भूमिका हथकरघा बुनकर व्यापक कल्याण योजना के दिशा-निर्देश हथकरघा बुनकर सामाजिक सुरक्षा संबंधी लाभ प्राप्त कर सकें इसके लिए भारत सरकार, स्वास्थ्य बीमा योजना (एचआईएस) और महात्मा गांधी बुनकर बीमा योजना (एमजीबीबीवाई) नामक दो घटकों के साथ हथकरघा बुनकर व्यापक कल्याण योजना कार्यान्वित कर रही है। स्वास्थ्य बीमा योजना का उद्देश्य 12वीं योजना में बुनकर समुदाय की पहुंच स्वास्थ्य सुविधाओं तक कराना है। यह योजना राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (आरएसबीवाई) की तर्ज पर कार्यान्वित की जाएगी। इस योजना में विनिर्दिष्ट रोगों के लिए न केवल बुनकर बल्कि पति/पत्नी और दो बच्चे भी शामिल हैं। इसमें बहिरंग रोगी (ओपी) उपचार सुविधा भी शामिल है। दूसरी ओर महात्मा गांधी बुनकर बीमा योजना का उद्देश्य स्वाभाविक और दुर्घटना के कारण हुई मृत्यु और पूर्ण या आंशिक अपंगता के मामले में हथकरघा बुनकरों को बीमा कवच प्रदान करना है। स्वास्थ्य बीमा योजना को 12वीं योजना में बहिरंग रोगी उपचार की अतिरिक्त सुविधा के साथ राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के आधार पर कार्यान्वित किए जाने का प्रस्ताव किया गया है जिसे श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा हथकरघा बुनकरों के लिए इस योजना में जोड़ा जा रहा है। तथापि, महात्मा गांधी बुनकर बीमा योजना का कार्यान्वयन विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय द्वारा सीधे ही किया जाता रहेगा क्योंकि इन घटकों को अभी तक राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना में शामिल नहीं किया गया है। इस समय स्वास्थ्य बीमा योजना में 4 सदस्यों के परिवार के लिए 15,000/-रुपये वार्षिक (जिसमें से 7,500/-रुपये ओपीडी के लिए हैं) का प्रावधान है जिसे बढ़ाकर 5 सदस्यों के परिवार के लिए प्रति परिवार 37,500/-रुपये (ओपी और आईपी उपचार के लिए क्रमश- 7,500/-रुपये और 30,000/-रुपये ) किया गया है। इस योजना का कार्यान्वयन आन्ध्र प्रदेश और तमिलनाडु को छोड़कर, क्योंकि श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा इन राज्यों में इस समय राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का कार्यान्वयन नहीं किया जा रहा है, वस्त्र मंत्रालय के लिए श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा ओपी उपचार सुविधा को शामिल करके किया जाएगा। इसलिए आन्ध्र प्रदेश और तमिलनाडु के लिए योजना का कार्यान्वयन राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना की तर्ज पर विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय द्वारा किया जाएगा। संशोधित स्वास्थ्य बीमा योजना को 2 वर्ष की अवधि अर्थात् 2014-15 के बाद श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना में मिलाए जाने का प्रस्ताव किया गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (आरएसबीवाई) आधारित हथकरघा बुनकरों के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (आरएसबीवाई) के आधार पर कार्यान्वित की जाने वाली स्वास्थ्य बीमा योजना प्रचालनात्मक दिशा-निर्देश प्रस्तावना देश में असंगठित क्षेत्र के कामगार कुल श्रमिक बल का लगभग 94% है। असंगठित क्षेत्र में कामगारों के लिए एक मुख्य असुरक्षा ऐसे कामगारों और उनके परिवार के सदस्यों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध न होना है। स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध न होने संबंधी असुरक्षा से चिकित्सा सुविधा और अस्पताल से संबंधित भारी व्यय और उपचार के लिए अपर्याप्त और अपूर्ण व्यवस्था का सहारा लेने से न केवल इन कामगारों पर न केवल सामाजिक और मनोवैज्ञानिक दवाब पड़ता है बल्कि आर्थिक स्थिति पर भी काफी असर पड़ता है जिससे आय की हानि और स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आती है। इस प्रकार हथकरघा बुनकरों और उनके परिवारों को जो गरीबी की रेखा से ऊपर (एपीएल) और गरीबी की रेखा से नीचे (बीपीएल) रह रहे