रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 इसके अलावा राज्यसभा की प्रवर समिति की रिपोर्ट पर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 09 दिसंबर,2015 को रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) विधेयक को मंजूरी दी। यह ऐतिहासिक कानून मार्च, 2016 में अधिनियमित किया गया। इस अधिनियम से बड़ी संख्या में खरीदारों के हितों की रक्षा के साथ ही लेनदेन में पारदर्शिता और समय पर परियोजनाओं के निष्पादन के माध्येम से इस क्षेत्र की विश्वसनीयता बढ़ेगी, जो रियल एस्टेट क्षेत्र में अधिक निवेश के लिये आवश्यक है। रियल एस्टेट दूसरा सबसे अधिक रोजगार देने वाला क्षेत्र है। व्यापक रूप से इस सराहे गये इस अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों में शामिल हैं- 500 वर्ग मीटर के आकार के या उससे अधिक अथवा 8 अपार्टमेंट की परियोजनाओं का पंजीकरण अनिवार्य, डेवलपर्स को एक अलग बैंक खाते में परियोजना लागत का 70% जमा पड़ेगा, अपीलीय न्यायाधिकरण के आदेश के उल्लंघन के मामले में डेवलपर्स के लिए 3 साल तक और रियल एस्टे्ट एजेंटों तथा खरीदारों के लिए एक वर्ष तक के कारावास की सजा,संरचनात्मक सुरक्षा के लिए डेवलपर्स के दायित्वों को बढ़ाकर 5 वर्ष करना, देरी होने पर डेवलपर्स और खरीदारों को एक समान ब्याज दर से भुगतान करना जरूरी, भूमि शीर्षक बीमा को बढ़ावा देने, एकल खिड़की मंजूरी, भूमि रिकार्ड के डिजिटलीकरण के प्रावधान। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद प्रधानमंत्री द्वारा 25 जून, 2015 को इस राष्ट्रीय शहरी आवास मिशन का शुभारम्भर किया गया था। इस मिशन के तहत 2022 तक शहरी गरीबों के आवास की कमी को पूरा करने लिये अनुमानित दो करोड़ घरों के निर्माण का प्रस्ताव है, जो सरकार के समावेशी शहरी विकास पर ध्यान केंद्रित करने का महत्वपूर्ण घटक है। 95% लाभार्थी आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के होंगे। केन्द्र सरकार इस योजना के विभिन्न घटकों के तहत एक लाख रुपये से लेकर दो लाख 20 हजार रुपये प्रति आवासीय इकाई की सहायता प्रदान करेगी, जिन्हेंर सभी वैधानिक शहरों और कस्बों में बनाया जाएगा। मिशन के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु आवश्यक 6 सुधारों को लागू करने के लिए लगभग सभी राज्यों ने एचयूपीए मंत्रालय के उपक्रम के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं, जो मिशन के दिशा निर्देशों के तहत आवश्यक है। अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय मंजूरी एवं निगरानी समिति (सीएसएमसी) ने नवंबर 2015 से 18 राज्यों में 6,83,724 मकानों के निर्माण के लिए कुल 43,922 करोड़ रुपये के निवेश की मंजूरी दी है, जिसमें 10,050 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता शामिल है। विवरण निम्नलिखित हैं- क्रं सं. राज्य/केंद्रशासित प्रदेश राशि देने के लिये मंजूर किये गये आवास दी गई केंद्रीय सहायता (करोड़ रुपये) 1. आंध्र प्रदेश 1,93,147 2,897.00 2. बिहार 30,216 453.00 3. छत्तीसगढ़ 12,670 190.00 4. गुजरात 66,983 853.00 5. हिमाचल प्रदेश 1,077 16.00 6. जम्मू और कश्मीर 224 3.36 7. झारखंड 20,239 304.00 8. कर्नाटक 16,522 248.00 9. मध्य प्रदेश 43,393 644.00 10. महाराष्ट्र 71,701 1,064.00 11. मिजोरम 10,286 154.00 12. ओडिशा 11,548 143.00 13. पंजाब 1,280 12.80 14. राजस्थान 12,307 185.00 15. तमिलनाडु 34,013 510.00 16. तेलंगाना 80,481 1,207.00 17. उत्तराखंड 2,757 42.00 18. पश्चिम बंगाल 74,880 1,123.00 इसके अलावा, पीएमएवाई(शहरी) के एक घटक-ऋण से जुड़ी अनुदान योजना के तहत 2015-16 के दौरान केंद्रीय नोडल एजेंसियों को ब्याज अनुदान के रूप में 200 करोड़ रुपए के जारी किये गये हैं। 