भूमिका भवन एवं अन्य सन्निर्माण कार्य में लगे श्रमिक जो असंगठित श्रमिकों की श्रेणी में आते हैं को जोखिम पूर्ण परिस्थितियों में कार्य करने, अस्थाई एवं अनियमित रोज़गार, अनिश्चित कार्यअवधि, मूलभूत तथा कल्याण सुविधाओं आदि के अभाव के कारण इनकी स्थिति अत्यंत कमज़ोर तथा दयनीय होती है | पर्याप्त क़ानूनी प्रावधानों के अभाव के कारण कर्मकारों की दुर्घटनाओं की सही– सही जानकारी हासिल करना, जिम्मेदारी निर्धारित करना एवं सुधारात्मक उपाय अमल में लाना दुर्लभ कार्य था | इसलिए कर्मकारों की सुरक्षा, कल्याण एवं अन्य सेवा शर्तों को सुव्यवस्थित करने हेतु व्यापक केन्द्रीय विधान कि आवश्यकता महसूस की गई | कर्मकारों की नियोजन तथा सेवा शर्तें, सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कल्याण उपायों को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार (नियोजन तथा सेवा शर्तें) अधिनियम, 1996 का सृजन किया गया है | उ०प्र० भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड श्रम विभाग उ०प्र० शासन के विभिन्न प्रशासनिक विभागों में से एक है| शासन स्तर पर इसके सर्वोच्च अधिकारी प्रमुख सचिव(श्रम) है|इसके अधीन श्रम विभाग उत्तर प्रदेश के अंतर्गत प्रदेश स्तर पर प्रदेश के विभिन्न कारखानों, उद्योगों एवं नियोजको में में कार्य करने वाले श्रमिको की समस्याओ के समाधान हेतु श्रमायुक्त संगठन के अंतर्गत विभिन्न स्तरों अधिकारी व कर्मचारी कार्यरत है| इस संगठन के मुखिया श्रम आयुक्त उ०प्र० है| जो श्रम विभाग उ०प्र० के विभागाध्यक्ष है | उ०प्र० भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड का गठन भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार (नियोजन तथा सेवा-शर्त विनियमन ) अधिनियम 1996 के अंतर्गत राज्यों के स्तर पर राज्य कल्याण बोर्ड के गठन की व्यवस्था है| इस अधिनियम 1996 के अधीन बनायीं गई नियमावली 2009 के नियम 256 के अंतर्गत प्रदत्त व्यवस्था के अधीन उ०प्र० भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड का गठन किया गया है | जिसमे पड़ें अध्यक्ष के रूप में प्रमुख सचिव श्रम एवं अन्य सदस्य है | उ०प्र० एक अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड का उद्देश्य भवन एवं अन्य सन्निर्माण कार्यों में नियोजित श्रमिक असंगठित क्षेत्र के श्रमिक हैं जो अत्यन्त गरीब व शोषित वर्ग से सम्बंधित होते हैं। ऐसी स्थिति में इनकी कार्यदशाओं में सुधार व इन्हें आर्थिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से शासन द्वारा बोर्ड का गठन कर उन्हें विभिन्न आर्थिक सहायता योजनाओं के माध्यम से लाभान्वित किया जा रहा है। विजन भवन एवं अन्य सन्निर्माण कार्यो में नियोजित विभिन्न श्रेणी के कामगारों की कार्य दशाओं व् उनके कार्यो के गुणवत्ता में सुधार व विभिन्न हितकारी योजनाओ के माध्यम से आर्थिक सहायता देकर उनके जीवन स्तर को उपर उठाना है| विभाग की योजनायें शिशु हित लाभ योजना योजना का उद्देश्य उ०प्र० भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के अन्तर्गत पंजीकृत लाभार्थी श्रमिकों के नवजात शिशुओं को उनके जन्म से दो वर्ष की आयु पूर्ण होने तक पौष्टिक आहार की व्यवस्था कराया जाना। पात्रता सभी पंजीकृत कर्मकार (महिला एवं पुरूष) (लाभ अधिकतम दो बच्चों तक देय होगा)। हितलाभ वर्ष में एक बार एक मुश्त (लडका होने पर 10000 लडकी पर 12000प्रति शिशु की दर से)‚ दो वर्ष की आयु तक ही देय है। आवेदन प्रक्रिया लाभार्थी या उनके परिवार के किसी सदस्य की ओर से उक्त सहायता प्राप्त करने हेतु प्रसव के 1साल के भीतर निकटस्थ श्रम कार्यालय अथवा सम्बन्धित तहसील के तहसीलदार अथवा सम्बन्धित विकास खण्ड कार्यालय में खण्ड विकास अधिकारी को निर्धारित प्रपत्र पर आवेदन पत्र दो प्र्रतियों में प्रस्तुत किया जायेगा, जिसकी एक प्रति पावती स्वरूप आवेदक को प्रार्थना पत्र प्राप्त करने वाले अधिकारी द्वारा प्राप्त की तिथि अंकित करते हुए उपलब्ध करवाई जाएगी। द्वितीय वर्ष का हितलाभ प्राप्त करने के लिए समबन्धित लाभार्थी द्वारा इस बात का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा कि सम्बन्धित शिशु जीवित है। आवेदन पत्र के साथ सम्बन्धित कर्मकार को चिकित्साधिकारी द्वारा प्रदत्त निर्धारित प्रसव/जन्म प्रमाण पत्र संलग्न करना अनिवार्य होगा।योजना के अन्तर्गत जन्म के एक वर्ष की अवधि तक प्रर्थना पत्र प्राप्त किये जायेंगे। प्रार्थना पत्र विलम्ब से प्राप्त होने की स्थिति में रू01000/-प्रतिमाह की दर से कटौती की जायेगी| मातृत्व हितलाभ योजना योजना का उद्देश्य उ०प्र० भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के अन्तर्गत पंजीकृत लाभार्थी महिला कर्मकारों को प्रसव के उपरान्त पौष्टिक आहार की व्यवस्था कराया जाना। पात्रता सभी पंजीकृत महिला श्रमिक‚ या पुरूष कर्मकार की पत्नी। लाभ अधिकतम दो प्रसवों तक ही देय होगा। हितलाभ लाभार्थी महिला कर्मकार के संस्थागत प्रसव के उपरान्त उसकी ओर से नियमानुसार निर्धारित प्रारूप पर प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने एवं संस्थागत प्रसव सत्यापित हो जाने की दशा में सम्बन्धित महिला कर्मकार को मातृत्व हितलाभ के रूप में उसकी श्रेणी के अनुरूप निर्धारित न्यूनतम वेतन की दर से 03 माह के वेतन के समतुल्य धनराशि देय होगी। यदि लाभार्थी महिला श्रमिक प्रसव के पूर्व तीन आवश्यक चिकित्सकीय जांचकरा लेती है तो संस्थागत प्रसव के पूर्व आवेदन करने पर भी हितलाभ दिया जा सकता है। महिला निर्माण श्रमिक को उपरोक्त के अतिरिक्त रू0 1,000/-(रू0एक हजार मात्र) की धनराशि चिकित्सा बोनस के रूप में देय होगी। महिला निर्माण श्रमिक के गर्भपात होने की दशा में उसे, उसके 06सप्ताह के वेतन के समतुल्य धनराशि देय होगी परन्तु दो बच्चों के जन्म के उपरान्त गर्भपात कराये जाने पर यह हितलाभ अनुमन्य नहीं होगा। यदि महिला श्रमिक का नसबन्दी ऑपरेशन होता है तो उसे उसके02 सप्ताह के वेतन के बराबर धनराशि देय होगी। योजना के अंतर्गत पुरूष कामगारों की पत्नियों को इस