हैं दोनों को ही स्वास्थ्य बीमा कवच प्रदान करने के उद्देश्य से वस्त्र मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना की तर्ज पर हथकरघा बुनकरों के लिए केन्द्र सरकार द्वारा घोषित स्वास्थ्य बीमा योजना को कार्यान्वित करने का निर्णय लिया है। परिवार की पात्रता के मानदंड इस योजना के तहत एपीएल और बीपीएल दोनों ही बुनकरों और उनके परिवारों (5 सदस्यों तक) को शामिल किया जाएगा। इस प्रकार जिस परिवार में परिवार प्रमुख, पति या पत्नी और तीन सदस्य तक आश्रित हों उस परिवार को शामिल किया जाएगा। आश्रितों में बच्चे और/या परिवार के प्रमुख के माता-पिता शामिल होंगे जिन्हें डाटा-बेस के रुप में परिवार के हिस्से के रुप में दर्शाया गया हो। यदि डाटा- बेस में माता-पिता को अलग परिवार के रुप में दर्शाया गया हो तो वे पृथक कार्ड के पात्र होंगे। लाभार्थियों का नामांकन लाभार्थियों का नामांकन राज्य सरकार द्वारा चुनी हुई और सरकार द्वारा अनुमोदित बीमा कंपनी द्वारा किया जाएगा। बीमाकर्ता, राज्य सरकार/नोडल एजेंसी द्वारा प्रदान किए गए साफ्ट डाटा के आधार पर एपीएल और बीपीएल दोनों लाभार्थियों का नामांकन करेगा और स्मार्ट कार्ड वेंडर के माध्यम से केन्द्र सरकार के विनिर्देशनों के अनुसार स्मार्ट कार्ड जारी करेगा और नामांकन की अवधि के दौरान ही नामांकन स्टेशन/ग्राम स्तर पर लाभार्थियों को इसे सौंपेगा। इसके अलावा नामांकन की प्रक्रिया, बाकी लाभार्थियों को स्मार्ट कार्ड प्रदान करने के लिए नामांकन अवधि समाप्त होने के बाद सरकार/नोडल एजेंसी द्वारा सम्मत नामित केन्द्रों पर जारी रहेगी। बीमाकर्ता, राज्य सरकार/नोडल एजेंसी के साथ परामर्श करके उस ढंग से ग्राम स्तर पर नामांकन चक्र तैयार करेगा ताकि बीमाकर्ता, सरकार/नोडल एजेंसी और स्मार्ट कार्ड वेंडर के प्रतिनिधि समय पर कार्य पूरा कर सकें। नामांकन की प्रक्रिया निम्नानुसार होगी - चुने हुए जिलों में एपीएल और बीपीएल दोनों प्रकार के बुनकर परिवारों से संबंधित आंकड़ों को संबंधित राज्य सरकार/नोडल एजेंसी द्वारा निर्धारित साफ्टवेयर में डाला जाएगा । इस आंकड़े की साफ्ट और हार्ड कापी राज्य सरकार/नोडल एजेंसी द्वारा उस बीमाकर्ता को प्रदान की जाएगी जिसका चयन राज्य सरकार/नोडल एजेंसी द्वारा किया गया हो । बीमाकर्ता, निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार स्मार्ट कार्ड तैयार करने की व्यवस्था करेगा । जिलें में प्रत्येक नामांकन स्टेशन/गांव के लिए बीमाकर्ता के साथ परामर्श करके सरकार/नोडल एजेंसी द्वारा कार्यक्रम की अनुसूची तैयार की जाएगी । संबंधित गांवों में राज्य सरकार/नोडल एजेंसी द्वारा राज्य सरकार और बीमा प्रदाता के प्रतिनिधियों के दौरे का पहले ही प्रचार किया जाएगा । सभी बुनकरों की सूची बीमाकर्ता द्वारा नामांकन स्टेशन/गांव में स्पष्ट रुप से दर्शाई जानी चाहिए । परिवार के प्रमुख का फोटोग्राफ और परिवार के प्रमुख और परिवार के अन्य पात्र सदस्यों के अंगूठे का निशान लेने के प्रयोजन से पूर्व निर्धारित तारीखों पर चुने हुए जिलों में प्रत्येक नामांकन स्टेशन/गांव में संयुक्त रुप से इनके प्रतिनिधि दौरा करेंगे, नामांकन और स्मार्ट कार्ड जारी करेंगे । नामांकन के प्रयोजन के लिए और उसके बाद अस्पतालों में अंतरण तथा उससे आंकड़े भेजने के प्रयोजन से बीमा कंपनी द्वारा प्रयोग किए जाने वाले साफ्टवेयर केन्द्र सरकार द्वारा अनुमोदित होने चाहिए। नामांकन के समय राज्य सरकार/एसएनए के पदाधिकारी बीमा प्रतिनिधि की उपस्थिति में प्रत्येक लाभार्थी की पहचान करेंगे । कार्ड सौंपते समय बीमाकर्ता लाभार्थी से पंजीकरण फीस के रुप मे 30/-रुपये प्राप्त करेगा। लाभार्थी को उस तारीख के बारे में भी सूचित किया जाएगा जब वह कार्ड काम करना शुरु कर देगा (माह) । यह राशि नोडल एजेंसी द्वारा बीमाकर्ता को भुगतान की जाने वाली प्रीमियम की राशि के आधार पर समायोजित की जाएगी । बीमाकर्ता के प्रतिनिधि लाभार्थी को स्मार्ट कार्ड के साथ ऐसा पैंफलेट भी प्रदान करेंगे जिसमें नेटवर्क