भ्रूण हत्या गर्भ में पल रहे भ्रूण की लिंग जांच करना या करवाना तथा शिशु को जीवित पैदा होने से रोकना भ्रूण हत्या कहलाता है।अल्ट्रासाउण्ड या सोनोग्राफी जैसी तकनीकों का इस्तेमाल भ्रूण के स्वास्थ्य को जांचने के लिए किया जाता है परन्तु इसी तकनीक से लिंग चयन के लिए भ्रूण की जांच भी की जाने लगी है। ऐसा करना गर्भधारण पूर्व और प्रसूति-पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम, 1994 के तहत दण्डनीय अपराध है। अधिनियम के अन्तर्गत निम्नलिखित कृत्य/व्यक्ति दण्डनीय होंगे गर्भवती महिला को उसके गर्भ में पल रहे भ्रूण के लिंग के बारे में जानने के लिए उकसाना; गर्भवती महिला पर उसके परिजनों या अन्य व्यक्ति द्वारा लिंग जांचने के लिए दबाव बनाना; वे डॉक्टर जो इस तकनीक का दुरूपयोग करते हैं; कोई भी ऐसा व्यक्ति अपने घर या बाहर कहीं पर लिंग की जांच के लिए किसी तकनीक का प्रयोग या मशीन का प्रयोग करता है; लेबोरेटरी, अस्पताल, क्लीनिक तथा कोई भी ऐसी संस्था जो सोनोग्राफी जैसी तकनीक का दुरुपयोग लिंग चयन के लिए करते हैं; गर्भवती महिला एवं पति द्वारा स्वयं इस तरह का कोई कृत्य जिससे लड़के के जन्म को बढ़ावा दिया जा रहा हो जैसे - आयुर्वेदिक दवाईयाँ खाना या कोई वैकल्पिक चिकित्सा; कोई भी व्यक्ति गर्भवती स्त्री और उसके रिश्तेदारों को शाब्दिक रूप से या सांकेतिक मुद्राओं से भ्रूण का लिंग बताए तो अपराधी माना जाएगा; भ्रूण के लिंग के चयन की सुविधा के बारे में किसी प्रकार के इश्तहार या प्रकाशन या पत्र निकालने वाले। इस कानून के अन्तर्गत प्रत्येक जुर्म संज्ञेय व गैर जमानतीय है और समझौता योग्य नहीं है। अधिनियम के अन्तर्गत दण्डात्मक प्रावधान लिंग चयन के लिए भ्रूण की जांच करना या कराना कानूनन अपराध है; लिंग चयन के लिए भ्रूण की जांच कराने पर 03 साल तक की जेल और रु. 10000 तक का जुर्माना हो सकता है; दुबारा ऐसा अपराध करने पर 05 साल की जेल और रु. 50000 तक का जुर्माना हो सकता है; इस तरह की जांच करने वाले डॉक्टर एवं तकनीकी सहायक को 03 साल तक की जेल और रु. 10000 तक का जुर्माना हो सकता है; डॉक्टर या तकनीकी सहायक द्वारा दुबारा अपराध करने पर 05 साल तक की जेल और रू. 50000 तक जुर्माना हो सकता है; लिंग चयन के लिए भ्रूण की जांच करने वाले केन्द्रों का पंजीयन रद्द किया जा सकता है; लिंग चयन के लिए भ्रूण की जांच सम्बंधी विज्ञापन देना अपराध है।ऐसा करने वाले को 03 साल की जेल और रु. 10000 का जुर्माना हो सकता है; यदि गर्भवती महिला की सोनोग्राफी/अल्ट्रासाउण्ड तकनीक से जांच की जाती है तो अल्ट्रासाउण्ड करने वाले को 02 साल तक जांच का पूरा ब्यौरा रखना होगा।ऐसा नहीं करने पर सजा हो सकती है; ऐसी जांच के लिए गर्भवती महिला से लिखित अनुमति लेना जरूरी है। गर्भवती महिला को इस अनुमति की कॉपी देना भी जरूरी है। शिकायत किससे और कहां करें सक्षम अधिकारी जिला स्तर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सी.एम.ओ.) उप मण्डल स्तर पर उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी (डिप्टी सी.एम.ओ.) यदि सक्षम अधिकारी आपकी शिकायत पर 15 दिनों के अन्दर कोई कदम नहीं उठाता है तो अपने क्षेत्र के न्यायिक दण्डाधिकारी (प्रथम श्रेणी की अदालत) से अपने जनपद के जिलाधिकारी से तहसील, जिला, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से निःशुल्क परामर्श/विधिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं। उपरोक्त में किसी से भी, स्वयं, माता-पिता या अन्य रिश्तेदार या सरकार द्वारा मान्य कोई समाज सेवी संस्था के माध्यम से शिकायत दर्ज करायी जा सकती है या फिर टोल फ्री नं. पर कॉल कर सकते हैं। टोल फ्री/हेल्पलाइन नम्बर समाधान शिकायत निवारण प्रकोष्ठ 18001805220 वूमेन्स पावर लाइन 1090 पुलिस 100 निःशुल्क विधिक सहायता 18004190234, 15100 स्त्रोत: दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान, उत्तर प्रदेश