योजना के अन्तर्गत लाभ की परिधि में लाते हुए उन्हें भी कुल रू0 6,000/-(रू0 छः हजार मात्र) दो किश्तों में दिये जायेंगे। आवेदन पत्र के साथ चिकित्साधिकारी द्वारा प्रदत्त प्रसव प्रमाण-पत्र (प्रसव के मामले में) तथा अन्य मामलों (गर्भपात या नसबन्दी) में चिकित्साधिकारी द्वारा प्रदत्त प्रमाण-पत्र संलग्न करना अनिवार्य होगा। आवेदन प्रक्रिया लाभार्थी महिला कर्मकार या उसके परिवार के किसी सदस्य की ओर से उक्त सहायता प्रप्त करने हेतु प्रसव के 01 वर्ष के अन्दर निकटस्थ श्रम कार्यालय अथवा संबंधित तहसील कार्यालय में तहसीलदार को अथवा सम्बन्धित विकास खण्ड कार्यालय में खण्ड विकास अधिकारी को निर्धारित प्रपत्र पर आवेदन पत्र दो प्रतियों में प्रस्तुत किया जाएगा, जिसकी एक प्रति पावती स्वरूप आवेदक को प्रार्थना पत्र प्राप्त करने वाले अधिकारी द्वारा प्राप्ति की तिथी अंकित करते हुए उपलब्ध कराई जाएगी। आवेदन पत्र के साथ सम्बन्धित कर्मकार को चिकित्साधिकारी द्वारा प्रदत्त निर्धारित प्रसव प्रमाण पत्र संलग्न करना अनिवार्य होगा। बालिका मदद योजना उद्देश्य उ०प्र० भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के अन्तर्गत पंजीकृत लाभार्थी कर्मकारों की पुत्रियों की आर्थिक मदद कर आत्मनिर्भर बनाना। पात्रता सभी पंजीकृत महिला ⁄ पुरूष निर्माण श्रमिक जो न्यूनतम 01 वर्ष से सदस्य हो तथा अंशदान जमा किया हो।परिवार में जन्मी पहली बालिका को लाभ मिलेगा दूसरी को तभी मिलेगा जब दोनो सन्तानें बालिका हों। यदि प्रथम एवं द्वितीय प्रसव में एक से अधिक बालिकाएं जन्मती है तो सभी को लाभ अनुमन्य होगा।कानूनी रूप से गोद ली हुई बालिका को प्रथम बालिका मानते हुए लाभ अनुमन्य होगा।बालिका के जन्म का पंजीकरण जन्म–मृत्यु पंजिका पर होना अनिवार्य है।18 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर यदि पुत्री का निधन हो जाता है तो सावधि जमा की रकम बोर्ड को वापस हो जायेगी।भारत ⁄उ०प्र० सरकार द्वारा चलाई जा रही किसी अन्य योजना में लाभ न लिया हो। हितलाभ रु 20000 एकमुश्त बतौर सावधि जमा 18 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर ही परिपक्व होगा। भुगतान अविवाहित रहने पर ही देय है।परिवार के निकटस्थ आंगनबाड़ी केन्द्र पर बालिका के जन्म से 01 वर्ष के अन्दर पंजीकरण कराना आवश्यक होगा। अक्षमता पेंशन योजना उद्देश्य उ०प्र० भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के अन्तर्गत पंजीकृत लाभार्थी कर्मकारों के दुर्घटना⁄बीमारी के कारण पूर्ण एवं स्थायी रूप से अक्षम हो जाने पर लाभार्थी व उसके परिवार के भरण–पोषण हेतु नियमित रूपसे आर्थिक सहायता प्रदान करना। पात्रता सभी पंजीकृत श्रमिक जो दुर्घटना⁄बीमारी के कारण पूर्ण एवं स्थायी रूप से (50 प्रतिशत व अधिक) अक्षम हो। प्रतिबन्ध लाभार्थी कर्मचारी राज्य बीमा योजना के अंतर्गत पेंशन का लाभ प्राप्त करने हेतु पात्र न हो।पूर्ण स्थायी अक्षमता 50 प्रतिशत या उससे अधिक हो।लाभ केवल पंजीकृत श्रमिक के स्वंय अक्षम होने की स्थिति में ही देय होगा। हितलाभ रु० 1000⁄– प्रतिमाह बतौर पेंशन लाभार्थी के अक्षम हो जाने पर जीवनकाल तक देय होगा।बीमारी से तात्पर्य लकवा‚ कुष्ठ रोग‚ कैंसर‚तपेदिक एवं अन्य गम्भीर बीमारी‚ जिससे श्रमिक अक्षम हो गया हो। आवेदन प्रक्रिया लाभार्थी या उसके परिवार के किसी सदस्य की ओर से उक्त सहायता प्राप्त करने हेतु पूर्ण एवं स्थायी रूप से अक्षम घोषित हो जाने की तिथि से तीन माह के भीतर निकटस्थ श्रम कार्यालय अथवा सम्बन्धित तहसील के तहसीलदार कार्यालय अथवा सम्बन्धित खण्ड विकास अधिकारी कार्यालय में निर्धारित प्रपत्र पर फोटोयुक्त आवेदन-पत्र दो प्रतियों में प्रस्तुत किया जाएगा, जिसकी एक प्रति पावती स्वरूप आवेदक को प्रार्थना पत्र प्राप्त करने वाले कार्यालय द्वारा प्राप्ति कि तिथी अंकित करते हुए उपलब्ध करायी जाएगी।आवेदन पत्र के साथ मुख्य चिकित्साधिकारी/मण्डलीय चिकित्सा परिषद द्वारा प्रदत्त प्रमाण पत्र भी संलग्न किया जाना अनिवार्य होगा।तीन माह के उपरान्त प्रप्त आवेदन पत्रों के सम्बंध में उपयुक्त कारण पाए जाने पर बार्ड द्वारा विचार किया जा सकता है किन्तु छः माह के पश्चात प्राप्त प्रार्थना पत्रों पर कोई विचार नहीं किया जायेगा। मृत्यु एवं विकलांगता सहायता योजना उद्देश्य पंजीकृत श्रमिकों की दुर्घटना हो जाने पर तत्कालिक सहायता हेतु लाभार्थी श्रमिक व उसके आश्रितों को तत्कालिक अनुग्रह राशि प्रदान किया जाना। पात्रता सभी पंजीकृत लाभार्थी कर्मकार या उनके आश्रितों (पति ⁄ पत्नी,अविवाहित पुत्रियां‚ अवयस्क पुत्रों तथा निर्भर माता–पिता) को देय होगा। क- कार्यस्थल पर कार्य के दौरान या इतर मृत्यु पर ख- महिला कर्मकार की प्रसव के दौरान मृत्यु पर। हितलाभ पंजीकृत निर्माण श्रमिक की किसी दुर्घटना के फलस्वरूप मृत्यु होने पर रु़ 1 लाख एकमुश्त तात्कालिक सहायता राशि के रूप में तथा रु़400000⁄– की धनराशि सावधि जमा के रूप में आश्रितों को दी जायेगी। रु० 300000⁄– कर्मकार की स्थायी पूर्ण अपंगता⁄विकलांगता पर‚ रु० 200000⁄–स्थायी आंशिक अपंगता⁄विकलांगता पर बतौर अनुग्रह धनराशि देय होगा।उपयुर्क्त परिस्थितियों को छोड़कर सामान्य मृत्यु के अन्य प्रकरणों में उसके आश्रितों को एकमुश्त रु़ 1 लाख की सहायता प्रदान की जायेगी। आवेदन प्रक्रियाः- (अ) अपंगता/विकलांगता की दशा में दुर्घटना के फलस्वरूप लाभार्थी को हुई स्थाई अपंगता/विकलांगता की दशा में निर्धारित प्रारूप-1 में आवेदन पत्र दो प्रतियों में दुर्घटना घटित होने की तिथि से 01 साल के अन्दर निकटस्थ श्रम कार्यालय अथवा संबंधित तहसील के तहसीलदार अथवा संबंधित विकास खण्ड कार्यालय में खण्ड विकास अधिकारी को प्रस्तुत किया जाएगा, जिसकी एक प्रति पावती स्वरूप आवेदक को प्रार्थना पत्र प्राप्त करने वाले अधिकारी द्वारा प्राप्त की तिथि अंकित करते हुए उपलब्ध करवायी जाएगी।