में शामिल किए गए अस्पतालों की सूची, उपलब्ध लाभ और जिन व्यक्तियों के साथ संपर्क किया जाना है उनके नाम और ब्यौरे भी दिए गए हों। स्मार्ट कार्डो को कोई हानि न पहुंचे इसके लिए इन्हें प्लास्टिक जैकेट में प्रदान किया जाना चाहिए। कार्यान्वयन अनुसूची स्वास्थ्य बीमा योजना को वर्ष 2014-15 के बाद श्रम और रोजगार मंत्रालय की राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना में मिला दिया जाएगा और वर्ष 2014-15 के बाद समूचे देश में अगले दो वर्षों के लिए राज्य सरकार द्वारा इसका कार्यान्वयन किया जाएगा। वर्ष 2012-13 तक समूचे देश को इसमें शामिल किए जाने का प्रस्ताव है। जिन जिलों में यह योजना शुरु की गई है उनमें स्वास्थ्य बीमा योजना के स्थान पर यह योजना लागू होगी। योजना के लिए वित्त पोषण योजना का वित्त पोषण निम्नानुसार होगा - भारत सरकार का अंशदान- 750 रुपये के अनुमानित वार्षिक प्रीमियम का 75% जो अधिकतम 565 रुपए वार्षिक प्रति परिवार होगा। इसके अलावा 60 रुपये प्रति कार्ड की दर से केन्द्र सरकार द्वारा स्मार्ट कार्ड की लागत भी वहन की जाएगी । संबंधित राज्य सरकारों का अंशदान – वार्षिक प्रीमियम का 25% और उन मामलों में जहां कुल प्रीमियम 750 रुपये से अधिक हो वहां अतिरिक्त प्रीमियम । लाभार्थी पंजीकरण/नवीकरण फीस के रुप में 30 रुपये वार्षिक का भुगतान करेगा । प्रत्येक राज्य में योजना का संचालन करने से संबंधित कोई प्रशासनिक और अन्य संबंधित लागत जिसे प्रीमियम लागत में शामिल न किया गया हो उसे संबंधित राज्य सरकारों द्वारा वहन किया जाएगा । स्वास्थ्य सेवा लाभ पैकेज लाभार्थी ऐसी अंतरंग रोगी स्वास्थ्य सुविधा सेवाओं की वित्तीय लागत का पात्र होगा जिसे बीमाकर्ता (ओं) के साथ संबंधित राज्य सरकारों द्वारा समझौता किया गया हो तथा साथ ही अस्पताल की अपेक्षित दैनिक सुविधाओं की प्रक्रिया पर भी सहमति हुई हो। तथापि स्वास्थ्य बीमा योजना की न्यूनतम विशेषताएं नीचे दी गईं हैं आईपी उपचार के लिए परिवार के आधार पर प्रति एपीएल और बीपीएल बुनकर परिवार के लिए प्रति वर्ष 30,000/-रुपये की राशि का बीमा और ओपी उपचार के लिए 7,500/-रुपये इसके अलावा होगा। शामिल की जाने वाले पूर्व निर्धारित शर्ते जो न्यूनतम अपवर्जन के अध्यधीन है । अपवर्जनों की निर्देशात्मक सूची परिशिष्ट –।(नीचे दी गयी विभाग के वेबसाइट में जाएँ और विस्तृत जानकारी देखें) में दी गई है। शल्य चिकित्सा के लिए अस्पताल की व्यवस्था और सेवाओं से संबंधित स्वास्थ्य सेवाएं दैनिक आधार पर प्रदान की जा सकती हैं। दैनिक उपचार की निर्देशात्मक सूची परिशिष्ट।। (नीचे दी गयी विभाग के वेबसाइट में जाएँ और विस्तृत जानकारी देखें) में दी गई है। बीमाकर्ता पैकेज में सभी स्वास्थ्य सेवाओं का नकदीरहित कवरेज। इस योजना में दावों की प्रतिपूर्ति नहीं की जाएगी। लाभार्थी की पहचान/सत्यापन की स्मार्ट कार्ड आधारित प्रणाली का प्रावधान और ग्राहक अंतरणों की सेवा संसाधन व्यवस्था। अस्पताल में भर्ती होने से एक दिन पहले और पांच दिन बाद के उपयुक्त उपचार पूर्व और उपचार के बाद के व्यय का प्रावधान जो अस्पताल में चिकित्सा की कुल लागत के अधिकतम हिस्से के अध्यधीन हो। परिवहन भत्ते का प्रावधान (प्रत्येक दौरे के लिए 100/-रुपये की सीमा के साथ वास्तविक व्यय) लेकिन यह 1000/-रुपये की वार्षिक सीमा के अध्यधीन होगा। उपर्युक्त न्यूनतम के अलावा राज्यों को अपने प्रस्तावों में योजना में शामिल किए जाने वाले स्वास्थ्य सेवाओं के प्रस्तावित पैकेज का ब्यौरा देना चाहिए तथा साथ ही प्रस्तावित अपवर्जन भी दर्शाए जाने चाहिए। प्रीमियम का भुगतान पंजीकरण फीस और प्रीमियम की किस्त का भुगतान निम्नानुसार किया जाएगा- लाभार्थी द्वारा 30 रुपये की पंजीकरण फीस का भुगतान बीमा कंपनी को किया जाएगा। पहली किस्त बीमा कंपनी को राज्य नोडल एजेंसी से (X-60) का 25% - 30 के हिसाब से की जाएगी । (जिसमें X प्रति लाभार्थी प्रीमियम की राशि है )। दूसरी किस्त का भुगतान निम्नलिखित अनुसार राज्य नोडल एजेंसी के