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मशरूम बीज उत्पादन से मिली सामाजिक पहचान

मशरूम बीज उत्पादन से मिली सामाजिक पहचान

परिचय

श्रीमती निधि कटारे सूक्ष्म जीव विज्ञान विषय से एम्.एस.सी. करने के पश्चात् अशासकीय महाविद्यालय में छात्रों को पढ़ाकर जीविकार्जन किया करती थी। उनको हमेशा लगता था कुछ अलग तथा अच्छा किया जाये। इसी बीच उनका वर्ष 2016 में कृषि विज्ञान केंद्र, ग्वालियर में वैज्ञानिकों से संपर्क हुआ तथा आर्या परियोजना के अंतर्गत मशरूम उत्पादन पर व्यवसायिक प्रशिक्षण एवं कौशल विकास की उन्हें जानकारी मिली तो पता चला की पौष्टिक गुणों के कारण मशरूम उत्पादन की मांग बढ़ रही है। इससे उनके मन में इसके उत्पादन तथा कुछ नया करने की इच्छा जागृत हुई। इसे घर के अंदर भी लगा सकते हैं तथा अध्यापन के साथ – साथ खाली समय का अच्छा सदुपयोग हो सकता है। यही सोचकर उनहोंने इस व्यवसाय की शुरूआत की। धीरे – धीरे अनुभव हुआ की इसके उत्पादन के लिए गुणवत्तायुक्त बीज आवश्यक हैं, इसे आगरा, दिल्ली आदि जगहों से मंगाना पड़ता था। इससे कभी – कभी बीज समय न मिलने के कारण उत्पादन में बाधा आने लगी। इसके समाधान के लिए उन्होंने अपनी शिक्षा एम. एस. सी (सूक्ष्म विज्ञान) का प्रयोग करने का निश्चय किया।

कैसे शुरू किया यह व्यवसाय

उन्होंने अपनी बीज उत्पादन प्रयोगशाला अपने पति के साथ मिलकर स्थापित की। कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण पुराने उपकरणों (ऑटो क्लोव, इनक्यूबेटर फ्रिज) को ख़रीदा तथा किराये की जगह पर प्रयोगशाला की नींव रखी। पति का सहयोग मिलने से विपणन तथा सप्लाई का सारा काम पति के सहयोग से करने लगी। शुरू में जीवाणु संदूषण के कारण नुकसान भी हुआ। इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्र, ग्वालियर से संपर्क किया तथा वैज्ञानिकों ने जानकारी दी की ऑटोक्लेव के सही ढंग से कार्य नहीं करने के कारण गेंहू के दानों को विषाणुरहित सही ढंग से नहीं किया गया तथा यह समस्या इसी कारण आ रहा है। इसके अलावा एंटीबायोटिक का मिडिया में प्रयोग करने की सलाह भी उन्हें मिली। इस बीच धीरे – धीरे नये यंत्रों को खरीदकर कार्य क्षमता बढ़ायी। उन्होंने प्रारंभ में 50 – 150 किग्रा. बीज प्रति माह उत्पादन किया। भारत सरकार द्वारा संचालित आर्या परियोजना, सोलन (हिमाचलप्रदेश) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय मशरूम मेले में कृषि विज्ञान केंद्र, ग्वालियर के वैज्ञानिकों के साथ भ्रमण कर मशरूम उत्पादन के विभिन्न पहलुओं पर भी उन्होंने जानकारी ली। आज श्रीमती निधि कटारे मशरूम बीज (स्पान) की अधिक मांग के कारण अक्टूबर एवं वर्ष के अन्य माह एवं वर्ष के अन्य माह में 400 किग्रा. स्पान प्रति माह 1000 वर्ग फीट में उत्पादन कर लगभग 10 से 12 हजार रूपये प्रति माह आय प्राप्त कर रही है।

स्रोत: अरविन्दर कौर, राज सिंह कुशवाहा, रूपेंद्र कुमार सिंह, एस. के. सिंह नरेश गुप्ता और ब्रजकिशोर राजपूत

स्त्रोत: कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार



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