भारत में कम पोषण अधिकांश महिलाओं को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर रहा है। भारत में हर तीसरी महिला कुपोषित है और हर दूसरी महिला रक्ताल्पता से ग्रस्त है। एक कुपोषित माँ लगभग अनिवार्य रूप से कम वजन वाले बच्चे को जन्म देती है। जब खराब पोषण गर्भाशय में शुरू होता है, तो यह पूरे जीवन चक्र में फैलता है क्योंकि परिवर्तन काफी हद तक अपरिवर्तनीय होते हैं। आर्थिक और सामाजिक संकट के कारण कई महिलाएं अपनी गर्भावस्था के अंतिम दिनों तक अपने परिवार के लिए आजीविका कमाने के लिए काम करना जारी रखती हैं। इसके अलावा, वे बच्चे के जन्म के तुरंत बाद काम करना फिर से शुरू कर देते हैं, भले ही उनका शरीर इसकी अनुमति न दे, इस प्रकार उनके शरीर को एक तरफ पूरी तरह से ठीक होने से रोकता है, और पहले छह महीनों में अपने छोटे शिशु को विशेष रूप से स्तनपान कराने की उनकी क्षमता को भी बाधित करता है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पी. एम. एम. वी. वाई.) एक मातृत्व लाभ कार्यक्रम है जिसे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के अनुसार देश के सभी जिलों में लागू किया जाता है। मिशन शक्ति, जिसमें पी. एम. एम. वी. वाई. योजना शामिल है, 142022 से लागू हुआ उद्देश्य नकद प्रोत्साहन के संदर्भ में मजदूरी के नुकसान के लिए आंशिक मुआवजा प्रदान करना ताकि महिला पहले जीवित बच्चे के जन्म से पहले और बाद में पर्याप्त आराम कर सके। प्रदान किए गए नकद प्रोत्साहन से गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं (पीडब्लू एंड एलएम) के बीच स्वास्थ्य संबंधी व्यवहार में सुधार होगा। लक्षित लाभार्थी इस योजना का उद्देश्य सामाजिक, आर्थिक रूप से वंचित और समाज के हाशिए पर रहने वाली महिलाओं को शामिल करना है। पी. एम. एम. वी. वाई. का लाभ उठाने के लिए निम्नलिखित पात्रता मानदंडों में से किसी एक की आवश्यकता हैः अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाएं आंशिक रूप से (40 प्रतिशत) या पूरी तरह से विकलांग (दिव्यांग जन) महिलाएं बी. पी. एल. राशन कार्ड धारक महिलाएँ आयुष्मान भारत के तहत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएमजेएवाई) के तहत महिला लाभार्थी। ई-श्रम कार्ड रखने वाली महिलाएं महिला किसान जो किसान सम्मान निधि के तहत लाभार्थी हैं मनरेगा जॉब कार्ड रखने वाली महिलाएं जिन महिलाओं की कुल पारिवारिक आय ₹8 लाख प्रति वर्ष से कम है गर्भवती और स्तनपान कराने वाली ए. डब्ल्यू. डब्ल्यू./ए. डब्ल्यू. एच./आशा एन. एफ. एस. ए. अधिनियम 2013 के तहत राशन कार्ड रखने वाली महिलाएं केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित कोई अन्य श्रेणी सभी पात्र गर्भवती महिलाएँ और स्तनपान कराने वाली माताएँ जिनके परिवार में पहले बच्चे के लिए 01.01.2017 पर या उसके बाद गर्भावस्था होती है। यदि दूसरा बच्चा लड़की है तो दूसरे बच्चे के लिए भी 142022 PMMVY लाभ दिया जाता है। एल. एम. पी. से लेकर बच्चे के जन्म तक की समयरेखा-एल. एम. पी. + 140 दिन से एल. एम. पी. + 300 दिन (पूर्व-परिपक्व और बाद में)। एक लाभार्थी के लिए गर्भावस्था की तारीख