आवेदन पत्र के साथ संबंधित कर्मकार को मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा प्रदत्त विकलांगता प्रमाण पत्र एवं लाभार्थी कर्मकार के पंजीयन कार्ड की प्रमाणित प्रति संलग्न करना अनिवार्य होगा। साथ ही यदि श्रमिक की कार्यस्थल पर घटित दुर्घटना के फलस्वरूप अपंगता/विकलांगता हुई है, तो तद्विषयक थाने में दर्ज प्राथमिकी/श्रम कार्यालय अथवा जिला प्रशासन को दी गई सूचना तथा चिकित्सक का प्रमाण पत्र जिसके द्वारा प्रारम्भिक उपचार किया गया है, संलग्न करना अनिवार्य होगा। दुर्घटना यदि कार्यस्थल से इतर किसी अन्य स्थान पर घटित होती है, तो आवेदन के साथ पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी, मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा दिया गया प्रमाण पत्र तथा मृत्यु की दशा में पोस्टमार्टम रिपोर्ट संलग्न करना अनिवार्य होगा। (ब) मृत्यु की दशा में दुर्घटना के फलस्वरूप मृत्यु हो जाने की दशा में निर्धारित प्रारूप-1 में परिवार के निकटस्थ सदस्य द्वारा आवेदन पत्र दो प्रतियों में घटना घटित होने की तिथि से 01 साल के अन्दर निकटस्थ श्रम कार्यालय में अथवा संबंधित तहसील के तहसीलदार अथवा संबंधित विकास खण्ड कार्यालय में खण्ड विकास अधिकारी को प्रस्तुत करना होगा,जिसकी एक प्रति पावती स्वरूप आवेदक को दी जाएगी।आवेदन पत्र के साथ संबंधित श्रमिक की मृत्यु का प्रमाण-पत्र, थाने में दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट एवं लाभार्थी कर्मकार के पंजीयन कार्ड की प्रमाणित प्रति संलग्न करना अनिवार्य होगा। पुत्री विवाह अनुदान योजना उद्देश्य उ०प्र० भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के अन्तर्गत पंजीकृत लाभार्थी श्रमिकों की विवाह योग्य पुत्रियों के विवाह संस्कार को सुगमता से सम्पन्न करने हेतु आर्थिक सहायता प्रदान करना। पात्रता सभी पंजीकृत निर्माण श्रमिक (महिला एवं पुरूष)श्रमिक का न्यूनतम03 वर्ष तक नियमित सदस्य होना अनिवार्य है तथा नियमित अंशदान जमा हो। हितलाभ पंजीकृत निर्माण श्रमिक को समस्त आर्हताओं की पूर्ति की स्थिति में उसकी पुत्री के विवाह हेतु रू0 51,000/- (इक्यावन हजार रूपये मात्र) की धनराशि बोर्ड द्वारा आर्थिक सहायता के रूप में प्रदान की जाएगी तथा अन्र्तजातीय विवाह हेतु रू0 55,000/- (पचपन हजार रूपये मात्र) की धनराशि आर्थिक सहायता के रूप में प्रदान की जाएगी। सामूहिक विवाह की स्थिति में न्यूनतम 11 जोड़ों के विवाह एक साथ एक स्थल पर आयोजित होने की दशा में रू0 5,000/- (पाँच हजार रूपये मात्र) प्रति जोड़े की दर से आयोजन में होने वाले व्यय का भुगतान बोर्ड द्वारा किया जाएगा। तद्नुसार संशोधित योजना के अनुसार भविष्य में कार्यवाही करना सुनिश्चित करें। आवेदन प्रक्रिया उपारोक्तानुसार पात्र पंजीकृत निर्माण श्रमिक को समस्त अर्हताओं की पूर्ति की स्थिति में उसकी पुत्री के विवाह हेतु रु0 40,000/-(रु0चालीस हजार मात्र) की धनराशि बोर्ड द्वारा आर्थिक सहायता के रुप में प्रदान की जायेंगी। यहाँ यह स्पष्ट किया जा रहा है कि यह सहायता पंजीकृत निर्माण श्रमिक की सभी पुत्रियों को यह आर्थिक सहायता विवाह हेतु अनुमन्य होगी।1 जहाँ पर माता-पिता दोनों ही पंजीकृत निर्माण श्रमिक है, तो दोनों में से किसी एक को ही यह सहायता सुलभ हो सकेगी। आर्थिक सहायता प्रदान किये जाने हेतु भारत सरकार अथवा प्रदेश सरकार से संचालित किसी अन्य योजना में आर्थिक सहायता प्राप्त न हुई हो। किसी अन्य शासकीय योजना से यदि इस प्रयोजन हेतु आर्थिक सहायता प्राप्त हुई है, तो इस योजना के अन्तर्गत हितलाभ अनुमन्य नहीं होगा। यहाँ यह भी स्पष्ट किया जा रहा है कि यदि किसी पंजीकृत लाभार्थी श्रमिक को अपनी कोई संतान नही है और उसने किसी कन्या को विधिवत गोद लिया है, तो ऐसी स्थिति में केवल एक गोद ली गई कन्या तक ही इस योजना अन्तर्गत लाभ अनुमन्य हो सकेगा। सम्बन्धित कन्या के विवाह उपरान्त लाभार्थी श्रमिक द्वारा इस आशय का प्रमाण पत्र भी निर्धारित प्रारुप पर देना अनिवार्य होगा कि सम्बंधित कन्या का विवाह सम्पन्न हो गया है और अनुदान की धनराशि का उपभोग सम्बंधित मद में ही किया गया है। यह प्रमाण पत्र जिला श्रम कार्यालय को उसी कार्यालय के माध्यम से प्रस्तुत किया जा सकता है,जहाँ प्रार्थना पत्र प्रारंभ में प्रस्तुत किया गया था। पंजीकृत निर्माण श्रमिक का पहचान प्रमाण पत्र की फोटो प्रति। सम्बंधित पुत्री के जन्म प्रमाण पत्र की प्रमाणित फोटो प्रति। पुत्री यदि गोद ली गई है, तो उससे सम्बंधित यथा प्रमाणित अभिलेख।प्रश्नगत पुत्री तथा प्रस्तावित वर का आयु प्रमाण पत्र कि उन्होंने क्रमशः 18वर्श एवं 21 वर्श की आयु (विवाह के नियत तिथि को) पूर्ण कर लिया है। परिवार रजिस्टर की प्रमाणित प्रति/स्कूल लीविंग सार्टिफिकेट/जन्म प्रमाण पत्र की प्रमाणित प्रति इस हेतु आवश्यक होगी। लाभार्थी पंजीकृत श्रमिक के कुटुम्ब रजिस्टर/राशन कार्ड या उसके समतुल्य अन्य कोई अभिलेख जिससे निर्माण श्रमिक के परिवार का विवरण हो,की फोटो प्रति। अन्त्येष्टि सहायता योजना उद्देश्य उ०प्र० भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के निर्मांण श्रमिक की मृत्यु की स्थिति में उसकी अन्तेष्टि एवं अंतिम संस्कार को सुगमतापूर्वक सम्पन्न किए जाने हेतु तत्कालिक आर्थिक सहायता प्रदान किया जाना। पात्रता पंजीकृत मृतक निर्माण श्रमिक के आश्रित।यह सहायता आत्महत्या जैसी स्थिति में अनुमन्य नही होगी। हितलाभ रु० 25000⁄– अंतिम संस्कार व्यय के रूप में। स्पष्टीकरण लाभार्थी श्रमिक की मृत्यु हो जाने की स्थिति में प्रथमतः सहायता राशि का भुगतान लाभार्थी श्रमिक के पति अथवा पत्नी (जैसी भी स्थिति हो), को द्वितीयतः लाभार्थी श्रमिक के व्यस्क पुत्र/अविवाहित वयस्क पुत्री एवं उनके अनुपलब्ध होने पर लाभार्थी श्रमिक पर आश्रित माता/पिता और अंततः लाभार्थी श्रमिक के अवयस्क पुत्रों अथवा पुत्रियों को किया जायेगा। आवेदन प्रक्रिया निर्माण श्रमिक की मृत्यु के उपरांत ऊपर बताये गये स्पष्टीकरण में वर्णित वरीयता क्रम में अनुसार उसके परिवार के किसी सदस्य की ओर से उक्त सहायता प्राप्त करने हेतु संबंधित मृत्यु के 01 वर्ष के भीतर निकटतम श्रम कार्यालय अथवा संबंधित तहसील कार्यालय मे तहसीलदार को अथवा संबंधित विकास खण्ड कार्यालय में खण्ड विकास अधिकारी को निर्धारित प्रपत्र पर आवेदन पत्र को दो प्रतियों में प्रस्तुत किया जायेगा। जिसकी एक प्रति पावती स्वरूप आवेदक को प्रार्थना पत्र प्राप्त करने वाले अधिकारी द्वारा प्राप्त की तिथि अंकित करते हुए उपलब्ध करवाई जायेगी।