माध्यम से केन्द्र सरकार द्वारा किया जाएगा - (X-60) का 75% + 60 (अधिकतम 750 रुपये +60 रुपये के अध्यधीन है) {केन्द्र सरकार के अंशदान से अधिक की कोई भी राशि राज्य सरकार द्वारा वहन की जाएगी } पात्र स्वास्थ्य सेवा प्रदाता बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण से लाइसेंस प्राप्त जन (ईएसआई सहित) और निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाता, दोनों ही जो अस्पताल संबंधी सेवाएं और/या दैनिक सेवाएं प्रदान करते हैं वे बीमा योजना के तहत शामिल किए जाने के पात्र होंगे जो ऐसी आवश्यकता के अध्यधीन होगा जिसे राज्य सरकार और बीमाकर्ताओं के बीच यथासम्मत पैनल में रखने के लिए समझौता किया गया हो। बीमा प्रदाता का चयन करने के लिए निविदा की आवश्यकता राज्य सरकार निविदा प्रक्रिया के अनुसार आवधिक आधार पर एक या अधिक स्वास्थ्य प्रदाताओं का चयन करेगी जिसमें प्रस्ताव के बीमा पैकेज की कीमत और तकनीकी गुण-दोषों को ध्यान में रखा जाएगा। यह निविदा पब्लिक और प्राइवेट क्षेत्र के सेवा प्रदाताओं के लिए खुली होनी चाहिए जो संगत आईआरडीए मानकों को पूरा करते हों। यदि सफल बोलीकर्ता के साथ संविदा की अवधि एक वर्ष से अधिक हो तो वार्षिक आधार पर संविदा बढ़ाने के लिए राज्य को कार्य निष्पादन सूचक या अन्य तंत्र प्रदान करने चाहिए। प्रस्ताव प्रस्तुत करना और अनुमोदन प्राप्त करना राज्य सरकारों के प्रस्तावों पर केन्द्र सरकार द्वारा स्थापित अनुमोदन और निगरानी समिति द्वारा विचार किया जाएगा। अपने प्रस्ताव में राज्यों द्वारा जिन तत्वों को शामिल किया जाना है वे निम्नानुसार हैं- बीमाकर्ता/भागीदारों के लिए निविदा और संविदा की प्रक्रिया व्यवस्थाओं का पर्यवेक्षण (उदाहरण के लिए जिला और ब्लॉक निगरानी निकाय)। पंचायती राज संस्थाओं सहित सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों को संगत राज्य , जिला और ब्लॉक स्तर पर पर्यवेक्षण निकायों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए । एपीएल और बीपीएल दोनों की स्थिति और निर्धारित मानकों के साथ इनका मिलान, बीमाकर्ता को इन्हे तत्काल प्रदान करने का प्रावधान और शामिल किए गए जिलों में एपीएल और बीपीएल जनसंख्या का अनुमान । राज्य सरकार, बीमाकर्ताओं और अन्यों को प्रशिक्षण देने की योजना ताकि योजना के कार्यान्वयन के लिए पर्याप्त क्षमता सुनिश्चित को सके । आईईसी/जागरुकता प्रदान करने का तंत्र (शुरु करने और चलाने) जिसमें अगम्य समूहों तक पहुंचने के लिए विशेष/अतिरिक्त चैनल शामिल हैं। इसमें मध्यवर्तियों/एनजीओ/एमएफआई/सहकारी समितियों की भूमिका । लाभार्थियों की पहचान सहित नामांकन और नवीकरण की प्रक्रिया । योजना में शामिल की जाने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए न्यूनतम आवश्यकताओं और प्रशासनिक क्षमता सहित स्वास्थ्य प्रदाताओं का पैनल बनाना/मान्यता देना । स्मार्ट कार्ड का प्रावधान और प्रचालन की प्रक्रिया । मरीजों/प्रदाताओं और इसके प्रयोग से संबंधित आंकड़े प्राप्त करने से एमआईएस और डाटाबेस प्रबंधन । बुनियादी आधार पर सर्वेक्षण करने सहित इसके प्रभाव और कार्य निष्पादन का मूल्यांकन । शिकायत निवारण तंत्र राज्य सरकार के प्रीमियम अंशदान और योजना के परिचालन में होने वाले अन्य प्रशासनिक व्ययों के लिए वित्त पोषण की योजना । प्रस्तावित जिला(जिलों) में वर्तमान स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के साथ प्रस्तावित योजना कैसे मेल खाएगी। केन्द्र सरकार की अनुमोदन और निगरानी समिति सभी राज्य सरकारों के प्रस्तावों का आकलन करेगी ताकि यह सुनिश्चित हो कि सभी उपर्युक्त मदों के लिए विश्वसनीय कार्यान्वयन व्यवस्था कर दी गई है। भारत सरकार की जिम्मेदारियां ऊपर बताई गई इसकी वित्त पोषण की प्रतिबद्धता के अलावा भारत सरकार स्वास्थ्य बीमा योजना को कार्यान्वित करने के उद्देश्य से निम्निलिखित कार्रवाई करेगी - योजना के लिए दिशा-निर्देश जारी करना और आवधिक संशोधन करना भारत सरकार के वित्त पोषण अंशदान के