दहेज़ ऐसी सम्पत्ति या मूल्यवान वस्तु जो विवाह के पहले, विवाह के समय अथवा उसके बाद विवाह के सम्बन्ध में एक पक्ष (वर या वधू) सीधे तौर पर या किसी भी प्रकार से दूसरे पक्ष को देता है या देना स्वीकार करता है। (लेकिन ये मेहर पर लागू नहीं है।) दहेज लेना और देना दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 के अधीन दण्डनीय अपराध है। कानून के अनुसार दहेज देना अपराध है; दहेज लेना अपराध है; दहेज लेने या देने में सहायता करना अपराध है; दहेज मांगना अपराध है; दहेज के लिए विज्ञापन या इश्तहार देना अपराध है। यह सभी अपराध संज्ञेय हैं यानी थाने में शिकायत होने पर बिना मजिस्ट्रेट के आदेश के पुलिस मामले की जांच कर सकती है। विवाह के समय माता-पिता, मित्र, सगे सम्बन्धी या अन्य किसी के द्वारा उपहार दिया जा सकता है। अधिनियम के मुख्य प्रावधान दहेज एक गैर जमानती अपराध है यानी मजिस्ट्रेट के आदेश । के बिना आरोपी को जमानत पर रिहा नहीं किया जा सकता है; इसमें अपराध आपसी समझौते से नहीं निपटाये जा सकते हैं; दहेज संबंधी अपराध के आरोपी व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह सिद्ध करे कि उसने ऐसा अपराध नहीं किया है; विवाहित महिला विवाह के समय स्वेच्छा से मिला धन/सामान या सम्पत्ति उपहार स्वरूप जो अपने मायके से अपने साथ लेकर आती है वह स्त्रीधन माना जाता है; विवाह के समय मिले उपहार/सम्पत्ति को विवाह के 03 महीने के भीतर वधू को दे दिया जाना चाहिए; अगर उपहार/सम्पत्ति शादी के समय या उसके बाद प्राप्त हुई है तो उपहार/सम्पत्ति प्राप्त होने की तारीख से 03 महीने के भीतर वधू को दे दिया जाना चाहिए; गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाली दहेज उत्पीड़ित महिला जिसके द्वारा थाने में एफ. आई. आर दर्ज करायी गयी और कोर्ट में केस चल रहा हो तो केस की पैरवी हेतु सरकार द्वारा निर्धारित धनराशि जिला परिवीक्षा/दहेज प्रतिषेध अधिकारी द्वारा प्रदान किये जाने का प्रावधान है; गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाली दहेज उत्पीड़ित महिला जिसके द्वारा थाने में एफ.आई.आर. दर्ज हो या कोर्ट में केस चल रहा हो, को सरकार द्वारा निर्धारित प्रति माह आर्थिक सहायता जिला परिवीक्षा/ दहेज प्रतिषेध अधिकारी द्वारा प्रदान किये जाने का प्रावधान है। अधिनियम के अन्तर्गत दण्डात्मक प्रावधान कृत्य सजा दहेज लेना या देना या उसके लिए उकसाना 05 वर्ष तक की सजा तथा रू. 15000/- का जुर्माना या दहेज का मूल्य जो भी अधिक हो किसी भी प्रकार से दहेज की मांग करना 06 माह से 02 वर्ष तक सजा तथा रू. 10000/- का जुर्माना दहेज मृत्यु न्यूनतम 07 साल से आजीवन कारावास तक की सजा अगर कोई व्यक्ति कानून द्वारा तय किये गये समय में उपहार लड़की को नहीं लौटाता है, तो उसकी शिकायत दर्ज करायी जा सकती है। उपहार न लौटाने वालों को 06 माह से 02 साल तक की सजा या 05 से 10 हजार रूपये तक का जुर्माना, या फिर दोनों हो सकते हैं; अगर ऐसे व्यक्ति से उपहार वापिस मिलने से पहले उस लड़की या औरत की किसी भी कारण से मृत्यु हो जाये, तो ऐसे में महिला के वारिस या उसका बेटा/बेटी या फिर उसके माता-पिता उस व्यक्ति से उपहार मांग सकते हैं जिसके पास वह रखा हो; जुर्माने की रकम दहेज पीड़ित महिला को न्यायालय के आदेश पर मुआवजे के रूप में दी जा सकती है; पति के दोषी पाये जाने के बाद महिला 02 माह के भीतर गुजारा भत्ता और खर्चे के लिए आवेदन कर सकती है; अगर विवाहित महिला की मौत विवाह के 07 साल के भीतर हो जाती है तो उसकी सारी सम्पत्ति उसके बच्चों को दी जायेगी। बच्चे न होने की स्थिति में उसकी सारी सम्पत्ति उसके माता-पिता को सौंपी जा सकती है; यदि किसी महिला की शादी के 07 साल के भीतर असाधारण मौत हो जाती है (जैसे - जलकर या फांसी लगाकर या फिर आत्महत्या करके) और मृत्यु से पहले उसे दहेज के लिए तंग किया गया हो तो दहेज मृत्यु (धारा - 304 (ख), भारतीय दण्ड संहिता, 1860) कहलाएगी। दहेज की रिपोर्ट लिखाने की या मुकदमा चलाने की कोई समय सीमा नहीं है लेकिन यह रिपोर्ट जल्द से जल्द लिखवानी चाहिए। तहसील, जिला, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से निःशुल्क परामर्श/विधिक सहायता प्राप्त की जा सकती है। शिकायत किससे और कहाँ करें अपने नजदीकी पुलिस थाने से; तहसील, जिला, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से निःशुल्क परामर्श/विधिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं। नजदीकी कार्यपालक मजिस्ट्रेट से; राज्य या राष्ट्रीय महिला आयोग से उपरोक्त में किसी से भी, स्वयं, माता-पिता या अन्य रिश्तेदार या सरकार द्वारा मान्य कोई समाज सेवी संस्था के माध्यम से शिकायत दर्ज करायी जा सकती है या फिर टोल फ्री नं. पर कॉल कर सकते हैं। टोल फ्री/हेल्पलाइन नम्बर समाधान शिकायत निवारण प्रकोष्ठ 18001805220 वूमेन्स पावर लाइन 1090 पुलिस 100 निःशुल्क विधिक सहायता 18004190234, 15100 स्त्रोत: दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान, उत्तर प्रदेश