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राष्ट्रीय जैविक खेती परियोजना के अधीन प्रमुख उपलब्धियों का प्रभाव

राष्ट्रीय जैविक खेती परियोजना के अधीन प्रमुख उपलब्धियों का प्रभाव

सेवा प्रदाताओं के माध्यम से क्षमता विकास

दिनांक 31-3-2009 तक 468 सेवा प्रदाताओं में नसे लगभग 200 सेवा प्रदाताओं ने 2.8 लाख किसानों को समूह संगठन के अंतर्गत प्रमाणीकरण हेतु पंजीकृत किया है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत लगभग 1.73.000 हेक्टेयर भूमि जैविक प्रमाणीकरण प्रक्रिया के अधीन लाई जा चुकी है।

जैविक आदान उत्पादन इकाइयों की उत्पादन क्षमता में वृद्धि

इस योजना के अधीन जिन 3 प्रकार की इकाइयों को सहायता दी गई वे है: (1) सब्जी बाजार कचरा से कम्पोस्ट उत्पादन इकाई (2) जैव उर्वरक इकाई तथा (3) वर्मी कल्चर उप्तादन इकाई राष्ट्रीय जैविक खेती परियोजना काल में 16 सब्जी बाजार के कचरे में से कम्पोस्ट निर्माण इकाइयां 51 उर्वरक इकाइयां तथा 1396 वर्मीकल्चर हैचरीज की स्थापना हेतु रु.3023.368 लाख स्वीकृत किये गये। इन इकाइयों द्वारा 1600 टन कचरा प्रतिदिन कम्पोस्ट में परिवर्तित किया जा रहा है। 6120 मी. टन जैव उर्वरकों का उत्पादन हो रहा है तथा 209400 मी. टन केंचुआ व वर्मीकम्पोस्ट का निर्माण हो रहा है।

प्रशिक्षण

  • सेवा प्रदाता, प्रमाणीकरण तथा निरीक्षण संस्थाओं हेतु प्रशिक्षण - 135 प्रशिक्षण सत्रों में 2700 से अधिक सेवा प्रदाता प्रतिनिधियों तथा आंतरिक नरीक्षण कर्त्ताओं को प्रमाणीकरण प्रकिया तथा आंतरिक नियंत्रण प्रणाली में प्रशिक्षित किया गया। सेवा प्रदाताओं की आंतरिक प्रमाणीकरण प्रणाली प्रशिक्षण का प्रभाव दर्शनीय है। इन प्रशिक्षणों ने राज्य सरकारों के अधिकारियों को प्रमाणीकरण प्रणाली की आवश्यकता तथा गहनताएं समझने में भी मदद की है।
  • जैविक आदानों के गुणवत्ता नियंत्रण तथा उत्पादन का प्रशिक्षण - इस प्रशिक्षण के अंतर्गत 5660 से अधिक राज्य सरकारों के अधिकारी तथा जैविक आदान इकाइयों के प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित किया जा चूका है। सरकारी अधिकारियों को मुख्यतया गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली में जबकि उत्पादन इकाइयों के प्रतिनिधियों को उत्पादन तकनीकी में प्रशिक्षित किया गया है।
  • विस्तार अधिकारी तथा प्रसार कर्मचारी प्रशिक्षण - 620 प्रशिक्षण सत्रों द्वारा जैविक खेती प्रबन्धन प्रणाली में 12400 से अधिक प्रसार अधिकारियों तथा गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित किया गया। परिणामस्वरूप कृषि कार्यकर्ताओं के बीच वृहत स्तर पर जैविक खेती की उपयोगिता पर जागरूकता निर्मित हुई है।
  • जैविक प्रबन्धन पर कृषक प्रशिक्षण - अक्टूबर 2004 से मार्च 2009 तक अवधि में 3850 से अधिक प्रशिक्षण सत्र स्वीकृत किये गये जिनमें 79000 से अधिक कृषकों को जैविक खेती प्रबन्धन की जानकारी दी गई।
  • प्रक्षेत्र –प्रदर्शन - मार्च 2009 तक 5908 जैविक  आदान प्रदर्शन तथा 1002 बायोगैस स्लैरी प्रदर्शन स्वीकृत किये गये। इन प्रदर्शनों से 6910 से अधिक कृषक सीधे तथा 345,500 से अधिक कृषक क्षेत्र दिवसों की सहभागिता से लाभान्वित हुए।

 

जैव उर्वरक इकाइयों को मातृ संवर्धों की आपूर्ति

राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय जैविक खेती केंद्र जैव उर्वरकों के मातृ संवर्धों के प्रमुख स्रोत हैं तथा पुरे देश की कुल आवश्यकता की 80% की आपूर्ति इन्हीं केन्द्रों द्वारा की जाती है। वर्ष 2007-08 के अंतर्गत देश की 110 उत्पादन इकाइयों को 1024 मातृ संवर्ध उपलब्ध कराए गये।

जैव उर्वरक तथा जैव खादों का गुणवत्ता नियंत्रण विश्लेषण

2007-08 की अवधि में खाद्य नियंत्रण आदेश उर्वरक नियंत्रण उर्वरक आदेश के नियमानुसार 1907 जैव उर्वरक नमूनों तथा 115 जैविक खाद के नमूनों की गुणवत्ता जांच की गई। इनमें से 17 जैव उर्वरक तथा 37 जैविक खाद के नमूने अमानक पाए गये।

जैविक प्रबन्धन प्रक्रिया का विकास

राष्ट्रीय जैविक खेती परियोजना तथा विश्व खाद्य संगठन के एक संयुक्त प्रयास के अधीन 5 राज्यों की 20 महत्वपूर्ण फसलों हेतु प्रबन्धन प्रक्रिया विकसित की गई।

इसी परियोजना के अधीन प्रमाणीकरण प्रक्रिया का एक वैकल्पिक मॉडल भी तैयार किया गया है जिसे सहभागिता प्रतिभूति प्रणाली के रूप में जाना जाता है। इस प्रणाली को विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से 7 स्थानों पर जांचा परखा जा रहा है तथा उपयुक्त पाए जाने पर इसका आगे प्रचालन किया जाएगा।

सूचना पत्रों का प्रकाशन

अर्द्धवार्षिक जैव उर्वरक सूचना-पत्र तथा त्रैमासिक जैविक खेती सूचना-पत्र प्रकाशित किये जा रहे है। ये सूचना पत्र सामान्यतया 24-40 पृष्ठों के हैं तथा महत्वपूर्ण राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय घटनाओं, समाचारों/सूचनाओं तथा वैज्ञानिक विकास पर नवीनतम जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं। समस्त राज्य सरकारों, विश्वविद्यालयों, अनुसन्धान, संस्थान, प्रसार शिक्षकों/अधिकारियों तथा विषय के साथ सम्बद्ध कृषकों आदि को नियमित रूप से इन सूचना से इन सूचना पत्रों का निशुल्क प्रेषण किया जा रहा है।

प्रशिक्षण सामग्री का प्रकाशन

निम्न विषयों पर प्रशिक्षण सामग्री तथा पुस्तकें प्रकाशित की गई है।

1.  प्रमाणीकरण तथा निरीक्षण प्रणाली।

2.  जैविक आदानों का गुणवत्ता नियंत्रण तथा उत्पादन ।

3.  जैविक फार्म प्रबन्धन

4.  स्वदेशी ज्ञान पर आधारित जैविक प्रबन्धन

स्त्रोत: कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार

 



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