<div id="MiddleColumn_internal"> <h3 style="text-align: justify;"><a href="../../../../../../education/child-rights/92c93e932-93894193091594d93793e-914930-91593f93694b930-92894d92f93e92f-93594d92f93593894d92593e/91593f93694b930-92894d92f93e92f-92c94b93094d921">किशोर न्याय बोर्ड</a></h3> <p style="text-align: justify;">राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा अधिनियम की धारा 4 के अनुसार प्रत्येक जिला में किशोर न्याय बोर्ड का गठन करेगी ।</p> <h3 style="text-align: justify;">किशोर न्याय बोर्ड की संरचना</h3> <ol> <li style="text-align: justify;">बोर्ड में, यथास्थिति, एक महानगरीय मजिस्ट्रेट अथवा प्रथम श्रेणी का न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रधान मजिस्ट्रेट के रूप में तथा दो सामाजिक कार्यकर्ता, जिनमें से कम से कम 1 महिला होगी, न्यायपीठ का गठन करेंगे ।</li> <li style="text-align: justify;">परिषद का प्रधान न्यायिक मजिस्ट्रेट बोर्ड के समक्ष लंबित मामलों का पुनर्विलोकन करेगा तथा उनके त्वरित निपटान के लिए यथावश्यक उपाय करेगा।</li> <li style="text-align: justify;">प्रत्येक ऐसी न्यायपीठ को दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 (1974 का 2) द्वारा प्रदत्त शक्तियाँ प्राप्त होंगी ।</li> <li style="text-align: justify;"> (I) बाल मनोविज्ञान अथवा बाल कल्याण में विशेष ज्ञान रखने वाले या इस विषय में प्रशिक्षण प्राप्त मजिस्ट्रेट को बोर्ड के प्रधान मजिस्ट्रेट के रूप में नामनिर्दिष्ट किया जाएगा ।</li> <li style="text-align: justify;">(II) ऐसा विशेष ज्ञान रखने वाला या प्रशिक्षण प्राप्त प्रधान मजिस्ट्रेट उपलब्ध न होने की स्थिति में, राज्य सरकार प्रधान मजिस्ट्रेट के रूप में उन्हें अभिहित किए जाने के तुरन्तबाद या अधिमानत: होने के अधिकतम एक माह के अंदर बाल मनोविज्ञान अथवा बाल कल्याण विषय का ऐसा अल्पावधि प्रशिक्षण प्रदान करेगी, जो वह आवश्यक समझे ।</li> <li style="text-align: justify;">दो सामाजिक कार्यकर्ताओं, जिनमें से कम से कम एक महिला होगी, की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा इस नियमावली के नियम 99 के अधीन गठित चयन समिति की अनुशंसा पर निर्मित नामों के पैनल से की जाएगी ।</li> <li style="text-align: justify;">राज्य सरकार/केंद्र सरकार की स्कीमों और कार्यकर मों के अनुसार, राज्य सरकार बोर्ड के सभी सदस्यों को बाल मनोविज्ञान, बाल कल्याण, बाल अधिकार, किशोर न्याय के राष्ट्रीय एवं अतंर्राष्ट्रीय मानकों का यथावश्यक प्रशिक्षण एवं अभिविन्यास प्रदान करेगी ।</li> </ol> <h3 style="text-align: justify;">बोर्ड का कार्यकाल</h3> <ol> <li style="text-align: justify;">बोर्ड का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा तथा सदस्यों की नियुक्ति भी उनकी नियुक्ति की तारीख से तीन वर्षों के लिए होगी ।</li> <li style="text-align: justify;">कोई सामाजिक कार्यकर्ता बोर्ड के सदस्य के रूप में बोर्ड के अधिकतम दो लगातार कार्यकाल के लिए नियुक्ति का पात्र होगा ।</li> <li style="text-align: justify;">बोर्ड के सदस्य की पुन: नियुक्ति सदस्यों के कार्य मूल्यांकन राज्य सरकार की जिला बाल संरक्षण इकाई अथवा बिहार सरकार तथा इस प्रयोजन के लिए गठित चयन समिति जिसका गठन नियम 99 के द्वारा हुआ है की अनुशंषा के आधार पर, बोर्ड की बैठकों में उनकी भागीदारी तथा मामलों के निपटारे में उनके योगदान का आवश्यक रूप से मूल्यांकन करने के पश्चात किया जाएगा ।</li> <li style="text-align: justify;">कोई सदस्य किसी भी समय, एक मास की लिखित पूर्व सुचना देकर त्याग पत्र डे सकेगा अथवा अधिनियम की धारा 4 की उपधारा (5) के अनुसार उसे पद से हटाया जा सकेगा ।</li> <li style="text-align: justify;">बोर्ड में हुई किसी रिक्ति को चयन समिति द्वारा तैयार किए गए पैनल में से किसी अन्य व्यक्ति की नियुक्ति द्वारा भरा जा सकेगा तथा इस प्रकार नियुक्त व्यक्ति बोर्ड के शेष कार्यकाल के दौरान पद धारण करेगा ।</li> </ol> <h3 style="text-align: justify;">बोर्ड के सदस्यों की अर्हर्त्ताएं</h3> <p style="text-align: justify;">(1) बोर्ड के सदस्य के रूप में नियुक्त किए जाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता की आयु 35 वर्ष से कम तथा 65 वर्ष से अधिक नही होगी, उसे सामाजिक कार्य, स्वास्थ्य, शिक्षा, मनोविज्ञान, बाल विकास, विधि अथवा समाज विज्ञान के किसी अन्य क्षेत्र में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त हो तथा कम से कम पाँच वर्ष तक वह स्वास्थ्य, शिक्षा, बाल अधिकार एवं अन्य बाल कल्याण से सबंधित प्रशासनिक उपायों की योजना एवं कार्यान्वयन में सक्रिय रूप से संबद्ध रहा हो।</p> <p style="text-align: justify;">(2) उप नियम (1) के अनुसार अहर्ता वाला उपयुक्त उम्मीदवार नही मिल पाने की स्थिति में चयन समिति उप नियम (1) में उल्लखित विषयों में स्नातक के साथ 3 वर्ष अनुभाव प्राप्त उम्मीदवार की अनुशंसा कर सकती है ।</p> <p style="text-align: justify;">(3) कोई व्यक्ति बोर्ड के सदस्य के रूप में नियुक्ति के लिए विचारणीय नहीं होगा, यदि वह:-</p> <p style="text-align: justify;">(क) किसी विधि के अधीन दोषी सिद्ध हुआ हो;</p> <p style="text-align: justify;">(ख) बच्चों के दुर्व्यवहार अथवा <a href="../../../../../../education/child-rights/child-labour">बाल श्रम</a>िकों को रोजगार पर लगाने अथवा अन्य किसी मानवाधिकार के कर के मामले या अनैतिक कार्य में शामिल रहा हो;</p> <p style="text-align: justify;">(ग) ऐसा कोई अन्य व्यवसाय कर रहा हो, जिसके कारण वह इस बोर्ड के कार्य के निष्पादन पर आवश्यक समय एवं ध्यान न डे सकता हो;</p> <p style="text-align: justify;">(घ) अधिनियम और इसके अधीन बनाए गए नियमों में विहित अर्हताएँ एवं अनुभाव को पूरा न करता हो और ऐसे मामले में चयन समिति विधिवत जाँच करके और इस तथ्य के सिद्ध होने पर सबंधित व्यक्ति का आवेदन अस्वीकार करेगी और रिक्तियों को भरने के लिए तैयार की गई सूची में से अगले व्यक्ति के नाम की सिफारिश करेगी ।</p> <h3 style="text-align: justify;">बैठक एवं यात्रा भत्ते</h3> <p style="text-align: justify;">बोर्ड के सामाजिक कार्यकर्ता सदस्यों को राज्य सरकार द्वारा अवधारित यात्रा एवं बैठक भत्तों का भुगतान किया जाता है ।