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समन्वित कृषि प्रणाली

समन्वित कृषि प्रणाली क्या है

कृषि के विभिन्न उद्यमों जैसे फसल उत्पादन, मवेशी पालन, फल तथा सब्जी उत्पादन, मछली पालन, वानिकी इत्यादि का जब एक साथ इस प्रकार समायोजन किया जाये कि वे एक दूसरे के पूरक हो जिससे संसाधनों की क्षमता, उत्पादकता एवं लाभप्रदता में पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए वृद्धि की जा सके तो इसे हम समन्वित कृषि प्रणाली कहते है। चूँकि ये स्व-सम्पोषित प्रणालियाँ अवशेषों के चक्रीय तथा जल एवं पोषक तत्वों आदि के निरंतर प्रवाह पर आधारित है जिससे कृषि लागत में कमी आएगी वही दूसरी ओर लगातार आमदनी एवं रोजगार का श्रृजन होगा।

समन्वित कृषि प्रणाली में एक उद्यम की दूसरे उद्यम पर अंर्तनिर्भरता समन्वित कृषि प्रणाली की मूल-भावना एक उद्यम की दूसरे उद्यम अंर्तनिर्भरता पर आधारित है। अत: समेकित कृषि प्रणाली में विभिन्न उद्यमों को एक निश्चित अनुपात में रखा जाता है जिससे विभिन्न उद्यम आपस में परस्पर सम्पूरक एवं सहजननात्मक संबंध स्थापित करके कृषि लागत में कमी लाते हुए आमदनी एवं रोजगार में वृद्धि कर सके।

इस प्रणाली के अंतर्गत किसान अपनी भूमि के 1/10 भाग पर तालाब या ट्रेंच बनाकर वर्षा जल संग्रहित कर सकते है। इस संचित जल में मछली तथा बत्तख पालन के साथ-साथ इसे सिंचाई के लिए सार भर इस्तेमाल किया जा सकता है। मछली पालन के तहत तालाब में छ:तरह की मछलियाँ रोहू, कतला, मृगाल, कामन कार्प, स्लिवर कार्य तथा ग्रास कार्य को पाला जा सकता है। ये मछलियाँ तालाब के पानी में विभिन्न स्तर पर रहती है। इस तरह तालाब में संग्रहित विभिन्न स्तर के जल का भरपूर दोहन करते हुए उच्च उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। साधारणतया एक हेक्टेयर तालाब के लिए 6000-7000 जीरा है जिनकी लम्बाई 3-4 इंच हो तालाब में डाला जाता है। बत्तख के साथ मछली उत्पादन करने पर 8-10 इंच की 3000-4000 जीरा तालाब में डाला जाता है ताकि बत्तख उन्हें खा न सके। समन्वित कृषि प्रणाली के अन्य उद्यम जैसे मवेशी, सूकर, मुर्गी या बत्तख पालन द्वारा परित्यक्त मल-मूत्र एवं अपशिष्ट पदार्थों को तालाब में निष्काषित किया जाता है जिससे मछलियों के लिए समुचित प्राकृतिक भोजन उपलब्ध होता। इस व्यवस्था में मछली के लिए अलग से पूरक आहार की आवश्यकता नहीं होगी। उत्सर्जित मल-मूत्र काफी होगा। बत्तख के साथ मत्स्य उत्पादन करने पर बत्तखों द्वारा तालाब में विचरण करने से पानी में जो उछाल होता है उससे वायुमंडल का ऑक्सीजन पानी में जाता है जो कि मछलियों के लिए जीवनदायी का काम करता है क्योंकि पानी में ऑक्सीजन की कमी होने पर मछलियाँ मर सकती है। इसलिए मछली उत्पादन के ली समय-समय पर चूने का प्रयोग किया जाता है। अत: तालाब में मछली के साथ बत्तख का उत्पादन करने पर चूने की लागत में कमी आती है साथ ही बत्तख उन कीट-पतंगों को जो मछलियों के लिए हानिकारक होती है उनका भक्षण करती है तथा मछलियों को हानिकारक रोगों से बचाती हैं इन कीट-पतंगों को खाने से बत्तखों की 18% तक प्रोटीन की जरूरत की पूर्ति होती है।