और चरण को उसकी अंतिम मासिक धर्म अवधि (एल. एम. पी.) तिथि के संबंध में गिना जाएगा जैसा कि माँ और बाल संरक्षण कार्ड (एम. सी. पी.) कार्ड में उल्लिखित है। पीएमएमवीवाई के तहत लाभार्थी की आयु 18 वर्ष और 7 महीने और बच्चे के जन्म के समय 55 वर्ष से कम होनी चाहिए। गर्भपात/मृत जन्म के मामले में, भविष्य में किसी भी गर्भावस्था की स्थिति में लाभार्थी को नए लाभार्थी के रूप में माना जाएगा एक लाभार्थी बच्चे के जन्म के 270 दिनों तक पी. एम. एम. वी. वाई. में पंजीकरण करने का पात्र है पीएमएमवीवाई के तहत लाभ पी. एम. एम. वी. वाई. का ₹5000/- का लाभ पहले बच्चे के लिए दो किश्तों में दिया जाता है (प्रसवपूर्व जांच (ए. एन. सी.) के बाद ₹3000/- की पहली किश्त और बच्चे के जन्म के बाद ₹2000/- की दूसरी किश्त और सार्वभौमिक टीकाकरण के 14 सप्ताह)। बच्चे के जन्म और 14 सप्ताह के भीतर सार्वभौमिक टीकाकरण पूरा होने के बाद दूसरे बच्चे (यदि लड़की है) के लिए एक ही किस्त में 6000/- रुपये दिए जाते हैं। उपरोक्त के अलावा, लाभार्थी संस्थागत प्रसव के बाद जननी सुरक्षा योजना (स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय योजना) का लाभ प्राप्त करने का भी पात्र है योजना के तहत पंजीकरण एक योग्य महिला भी सीधे फॉर्म भर सकती हैपीएमएमवीवाई पोर्टल.. निकटतम आंगनवाड़ी कार्यकर्ता/आशा कार्यकर्ता भी एक योग्य महिला के लिए ऑनलाइन फॉर्म भर सकती हैं। पंजीकरण के दौरान, लाभार्थी को एमसीपी कार्ड (मातृ और बाल संरक्षण कार्ड), लाभार्थी की पहचान का प्रमाण (आधार कार्ड या अनुमत वैकल्पिक आईडी प्रमाण) और लाभार्थी के बैंक/डाकघर खाते के विवरण की प्रति जमा करनी होगी। आवेदन की स्थिति और निधि के वितरण के बारे में जानकारी प्रदान करने के लिए मोबाइल नंबर अनिवार्य है दूसरी किश्त का दावा करने के लिए, लाभार्थी को गर्भावस्था के छह महीने बाद ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा, साथ ही कम से कम एक ए. एन. सी. वाले एम. सी. पी. कार्ड की प्रति भी भरनी होगी। तीसरी किश्त का दावा करने के लिए, लाभार्थी को बाल जन्म पंजीकरण की प्रति और एम. सी. पी. कार्ड की प्रति के साथ ऑनलाइन एफ. ओ. एम. आर. जमा करना आवश्यक है जिसमें दिखाया गया है कि बच्चे को टीकाकरण का पहला चक्र या इसके समकक्ष/विकल्प प्राप्त हुआ है। यदि किसी लाभार्थी ने योजना के तहत निर्धारित शर्तों का पालन किया है, लेकिन निर्धारित समय के भीतर दावा दर्ज/जमा नहीं कर सका है, तो वह दावा जमा कर सकता है-एक लाभार्थी किसी भी समय आवेदन कर सकता है, लेकिन गर्भावस्था के 270 दिनों के बाद नहीं, भले ही उसने पहले किसी भी किस्त का दावा नहीं किया हो, लेकिन लाभ प्राप्त करने के लिए पात्रता मानदंड और शर्तों को पूरा करता हो पूर्ण दिशानिर्देशों तक पहुँच प्राप्त करने के लिए,यहाँ क्लिक करें। योजना संबंधी सहायता पीएमएमवीवाई हेल्प लाइनः ईमेल आईडी-pmmvy-mwcd@gov.in; नंबर-1515 (सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक) स्रोतःमहिला एवं बाल विकास मंत्रालय संबंधित संसाधन पी. एम. एम. वी. वाई. पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न