</p> <h3 style="text-align: justify;">बोर्ड की बैठक</h3> <p style="text-align: justify;">(1) बोर्ड अपनी बैठकें संप्रेषण गृह या न्यायालय परिसर से भिन्न किसी ऐसे अन्य उपयुक्त स्थान, जो अधिनियम से अधीन संचालित हो, में करेगी ।</p> <p style="text-align: justify;">(2) राज्य सरकार आधारभूत संरचना यथा बोर्ड कक्ष, प्रतीक्षालय, कार्यालय कक्ष, अभिलेखागार, सभा भवन, शौचालय/मूत्रालय और सुरक्षित पेयजल सुविधा एवं अन्य कार्यालय उपसाधन प्रदान करेगी ।</p> <p style="text-align: justify;">(3) राज्य सरकार परिषद को सचिवालीय सहायता प्रदान करेगी ।</p> <p style="text-align: justify;">(4) जहाँ बोर्ड अपनी बैठकें आयोजित करेगा, वे परिसर बालकों के अनुकूल होंगे तथा वे किसी भी स्थिति में, न्यायालय जैसे नहीं दिखगें, उदाहरणार्थ बोर्ड के सदस्यों के आसन मंच पर नहीं होंगे और बैठने की व्यवस्था एक समान होगी और वहाँ पर साक्षियों का कटघरा भी नहीं होगा ।</p> <p style="text-align: justify;">(5) परिषद की कार्यवाही एक सम्मेलन की भाँती होगी जिसमें किशोर न्याय परिषद के सदस्यगण, किशोर, माता-पिता, परिवीक्षा पदाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी, विधिक प्रतिनिधि इत्यादि, कार्यवाही में भाग लेंगे ।</p> <p style="text-align: justify;">(6) यह राज्य सरकार के पंचांग का अनुश्रवण करेगा ।</p> <p style="text-align: justify;">(7) बोर्ड की बैठक सप्ताह में कम से कम एक बार होगी लेकिन बैठक की बारंबारता प्रधान मजिस्ट्रेट द्वारा विस्तारित की जा सकेगी । राज्य सरकार भी विशेष या साधारण आदेश से सप्ताह में बैठकों की संख्या का विस्तार कर सकेगी ।</p> <p style="text-align: justify;">(8) वर्ष में बोर्ड के अध्यक्ष एवं सदस्यों की न्यूनतम तीन चौथाई उपस्थिति आवश्यक होगी ।</p> <p style="text-align: justify;">(9) बोर्ड का प्रत्येक सदस्य प्रत्येक बैठक में न्यूनतम पाँच घंटे उपस्थित रहेगा ।</p> <p style="text-align: justify;">(10) बोर्ड की कार्यवाही किसी एक सदस्य के कार्यवाही के किसी भी चरण में अनुपस्थित रहने पर अविधिमान्य नहीं होगी ।</p> <p style="text-align: justify;">(11) किसी मामला का अंतिम निष्पादन कम से कम दो सदस्यों के द्वारा होगा जिसमे एक प्रधान मजिस्ट्रेट होगा ।</p> <p style="text-align: justify;">(12) मामले में या अंतरिम आदेश यदि कोई हो में मतभिन्नता की स्थिति में बहुमत की राय अभिभावी होगी, परन्तु जहाँ ऐसा कोई बहुमत नहीं है वहाँ प्रधान मजिस्ट्रेट की राय अभिभावी होगी । ऐसी स्थिति में प्रधान मजिस्ट्रेट उन परिस्थितियों को अभिलिखित करेगा जिसके कारण प्रधान मजिस्ट्रेट को अंतिम निर्णय लेना पड़ा ।</p> <h3 style="text-align: justify;">बोर्ड के कार्य</h3> <p style="text-align: justify;">(1) बोर्ड अधिनियम के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित कार्य करेगा यथा:-</p> <p style="text-align: justify;">(क) विधि का उल्लघंन करने वाले किशोरों के मामलों का न्यायनिर्णयन एवं निपटान करना;</p> <p style="text-align: justify;">(ख) अधिनियम की धारा 23 से 28 के अधीन आने वाले अपराधों का सज्ञान लेना;</p> <p style="text-align: justify;">(ग) विधि का उल्लघंन करने वाले किशोरों के लिए कार्यरत संस्थाओं को मानिटर करना और ध्यान में आई कर्मियों के मामलों में बोर्ड के सुझावों के आधार पर सुधार के सबंध में अनुपालन सुनिश्चित करना;</p> <p style="text-align: justify;">(घ) यथास्थिति सबंधित सरकारी कर्मियों अथवा स्वैच्छिक सगंठनों के कार्यकर्ताओं द्वारा बोर्ड के किसी आदेश का अनुपालन न किए जाने के मामले पर विधि की सम्यक प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई करना;</p> <p style="text-align: justify;">(ड.) आवश्यक अवसंरचना या सुविधाएँ प्रदान अथवा सृजित करने के लिए जिला पदाधिकारियों एवं पुलिस को आवश्यक निर्देश जारी करना, ताकि इस अधिनियम की मूल भावना के अनुसार न्याय एवं उपचार के न्यूनतम मानक बनाए रखे जा सकें ।</p> <p style="text-align: justify;">(च) देखरेख और संरक्षण की जरूरत वाले मामलों का सबंध में समिति के साथ सम्पर्क बनाए रखना;</p> <p style="text-align: justify;">(छ) विधि की सम्यक प्रक्रिया के माध्यम से मामलों की त्वरित जाँच एवं निपटान को सुगम बनाने के लिए अन्य जिलों के बोर्डों का साथ सम्पर्क करना;</p> <p style="text-align: justify;">(ज) इस अधिनियम के कार्यान्वयन के दौरान उत्पन्न होने वाली अकल्पित परिस्थितियों से निपटने तथा किशोरों के सर्वोत्तम हित में ऐसी कठिनाईयों को दूर करने के लिए उपयुक्त कार्रवाई करना;</p> <p style="text-align: justify;">(झ) विधि का उल्लघंन करने वाले किशोरों के विषय में अपने समक्ष प्रस्तुत की गई तिमाही सूचना जिला, राज्य बाल संरक्षण इकाई एवं सबंधित राज्य सरकार तथा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट को भी अधिनियम की धारा 14 की उपधारा (2) के अधीन समीक्षा के लिए भेजना;</p> <p style="text-align: justify;">(ट) विधि का उल्लघंन करने वाले किशोरों के सबंध में राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर सौपें गए अन्य कार्य करना;</p> <p style="text-align: justify;">(ठ) बोर्ड किसी मीडिया के विरुद्ध कार्रवाई प्रारंभ करेगा जो विधि का उल्लघंन करने वाले किशोर से सबंधित किसी ऐसी बात को प्रकाशित करेगा जिससे किशोर की पहचान हो जाए;</p> <p style="text-align: justify;">(ड) यदि किशोर को माता-पिता/अभिभावक की देख-रेख में जमानत पर मुक्त नही किया जा सका हो तो बोर्ड किशोर को यथास्थिति संप्रेक्षण गृह में या किसी सुरक्षित स्थान में रखने का आदेश करेगा;</p> <p style="text-align: justify;">(ढ) (i) बोर्ड यह सुनिश्चित करेगा कि कोई बालिका सूर्यास्त और सूर्योदय के बीच पुलिस के प्रभार में न लिया जाए;</p> <p style="text-align: justify;">(ii) परन्तु यदि ऐसी परिस्थितियाँ आ जाए किऐसे समय में पुलिस को बालिका प्रभार लेना पड़े तो बोर्ड यह सुनिश्चित करे की वैसी बालिका को किसी योग्य महिला या उस बालिका के योग्य महिला रिश्तेदार या किसी सुरक्षित स्थान में अथवा संप्रेक्षण गृह में रखा जाए ।</p> <p style="text-align: justify;">(ण) जाँच के दौरान किसी चरण में यदि बोर्ड का समाधान हो जाए कि जाँच के प्रयोजनार्थ किशोर का उपस्थित रहना अनिवार्य नहीं है तो उसकी उपस्थिति से अभिमुक्ति प्रदान करते हुए जाँच की कार्रवाई किशोर के अनुपस्थिति में जारी रहेगा ।</p> <p style="text-align: justify;">(त) बोर्ड किसी जाँच का अंतिम निष्पादन परिवीक्षा पदाधिकारी/केस वर्कर से प्रतिवेदन लिए बिना नहीं करेगा ।</p> <p style="text-align: justify;">(थ) बोर्ड परिवीक्षा पदाधिकारी को सामाजिक जाँच करने और बोर्ड को देने का निदेश डे सकता है तथा यह भी निर्देशित कर सकता है कि किशोर की मनोवैज्ञानिक/ मनोचिकित्सा संबंधी समस्याओं के मामले में पेशेवर/विशेषज्ञ की राय ले, परन्तु बोर्ड पेशेवर को यह भी निदेशित कर सकता है कि वह विधि का उल्लघंन करने वाले बच्चे के संबंध में विशेष प्रतिवेदन न प्रस्तुत करें ।</p> <p style="text-align: justify;">(द) चिकित्सा महाविद्यालया/अस्पतालों के शिशु/मनोचिकित्सा विभाग पेशागत राय देने हेतु नाडेल एजेन्सी के रूप में अभिस्वीकृत किए जाएँगे ।</p> <p style="text-align: justify;">(2) सभी किशोरों के मामलों में किशोर न्याय बोर्ड निम्नांकित दिशा-निर्देशों का अनुपालन करेंगे:-</p> <p style="text-align: justify;">(क) पीड़ित बच्चे/गवाहों को न्यायालय की कार्यवाहियों के संबंध में उनकी भूमिका से अवगत कराया जाए ।</p> <p style="text-align: justify;">(ख) उनके विचार सुने जाएं और उनका सम्मान किया जाए ।</p> <p style="text-align: justify;">(ग) उन्हें कम से कम असुविधा हो और उनकी एकांतता का सम्मान किया जाए ।</p> <p style="text-align: justify;">(घ) कार्यवाही में विलम्ब को कम किया जाए ।</p> <p style="text-align: justify;">(ड.) पीड़ित बच्चा से आकर मक प्रश्न करने या प्रतिपरीक्षण करने से बचा जाए और यदि आवश्यक हो तो यह न्यायाधीश के माध्यम से किया जाय ।</p> <p style="text-align: justify;">(च) कमरे के अंदर विचारण की व्यवस्था हो ।</p> <p style="text-align: justify;">(छ) पीड़ित किशोर की पहचान सुरक्षित रहे ।</p> <p style="text-align: justify;">(ज) पीड़ित किशोर न्यायिक प्रक्रिया के लिए तैयार हो और यदि बच्चा न्यायालय जाने के लिए तैयार न हो तो अधिकथित के अभियोजन में हडबडी न की जाए ।</p> <p style="text-align: justify;">(झ) अनुसंधानकर्त्ता पीड़ित किशोर के चिकित्सीय परीक्षण की आवश्यकता अभिनिश्चित करे और जब परीक्षण कर लिया जाए तब यह सुनिश्चित करे कि बहु पुनर्परीक्षण से बचा जाए।</p> <p style="text-align: justify;">(ट) चिकित्सीय जाँच माता-पिता/अभिभावक/सामाजिक कार्यकर्त्ता/परामर्शी (काउंसेलर) की उपस्थिति में हो ।</p> <p style="text-align: justify;">(ठ) दुराचार की घटना के बाद, किशोर की गवाही सामाजिक कार्यकर्त्ता/परामर्शी की उपस्थिति में यथाशीघ्र अभिलिखित की जाए ।</p> <p style="text-align: justify;">(ड) जहाँ कहीं आवश्यक हो, पर्याप्त अनुवाद निर्वचन किए जाएँ तथा ऐसे अनुवादकों, निर्वचनकर्त्ताओं की सेवा ली जाए जो बच्चों के जरूरतों के प्रति संवेदनशील हों ।</p> <p style="text-align: justify;">(ढ) मानसिक रूप से पीड़ित किशोर के मामले में किशोर की ओर से गवाही सक्षम सेवा प्रदाता दें ।</p> <p style="text-align: justify;">(ण) पीड़ित किशोर/साक्षी की विशेष आवश्यक्ताओं का ध्यान रखा जाए ।</p> <p style="text-align: justify;">पुलिस एवं अन्य अभिकरणों द्वारा पेशी के पूर्व एवं पश्चात की जाने वाली कार्रवाई</p> <p style="text-align: justify;">(1) पुलिस अधिकारी, कानून के उल्लघंन के आरोपी किशोर को पकड़ते ही, इन सबका सूचित करेंगे;</p> <ul style="text-align: justify;"> <li>सबंध पुलिस थाणे के नामनिर्दिष्ट किशोर अथवा बाल कल्याण अधिकारी, ताकि वह इस मामले का प्रभार लें ।</li> <li>विधि का उल्लघंन के अभिकथित किशोर के माता-पिता या संरक्षक को उस किशोर के पकड़े जाने के साथ-साथ बोर्ड के पते, जहाँ किशोर को प्रस्तुत किया जाएगा, और उस तारीख, किशोर की भौतिक अवस्थिति एवं समय की सूचना देगा, जब माता-पिता या संरक्षक को बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत होना हो;</li> <li>सबंधित परिवीक्षा अधिकारी, जिससे कि वह किशोर की सामाजिक पृष्ठभूमि और अन्य पारिस्थितिक तथ्यों के बारे में ऐसी जानकारी प्राप्त कर सकें, जो कि बोर्ड के जाँच कार्य में सहायक हो ।</li> </ul> <p style="text-align: justify;">(2) किशोर के पकड़े जाने के तुरन्त पश्चात उसे बाल कल्याण अधिकारी को सौंपा जाएगा तथा वह अधिकारी अधिनियम की धारा 10 की उपधारा (1) के अनुसार किशोर को चौबीस घटें के भीतर बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत करेगा और जहाँ अधिनियम की धारा 63 की उपधारा (2) में अभिकथित उपबंधों के अनुसार ऐसा कोई किशोर या बाल कल्याण अधिकारी नामनिर्दिष्ट नही किया गया हो अथवा वह कुछ शासकीय कारणों से उपलब्ध न हो तो वहाँ किशोर को पकड़ने वाला पुलिस अधिकारी ही उसे बोर्ड के समक्ष अधिनियम की धारा 10 उपधारा-1 के अनुरूप 24 घंटे के अंदर प्रस्तुत करेगा ।</p> <p style="text-align: justify;">(3) बोर्ड की बैठक आयोजित न होने की दशा में विधि का कर करने वाले किशोर को अधिनियम की धारा 5 की उपधारा (2) के अधीन अधिकथित उपबंधो के अनुसार बोर्ड के किसी एक सदस्य के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा ।</p> <p style="text-align: justify;">(4) बोर्ड के किसी एक सदस्य के समक्ष किशोर को प्रस्तुत किए जाने पर प्राप्त आदेश का अनुसमर्थन बोर्ड की अगली बैठक में कराने की आवश्यकता होगी ।</p> <p style="text-align: justify;">(5) विधि का कर करने वाले किशोर को पकड़ने वाली पुलिस किसी भी दशा में उसे हवालात में नहीं भेजेगी या प्रभारी किशोर या बाल कल्याण अधिकारी को सौंपने में विलम्ब नहीं करेगी, यदि ऐसा कोई अधिकारी नामनिर्दिष्ट किया गया हो ।</p> <p style="text-align: justify;">(6) किसी जिले में सभी नामनिर्दिष्ट किशोर या बाल कल्याण अधिकारियों एवं विशेष किशोर न्याय पुलिस इकाई के सदस्यों की सूची, उनके सम्पर्क के ब्यौरे सहित प्रत्येक पुलिस थाणे में प्रमुख रूप से दर्शाई जाएगी ।</p> <p style="text-align: justify;">(7 ) पुलिस या किशोर अथवा बाल कल्याण अधिकारी विधि का उल्लघंन करने वाले किशोर के विषय में उपलब्ध सम्पूर्ण एवं तथ्यपरक सूचनाएँ एकत्र करेंगे और किशोर के माता-पिता या संरक्षकों से सम्पर्क करेंगे और उन्हें विधि का उल्लघंन करने वाले उस किशोर के व्यवहार की जानकारी देगें ।</p> <p style="text-align: justify;">(8) पुलिस या किशोर अथवा बाल कल्याण अधकारी, समाजिक कार्यकर्त्ता के सहयोग से प्रत्येक किशोर की केस डायरी में उसकी सामाजिक पृष्ठभूमि एवं उसे जिन परिस्थितियों में पकड़ा गया, एवं अभिकथित अपराध को भी अभिलिखित करेगा जिन्हें वह तत्काल बोर्ड को भेजेगा ।</p> <p style="text-align: justify;">(9) पुलिस या किशोर/बाल कल्याण अधिकारी किशोर को पकड़ने की अपनी शक्ति का प्रयोग केवल उन मामलों में करेंगे, जिनमें 5 वर्ष से अधिक का दण्ड दिया जा सकता है (जिन अपराधों के लिए वयस्कों को 5 वर्ष से अधिक कारावास का दण्ड दिया जा सकता है) ।</p> <p style="text-align: justify;">(10) ऐसे मामलों में, जहाँ ऐसा प्रतीत हो कि किशोर को पकड़ा जाना उसके हित में है, उन मामलों में पुलिस अथवा बाल कल्याण अधिकारी सबंधित किशोर को देखरेख एवं संरक्षण का जरुरतमन्द बालक मानते हुए उसके साथ व्यवहार करेंगे और उसे बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत करेंगे और प्रस्तुत करने के समय अपनी रिपोर्ट में किशोर की देख-रेख एवं संरक्षण की जरूरत को दर्शाएँगे तथा बोर्ड से इन नियमों के नियम 13 (1) (ख) के अंतर्गत उपयुक्त आदेश पारित करने का अनुरोध करेंगे ।</p> <p style="text-align: justify;">(11) अन्य सभी मामलों में जिनमें अपराध गंभीर प्रकृति के नहीं हों, (जिन अपराधों के लिए वयस्कों को 5 वर्ष से कम अवधि के कारावास का दण्ड दिया जा सकता है) तथा जहाँ किशोर के हित में उसे पकड़ा जाना आवश्यक नहीं हिया वहाँ पुलिस या किशोर अथवा बाल कल्याण अधिकारी उनके आरोप उनके बालक या प्रतिपाल्य द्वारा किए गए अभिकथित अपराध की प्रकृति के बारे में लगाए गए है उन अपराधों की प्रकृति तथा उस बालक की सामाजिक आर्थिक पृष्ठभूमि की सूचना बोर्ड को भेजी गई है, जिसे पश्चातवर्ती सुनवाई के लिए किशोर को बुलाने की शक्ति होगी ।</p> <p style="text-align: justify;">(12) राज्य सरकार केवल उन्हीं स्वैच्छिक संगठनो को मान्यता प्रदान करेगी, जो परिवीक्षा सेवाएँ, परामर्श, मामला संबंधित कार्य, सुरक्षित स्थान जैसी सेवाएँ प्रदान करने और पुलिस या विशेष किशोर न्याय पुलिस इकाई के किशोर अथवा बाल कल्याण अधिकारी के साथ सहयुक्त हो तथा जिनके पास संरक्षण अभिकरणों के रूप में वे क्षमताएँ, सुविधाएँ, विशेषज्ञता हो, जिनके द्वारा वे किशोर को पकड़े जाने के समय, किशोर की सामाजिक पृष्टभूमि एवं कथित अपराध के साथ-साथ जिन परिस्थितियों में किशोर को पकड़ा गया, उन परिस्थितियों की रिपोर्ट तैयार करने में पुलिस या जिन परिस्थितियों में किशोर को अधिकारी की सहायता कर सके बोर्ड के समक्ष किशोर को प्रस्तुत किए जाने तक उसकी देखरेख कर सकें और उस किशोर को चौबीस घंटे के भीतर बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत करने में पुलिस की सहायता कर सके ।</p> <p style="text-align: justify;">(13) पकड़े गए किशोरों तथा जितनी अवधि तक उन्हें पुलिस या प्रभारी किशोर अथवा बाल कल्याण अधिकारी या मान्यता प्राप्त स्वैच्छिक संगठन की देखरेख में रखा गया, उस अवधि के दौरान उन किशोरों को सुरक्षा तथा भोजन एवं अन्य मूलभूत सुविधाएँ प्रदान करने का दायित्व उनका होगा ।</p> <h3 style="text-align: justify;">आयु के निर्धारण में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया</h3> <p style="text-align: justify;">(1) किसी बालक या विधि का उल्लघंन करने वाले किशोर से सबंधित प्रत्येक मामले में, यथास्थिति, न्यायालय या बोर्ड इस नियमावली के नियम 19 में निर्दिष्ट समिति ऐसे बालक या विधि का उल्लघंन करने वाले किशोर की आयु का निर्धारण इस प्रयोजन के लिए आवेदन किए जाने की तारीख से 30 दिन के भीतर करेंगे ।</p> <p style="text-align: justify;">(2) न्यायालय या बोर्ड या समिति प्रथम दृष्टया किशोर या बालक होने का विनिश्चय, यथास्थिति, बालक या विधि का उल्लघंन करने वाले किशोर की शारीरिक बनावट अथवा दस्तावेजों, यदि उपलब्ध हों, के आधार पर करेगी तथा उसे, यथास्थिति संप्रेक्षण गृह या कारागार भेजेगी ।</p> <p style="text-align: justify;">(3) बालक या विधि का उल्लघंन करने वाले किशोर से सबंधित प्रत्येक मामले में, यथास्थिति, न्यायालय या बोर्ड या समिति आयु निर्धारण जाँच करने के लिए निम्नलिखित साक्ष्य प्राप्त करेंगे :-</p> <p style="text-align: justify;">(क) (I) मैट्रिक या समकक्ष प्रमाण पत्र, यदि उपलब्ध हो; तथा/अथवा</p> <p style="text-align: justify;">(II) जहाँ पहली बार गया (प्ले स्कूल छोड़ कर) उस स्कूल से जन्म प्रमाण पत्र और उसके उपलब्ध न होने पर;</p> <p style="text-align: justify;">(III) नगर निगम या नगरपालिका प्राधिकरण या पंचायत द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र; और</p> <p style="text-align: justify;">(ख) उपर्युक्त खण्ड (क) के (I), (II) अथवा (III) अथवा न्यायालय, परिषद या समिति आवश्यक समझती हो की अनुपल्ब्धता में ही सम्यक रूप से गठित चिकित्सा बोर्ड की राय ली जायेगी जो किशोर अथवा बालक की आयु का निर्धारण करेगा । यदि आयु का बिल्कुल सही निर्धारण न किया जा सकता हो तो, यथास्थिति, न्यायालय अथवा बोर्ड या समिति कारणों का अभिलेख करने हुए यदि आवश्यक समझे तो बच्चे अथवा किशोर को छ: महीने कम की आयु का लाभ डे सकती है और ऐसे किसी मामले में, यथास्थिति, ऐसे साक्ष्य अथवा चिकित्सा बोर्ड के अनुमान को ध्यान में रखे हुए आदेश पारित करते समय बोर्ड या न्यायालय या समिति किशोर या बालक की आयु के संबंध में निष्कर्ष तथा उपर्युक्त खण्ड (क) के उपखण्ड (I), (II) और (III) में विनिर्दिष्ट साक्ष्य अथवा इन तीनों की अनुपस्थिति में खण्ड (ख) में दर्शाए गए चिकित्सा बोर्ड के आयु संबंधी अनुमान को ऐसे बालक या विधि का उल्लघंन करने वाले किशोर की आयु के संबंध में साक्ष्य के रूप में दर्ज करेंगे ।</p> <p style="text-align: justify;">(4) सम्यक रूप से गठित बोर्ड अपनी चिकित्सीय राय सबंधित प्राधिकार को आदेश प्राप्ति की तिथि से एक सप्ताह के अन्दर सौंप देंगे ।</p> <p style="text-align: justify;">(5) यदि उपनियम (3) में विनिर्दिष्ट साक्ष्यों के आधार पर यह पाया जाता है कि अपराध करने की तारीख को बालक या विधि का उल्लघंन करने वाले किशोर की आयु 18 वर्ष से कम थी, तो यथास्थिति न्यायालय या बोर्ड या समिति लिखित आदेश पारित करेंगे जिसमें इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए किशोर या बालक की आयु अभिकथित होगी एवं यह घोषणा होगी कि वह किशोर है या नहीं और इस आदेश की प्रति ऐसे किशोर या सबंधित व्यक्ति को डी जाएगी ।