<div id="MiddleColumn_internal"> <h3><span>बैंकर - ग्राहक सम्बन्ध</span><strong></strong></h3> <ul> <li> ग्राहक शब्दावली किसी भी ACT में परिभाषित की गयी है।</li> <li> जब कोई बैंकर किसी ग्राहक को ओवरड्राफ्ट की अनुमति देती है, तो उसके ग्राहक और उसमें सम्बन्ध।</li> <li>ऋणदाता तथा कर्ज़दार का होता है।</li> <li> जब कोई ग्राहक बैंक में लोकर लेता है तो बैंक और ग्राहक के बीच सम्बन्ध पट्टाकार व पट्टेदार का होता है।</li> <li> बैंकर-ग्राहक के बीच सम्बन्ध कब समाप्त होता है - खाता बंद होने पर।</li> <li> जमा खातों में, बैंक व ग्राहक के बीच मुख्य सम्बन्ध ऋणदाता-बैंक, कर्ज़दार-ग्राहक का होता है।</li> <li> बैंक की सुरक्षा में सामन रखने पर ज़मानतदार-अमानतदार सम्बन्ध लागू होता है।</li> <li> जब बैंक कोई चेक क्लिअरिंग के लिए लेती है तो कोई सम्बन्ध स्थापित नहीं होता है।</li> <li> जब किसी बैंक के ग्राहक द्वारा FDR खो दी जाती है तो क्षतिपूर्ति बॉण्ड बनाया जाता है।</li> </ul> </div>