मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 महिलाओं के स्वास्थ्य, गरिमा और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा करने वाला महत्वपूर्ण श्रम क़ानून है। इसका उद्देश्य प्रसूति काल में महिलाओं को सुरक्षित वातावरण और भुगतान सहित अवकाश देना है ताकि मातृत्व रोजगार में बाधा न बने। यह अधिनियम संविधान के अनुच्छेद 14, 15(3), 21 और 42 की भावना पर आधारित है। लागू क्षेत्र 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले कारखानों, खदानों, बागानों और सरकारी प्रतिष्ठानों पर लागू। असंगठित/स्वरोज़गार करने वाली महिलाओं पर लागू नहीं। स्थायी, अस्थायी, ठेका या आकस्मिक सभी महिला कर्मचारी शामिल। पात्रताः नियोजित महिला को अपेक्षित डिलीवरी से पूर्व 12 माह में कम-से-कम 80 दिन कार्य करना आवश्यक। 2017 संशोधन के बाद प्रमुख प्रावधान प्रसूति अवकाशः 26 सप्ताह (पहले दो बच्चों तक), 12 सप्ताह (दो से अधिक बच्चों पर)। गोद लेने/सरोगेसी माताओं हेतु 12 सप्ताह। कार्यस्थल पर 50 से अधिक कर्मचारियों पर क्रेच सुविधा अनिवार्य। घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) विकल्प संभव । चिकित्सकीय स्थिति हेतु अतिरिक्त अवकाशः गर्भपात-6 सप्ताह ऑपरेशन/गंभीर बीमारी-2 से 4 सप्ताह तक प्रसव के बाद 6 सप्ताह तक नियोजन वर्जित। भुगतान पूर्ण और बिना कटौती अनिवार्य। प्रसव काल में बर्खास्तगी/भेदभाव पर रोक। दंडात्मक प्रावधान अधिनियम के उल्लंघन पर 3 माह तक सज़ा या ₹5,000 तक जुर्माना। गर्भावस्था/प्रसूति आकाल में नौकरी से निकालने पर 1 वर्ष तक सज़ा। कंपनी अपराधों में प्रबंधन उत्तरदायी। नवीनतम दिशा-निर्देश मातृत्व अवकाश महिला का मौलिक अधिकार है। नई सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक संस्थान में कार्यस्थल के पास क्रेच सुविधा, प्रशिक्षित देखरेख, साफ-सफाई और रिकॉर्ड रखना अनिवार्य है। श्रम सुविधा पोर्टल के माध्यम से EPFO के तहत आने वाले संस्थानों में मातृत्व लाभ का दावा अब डिजिटल रूप से किया जा सकता है जिससे प्रक्रिया तेज और सुविधाजनक हो गई है। मातृत्व को सम्मान दें, सशक्त भारत बनाएं