</p> <p style="text-align: justify;">(6) इस नियमावली के प्रावधानों का दुरूपयोग न हो इसके लिए <a href="../../../../../../social-welfare/समाज-कल्याण">समाज कल्याण</a> विभाग, निदेशक, समाज कल्याण या सबंधित जिला के जिला पदाधिकारी पर्यवेक्षण गृह में रह रहे विधि का उल्लघंन करने वाले वैसे किशोरों, जो प्रत्यक्ष रूप से 18 वर्ष के ऊपर दिखते हों, के उम्र का सत्यापन, सम्यक रूप से गठित चिकित्सा बोर्ड के द्वारा करा सकेगी । उक्त चिकित्सा बोर्ड उम्र सत्यापन का अंतिम प्रतिवेदन अधिकारी सत्यापन के आदेश की तिथि से दो सप्ताह के अन्दर भेज देंगे ।</p> <h3 style="text-align: justify;">प्रस्तुत करने के पश्चात बोर्ड द्वारा की जाने वाली कार्यवाहियाँ</h3> <p style="text-align: justify;">(1) अधिनियम की धारा-10 के उपधारा -2 के अधीन बनाई गई नियमावली के अनुसार बोर्ड परिवीक्षा पदाधिकारी को फ़ार्म-III में आदेशित करेगा या अन्यथा सामाजिक अनुसंधान कराकर किशोर के चरित्र एवं पूर्व इतिहास का प्रतिवेदन के लिए करेगा ताकि उसे किसी संस्थान में या परिवार के साथ रखने या अन्यथा अधिनियम के अधीन अन्यथा अनुज्ञेय स्थान पर रखे जाने के सर्वोतम तरीका का निर्धारण किया जा सके ।</p> <p style="text-align: justify;">(2) परिवीक्षा पदाधिकारी अपने प्रतिवेदन में किशोर का पुनर्वास से सबंधित सलाह बच्चे के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए देगा । परिवीक्षा पदाधिकारी के पर्यवेक्षण में किशोर की नियमित रूप से मानिटरीगं की जाएगी तथा बोर्ड को उनकी गतिविधि की अद्यतन जानकारी दी जाएगी ।</p> <p style="text-align: justify;">(3) किशोर का सर्वोत्तम हित में बोर्ड निश्चित तौर पर परिवीक्षा पदाधिकारी, या ऐसे अन्य व्यक्ति या अभिकरण जो सबंधित किशोर के मामले से प्रत्यक्षत: सम्बद्ध से एक समय सीमा के अन्दर प्रतिवेदन न मांगे ।</p> <p style="text-align: justify;">(4) बोर्ड किशोर से सबंधित मामले की सुनवाई यथासंभव कमरे के अन्दर कर सकेगा तथा बोर्ड कार्यवाही के समय सबंधित किशोर या उनके प्रतिनिधि या उस मामले से सबंधित व्यक्ति को ही उपस्थित रहने की अनुमति प्रदान कर सकेगा । अन्य किसी को जिसका उस बच्चा विशेष के मामले से सबंधित नहीं है, उन्हें उस कमरे में उपस्थित रहने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए ।</p> <p style="text-align: justify;">(5) दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 के प्रावधानों के प्रतिकूल, जाँच किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण), अधिनियम, 2000 की धारा – 14 के अनुसार ही की जाएगी ।</p> <p style="text-align: justify;">(6) किशोर को बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किए जाने पर उस किशोर को प्रस्तुत करने वाले अधिकारियों, व्यक्तियों, अभिकरणों द्वारा सबंधित किशोर की सामाजिक पृष्ठभूमि तथा जिन परिस्थितियों में उसे पकड़ा गया, उन परिस्थितियों एवं अभिकथित अपराध करने के आरोप का ब्यौरा दर्शने वाली रिपोर्ट का बोर्ड पुनर्विलोकन करके प्रथम संक्षिप्त जाँच में उसी दिन निम्नलिखित आदेश पारित करेगा :-</p> <p style="text-align: justify;">(क) यदि किशोर द्वारा विधि के उल्लघंन का साक्ष्य निराधार पाया जाता हो अथवा वह किशोर विधि का उल्लघंन करने के छोटे-मोटे मामले में शामिल रहा हो तो मामले का निष्पादित कर देने का;</p> <p style="text-align: justify;">(ख) किशोर को बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत करते समय पुलिस द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में यदि किशोर को स्पष्ट शब्दों में देखरेख एवं संरक्षण का जरुरतमन्द माना गया हो तो उस किशोर से सबंधित मामले को समिति को अंतरित कर देने का;</p> <p style="text-align: justify;">(ग) किशोर को यथास्थिति, उपयुक्त व्यक्तियों या उपयुक्त संस्थाओं या परिवीक्षा अधिकारियों की देखरेख या अभिरक्षा में छोड़े जाने का प्रपत्र I में आदेश, इस निदेश के साथ कि aअगली तारीख को जाँच के लिए किशोर को हाजिर किया या कराया जाए;</p> <p style="text-align: justify;">(घ) प्रपत्र II में दिए गए आदेशानुसार किशोर के किसी गंभीर अपराध में लिप्त होने के मामलों में संप्रेक्षण गृह या उपयुक्त संस्था में रखना;</p> <p style="text-align: justify;">(ड.) जिन मामलों में जाँच कार्य के लंबित रहते किशोर को छोड़ा जा रहा हो, उन सभी मामलों में बोर्ड सुनवाई की जो अगली तारीख अधिसूचित करेगा, वह प्रथम सक्षिप्त जाँच के पश्चात अगले 15 दिनों के ही भीतर ही होगी और बोर्ड प्रपत्र – III में जारी आदेश के द्वारा सबंध परिवीक्षा अधिकारी/सामाजिक कार्यकर्ता से सामजिक अन्वेषण रिपोर्ट मांगेगा।</p> <h3 style="text-align: justify;">जाँच</h3> <p style="text-align: justify;">(1) बोर्ड निष्पक्ष एवं त्वरित जाँच सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित उपाय करेगा अर्थात: -</p> <p style="text-align: justify;">(क) जाँच कार्य आरंभ करते समय, बोर्ड यह समाधान करेगा कि विधि का उल्लघंन करने वाले किशोर के साथ पुलिस द्वारा या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा जिसके अंतर्गत अधिवक्ता या परिवीक्षा अधिकारी भी है दुर्व्यवहार नहीं किया गया है और ऐसा कोई दुर्व्यवहार किया गया हो तो बोर्ड सुधारात्मक उपाय करेगा;</p> <p style="text-align: justify;">(ख) इस अधिनियम के अधीन सभी मामलों में कार्यवाहियाँ यथासंभव साधारण ढंग से की जाएँगी तथा यह सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया जाएगा कि जिस किशोर के विरुद्ध कार्यवाही शुरू की गयी है, उसे कार्यवाही के दौरान बाल अनुकूल वातावरण मिले;</p> <p style="text-align: justify;">(ग) बोर्ड के समक्ष लाए गए प्रत्येक किशोर को उसे सुने जाने का अवसर दिया जाएगा और वह जाँच में शामिल होगा;</p> <p style="text-align: justify;">(घ) छोटे-मोटे अपराधों के मामलों का निपटान यदि विशेष किशोर न्याय पुलिस इकाई अथवा पुलिस थाने में ही न किया जा सका है, तो उन मामलों को बोर्ड संक्षिप्त कार्यवाही अथवा जाँच के माध्यम से एक माह के भीतर निपटाएगा, जबकि जघन्य अपराधों के मामलों में जिनमें 5 वर्ष या इससे अधिक अवधि के कारावास का दण्ड दिया जा सकता हो, उन मामलों में विस्तृत जाँच प्रक्रिया चलाई जा सकेगी;</p> <p style="text-align: justify;">(ड.) गंभीर अपराधों से सबंधित मामलों की जाँच में भी बोर्ड सुनवाई की वही प्रक्रिया अपनाएगा, जो सम्मन वाले मामलों के विचारण में अपनाई जाती है ।