स्टार्ट-अप की परिवर्तनकारी क्षमता को पहचानते हुए, सरकार ने महिला उद्यमिता सहित उद्यमिता को समर्थन और पोषण देने के लिए कई पहल शुरू की हैं। 73000 से अधिक स्टार्ट-अप्स, जो स्टार्ट-अप इंडिया पहल के तहत सरकार द्वारा समर्थित 157066 स्टार्ट-अप्स में से लगभग आधे हैं, में कम से कम एक महिला निदेशक हैं, जो नवाचार और आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है। महिलाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/विभागों द्वारा देश भर में अनेक योजनाएं/पहलें क्रियान्वित की जा रही हैं। कौशल निर्माण के लिए योजनाएं महिलाओं को कौशल अवसर प्रदान करने वाली योजनाओं में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) और महिला कॉयर योजना (एमसीवाई) शामिल हैं, जो कॉयर विकास योजना का एक उप-घटक है। महिला उद्यमियों के लिए योजनाएं महिला उद्यमियों और स्टार्ट-अप्स को सुविधा प्रदान करने वाली कुछ योजनाओं में शामिल हैं: भारतीय पेटेंट अधिनियम में कम से कम एक आवेदक महिला होने पर त्वरित जांच का प्रावधान है। यह महिला नवप्रवर्तकों को पेटेंट आवेदन दाखिल करने और उनके आविष्कारों की रक्षा करने के लिए प्रोत्साहित करने का एक ठोस प्रयास है। महिला उद्यमी, जो व्यक्तिगत रूप से अपनी बौद्धिक संपदा की सुरक्षा के लिए आवेदन करती हैं, उन्हें अन्य बड़ी संस्थाओं की तुलना में कम शुल्क देना पड़ता है। पिछले 5 वर्षों में महिलाओं द्वारा पेटेंट दाखिल करने की संख्या में 905% से अधिक की वृद्धि हुई है। अटल इनोवेशन मिशन के अटल इनक्यूबेशन केंद्रों के तहत शुरू किए गए लगभग एक तिहाई स्टार्ट-अप का नेतृत्व महिलाएं करती हैं, जो विश्वविद्यालयों, संस्थानों और कॉरपोरेट्स में नवाचार को बढ़ावा देते हैं। स्टैंड अप इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया और मुद्रा योजना बैंक ऋण और उद्यमशीलता गतिविधियों को सुविधाजनक बनाती हैं और इससे महिला उद्यमियों को काफी लाभ हुआ है। स्टार्ट-अप्स के लिए ऋण गारंटी योजना (सीजीएसएस) का उद्देश्य उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) द्वारा जारी और समय-समय पर संशोधित राजपत्र अधिसूचना में परिभाषित महिलाओं सहित पात्र उधारकर्ताओं को वित्तपोषित करने के लिए सदस्य संस्थानों (एमआई) द्वारा दिए गए ऋणों के विरुद्ध निर्दिष्ट सीमा तक ऋण गारंटी प्रदान करना है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) एक प्रमुख ऋण-लिंक्ड सब्सिडी कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य गैर-कृषि क्षेत्र में सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना के माध्यम से स्वरोजगार के अवसर पैदा करना है। सरकार ने कंपनी अधिनियम, 2013 में प्रावधान किया है कि कंपनियों के लिए कम से कम एक महिला निदेशक रखना अनिवार्य है। प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) जैसी योजनाएं स्ट्रीट वेंडर्स को रोजगार/स्वरोजगार और ऋण सुविधाएं प्रदान करती हैं। इन योजनाओं के तहत लाभार्थियों में से अधिकांश महिलाएं हैं। उपर्युक्त योजनाओं के अतिरिक्त, राष्ट्रीयकृत बैंकों द्वारा महिला उद्यमियों को सहायता प्रदान करने के लिए कई अन्य योजनाएं/पहलें भी क्रियान्वित की जा रही हैं। इनमें महिला उद्यम निधि योजना, देना शक्ति योजना, महिला उद्यमियों के लिए स्त्री शक्ति पैकेज और शत कल्याणी योजना आदि शामिल हैं। स्रोत : पीआईबी