झारखंड राज्य की मुख्य फसल धान है तथा बेहतर तकनीक एवं प्रबन्धन के बावजूद 10-15 प्रतिशत धान के आधे भरे हुए अथवा कुछ भरे हुए दाने प्राप्त होते है। जिसे बत्तखों द्वारा बड़े चावपूर्वक खाया जाता है तथा जिनका उपयोग करके बतख उत्पादन में लगने वाली लागत में कमी की जा सकती है। इस प्रकार फसल उत्पादन से मिलने वाले पुआल एवं भूसा जानवरों के आहार के रूप में तथा मशरूम उत्पादन में प्रयुक्त होता है। मवेशी पशुओं द्वारा उत्सर्जित मल-मूत्र और कृषि प्रक्षेत्र से प्राप्त अवशेष जैसे पुआल, घास-फूस तथा अन्य अपशिष्ट पदार्थ का उपयोग केचुआ खाद उत्पादन अथवा कम्पोस्ट खाद उत्पादन में प्रयोग किया जाता है जिससे प्रयोग करके फसल उत्पादन की लागत में कमी लाई जा सकती है तथा मृदा उत्पादकता को बरकरार रखा जा सकता है। तालाब की तलहटी में जमीन गाद भी पोषक तत्वों से भरपूर होती है जिसका उपयोग भी खाद के रूप में किया जा सकता है। समन्वित कृषि प्रणाली के वानिकी खण्ड में वृक्षों के बीच की जगह को चारागाह के रूप में बनाया जा सकता है जिसमें समन्वित कृषि प्रणाली के मवेशी स्वतंत्रपूर्वक चर सके तथा कृषि वानिकी समन्वित कृषि प्रणाली के अन्य उद्यम जैसे मधुमक्खी पालन, लाख उत्पादन, रेशम कीट पालन को भी आधार देता है। साधरणतया एक हेक्टेयर क्षेत्रफल के लिए मधुमक्खी के 10 बक्से रखे जाते है। समन्वित कृषि प्रणाली के अंतर्गत मधुवाटिका के आसपास सालों भर फसल, सब्जियाँ तथा फूल विद्यमान रहते है जिससे मधुमक्खियों को पर्याप्त मात्रा में पुष्परस तथा पराग उपलब्ध होता है। साथ ही मधुमक्खियों के द्वारा फसल उत्पादन में वृद्धि होती है खासकर उन फसलों में जिसमें मधुमक्खियों के द्वारा परागण किया जाता है। इस प्रकार समन्वित कृषि प्रणाली में ऐसा समन्वय स्थापित किया जाता है कि एक उद्यम दूसरे उद्यम का पूरक हो जिससे हरेक उद्यम की लागत में कमी आये और किसान हरेक उद्यम से अधिक से अधिक लाभ प्राप्त कर सके।

समन्वित कृषि प्रणाली के लाभ

समन्वित कृषि प्रणाली अपनाकर झारखंड के किसान अपने खेतों में संग्रहित जल से फसल आच्छादन बढ़ा सकते है तथा उपलब्ध संसाधनों का भरपूर दोहन करते हुए अपनी आय में वृद्धि कर सकते है। समन्वित कृषि प्रणाली के अंतर्गत कृषि के विभिन्न उद्यम जैसे मवेशी पालन, बत्तख पालन, मुर्गी पालन से किसानों को रोजाना आय प्राप्त हो सकती है जिससे वह अपनी रोजमर्रा की जरूरतों की पूर्ति कर सकता है। छोटे एवं सीमांत किसान इस प्रणाली के द्वारा अपनी भूमि पर सालो भर रोजगार प्राप्त कर सकते है तथा बड़े किसान अपनी भूमि पर दूसरों को रोजगार मुहैया करा सकते है। अत: अच्छी आमदनी एवं रोजगार प्राप्त होने पर किसानों एवं मजदूरों का गाँवों से शहरों की तरफ होने वाले पलायन को रोका जा सकता है। साथ ही इस प्रणाली को अपनाकर हम मृदा-उत्पादकता को बरकरार रखते हुए अपने पर्यावरण को सुरक्षित रख सकते है।

झारखंड के विभिन्न कृषि जलवायु के लिए कृषि प्रणाली एवं तकनीक

कृषि प्रणाली

प्रस्तावित तकनीक/ कार्य

फसल + पशुधन

फसल+पशुधन/ मुर्गी पालन/ मधुमक्खी पालन/ मशरूम की खेती/ सब्जी की खेती/ बीज उत्पादन/ मछली पालन/ उद्यान/ बकरी पालन/ बत्तख पालन/ सूअर पालन/ टर्की/ वानिकी-सह

सब्जी + पशुधन+ फसल

सब्जी की खेती + पशुधन +उद्यान/वन उत्पादन/ भेड़ पालन/खरगोश पालन/ मधुमक्खी पालन/ मशरूम उत्पादन वानिकी-सह- चारा + फसल + पशुधन वानिकी – सह – चारा + पशुधन + फसल + जल संग्रह प्रबन्धन

फसल+मुर्गी पालन+ पशुधन

फसल+मुर्गी पालन+पशुधन/ मछली पालन/मुर्गी पालन/सूअर पालन/ उद्यान/ फूल की खेती/ वानिकी-सह-चारा फसल/ बकरी पालन/ बत्तख पालन/ खरगोश पालन/मधुमक्खी पालन।