</p> <p style="text-align: justify;">(2) विधि का उल्लघंन करने वाले किशोर से सबंधित जाँच के दौरान गवाहों के परीक्षण के समय बोर्ड इस तथ्य को ध्यान में रखेगा कि जाँच कार्य पूर्णत: प्रतिकूल कार्यवाही के रूप में न किया जाए तथा बोर्ड, भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1872 का 1) की धारा 165 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करेगा, ताकि किशोर से प्रश्न किए जा सकें और किशोर के पुनरुद्धार संबंधी अधिकारों के अनुकूल उपधारणाओं के आधार पर कार्यवाही की जा सके।</p> <p style="text-align: justify;">(3) विधि का उल्लघंन करने वाले किशोर के परीक्षण करने व उसका कथन अभिलिखित करने के समय बोर्ड किशोर से बाल अनुकूल रीति में सवाल-जवाब करेगा, ताकि वह किशोर सहज हो सके और जिन अपराधों का आरोप उस पर लगाया गया है, न केवल उनके बारे में, बल्कि जिस घर, सामाजिक परिवेश में एवं प्रभाव के अधीन वह रहा, उन सभी के विषय में तथ्यों एवं परिस्थितियों का वर्णन बिना किसी भय के कर सके ।</p> <p style="text-align: justify;">(4) व्यान का अंतर्वस्तु और परिखित जिसमें वह दिया गया हो को ध्यान में रखते हुए परीक्षण अभिलेखन बोर्ड जैसा उचित समझे उस प्रारूप में कर सकता है ।</p> <p style="text-align: justify;">(5) विधि का उल्लघंन करने वाले किशोर के विषय में किसी निष्कर्ष पर पहुँचने के लिए बोर्ड, उस किशोर के पकड़े जाने की परिस्थितियाँ एवं उसके कथित अपराध का ब्यौरा दर्शाने वाली पुलिस की रिपोर्ट तथा बोर्ड के प्रपत्र- III में जरी आदेशानुसार परिवीक्षा अधिकारी या स्वैच्छिक संगठन द्वारा प्रपत्र – IV में प्रस्तुत की गई सामाजिक अन्वेषण रिपोर्ट और विभिन्न पक्षों द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों पर विचार कर सकेगा ।</p> <p style="text-align: justify;">(6) बोर्ड द्वारा प्रत्येक जाँच कार्यवाही प्रथम संक्षिप्त जाँच की तारीख से चार मास के भीतर पूरी की जाएगी और केवल उन अपवादात्मक मामलों में बोर्ड कारण को अभिलिखित करते हुए जाँच कार्य की अवधि दो मास के लिए बढ़ा सकेगा, जिनमें विभिन्न देशों के नागरिक शामिल हों, आरोपियों की संख्या ज्यादा हो तथा गवाहों को प्रस्तुत करने में अनापेक्षित विलंब हो ।</p> <p style="text-align: justify;">(7) गंभीर अपराधों के मामलों को छोडकर अन्य सभी मामलों में चार या छह माह से अधिक विलंब होने पर कार्यवाही समाप्त हो जाएगी ।</p> <p style="text-align: justify;">(8) जिन मामलों में किशोर पर गंभीर अपराध करने के आरोप लगाए जाने के कारण कार्यवाही में छह मास से अधिक देरी होती है तो बोर्ड मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अथवा मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट को आवधिक रिपोर्ट भेजेगा, जिसमें देरी का कारण तथा मामले को शीध्र निपटाने हेतु किए जा रहे उपायों का ब्यौरा दर्शाया जाएगा ।</p> <h3 style="text-align: justify;">विधि सहायता</h3> <p style="text-align: justify;">(1) बोर्ड के समक्ष कार्यवाही ऐसे वातावरण में की जाएगी जो प्रतिकूल न हो और जाँच प्रक्रिया के दौरान परामर्श एवं नि:शुल्क विधिक सहायता के अधकार जैसे सभी प्रक्रियाओं को ध्यान में रखा जाएगा ।</p> <p style="text-align: justify;">(2) बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार “विधि का उल्लघंन करने वाले किशोर” को कानूनी सेवा प्रदान करने हेतु अधिवक्ता को नामनिर्दिष्ट करेगा । उनकी सेवा किशोर को शोषण एवं दुर्व्यवहार से राहत दिलाने के लिए भी प्राप्त की जा सकेगी ।</p> <p style="text-align: justify;">(3) बोर्ड यह सुनिश्चित करेगा कि जिला बाल संरक्षण इकाई तथा राज्य विधिक सहायता सेवा प्राधिकरण के विधि अधिकारी विधि का उल्लघंन सरने वाले सभी किशोरों को नि:शुल्क विधिक सहायता सेवाएँ प्रदान करेंगे ।</p> <p style="text-align: justify;">(4) जिला बाल संरक्षण इकाई तथा राज्य विधिक सहायता सेवा प्राधिकरण के विधि अधकारियों का यह दायित्व होगा कि वे बोर्ड द्वारा मांगे जाने पर अपनी विधिक सेवाएँ प्रदान करें ।</p> <p style="text-align: justify;">(5) बोर्ड विधि का उल्लघंन करने वाले किशोरों के माता-पिता से संपर्क करने था उन किशोरों के विषय में सामाजिक एवं पुनर्वासात्मक सूचना प्राप्त करने जैसे अर्धविधिक कार्यों के लिए छात्र विधिक सेवा स्वयंसेवियों और गैर सरकारी संगठनो के स्वयंसेवियों को अभिनियोजित कर सकेगा ।</p> <p style="text-align: justify;">(6) बोर्ड ऐसे किसी मीडिया के विरुद्ध कार्रवाई प्रारंभ करेगा जो विधि का उल्लघंन करने वाले किशोर से सबंधित किसी ऐसी बात को प्रकाशित करे जो किशोर के पहचान को इंगित करता हो ।</p> <p style="text-align: justify;">(7) बोर्ड जाँच के दौरान किशोर की उपस्थिति को उन्योचित करते हुए किशोर के अनुपस्थिति में जाँच की कार्यवाही आगे बढ़ा सकेगा ।</p> <p style="text-align: justify;">(8) बोर्ड किशोर इ मनोचिकित्सीय/मनोवैज्ञानिक समस्याओं के बारे में विशेषज्ञ राय प्राप्त कर सकेगा ।</p> <h3 style="text-align: justify;">जाँच कार्य की समाप्ति एवं निपटान के विकल्प</h3> <p style="text-align: justify;">(1) बोर्ड सभी जाँच कार्य चार मास की निर्धारित अवधि के भीतर समाप्त करेगा तथा अभिकथित अपराध में किशोर की संलिप्तता पाए जाने पर अधिनियम की धारा 15 में उल्लिखित निपटान के संबंध में सात आदेशों में से कोई एक आदेश पारित करेगा ।</p> <p style="text-align: justify;">(2) कोई भी आदेश पारित करने के पूर्व, बोर्ड परिवीक्षा अधिकारी या किसी मान्यता प्राप्त संगठन द्वारा दिये गये आदेश के आलोक में तैयार की गई सामाजिक अन्वेषण रिपोर्ट प्राप्त करेगा और रिपोर्ट के निष्कर्षों पर विचार करेगा ।</p> <p style="text-align: justify;">(3) बोर्ड द्वारा पारित सभी निपटान आदेशों में, विधि का उल्लघंन करने वाले किशोर के लिए अनिवार्य रूप से वैयक्तिक देखरेख योजना को शामिल किया जाएगा । यह वैयक्तिक देखरेख योजना सबंधित किशोर एवं यदि संभाव हो तो उसके परिवार से विचार-विमर्श के आधार पर परिवीक्षा अधिकारी द्वारा तैयार की जाएगी ।