निर्भया फंड भारत सरकार ने 2012 के दिल्ली सामूहिक बलात्कार कांड के जवाब में, निर्भया कोष की स्थापना की, जो एक समर्पित, अपरिवर्तनीय कोष है। इसका उद्देश्य देश में महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा को बढ़ावा देना है। इस कोष का अनावरण 2013 के केंद्रीय बजट में किया गया था, जिसमें सरकार का प्रारंभिक योगदान 1,000 करोड़ रुपये था। इसका प्रशासन वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के अधीन है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय निर्भया कोष के माध्यम से वित्तपोषित योजनाओं के मूल्यांकन और निगरानी के लिए नोडल मंत्रालय है। कोष की राशि समय-समय पर बजट आवंटन के माध्यम से बढ़ाई गई है। वित्त वर्ष 2024-25 तक निर्भया फंड के तहत कुल 7712.85 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। मंत्रालयों/विभागों द्वारा जारी और निर्भया फंड से उपयोग की गई कुल राशि 5846.08 करोड़ रुपये है, जो कुल आवंटन का लगभग 76% है। यह कोष उन पहलों को वित्तपोषित करने के लिए बनाया गया है जो सार्वजनिक स्थानों, सार्वजनिक परिवहन और ऑनलाइन जगत में महिलाओं की सुरक्षा में सीधे योगदान देती हैं। मंत्रालय, राज्य और केंद्र शासित प्रदेश निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार अनुमोदन के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत करते हैं, और अनुमोदित योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए धनराशि जारी की जाती है। निर्भया निधि का उपयोग निर्भया फंड के तहत परियोजनाएं/योजनाएं मांग पर आधारित हैं। निर्भया फंड के फ्रेमवर्क के तहत अधिकार प्राप्त समिति (ईसी) द्वारा शुरू में मूल्यांकित परियोजनाओं/योजनाओं में आम तौर पर कार्यान्वयन के लिए एक चरणबद्ध कार्यक्रम होता है। कुछ मूल्यांकित परियोजनाएं सीधे केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों द्वारा कार्यान्वित की जाती हैं। हालांकि, अधिकांश परियोजनाएं राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) प्रशासनों के ज़रिए कार्यान्वित की जाती हैं, जिसमें केंद्र सरकार, संबंधित राज्यों/यूटी के निर्धारित फंड शेयरिंग पैटर्न के अनुसार राज्यों/यूटी को धनराशि जारी करती है। देश में महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा 'निर्भया फंड' के तहत कई योजनाएं/परियोजनाएं क्रियान्वित की गई हैं/की जा रही हैं। मानव तस्करी की रोकथाम और पीड़ितों को सहायता प्रदान करने के लिए 827 मानव तस्करी विरोधी इकाइयाँ स्थापित की गई हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए, कि पुलिस स्टेशन महिलाओं के लिए अधिक अनुकूल और सुलभ हों, क्योंकि वे पुलिस स्टेशन में आने वाली किसी भी महिला के लिए संपर्क का पहला और एकल बिंदु होंगे, 14,658 महिला सहायता डेस्क (डब्ल्यूएचडी) स्थापित किए गए हैं, जिनमें से 13,743 का नेतृत्व महिला पुलिस अधिकारी कर रही हैं। 33 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में साइबर फोरेंसिक सह प्रशिक्षण प्रयोगशालाएँ भी स्थापित की गई हैं, जिनमें 24,264 व्यक्तियों को साइबर से संबंधित मामलों को संभालने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। हिंसा से प्रभावित महिलाओं को एकीकृत सहायता प्रदान करने और महिलाओं के खिलाफ किसी भी प्रकार की हिंसा से लड़ने के लिए पुलिस, चिकित्सा, कानूनी सहायता, परामर्श और मनोवैज्ञानिक सहायता सहित कई प्रकार की सेवाओं तक तत्काल, आपातकालीन और गैर-आपातकालीन पहुंच की सुविधा प्रदान करने के लिए, 36 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 802 ओएससी कार्यात्मक बनाए गए हैं, जिनमें अब तक 10.80 लाख से अधिक महिलाओं को मदद दी गई है। जरूरतमंद और संकटग्रस्त महिलाओं की सहायता के लिए, सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ईआरएसएस-112) की स्थापना की गई है, जिसमें कंप्यूटर की मदद से क्षेत्र/पुलिस संसाधनों की सहायता शामिल है। इसकी शुरूआत से अब तक 43 करोड़ से