मछली पालन+फसल+पशुधन

मछली पालन+फसल+पशुधन+बत्तख पालन/ मुर्गी पालन/ सब्जी की खेती/ उद्यान/सूअर पालन।

मछली पालन+पशुधन

मछली+ फसल+सब्जी+पशुधन

फसल+पशुधन+कृषि वानिकी

फसल+पशुधन+कृषि वानिकी/मधुमक्खी पालन/ बकरी पालन/ मुर्गी पालन/ बगीचा/फूल की खेती/उद्यान/सब्जी की खेती।

कृषि वानिकी+चारा फसल

वानिकी-सह-चारा फसल/ फसल/पशुधन+वर्षा जल संग्रह

फसल+पशुधन+उद्यान

फसल+पशुधन+उद्यान/बकरी पालन/मुर्गी पालन/सब्जी की खेती/ मशरूम उत्पादन/ बीज उत्पादन।

फसल+उद्यान

फसल+उद्यान/ बकरी पालन/ सूअर पालन/ सब्जी की खेती/ मुर्गी पालन।

फसल+मुर्गी पालन+उद्यान

फसल+मुर्गी पालन+उद्यान/बकरी पालन/मशरूम की खेती/ बीज उत्पादन।

मछली पालन+फसल+उद्यान

मछली पालन+फसल+उद्यान/मुर्गी पालन/सब्जी की खेती/ फसल+ पशुधन/ मछली पालन+मशरूम।

वानिकी-उद्यान+पशु

वृक्षारोपण+मुर्गी पालन+मसाला/ पशुपालन/उद्यान/मल्टीटायर/ सघन कृषि/ मुर्गी पालन/ वृक्षारोपण + फसल कृषि वानिकी/ बत्तख पालन/ मछली पालन/ सूअर पालन।

उद्यान-आधारित

नारियल + मसाला/ फसल

पशुधन –आधारित

पशुधन+ फसल/ मुर्गी पालन/ सब्जी की खेती/ बीज उत्पादन/ मसाले की खेती/ बकरी पालन/ उद्यान/ वानिकी-सह-चारा फसल+ फसल।

 

मानव स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी

1. वयस्क पुरुषों के लिए संतुलित आहार (ग्राम/प्रतिदिन)

खाद्य सामग्री

साधारण श्रम श्रेणी

मध्यम श्रम श्रेणी

भारी श्रम श्रेणी

शाकाहारी

मांसाहारी

शाकाहारी

मांसाहारी

शाकाहारी

मांसाहारी

अनाज

400

400

475

475

650

650

दालों

70

55

80

65

80

65

सब्जियाँ

 

 

 

 

 

 

हरी पत्ती वाली

100

100

125

125

125

125

जड़ वाली

75

75

100

100

100

100

अन्य

75

75

72

75

1`00

100

फल

30

30

30

30

30

30

दूध आदि

200

100

200

100

200

100

घी, तेल आदि

35

40

40

40

50

50

मांस-मछली

-

30

-

30

-

30

अंडे

-

30

-

30

-

30

शक्कर, गुड़ आदि

30

30

40

30

55

55

मूंगफली

-

-

-

-

50

50

 

नोट: मूंगफली की जगह 25 ग्राम घी, तेल आदि का प्रयोग किया जा सकता है।

2. वयस्क महिलाओं के लिए संतुलित आहार (ग्राम/प्रतिदिन)

खाद्य सामग्री

साधारण श्रम श्रेणी

मध्यम श्रम श्रेणी

भारी श्रम श्रेणी

विशेष परिस्थिति में अतिरिक्त

शाकाहारी

मांसाहारी

शाकाहारी

मांसाहारी

शाकाहारी

मांसाहारी

शाकाहारी

मांसाहारी

अनाज

300

300

350

350

475

475

50

100

दालों

60

45

70

55

70

55

-

10

सब्जियाँ

 

 

 

 

 

 

 

 

हरी पत्ती वाली

125

125

125

125

125

125

125

125

जड़ वाली

50

50

75

75

100

100

-

-

अन्य

75

75

75

75

1`00

100

-

-

फल

30

30

30

30

30

30

-

-

दूध आदि

200

100

200

100

200

100

125

125

घी, तेल आदि

30

35

35

40

40

45

-

-

मांस-मछली

-

30

-

30

-

30

-

-

अंडे

-

30

-

30

-

30

-

-

शक्कर, गुड़ आदि

30

30

30

30

40

40

10

20

मूंगफली

-

-

-

-

40

40

-

-

 

नोट: मूंगफली की जगह 25 ग्राम घी, तेल आदि का प्रयोग किया जा सकता है।

स्त्रोत: कृषि विभाग, झारखंड सरकार



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