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मधुमक्खी पालन की आय से बच्चों को दी अच्छी शिक्षा

मधुमक्खी पालन की आय से बच्चों को दी अच्छी शिक्षा

परिचय

श्री सुभाष सिंह गाँव औंगध जिला करनाल का रहने वाल अनपढ़ किसान था जिसके पास केवल 3 एकड़ जमीन थी। चूँकि खेती के अलावा आमदनी का कोई और साधन नहीं था इसलिए गुजारा बहुत मुशिकल से चलता था। वर्ष 1988 में कृषक ने कृषि विज्ञान केंद्र, राष्ट्रीय डेरी अनुसन्धान संस्थान, करनाल से मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण लिया तथा पांच मधुमक्खी कॉलोनियों के साथ इस व्यवसाय को आरंभ किया।

बच्चों को दी अच्छी शिक्षा

इसके बाद धीरे-धीरे मधुमक्खी कॉलोनियों की संख्या बढ़ाता गया तथा वर्ष 2005 के अंत तक इसके पास 145 कॉलोनियां हो गई। इससे 30.45 किवंटल शहद का उत्पादन किया जिसे  42 रूपये प्रति कि.ग्रा. के भाव से बेचकर लगभग 1.28 लाख रूपये की आमदनी थी। मधुमक्खी कॉलोनियों को एक  जगह से दूसरी जगह स्थानान्तरण करने, गर्मी में वर्षा ऋतु  में दी जाने वाली चीनी, दवाइयों एवं अन्य सामान आदि पर आने वाल कुल खर्च लगभग 30,000 रूपये था। इस प्रकार सभी खर्चे निकालना किशन को 98,000 रूपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। इसके अलावा इसी वर्ष 35 मधुमक्खी कॉलोनियों को 720 रूपये प्रति चार फ्रेम के साथ बेचकर 25,200 रूपये की आमदनी थी। इस प्रकार वर्ष खेती के आलावा कृषक को मधुमक्खी पालक से लगभग 1 लाख रूपये की अतिरिक्त आय होने लगी। गाँव में पक्का बना लिया है तथा बच्चे भी अच्छे स्कूल में पढ़ रहे हैं। इससे मधुमक्खी पालन की आर्थिक एवं सामाजिक दशा में काफी सुधार आया है। इस कार्य को देखते हुए गाँव में दो ने किसानों ने भी मधुमक्खी पालन को एक सहायक व्यवसाय के रूप में अपना लिया है।

 

स्त्रोत: कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार



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