अधिक कॉल्स पर काम किया गया है। ईआरएसएस के अलावा, पश्चिम बंगाल को छोड़कर 35 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में पूरी तरह कार्यात्मक समर्पित महिला हेल्पलाइन (डब्ल्यूएचएल-181) भी चालू है। अब तक महिला हेल्पलाइनों ने 2.10 करोड़ से अधिक कॉल्स को संभाला है और 84.43 लाख से अधिक महिलाओं की मदद की है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि जघन्य यौन अपराधों की पीड़ित दुर्भाग्यपूर्ण महिलाओं और युवा लड़कियों को न्याय मिले, सरकार वर्ष 2019 से राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (एफटीएससी) स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। अब तक 790 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (एफटीएससी) को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 404 विशिष्ट पोक्सो (ई-पोक्सो) अदालतों सहित 745 एफटीएससी, 30 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में कार्यरत हैं, जिन्होंने देश भर में बलात्कार और पोक्सो अधिनियम के तहत अपराधों के 3,06,000 से अधिक मामलों का निपटारा किया है। निर्भया फंड के तहत राज्य मुआवजा योजनाओं का समर्थन और अनुपूरण करने के लिए, केंद्रीय पीड़ित मुआवजा कोष (सीवीसीएफ) के तहत राज्य सरकारों/ केंद्र शासित प्रदेशों को एकमुश्त अनुदान के रूप में 200 करोड़ रुपये जारी किए गए, ताकि विभिन्न अपराधों विशेषकर बलात्कार, एसिड हमलों, बच्चों के खिलाफ अपराध, मानव तस्करी आदि सहित यौन अपराधों के पीड़ितों को मुआवजा दिया जा सके। सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, जहां महिलाएं काम करती हैं और रहती हैं, सुरक्षित शहर परियोजनाओं के तहत उप-परियोजनाएं 8 शहरों (अर्थात अहमदाबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता, लखनऊ और मुंबई) में लागू की गई हैं। महिलाओं के लिए सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित करने के लिए, रेल और सड़क परिवहन परियोजनाएं जैसे एकीकृत आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रबंधन प्रणाली (आईईआरएमएस), कोंकण रेलवे में वीडियो निगरानी प्रणाली, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित चेहरे की पहचान प्रणाली (एफआरएस) को वीडियो निगरानी प्रणालियों के साथ एकीकृत किया गया है, जिसमें रेल मंत्रालय द्वारा 7 प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर और ट्रेन में अकेली महिला यात्री की सुरक्षा के लिए टैब जैसी सुविधाएं लागू की गई हैं। इसके अलावा राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में कमांड और कंट्रोल सेंटर के साथ वाहन ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म जैसी परियोजनाएं और सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा उत्तर प्रदेश सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी), बेंगलुरु मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (बीएमटीसी), तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम (टीएसआरटीसी) आदि कुछ राज्य विशिष्ट परियोजनाएं भी लागू की गई हैं। मुख्य लाभ और महत्व निर्भया फंड ने संस्थागत तंत्रों के माध्यम से महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसने बुनियादी ढांचे के विकास, तकनीक आधारित समाधानों, आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणालियों और पीड़ित सहायता सेवाओं के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए हैं। यह फंड हेल्पलाइन, पुलिस सहायता, साइबर अपराध रोकथाम और वन-स्टॉप क्राइसिस सेंटरों पर विशेष ध्यान केंद्रित करता है, जो ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं के लिए एक सराहनीय कदम है, जहां तत्काल सहायता सेवाओं की उपलब्धता आमतौर पर सीमित होती है। मूल रूप से, इस फंड का उद्देश्य भय को कम करना, आवागमन को बढ़ावा देना और महिलाओं के लिए सार्वजनिक स्थानों पर जाना तथा आवश्यक सेवाओं का सुरक्षित रूप से लाभ उठाना आसान बनाना है।