घरेलू हिंसा परिवार में महिला के साथ शारीरिक, आर्थिक, मानसिक दुर्व्यवहार व यौनिक हिंसा घरेलू हिंसा की परिधि में आता है। ऐसा करना घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 के अधीन दण्डनीय अपराध है। कोई भी पत्नी, बेटी, मां या बिना शादी के साथ रहने वाली महिला मित्र इस कानून के अनुसार अदालत से सुरक्षा का आदेश पाने के लिए प्रार्थना कर सकती है। इस कानून के तहत भरण पोषण पाने के हकदार – घरेलू हिंसा से पीड़ित महिला और उसके बच्चे भरण पोषण किस व्यक्ति से मांगा जा सकता है - वयस्क पुरूष जिसके साथ पीड़ित महिला घर में रह रही है या रहती थी। अधिनियम के मुख्य प्रावधान अगर कोई महिला घरेलू हिंसा की शिकार है तो – संरक्षण अधिकारी से अधिनियम के तहत मिलने वाली सहायता व राहत की जानकारी प्राप्त कर सकती है; निम्न सहायता के लिए मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन कर सकती है - क. संरक्षण हेतु आदेश (धारा -18) ख. साझा घर में निवास करने हेतु आदेश (धारा -19) ग. आर्थिक सहायता (धारा-20) घ. अभिरक्षा का आदेश (धारा -21) ङ. मुआवजा/हर्जाने का आदेश (धारा -22) घरेलू हिंसा की शिकायत "घरेलू हिंसा घटना रिपोर्ट" के नाम से जानी जायेगी; किसी खतरे से बचाव के लिए पुलिस या संरक्षण अधिकारी से सहायता ली जा सकती है; अदालत आरोपी/आरोपियों को वह घर बेचने से रोक सकती है जहां वह महिला भी रहती है; आरोपियों को उस घर में या घर के पास जाने से भी रोका जा सकता है जहाँ महिला रह रही हो; पीड़ित महिला के बच्चों को संरक्षण दिया जा सकता है; पीड़ित महिला को स्त्री धन, आभूषण, कपड़ों और दैनिक उपयोग की वस्तुएं अपने कब्जे में लेने का अधिकार है। तहसील, जिला, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से निःशुल्क परामर्श/विधिक सहायता प्राप्त की जा सकती है। अधिनियम के अन्तर्गत दण्डात्मक प्रावधान यदि कोई व्यक्ति किसी स्त्री का पति या पति का नातेदार होते हुए स्त्री के प्रति क्रूरता करेगा तो उसे 03 वर्ष के करावास की सजा और जुर्माने का दण्ड दिया जा सकता है; यदि कोई व्यक्ति मजिस्ट्रेट के आदेश का पालन नहीं करता है तो ऐसे व्यक्ति को 01 वर्ष की अवधि का कारावास या रू. 20 हजार तक जुर्माना या दोनों का दण्ड दिया जा सकता है; शिकायतकर्ता को न्यायालय आदेश की निःशुल्क प्रतियाँ प्रदान किये जाने का प्रावधान है; मजिस्ट्रेट के आदेश के विरूद्ध 30 दिन के अन्दर सेशन न्यायालय में अपील की जा सकती है। शिकायत किससे और कहाँ करें संरक्षण अधिकारी; जिला अधिकारी द्वारा नियुक्त महिला संरक्षण/सुरक्षा अधिकारी; नजदीकी पुलिस स्टेशन; जिला न्यायालय, पंजीकृत सेवा प्रदाता संस्था (गैर सरकारी संगठन); उपनिदेशक, महिला एवं बाल विकास । तहसील, जिला, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से परामर्श/विधिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं। उपरोक्त में किसी से भी, स्वयं, माता-पिता या अन्य रिश्तेदार या सरकार द्वारा मान्य कोई समाज सेवी संस्था के माध्यम से शिकायत दर्ज करायी जा सकती है या फिर टोल फ्री नं. पर कॉल कर सकते हैं। टोल फ्री/हेल्पलाइन नम्बर समाधान शिकायत निवारण प्रकोष्ठ 18001805220 वूमेन्स पावर लाइन 1090 पुलिस 100 निःशुल्क विधिक सहायता 18004190234, 15100 स्त्रोत: दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान, उत्तर प्रदेश