<div id="MiddleColumn_internal"> <h3 style="text-align: justify;">परिचय</h3> <p style="text-align: justify;">वर्तमान में स्वयं सेवी संस्थाएं विभिन्न स्तर पर विकास के हर क्षेत्र में काम कर रही है और अपनी एक स्पष्ट पहचान बना ली है। जो स्वयं सेवी संस्थाएं अपने को थोड़ा बड़ा समझते हैं, अपने कार्यक्रम में नेटवर्किंग को एक अहम मुद्दा माना है। अतः सहयोगी संस्थाओं के बीच आपसी सम्बन्ध सम्पर्क स्थापित करने के लिए यह जानना जरुरी है कि’:</p> <ul> <li style="text-align: justify;">नेटवर्किंग क्या है?</li> <li style="text-align: justify;">नेटवर्क से फायदा क्या है?तथा</li> <li style="text-align: justify;">नेटवर्क का संचालन कैसे करें?</li> </ul> <p style="text-align: justify;">यदि हम उपरोक्त चार सवाल का जवाब दे सकते हैं तो हमारा नेटवर्किंग प्रभावी हो सकता है। मुख्य रूप से यहां इन्हीं चार मुद्दों पर विचार किया गया है</p> <h3 style="text-align: justify;">नेटवर्क क्या है?</h3> <p style="text-align: justify;">साधारण बोल-चाल की भाषा में नेटवर्क का अर्थ सहयोगी संस्थाओं से सबंध/सम्पर्क बनाने से है। पर विशेष रूप से नेटवर्क का अर्थ है निम्नलिखित कार्य करने के लिए सम्पर्क के साथ-साथ उसका:</p> <ul> <li style="text-align: justify;">दूसरों को प्रभावित करने के लिए उपयोग करना।</li> <li style="text-align: justify;">अपना ज्ञान बढ़ाने और विकसित करने के लिए</li> <li style="text-align: justify;">दूसरों के लिए सम्पर्क एवं सहारे की व्यवस्था करना</li> <li style="text-align: justify;">भागीदारी बनाना और एक दूसरे को सूचना/जानकारी देना</li> <li style="text-align: justify;">सहयोगी संस्थाओं का हल खोजना, साथ ही साथ कठिनाइयों को दूर करण।</li> </ul> <p style="text-align: justify;">अतः हम कह सकते हैं कि नेटवर्क का अर्थ है विचारों, सूचनाओं, जानकारियों और अनुभव का आदान-प्रदान करना। नेटवर्किंग व्यवस्था में संस्था दूसरे संस्था को कुछ देता है साथ ही साथ कुछ लेता है अतः इसमें लेना एवं देना दोनों होता है। अतः इसमें सम्पर्क क्षेत्र में दूसरों को जानकारी देकर, सम्पर्क व्यक्तियों से परिचय कराकर मदद देंगे और इस प्रकार उससे भी आप को मदद मिलेगी।</p> <h3 style="text-align: justify;">नेटवर्क से फायदा<strong> </strong></h3> <p style="text-align: justify;">नेटवर्क सबके लिए महत्वपूर्ण है संस्था को कई तरह से लाभ पहुंचा सकता है जैसे –</p> <ul> <li style="text-align: justify;">दूसरे संस्था क्या कर रहे हैं, इसकी जानकारी मिलती है।</li> <li style="text-align: justify;">दूसरों को सहायता देने के लिए सम्पर्कों का उपयोग कर सकते हैं।</li> <li style="text-align: justify;">दूसरे संस्था से मिलकर नई परियोजनाओं मिल सकती है।</li> <li style="text-align: justify;">सरकारी तंत्र पर दल बनाकर दबाव डाला जा सकता है और सरकारी कार्यक्रम को लाभुकों तक पहुंचा सकते हैं।</li> </ul> <h3 style="text-align: justify;">प्रभावी नेटवर्क का संचालन <strong> </strong></h3> <p style="text-align: justify;">जब भी कोई संस्था नेटवर्क करने का बीड़ा उठाता है जो उसे नियमति रूप से निम्नलिखित कार्यों का निष्पादन करते रहना होगा-</p> <ol> <li style="text-align: justify;">सम्पर्क बनाए रखना- संस्था के पास जो साधन उपलब्ध है उसके माध्यम से सहयोगी संस्थाओं को सम्पर्क बनाएं रखना होगा। जैसे; टेलीफोन से, पत्रों द्वारा, ई-मेल, फैक्स, अनौपचारिक बैठकी इत्यादि।</li> <li style="text-align: justify;">अनुभव बाँटने के लिए तैयार रहें- जैसा कि पहले कहा जा चूका है कि नेटवर्क दोहरी प्रक्रिया है: लेना-देना। अतः अपने अनुभव बाँटने के लिए तैयार रहें तथा दूसरे सहयोगी संस्था से भी सूचना/ अनुभव को लेने के लिए तैयार रहना होगा।</li> <li style="text-align: justify;">नये सम्पर्क बनाना- जिस संस्था की शोच आपके संस्था को सोच से मिलती है वैसे संस्थाओं से विचार-विमर्श कर उसे नेटवर्किंग में जोड़ सकते हैं। जब भी आप नये व्यक्ति, नयी समूह या संस्था से मिलें तो अपना परिचय जरुर दें। अगर भिजिटिंग कार्ड हो हो उस व्यक्ति को अवश्य दें साथ ही साथ नये व्यक्ति से भी कुछ सवाल पूछें। जब भी सेमिनार, प्रशिक्षण में जाते हैं यह अपने संस्था में लोगों को बुलाते हैं तब भी नए सम्पर्क बना सकते हैं।</li> <li style="text-align: justify;">सूचना के लिए मांग करना- संस्था को सही गति देने के लिए नियमित रूप से सूचनाओं का प्रवाह होना जरुरी है।</li> <li style="text-align: justify;">जब भी कोई नये आदमी से मिलते हैं तो वह यह चाहता है कि दूसरे व्यक्ति उनकी सलाह या राय ले और यदि कोई व्यक्ति समय देने और अपनी जानकारी तथा अनुभव बताने के लिए तैयार है तो आप गंभीरता से उनकी बात सुनें और अपनी ओर से आभार व्यक्त करें साथ ही बदले में अपनी ओर से कुछ देने को तैयार रहें। यदि अपने ओर से कुछ नहीं देंगे तो संभव है सम्पर्क कम होते जायेंगे।</li> <li style="text-align: justify;">नेटवर्क सक्रिय रखना- नेटवर्क तभी मजबूत होगा जब अपने नेटवर्क को सक्रिय रखेंगे। अतः यह जरुरी है कि समय-समय पर सम्पर्क व्यक्ति से टेलीफोन करता है अथवा पत्र लिखता है तो आप भी अपने ओर यथाशीघ्र टेलीफोन करें अथवा पत्र लिखें।</li> </ol> <p style="text-align: justify;">एक स्वयं सेवी संस्था को अपने कार्यक्रम को प्रभावशाली ढंग से गतिमान करने के लिए विभिन्न संस्थाओं से सम्बन्ध स्थापित करना आवश्यक है जिसका एक उदाहरण नीचे दिया जा रहा है।</p> <p style="text-align: justify;"><strong>स्रोत:- हलचल,</strong> <strong>जेवियर समाज सेवा संस्थान, राँची।</strong></p> </div>