लिए राज्य सरकारों द्वारा प्रस्तुत किए गए स्वास्थ्य बीमा प्रस्तावों का आकलन करने के लिए अनुमोदन और निगरानी समिति स्थापित करना । राज्यों के साथ परामर्श करके ऐसे प्रोटोकोल और सामान्य मानकों का विकास करना जो राष्ट्रीय आधार पर योजना के प्रभावी कार्यकरण को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हों। इसमें बीपीएल परिवारों के लिए राष्ट्रीय विशिष्ट पहचान संख्या के लिए प्रोटोकोल, स्मार्ट कार्ड के न्यूनतम तकनीकी मानकों का विनिर्दिष्टीकरण, बीमा प्रीमियम के केन्द्रीय वित्तीय सहायता का समय पर अंतरण सुनिश्चित करना, योजना पर निगरानी रखने के एक भाग के रुप में राज्यों के लिए साझा सूचना प्रोटोकोल स्थापित करना और ऐसे अन्य डिजाइन और कार्यान्वयन संबंधी मुद्दों पर विचार करना शामिल है जिन्हें राष्ट्रीय प्रणाली के अनुरुप कार्यकरण के लिए आवश्यक समझा जाता हो । श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में एक ऐसे तकनीकी सहायता कक्ष की स्थापना जो योजना के डिजाइन, कार्यान्वयन और निगरानी/मूल्यांकन से संबंधित मामलों में केन्द्र और राज्य सरकारों को विशेषज्ञ सूचना प्रदान करेगा। वरिष्ठ सलाहकार इस कक्ष के प्रमुख होंगे तथा उनकी सहायता के लिए दो सलाहकार, डाटाबेस प्रबंधन टीम , सहायक कर्मचारी और ऐसे अन्य विशेषज्ञ कार्मिक होंगे जिसका निर्धारण योजना के कारगर कार्यान्वयन में सहायता करने के लिए आवश्यक हो। इस कक्ष के कार्य अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित होंगे - स्वास्थ्य बीमा योजनाएं केन्द्र सरकार को प्रस्तुत करने के लिए राज्यों को तकनीकी सहायता प्रदान करना । निगरानी और मूल्यांकन सहित अलग-अलग राज्यों में योजना के कार्यान्वयन के लिए तकनीकी मुद्दों पर राज्य सरकारों को निरंतर सहायता प्रदान करना (राज्य स्तर पर ऐसे ही कक्षों के साथ समन्वय करना )। योजना के तहत केन्द्र और राज्य सरकार के बजट संबंधी निहितार्थों का आकलन करने के लिए यथा आवश्यक वित्तीय अनुमान के लिए अनुमोदन और निगरानी समिति का प्रावधान करना। अनुमोदन और निगरानी समिति को तकनीकी सूचना देना जिससे वह इसकी निगरानी और कार्यो का प्रभावी ढंग से मूल्यांकन कर सके। योजनाओं के कार्यकरण का विस्तृत मूल्यांकन अध्ययन करना। राज्यों द्वारा जिलों का चयन योजना में शामिल किए जाने के लिए जिले(जिलों) का चयन करने के प्रस्ताव के लिए राज्य जिम्मेदार होंगे जो अनुबंध-। में (नीचे दी गयी विभाग के वेबसाइट में जाएँ और विस्तृत जानकारी देखें) यथा निर्धारित प्रत्येक राज्य के लिए जिलों की अधिकतम संख्या के अध्यधीन होगा। योजना में जिलों को शामिल किए जाने के प्रस्ताव में राज्यों को यह सुनिश्चित करना होगा कि जिलों में निम्नलिखित है- अस्पतालों/स्वास्थ्य सुविधाओं का पर्याप्त नेटवर्क है जो योजना से संबंधित सेवा प्रदान करने और अंतरणों के परिचालन के न्यूनतम मानकों को पूरा करते हों । संभावित मध्यवर्तियों की पर्याप्त उपस्थिति जो योजना के परिचालन के विभिन्न पहलुओं में लाभार्थियों को प्रभावी और मूल रुप से सहायता सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य बीमाकर्ताओं के साथ भागीदारी कर सके । योजना का सफल कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचा(उदाहणार्थ बिजली; सड़क) महात्मा गांधी बुनकर बीमा योजना XII वीं पंचवर्षीय योजना (2012-13 से 2016-17 तक) के दौरान महात्मा गांधी बुनकर बीमा योजना के कार्यान्वयन के दिशा-निर्देश प्रस्तावना भारत सरकार ने दिसम्बर, 2003 में बुनकर बीमा योजना शुरु की थी जो जनश्री बीमा योजना और एड-ऑन समूह बीमा योजना का संयुक्त रुप है। यह योजना भारतीय जीवन बीमा निगम के सहयोग से कार्यान्वित की जा रही थी। वर्ष 2005-06 से इस योजना को संशोधित किया गया और इसे महात्मा गांधी बुनकर योजना के संशोधित रुप में कार्यान्वित किया गया है ।