आवेदन पत्र के साथ मृत पंजीकृत निर्माण श्रमिक की मृत्यु के प्रमाण पत्र की प्रमाणित प्रति तथा निर्गत पहचान पत्र की मूल प्रति संलग्न किया जाना अनिवार्य होगा। पहचान पत्र खो जाने की दशा में बोर्ड का कोई सदस्य इस आशय का प्रमाण पत्र दे सकता है कि मृत निर्माण श्रमिक का पहचान पत्र वास्तव में नहीं मिल रहा है। कौशल विकास तकनीकी उन्नयन एवं प्रमाणन योजना उद्देश्य निर्माण श्रमिकों को उनमें कौशल संबंधी दक्षता विकास एवं तकनीकी उन्नयन के उद्देश्य से आवश्यक प्रशिक्षण सुलभ कराया जाना है। ऐसे प्रशिक्षण में हुए व्यय तथा मजदूरी के नुकसान की प्रतिपूर्ति करना है। पात्रता पंजीकृत श्रमिक अथवा पत्नी एवं आरित अविवाहित पुत्री व 21 वर्ष से कम आयु वाले पुत्रों को ही मिल सकेगा परन्तु यह कि यदि किसी लाभार्थी का पुत्र प्रशिक्षण में प्रवेश के समय 21 वर्ष से कम आयु का है और प्रशिक्षण के उपरान्त असकी उम्र 21 वर्ष से अधिक हो जाती है तो इस योजना का लाभ उसे भी अनुमन्य होगा। योजना के अन्तर्गत प्रशिक्षण का कार्य व्यवसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग के कौशल विकास मिशन के तहत कराया जाएगा। हितलाभ प्रशिक्षण की दशा में संस्था द्वारा निर्धारित शुल्क‚ पाठ्य पुस्तकें एवं प्रशिक्षण से सम्बन्धित अन्य लेखन सामग्री के व्यय की प्रतिपूर्ति बोर्ड द्वारा की जायेगी। श्रमिक के स्वयं प्रशिक्षण में भाग लेने पर प्रशिक्षण अवधि की अनुमन्य मजदूरी भी मिलेगी जबकि आश्रित पुत्र ⁄पुत्रियों को अनुमन्य नहीं होगी। आवेदन प्रक्रिया पंजीकृत निर्माण श्रमिकों द्वारा निर्धारित प्रारूप पर प्रार्थना-पत्र प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने के 03 माह के अन्दर प्राप्त होने वाले प्रार्थना-पत्रों में बोर्ड के सचिव द्वारा पर्याप्त कारण उपलब्ध कराये जाने पर ही निर्णय लिया जा सकेगा, परन्तु 06 माह से अधिक विलम्बित अवधि के प्रार्थना-पत्र स्वीकार नहीं किये जायेंगे। आवेदक द्वारा अपना प्रार्थना पत्र निकटस्थ श्रम कार्यालय अथवा सम्बन्धित तहसील कार्यालय में तहसीलदार को अथवा सम्बन्धित विकास खण्ड कार्यालय में खण्ड विकास अधिकारी को निर्धारित प्रपत्र पर आवेदन पत्र दो प्रतियों में प्रस्तुत किया जायेगा। जिसकी एक प्रति पावती स्वरूप आवेदक को प्रार्थना पत्र प्राप्त करने वाले अधिकारी द्वारा प्राप्ति की तिथि अंकित करते हुए उपलब्ध कराई जायेगी। आवेदन पत्र के साथ पंजीकृत निर्माण श्रमिक का निर्गत पहचान-पत्र की फोटो प्रति संलग्न किया जाना अनिवार्य होगा।आवेदन पत्र के साथ प्राप्त प्रशिक्षण करर्यक्रम के प्रमाण-पत्र की फोटोप्रति प्रशिक्षण प्रदान करने वाली संस्था द्वारा दिया गया व्यय का प्रमाण-पत्र मूलरूप में एवं संस्थान द्वारा इस आशय का दिया गया प्रमाण-पत्र कि आवेदक अथवा उसकी पत्नी/पुत्र/पुत्री ने किन तिथियों में प्रशिक्षण प्राप्त किया है, भी संलग्न करना अनिवार्य होगा। आवास सहायता योजना उद्देश्य अधिकांशतः निर्माण श्रमिक गरीब होते हैं‚ परन्तु बी०पी०एल० सूची में उनका नाम न होने से आवास लाभ नही मिलता‚ वस्तुतः वे पात्र होते है। अतः योजना का मूल उद्देश्य पंजीकृत कर्मकारों को आवासीय सुविधा हेतु अनुदान उपलब्ध कराना है। पात्रता गत वित्तीय वर्ष में सभी पंजीकृत निर्माण श्रमिक पात्र होंगे। लाभार्थी नियमित अंशदान जमा करता हो।परिवार एक ईकाई के रूप में लिया जाएगा। लाभार्थी के पास स्वयं का अथवा परिवार का पक्का आवास न हो।केन्द्र ⁄ प्रदेश सरकार की अन्य योजना में आवास हेतु सहायता का लाभ पाने वाले श्रमिक इस योजना के पात्र नही होंगे।उन श्रमिको को लाभ मिलेगा जिनके पास स्वयं अथवा परिवार के नाम समुचित भूमि उपलब्ध हो।कार्य स्थान⁄निवास एक ही जिले में होने पर वरीयता प्रदान की जाएगी।श्रमिकों को इस योजना का लाभ सम्पूर्ण जीवनमें केवल एक बार ही मिलेगा। पति ⁄ पत्नी दोनो पंजीकृत हैं तो लाभ में पत्नी को वरीयता दी जाएगी। हितलाभ रु० 100000⁄– की धनराशि 02 किश्तों में। मरम्मत हेतु रु० 15000⁄– की धनराशि मिलेगी।परन्तु एक ही लाभार्थी को एक साथ दोनों लाभ नही दिया जाएगा। परिभाषा योजना में भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार (नियोजन तथा सेवा शर्ते विनियमन) अधिनियम, 1996 की धारा-12 के अन्तर्गत गत वित्तीय वर्ष तक पंजीकृत सभी लाभार्थी श्रमिक पात्र होगें। प्रतिबंध यह होगा कि- लाभार्थी श्रमिक- भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार (सेवाशर्त एवं विनियमन) अधिनियम, 1996 की धारा 12 में उल्लेखित परिभाषानुसार।परिवार-परिवार के अन्तर्गत पंजीकृत लाभार्थी श्रमिक स्वयं, उसकी पत्नी आश्रित माता-पिता, एवं 21 वर्ष से कम आयु के पुत्र ता अविवाहित पुत्री शामिल होंगे। बोर्डयोजना में बोर्ड से तात्पर्य“उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण बोर्ड” से होगा। आवेदन प्रक्रिया आवेदन पत्र के साथ निम्न अभिलेख प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा पंजीकृत निर्माण श्रमिक को बोर्ड द्वारा निर्गत पहचान प्रमाण-पत्र की सत्यापित फोटो-प्रति। निवास प्रमाण-पत्र की सत्यापित प्रति।भूमि के स्वामित्व के अभिलेख की सत्यापित प्रति।इस आशय का शपथ-पत्र के केन्द्र अथवा राज्य सरकार की किसी भी आवासीय योजना में उसे अथवा उसके परिवार के सदस्य को लाभ प्राप्त नहीं हुआ है। पेंशन योजना उद्देश्य पंजीकृत निर्माण श्रमिको‚ जिनकी आयु 60 वर्ष हो गई है और जिनका वार्षिक अंशदान अद्यदतन जमा हो‚ को एक निश्चित धनराशि पेंशन के रूपमें उपलब्ध कराया जाना है। अतः लाभार्थी की नियमित आया में हो रही क्षति की प्रतिपूर्ति करने तथा उसकी आजीविका के सुगम संचालन की दृष्टि से इस योजना की सकंल्पना की गयी है। पात्रता भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार अधिनियम–1996 के अंतर्गत लाभार्थी के रूप मे पंजीकृत होना।