परिचय विकसित बिहार के सात निश्चय में हर घर नल का जल निश्चय अन्तर्गत सभी ग्राम पंचायतों के सभी वार्डों में मुख्यमंत्री पेयजल निश्चय योजना के क्रियान्वयन का उद्देश्य ग्राम के सर्वांगीण विकास की राह को प्रशस्त करना है। इस लक्ष्य को सामुदायिक सहभागिता से ग्राम पंचायत द्वारा क्रियान्वित कराते हुए वर्ष 2019-20 तक प्राप्त करना है। इस योजना अन्तर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में पाइप द्वारा शुद्ध पेयजल की आपूर्ति हेतु ग्राम पंचायतों द्वारा जलापूर्ति की छोटी-छोटी योजनाएं क्रियान्वित की जाएंगी। इस योजना के लिए स्थानीय क्षेत्रों के आवश्यकतानुसार मानक प्राक्कलन तैयार किये गये हैं। इसके आधार पर ग्राम पंचायतों के वार्ड को सामान्यतः एक इकाई मान कर प्रत्येक वार्ड के लिए एक योजना तैयार की जाएगी। योजना के अंतर्गत, लगभग 70 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन की दर से पानी उपलब्ध कराया जाएगा। इसी मानक के आधार पर योजना की रूपरेखा तैयार की जाएगी। पंचायती राज विभाग द्वारा इस योजना का कार्यान्वयन राज्य की 5013 ग्राम पंचायतों (जो जल-गुणवत्ता प्रभावित नहीं हैं) में किया जाएगा। वैसे सभी ग्राम पंचायत क्षेत्रों में, जहाँ पानी में फ्लोराईड, आर्सेनिक एवं लौह (आयरन) संबंधी अशुद्धियाँ हैं या जहाँ पूर्व से ही लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, बिहार द्वारा इन्हें विश्व बैंक परियोजना/डी0एफ0आई0डी0 सम्पोषित योजना/पाईप जलापूर्ति योजना (Piped Water Supply Scheme) के तहत आच्छादित कर पाईप द्वारा पेयजल की आपूर्ति की जा रही है, हर घर नल का जल संबंधी योजना लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) द्वारा क्रियान्वित की जायेगी। मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना को 14वें वित्त आयोग की अनुशंसा पर प्राप्त होने वाले बुनियादी अनुदान (Basic Grant) की राशि, पंचम राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा पर प्राप्त होने वाली प्रतिनिधायन की राशि तथा राज्य योजना मद से पंचायती राज विभाग द्वारा ग्राम पंचायतों को आवंटित राशि का अभिसरण कर क्रियान्वित किया जायेगा। मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पाईप से शुद्ध पेयजल की सतत उपलब्धता पूरे वर्ष सुनिश्चित करना, जल जनित बीमारियों को कम करना, ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के जीवन स्तर को सुधारना, पेयजल वितरण प्रणाली के संचालन एवं रख-रखाव में पंचायत/वार्ड की जबावदेही तथा समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना के अंतर्गत वार्डों का चयन योजना के तहत ग्राम पंचायत के सभी वार्डों की स्थिति आकलन करते हुए योजनाओं का चयन वार्ड सभा एवं ग्राम सभा के माध्यम से ग्राम पंचायतों द्वारा किया जायेगा। ग्राम पंचायतों में वार्डों के चयन में प्राथमिकता का निर्धारण सर्वप्रथम वार्डों की अनुसूचित जाति/जनजाति की संख्या बाहुल्यता के आधार पर जनसंख्या के घटते क्रमानुसार किया जायेगा। इसके पश्चात् यदि वार्ड अवशेष रहते हैं तो द्वितीय प्राथमिकता का निर्धारण कुल जनसंख्या के घटते क्रमानुसार किया जायेगा। राज्य स्तरीय संरचना मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना को प्रभावी रूप से क्रियान्वित कराने के लिए प्रधान सचिव / सचिव, पंचायती राज विभाग के अधीन राज्य स्तर पर एक क्रियान्वयन एवं अनुश्रवण कोषांग का गठन किया जायेगा। यह क्रियान्वयन एवं अनुश्रवण कोषांग नियमित रूप से योजना की प्रगति की समीक्षा करने के साथ ही जलापूर्ति की योजनाओं के मानक प्राक्कलनों की तैयारी एवं तकनीकी स्वीकृति, उनकी