XII वीं योजना के दौरान महात्मा गांधी बुनकर बीमा योजना को 11वीं योजना में दिए गए लाभों के साथ कार्यान्वित किया जाएगा। इसमें प्रतिवर्ष अधिकतम नवीकरण के मामलों सहित 2012-13 से 2016-17 की अवधि के दौरान 26.19 लाख बुनकर शामिल होंगे । उद्देश्य महात्मा गांधी बुनकर बीमा योजना का मूल उद्देश्य हथकरघा बुनकरों को स्वाभाविक मृत्यु के साथ-साथ दुर्घना में मृत्यु होने की स्थिति में तथा पूर्ण या आंशिक नि:शक्तत्ता के मामलों में बढ़ा हुआ बीमा कवर प्रदान करना है । पात्रता योजना के तहत सहायता प्राप्त करने के लिए बुनकर को निम्नलिखित शर्ते पूरी करनी होगी- बुनकर हथकरघा बुनाई से अपनी आय का कम से कम 50 प्रतिशत अर्जित करता हो । 18 से 59 वर्ष के आयु वर्ग के बीच के सभी बुनकर चाहे वे महिला हों या पुरुष इस योजना के तहत शामिल किए जाने के पात्र हैं। इसमें अल्पसंख्यक, महिला बुनकर और पूर्वोत्तर क्षेत्र के बुनकर भी सम्मिलित हैं। इस योजना में राज्य हथकरघा विकास निगमों/शीर्ष/प्राथमिक हथकरघा बुनकर सहकारी समितियों के बुनकर कवर किए जाएंगे। सहकारी समितियों से बाहर के बुनकर भी इस योजना के तहत शामिल किए जा सकते हैं परंतु उन्हें अपनी पात्रता शर्ते पूरी करने के संबंध में हथकरघा राज्य निदेशालय प्रभारी से प्रमाण पत्र प्राप्त करना होगा कि वे पात्रता की शर्तें पूरी करते हैं । हथकरघा राज्य प्रभारी निदेशक की यह जिम्मेदारी होगी कि वे उन बुनकरों की पात्रता का सत्यापन करें जिन्हें इस योजना में शामिल किए जाने का प्रस्ताव है । योजना को कार्यान्वित करते समय यह सुनिश्चित करने का दायित्व राज्य प्रभारी निदेशक और एलआईसी का होगा कि महिला बुनकरों, अल्पसंख्यकों से संबंधित बुनकरों तथा पूर्वोत्तर राज्य (अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैण्ड, त्रिपुरा और सिक्किम) के बुनकरों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया जाता है । प्रशासन राज्य में हथकरघा प्रभारी प्राधिकारी, बुनकरों के बीमा कवरेज को भारतीय जीवन बीमा निगम के साथ अंतिम रुप देंगे। बीमा कवरेज की मुख्य बातें यह योजना भारतीय जीवन बीमा निगम द्वारा संचालित की जाएगी । राज्य में हथकरघा प्रभारी प्राधिकारी, बुनकरों के बीमा कवरेज को भारतीय जीवन बीमा निगम के साथ अंतिम रुप देंगे । लाभ क्र. सं. लाभ 1. स्वाभाविक मृत्यु 60,000 रुपये 2. दुर्घटना के कारण मृत्यु 1,50,000 रुपये 3. पूर्ण नि:शक्तत्ता 1,50,000 रुपये 4. आंशिक नि:शक्तत्ता 75,000 रुपये प्रीमियम470/- रुपये प्रति सदस्य की वार्षिक प्रीमियम निम्नलिखित रुप में दी जाएगी - भारत सरकार का अंशदान 290 रुपये बुनकरों का अंशदान 80 रुपये भारतीय जीवन बीमा निगम का अंशदान 100 रुपये कुल प्रीमियम 470 रुपये प्रचालनात्मक क्रियाविधि योजना का प्रति वर्ष नवीनीकरण किया जाएगा और कवरेज को जारी रखना नवीनीकरण की निश्चित तारीख को प्रीमियम का भुगतान करने पर ही सुनिश्चित किया जाता है। प्रीमियम की राशि पूरे वर्ष के लिए भारतीय जीवन बीमा निगम को लाभार्थी द्वारा एक बार दी जाएगी। योजना 1.10.2007 से प्रभावी होगी एक बार दी गई प्रीमियम राशि वापस नहीं की जाएगी । प्रत्येक वर्ष अधिकतम नवीकरण के मामले लिए जाएंगे। सामान्यतया बीमा कवरेज प्रीमियम की संपूर्ण राशि अर्थात् सरकार और लाभार्थी दोनों के अंश, की प्राप्ति के पश्चात् लागू होता है। किसी असंभावित स्थिति में जहां सरकार का प्रीमियम अंश तैयार नहीं है, भारतीय जीवन बीमा निगम लाभार्थी के अंश को स्वीकार करेगा और तदनुसार कवरेज लागू करेगा । योजना के क्रियान्वयन के लिए हथकरघा और वस्त्र के राज्य निदेशक प्रभारी कार्यालय तथा इस फील्ड में उसके अधीनस्थ कार्यालय नोडल एजेंसियां होंगी। बीमा कवर से संबंधित सभी मामलों में नोडल एजेंसी बीमाकृत सदस्यों के लिए और उनकी ओर से कार्य करेगी। योजना के तहत अधिकतम बुनकर कवरेज के लिए लाभार्थियों की पहचान, फार्म भेजने, अनुदेश आदि के लिए भारतीय जीवन बीमा निगम हथकरघा के राज्य निदेशक प्रभारी के संपर्क में रहेगा । एक प्रत्याशित लाभार्थी को अपना आवेदन-सह-नामांकन पत्र भरना होगा और उसे अपने प्रीमियम के शेयर के साथ नोडल एजेंसी को प्रस्तुत