60 वर्ष की आयु पूर्ण करना एवं तत्समय न्यूनतम तीन वर्ष तक लाभार्थी के रूप में पंजीकृत एवं अद्यकतन अंशदान दिया जाएगा।किसी अन्य बोर्ड या पेंशन योजना का सदस्य न होना एवं आयु पूर्ण करते समय उत्तर प्रदेश में स्थायी रूप से निवास करना। हितलाभ प्रत्येक पात्र निर्माण–श्रमिक को प्रतिमाह की दर से रु़ 1000⁄– की धनराशि उसके जीवित रहने तक उसे स्वयं और उसकी मृत्यु के पश्चात प्रथमतः उसकी पत्नी⁄पति कों या द्वितीयतः उसके आश्रित‚माता⁄पिता को‚ यदि वह किसी पेंशन योजना के अन्तर्गत यह धनराशि पेंशन के रूप में देय होगी। पेंशन की धनराशि का भुगतान लाभार्थी के बैक–खाते के माध्यम से किया जाएगा। एक वर्ष के पश्चात ऐसे निर्माण श्रमिक को या उसकी मृत्यु के पश्चात उसके आश्रित को पंजीयन अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर अपने जीवित होने का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। आवेदन-प्रक्रिया ’’लाभार्थी’’पंजीकृत निर्माण श्रमिक 60 वर्ष आयु पूर्ण करने के 03 माह पूर्व अपने स्थायी निवास के जनपद में अपना आवेदन/पेंशन प्रार्थना-पत्र स्थानीय श्रम कार्यालय/तहसील/विकास खण्ड में प्रस्तुत कर सकेगा परन्तु यदि उसके उपरान्त भी आवेदन करता है तो विलम्ब से छूट देने का अधिकार स्वीकृतिकर्ता समिति को होगा। यदि प्रस्तुत प्रार्थना-पत्र जिला श्रम कार्यालय के अतिरिक्त अन्य किसी कार्यालय में प्रस्तुत किया जाता है तो वह कार्यालय प्रप्त सभी प्रार्थना-पत्रों को तिथिवार संकलित करेगा और प्रत्येक माह की 05 तारीख तक जिला श्रम कार्यालय को उपलब्ध कराएगा।जिला श्रम कार्यालय समस्त प्रार्थना-पत्रों को संकलित करेगा और उन्हें स्वीकृति हेतु समिति के समक्ष प्रस्तुत करेगा।आवेदन के साथ पहचान की फोटोप्रति ,बैंक पासबुक की फोटोप्रति, स्थायी निवास की प्रमाणित फोटोप्रति, इस आशय का शपथ- पत्र कि वह किसी अन्य योजना/ सरकार से कोई पेंशन प्रप्त नहीं कर रहा है। बैंक खाता एकल लाभार्थी के नाम होगा और धनराशि का आहरण चेकबुक से न होकर पर्ची से होगी। पेंशन स्वीकार किये जाने की प्रक्रिया जनपद स्तर पर पेंशन प्रर्थना -पत्र को स्वीकार करने के लिए एक समिति निम्नवत होगी जिलाधिकारी/मुख्य विकास अधिकारी - अध्यक्षअपर/उप /सहायक श्रमायुकत - सदस्य सचिवजिला समाज कल्याण अधिकारी - सदस्य समिति प्रति 03 माह पर बैठक करेगी और उक्त के दौर प्राप्त प्रार्थना-पत्रों पर निर्णय करेगी। सदस्य सचिव का यह दायित्व है कि समिति द्वारा लिए गये निर्णय को क्रमबद्ध करते हुए प्राप्त आवेदन पत्रों की एक प्रति अन्य सभी अभिलेखों सहित बोर्ड कार्यालय को उपलब्ध कराएगें।पेंशन भुगतान प्रत्येक माह किया जायेगा।लाभार्थी श्रमिक का यह दायित्व होगा कि वह प्रत्येक वर्ष माह अप्रैल में अपने जीवित होने का प्रमाण जिला श्रम कार्यालय को प्रस्तुत करें। यह जीवित प्रमाण-पत्र किसी भी राजपत्रित अधिकारी द्वारा दिया जा सकता है।ऐसे सभी प्राप्त जीविता प्रमाण-पत्र सदस्य सचिव मई के प्रथम सप्ताह में बोर्ड कार्यालय को उपलब्ध कारायेंगे।यदि लाभार्थी श्रमिक की मृत्यु हो जाती है तो पारिवारिक पेन्शन के रूप में उसके पति/पत्नी को उक्त पेंशन की धनराशी स्वीकृत की जा सकती है। शर्तं यह होगाी कि वह पात्रता की शर्त संख्या 04 पूर्ण करता /करती हो और उत्तर प्रदेश का मूल निवासी बना रहता हो,परन्तु यह भी कि पारिवारिक पेंशन रू0 1000.00(रु0 एक हजार मात्र) प्रतिमाह से अधिक नहीं होगी।यदि लाभार्थी की मृत्यु हो जाती है और जानकारी के अभाव में पेंषन की अगली किष्त का भुगतान हो जाता है तो उसके आश्रितों से उक्त की वसूली की जाएगी।यदि पति-पत्नी दोनों पंजीकृत श्रमिक हैं और दोनो पेंशन योजना का लाभ प्राप्त कर रहे हैं तो एक की मृत्यु के बाद दूसरे को मात्र अपनी पेंशन का लाभ देय होगा। पेंशन की धनराशि प्रत्येक पात्र लाभार्थी/निर्माण-श्रमिक को प्रतिमाह की दर से रू0-1000/-(रु0 एक हजार मात्र) की धनराशि उसके जीवित रहने तक उसे स्वयं और उसकी मृत्यु के पश्चात् उसकी पत्नी/पति (जैसी भी स्थिति हो)देय होगी। अगले वर्ष की पेंशन में रू0-50.00(पचास रूपये मात्र) प्रति दो वर्ष की दर से अधिकतम रू0-1250/-(रु0 बारह सौ पचास मात्र) प्रतिमाह की दर से वृद्धि करते हुऐ भुगतान किया जायेगा। पारिवारिक पेंशन के रूप में पेंशन प्रप्तकर्ता के प्रति/पत्नी को रूपये1000/-(रु0 एक हजार मात्र) की पेंशन अनुमन्य होगी। सौर ऊर्जा सहायता योजना उद्देश्य पंजीकृत लाभार्थी श्रमिकों एवं उनके परिवार की ऊर्जा ⁄ प्रकाश सम्बन्धी आवश्यकता पूर्ण करना है जिससे उनकी कार्यकुशलता में वृद्धि होगी एवं आश्रित बच्चों को अध्ययन में सहायता मिलेगी। पात्रता सभी पंजीकृत निर्माण श्रमिक लाभार्थी होंगे। किसी अन्य योजना में सोलरलाइट ⁄ लालटेन का लाभ न प्राप्त किया हो। परिवार को एक इकाई माना जाएगा। स्वयं पति⁄पत्नी‚ आश्रित माता पिता‚ 21 वर्ष से कम आयु के पुत्र तथा अविवाहित पुत्री) हितलाभ पंजीकृत लाभार्थी श्रमिक, जो अधिनियम के अंतर्गत आवर्त होते हैं,को सोलर लाइट सौर ऊर्जा सहायता योजना के अंतर्गत अगले कार्यादेश से प्रत्येक लाभार्थी से रू0 250/-की धनराशि अंशदान के रूप में लिया जाएगा। आवेदन प्रक्रिया पंजीकृत निर्माण श्रमिक द्वारा निकटस्थ श्रम कार्योलय अथवा सम्बन्धित तहसील कार्यालय या तहसील कार्यालय के तहसीलदार अथवा सम्बन्धित विकास खण्ड कार्यालय के खण्ड विकास अधिकारी एवं किसी भी पंजीकरण कार्यालय को निर्धारित प्रपत्र पर आवेदन पत्र दो प्रतियों में प्रस्तुत करना होगा। आवेदक को प्रार्थना पत्र प्राप्त करने वाले अधिकारी द्वारा प्राप्ति की तिथि अंकित करते हुए प्राप्ति रसीद दी जायेगी। आवेदन पत्र के साथ सम्बन्धित श्रमिक द्वारा लाभार्थी श्रमिक के पंजीयन की प्रमाण पत्र की सत्यापित प्रति संलग्न करना अनिवार्य होगा। साइकिल सहायता योजना उद्देश्य निर्माण कामगारों को कार्य हेतु अपने आवास से काफी दूरी तय करनी पडती है‚ जिसमें उन्हे पैदल चलना पड़ता है और अपनी सीमित आय में से धनराशि खर्च करनी पडती है। कामगारों को कार्यस्थल पर पहुंचने में सुविधा ईंधन⁄व्यय की बचत हो। इसका मूल उद्देश्य कामगारों को साइकिल की सुविधा उपलब्ध कराना है। पात्रता श्रमिक के रूप में कम से कम 06 माह से पंजीकृत हो। केन्द्र अथवा प्रदेश सरकार की किसी अन्य योजना में साइकिल की सुविधा प्राप्त करने वाला पंजीकृत निर्माण श्रमिक इस योजना के अंतर्गत् पात्र नही होगा। हितलाभ बोर्ड द्वारा साइकिल क्रय हेतु रु० 3000⁄– की धनराशि सब्सिडी के रूप में दी जाएगी। बाकी धनराशि लाभार्थी श्रमिक द्वारा स्वंय दी जाएगी।