भौगोलिक–सामाजिक भागीदारी की गतिविधियों के लिए नीतियों / कार्यक्रमों को निरूपित करेगा। राज्य स्तरीय कोषांग में ग्रामीण विकास/ स्वच्छता/ जलापूर्ति के क्षेत्र में कार्य करने वाले अंतर्राष्ट्रीय/ राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संगठनों के प्रतिनिधियों को विकास सहयोगी (Development partner) के रूप में शामिल किया जायेगा। । योजना के क्रियान्वयन एवं अनुश्रवण कोषांग को तकनीकी सहयोग प्रदान करने के लिए राज्य स्तर पर राज्य स्तरीय योजना अनुश्रवण इकाई (State Level scheme Monitoring Unit) का गठन किया जायेगा। यह इकाई योजना को मिशन मोड में क्रियान्वित करने के लिए विशेष प्रयासों को संयोजित करेगी। इकाई के अंतर्गत संविदा / आउटसोर्सिग /प्रतिनियुक्ति के आधार पर IT विशेषज्ञ, अभियंता, वित्त प्रबंधक, जन संचार विशेषज्ञ, अनुश्रवण एवं मूल्यांकन विशेषज्ञ तथा सामाजिक वैज्ञानिक, आदि को रखा जायेगा। केन्द्र/राज्य सरकार के अनुभवी व योग्य सेवानिवृत कर्मियों को भी इकाई से जोड़ कर उनकी सेवाएं ली जायेंगी। योजना के क्रियान्वयन, अनुश्रवण एवं गुणवत्ता की निगरानी हेतु पंचायती राज विभाग के द्वारा सूचीबद्धता पर राज्य स्तरीय गुणवत्ता अनुश्रवक (State Quality Monitors) रखे जायेंगे। जिला स्तरीय संरचना जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के क्रियान्वयन हेतु गठित जिला जल एवं स्वच्छता समिति(DwSC) के माध्यम से योजना का क्रियान्वयन किया जायेगा तथा जिला पंचायत राज पदाधिकारी एवं विद्युत कार्यपालक अभियंता को इस योजना हेतु समिति के सदस्य के रूप में नामित किया जायेगा। यह समिति योजना को निर्धारित समयावधि में पूरा कराने के लिए प्राधिकृत समिति होगी और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप दिशा-निर्देश के प्रावधानों की व्यवहारिकता को ध्यान में रखते हुए गुणवत्तापूर्ण कार्य का संपादन सुनिश्चित करेगी। जिला पंचायत राज पदाधिकारी इस योजना हेतु विशेष जवाबदेही व भूमिका को सुनिश्चित करेंगे और ग्राम पंचायत की वार्षिक कार्य योजना को मासिक/ त्रैमासिक कार्य योजना में बांटते हुए सभी प्रखंड़ों के लक्ष्य निर्धारण, उसकी समीक्षा, कार्य प्रगति की निगरानी, सामाजिक जागरूकता, क्षमता संवर्द्धन कार्यक्रमों के आयोजन सुनिश्चित करेंगे। सामाजिक या अन्य किसी प्रकार के विवाद आदि की स्थिति में यह समिति अंतिम रूप से निर्णय लेने के लिए अधिकृत होगी। जिला पंचायत राज पदाधिकारी के कार्यालय में एक सहयोगी कोषांग (Support Cell) गठित किया जायेगा, जो जिला स्तर पर संसाधन केन्द्र के रूप में योजना के क्रियान्वयन में सहयोग करेगा। सहयोगी कोषांग में वित्त प्रबंधन, सूचना प्रावैधिकी, जनसंचार/मीडिया, अनुश्रवण/मूल्यांकन आदि के अनुभवी व्यक्तियों को परामर्शी के रूप में जोड़ा जायेगा। सहयोगी कोषांग ग्राम पंचायत को सुचारू वित्तीय प्रबंधन, कार्यों की प्रगति रिर्पोटिंग एवं तकनीकी कार्य क्रियान्वयन में सहयोग प्रदान करने के लिए प्रति चार पंचायत पर एक की दर से लेखापाल-सह-आई.टी. सहायक और कनीय अभियंता का पैनल तैयार करेगा और उन्हें कार्य आधारित मानदेय (Performance Based Honorarium) पर रखा जायेगा। इस हेतु जिला कार्यालय द्वारा Expression of Interest प्रकाशित कर सूचीबद्ध (Empanel) करने का कार्य किया जायेगा। इस कार्य हेतु विभाग स्तर से आवश्यक सहयोग प्रदान किया जायेगा। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में उनकी भूमिका सुनिश्चित की जायेगी। जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में सुशासन के कार्यक्रम हेतु गठित अनुश्रवण समिति इस योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा करेगी। जिला जल एवं स्वच्छता समिति निजी तौर पर कार्य करने के इच्छुक अभियंताओं (न्यूनतम अर्हता / Qualification - डिप्लोमा धारक) को तकनीकी सहायक के तौर पर सूचीबद्ध कर, ग्राम पंचायतों के साथ सूची साझा करेगी। ग्राम पंचायत इनमें से किसी एक तकनीकी सहायक को जलापूर्ति योजनाओं की रूपरेखा बनाने एवं पर्यवेक्षण करने के लिए नियुक्त कर सकेगी। तकनीकी सहायकों को परियोजना की अनुमानित लागत का दो प्रतिशत भुगतान पूर्व निर्धारित किस्तों में किया जा सकेगा (उदाहरण-योजना की रूपरेखा तैयार होने तथा प्रखंड स्तरीय इकाई द्वारा तकनीकी स्वीकृति प्राप्त होने पर 0.25 प्रतिशत; योजना अन्तर्गत पानी के स्रोतों का निर्माण तथा संग्रहण व्यवस्था पूर्ण होने पर 0.25 प्रतिशत; योजनान्तर्गत सभी लाभुक परिवारों का वितरण प्रणाली के साथ संयोजन होने के उपरान्त 0.25 प्रतिशत; योजना के सफलतापूर्ण परीक्षण तथा प्रवर्तन के पश्चात् 0.75 प्रतिशत; योजना के प्रवर्तन के पश्चात् तीन माह तक सफल संचालन के पश्चात् 0.50 प्रतिशत)। प्रखंड स्तर प्रखंड विकास पदाधिकारी की अध्यक्षता में लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के क्रियान्वयन हेतु गठित प्रखंड परियोजना अनुश्रवण इकाई के सहयोग से प्रखंड स्तर पर योजना का क्रियान्वयन एवं अनुश्रवण किया जायेगा। योजना के क्रियान्वयन को सुनिश्चित तरीके से कराने के लिए प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी की भूमिका Facilitator की होगी तथा मनरेगा PHED, RWD, LAEO, एवं RDD इकाई के सहायक / कनीय अभियंता योजना के क्रियान्वयन एवं अनुश्रवण में तकनीकी सहयोग प्रदान करेंगे। योजना को क्रियान्वित कराने के लिए प्रखंड पचायत राज पदाधिकारी के स्तर पर एक कार्यपालक सहायक को जोड़ा जायेगा, जो योजना संबंधित आंकड़ों, रिपोर्ट, लेखा विवरण आदि की प्रखंड स्तर पर समयबद्ध रिपोर्टिंग सुनियोजित करेगा। प्रखंड विकास पदाधिकारी के स्तर पर पूर्व से पंचायती राज विभाग के द्वारा प्रशिक्षित प्रशिक्षकों का एक पैनल बनाकर उनकी आवश्यकता आधारित उपलब्धता (Need Based Availability) बनाई रखी जायेगी। इसके अतिरिक्त प्रखंड विकास पदाधिकारी क्षमता संवर्द्धन, प्रचार-प्रसार एवं सामुदायिक सहभागिता की गतिविधियों को क्रियान्वित कराने के लिए नोडल पदाधिकारी होगे। तकनीकी सहायक, लेखापाल-सह-आई0टी0 सहायक एवं प्रशिक्षकों को ग्राम पंचायतों के समूह में लगाये जाने की जिम्मेदारी एवं उनके द्वारा किये गये कार्य का मूल्यांकन प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा संपादित किया जायेगा। तकनीकी सहायक, लेखापाल-सह-आई0टी0 सहायक एवं प्रशिक्षकों को कार्य आधारित मानदेय भुगतान के संबंध में विभाग द्वारा अलग से दिशा-निर्देश निर्गत किये जायेंगे। ग्राम पंचायत स्तर मुख्यमंत्री पेयजल निश्चय योजना के क्रियान्वयन में ग्राम पंचायत की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। मुखिया के नेतृत्व में ग्रामपंचायत योजना के क्रियान्वयन संबंधी समस्त दायित्वों का निर्वहन करेगी। ग्राम पंचायत के मुखिया द्वारा ग्राम पंचायत के निर्णय के आलोक में योजनाओं की प्रशासनिक स्वीकृति संसूचित की जायेगी तथा वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति द्वारा क्रियान्वित योजनाओं का नियमित अनुश्रवण एवं पर्यवेक्षण किया जायेगा। साथ ही, बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा 25 (vi) के अंतर्गत गठित लोक निर्माण समिति अपनी विशेष भूमिका निभायेगी तथा नियमित वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति को योजनाओं के क्रियान्वयन में सहयोग करेगी। ग्राम पंचायत में कार्यरत विभिन्न