</p> <p style="text-align: justify;">(4) जिन मामलों में बोर्ड सबंधित किशोर को सलाह अथवा ताकीदकर या सामूहिक विचार विनिमय में किशोर की भागीदारी के पश्चात निर्मुक्त करता है या उसे सामुदायिक सेवा करने का निर्देश देता है, उन मामलों में बोर्ड जिला या राज्य बाल संरक्षण इकाई या राज्य सरकार को ऐसे वैयक्तिक परामर्श सामूहिक परामर्श एवं सामुदायिक सेवा की व्यवस्था कराने का आवश्यक निर्देश भी देगा ।</p> <p style="text-align: justify;">(5) जिन मामलों में बोर्ड किसी विधि का उल्लघंन करने वाले किशोर को परिवीक्षा पर छोड़ते हुए उसे उसके माता-पिता या संरक्षक या किसी उपयुक्त व्यक्ति की देखरेख में रखे जाने क निर्देश देता है, उन मामलों में जिस व्यक्ति की देखरेख में उस किशोर को रखा गया, उस व्यकित को प्रपत्र –V में यह लिखित वचनपत्र प्रस्तुत करना होगा कि अधिकतम तीन वर्षो तक वह किशोर का अच्छा व्यवहार एवं कल्याण सुनिश्चित करेगा ।</p> <p style="text-align: justify;">(6) बोर्ड विधि का उल्लघंन करने वाले किशोर को प्रपत्र –VI में प्रतिभूति के बिना मुचलके पर छोड़ने का निर्णय ले सकेगा ।</p> <p style="text-align: justify;">(7) यदि विधि का उल्लघंन करने वाले किशोर को उपयुक्त संस्था या विशेष गृह में रखा जाता है तो बोर्ड इस बात का ध्यान रखेगा कि वह उपयुक्त संस्था य विशेष गृह उस किशोर के माता-पिता अथवा संरक्षण के निवास स्थान के ज्यादा के ज्यादा निकट हो ।</p> <p style="text-align: justify;">(8) जिस मामले में बोर्ड विधि का उल्लघंन करने वाले किशोर को परिवीक्षा पर निर्मुक्त करता है और उसे उसके माता-पिता या संरक्षक या किसी उपर्युक्त व्यक्ति की देखरेख में रखता है, उस मामले में बोर्ड यह आदेश दे सकेगा कि उस किशोर को परिवीक्षा अधिकारी की निगरानी में रहना होगा, निगरानी की अवधि अधिकतम 3 वर्ष होगी ।</p> <p style="text-align: justify;">(9) जिस मामले में बोर्ड यह विनिश्चय करता है कि विधि का उल्लघंन करने वाले किशोर को देखरेख और संरक्षण का जरुरतमन्द बालक माना जाए, उस मामले में बोर्ड ऐसे किशोर को उपर्युक्त देखरेख संरक्षण एवं पुनर्वास के लिए निकटतम समिति के समक्ष प्रस्तुत किए जाने का आवश्यक आदेश देगा ।</p> <p style="text-align: justify;">(10) जहाँ बोर्ड को ऐसा प्रतीत होता है कि विधि का उल्लघंन करने वाले किशोर ने परिवीक्षा की शर्तों की अनुपालन नहीं किया है, उस मामले में बोर्ड सबंधित किशोर को विशेष गृह में निरुद्धकिए जाने का आदेश दे सकेगा ।</p> <p style="text-align: justify;">(11) जहाँ विधि का उल्लघंन करने वाले किशोर की आयु 16 वर्ष हो गई है तथा उसके द्वारा किया गया अपराध इतना गंभीर है कि बोर्ड को यह विशवास है कि उस किशोर को विशेष गृह में रखा जाना न तो स्वयं उसके और न ही उस विशेष गृह में रहने वाले अन्य किशोरों के हित में है, उस मामले में बोर्ड सबंधित किशोर को सुरक्षित स्थान पर सर्वाधिक उपयुक्त ढंग से रखे जाने का आदेश देगा ।</p> <p style="text-align: justify;">(12) विधि का उल्लघंन करने वाले विशेष श्रेणी के किशोरों को विशेष गृह के स्थान पर अन्य किसी सुरक्षित स्थान पर निरुद्ध करने के अनुपालन की व्यवस्था राज्य सरकार करेगी ।</p> <p style="text-align: justify;">(13) किसी भी मामले में किसी किशोर को निरुद्ध किए जाने की अवधि अधिनियम की धारा 15 की उपधारा (1) के खण्ड (छ) में उपबधित अवधि से ज्यादा नही होनी चाहिए ।</p> <h3 style="text-align: justify;">विधि का उल्लघंन करने वाले किशोरों हेतु संस्थाएँ</h3> <p style="text-align: justify;">(1) राज्य सरकार स्वयं अथवा मान्यताप्राप्त स्वैच्छिक संगठन से एकरारनामा कर लड़को और लड़कियों के लिए अपेक्षानुसार हरेक जिला में या जिलों के समूह में अलग-अलग संप्रेक्षण गृह अथवा विशेष गृह स्थापित करेंगी ।</p> <p style="text-align: justify;">(2) संप्रेक्षण गृह अथवा कीशेष गृह 12 वर्ष तक की आयु के 13 -15 वर्ष आयु-वर्ग के तथा 16 या इससे अधिक आयु के लडकों और लड़कियों के लिए अलग-अलग आवासीय सुविधाएँ उपलब्ध कराएंगे ।</p> <p style="text-align: justify;">(3) प्रत्येक संस्था अपने कर्मचारियों, वहाँ रहने वाले किशोरों और बालकों, दोनों के उपयोग के लिए राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियम, यदि कोई हो, की प्रति रखेगी ।</p> <p style="text-align: justify;">(4) राज्य सरकारें, नियम का सरलीकृत और बालोपयोगी रूपान्तर क्षेत्रीय भाषाओं में तैयार करवाकर उन्हें उपलब्ध कराएगी ।</p> <p style="text-align: justify;">(5) विधि का उल्लघंन करने वाले किशोरों को इस अधिनियम और राज्य के नियमों के उपबंधो के अनुसार सभी सुविधाएँ और सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी और उनका अनुरक्षण किया जाएगा।</p> <h3 style="text-align: justify;">निर्मुक्ति</h3> <p style="text-align: justify;">(1) अधीक्षक विधि का उल्लघंन करने वाले ऐसे किशोरों का एक रोस्टर तैयार करेगा, जिन्हें वहाँ रहने का अवधि की समाप्ति के पश्चात बोर्ड के आदेशानुसार रिहा किया जाना है ।</p> <p style="text-align: justify;">(2) निर्मुक्ति के कम से कम तीन माह पूर्व सबंधित अधीक्षक, परिवीक्षा अधिकारी अथवा बाल कल्याण अधिकारी अथवा मामले का कार्यकर्त्ता द्वारा प्रत्येक मामले को इस नियमावली के नियम 63 के अधीन गठित प्रबंध समिति के समक्ष रखा जाएगा, ताकि किशोर की निर्मुक्ति और निर्मुक्ति के पश्चात समाज की मुख्य धारा में उसका प्रवेश सुनिश्चित किया जा सके ।</p> <p style="text-align: justify;">(3) निर्मुक्ति, वैयक्तिक देखरेख योजना के अधीन तैयार निर्मुक्ति-पूर्व और निर्मुक्ति के पश्चात योजना तथा इस नियमावली के नियम-62 के अधीन गठित प्रबंध-समिति द्वारा समय-समय पर समीक्षित योजना के अनुसार की जाएगी तथा निर्मुक्ति के सभी मामलों में निर्मुक्ति की तारीख से काफी पहले आवश्यक कार्रवाई और तैयारी शुरू कर दी जाएगी जिसमें निर्मुक्ति के पश्चात परिवीक्षा पदाधिकारी द्वारा दो वर्षों तक अनुवर्ती पर्यवेक्षण की तैयारी भी शामिल होगी ।</p> <p style="text-align: justify;">(4) किशोर की निर्मुक्ति की सूचना और निर्मुक्ति की सही तारीख की सूचना माता-पिता अथवा संरक्षक को निर्मुक्ति की तारीख पर किशोर को ले जाने के लिए संस्था में उक्त तारीख को आमंत्रित किया जाएगा ।