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कृषि विपणन आधारिक संरचना

कृषि विपणन आधारिक संरचना

पृष्ठभूमि

फसल कटाई के बाद विभिन्न कृषि उत्पादों/ विपणय अधिशेष के प्रबंधन की आवश्यकता को पूरा करने के लिए विपणन आधारिक संरचना के विकास हेतु यह योजना तैयार की गई है| कृषि मंत्रालय द्वारा स्थापित विशेषज्ञ समिति ने अनुमान लगाया है कि कृषि विपणन में आधारित संरचना के विकास के लिए अगले दस वर्षो में 11,172 करोड़ रूपए के निवेश की आवश्यकता होगी| इस निवेश का एक बड़ा हिस्सा निजी क्षेत्र से प्राप्त होने की के लिए कानून सम्मत स्थान बनाने की आवश्यकता पर विभाग में कई बार विचार-विमर्श हो चुका है|

मुख्य विशेषताएँ

  • सुधार संयोजित निवेश योजना: कृषि और सहगामी क्षेत्रों (डेरी, मांस मछली – पालन तथा गौण वन उत्पादन सहित) में आधारिक संरचना परियोजनाओं के तीव्र विकास को प्रोत्साहित करना|
  • निवेश सब्सिडी : उत्पादकों/कृषक समुदायों को फसल कटाई के बाद के प्रबंधन/उपज के विपणन में ‘डायरेक्ट’ सेवा प्रदान करने वाली प्रत्येक परियोजना पर 50 लाख तक के पूंजीनिवेश पर 25%| पूर्वोत्तर राज्यों, पर्वतीय और जनजाति क्षेत्रों तथा अनुसूचित जाति/जनजाति के उद्यमियों तथा उनकी सहकारी समितियों को 60 लाख रूपये तक के पूँजी निवेश पर 33.33% की सब्सिडी दी जाएगी|

राज्य एजेंसियों की आधारित संरचना परियोजनाओं के संदर्भ में सब्सिडी की कोई अधिकतम सीमा नहीं होगी|

शर्तें

  • यह योजना केवल उन राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में लागू होगी जो ‘प्रत्यक्ष विपणन’ और संविदा कृषि’ की अनुमति देने तथा निजी और सहकारी क्षेत्रों में कृषि उपज मंडियों की अनुमति देने के लिए कृषि उपज मंडी समिति अधिनियम में सुधार करेंगे|
  • परियोजना लागत में प्रोत्साहक का अंशदान वित्तदाता बैंक द्वारा निर्धारित किया जाएगा जिसमें सामान्य मामलों में बैंक लोग 50% रहेगा तथा पर्वतीय क्षेत्रों आदि में यह 46.67% होगा|

 

आधारिक संरचना परियोजनाओं की विस्तृत सूची

  • मंडी प्रयोगकर्त्ता के लिए सामान्य सुविधाएं यथा मंडी अहाता, उपज लड़ने, एकत्र करने तथा नीलामी की लिए चबूतरा, तोलने तथा यांत्रिक संभलाई उपस्कर|
  • माल एकत्र करना, श्रेणीकरण, मानकीकरण, गुणवत्ता प्रमाणन, लेबलिंग, पैकेजिंग, मूल्य बढ़ाने की सुविधाएँ (उत्पाद का रूप परिवर्तित किए बिना) के लिए कार्यात्मक कार्ययोजना|
  • उत्पादकों से उपभोक्ता/प्रसंस्करण इकाइयों/अंबार क्रेताओं इत्यादि तक प्रत्यक्ष विपणन के लिए आधारित संरचना|
  • ई- व्यापार, मंडी विस्तार और मंडी प्रधान उत्पादन योजना के लिए आधारिक संरचना|
  • फसल कटाई के बाद के कार्यों अर्थात् श्रेणीकरण, पैकेजिंग, गुणवत्ता परीक्षण इत्यादि (यातायात उपस्करों को छोड़कर) के लिए सचल आधारिक संरचना|

 

उद्देश्य

योजना के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं :

  1. डेरी, मुर्गीपालन, मछली पालन, पशुधन, और गौण वन उपज सहित कृषि और सहगामी वस्तुओं के भारी मात्रा में विपन्य अधिशेष की संभावना को ध्यान में रखते हुए उसके प्रबंधन के लिए अतिरिक्त कृषि विपणन आधारिक संरचना की व्यवस्था करना है|
  2. निजी और सहकारी क्षेत्रों द्वारा निवेश का प्रारंभ करके प्रतिस्पर्धात्मक वैकल्पिक कृषि विपणन आधारिक संरचना को प्रोत्साहित करना जिसमें उत्पादन बढ़ाने और गुणवत्ता के लिए प्रोत्साहन होगा और उससे किसानों की आमदनी में वृद्धि होगी|
  3. निपुणता बढ़ाने के लिए विद्यमान कृषि विपणन आधारिक संरचना का सुदृढ़करण|
  4. प्रत्यक्ष विपणन को बढ़ावा देना ताकि बिचौलियों और संभलाई चैनल में कमी आय, मंडी दक्षता बढ़े और किसानों की आमदनी में वृद्धि हो|
  5. कृषि उपज के श्रेणीकरण, मानकीकरण और गुणवत्ता प्रमाणन के लिए आधारित संरचना सुविधाओं की व्यवस्था करना ताकि किसानों को उपज को गुणवत्ता के अनुरूप मूल्य मिल सके|
  6. प्रतिभूति वित्त प्रबंधन और विपणन ऋण, बेचनीय मालगोदाम रसीद प्रणाली की शूरूआत, वायदा और भावी मंडियों के प्रोत्साहन पर विशेष जोर देने के लिए श्रेणीकरण, मानकीकरण और गुणवत्ता प्रमाणन व्यवस्था को बढ़ावा देना ताकि मंडी व्यवस्था को बढ़ावा देना ताकि मंडी व्यवस्था में स्थिरता आए और किसानों की आमदनी में वृद्धि हो|
  7. प्रसंस्करण यूनिटों और उत्पादकों के बीच सीधे संपर्क को बढ़ावा देना|
  8. श्रेणीकरण, मानकीकरण और गुणवत्ता प्रमाणक सहित कृषि विपणन पर किसानों, उद्यमियों और मंडी कर्मियों को शिक्षा तथा प्रशिक्षण प्रदान करके सामान्य जागरूकता पैदा करना|

 

योजना की मुख्य विशेषताएँ

यह योजना सुधारों से जुड़ी है:

  1. यह योजना उन राज्यों में कार्यान्वित की जाएगी जो प्रत्यक्ष विपणन एवं संविदा कृषि और निजी तथा सहकारी क्षेत्रों में कृषि मंडियों की स्थापना की अनुमति देने के  लिए आवश्यक्तानूसार कृषि उपज मंडी समिति अधिनियम को संशोधित करते हैं|
  2. कृषि वस्तुओं के विपणन और विद्यमान थोक अथवा ग्रामीण आवधिक या जनजातीय क्षेत्रों की कृषि मंडियों के सुदृढ़करण तथा आधुनिकीकरण के लिए समाने अथवा वस्तु विशिष्ट आधारिक पश्च समायोजन सब्सिडी दी जाएगी|

 

विपणन आधारिक संरचना

3. योजना के लिए आधारिक संरचना के अंतर्गत निम्नलिखित में से कोई एक समाविष्ट हो सकता है|

क) माल एकत्र करना, सुखाना, सफाई, श्रेणीकरण, मानकीकरण, एस पी एस (स्वास्थय संरक्षक एवं स्वास्थ्य पूरक उपाय, गुणवत्ता प्रमाणक, लेबलिंग, पैकिजिंग, पकाने के चैम्बर्स, खुदरा और थोक बिक्री, मूल्य बढ़ाने की सुविधाओं (उत्पादन का रूप में बदले बिना) इत्यादि के लिए कार्यात्मक आधारिक संरचना|

ख) परियोजना क्षेत्र में मंडी प्रयोगकर्त्ताओं के लिए सामान्य सुविधाएँ उपलब्ध कराना जैसे  दूकान/कार्यालय, लदान/उतराई/उपज को इकट्ठा करने एवं नीलामी के लिए चबूतरा, पार्किंग रोड, आन्तरिक सड़कें, कूड़ा फेंकने की व्यवस्था, चाहरीदीवारी, पीने का पानी, सफाई व्यवस्था, तुलाई और यांत्रिक संभलाई उपस्करों की व्यवस्था|

ग) उत्पादकों से उपभोक्ताओं/प्रसंस्करण इकाइयों अंबार क्रेताओं तक कृषि वस्तुओं के प्रत्यक्ष विपणन के लिए आधारित संरचना की स्थापना|

घ) किसानों की उत्पादन इनपुट और आवश्यकता आधारित सेवाओं की आपूर्ति के लिए आधारिक संरचना की व्यवस्था|

ङ) ई- व्यापर. मंडी आसूचना, विस्तार और मंडी प्रधान उत्पादन योजना के लिए आधारिक संरचना (उपस्कर, हार्डवेयर, गैजिट)  आदि|

च) इस योजना के अंतर्गत फसलोपरांत कार्यों (परिवहन उपस्कर को छोड़कर) चल आधारिक संरचना की लिए भी सहायता दी जाएगी|

 

पात्र व्यक्ति

4. देश भर में एकल व्यक्ति, कृषक/उत्पादक/उपभोक्ता समूह, साझेदारी/स्वामित्व फर्में, गैर सरकारी संगठन (एन जी ओ) स्वयं सहायता समूह (एस एच जी एस), कंपनियां, निगम, सहकारी समितियाँ, सहकारी विपणन संघ, स्थानीय निकाय, कृषि उपज विपणन बोर्ड|

5. राज्य एंजेसियों की बैंक से सहायता प्राप्त परियोजनाएँ, जिनमें विद्यमान विपणन आधारिक संरचना के सुदृढ़करण/आधुनिकीकरण के लिए नाबार्ड द्वारा पुनर्वित्तपोषित/सहवित्तपोषित परियोजनाएँ शामिल हैं, इस योजना के अंतर्गत सहायता के लिए पात्र होंगी|

 