योजना से जुड़े कर्मी यथा- पंचायत रोजगार सेवक, पंचायत तकनीकी सहायक, ग्रामीण आवास सहायक, कृषि सलाहकार, विकास मित्र, टोला सेवक, आशा/आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, महिला स्वयं सहायता समूह/ग्राम संगठन के सदस्यों, जागरूक ग्रामीणों, आदि को भी सामुदायिक सहभागिता के लिए प्रेरक (Motivator) के रूप में जोड़ा जायेगा। समुदाय के बीच सामूहिक चेतना के विकास एवं कार्य के निगरानी में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी। प्रेरक (Motivator) के लिए कार्य के विरूद्ध परिणाम आधारित प्रोत्साहन राशि की व्यवस्था की जायेगी। वार्ड स्तर बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 (यथा संशोधित) एवं बिहार वार्ड सभा तथा वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति कार्य संचालन नियमावली, 2017 में निहित प्रावधानों के अन्तर्गत ग्राम पंचायत के संबंधित वार्ड सदस्य की अध्यक्षता में सात सदस्यीय वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति का गठन वार्ड सभा के माध्यम से किया जायेगा, जो संबंधित वार्ड के लिए मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना का क्रियान्वयन एवं रखरखाव/अनुरक्षण प्रदत्त दिशा-निर्देश के अनुसार करेगी। संबंधित वार्ड के पंच वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति के पदेन सदस्य एवं वार्ड सभा सचिव पदेन सदस्य सचिव होंगे। अध्यक्ष, पदेन सचिव एवं पदेन सदस्य के अलावा, वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति में संबंधित वार्ड के निवासियों में से चार व्यक्तियों को सदस्य के रूप में वार्ड सभा द्वारा चयनित किया जायेगा। वार्ड में यदि जीविका के ग्राम संगठन/स्वयं सहायता समूह कार्यरत हों तो इसके एक प्रतिनिधि को भी समिति के सदस्य के रूप में निर्वाचित किया जायेगा। अगर संबंधित वार्ड में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के परिवार निवास करते हैं, तो वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति के सदस्यों में कम-से-कम एक सदस्य अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति परिवार से अनिवार्य रूप से चयनित किया जायेगा। समिति में कम-से-कम तीन महिला सदस्य होंगी। वार्ड सभा सचिव वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति के पदेन सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेगा। अध्यक्ष अथवा पंचायती राज संस्थाओं/ग्राम कचहरी के किसी पदधारक के परिवार के सदस्य को वार्ड सभा सचिव के रुप में नहीं चुना जायेगा। अध्यक्ष के निर्देश पर वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति की बैठक बुलाने, बैठकों का कार्यवृत्त लेखन एवं लेखा-जोखा रखने की जिम्मेवारी सदस्य सचिव की होगी। वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति योजना की राशि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक के खाते में रखेगी। पूर्व में वार्ड विकास समिति के नाम से संधारित बैंक खातों का नामान्तरण नयी समिति के नाम के अनुरुप किया जायेगा। इस बैंक खाते का संचालन वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति के अध्यक्ष तथा सदस्य सचिव के संयुक्त हस्ताक्षर से होगा। वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति के निर्वाचित सदस्यों का कार्यकाल दो वर्ष का होगा। ऐसे सदस्य जो समिति की बैठकों में भाग / कार्यों में अभिरूचि नहीं लेंगे, उनके स्थान पर नये सदस्य का चयन उपर्युक्त वर्णित रीति से समिति के शेष अवधि के लिए किया जायेगा। दो वर्षों का कार्यकाल पूर्ण होने पर, वार्ड सभा पुनः वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति के सदस्यों का चयन करेगी। समयबद्ध कार्य योजना क्र0स0 गतिविधि अवधि 6 माह अ नियोजन पूर्व चरण प्रथम माह 1 ग्राम पंचायत स्तरीय जागरूकता अभियान एवं योजना उन्मुखीकरण बैठक का आयोजन। प्रथम माह 2 वार्ड प्राथमिकता सूची का निर्माण एवं वार्ड का चयन प्रथम माह 3 ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) की वार्षिक योजना में मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना की प्रविष्टि। प्रथम माह 4 वार्ड सभा आयोजन प्रथम माह 5 वार्ड सदस्य की अध्यक्षता में वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति का गठन। प्रथम माह 6 वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति का बैंक खाता खुलवाना/पूर्व में खोले गये खाते का नामांतरण। प्रथम माह 7 वार्ड में आम जन के बीच योजना की जानकारी हेतु संपर्क बैठक एवं प्रचार–प्रसार जागरूकता कार्यक्रम प्रथम माह 8 वार्ड का बेसलाईन सर्वेक्षण। प्रथम माह 9 वार्ड सभा का आयोजन और मुख्यमंत्री पेयजल निश्चय योजना का कार्यान्वयन । प्रथम माह ब नियोजन चरण 1 वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति द्वारा योजना का प्रारंभिक डिजाईन और बजटीय आकलन (निजी/सार्वजनिक भूमि की आवश्यकता, कचरा जल निष्पादन का स्थान एवं जल संरक्षण की तकनीक आदि)। 2-6 माह 2 वार्ड के लिए योजना का सूत्रण। 2-6 माह 3 कनीय अभियंता की सहायता से वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति द्वारा वित्तीय आवश्यकता का डीपीआर तैयार एवं तकनीकी स्वीकृति हेतु प्रखंड परियोजना अनुश्रवण इकाई को सम्प्रेषित। 2-6 माह योजना से संबंधित विवरण तैयार कर वार्ड के प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शन। 2-6 माह योजना की तकनीकी स्वीकृति प्राप्त। 2-6 माह वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति द्वारा प्रशासनिक स्वीकृति हेतु ग्राम पंचायत को योजना का सम्प्रेषण । 2-6 माह योजना की प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त । 2-6 माह ग्राम पंचायत द्वारा वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति को निधि का अंतरण | 2-6 माह स कार्यान्वयन चरण वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति द्वारा मार्केट सर्वे कर दर, गुणवत्ता निर्धारण एवं आपूर्तिकर्ता एजेंसी का चयन । 2-6 माह वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति द्वारा आपूर्तिकर्ता एजेंसी को कार्यादेश निर्गत। 2-6 माह योजना का निर्माण कार्य प्रारंभ। 2-6 माह निगरानी समिति, ग्राम पंचायत एवं अन्य के द्वारा समय-समय पर निरीक्षण प्रतिवेदन वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति को उपलब्ध कराना। 2-6 माह निर्माण सामग्री आपूर्ति के अनुसार वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति द्वारा आपूर्ति एजेंसी को भुगतान। 2-6 माह निर्धारित प्रपत्र में कार्य समाप्ति प्रतिवेदन तैयार कर ग्राम पंचायत को उपलब्ध कराना। 2-6 माह व्यय की गई योजना राशि का उपयोगिता प्रमाण-पत्र निर्धारित प्रपत्र में समर्पित करना । 2-6 माह कार्य समाप्ति के उपरान्त शिलापटट् पर विवरण का प्रदर्शन। 2-6 माह योजना की गुणवत्ता हेतु सामाजिक अंकेक्षण। 2-6 माह रख-रखाव एवं अनुरक्षण चरण के अन्तर्गत योजना के सतत् संचालन हेतु उपभोक्ता शुल्क का संग्रहण एवं व्यय के साथ-साथ वार्ड सभा का आयोजन एवं चक्रानुक्रमण के आधार पर वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति नये सदस्यों का चयन करते हुए जलापूर्ति योजना को निर्बाध गति से नियमित संचालित रखना। स्रोत: पंचायती राज विभाग, बिहार सरकार