भविष्य में आवश्यकता पडने पर श्रमिक स्वयं उसका सत्यापन क्षेत्रीय कार्यालय से करवायेगा तथा ऐसा न करने का उससे वसूली की कार्यवाही अपनाई जाएगी एवं उसकी सदस्यता समाप्त करने पर विचार किया जाएगा। परिभाषा लाभार्थी श्रमिक-भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार (सेवाशर्त एवं विनियमन) अधिनियम, 1996 की धारा 12 में उल्लिखित परिभाषानुसार। योजना में बोर्ड से तात्पर्य “उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण बोर्ड“ से होगा। आवेदन प्रक्रिया आवेदन पत्र के साथ निम्न अभिलेख प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा पंजीकृत निर्माण श्रमिक को बोर्ड द्वारा निर्गत पहचान प्रमाण-पत्र की सत्यापित फोटो-प्रतिपंजीकृत निर्माण श्रमिक द्वारा जमा किए गए अंशदान की रसीद की छायाप्रति।पहचान से संबंधित अभिलेख जैसे- वोटर आई0डी0, राशन कार्ड, निवास प्रमाण पत्र इत्यादि। इस आशय का शपथ-पत्र कि केन्द्र अथवा राज्य सरकार की किसी भी योजना में उसे साइकिल का लाभ प्राप्त नहीं हुआ है। गम्भीर बीमारी सहायता योजना उद्देश्य पंजीकृत कर्मकार की स्वंय अथवा पारिवारिक सदस्य को गम्भीर बिमारी की स्थिति में सरकारी चिकित्सालय में कराये गए इलाज के उपरान्त किए गए व्यय की प्रतिपूर्ति कराया जाना है। पात्रता सभी निर्माण श्रमिक (गत वित्तीय वर्ष से पंजीकृत) स्वंय एवं पारिवारिक सदस्य पात्र होंगे। इस योजना के अन्तर्गत हृदय आपरेशन‚गुर्दा ट्रान्सप्लान्ट‚ लीवर ट्रान्सप्लान्ट‚ मस्तिष्क आपरेशन‚ रीढ़ की हड्डी ऑपरेशन‚ पैर के घुटने बदलना‚ कैंसर इलाज‚ एड्स बिमारी आदि ही लाभान्वित होंगी। हितलाभ लाभार्थी स्वयं या पारिवारिक सदस्य की गम्भीर बिमारी में प्रवेश के किसी सरकारी स्वायत्तशासी चिकित्सालय में कराये गये इलाज पर व्यय की शत प्रतिशत पूर्ति बोर्ड द्वारा की जायेगी। लाभार्थी गम्भीर बिमारी की स्थिति में राष्ट्रस्वास्थ्य बीमा योजना भारत सरकार (सीजीएचएस व ईएसआई ) द्वारा मान्यता प्राप्त अस्पतालों में इलाज कराते हैं तो इलाज की प्रतिपूर्ति सीधे अस्पताल को दी जायेगी। आवश्यक शर्तें श्रमिक बोर्ड का पंजीकृत लाभार्थी श्रमिक हो। किसी गम्भीर बीमारी के इलाज के फलस्वरूप उपचार करने वाले चिकित्सक/अस्पताल द्वारा प्रारूप-2 पर दिया गया प्रमाण पत्र। दवाईयों के क्रय पर हुए व्यय के मूल बिल/बाउचर जो कि उस चिकित्सक/अस्पताल द्वारा प्रामाणित किए गए हो, जिनके द्वारा उपचार किया गया हो। सामान्य निर्देश:- लाभार्थी श्रमिक द्वारा निर्धारित प्रपत्र पर दो प्रतियों में आवेदन-पत्र प्रस्तुत करना होगा। आवेदन पत्र के साथ निम्नलिखित अभिलेख भी संलग्न अनिवार्य रूप से किए जायेंगे:- निर्धारित प्रारूप-1 पर आवेदन पत्र। पहचान प्रमाण पत्र की फोटो प्रति निर्धारित प्रारूप-2 पर समक्ष मुख्य चिकित्साधीक्षक/चिकित्सा बोर्ड द्वारा अनुमन्य एवं प्रतिहस्ताक्षरित प्रमाण-पत्र दवाईयों के क्रय पर हुए व्यय के मूल बिल/बाउचर, जो कि उस चिकित्सक/अस्पताल द्वारा प्रमाणित तथा भुगतान हेतु सत्यापित किए गए हो, जिनके द्वारा उपचार किया गया हो। यदि रोगी अविवाहित पुत्री अथवा 21 वर्ष से कम आयु का पुत्र है तो ऐसी स्थिति में उसका पंजीकृत निर्माण श्रमिक पर आश्रित होने का प्रमाण-पत्र इस समय कार्यवाही में जिला श्रम कार्यालय द्वारा नोडल एजेंसी के रूप में कार्य किया जाएगा। योजनावार तथा लाभार्थीवार विवरण निर्धारित पंजिका में जिला श्रम कार्यालय के साथ-साथ क्षेत्रीय अपर/उप श्रम आयुक्त कार्यालय में संरक्षित रखे जायेंगे, जिसके लिए पंजिका प्रपत्र संख्या-3 संलग्न किया जा रहा है। क्षेत्रीय अपर/उप श्रम आयुक्त कार्यालय द्वारा योजनावार,लाभार्थीवार तथा जिलवार पूर्ण विवरण निर्धारित प्रपत्रों पर मासिक आधार पर संकलित करते हुए, उ0प्र0 भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के कार्यालय में मास की समाप्ति के उपरांत अगले 04 दिन के अंदर उपलब्ध करवायें जायेंगे। मेधावी छात्र पुरस्कार योजना उद्देश्य इस योजना का मूल उद्देश्य उ०प्र० भवन एवं अन्य सन्निर्माण प्रक्रियाओं में कार्यरत लाभार्थी श्रमिकों के मेधावी बच्चों को शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित करना एवं उच्च एवं व्यवसायिक शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ना है। पात्रता इस योजना के लिए वह सभी पंजीकृत कर्मकार पात्र होंगे जिनके पुत्र एवं पुत्रियों ने कक्षा 05 से 08 तक 70 प्रतिशत या उससे अधिक अंको तथा कक्षा 09 से 12 तक 60 प्रतिशत हों। हितलाभ कक्षा 5 से 7 तक जिनका प्राप्तांक 70 प्रतिशत है उन्हे रु० 4000⁄–(पुत्र को) तथा रु० 4500⁄– (पुत्री को) दो किश्तों मेंकक्षा 8 जिनका प्राप्तांक 70 प्रतिशत है उन्हें रु० 5000⁄–(पुत्र को) तथा रु० 5500⁄– (पुत्री को) दो किश्तों में एवं कक्षा 9 एवं 10 जिनका प्राप्तांक 60प्रतिशत है उन्हे रु० 5000⁄–(पुत्र को) तथा रु० 5500⁄– (पुत्री को) दो किश्तों में।कक्षा 11 से 12 तक जिनका प्राप्तांक 60 प्रतिशत है उन्हे रु० 8000⁄–(पुत्र को) तथा रु० 10000⁄– (पुत्री को) दो किश्तों में बतौर हितलाभ देय है।