भूमि तथा अवस्थिति

6. योजना के तहत उद्यमी आर्थिक व्यवहार्यता और वाणिज्यिक पहलुओं के आधार पर, अपनी पसंद के किसी भी स्थान पर विपणन आधारिक संरचना परियोजना स्थापित करने के लिए स्वतंत्र है| तथापि परियोजना द्वारा उत्पादकों/कृषक समुदाय को, उपज के फसलोपरांत प्रबंधन/विपणन में डायरेक्ट सेवा प्रदान की जानी चाहिए|

7.  आधारिक संरचना परियोजना में भूमि के लागत, ग्रामीण क्षेत्रों में कूल परियोजना लागत के अधिकतम 10% तक और नगर निगम क्षेत्र में अधिकतम 20% तक सीमित रहेगी तथा इसे परियोजना के मालिक का अंशदान समझा जाएगा|

8. उद्यमी ऋण की आवधि के दौरान भूमि को उस उद्देश्य के अलावा जिसके ली ऋण स्वीकृत हुआ है, किसी अन्य कार्य के लिए प्रयोग में नहीं लाएगा|

 

ऋण आधारित सहायता

योजना के अधीन सहायता ऋण पर आधारित है और उन आधारित संरचना परियोजना के लिए है जिनको स्वीकृति, आर्थिक व्यवहार्यता और वाणिज्यिक पहलुओं के आधार पर वाणिज्यिक/सहकारी/क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों द्वारा दी गई हो|

9. योजना के तहत दी जाने वाली सहायता केवल परियोजना की पूंजीगत लागत पर ही देय होगी| तथापि, बैंक/राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगम (एन सी डी सी), किसानों/उद्यमियों की विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अन्य क्रियाकलापों/कार्यशील पूँजी हेतु वित्तपोषण के लिए स्वतंत्र होगा|

सब्सिडी

10. सब्सिडी की दर परियोजना की पूंजीगत लागत का 25% होगी| पूर्वोत्तर राज्यों, पर्वतीय और जनजातीय क्षेत्रों तथा अनुसूचित जाति/जनजाति के उद्यमियों तथा उनकी सहकारी समितियों के लिए यह दर परियोजना की पूँजीगत लागत का 33.33% होगी|

11. सब्सिडी की अधिकतम राशि प्रत्येक परियोजना के लिए 50 लाख रूपए तक सीमित होगी| पूर्वोत्तर राज्यों, पर्वतीय और जनजातीय क्षेत्रों तथा अनुसूचित जाति/जनजाति के उद्यमियों तथा उनकी सहकारी समितियों के लिए सब्सिडी की राशि प्रत्येक परियोजना के लिए 60 लाख रूपए तक सीमित होगी|

12. राज्य एजेंसियों की आधारिक संरचना परियोजनाओं के लिए, योजना के तहत दी जाने वाली सब्सिडी की कोई अधिकतम सीमा नहीं होगी|

19. परियोजना या उसके किसी घटक के लिए किसी अन्य केन्द्रीय योजना से प्राप्त की गई केन्द्रीय सहायता/सब्सिडी की राशि, इस योजना से प्राप्त की गई केन्द्रीय सहायता/सब्सिडी की राशि, इस योजना के तहत स्वीकार्य सब्सिडी राशि में से घटा दी जाएगी|

सब्सिडी जारी करना

20. इस योजना के तहत उन परियोजनाओं के लिए सब्सिडी नाबार्ड के माध्यम से दी जाएगी जिनका वित्तपोषण वाणिज्यिक, सहकारी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, कृषि विकास वित्तपोषण कंपनी (ए डी एफ सी) अनुसूचित प्राथमिक सहकारी बैंक (पी सी बी), पूर्वोत्तर विकास वित्तीय निगम (एन ई दी एफ आई) और नाबार्ड द्वारा पुनर्वित्तपोषण के लिए पात्र अन्य संस्थाओं द्वारा किया जाता है| एन. सी. डी. सी. या एन. सी. डी. सी. द्वारा मान्यता प्राप्त सहकारी बैंकों द्वारा वित्तपोषित परियोजनाओं के लिए सब्सिडी एनसीडीसी के माध्यम से और इसके पात्रता दिशा निर्देशों के अनुसार दी जाएगी|

ऋणी के खाते में सब्सिडी का समायोजन :

 

21. एकल परियोजना के लिए बैंक/एन.सी.डी.सी. दी गई सब्सिडी ऋणी के अलग –अलग कहते में रखी जाएगी| सब्सिडी का समायोजन अंत में किया जाएगा| तदनुरूप सब्सिडी राशि सहित लेकिन लाभ प्राप्त करने वाले उद्यमी की सीमांत अंशदान को छोड़कर कूल परियोजना बैंक द्वारा ऋण के रूप में दी जाएगी| ऋण की राशि पर प्रति संदाय सूची इस प्रकार तैयार की जाएगी कि ब्याज सहित कूल बैंक ऋण की राशि, सब्सिडी की राशि में समायोजित हो जाए| वित्तपोषक बैंक को यह अधिकार नहीं होगा कि वह नाबार्ड/एनसीडीसी की सिफारिश और प्रधान कार्यालय, विपणन एवं निरिक्षण निदेशालय के अनुमोदन के बिना, परियोजना की स्वीकृति के समय निर्धारित की गई प्रतिसंदाय सूची में परिवर्तन करे|