2014 तक और बाद में किफायती आवास 2004-14 के दौरान लागू की गई जेएनएनयूआरएम और राजीव आवास योजना के तहत 21,072 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता से कुल 13,90,349 घरों के निर्माण की मंजूरी दी गई थी। जबकि इसकी तुलना में 10,114 करोड़ रुपये की वास्तविक केंद्रीय सहायता से केवल 8,03,820 घर बनाये गये। अनुमानित 2 करोड़ किफायती आवासीय इकाइयों की कमी को पूरा करने के लिए पीएमएवाई(शहरी) के तहत मंत्रालय ने पहले ही 6,83,724 मकानों के निर्माण के लिए धन की मंजूरी दे दी है, जो 2004 से 2014 के दौरान 10 साल में मंजूर किये गये घरों से 50 प्रतिशत से अधिक है। अन्य नीतिगत पहलें हितधारकों और विशेषज्ञों के साथ विस्तृत विचार विमर्श के बाद राज्य आवासीय नीति, मॉडल किरायेदारी अधिनियम और राष्ट्रीय किराया आवासीय नीति के लिए खाका तैयार होने के अंतिम चरण में हैं। दीनदयाल अंत्योदय योजना (डीएवाई-एनयूएलएम) राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (एनयूएलएम) सितंबर 2013 में शुरू किया गया था। इस 791 शहरों की शहरी समर्थक योजना का विस्तार कर इसे देश के सभी 4041 वैधानिक शहरों में लागू करने और क्रियान्वयन में राज्यों को लचीलापन प्रदान करने के लिये 19 फरवरी,2016 को दीनदयाल अंत्योदय योजना-एनयूएलएम का नाम दिया गया । इस योजना के विस्तार से 25 प्रतिशत अतिरिक्त शहरी आबादी को लाभ मिलेगा। डीएवाई-एनयूएलएम का उद्देश्य शहरी गरीबों को स्व-सहायता समूहों के रूप में नियोजित करना, स्व-रोजगार के लिये शहरी गरीबों को कौशल प्रशिक्षण देना और रियायती दर पर ऋण उपलब्ध करा कर स्वा-रोजगार उद्यम स्थापित करने में मदद उपलब्धा करा कर शहरी गरीबों के लिए आजीविका के अवसर बढ़ाना है। इसके अलावा, इस मिशन के तहत शहरी बेघरों के लिये आश्रय स्थरल और सड़क विक्रेताओं के लिए बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई जाती हैं। पिछले दो वर्ष के दौरान 4,30,876 शहरी गरीबों को कौशल प्रशिक्षण दिया गया, जिनमें से 91,873 लोगों को व्यक्तिगत और समूह सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना के लिए सहायता प्रदान की गई; 1,04,738 स्व-सहायता समूहों (एसएचजी) का गठन किया गया; 96,436 स्वयं सहायता समूहों को रियायती ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध कराया गया; बेघरों के लिए 770 आश्रयों के लिये स्वीकृति दी गई और 270 आश्रय स्थंलों में संचालन शुरू किया गया। शहर आजीविका केन्द्रों की स्थापना के लिए 134 प्रस्ताव मंजूर किये गये। ये केंद्र अनौपचारिक क्षेत्र की सेवाएं प्राप्तो करने वालों के लिए 'वन स्टॉप शॉप' के रूप में कार्य करेगा। इसके साथ ही इन केंद्रों पर शहरी गरीबों की सेवाओं और उनके उत्पादों को बढ़ावा दिया जायेगा। 277 शहरों में सड़क विक्रेताओं के सर्वेक्षण का काम पूरा हो चुका है और 22 राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों के 6.30 लाख सड़क विक्रेताओं की पहचान कर ली गई है। 1.59 लाख से अधिक सड़क विक्रेताओं को पहचान पत्र दे दिये गये हैं। आवासीय क्षेत्र के लिए बजट में इजाफा 2016-17 का बजट संसाधन जुटाने के लिए अति वांछित पारिस्थितिकी तंत्र की सुविधा और आवास तथा निर्माण क्षेत्र के लिए बुनियादी ढांचे की स्थिति का लाभ उठाने के लिये बनाया गया है। इस संबंध में प्रस्तावित पहलें हैं- इस वर्ष के आखिर में बुनियादी ढांचे से संबंधित निर्माण परियोजनाओं, पीपीपी और सार्वजनिक उपयोगिता के ठेकों में विवादों के समाधान के लिए संस्थागत कारगर व्यवस्था बनाने के वास्तेक जन उपयोगी (विवाद समाधान) विधेयक पेश किया जायेगा। पीपीपी रियायत समझौतों में दोबारा विचार विमर्श के लिए दिशानिर्देश जारी किए जायेंगे, जिनमें इस तरह के ठेकों की लम्बी अवधि और पारदर्शिता से समझौता किए बिना संभावित अनिश्चितताओं को ध्या न में रखा