बी०ए० ⁄ बी०कॉम⁄बी०एस०सी०‚ एम०ए० ⁄एम०कॉम⁄एम०एस०सी०‚ एल०एल०बी०‚ पालिटेकनिक डिप्लोमा‚इन्जीनियरिंग ⁄ चिकित्सा डिग्री हेतु प्राप्तांक 60प्रतिशत हो तब देय हितलाभ रु० 10000⁄– से 22000⁄– में उपरोक्त शिक्षा के लिए निर्धारित है। आवेदन प्रक्रियाः- लाभार्थी या उसके परिवार के किसी सदस्य की ओर से उक्त सहायता प्राप्त करने हेतु लाभार्थी के पुत्र या पुत्री के संबंधित कक्षा में उपरोक्त विवरण के अनुसार या उससे अधिक अंको से उत्तीर्ण होने की तिथि से 01वर्ष के अंदर निकटस्थ श्रम कार्यालय अथवा संबंधित तहसील के तहसीलदार कार्यालयअथवा संबंधित खण्ड विकास के खण्ड विकास अधिकरी कार्यालय में निर्धारित प्रपत्र पर संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य से अभिप्रमाणित फोटोयुक्त आवेदन पत्र दो प्रतियों में प्रस्तुत किया जाएगा, जिसकी पावती आवेदक को प्रार्थना पत्र करने वाले अधिकारी/कर्मचारी द्वारा प्राप्ति तिथि अंकित करते हुए उपलब्ध करवाई जाएगी। आवेदन पत्र के साथ संबंधित पुत्र या पुत्री के संबंधित कक्षा में उत्तीर्ण होने की अंकतालिका की प्रमाणित प्रति संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य के प्रमाण-पत्र के साथ संलग्न किया जाना अनिवार्य होगा। मान्यता प्राप्त विद्यालयों से उत्तीर्ण कक्षा 05 व08के संबंध में प्रमाण-पत्र जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित ही स्वीकार किए जाएगें।यआवेदन पत्र के साथ संबंधित पुत्र या पुत्री के आगे भी शिक्षारत् रहने का प्रमाण-पत्र जो कि संबंधित विद्यालय द्वारा निर्गत तथा प्रधानाचार्य द्वारा अभिप्रमाणित हो, मूल रूप में संलग्न किया जाना अनिवार्य होगा। जहाँ आवेदन आई0टी0आई0 अथवा इन्जीनियरिंग डिग्री अथवा चिकित्सा में डिग्री के लिए किया जा रहा हो वहॅा प्रवेश के प्रमाण स्वरूप् सम्बन्धित सरकारी कालेज/आई0टी0आई में प्रवेश की रसीद की प्रमाणित छायाप्रति भी संलग्न की जाएगी। हित-लाभ की स्वीकृति हेतु प्रक्रिया, भुगतान की प्रक्रिया तथा सूचना का रखरखाव एवं प्रेषण की प्रक्रिया योजना के अन्तर्गत प्राप्त आवेदन पत्र यदि जिला श्रम कार्यालय से इतर तहसील/ खण्ड विकास कार्यालय अथवा किसी तहसील में स्थित श्रम प्रवर्तन अधिकारी कार्यालय में प्राप्त होते हैं, तो उन्हें प्राप्त होने की तिथि से 07 दिन के अंदर प्रत्येक दशा में जिला श्रम कार्यालय मे प्राप्त करवा दिया जाएगा।जिला श्रम कार्यालय में इस प्रकार प्राप्त सभी आवेदन पत्रों को सूचीबद्ध करते हुए, पत्रावली पर पूर्ण विवरण अंकित करते हुए, जिलाधिकारियों के समक्ष प्रार्थना पत्र प्राप्त होने की तिथि से दस कार्य दिवस के अंदर उनके आदेशार्थ प्रस्तुत किया जाएगा।जिलाधिकारी द्वारा ऐसे प्राप्त सभी प्रार्थना पत्रों पर प्रार्थना पत्र के साथ संलग्न अभिप्रमाणित अभिलेखों से संतुष्ट होने की स्थिति में योजनानुसार अनुमन्य धनराशि की स्वीकृति के आदेशा पत्रावली पर किये जाएगें। जिलाधिकारी यदि ऐसा आवश्यक/वांछनीय प्रतीत करें,तो प्रार्थना पत्र में उल्लिखित तथ्यों की स्थलीय जाँच के आदेश भी जिला श्रम कार्यालय के माध्यम से कर सकते है। अथवा जिलाधिकारी एक संयुक्त जाँच टीम गठित करते हुए समयबद्ध स्थलीय जाँच करवा सकते है। स्वीकृति सम्बन्धी यह कार्यवाही यथासम्भव पत्रावली प्रस्तुत होने के 15 दिन के अन्दर पूर्ण कर ली जाए।आवेदन पत्र स्वीकृत/ अस्वीकृत होने की जैसी भी स्थिति होगी, उसकी सूचना आवेदक को उपलब्ध कराई जाएगी।जिलाधिकारी से आवेदन पत्र स्वीकृत होने की स्थिति में यथासम्भव 15 दिन के भीतर जिला श्रम कार्यालय के प्रभारी अधिकारी द्वारा सहायक श्रमायुक्त के माध्यम से स्वीकृति प्राप्त पत्रावली पूर्ण विवरण सहित क्षेत्रीय अपर/उप श्रम आयुक्त के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी क्षेत्रीय अपर/उप श्रमायुक्त द्वारा इस प्रकार जिलाधिकारी से स्वीकृति प्राप्त पत्रावली उनके कार्यालय में प्राप्त होने की तिथि से विलम्बतम 10 दिन के भीतर, सम्बन्घित निर्माण श्रमिक के नाम से रेंखाकिंत चेक स्वीकृति धनराशि भुगतान हेतु निर्गत किया जाएगा, जिसमें लाभार्थी के बैंक खाते का नम्बर,शाखा इत्यादि का भी स्पष्ट विवरण अंकित किया जाएगा।इस प्रकार निर्गत चेक सम्बन्धित जिला श्रम कार्यालय के प्रभारी अधिकारी के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा । बोर्ड का आगामी 06 माह में यह प्रयास होगा कि सम्बन्धित श्रमिक के बैंक खाते में सीधे ट्रान्सफर के माध्यम से धनराशि भेजी जाए परन्तु जब तक यह व्यवस्था प्रभावी नहीं हो जाती है, तब तक इस प्रकार इस प्रस्तर में उल्लिखित पूर्व निर्देश के अनुसार कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।इस प्रकार जिला श्रम कार्यालय में प्राप्त रेंखाकित चेक जिलाधिकारी के संज्ञान में लाते हुए लाभार्थी को 10 दिन के भीतर उपलब्ध करा दिया जाएगा और उससे प्राप्त रसीद दो प्रतियों में प्राप्त की जाएगी। प्राप्ति रसीद की एक प्रति जिला श्रम कार्यालय में तथा दूसरी प्रति क्षेत्रीय अपर/उप श्रमायुक्त कार्यालय में अभिलेखार्थ संरक्षित की जाएगी।इस समग्र कार्यवाही में जिला श्रम कार्यालय द्वारा नोडल एजेंसी के रूप में कार्य किया जाएगा। योजनावार तथा लाभार्थीवार विवरण निर्धारित पंजिका में जिला श्रम कार्यालय के साथ-साथ क्षेत्रीय अपर/उप श्रमआयुक्त कार्यालय में संरक्षित रखे जायेंगे। क्षेत्रीय अपर/उप श्रमायुक्त कार्यालय द्वारा योजनावार, लाभार्थीवार तथा जिलावार पूर्ण विवरण निर्धारित प्रपत्रों पर मासिक आधार पर संकलित करते हुए, उ0प्र0 भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के कार्यालय में मास की समाप्ति के उपरांत अगले 07 दिन के अंदर उपलब्ध करवायें जायेंगें । मध्यान्ह भोजन सहायता उद्देश्य निर्मांण श्रमिक अपने कार्य की तलाश में दूर–दराज के राज्यों तथा जनपदों से आते है तथा उनके पास न तो रहने का स्थान होता है और न ही भोजन बनाने की कोई उचित व्यवस्था जिसके अभाव में उनकी कार्यकुशलता प्रभावित होती है तथा उनके स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पडता है। अतः ऐसे श्रमिकों को उनक कार्यस्थल के आसपास एकबार पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराये जाने से उनके स्वास्थ्य एवं कार्यक्षमता पर सकारात्मक प्रभाव पडेगा। पात्रता इस योजना में भवन सन्निर्माण कर्मकार (रोजगार नियोजन सेवाशर्त) अधिनियम‚ 1996 की धारा–12 के अंतर्गत पंजीकृत सभी निर्माण श्रमिक पात्र होंगे। हितलाभ पंजीकृत लाभार्थी श्रमिकों को निर्धारित मूल्य रुद्ध 10⁄– अथवा समय–समय पर संशोधित मूल्य पर भोजन उपलब्ध कराया जायेगा। भोजन के मूल्य का भुगतान श्रमिक द्वारा सीधे नकद के रूप में किया जाएगा। श्रमिक द्वारा भुगतान किये गये उक्त् रु० 10⁄– के अतिरिक्त अवशेष लागत की प्रतिपूर्ति बोर्ड द्वारा सब्सिडी के रूप में संस्था को की जायेगी। भोजन की मात्रा भोजन दो प्रकार के मीनू में उपलब्ध कराया जायेगा, जिनकी मात्रा निम्नवत होगी- मीनू- 1 क्रं. सामग्री एवं संख्या वजन कैलोरी 1 रोटी-6 300 ग्राम (तैयार) लगभग 1200 2 सब्जी-2 250 ग्राम (तैयार) 2 3 गुड 20 ग्राम 3 4 सलाद 40 ग्राम 4 5 अचार - 5 6 हरी मिर्च 2 पीस 6 मीनू- 2 क्रं. सामग्री एवं संख्या वजन कैलोरी 1 चावल 400 ग्राम (तैयार) लगभग 1150 2 सादी सब्जी-2 125 ग्राम (तैयार) 3 दाल 250 ग्राम 4 गुड 20 ग्राम 4 5 सलाद 40 ग्राम 5 6 अचार - 6 7 हरी मिर्च 02 पीस 7 आवासीय विद्यालय योजना उद्देश्य प्रायः देखा जाता है कि निर्माण–श्रमिकों के बच्चे अपने माता–पिता के साथ कार्य स्थल पर ही रहते है। माता–पिता की गरीबी तथा साधनहीनता के कारण ऐसे बच्चे किसी विद्यालय में प्रवेश नही ले पाते है अथवा प्रवेश लेने के बाद अपनी शिक्षा जारी नही रख पाते है। निर्माण–श्रमिकों के ऐसे बच्चो के लिए आवासीय विद्यालय प्रारम्भ किये जाने की आवश्यकता अनुभवन करते हुए आवासीय विद्यालय योजना प्रस्तावित की गयी है। योजना का उद्देश्य पंजीकृत निर्माण–श्रमिकों के 06 से 14 वर्ष तक की आयु वर्ग के बच्चों को प्राथमिक‚जूनियर हाईस्कूल एवं माध्यमिक शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराते हुए उन्हें गुणवत्तापरक शिक्षा प्रदान करना है। पात्रता उ०प्र० भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार (विनियमन एवं सेवाशर्तें) अधिनियम 1996 की धारा 12 के अन्तर्गत लाभार्थी के रूप में पंजीकृत सभी निर्माण–श्रमिकों के ऐसे पुत्र⁄पुत्रियां‚ जिनकी आयु 06 से14 वर्ष के मध्य है‚ आवासीय विद्यालयों में प्रवेश पाने के पात्र होंगे। हितलाभ एवं प्रक्रिया पंजीकृत सभी निर्माण–श्रमिकों के ऐसे पुत्र⁄पुत्रियों‚ जिनकी आयु 06 से14 वर्ष के मध्य हैं‚ आवासीय विद्यालयों में निशुल्क शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं। योजना का क्षेत्र प्रारम्भ में जनपद इटावा, भदोही, कन्नौज, मुरादाबाद, फिरोजाबाद,ललितपुर, बहराइच, गाजियाबाद, कानपुर, आजमगढ़, आगरा एवं मेरठ में आवासीय विद्यालय योजना का संचालन किया जायेगा। बाद में प्राप्त अनुभवों एवं आवष्यकता के आधार पर अध्यक्ष, बोर्ड के अनुमोदन से इस योजना का विस्तार अन्य जनपदों में भी किया जायेगा। रुपरेखा/क्रियान्वयन योजना का संचालन महिला समाख्या/गैर सरकारी/स्वैच्छिक संस्थाओं के माध्यम से कराया जायेगा। कक्षा 5 तक की षिक्षा 2 वर्ष के ब्रिज कोर्स के रूप में होगी। कक्षा 6 से कक्षा 8 तक की षिक्षा 3 वर्ष की होगी। अग्रेतर कक्षाओं अर्थात कक्षा 9 से 12 तक की षिक्षा देने के लिये, अनुभव के आधार पर, कालान्तर में तत्समय अलग से योजना बनायी जायेगी। योजना के अन्तर्गत विद्यालय पूर्णतः आवासीय यथावष्यक अलग-अलग या फिर सह-षिक्षा के आधार पर संचालित होंगे। विद्यालय में बेसिक षिक्षा परिषद/सी0बी0एस0ई0 /आई0सी0एस0ई0-जो भी उ0प्र0 भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा निर्धारित किया जायेगा-द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार षिक्षा दी जायेगी। प्रत्येक विद्यालय में 4 पूर्णकालिक अध्यापक, 3 अंषकालिक अध्यापक, 1 वार्डेन, 1 लेखाकार, 4 चैकीदार/चपरासी, 1 मुख्य रसोईया एवं 1 सहायक रसोईया नियोजित होंगे। प्रत्येक आवासीय विद्यालय कम से कम 5 कक्ष होंगे, जिनमें से 1 कक्ष अध्यापकों के लिए, 1 कक्ष कार्यालय के लिये तथा 3 कक्ष बच्चों की षिक्षा के उपयोग के लिये होंगे। प्रथम दो कक्ष 15ग्20 वर्ग फीट क्षेत्रफल के तथा शेष 3 कक्ष 25ग्25 वर्ग फीट क्षेत्रफल के होंगे। प्रत्येक विद्यालय में कम से कम 03 शौचालय, स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था तथा बिजली कनेक्षन का होना आवष्यक है। आवासीय विद्यालय में छात्र एवं छात्राओं के लिये पृथक-पृथक छात्रावास की व्यवस्था होगी। ऐसे प्रत्येक आवास/कक्ष/डारमेट्री कम से कम 2000 वर्गफीट क्षेत्रफल का होगा। छात्र/छात्राओं के लिए कम से कम 3-3 पृथक-पृथक शौचालय एवं स्नानगृह होंगे। प्रत्येक छात्रावास में 1 किचन होगा तथा कम से कम 1000 वर्गफीट क्षेत्रफल का भोजनालय-कक्ष होगा। छात्रावास में कम से कम 15ग्20 वर्ग फीट का एक कक्ष वार्डेन के लिए होगा। आवासीय विद्यालयों के छात्र एवं छात्राओं को प्रतिदिन प्रातःकाल नाष्ता, मध्याहृन भोजन, सांयकालीन चाय तथा रात्रिकालीन भोजन (डिनर) दिया जायेगा। मीनू का निर्धारण बोर्ड द्वारा किया जायेगा। छात्रावास में स्वच्छ पेयजल, खेल-कूद एवं मनोरंजन की पर्याप्त व्यवस्था की जायेगी। विद्यालय के संचालन हेतु समस्त शै़क्षणिक एवं अषैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्ति बोर्ड द्वारा नामित संस्था (विद्यालय संचालन हेतु) द्वारा की जायेगी। ऐसे विद्यालयों की मान्यता सम्बन्धी कार्यवाही भी सम्बन्धित संस्था द्वारा की जायेगी। छात्रावास में भोजन सुरक्षा, साफ-सफाई आदि का दायित्व भी सम्बन्धित संस्था का होगा। विद्यालय के संचालन हेतु सम्बन्धित संस्था के चयन के उपरान्त चयनित संस्था एवं सचिव, बोर्ड के मध्य सहमति पत्र हस्ताक्षरित किया जायेगा, जिसके अंतर्गत आवासीय विद्यालय संचालन की शर्तें,भुगतान की प्रक्रिया आदि निर्धारित की जायेगी। आवासीय विद्यालय के संचालन का बजट कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय के आधार पर होगा। पंजीयन फॉर्म, योजना कॉमन एप्लीकेशन फॉर्म, अधिष्ठान पंजीयन फॉर्म और उपकर से सम्बंधित प्रारूप के लिए विभाग के वेबसाइट पर देखें| स्रोत: उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड,श्रम विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार