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कहानी बलरामपुर की

बलरामपुर के बारे में

बलरामपुर जिला छत्तीसगढ़ राज्य (भारत) का 26 वां जिला है और बलरामपुर शहर इस जिले का प्रशासनिक मुख्यालय है। यह राज्य के पिछड़े जिलों में से एक है। हालांकि इसने राष्ट्र के डिजीटल बनने की ओर सफलता से कदम बढ़ाते हुए खुद को एक डिजिटल जिले में पूरी तरह से बदल दिया है। जहां एक ओर इसकी पहचान डिजीटल भारत के एक आदर्श जिले के रूप में बनी है, जहाँ प्रत्येक पंचायत कार्यालय बहुकार्यात्मक तरीके से अपने नागरिकों को सेवाएं प्रदान करने में सक्षम हो गया है। सही शब्दों में बलरामपुर जिले को अब वास्तविक रूप में बायोमैट्रिकपुर जिले के रूप में जाना जा सकता है।

परिवर्तन

जिला प्रशासन ने पूरे जिले में ई-सेवाएं प्रदान करने के भाग के रूप में ई-गवर्नेंस परियोजना बायोमैट्रिकपुर के नाम से शुरुआत की। परियोजना की शुरुआत जनवरी 2015 की गई थी। ऑप्टिकल केबल तार के माध्यम से,  ग्राम पंचायतों के माध्यम से,  ऑनलाइन सरकारी योजनाएं और इंटरनेट की सुविधा प्रदान की जा रही है। इस जिले के अधिकांश गांवों में अब 24 घंटे बिजली आपूर्ति है। यह  छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के एक गांव -पत्थरपाड़ा की सफलता की कहानी है। मनरेगा के तहत किये गये कार्यों के लिए मजदूरी प्राप्त करने के लिए पत्थरपाड़ा गांव के लोगों को अपनी मेहनत के पैसे पाने के लिए कई बाधाओं और अपमान का सामना करना पड़ता था और अपनी बारी के लिए घंटों  ंइंतजार करना पड़ता था  और यह सब करने के लिए पास के शहर की यात्रा करना जरुरी था। यह हर दिन की मजदूरी का भुगतान का मामला था, जो अब ऐसा नहीं  रहा। ऑनलाइन सरकारी योजनाएं और इंटरनेट की सुविधा प्रदान की जा रही है। इस जिले के अधिकांश गांवों में अब 24 घंटे बिजली आपूर्ति है।

यह  छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के एक गांव -पत्थरपाड़ा की सफलता की कहानी है। मनरेगा के तहत किये गये कार्यों के लिए मजदूरी प्राप्त करने के लिए पत्थरपाड़ा गांव के लोगों को अपनी मेहनत के पैसे पाने के लिए कई बाधाओं और अपमान का सामना करना पड़ता था और अपनी बारी के लिए घंटों के लिए इंतजार करना पड़ता था  और यह सब करने के लिए पास के शहर की यात्रा करना जरुरी था। यह हर दिन की  मजदूरी का भुगतान का मामला था, जो अब ऐसा नहीं रहा। अब, स्थिति बदल गई है। डिजीटल इंडिया एवं ई-शासन कार्यक्रम के रुप में शुरु की गई पहल को धन्यवाद, जिससे अब पंचायत में एक बैंक है और जहां नागरिकों द्वारा मनरेगा भुगतान प्राप्त किया जा सकता है। पंचायत अब ग्रामीणों तक कई अन्य नागरिक सेवाएं प्रदान करने की पेशकश करता है, जो उनके नजदीक स्थान से प्राप्त की जा सकती है।

इस सब निम्नलिखित कार्यों की वजह से संभव हो पाया -

  • बलरामपुर जिले की 341 ग्राम पंचायतों में से 301 ग्राम पंचायतें पहले ही कई नागरिक सहायक कार्यों के साथ कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) में परिवर्तित हो रही हैं।
  • 7.6 लाख की कुल जनसंख्या में से 5.6 लाख लोगों का खाता बायोमेट्रिक पंजीकरण के साथ जोड़ा गया है।
  • 4.03 लाख लोगों के बैंक खातों को बॉयोमीट्रिक प्रणाली से जोड़ते हुए आधार कार्ड से लिंक किया गया है।

स्त्रोत: सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेस इंडिया लिमिटेड

संबंधित स्त्रोत

१.बलरामपुर जिला

२. प्रेस कवरेज-बायोमैट्रिक-एक ई-शासन परियोजना से जिले की बदलती स्थिति



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