</p> <p style="text-align: justify;">(5) यदि माता-पिता अथवा संरक्षक निर्धारित तारीख को किशोर को ले जाने के लिए नहीं आ जाते हों तो उसे संस्था के मार्गरक्षी द्वारा ले जाया जाएगा तथा लड़की को महिला मार्गरक्षी द्वारा ले जाया जाएगा जो उसे उनके माता-पिता/अभिभावक की अभिरक्षा में सुपुर्द कर देगा।</p> <p style="text-align: justify;">(6) किशोर की निर्मुक्ति या निर्मोचन के समय किशोर को कपड़ों तथा प्रसाधन का जरूरी सामान देगा ।</p> <p style="text-align: justify;">(7) यदि किशोर का कोई संरक्षक या माता-पिता नहीं है तो उसे किसी परवर्ती देखभाल सगंठन/<a href="../../../../../../e-governance/online-legal-services/92e93992494d93592a94293094d923-90592793f92893f92f92e/92c91a94d91a94b902-938947-91c941940-90592793f92893f92f92e/91593f93694b930-92894d92f93e92f-90592793f92893f92f92e-2015/92c93e932-91593294d92f93e923-93892e93f92493f">बाल कल्याण समिति</a> के पास अथवा उसका रोजगार लग जाने की स्थिति में उस व्यक्ति के पास जिसने किशोर को नियोजन में लिया है भेजा जाए ।</p> <p style="text-align: justify;">(8) लड़कियों की संस्था का प्रभारी अधिकारी लड़की की सहमति और बोर्ड के अनुमोदन के अधीन, अठारह वर्ष से अधिक आयु की लड़की को सक्षम प्राधिकारी द्वारा समय-समय पर अभिकथित प्रक्रिया के अनुसार परवर्ती देखरेख कार्यकर म में प्रवेश दिलाकर या उसे कोई लाभदायक रोजगार या नौकरी दिलाकर या उसका विवाह कराकर उसे समाज की मुख्यधारा में लाने में उसकी सहायता कर सकता है ।</p> <p style="text-align: justify;">(9) अधीक्षक किसी किशोर का निरोध की अवधि की समाप्ति पर प्रपत्र-VII में निर्मोचन का आदेश देगा और बोर्ड एवं निदेशक, समाज कल्याण को सात दिनों के अंदर की गई कार्रवाई की सूचना देगा और यदि निर्मुक्ति की तारीख रविवार को या किसी सार्वजनिक अवकाश के दिन पड़ती हो तो किशोर को उससे एक दिन पश्चात निर्मोचित किया जाएगा और निर्मोचन रजिस्टर में इस आशय की प्रविष्टि की जाएगी । यदि अधीक्षक किशोर की निर्मुक्ति नियत तिथि को कराने में असफल रहता/रहती हो या आदेश के कार्यान्वयन में असफल रहता/रहती हो तो वह विभागीय कार्यवाही सहित अनुशासनिक कार्रवाई का दायी होगा ।</p> <p style="text-align: justify;">(10) उपर्युक्त मामलों में, अधीक्षक, राज्य अथवा जिला बाल संरक्षण इकाई अथवा राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित दरों पर जीवन निर्वाह हेतु धन और यथास्थिति रेल अथवा सड़क या दोनों के किराये का भुगतान करने का आदेश देगा ।</p> <p style="text-align: justify;">(11) उपर्युक्त मामलों में, अधीक्षक किशोर को कोई कार्य या व्यवसाय प्रारंभ करने के लिए यथावश्यक लघु औजार डे सकता है, लेकिन उनका अधिकतम मूल्य निर्मुक्ति उपरांत योजना के एक भाग के रूप में संस्था द्वारा निर्धारित मूल्य से अधिक नहीं होगा ।</p> <p style="text-align: justify;">(12) जहाँ विधि का उल्लघंन करनेवाला किशोर की मुक्ति के पश्चात जाने हेतु कोई स्थान नहीं हो या कोर्स पूरा होने के पश्चात एवं संस्थान में ठहरने हेतु अवधि समाप्त होने पर, अधीक्षक, सक्षम प्राधिकार के अनुमोदन के अध्यधीन, उसे कोई अन्य उपयुक्त व्यवस्था होने तक ठहरने की अनुमति दे सकेगा या उसे किसी अन्य उत्तर रक्षा गृह में स्थानांतरित किया जा सकेगा ।</p> <h3 style="text-align: justify;">अधिनियम की धारा 21, 22, 23, 24, 25, और 26 के संबंध में अपनायी जाने वाली प्रक्रिया</h3> <p style="text-align: justify;">(1) अधिनियम की धारा 21 के अधीन अभिकथित उपबंधों के उल्लघंन की दशा में:</p> <p style="text-align: justify;">(क) बोर्ड द्वारा प्रकाशन अथवा इलेक्ट्रोनिक प्रचार-माध्यमों द्वारा ऐसे उल्लघंन का संज्ञान लिया जाएगा और अधिनियम की धारा 21 की उपधारा (2) में उल्लिखित उपबंधों के अनुसार आवश्यक जाँच शुरू की जाएगी तथा उपयुक्त आदेश पारित किए जाएँगे और जहाँ राष्ट्रीय अथवा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने अधिनियम की धारा 21 के अधीन उल्लघंन का स्व-प्रेरणा से संज्ञान लिया है, वहाँ आयोग संबंधित जिले या राज्य के जिला अथवा राज्य बालक संरक्षण इकाई को यह निर्देश देते हुए सूचित करेगा कि बोर्ड के माध्यम से आवश्यक कार्रवाई की जाए ।</p> <p style="text-align: justify;">(2) विधि का उल्लघंन करने वाले किशोर अथवा बालक के भाग जाने की दशा में चौबीस घंटे के भीतर निम्नलिखित कार्रवाई की जाएगी:-</p> <p style="text-align: justify;">(क)संस्था के अधीक्षक उस क्षेत्र के पुलिस स्टेशन या विशेष किशोर पुलिस इकाई को किशोर अथवा बालक के विवरण सहित एक रिपोर्ट तत्काल भेजेगा, जिसके साथ उसका पहचान चिह्न और फोटो भेजा जाएगा और रिपोर्ट की एक-एक प्रति बोर्ड, जिला बालक संरक्षण इकाई और अन्य संबंधित प्राधिकारियों को भी भेजी जाएगी ।</p> <p style="text-align: justify;">(ख) आश्रय गृहों अथवा ड्राप इन सेंटरों से भिन्न संस्थाओं के अधीक्षक गार्डों को अथवा सबंधित कर्मचारियों को किशोर की तलाश में ऐसे स्थानों, जैसे रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों तथा अन्य स्थानों पर भेजेगा, जहाँ उसके जाने की संभावना हो सकती है;</p> <p style="text-align: justify;">(ग) माता-पिता अथवा संरक्षकों को बच्चे के ऐसे भाग जाने के बारे में तत्काल सूचित किया जाएगा; और</p> <p style="text-align: justify;">(घ) आश्रय गृह अथवा ड्रापइन सेंटरों से भिन्न संस्था का प्रभारी अधिकारी बच्चे के भाग जाने के मामले की जाँच करेगा और बोर्ड अथवा समिति और सबंधित प्राधिकारियों को अपनी रिपोर्ट भेजेगा और यह रिपोर्ट इन नियमावली के नियम 63 के अधीन गठित प्रबंधन समिति की आगामी बैठक में पुनर्वलोकन के लिए रखी जाएगी ।</p> <p style="text-align: justify;">(3) विधि का उल्लघंन करने वाले किशोर अथवा बालक के खिलाफ अपराध, जो धारा 23, धारा 25 और धारा 26 में निर्देष्ट हैं, दण्ड प्रक्रिया सहिता, 1973 (1974 का 2) के उपबंधों के अधीन संज्ञये होने के साथ-साथ या तो जमानतीय या अजमानतीय होंगे और ये कार्यविधियाँ तदनुसार पुलिस, बोर्ड तथा सबंधित प्राधिकारियों और अधिकारियों पर लागू होगी ।</p> <p style="text-align: justify;"><strong>स्रोत: समाज कल्याण विभाग,बिहार सरकार</strong>।</p> </div>