 

सब्सिडी की राशि पर कोई ब्याज नहीं

22. योजना के तहत प्रवर्तक के लिए स्वीकार्य सब्सिडी की राशि वित्तपोषक बैंक के सब्सिडी आरक्षित निधि खाते में (प्रत्येक ऋणी का अलग – अलग) रखी जाएगी| इस राशि पर बैंक द्वारा कोई ब्याज नहीं लगेगा| इस प्रकार सब्सिडी राशि को छोड़कर राशि को छोड़कर, सिर्फ ऋण की राशि पर ब्याज लिया जाएगा| अत: एस.एल.आर/सी.आर.आर के लिए सब्सिडी आरक्षित निधि खाते में बची शेष राशि पर मांग एवं समय – सीमा लागू नहीं होगी|

23. दसवीं योजना के अंतर्गत, विपणन आधारिक संरचना के लिए 175 करोड़ रूपए की केन्द्रीय सहायता से यह स्कीम 20.10. 2004 से प्रारंभ होकर 2004-05, 2005-06 और 2006-07 के दौरान कार्यान्वित की जाएगी| इसके अतिरिक्त एगमार्क प्रयोगशालाओं के सुदृढ़करण, सामान्य जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा अध्ययन इत्यादि के लिए केंद्र की ओर 15 करोड़ रूपये का प्रावधान है|

कार्यान्वयन एजेंसी

24. यह योजना विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय (डी. एम. आई.) द्वारा कार्यान्वित की जाएगी जो कृषि एवं सहकारिता विभाग का संबद्ध कार्यालय है| डी. एम. आई. के क्षेत्रीय/ उप कार्यालयों की सूची अनुलग्नक VII  पर दी गई है|

सहायता पैटर्न

  1. I. बैंक/नाबार्ड द्वारा वित्त पोषित परियोजनाओं के लिए

निधीयन पैटर्न

वित्तीय स्रोत

पूर्वोत्तर राज्यों और पहाड़ी क्षेत्रों को छोड़कर

पूर्वोत्तर राज्यों, पर्वतीय और जनजाति क्षेत्र/अनुसूचित जाति/जनजाति के उद्यमियों तथा उनकी सहकारी समितियों के लिए

केंद्र सरकार द्वारा सब्सिडी

25%

33.33%

वाणिज्यिक/सहकारी बैंकों इत्यादि से संस्थागत ऋण

न्यूनतम 40%

न्यूनतम 46.67%

मंलिक अंशदान

शेष परियोजना लागत

शेष परियोजना लागत

 

पर्वतीय क्षेत्र के अंतर्गत के स्थान आते हैं जो माध्य स्मूद्र्तल से 1000 मीटर की ऊँचाई पर स्थित हैं|

जनजातीय क्षेत्र वे हैं जिन्हें केंद्र सरकार/संबंधित राज्य सरकार द्वारा जनजाति क्षेत्र के रूप में अधिसूचित किया गया हो|

ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि की लागत के 10% से अधिक नहीं और नगरपालिका क्षेत्रों में भूमि की लागत के 20% से अधिक नहीं| परियोजना लागत को मालिक का अंशदान समझा जा सकता है|

जारी  करने का तरीका

क) सब्सिडी की 50% कृषि एवं सहकारिता विभाग द्वारा नाबार्ड को पहले ही प्रदान कर दी जाएगी| तदनुसार, नाबार्ड द्वारा सहभागी बैंकों को सब्सिडी पहले से ही दे दी जाएगी ताकि वे उसे संबंधित कर्जदारों के सब्सिडी रिजर्व फंड एकाउंट में रख सकें| यह राशि परियोजना की समाप्ति पर बैंक द्वारा दी गई ऋण राशि के साथ अंतिम रूप में समायोजित की जाएगी| 50% सब्सिडी की यह राशि नाबार्ड द्वारा, सहभागी बैंकों को प्रोजेक्ट प्रोफाइल एवं दावा फार्म प्रस्तुत करने पर दी जाएगी|

सब्सिडी के शेष 50% राशि नाबार्ड द्वारा सहभागी बैंक/बैंकों को तब संवितरित की जाएगी जब नाबार्ड, सहभागी बैंक और संबंधित राज्य में विपणन एवं निरिक्षण निदेशालय (डी.एम.आई.) के अधिकारीयों की संयूक्त निरिक्षण समिति द्वारा निरीक्षण कर लिया जाए|

  1. II. एन.सी.डी.सी. द्वारा वित्तपोषित परियोजनाओं के लिए

निधीयन का तरीका

पूर्वोत्तर राज्यों, पर्वतीय क्षेत्रों और जनजातीय क्षेत्रों तथा अनुसूचित जाति/जनजाति की सहकारी समितियों को छोड़कर सभी राज्यों में

एन. सी. डी. सी. से राज्य सरकार को                                     राज्य सरकार से सोसाइटी को

आवधिक ऋण          -         65%                                          आवधिक ऋण -           50%

सब्सिडी                   -         25%                                          शेयर पूँजी         -         15%

सब्सिडी            -         25%

सोसाइटी शेयर -         10%

पूर्वोत्तर राज्यों, पर्वतीय क्षेत्रों तथा अनुसूचित जाति/जनजाति की सहकारी समितियों के लिए

एन. सी. डी. सी. से राज्य सरकार को                                     राज्य सरकार से सोसाइटी को

आवधिक ऋण          -         56.67%                                     आवाधिक ऋण            -     50%

सब्सिडी                   -         33.33%                                     शेयर पूँजी         -         06.67%

सब्सिडी            -         33.33%

सोसाइटीशेयर   -         10.00%

न्यूनतम आवधिक ऋण 50% ( आवधिक ऋण में वृद्धि के साथ-साथ उसी अनुपात में राज्य सरकार की शेयर पूँजी परिवर्तित होगी|

सहकारी बैंकों के माध्यम से/सहकारी समितियों को सीधे

वित्तीय स्रोत

पूर्वोत्तर राज्य, पर्वतीय और जनजातीय क्षेत्रों के अलावा

पूर्वोत्तर राज्यों, पर्वतीय तथा जनजातीय क्षेत्र अनुसूचित जाति एवं जनजाति  समितियां

केंद्र सरकार द्वारा सब्सिडी

25%

33.33%

वाणिज्यिक/सहकारी बैंकों इत्यादि से संस्थागत ऋण

न्यूनतम 50%

न्यूनतम 50%

प्रोत्साहक का अंशदान

शेष परियोजना लागत

शेष परियोजना लागत

 

पर्वतीय क्षेत्रों के अंतर्गत वे स्थान आते हैं जो माध्य समुद्रतल से 1000 मीटर की ऊँचाई पर स्थित हैं|

जनजातीय क्षेत्र वे हैं जिन्हें केंद्र सरकार/संबंधित राहत सरकार द्वारा जनजातीय क्षेत्र के रूप में आधिसूसित किया गया है|

ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि की लागत के 10% से अधिक नहीं और नगर पालिका क्षेत्रों में भूमि के लागत के 20% से अधिक नहीं| परियोजना लागत को मालिक को अंशदान समझा जा सकता है|

जारी करने का तरीका सभी राज्यों के मामले में

-          सहायता राज्य सरकार की गारंटी पर प्रदान की जाती है|

-          स्वीकृत सहायता की 5% राशि भूमि के अनुमोदन और अधिग्रहण तथा राज्य सरकार द्वारा सोसाइटी को फंड दिए जाने के उपरांत प्रदान की जाएगी| स्वीकृति सहायता का शेष 50% राज्य सरकार द्वारा, शेयर पूँजी के रूप में, अपने शेयर सहित पूर्ण सहायता प्रदान करने के और और निर्माण कार्य प्लिंथ स्तर तक पहुँचने के उपरांत (जहाँ निर्माण कार्य परियोजना का हिस्सा हो) और कार्यस्थल पर मशीनरी/उपस्कर पहुँच जाने के बाद प्रदान किया जाएगा|

संघ राज्य क्षेत्र के मामले में

उपयुर्क्त पैटर्न पर केंद्र सरकार की गारंटी पर सहायता सीधे सोसाइटी को प्रदान की जाती है|

राष्ट्रीय स्तर/बहुराज्यीय सोसाइटियों/अन्य सोसाइटियों के मामले में अचल सम्पतियों के बंधक रखे जाने पर सहायता सीधे समिति को प्रदान की जाती है|

ध्यान देने योग्य बातें

क) सब्सिडी (25% या 33.33% जैसा भी मामला हो)  स्कीम के अंतर्गत निर्धरित सीमाओं के अध्यधीन होगी| तदनुसार आवधिक ऋण की मात्रा बढ़ाई जा सकती है|

ख) सोसाइटी का न्यूनतम शेयर, लागत का 10% होगा| सोसाइटियों  यदि 10% से अधिक अंशदान देने में समर्थ हों तो आवधिक ऋण/ राज्य सरकार शेयर पूँजी की मात्रा की तदनुसार घटाया जा सकता है|

ग) निर्माण आवधि के दौरान आर्थिक सहायता ब्याजमुक्त ऋण की रूप में प्रदान की जाएगी और गोदामों का निर्माण कार्य एन. सी. डी. सी. की संतुष्टि के अनुरूप पूरा होने पर उसे आर्थिक सहायता में परिवर्तित कर दिया जाएगा|

संस्थागत ऋण

क) पत्र वित्तीय संस्थान

योजना के तहत पात्र वित्तीय संस्थान हैं –

(i)     कमर्शियल बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (आर आर बी), राज्य सहकारी बैंक (एस एस बी), राज्य सहकारी कृषि एवं ग्रामीण बैंक (एस. सी. ए. आर. डी. बी. वित्त), कृषि कंपनियां (ए डी एफ सी), पूर्वोत्तर विकास वित्त निगम (एन. ई. डी. एफ. आई.) और अन्य ऐसे संस्थान जो नाबार्ड से पुनर्वित प्रबंधन के लिए पात्र होंगे|

