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प्राथमिक विद्यालयों के लिए पोषाहार योजना

भूमिका

15 अगस्त 1995 को तत्कालीन प्रधानमंत्री द्वारा प्रथमिकता विद्यालयों के लिए पोषाहार कार्यक्रम की घोषणा की गई इस कार्यक्रम के अंतर्गत सरकारी स्कूलों में वर्ग 1 से वर्ग 5 तक पढ़ने वाले सभी बच्चों को, जिनकी प्रतिमाह वर्ग में उपस्थिति 80 प्रतिशत रहती है उन्हें, प्रतिदिन 100 ग्राम अनाज (चावल/गेहूं) की दर से महीने में 3 किलो अनाज दिया जाता है

पोषाहार कार्यक्रम के  उद्देश्य

 

पोषाहार कार्यक्रम के प्रमुख उद्देश्य हैं –

क) बच्चों के पोषण स्तर में वृद्धि

ख) सन 2000 तक सबके लिए प्राथमिक शिक्षा

ग) बच्चों में जाति और समुदाय के भेदभाव को दूर करके सही सामाजिक व्यवहार को बढ़ावा देना।

घ) निर्धन वर्गों में धीरे-धीरे सामाजिक आर्थिक परिवर्तन लाना।

पोषाहार कार्यक्रम पूरे देश में एक साथ शुरू किया गया है

 

यह कार्यक्रम पूरे देश में एक साथ नहीं चल रहा है। फ़िलहाल यह कार्यक्रम 2446 प्रखंडो (विकास खंडो) में चल रहा है। परंतु यह कार्यक्रम चरणबद्ध ढंग से पूरे देश में लागू किया जायेगा। 1997-98 तक सभी प्राथमिकता विद्यालयों में इस कार्यक्रम को शुरू कर देने की योजना है।

खाद्यान्न का आबंटन

जहाँ पोषाहार कार्यक्रम चल रहा है वहाँ के स्थानीय निकायों जैसे नगरपालिका या पंचायतों को केंद्र सरकार द्वारा सहायता दी जाती है केंद्र सरकार की ओर भारतीय खाद्य निगम के निकटतम  गोदामों से प्रतिदिन 100 ग्राम गेहूं/चावल प्रत्येक बच्चे को उपलब्ध कराया जाता है

उपलब्ध कराने के लिए मुख्य आधार निम्नलिखित है –

क) भारतीय खाद्य निगम से प्राप्त खपत के आंकड़े

ख) जिला स्तरीय उपयोग प्रमाण-पत्र एवं

ग) राज्यों से दाखिलों के बारे में प्राप्त सूचना।

बच्चों तक खाद्यान्न का पहूँचाना

भारतीय खाद्य निगम जिला उपयोग प्रमाण-पत्र के आधार पर जिला अधिकारी/उपयुक्त पोषाहार कार्यक्रम चल रहे प्रखंडों के मुख्यालय में खाद्यान्न पहूँचाने के लिए आवश्यक प्रबंध करते हैं या सभी विद्यालयों को सूचित कर देते हैं की प्रधानाद्यापक अपने विद्यालय का खाद्यान्न प्रखंड मुख्यालय से ले जाएँ खाद्यान्न की आपूर्ति हेतु परिवहन खर्च पे प्रति क्विंटल 25/- रू. की व्यवस्था है

विद्यालय में खाद्यान्न के वितरण

विद्यालय में 80 प्रतिशत उपस्थिति वाले बच्चों की सूची तीन प्रतियों में तैयार की जाती है एवं प्रति प्रखंड मुख्यालय में भेजी जाती है तथा एक प्रति निगरानी समिति (खाद्यान्न वितरण के लिए गाँव के लोगों के समिति जिसमें 10 या 12 सदस्य तथा जिसके अध्यक्ष मुखिया होते हैं) को दी जाती है एक प्रति विद्यालय में रहती है खाद्यान्न की आपूर्ति हो जाने पर निगरानी सीमित के सदस्यों की उपस्थिति में बच्चों के बीच विद्यालय में खाद्यान्न को वितरित का दिया जाता है वितरण के पश्चात निगरानी समिति के सदस्य खाद्यान्न वितरण को प्रमाणित कर देते हैं

 

स्रोत: जेवियर समाज सेवा संस्थान, राँची



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