करना होगा। आवेदन का प्रारुप भारतीय जीवन बीमा निगम द्वारा नोडल एजेंसी को उपलब्ध करवाया जाएगा। चिकित्सा प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है और इस प्रयोजन के लिए स्वयं का प्रमाण पत्र ही पर्याप्त होगा । उपर्युक्त के प्राप्त होने पर नोडल एजेंसी आवेदन पत्र की जांच करेगी और पात्र पाए जाने पर प्रीमियम की राशि स्वीकार करेगी और इन लाभार्थियों की सूची के साथ-साथ प्रीमियम की राशि भारतीय जीवन बीमा निगम को भेजेगी । नोडल एजेंसी से लाभार्थियों की सूची के साथ प्रीमियम की राशि प्राप्त होने पर भारतीय जीवन बीमा निगम योजना के तहत शामिल किए गए सभी बुनकरों को कार्ड/प्रमाण पत्र जारी करेगा और उसे इस तरह से बनाया जाएगा कि नवीनीकरण की तारीख/माह का भी उसमें उल्लेख हो। कार्ड देशी भाषा में होना चाहिए। इससे भारतीय जीवन बीमा निगम से अपनी बकाया राशि का दावा कर पाएंगे । मृत्यु या अपंगता की स्थिति में संबंधित नामित व्यक्ति/लाभार्थी अपने दावे को अपेक्षित दस्तावेज जैसे मृत्यु प्रमाण पत्र/शव परीक्षण रिपोर्ट/चिकित्सा प्रमाण पत्र/छुट्टी प्रमाण पत्र/अन्य दस्तावेज जो भी लागू हों, सहित नोडल एजेंसी के माध्यम से भारतीय जीवन बीमा निगम को प्रस्तुत करेगा। नोडल एजेंसी दावे प्राप्त होने के 15 दिन के भीतर भारतीय जीवन बीमा निगम को दावा भेजेंगी। भारतीय जीवन बीमा निगम दावे प्राप्त होने की तारीख से एक माह के भीतर दावे को निपटाएगा और राशि का भुतान लाभार्थी /नामित व्यक्ति को नोडल एजेंसी के माध्यम से सीधे खाता आदाता चैक( नोडल एजेंसी को सूचित करते हुए) द्वारा करेगा । लाभार्थी द्वारा अगले वर्ष के लिए बीमा प्रीमियम का भुगतान न करने पर बीमा कवर स्वत- बंद हो जाएगा। तथापि, अपेक्षित प्रीमियम का भुगतान करने पर अगले वर्ष में योजना में शामिल होने के लिए लाभार्थी स्वतंत्र होगा । यदि हथकरघा बुनकर बीमा-अवधि के दौरान एक समिति या निगम से दूसरी समिति अथवा निगम में अपना रोजगार बदल देता है तो वह योजना के लाभार्थी के रुप में नोडल एजेंसी को सूचित करेगा । राज्य सरकारों और राज्य हथकरघा निगमों/शीर्ष/प्राथमिक हथकरघा बुनकर सहकारी समितियों/संघों को योजना में शामिल होने के लिए समाचार पत्रों और अन्य प्रचार माध्यमों में विज्ञापन देकर हथकरघा बुनकरों को सुग्राही बनाकर योजना के कार्यान्वयन में सक्रिय रुप से जोड़ा जाएगा । नोडल एजेंसियां कवरेज के विवरण एवं दावों का निपटान दर्शाते हुए आवधिक रिपोर्ट विकास आयुक्त हथकरघा, वस्त्र मंत्रालय को प्रस्तुत करेंगी । अतिरिक्त लाभ महात्मा गांधी बुनकर बीमा योजना में अभिभावक के उन बच्चों को छात्रवृत्ति का भी प्रावधान है जिनको शिक्षा सहयोग योजना के तहत शामिल किया गया है। 9वीं से 12वीं कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों को अधिकतम चार वर्ष की अवधि के लिए या 12वीं कक्षा पूर्ण करने तक इनमें से जो भी पहले हो, प्रति छात्र को 300 रुपये प्रति तिमाही की दर से छात्रवृत्ति दी जाएगी। छात्रवृत्ति शैक्षिक वर्ष जून से मई के लिए दी जाएगी । योजना में कवर सदस्य के 2 बच्चों को लाभ प्राप्त होगा। लिंग आधारित भेदभाव के बिना दोनों बच्चों को छात्रवृत्ति के लिए कवर किया जाएगा। यदि कोई विद्यार्थी असफल होता है और उसी कक्षा में पुन: रखा जाता है तो उसे उस कक्षा में अगले वर्ष के लिए छात्रवृत्ति का लाभ नहीं प्राप्त होगा। यह सुनिश्चित किया जाए कि महात्मा गांधी बुनकर बीमा योजना-शिक्षा सहयोग योजना के तहत लाभ प्राप्त बुनकर समुदाय के प्रतिभा संपन्न विद्यार्थियों को आगे लाए जाने की जरुरत है ताकि अन्य बुनकर परिवारों के बच्चे उनसे प्रेरणा लें । महात्मा गांधी बुनकर बीमा योजना के तहत सदस्य के रुप में एक बार व्यक्ति को शामिल कर लिए जाने पर योजना के तहत लाभार्थी के चयन के समय आगे आय का प्रमाण पत्र देना आवश्यक नहीं है। छात्रवृत्ति धारक के माता-पिता को या नोडल एजेंसी को प्रीमियम की राशि नहीं देनी होगी। महात्मा गांधी बुनकर बीमा योजना के तहत शामिल माता-पिता के