मानव व्यापार (Human Trafficking) एक गम्भीर वैश्विक समस्या है जिसमें मनुष्यों को जबरन या धोखे से उठाकर उनका शोषण किया जाता है। यह अपराध आमतौर पर बन्दुआ मजदूरी, यौन शोषण, बाल श्रम, अंगों की तस्करी, या जबरिया विवाह जैसे कृत्यों से जुड़ा होता है। यह मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है और समूचे विश्व में इसके विरूद्ध कानूनी और सामाजिक प्रयास हो रहे हैं मुख्य प्रकार यौन शोषण- महिलाओं और बच्चों को जबरन वेश्यावृत्ति या पोर्नोग्राफी के लिए बेचा जाता है। बंधुआ मजदूरी- लोगों को झूठे वादों या कर्ज के बहाने कारखानों, खेतों, या घरेलू काम में फंसाया जाता है। बाल मजदूरी- बच्चों को रेस्टोरेंट या होटलों या घरों में बाल मजदूरी करने के लिए मजबूर किया जाता है और उन्हें जबरन या धोखे से फसाया जाता हैं व शहरी आबादी क्षेत्रों में भीख मांगने के लिए मजबूर किया जाता है। अंग तस्करी- गरीब या असहाय व्यक्तियों के अंगों को अवैध रूप से निकालकर बेचा जाता है। कारण गरीबी और बेरोजगारी शिक्षा और जागरूकता की कमी युद्ध और राजनीतिक अस्थिरता लैंगिक असमानता और भ्रष्टाचार प्रभाव पीड़ितों को शारीरिक, मानसिक, और भावनात्मक चोट। समाज में असुरक्षा और अपराध बढ़ना। बच्चों का बचपन और शिक्षा छिनना। उपाय कानूनी प्रयास- UN का "पालर्मो प्रोटोकॉल" (2000), भारत में "इम्मोरल ट्रैफिक (प्रिवेंशन) एक्ट" (ITPA)। जागरूकता अभियान- स्थानीय समुदायों को शिक्षित करना। पीड़ितों की सहायता- रिहेबिलिटेशन केंद्र, मनोसामाजिक समर्थन। अंतरराष्ट्रीय सहयोग- पुलिस और एजेंसियों के बीच सूचना साझा करना। संगठन और पहल :- यूएनओडीसी (UNODC) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग(NHRC) द्वारा निगरानी करना क्या करें संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्ट करें (चाइल्ड हेल्पलाइन- 112, भारत)। स्थानीय एनजीओ की सहायता लें। सोशल मीडिया पर जागरूकता फैलाएं। मानव तस्करी के विरूद्ध सामूहिक लड़ाई और जिम्मेदारी एवं सतर्कता आवश्यक है। इसके लिए सरकार, नागरिक,व समाज, और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को साथ मिलकर कार्य करना होगा।