बाल कल्याण समिति प्रत्येक जिले में एक बाल कल्याण समिति होगी, जिसका गठन अधिनियम की धारा 29 की उपधारा (1) के अनुसार, राजपत्र में अधिसूचना के माध्यम से राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा । समिति को सुचारू रूप से चलाने हेतु राज्य सरकार आवश्यक संरचना, मानव एवं वित्तीय संसाधन प्रदान करेगी । बाल कल्याण समिति की संरचना समिति में एक अध्यक्ष और चार अन्य सदस्य होंगे, जिनमें से कम से कम एक महिला होगी । समिति के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति नियम 100 के अधीन इस प्रयोजन के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित चयन समिति की सिफारिश के आधार पर की जाएगी। समिति के अध्यक्ष एवं सदस्यों का चयन करते समय चयन समिति यथासंभव यह सुनिश्चित करेगी कि उनमें से कोई भी किसी दतक ग्रहण अभिकरण या बाल संस्थान से न हो । राज्य सरकार, समिति के अध्यक्ष एवं सभी सदस्यों को बाल मनोविज्ञान, बाल कल्याण, बाल अधिकार, सामाजिकरण और पुनर्वास, किशोर न्याय के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मानकों में सुसंगत विधि यथावश्यक प्रशिक्षण तथा अभविन्यास प्रदान करेगी। समिति का कार्यकाल समिति का कार्यकाल तीन वर्षो का होगा और समिति के अध्यक्ष तथा सदस्यों का कार्यकाल समिति के कार्यकाल तक होगा । समिति के अध्यक्ष और सदस्य अधिकतम दो लगातार निर्धारित कार्यकाल हेतु नियुक्ति के पात्र होंगे । समिति के सदस्यों के कार्यकाल में विस्तार राज्य सरकार द्वारा उनके कार्यों के मूल्यांकन के आधार पर तथा चयन समिति की सिफारिश पर होगा । समिति के कार्यकाल के पूरा हो जाने पर निरंतरता सुनिश्चित करने की दृष्टि से, राज्य सरकार वर्तमान समिति की अवधि समाप्त होने से पूर्व नई समिति का गठन करेगी; जिसके पश्चात वर्तमान समिति सभी अभिलेख तथा सूचनाएँ नव गठित समिति को सौंप देगी । समिति के अध्यक्ष और सदस्य एक महीने की लिखित सूचना देने के पश्चात किसी भी समय पद त्याग कर सकेंगे अथवा इस अधिनियम की धारा 29 की उपधारा (4) के अनुसार पद से हटाए जा सकेंगे । समिति में किसी भी आकस्मिक रिक्ति को चयन समिति द्वारा तैयार किए गए नामों के पैनल में से अन्य व्यक्ति की नियुक्ति द्वारा भरा जा सकेगा तथा वह व्यक्ति समिति के शेष कार्यकाल हेतु पद धारण करेगा । समिति के अध्यक्ष और सदस्यों के लिए अर्हताएँ समिति के अध्यक्ष अथवा सदस्य के रूप में चयन किए जाने वाले किसी व्यक्ति को निम्नलिखित अर्हताओं में से किसी एक अर्हता के साथ-साथ सबंधित क्षेत्र में कम से कम 3 वर्षों का अनुभव होगा: वैसा व्यक्ति जो सामाजिक कार्य, मनोविज्ञान, बाल विकास, शिक्षा, समाज शास्त्र, विधि, अपराध शास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधि रखता हो, जब ऐसा कोई व्यक्ति उपलब्ध न हो तो सामाजिक विज्ञान की किसी एक क्षेत्र में कम से कम स्नातक हो । शिक्षक, डॉक्टर अथवा सामाजिक कार्यकर्ता, जो बच्चों से सबंधित कार्य में सलंग्न हो। समिति के अध्यक्ष या सदस्य की आयु नियुक्ति/विस्तार के समय न्यनूतम 35 वर्ष तथा अधिकतम 62 वर्ष हो । अध्यक्ष पद के लिए विधि में डिग्री प्राप्त व्यक्ति को प्राथमिकता दी जायेगी । (2) उप नियम (1) के अर्हता के अनुसार जिला में उपयुक्त पात्र नही मिल पाने की स्थिति में चयन समिति उल्लखित उप नियम (1) के विषयों में स्नातक के साथ 3 वर्ष अनुभाव प्राप्त की अनुशंसा कर सकती है । किसी व्यक्ति को समिति का अध्यक्ष अथवा सदस्य बनाने पर विचार नहीं किया जाएगा, यदि वह: पूर्व में दोषसिद्ध हो चुके हो; किसी अनैतिक कार्य अथवा बाल उत्पीडन के कार्य अथवा बाल श्रमिक के नियोजन में अन्तर्वलित रहा हो; ऐसा पूर्णकालिक व्यवसाय कर रहा हो, जिसके कारण इस अधिनियम तथा इस नियमावली के अनुसार समिति के कार्य के लिए आवश्यक समय एवं ध्यान नही दे सकता है; इस अधिनियम तथा इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के अधीन विहित अर्हताएँ एवं अनुभाव पूरा न करता हो, ऐसे मामलों में चयन समिति जाँच कर लेने के बाद तथा ऐसे तथ्यों व सिद्ध होने पर उसके आवेदन को रद्द करेगी तथा रिक्तियों को भरने के लिए तैयार की गई नामों की सूची में से दूसरे व्यक्ति के नाम की अनुशंसा करेगी । बैठक एवं यात्रा भत्ता समिति के अध्यक्ष एवं सदस्यों को राज्य सरकार द्वारा अवधारित यात्रा एवं बैठक भत्ते का भुगतान किया जाएगा । यह भत्ता एक हजार रूपये प्रति बैठक प्रति सदस्य से कम न होगा । अध्यक्ष एवं सदस्यों के भत्ते का भुगतान निदेशक, समाज कल्याण द्वारा किया जाएगा । समिति की बैठकें समिति अपनी बैठकें बाल गृह के परिसर अथवा बाल गृह के निकट किसी स्थान अथवा इस अधिनियम के अधीन चलाई जा रही किसी संस्था के उपयुक्त परिसर में आयोजित करेगी । देखरेख और संरक्षण के लिए जरूरतमंद बच्चे अथवा बच्चों की सूचना मिलने पर यदि परिस्थितियाँ ऐसी हो कि बच्चों को समिति के समक्ष पेश नहीं किया जा सकता, समिति बच्चे अथवा बच्चों तक पहुँचने के लिए स्वत: जाएगी और ऐसे बच्चे अथवा बच्चों के लिए सुविधाजनक स्थान पर अपनी बैठक आयोजित करेगी । परिसर जहाँ समिति अपनी बैठकों का आयोजन करती है, बाल हितैशी होगा तथा किसी भी रूप में न्यायालय की तरह नहीं दिखेगा । उदाहरणार्थ समिति किसी मंच पर नहीं बैठेगी एवं बैठने की व्यवस्था एक समान होगी और वहाँ गवाहों के लिए कठघरा नहीं होगा । समिति सप्ताह में कम से कम एक दिन बैठक आयोजित करेगी, जिसमें राज्य सरकार लंबित मामले अथवा कार्य के आधार पर वृद्धि कर सकेगी । एक वर्ष में समिति के अध्यक्ष तथा सदस्यों की न्यूनतम उपस्थिति तीन चौथाई आवश्यक होगी । समिति के प्रत्येक सदस्य शासकीय कार्य के घंटे के दौरान प्रत्येक बैठक में कम से कम पाँच घंटे उपस्थित रहेंगे । कार्य के लंबित रहने की स्थिति में राज्य सरकार कार्य अवधि को बढ़ा सकेगी । समिति के कार्य एवं शाक्तियां समिति, अधिनियम के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए निम्नलिखित कार्यों का निष्पादन करेगी, अर्थात:- समिति के समक्ष पेश किए गए बच्चों का संज्ञान लेना एवं ग्रहण करना । समिति के समक्ष लाए गए माले में विनिश्चय शीघ्राशीघ्र करना । देखरेख और संरक्षण योग्य जरूरतमंद ऐसे बालकों, जो विषम परिस्थितियों में रहने के कारण समिति के समक्ष प्रस्तुत किए जाने की स्थिति में नहीं हैं, के पास जिला बाल संरक्षण इकाई अथवा राज्य बाल संरक्षण इकाई अथवा राज्य सरकार के सहयोग से पहुंचना । बच्चे की सुरक्षा और उनके हित को प्रभावित करने वाले सभी मुद्दों के बारे में आवश्यक जाँच करना । बाल कल्याण अधिकारियों अथवा परिवीक्षा अधिकारियों अथवा गैर-सरकारी संगठनों को सामाजिक जाँच करने तथा समिति को रिपोर्ट पेश करने का निर्देश देना । प्रत्येक बच्चों की देखरेख के लिए योजना तैयार करना । बच्चों की आवश्यक देख-रेख, संरक्षण तथा तत्काल आश्रम सुनिश्चित करना । जिला बाल संरक्षण इकाई अथवा राज्य दत्तक संसाधन अभिकरणों तथा अन्य अभिकरणों के साथ अनुवर्त्ती कार्रवाई तथा समन्वय के अतिरिक्त माता पिता अथवा संरक्षकों अथवा उपयुक्त व्यक्ति अथवा उपयुक्त संस्थान को आवश्यक निर्देश जारी करने सहित बच्चों के लिए उपयुक्त पुनर्वास एवं उनका पुन: स्थापन सुनिश्चित करना। आश्रय एवं देखभाल के जरूरतमंद बच्चों को ग्रहण करने के लिए बाल/आश्रय/पालना गृहों के अधीक्षक को निर्देश देना । समिति द्वारा निपटाए गए प्रत्येक मामले के सार के साथ मामले की विस्तृत अभिलेख तैयार करना और उसका रख-रखाव करना । बच्चों के लिए, बच्चों के अनुकूल वातावरण प्रदान करना । बच्चों के लिए, बच्चों के अनुकूल वातावरण प्रदान करना । विनिर्दिष्ट मामलों में अस्थायी अवधि के लिए उपयुक्त व्यक्ति तथा उपयुक्त संस्था की घोषणा करना । बच्चे को गोद लेने के लिए विधिक रूप से मुक्त घोषित करना । अपने क्षेत्राधिकार के गुमशुदा बच्चों के संबंध में जानकारी रखना तथा आवश्यक अनुवर्त्ती कार्रवाई करना । देखरेख और संरक्षण के जरूरतमंद मामलों के संबंध में बोर्ड के साथ संपर्क बनाए रखना । राज्य सरकार के सहयोग से संस्थाओं में बच्चों की स्थिति का पुनर्विलोकन करने के लिए प्रत्येक संस्था का, जहाँ देखरेख और संरक्षण के लिए या दत्तक ग्रहण के लिए बालक भेजे जाते हैं कम से कम तीन मास में एक दौरा करना तथा आवश्यक कार्रवाई का सुझाव देना । बालकों के शोषण एवं बाल उत्पीडन को रोकने के उद्देश्य से अपने अधिकार क्षेत्र के अधीन बालकों से सबंधित संस्था एवं अभिकर्ताओं पर नियंत्र रखना । जिला बाल संरक्षण अथवा राज्य बाल संरक्षण इकाई अथवा राज्य सरकार के सहयोग से शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस, श्रम विभाग तथा बच्चों की देखरेख और संरक्षण में सलंग्न अन्य अभिकरणों के साथ समन्वय स्थापित करना । जब कभी अपेक्षित हो सामाजिक जाँच, पुन:स्थापन एवं पुनर्वास सहित उपर्युक्त के लिए कॉर्पोरेट सेक्टर तथा गैर सरकारी संगठनों से सम्पर्क एवं नेटवर्क बनाना । बच्चों एवं व्यस्कोसे सुझाव प्राप्त करने के उद्देश्य से सुझाव पेटिका का रखरखाव करना तथा आवश्यक कार्रवाई करना । समिति, जिला बाल संरक्षण इकाईयाँ किसी स्वयंसेवी संस्था की मदद से, विभिन्न सरकारी, गैर सरकारी, कॉर्पोरेट एवं सामुदायिक अभिकरण की सूची तैयार करेगा ताकि बच्चों का पुनर्वास एवं सामाजिक पुन: एकीकरण प्रदान किया जा सके । किशोर के पुनर्वास या पुर्नस्थापन तथा त्वरित जाँच को सुकर बनाने हेतु अन्य जिलों की समितियों एवं अन्य सबंधित निकायों के साथ समन्वय स्थापित करना । जब कभी अपेक्षा की जाए, किशोरों तथा अन्य संबंधित बातों से सबंधित मासिक सूचना तैयार करना और इसे जिला बाल संरक्षण इकाई एवं राज्य बाल संरक्षण इकाई को भेजना । देख-रेख एवं संरक्षण के जरुरमंद किशोर के संबंध में, राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर सौंपे गए अन्य कार्यों को करना । बाल कल्याण समिति स्थानीय प्राधिकार को बेसहारा बच्चों का, आवश्यक जांचोपरान्त, जन्म प्रमाण पत्र निर्गत करने का आदेश कर सकती है । समिति से संबंधित प्रक्रिया बैठक के लिए कोरम अध्यक्ष सहित तीन सदस्यों की उपस्थिति होगी; जिसमें अध्यक्ष सम्मिलित हो सकते हैं । जब समिति बैठक में नहीं हो, तो किसी एक सदस्य द्वारा लिये गये निर्णय को समिति की अगली बैठक में अनुसमर्थन कराना अपेक्षित होगा । मामले को निपटाने हेतु समिति बच्चे की आयु, विकासात्मक स्तर, शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य, बच्चे की राय तथा बाल कल्याण अधिकारी अथवा परिवीक्षा पदाधिकारी मामले पर कार्य कर रहे कार्यकर्त्ता की सिफारिशों को ध्यान में रखेगी । मामले के अंतिम निष्पादन के लिए समिति के आदेश को कम से कम दो सदस्यों द्वारा हस्ताक्षरित किया जाएगा, जिसमें अध्यक्ष भी शामिल रहेंगे । समिति के समक्ष किसी बालक को पेश करना देखरेख और संरक्षण के लिए जरुरतमंद बच्चों को समिति के समक्ष यात्रा में लगे समय को छोड़ कर चौबीस घंटे के भीतर निम्नलिखित व्यक्तियों में से किसी एक के द्वारा पेश किया जाएगा:- किसी पुलिस अधिकारी अथवा विशेष किशोर न्याय पुलिस इकाई अथवा नामनिर्दिष्ट पुलिस अधिकारी; कोई लोक सेवक; चाइल्ड लाइन, पंजीकृत स्वैच्छिक संस्था अथवा राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त ऐसे अन्य स्वैच्छिक संगठन अथवा अभिकरण; सामाजिक कार्यकर्ता; लोक भावना से युक्त कोई नागरिक; अथवा स्वयं बच्चे द्वारा । जब कभी ऊपर उल्लिखित व्यक्ति देख-रेख एवं संरक्षण के जरूरतमंद किशोर को अपने प्रभार में लेगा तब इसकी सूचना यथाशीघ्र पुलिस नियंत्रण कक्ष और चाइल्ड लाइन को देगा जिसमें किशोर का ब्यौरा, किस स्थिति में मुक्त कराया गया तथा किस समय एवं किस स्थान से मुक्त कर प्रभार में लिया गया, की जानकारी दी जाएगी । किशोर को प्रभार में लेने वाला व्यक्ति अपना ब्यौरा यथा नाम, पता और संगठन जिसमें वह कार्य कर रहा हो तथा मुक्तिद्ल के सदस्यों के सबंधित अन्य सुसंगत ब्यौरा भी दिया जाएगा। दो वर्ष से कम आयु के बच्चे, जो चिकित्सीय दृष्टि से स्वस्थ नहीं हों के मामले में व्यक्ति अथवा संगठन बच्चे को फोटो के साथ लिखित रिपोर्ट समिति को चौबीस घंटे के भीतर भेजेगा तथा जैसे ही बालक चिकित्सीय दृष्टि से स्वस्थ होगा उसे चिकित्सा प्रमाण-पत्र के साथ समिति के समक्ष यथाशीघ्र पेश करेगा । समिति उसकी जानकारी में लाए गए मामले का स्वत: संज्ञान ले सकती है तथा जहाँ आवश्यक हो, देखरेख और संरक्षण के लिए जरूरतमंद किसी बच्चे तक पहुंच सकती है । ऐसे कार्य करने में समिति को जिला अथवा राज्य बाल संरक्षण इकाई अथवा राज्य सरकार आवश्यक समर्थन एवं सहायता प्रदान करेगा । समिति की बैठक में नहीं होने की स्थिति में, बच्चे को समिति के समक्ष पेश किए जाने तक माता-पिता अथवा संरक्षक अथवा उपयुक्त व्यक्ति अथवा उपयुक्त संस्था की सुरक्षा में रखने के लिए अधिनियम की धारा 30 की उपधारा (2) के अधीन अभिकथित उपबंधों के अनुसार, समिति के किसी एक सदस्य के समक्ष बालक को पेश किया जा सकता है । एक सदस्य तक भी नहीं पहुंच पाने की स्थिति में अथवा समय कार्य-समय से परे हो बालक को गैर-सरकारी संगठनों अथवा चाइल्ड लाइन अथवा पुलिस द्वारा आवश्यक दस्तावेजों के साथ अधिनियम के अंतर्गत बच्चों के लिए पंजीकृत उपर्युक्त संस्थान ले जाया जाएगा तथा बालक को समिति के समक्ष प्रस्तुत करने के समय तक ऐसे संस्थान में रखा जाएगा । सबंधित संस्थान, समिति के अध्यक्ष अथवा किसी सदस्य को ऐसे बालक के बारे में सूचित करेगा तथा चौबीस घंटे के अंदर बालक को समिति के समक्ष पेश करेगा और ऐसे मामलों में देखरेख और संरक्षण के लिए जरूरतमंद बच्चे को संस्थान तक पहुँचाने वाले व्यक्ति को समिति के समक्ष करते समय उपस्थित होना आवश्यक नहीं होगा । यदि संस्थान सरकारी बाल गृह हो तो बालक को समिति की अगली बैठक के दौरान पेश किया जा सकेगा । समिति के समक्ष बालक को जो कोई पेश करेगा उसे उन परिस्थितियों की रिपोर्ट पेश करनी होगी, जिनके अधीन बालक उनकी जानकारी में आया हो तथा उनके द्वारा पुलिस एवं गुमशुदा व्यक्ति तलाश दल को सूचित करने के लिए क्या प्रयास किए गए हैं और मान्यता प्राप्त स्वैच्छिक संगठन अथवा किसी पुलिस कर्मी द्वारा बच्चे को समिति के समक्ष पेश करने की दिशा में उन्हें बच्चे के परिवार को खोजने के लिए उनके द्वारा किए गए प्रयासों की रिपोर्ट भी पेश करेगा । समिति के समक्ष बालक को पेश करने अथवा संस्था में उसके प्रवेश के लिए बच्चे की किसी सामान्य चिकित्सक अथवा स्त्री रोग विशेषज्ञ से जाँच कराना आवश्यक नहीं होगा। समिति, खोए हुए बच्चों के साथ-साथ हिंसा, शोषण एवं बाल उत्पीडन के मामलों में पुलिस शिकायत एवं प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने में सहायता करेगी तथा जिला बाल संरक्षण इकाई अधिकारी के माध्यम से अपेक्षित विधिक सहायता का प्रबंध करेगी । प्रत्येक समिति उसके द्वारा प्राप्त किए गए देखरेख और संरक्षण के लिए जरूरतमंद बच्चों के बारे में तिमाही प्रतिवेदन जिला अथवा राज्य बाल संरक्षण इकाई अथवा राज्य सरकार को भेजेगी । समिति द्वारा इन कार्यवाहियों के दौरान बालक को हितैशी वातावरण प्रदान किया जाएगा । समिति के पास अधिवक्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का पैनल होगा, जो बाल उत्पीडन के मामलों के निष्पादन में समिति की सहायता करेंगे तथा जब ऐसे बच्चों से सबंधित मामलों को नियमित आपराधिक न्यायालय में सुनवाई के लिए लाया जाएगा, तब ये पीड़ित बच्चों को विधि सेवाओं की सुलभता के लिए लोक अभियोजक अथवा सहायक लोक अभियोजक से विचार विमर्श भी करेंगे । बालिका के मामले में, लोक अभियोजक या सहायक लोक अभियोजक यथासंभव महिला होगी । जिला बाल संरक्षण इकाई की सहायता से बच्चों के कुटुम्ब को खोजने के सभी संभव प्रयास किए जाएगें तथा मान्यता प्राप्त स्वैच्छिक संगठनों, चाइल्ड लाइन अथवा पुलिस की भी सहायता ली जाएगी । जाँच लंबित रहने तक, समिति बच्चे की आयु एवं लिंग को ध्यान में रखते हुए विशिष्ट सेवाओं वाले नामनिर्दिष्ट सुरक्षित स्थानों पर भेजेगी तथा ऐसी परिस्थिति में राज्य सरकार परिवहन की व्यवस्था करेगी अथवा व्यय के लिए वास्तविक किराये पर आधारित आवश्यक बजटीय आवंटन करेगी । बच्चों के साथ सादे कपड़े में पुलिस अधिकारी अथवा स्वैच्छिक संगठन का प्रतिनिधि मार्गदर्शी होगा अथवा जिला बाल संरक्षण इकाई के सहयोग से समिति द्वारा उपयुक्त कोई अन्य व्यवस्था की जाएगी तथा बालिका के मामले में उसके साथ महिला मार्गदर्शी होगी । जिला बाल संरक्षण इकाई अथवा राज्य सरकार द्वारा समिति को अधिनियम की धारा 34 के अधीन यथाविधित उपयुक्त सुविधाओं तथा क्षमता के साथ सभी मान्यता प्राप्त बाल संरक्षण संस्थाओं की सूची, बच्चों से सबंधित सभी ससंधान सेवाओं की सूची तथा संपर्क सूत्रों की सूची प्रदान की जाएगी । समिति जाँच लंबित रहने एवं बच्चे के पुन:स्थापन तक जैसा भी मामला हो, माता-पिता, संरक्षक अथवा उपयुक्त व्यक्ति की देखरेख में बच्चे को सुरक्षित रखने के लिए प्रपत्र- VIII में आदेश करते समय ऐसे माता-पिता, संरक्षक अथवा उपयुक्त व्यक्ति को प्रपत्र – IX में वचनबंध देने के लिए निदेश देगी । जब कभी समिति जाँच लंबित होने तक बच्चे को किसी संस्था में रखने के लिए आदेश करेगी, तो समिति ऐसी संस्था के अधीक्षक को अल्पावधि स्थापन के आदेश की प्रति गृह तथा माता-पिता अथवा संरक्षकों एवं पिछले अभिलेखों का ब्यौरा प्रपत्र – X में भेजेगी । जब समिति अधिनियम की धारा 39 की उपधारा (3) के उप-खण्ड (च) के अधीन प्रत्यर्पण के एक भाग के रूप में बच्चे को किसी उपयुक्त संस्था में रखने के लिए आदेश करती है, समिति ऐसे संस्थान के अधीक्षक का प्रपत्र –XI में पुन: स्थापन के आदेश की एक प्रति भी भेजेगी । समिति को यह भी समाधान कर लेना चाहिए कि बच्चे के साथ पुलिस या अन्य व्यक्ति के द्वारा बाल कल्याण समिति तक पहुँचाने में कोई उत्पीडन तो नहीं किया गया है । समिति, प्रतिभूति पर या प्रतिभूति के बिना अंतिम निष्पादन दिए जाने तक बालक को उसके माता-पिता/अभिभावक की देख-रेख में मुक्त कर सकेगी । यह सुनिश्चित करने के लिए कि बालक के हित का महत्व सर्वोपरी है, समिति, कार्यवाही का संचालन अनौपचारिक तौर पर करेगी । देखरेख एवं संरक्षन के जरूरतमंद बच्चों के हित को कुप्रभावित करने से सबंधित कोई बात प्रकाशित करने के लिए समिति किसी मीडिया के विरुद्ध कार्रवाई आरंभ करेगी । समिति, देख-रेख एवं संरक्षण के जरूरतमंद बालक से पूछताछ करेगी तथा उनके बयान को दण्ड प्रक्रिया संहिता -1973 में यथा विनिर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अभिलिखित करेगी । समिति जाँच के दौरान, किसी भी चरण में यदि समिति का समाधान हो जाए कि बालक की उपस्थिति जाँच के लिए आवश्यक नहीं हैं तो उसकी उपस्थिति का त्याग करते हुए बालक की अनुपस्थिति में भी जाँच की कार्रवाई जारी रखेगी । बालक को, जहाँ तक संभव हो, उनके माता-पिता अथवा अभिभावक के निवास स्थान के निकटतम संस्थान में रखा जाएगा, बशर्ते बालक का माता-पिता अथवा संरक्षक द्वारा शोषण अथवा उत्पीड़नण किया गया हो । जाँच प्रक्रिया जब किसी बालक को समिति के समक्ष पेश किया जाता हो, समिति प्रपत्र- XII में आदेश देकर बच्चे को जाँच करने के लिए परिवीक्षा पदाधिकारी या सामाजिक कार्यकर्ता या मामले के कार्यकर्ता अथवा बाल कल्याण अधिकारी को सौंपेगी । समिति, व्यक्तिगत देखरेख योजना तैयार करने तथा उपयुक्त पुनर्वास की व्यवस्था के लिए विवरण या विशिष्टियों की जाँच करने के बारे में संबद्ध व्यक्ति अथवा संगठन को निदेश देगी । परिवीक्षा पदाधिकारी अथवा मामले के कार्यकर्ता अथवा बाल कल्याण अधिकारी द्वारा की गई सभी जांचों का विवरणी प्रपत्र – XIII के अनुसार होगी तथा उसमें बच्चे की पारिवारिक स्थिति के मूल्यांकन का विस्तृत ब्यौरा भी दिया जाएगा एवं लिखित रूप में यह स्पष्ट करना होगा किबालक को उसके परिवार में पुन:स्थापित करना उसके हित में होगा या नही । जाँच चार माह के भीतर अथवा समिति द्वारा यथानियत उससे कम अवधि में ही पूरी की जाएगी; परन्तु समिति, बच्चों के सर्वोतम हित में तथा अभिलिखित कारणों से विशेष परिस्थितियों में उक्त अवधि को बढ़ा सकेगी । जाँच पूरी होने के पश्चात यदि बालक को बाल गृह में रहने का आदेश दिया जाता हो तो समिति, गृह के अधीक्षक को ऐसे बालक की तिमाही प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत करने तथा प्रगति की वार्षिक समीक्षा के लिए समिति के समक्ष पेश करने के लिए निदेश देगी । बाल गृह राज्य सरकार स्वयं अथवा स्वैच्छिक संगठनों के सहयोग से, निम्नलिखित निर्दिष्ट रीति से देखरेख और संरक्षण के लिए जरूरतमंद बच्चों के लिए पृथक गृहों का स्थापना करेगी: अधिनियम की धारा 34 की उपधारा (3) तथा इस नियमावली के नियम 82 के अधीन सभी बाल गृह शिशु देख-रेख संस्थान के रूप में रजिस्ट्रीकृत होंगे । नियम 83 में अभिकथित प्रक्रिया के अनुसार सभी बाल गृह प्रमाणित होंगे । सभी बाल गृह उनके द्वारा देखरेख और संरक्षण के लिए प्राप्त प्रत्येक बालक के विषय में संबद्ध समिति को रिपोर्ट देंगें । 10 वर्ष से कम आयु के लड़कों और लड़कियों को एक ही गृह में रखा जा सकता है किन्तु 5 से 10 वर्ष का आयु वर्ग के लड़कों एवं लड़कियों के लिए अलग-अलग सुविधाएँ प्रदान की जाएगी । प्रत्येक बाल गृह में उपयुक्त सुविधाओं के साथ 0-5 वर्ष के आयु समूह के बच्चों के लिए अलग-अलग सुविधाएँ प्रदान की जाएगी । 10 वर्ष से 18 वर्ष तक के लड़के एवं लड़कियों के लिए अलग-अलग बाल गृह स्थापित किए जायेंगे । उम्र समूह 10-18 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों को 10-15 वर्ष तथा 15-18 वर्ष के दो समूहों में अलग-अलग किए जाएंगे । प्रत्येक बाल गृह, व्यापक रूप में बाल संरक्षण केंद्र होगा, जिसका मुख्य उद्देश्य किशोर गृह राज्य सरकार या अन्य किसी सम्बद्ध स्वैच्छिक संगठन नियमित पुनरीक्षण के अलावा इस नियमावली के नियम 62 के अधीन गठित प्रबंध समिति के माध्यम से समुदाय एवं स्थानीय गैर-सरकारी संगठनों की भागीदारी के द्वारा बच्चे के देखरेख के लिए समेकित दृष्टिकोण को बढ़ावा देना होगा तथा जिला बाल संरक्षण इकाई अथवा राज्य बाल संरक्षण इकाई राज्य सरकार इन बाल गृहों के कार्यों की वार्षिक समीक्षा करेगी। ऐसे केन्द्रों का कार्यकलाप निम्नलिखित पर केन्द्रित होंगी: - अधिकार आधारित दृष्टिकोण के साथ प्रत्येक बच्चे के लिए निजी दायित्व योजना तैयार करना तथा उसका अनुसरण करना, विशेष रूप से बच्चे के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक आवश्यक्ताओं, शिक्षा, कौशल विकास, संरक्षण तथा विशिष्ट आवश्यक्ताओं; यदि कोई हो, की पूर्ति करना । परिवार आधारित गैर-संस्थागत सेवाएँ – जैसे कि पोष्य परिवार देखरेख,दत्तक ग्रहण एवं प्रायोजन । संघर्ष अथवा आपदा की स्थिति में तथा संकर मित अथवा ठीक न होने वाली बीमारियों से प्रभावित किशोरों अथवा बच्चों को उपेक्षा से बचाने के लिए परिवार परामर्श, पोषण, स्वास्थ्य सेवाएँ, मनोसामाजिक उपायों तथा प्रयोजन के माध्यम से विशेषज्ञ सेवाएँ । चाइल्ड लाइन (नि:शुल्क हेल्प लाइन) के माध्यम से आपातकालीन सेवाओं का विस्तार । छह वर्ष से कम आयु के बच्चों की जरूरतों को पूरा करने के लिए समेकित बाल विकास सेवा स्कीम से संकेंद्र्ण । बच्चों को समर्थक सेवाएँ प्रदान करने वाले संगठनों और व्यक्तियों से सम्पर्क । बच्चों के लिए विभिन्न सेवाएँ प्रदान करने वाले इच्छुक स्वयं सेवियों को अवसर प्रदान करना । यह सुनिश्चित करना कि बालक का परिवार के प्रति सकारात्मक सोच विकसित हो और परिवार के साथ संबंध स्थापित हो । हिंसात्मक परियोजना के विकल्प जैसा सामूहिक परामर्श की व्यवस्था करना । आश्रय गृह देखरेख और संरक्षण के लिए जरूरतमंद बच्चे यथा गली कुची के बच्चे तथा घर से भागे हुए बच्चों के लिए राज्य सरकार खुद या स्वैच्छिक संगठनों के माध्यम से अपेक्षित संख्या में आश्रय गृहों अथवा ड्रॉपइन-सेंटरों की स्थापना में सहायता करेगी । आश्रय गृहों में शामिल है:- अधिकतम एक वर्ष की अवधि के लिए अस्थायी आश्रय, देखरेख और संरक्षण के जरूरतमंद बच्चों के लिए अल्प-अवधि गृह । चार महीनों की अधिकतम अवधि के लिए बालकों को तात्कालिक देखरेख और संरक्षण प्रदान करने के लिए अंत:कालीन गृह । दिन में देखरेख या रात्रि आश्रय सुविधाओं के जरूरतमंद बालकों के लिए चौबीस घंटे खुले रहने वाले ड्रॉपइन सेंटर । आश्रय-गृहों अथवा ड्रॉप इन सेंटर में कपड़े, भोजन, स्वास्थ्य देखरेख एवं पोषण, सुरक्षित पेयजल एवं सफाई के मामलों में बुनियादी आवश्यक्ताओं को पूरा करने के लिए रहने एवं खाने की सुविधाएँ होंगी । इस नियमावली के नियम 47 (2) (घ) के अनुसार लड़कियों एवं लड़कों का लिए अलग-अलग आश्रय-गृह होंगे । सभी आश्रय-गृहों में शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, परामर्श तथा मनोरंजन की अपेक्षित सुविधाएँ होंगी अथवा स्वैच्छिक संगठनों अथवा कॉर्पोरेट-क्षेत्र के सहयोग से इनकी व्यवस्था की जाएगी । समिति, विशेष किशोर पुलिस इकाई, सरकारी कर्मचारी, चाइल्ड लाइन, स्वैच्छिक संगठन, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बच्चे स्वयं ऐसे आश्रय-गृहों में बच्चों को भेज सकेंगे तथा बच्चे स्वयं इन गृहों में जा सकेंगे । सभी आश्रय-गृह, समिति, गुमशुदा व्यक्ति के लिए गठित ब्यूरो अथवा विशेष किशोर न्याय पुलिस इकाई एवं जिला बाल संरक्षण इकाई अथवा राज्य बाल संरक्षण इकाई को आश्रय गृह की सुविधाओं का उपयोग करने वाले बच्चों का उनके फोटो के साथ रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे । अधिनियम की धारा 32, धारा 33, धारा 38 एवं धारा 39 के अधीन जाँच एवं मामले के निष्पादन के लिए आश्रय गृह द्वारा समिति के समक्ष बच्चे को पेश करने की आवश्यकता होगी, जो इस नियमावली के नियम 30 (2) (ग) में यथोल्लिखित ड्रॉपइन सेंटरों से भिन्न केवल आश्रय गृहों पर ही लागू होगी । आश्रय गृहों में बच्चों की समुचित देखभाल, संरक्षण, विकास, पुनर्वास एवं समेकन की जरूरतों के लिए प्रभारी थाना प्रभारी, बाल कल्याण अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता की सेवाएँ प्रदान की जाएगी । विशेष परिस्थितियों में समिति के अनुमोदन छोड़ कर किसी भी बच्चे को अल्पावधि निवास गृह में सामान्यत: एक वर्ष से अधिक की अवधि हेतु नही रखा जाएगा । बालकों के यौन उत्पीड़न के निवारण के लिए दिशानिर्देश राज्य सरकार, किशोर न्याय बोर्ड, बाल कल्याण समिति, अन्य सक्षम पदाधिकारी और अभिकरण तथा प्रत्येक व्यक्ति बच्चों के सर्वोत्तम हित में, बालकों के यौन उत्पीडन की रोकथाम हेतु समय-समय पर राज्य एवं केंद्र सरकार द्वारा जरी दिशा-निर्देशों का पालन करेंगे । स्रोत: समाज कल्याण विभाग, बिहार सरकार।