(ii)   पात्रता दिशानिर्देशों के अनुरूप एन. सी. डी. सी. से मान्यता प्राप्त सहकारी समितियाँ और सहकारी बैंक

ख) आवधिक ऋण

परियोजना लागत का न्यूनतम 50% पूर्वोत्तर राज्यों, पर्वतीय और जनजातीय क्षेत्रों तथा अनुसूचित जाति/जनजाति के उद्यमियों तथा उनकी सहकारी समितियों के लिए 46.67% वित्तीय बैंकों से आवधिक ऋण के रूप में प्राप्त किया जा सकता है| चूंकि सब्सिडी समायोजनीय होती है, अत: सब्सिडी की देय राशि (25%/33.33%) प्रारंभ में लाभार्थी को आवधिक ऋण के रूप में दी जाएगी| प्रतिसंदाय सूची कोल ऋण राशि पर सब्सिडी सहित इस तरह तैयार की जाएगी कि सब्सिडी राशि शुद्ध बैंक ऋण (सब्सिडी को छोड़कर) के समापन के बाद समायोजित की जा सके|

(i)     प्रतिसंदाय अवधि नकदी प्रवाह पर निर्भर होगी और 11 वर्ष तक के लिए होगी जिसमें 1 वर्ष की अनुग्रह अवधि भी शामिल होगी| प्रथम वार्षिक किस्त प्रथम संवितरण की तारीख से 24 माह बाद देय होगी|

(ii)   ऋणियों के लिए आवधिक ऋण पर ब्याज दर आर. बी. आई. के दिशानिर्देशों के अनुसार बैंक (या लीड बैंक) के पी. एल. आर. पर होगी| ब्याज ऋण के प्रथम संवितरण की तारीख से देय होगा|

(iii) वित्तीय संस्थान उद्यमियों को व्यवसाय प्रारंभ करने के लिए अलग से भी कार्यपूंजी प्रदान कर सकते हैं|

(iv)  ऋण की आवधि, इसके प्रतिसंदाय, विलम्बन, ब्याज दर इत्यादि के लिए एन.सी.डी.सी. अपने मानदंडो का अनुपालन कर सकती है|

परियोजना को पूरा करने के लिए समय - सीमा

वित्तीय संस्था द्वारा ऋण की प्रथम किस्त का संवितरण की तारीख से 18 महीने निर्धारित की गई है|

तथापि, कूल 2 करोड़ रूपए या इससे अधिक परिव्यय वाली एकीकृत बड़ी समन्वित कृषि विपणन आधारिक संरचना परियोजनाएँ जिनमें चरणबद्ध रूप से कार्य किए जाने की आवश्यकता हो, वहाँ परियोजना के समापन के लिए वित्तपोषक संस्था द्वारा ऋण की पहली किस्त दिए जाने की तारीख से अधिकतम 36 महीने की समय – सीमा दी जा सकती है|

यदि परियोजना निर्धारित आवधि के भीतर पूरी नहीं होती है तो सब्सिडी का लाभ नहीं लाभ पाएगा और अग्रिम सब्सिडी तुरंत वापिस करनी होगी|

कृषि विपणन आधारिक संरचना परियोजनाओं के लिए नाबार्ड व्यवसायिक बैंक/आर.आर.बी/ए.डी.एफ.सी./एस.सी.बी.एस./एस.सी.ए.आर.डी.बी. और ऐसी अन्य पात्र संस्थाओं को पुनर्वित प्रबंधन करेगा लेकिन इन बैंकों द्वारा दी गई राशि का 90% आवधिक ऋण के रूप में होगा| तथापि, पूर्वोत्तर क्षेत्रों में, एस.सी.ए.आर.डी.बी. के मामले में पुनर्वित्तप्रबंधन की राशि 95% होगी| पुनर्वित्तप्रबंधन पर ब्याज की दर नाबार्ड द्वारा समय-समय पर निर्धरित की जाएगी| वर्तमान में यह दर 6.75% वार्षिक है|

अन्य शर्तें

(i)     योजना के तहत परियोजनाओं के वित्तप्रबंधक के लिए आधारभूत संरचना समझा जाए|

(ii)   सहभागी बैंक/एन.सी.डी.सी./नाबार्ड आदि परियोजनाओं के मूल्यांकन के लिए अपने नियमों का पालन करेंगे|

(iii) परियोजना यूनिट का बीमा करवाने की जिम्मेदारी परियोजना के मालिक की होगी|

(iv)  परियोजना स्थल पर “कृषि मंत्रालय, भारत सकरार की कृषि विपणन आधारिक संरचना योजना के अंतर्गत सहायता प्राप्त” नाम पट्ट प्रदर्शित होगा|

(v)    विभिन्न निबंधनों की सरकार की व्याख्या की अंतिम व्याख्या होगी|

(vi)  संयुक्त निरिक्षण समिति के निरीक्षणों के अलावा जब कभी आवश्यक हो, भौतिक, वित्तीय और संरचनागत प्रगति के सत्यापन के लिए पूर्व और पश्च निरीक्षण किया जा सकता है|

(vii)   बिना कोई कारण बताए सरकार किसी भी शर्त को संशोधित करने, उसमें कुछ जोड़ने और उसमें से कुछ समाप्त करने का अधिकार रखती है|

परियोजना की मंजूरी और सब्सिडी जारी करने हेतु अनूपालित की जाने वाली प्रक्रिया

बैंक/नाबार्ड द्वारा वित्तप्रबंधित परियोजनाएं

क) इच्छुक प्रोत्साहक संबंधित बैंक द्वारा निर्धारित आवेदन पत्र पर परियोजना रिपोर्ट और ऋण के मूल्यांकन तथा मंजूरी के लिए आवश्यक अन्य दस्तावेजों सहित बैंक को आवधिक ऋण तथा सब्सिडी के लिए परियोजना प्रस्ताव प्रस्तुत करेगा| प्रोत्साहक, प्रस्ताव की एक प्रति अनुलग्नक vii पर दी गई, विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय के उप/क्षेत्रीय कार्यालय को भी पृष्ठांकित की जाएगी|

ख) ऋण की प्रथम किस्त के मूल्यांकन, मंजूरी और संवितरण के बाद बैंक अनुलग्नक- vii पर दी गई सूच के अनुसार विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय के उप कार्यालय/क्षेत्रीय कार्यालय को एक प्रति देते हुए, बैंक के स्वीकृति पत्र सहित, क्षेत्रीय कार्यालय नाबार्ड को, अनुलग्नक – I पर दिए गए विहित प्रपत्र में, अग्रिम सब्सिडी के लिए संक्षिप्त परियोजना रूपरेखा व मांग-प्रपत्र प्रस्तुत करेगा|

ग) नाबार्ड, सहभागी बैंक से परियोजना रूपरेखा व मांग प्रपत्र करने पर, सहभागी बैंक को मंजोरी और 50% अग्रिम सब्सिडी को सहायता आरक्षित निधि (ऋणीवार) में रखने के लिए मंजूरी प्रदान करेगा| विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय द्वारा नाबार्ड को प्रदना की गई अग्रिम सब्सिडी की पूर्णपूर्ति अथवा समायोजन के लिए नाबार्ड अनुलग्नक में दर्शाया गए मांग पत्र की एक प्रति विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय के प्रधान कार्यालय को परियोजनावार अग्रेषित करेगा| नाबार्ड द्वारा जारी की गई सहायता विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय से उपलब्ध निधियों के अद्याधीन होगी|

घ) जब परियोजना पूरी होने को होती है, तब प्रोत्साहक बैंक को सूचित करेगा बैंक, नाबार्ड तथा विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय के अधिकारीयों द्वारा गठित संयूक्त निरीक्षण समिति द्वारा इस संबंध में निरीक्षण करवाए जाने संबंधी करवाई करेगा की परियोजना तकनीकी और वित्तीय मानदंडो को पूरा करती है| संयूक्त निरीक्षण पूरा होने पर बैंक अनुलग्नक II  में दिए विहित प्रपत्र में विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय के संबंधित क्षेत्रीय/उप कार्यालय को एक – एक प्रति भेजते हुए, अंतिम सब्सिडी के लिए नाबार्ड को तीन प्रतियों में मांग प्रपत्र प्रस्तुत करेगा| अंतिम सब्सिडी के लिए मांग प्रपत्र के साथ संयुक्त समिति को निरीक्षण रिपोर्ट और समापन प्रमाण पत्र संलग्न होने चाहिए| नाबार्ड, बैंकों को अंतिम सब्सिडी जारी करेगा जिसकी पूर्णपूर्ति विपणन एवं निरिक्षण निदेशालय द्वारा की जाएगी अथवा नाबार्ड को पहले प्रदान की गई सब्सिडी राशि के साथ उसका समायोजना किया जाएगा|

एन.सी.डी.सी. द्वारा वित्त प्रबंधित परियोजनाएँ

क) एन.सी.डी.सी. कृषि विपणन आधारिक संरचना के विकास के लिए सहकारी समितियों को सहायता प्रदान करेगी|

ख) सहकारी समितियाँ, प्रस्तावों को एन.सी.डी.सी. के विहित प्रपत्र में व्यवस्थित करके उसे आर.सी.एस./राज्य सरकार को, या अगर समितियाँ बहुराज्य सहकारी अधिनियम के तहत पंजीकृत हो तो सीधे एन.सी.डी.सी. को भेजेंगी|

ग) आर.सी.एस./राज्य सरकार उस प्रस्ताव को जाँच करने के पश्चात एन.सी.डी.सी. के विचारार्थ अनुशंषित कर देगी|

घ) एन.सी.डी.सी. दी गई सहायता राशि के अनुरूप टेबल/क्षेत्र मूल्यांकन करते हुए उन प्रस्तावों पर विचार करेगी|

ङ) एन.सी.डी.सी., अपनी स्वीकृति राज्य सरकार को सम्प्रेषित करेगी और तदनुरूप राज्य सरकार समितियों को प्रतिस्वीकृति जारी करेगी|

च) निधियन, ब्याज दर तथा स्वीकृत सहायता प्रदान करने की विधि, एन.सी.डी.सी. द्वारा समय-समय परचालित मानदंडों और नीतियों के अनुरूप होगी|

छ) स्वीकृत सहायता राज्य सरकारों के माध्यम से समितियों को दी जाएगी|

ज) राज्य सरकारें समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट एन.सी.डी.सी. को भेजेंगी और एन.सी.डी.सी. उस रिपोर्ट को विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय को भेजेगी|

झ) विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय एन.सी.डी.सी. के खाते में पार्किंग के लिए एडवांस सब्सिडी जारी करेगा| सब्सिडी का परियोजनावार समायोजन/पूर्णपूर्ति विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय द्वारा किया जाएगा|

ञ) एन.सी.डी.सी. उपयोगिता प्रमाण पत्र विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय को भेजेगी|

ट) एन.सी.डी.सी. और विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय समाप्त परियोजनाओं की उपयोगिता की जाँच के लिए यादृछिक निरिक्षण कर सकते हैं|

मॉनिटरिंग

क) परियोजनाओं का नियंत्रण विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय द्वारा इसके क्षेत्रीय/उप कार्यालयों (अनुलग्नक VII पर सूची) के माध्यम से किया जाएगा और समीक्षा मासिक आधार पर नाबार्ड/ एन.सी.डी.सी. द्वारा की जाएगी|

ख) जैसा की पैराग्राफ 9 (घ) में उल्लेख किया गया है, नाबार्ड, एन.सी.डी.सी., सहभागी बैंकों के अधकारियों की संयुक्त निरीक्षण समिति जैसा भी मामला हो और विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय उपरोक्त योजना का संचालन दिशा-निर्देशों के सम्पूर्ण परिप्रेक्ष्य में परियोजना कार्य का निरीक्षण करेगा और अपनी रिपोर्ट अनुलग्नक VI  में प्रस्तुत करेगा जो कि अनुलग्नक II के साथ संलग्न होनी चाहिए| इस उद्देश्य के लिए प्रोत्साहक/सहभागी बैंक/ नाबार्ड परियोजना स्थल पर समिति द्वारा उस समय निरीक्षण करवाने के लिए, जब परियोजना पूरी हो गई हो, आवश्यक कार्यवाई करेगा ताकि सब्सिडी के जारी करने/समायोजन में किसी भी प्रकार के विलंब से बचा जा सके|

ग) ऋणी की आरक्षित निधि में सब्सिडी की अंतिम किस्त का आकलन करने के सहभागी बैंक द्वारा नाबार्ड/एन.सी.डी.सी को जैसा भी मामला हो, इस आशय से अनुलग्नक के अनुसार एक उपयोगता प्रमाण – पत्र प्रस्तुत करने की आवश्यकता होगी कि उनके द्वारा प्रदत्त की गई सब्सिडी की राशि को योजना के सभी दिशा-निर्देशों में परियोजना की स्वीकृत शर्तों के अंतर्गत लेखा पुस्तकों में पूर्णत: प्रयुक्त/ समायोजित किया गया|

घ) अनुलग्नक IV और  V  के प्रारूपों के अनुसार योजना की प्रगति रिपोर्ट/नाबार्ड/एन.सी.डी.सी. द्वारा मासिक आधार पर सीधे विपणन एवं निरिक्षण निदेशालय के प्रधान कार्यालय को भेज दी जानी चाहिए|

ङ) नाबार्ड अपने क्षेत्रीय कार्यालयों के मुख्य महाप्रबंधक/महाप्रबंधक नाबार्ड के क्षेत्रीय कार्यालयों के प्रभारी को पर्याप्त शक्तियाँ प्रदान करेगा ताकि योजना के अंतर्गत परियोजनाओं को स्वीकृत करने में और पुनर्वित प्रबंधन/सब्सिडी राशि जारी करने में शीघ्रता की जा सके|

विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय की एगमार्क प्रयोगशालाओं का सुदृढ़करण

केन्द्रीय एगमार्क प्रयोगशाला, नागपुर और 8 क्षेत्रीय एगमार्क प्रयोगशालाओं को अपेक्षित वैज्ञानिक उपकरण और सहायक सुविधाएँ प्रदान करके उन्नत किया जाएगा| उन्नयन के बाद ये प्रयोगशालाएँ कोडेक्स आवश्यकताओं के अनुसार गुण जाँच करेंगी और इन्हें राष्ट्रीय जाँच एवं अंशदान प्रयोगशालाएँ प्रत्यायन बोर्ड ( एन.ए.बी.एल.) विज्ञान एवं प्रद्यौगिकी विभाग के साथ प्रत्यायित किया जाएगा|

सामान्य जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम

आधारिक संरचना परयोजना एवं श्रेणी करण तथा मानकी करण सहित कृषि विपणन में कृषकों, मंडी कर्मियों और उद्यमियों के लिए समान्य जागरूकता, प्रचार एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम, चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय  कृषि विपणन संस्थान, जयपुर और अन्य राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर की संस्थाओं/विश्वविद्यालयों के माध्यमों से आयोजित किए जाएगें

 

नोट: अधिक जानकारी के लिए अपने नजदीकी नाबार्ड के शाखा में संपर्क करें|

स्रोत : क्षेत्रीय नाबार्ड बैंक कार्यालय, झारखण्ड



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