जायेगा। बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए नयी ऋण रेटिंग प्रणाली, जिसमें अक्सर कर्ज के गलत मूल्य स्थिर करने के जोखिम की मानक धारणा पर भरोसा करने की बजाय निर्मित संरचनाओं पर ऋण वृद्धि पर जोर दिया गया है। पीपीपी को व्यावहारिक बनाने के लिए ये पहल काफी उपयोगी होगी। बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए अधिक ऋण उपलब्धे कराने के जीवन बीमा निगम (एलआईसी) एक समर्पित कोष की स्थापना करेगी। किफायती आवासीय परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए पीपीपी परियोजनाओं सहित 60 वर्ग मीटर तक के आवासों के लिये सेवा कर छूट की घोषणा की गई है । जून 2016 से मार्च 2019 के दौरान अनुमोदित और अनुमोदन से 3 वर्ष की अवधि में पूरी कर ली गयी किफायती आवासीय परियोजनाओं के लिए मुनाफे से शत प्रतिशत कटौती की अनुमति दी गई है। चार प्रमुख शहरों में 30 वर्ग मीटर तक और अन्य शहरों में 60 वर्ग मीटर तक के मकानों के लिये यह लाभ मिलेगा। इससे परियोजनाओं को जल्दी तैयार करने और पूरा करने की प्रेरणा मिलेगी। प्रवासियों की आवश्यरकताओं को पूरा करने वाले और अपना मकान बनाने में असमर्थ लोगों के लिये किराये के मकान को बढ़ावा देने के लिए कटौती की सीमा 36,000 रुपये (वर्तमान 24,000 रुपये से 60,000 रुपये तक) से बढ़ा दी गई है। अगर ऋण राशि 35 लाख से कम है और 2016-17 में ऋण स्वीकृत है तथा घर की लागत 50 लाख रुपये से कम है, तो पहली बार घर खरीदने वालों के लिए 50,000 रुपये की अतिरिक्त कटौती की अनुमति दी गई है। लाभांश वितरण कर को वापस लेकर रियल एस्टेट निवेश न्या स (आरइआइटीएस) और बुनियादी ढ़ांचा निवेश न्याभस (इनवीआइटीएस) को प्रोत्साहित किया गया है। तैयार मिश्रित बजरीर के लिए उत्पाद शुल्क में छूट को बढ़ाया गया है। आधुनिकीकरण और भूमि रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण, कारोबार करने में सुगमता तथा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिये अधिक उदारीकरण जैसी अन्य घोषणाओं से किफायती आवास सहित आवास क्षेत्र में ज्यादा वांछित निवेश व्यैवस्थित करने में मदद मिलेगी। इन उपायों के अलावा, सरकार ने किफायती आवास सहित आवास क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए इससे पहले भी कुछ और समर्थन उपायों की घोषणा की है। इनमें क्षेत्र को उदार बनाना, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिये पूंजी की आवश्यकता के मानदंड और किफायती आवास के लिए इस तरह के मानदंडों से छूट, किफायती आवास के लिए बाह्य वाणिज्यिक उधार का लाभ उठाना आदि शामिल हैं। शहरी क्षेत्रों में आवास और निर्माण परियोजनाओं की मंजूरी को व्यवस्थित करना शहरी क्षेत्रों में निर्माण परियोजनाओं के संबंध में कारोबार करने में आसानी बढ़ाने के लक्ष्य से एचयूपीए मंत्रालय ने संबंधित मंत्रालयों के साथ कई बार विचार-विमर्श किया, ताकि आवास परियोजनाओं के लिए समयबद्ध और परेशानी मुक्त मंजूरी सुनिश्चित की जा सके। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन, नागरिक उड्डयन, संस्कृति, रक्षा, और उपभोक्ता मामले जैसे संबंधित मंत्रालय प्रौद्योगिकी अपनाने और शहरी स्थानीय निकायों को मंजूरी प्रदान करने के लिए दी गई निर्दिष्ट शक्तियों के माध्यम से प्रक्रियाओं में आवश्यक सरलीकरण पर सहमत हैं। इन विचार-विमर्श के अलावा शहरी विकास मंत्रालय ने 30 दिनों में निर्माण परियोजनाओं के लिए मंजूरी के वास्तेम मॉडल भवन निर्माण कानूनों और 1, 50,000 वर्ग मीटर तक के भूखंडों पर निर्माण के लिए पर्यावरण मंजूरी, हवाई अड्डों के आसपास के क्षेत्र में ऊंचाई की मंजूरी, राष्ट्रीय स्मारकों के पास निर्माण के लिए अनापत्ति जैसी अन्यक एजेंसियों की ओर से मंजूरी प्रदान करने के लिए शहरी स्थानीय निकायों को सशक्त बनाने घोषणा की है। स्रोत: पत्र सूचना कार्यालय