<div id="MiddleColumn_internal"> <h3 style="text-align: justify;">प्रस्तावना</h3> <p style="text-align: justify;">वर्ष 2011 में देश की आबादी 1038 मिलियन हो गई है। एक अनुमान के अनुसार, वर्ष 2016 में भारत में 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों की आबादी बढ़कर वर्ष 2016 में 11.6 करोड़ हो गई है जो वर्ष 2021 में 14.3 करोड़ तथा वर्ष 2026 में 17.3 करोड़ हो जाने की आशा है। जीवन प्रत्याशा में सतत वृद्ध होने से लम्बी आयु तक जीवन जीने वाले व्यक्तियों की संख्या और अधिक हो गई है। पिछले कुछ वर्षों में, वरिष्ठ नागरिकों को आबादी के अनुपात में सतत वृदधि होने के मुख्य कारणों में स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं में सामान्य सुधार होना एक कारण है। यह सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण है कि वे न सिर्फ लम्बी आयु तक जीवन जीते हैं बल्कि सुरक्षित, सम्मानपूर्ण एवं सृजनशील जीवन जीते हैं।</p> <h3 style="text-align: justify;">होने वाले बदलाव</h3> <p style="text-align: justify;">भारतीय समाज के परम्परागत मूल्यों एवं मानकों में वृद्धजनों को सम्मान देना और देखभाल करने पर बल दिया जाता था। तथापि, हाल के समय में समाज में धीरे-धीरे लेकिन निश्चित तौर पर संयुक्त परिवार प्रणाली में विघटन हो रहा है परिणामस्वरूप भावात्मक, शारीरिक और वितीय सहायता की कमी से काफी संख्या में माता-पिता की उनके परिवारों दवारा उपेक्षा की जा रही है। ये वृद्धजन पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा की कमी में अनेक समस्याओं का सामना कर रहे हैं । इससे स्पष्ट है कि वृद्धावस्था एक बड़ी सामाजिक चुनौती बन गई है और वृद्धजनों की आर्थिक और स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करने और वृद्धजनों की भावात्मक जरूरतों के प्रति संवेदनशील सामाजिक वातावरण बनाए जाने की आवश्यकता है।</p> <h3 style="text-align: justify;">लक्ष्य एवं उद्देश्य</h3> <p style="text-align: justify;">इस योजना का मुख्य उददेश्य वृद्ध व्यक्तियों को मौलिक सुविधाएं जैसे आश्रय, भोजन, चिकित्सा देखभाल और मनोरंजन के अवसर प्रदान करते हुए और सरकारी/गैर-सरकारी संगठन(एनजीओ)/पंचायती राज संस्थाएं(पीआरआई)/स्थानीय निकाय और व्यापक स्तर पर समुदाय के क्षमता निर्माण के लिए समर्थन प्रदान करने के माध्यम से सृजनशील एवं सक्रिय वृद्धावस्था को प्रोत्साहित हुए वृद्ध व्यक्तियों के जीवन स्तर में सुधार लाना है। लागत मानदण्ड 01 अप्रैल, 2015 से संशोधित हैं और पहले से ही अधिसूचित हैं। 4 नई योजनागत स्कीमें जिन्हें 12वीं योजना के दौरान कार्यान्वित करने के लिए परिकलिपत किया गया था, उनका विलय इस योजना के संगत संघटकों/कायक्रमों के साथ कर दिया गया है। ये विलयित योजनाएं निम्नलिखित हैं:-</p> <ul style="text-align: justify;"> <li>माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 के प्रति जागरूकता पैदा करना।</li> <li>राष्ट्रीय स्तर पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए हेल्पलाइन की स्थापना करना ।</li> <li>जिला स्तर पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए हेल्पलाइन की स्थापना करना ।</li> <li>वरिष्ठ नागरिकों के संबंध में नई राष्ट्रीय नीति के कार्यान्वयन हेतु योजना।</li> </ul> <h3 style="text-align: justify;">दृष्टिकोण</h3> <p style="text-align: justify;">इस योजना के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं/स्थानीय निकायों और पात्र गैरसरकारी/स्वैच्छिक संगठनों जैसी कार्यान्वयन एजेंसियों को निम्नलिखित उददेश्यों के लिए सहायता प्रदान की जाएगी-</p> <ul style="text-align: justify;"> <li>निराश्रित वृद्ध व्यक्तियों को वृद्धजनों की आधारभूत जरूरतों विशेषकर भोजन, आश्रय और स्वास्थ्य देखरेख की जरूरतों को पूरा करने वाले कार्यक्रम</li> <li>विशेषकर बच्चों/युवाओं और वृद्धजनों के बीच अंतर-पीढ़ी संबंधों को बनाने और सुदृढ़ करने वाले कार्यक्रम</li> <li>सक्रिय एवं उत्पादक वृद्धावस्था को प्रोत्साहित करने वाले कार्यक्रम</li> </ul> <p style="text-align: justify;"><strong>स्त्रोत: <a class="ext-link-icon" title="नए विंडो में खुलने वाली अन्य वेबसाइट लिंक" href="https://socialjustice.gov.in/" target="_blank" rel="noopener">सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय</a></strong></p> </div>