बच्चों को यह अतिरिक्त लाभ दिया गया है। यदि महात्मा गांधी बुनकर बीमा योजना के तहत वार्षिक नवीनीकरण की तारीख को प्रीमियम नहीं दिया जाता है तो ऐसे मामले में बच्चा छात्रवृत्ति के लिए पात्र नही होगा। महात्मा गांधी बुनकर बीमा योजना के तहत शामिल किए गए सदस्यों मे से शिक्षा सहयोग योजना के लिए लाभार्थियों का चयन किया जाता है। किसी राज्य के लक्षित लाभार्थी छात्रों को उस राज्य में शामिल व्यक्तियों की संख्या के अनुपात में महात्मा गांधी बुनकर बीमा योजना के तहत शामिल किए गए सदस्यों में विभाजित किया जा सकता है। अंतिम चयन गरीबों में सबसे गरीब के मानदंडों के आधार पर किया जाएगा क्योंकि छात्रवृत्तियों की संख्या सीमित है और लिंग भेद के बिना है। महात्मा गांधी बुनकर बीमा योजना के जिस सदस्य का बच्चा छात्रवृत्ति के लिए पात्र हैं, वह (नोडल एजेंसी से उपलब्ध) एक आवेदन प्रपत्र भरेगा और उसे नोडल एजेंसी को प्रस्तुत करेगा। विधिवत भरे और प्रमाणित आवेदन पत्र नोडल एजेंसी द्वारा लाभार्थी छात्रों की सूची सहित शिक्षा सहयोग योजना के तहत छात्रवृत्ति के वितरण के लिए संबंधित एल आई सी पी एंड जी एस यूनिट को भेजी जाएगी। छात्रवृत्ति की राशि लाभार्थी छात्रों को संबंधित नोडल एजेंसी के माध्यम से दी जाएगी। एल आई सी, लाभार्थी छात्रों की सूची सहित नोडल एजेंसी के नाम खाता आदाता चैक भेजेगा जो वह इस छात्रवृत्ति के पात्र छात्रों को देगा। नोडल एजेंसी को रिकार्ड का रख-रखाव करना है और उपयोगिता प्रमाण पत्र आवधिक रुप में एल आई सी, पी एंड जी एस यूनिट को भेजने होंगे। दावा प्रक्रिया मृतक सदस्य के लाभार्थी को मूल रुप से मृत्यु प्रमाण पत्र नोडल एजेंसी को प्रस्तुत करना होगा जो दावों संबंधी कागजातों सहित उसे एल आई सी अर्थात् बीमा सुरक्षा को मूल रुप से अंतिम रुप देने वाली शाखा को भेजने की व्यवस्था करेगा। एल आई सी, सीधे लाभार्थी को खाता आदाता चैक भेजकर दावों का निपटान करेगा, यद्यपि वह संबंधित राज्य सरकार और हथकरघा विकास आयुक्त कार्यालय को इसकी सूचना दी जाएगी। दुर्घटना से संबंधित दावों के मामले में पुलिस जांच रिपोर्ट भी प्रस्तुत की जानी होगी। विस्तृत प्रक्रिया एल आई सी की सामाजिक सुरक्षा समूह योजनाओं की प्रक्रिया की तर्ज पर होगी। निधियां जारी करना निधियां जारी करने के लिए एलआईसी और राज्यों में हथकरघों के प्रभारी प्राधिकरण, एमजीबीबीवाई के तहत शामिल किए जाने वाले बुनकरों की पहचान करेंगे। भारत सरकार, वस्त्र मंत्रालय, विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय, प्रीमियम का अपना हिस्सा अग्रिम में सीधे ही भारतीय जीवन बीमा निगम को जारी करेगा जो योजना के तहत शामिल किए जाने वाले हथकरघा बुनकरों की संख्या पर आधारित होगा। इसके बाद निधियां जारी किए जाने के प्रत्येक अनुरोध के साथ ऐसा नोट होना चाहिए जिसमें किए गए दावों और निपटाए गए दावों के संबंध में बीमा कंपनी के कार्यनिष्पादन का उल्लेख किया गया हो । केन्द्रीय सरकार के प्रीमियम का हिस्सा सीधे ही एलआईसी को जारी किया जाएगा। निगरानी और मूल्यांकन योजना की प्रगति की निगरानी और मूल्यांकन राज्य सरकारों द्वारा किया जाएगा जो विकास आयुक्त (हथकरघा) को तिमाही प्रत्यक्ष और वित्तीय प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। एमजीबीबीवाई योजना के कार्यान्वयन की समीक्षा करने के लिए एलआईसी, प्रत्येक माह के दूसरे हफ्ते में राज्य हथकरघों के प्रभारी निदेशक/आयुक्त और सहायक निदेशकों की जिला स्तरीय बैठक आयोजित करेगा। एलआईसी, अपने दावा विभाग से उस राज्य से संबंधित आंकड़े अग्रिम में प्रदान किए जाने की व्यवस्था करेगा । विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय, अपने फील्ड कार्यालय और राज्य सरकारों तथा एलआईसी के साथ समय-समय पर बैठकें आयोजित कर प्रगति की निगरानी करेगा। इस योजना का मूल्यांकन 12वीं योजना के मध्यावधिक मूल्यांकन के समय किया जाएगा। स्रोत: भारत सरकार का विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय