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स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना के अंतर्गत स्वरोजगार

स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना के अंतर्गत स्वरोजगार

भूमिका

एस. जी. एस. वाई. के अंतर्गत लाभार्थी को स्वरोजगार कहा जाता है। लेकिन समूह को ज्यादा बल दिया जाता है जिसके तहत ग्रामीण गरीब को स्वयं सहायता समूह में संगठित किया जाता है। सहायता प्रदान करने के लिए लाभार्थी का चुनाव ग्राम सभा द्वारा गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों का चुनाव किया जाता है।

स्वयं सहायता समूह

एस.जी.एस.वाई. का मुख्य बिन्दु सबसे निचले स्तर के लोगों को संगठित कर गरीबी को मिटाना है। यह योजना विश्वास करता है कि गरीबों के बीच में खुद की सहायता करने की जबरजस्त संभवना है। सम्भवना का सदुपयोग गरीब परिवारों का संगठनस्वयं सहायता समूह बनाके किया जा सकता है और यह संगठन स्वयं सहायता समूह होगा। जहाँ पर वे लोग पूर्ण एवं प्रत्यक्ष रूप से भाग लेकर गरीबी उन्मूलन के बारे में स्वयं निर्णय ले सकेंगे।

स्वयं सहायता समूहों का निर्माण

स्वयं सहायता समूह ग्रामीण गरीबों का समूह है जो अपनी इच्छा अनुसार संगठित होकर सदस्यों को गरीबी रेखा से ऊपर उठाना चाहते हैं। सदस्यगण छोटी रकम जमा करने को तैयार होते हैं जो बाद में संसाधन कोष में बदल जाता है।

एस.जी.एस.वाई. के तहत स्वयं सहायता समूह बनाते समय निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना जरूरी है:

  1. सदस्यों की संख्या कम से कम 10 और अधिक से अधिक 20 होनी चाहिए।
  2. सभी सदस्य गरीबी रेखा से नीचे गुजर – बसर करने वाले तथा एक परिवार से एक ही सदस्य समूह में हो सकता है। एक सदस्य दूसरे समूह का सदस्य नहीं हो सकता है।
  3. समूह का अपना नियम - कानून होना चाहिए जैसे बैठकी हरेक महीने होगी, निर्णय जन- सहभागिता से होगी, आदि।
  4. समूह बैठकी के लिए मुद्दा तैयार करने में सक्षम हो और इसके अनुसार चर्चा चला सके।
  5. समूह अपनी बचत से कोष का निर्माण तथा चंदा को संग्रह कर सके।
  6. समूह अपने कोष से सदस्यों को ऋण दे सके और वित्तीय प्रबंधन के नियम – कानून का विकास करे।
  7. समूह बैंक में ऋण के संबंध में सामूहिक निर्णय ले सके।
  8. समूह का अपना बैंक खाता बही, साधारण खाता बही, रोकड़ बही, बैंक पास बुक और व्यक्तिगत पास बुक रख सके।
  9. समूह को प्रस्ताव पुस्तिका, उपस्थिति बही,ऋण खता बही, साधारण कहता बही, रोकड़ बही, बैंक पास बुक और व्यक्तिगत पास बुक रख सके।

10.  विकलांगों के लिए एक ही तरह का विकलांग समूह होना चाहिए। अगर क्षेत्र में एक तरह के विकलांग नहीं है तो उनके तरह के विकलांगों को मिलाकर समूह बनाया जा सकता है।

स्वयं सहायता समूह अनौपचारिक होगा। समूह सोसाइटी रजिस्ट्रेशन कानून या राज्य सहकारिता कानून के तहत निबंधन करा सकता है।

स्वयं सहायता समूहों का क्षमता विकास

सभी स्वयं सहायता समूहम जो कम से कम 6 महीनों से काम कर रहा है, एक फायदेमंद समूह माना जायेगा और समूह दुसरे चरण में पहुँच जाएगा। चक्रीय वित्त प्राप्त कर सकता है तथा समूह के प्रत्येक सदस्य को क्षमता विकास के लिए चुना जा सकता है। चक्रीय वित्त का प्रबन्धन डी. आर.डी. ए. करेगी जिसमें 10% वित्तीय सहयोग एस. जी. एस. वाई. का रहेगा।

चक्रीय कोष प्रबंधन

समूह चक्रीय कोष प्रबंधन में निम्नलिखित सिद्धांतों का पालन करती है -

  1. कोष से अधिक से अधिक सदस्यों को ऋण प्रदान करना जिससे प्रति व्यक्ति ऋण को बढ़ावा मिल सके।
  2. वित्तीय कोष का प्रयोग वैसे ही करना चाहिए जैसे हम अपने बचत कोष का करते है।
  3. समूह सदस्यों की ऋण की आवश्यकता के बारे में चर्चा करेगी तथा सदस्यों ( आवश्यकता अनुसार) को ऋण (बचत+सूद+चक्रीय कोष) देगी, साथ ही साथ ऋण वापसी विवरण तथा सूद दर तय करेगी। जो रकम ऋण से प्राप्त होगा उसे उनके सदस्यों को दिया जा सकता है।
  4. सदस्यों से अपेक्षा की जाती है की सक्रिय कोष का उपयोग उसी कोष के लिए किया जायेगा जिस काम के लिए स्वीकृत की गई है।
  5. सदस्यों से यह भी अपेक्षा की जाती है किउचित समय पर ऋण अदा करें। ऐसे समूह जिन्होंने द्वाकरा (डी.डब्ल्यू.सी.आर.ए.) या अन्य सरकारी कार्यक्रम के अंतर्गत चक्रीय कोष प्राप्त कर लिया है, एस. जी. एस. वाई. के तहत चक्रीय कोष प्राप्त नहीं कर सकते हैं। लेकिन उन्हें सामान्य ऋण तथा अनुदान लेने में कोई रूकावट नहीं होगा।

स्वयं सहायता समूहों से अपेक्षा

  1. यह ध्यान रहे कि प्रति व्यक्ति ऋण की राशि की प्रत्येक वर्ष क्रमश: अभिवृद्धि हो।
  2. उपभोक्ता ऋण उत्पादन के रूप स्थानांतरित हो।
  3. प्रत्येक अपने समूह सदस्यों की प्रशिक्षण की आवश्यकताओं की सही पहचान करें।
  4. सदस्यगण अपनी स्थिति को समझने के योग्य हो तथा गरीबी से छूटकारा पाने के लिए अवसरों को पहचाने।
  5. समूह अनुदान आधारित कार्यक्रम स्वतंत्र रूप से लागू कर सके।
  6. सभी सदस्यों को आर्थिक कार्यक्रमों की पूर्ण जानकारी हो।

आर्थिक कार्यक्रम

जब स्वयं सहायता समूह दूसरा चरण पर कर लेता है तो समूह को आर्थिक क्रियाकलापों के लिए सहायता योग्य समझा जाता है। यह सहायता (1) ऋण के रूप में और (2) अनुदान के रूप में मिल सकती है। एस. जी. एस. वाई. के अंतर्गत समूह में व्यक्तिगत रूप में ऋण सह अनुदान मिल सकता है। इसके लिए स्वरोजगारकर्त्ता रोजगार करने में सक्षम में ऋण एवं अनुदान के लिए सामूहिक रूप में कार्यक्रम चलाता होगा। समूह में ऋण एवं अनुदान के लिए सामूहिक रूप में कार्यक्रम चलाता होगा। इसके लिए समूह को 50% अनुदान के रूप में देय है जिसका अधिकतम सीमा 1.25 रूपया है।

व्यक्तिगत स्वरोजगारी की पहचान एवं चुनाव

पहचान पद्धति – प्रखंड एस. जी. एस. वाई. समिति गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले ग्रामीणों की सूची प्रत्येक साल तैयार करेगी। सूची तैयार होने के बाद सम्बन्धित मुखिया/सरपंच को इसकी सूचना दी जाएगी। व्यक्तिगत स्वरोजगार ग्राम सभा की बैठकी में चुना जायेगा। यह संभव है की पंचायत स्तर की बैठकी में गरीबों की सहभगिता पाने के लिए तीन सदस्यों का एक दल बनाया जायेगा जिसमें बी.डी.ओ. या उसका प्रतिनिधि, बैंक अधिकारी एवं संबंधित मुखिया/ सरपंच रहेंगे जो समय- सारिणी के अनुसार गांवों का दौरा करेंगे। साथ ही समय- सारिणी हर क़स्बा में प्रकाशित करायी जाएगी।

चुनाव की शर्त्तेें

  1. चुनाव में खुलापन एवं पारदर्शिता होना बहुत जरूरी है।
  2. गरीबों में से ही गरीब का चुनाव होना चाहिए।
  3. यदि इच्छुक स्वरोजगारी उम्मीदवारों की संख्या उपलब्ध परियोजना से अधिक हो जाए जिससे केवल अति उत्तम कार्यक्रम लिए जा सकें।

चुनाव के बाद बी.डी.ओ. का कर्त्तव्य है कि चुने गए  स्वरोजगारी का प्रपत्र भरने के लिए प्रबंध करे। गाँव  में बहुत सारे स्वरोजगारी अनपढ़ भी हो सकते हैं अत: बैंक प्रपत्र बहुत ही साधारण होना चाहिए लेकिन प्रपत्र कानूनी आवश्यकताओं को अवश्य ही पूरा करेगा। प्रपत्र स्थानीय भाषा में भी हो सकता है।

स्वरोजगारी के चुनाव के बाद बी.डी.ओ. स्वरोजगारियों की सूची को मुद्रित कर एक प्रतिलिपि सम्बन्धित ग्राम पंचायत को उपलब्ध कराएगा ताकि ग्राम सभा की अगली बैठकी में प्रस्तुत किया जा सके। साथ ही यह सूची डी. आर.डी.ए. बैंक तथा अन्य संबंधित एजेंसियों को बी उपलब्ध करायी जाएगी।

ऋण प्रदान करने वाले बैंक

स्वरोजगारी को योजना के तहत वित्तीय सहयोग देने वाले बैंक

  1. व्यवसायिक बैंक
  2. सहकारी बैंक और
  3. क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक द्वारा प्रदान किया जायेगा।

बैंक में प्रपत्र की स्वीकृति

बैंक में प्रपत्र जमा करने के दिन से पन्द्रह (15) दिन के अंदर स्वीकृत कर दिया जाता है। इसकी सूचना बैंक ग्राम पंचायत को देगा जिसे ग्राम सभा की अगली बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा। बैंक बी.डी.ओ. एवं अन्य संबंधित विभागों को भी सूची भेज देगा।

बैंक समूह को भी ऋण देता है जिसकी पद्धति व्यक्तिगत ऋण जैसी ही है। किसी भी परिस्थिति में बैंक पूर्व वित्त व्यवस्था या निम्न वित्त व्यवस्था नहीं करेगा लेकिन अगर क्रियाकलाप ही ऐसा है जहाँ विभिन्न स्तर पर पैसे की जरूरत है तो वह ऐसा कर सकता है।

जब ऋण की स्वीकृति हो जाती है तो इसकी सूचना संबंधित विभाग को दे दी जाती है ताकि स्वरोजगारी की कुशलता का पता लगा सके।

जब स्वरोजगारी दक्षता प्रशिक्षण पूरा कर लेता है तो बैंक तुरंत रकम देगा लेकिन अनुदान रकम अंत में देगा।

बहूलित ऋण और बहूलित मात्रा

इस योजना के अंतर्गत स्वरोजगार से घनिष्ट सम्बन्ध बनाने की कोशिश की जाती है ताकि अवश्यतानुसार ऋण बार- बार दिया जा सके। अगर ऋण समय पर ऋण वापस कर देता है तो दुबारा ऋण दिया जा सकता है जिसमे अनुदान रह/नहीं रह सकता है।

अनुदान योजना के अंतर्गत अनुदान की राशि एक समान (30%) है जिसकी सीमा 7500 रूपया है लेकिन अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जन जाति के लिए अनुदान (50%) या अधिकतम सीमा 10,000 रूपये तक होगा।

स्वयं सहायता समूह में स्वरोजगारी के लिए अनुदान 50% होगा जिसकी अधिकतम राशि 1.25 लाख रूपया होगा। सिंचाई परियोजनाओं के लिए अनुदान की कोई सीमा नहीं है।

ऋण भुगतान

सभी ऋण मध्यवर्ती ऋण है जिनकी अवधि कम से कम 5 साल होगी। ऋण की किस्त नाबार्ड एवं डी.एल.सी.सी. द्वारा निर्धारित किया जायेगा। लेकिन भुगतान की किस्त कुल आय की 50% से ज्यादा नहीं होगी। किस्तों की संख्या मूल रकम, सूद और भुगतान समय को देखते हुए निर्धारित किया जाएगा।

अगर स्वरोजगारी ऋण रकम को भुगतान की अवधि के अंदर वापस करता है रो स्वरोजगारी अनुदान के लिए हकदार नहीं होगा।

भुगतान की अवधि को मुख्यत: तीन श्रेणियों में बाँटा गया है –

श्रेणी भुगतान की अवधि

प्रथम – 5 साल

द्वितीय – 7 साल

तृतीय – 9 साल

अगर ऋण की रकम क्रमशः 3, 4 और 5 वर्षों में चुकता कर दी जाती है तो स्वरोजगारी केवल यथानुपात अनुदान का ही हकदार होगा।

सेवा क्षेत्र पद्धति

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा यह पद्धति 1.4.89 ले लागू हो गयी है। इसके अंतर्गत ग्रामीण एवं अर्द्ध शहरी क्षेत्रों के व्यपारिक एवं क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को कुछ गांवों को चुन कर सारी गतिविधियाँ उन्हीं गांवों में चलायी जाती हैं।

दक्षता विकास

स्वरोजगार की सफलता और टिकाऊपन के लिए स्वरोजगारियों में हुनर एवं कुशलता का होना बहुत ही जरूरी है। अत: स्वरोजगारियों की कुशलता को बढ़ाने के लिए विभिन्न तरह के उपायों का प्रस्ताव किया जाता है। जिला एस. जी. एस. वाई. समिति विभिन्न संबंधित विभागों से परामर्श करके यह पहचान करती है की किस तरह का प्रशिक्षण संस्थान/केंद्र का चुनाव कर निहित आवधि के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाती है।

यह प्रशिक्षण दो तरह का हो सकता है:

  1. तकनीकी दक्षता के लिए (प्रशिक्षण से संबंधित) विभाग आयोजित होगा
  2. प्रबंधीय दक्षता – बैंक आयोजन करेगा।

प्रशिक्षण के बाद स्वरोजगारी को उन्मुखीकरण कार्यक्रम से गुजरना पड़ता है जो ऋण स्वीकृति और ऋण वितरण के बीच के समय में आयोजित किया जाता है। यह अनिवार्य कार्यक्रम प्रखंड में आयोजन किया जाता है और कार्यक्रम स्थल स्वरोजगारी के गाँव से बहुत दूरी पर नहीं हो सकता है।

प्रशिक्षण के लिए नजदीक की स्वयं सेवी संस्थाएँ, महाविद्यालयों एवं अन्य सरकारी संस्थानों को आमंत्रित किया जा सकता है।

एस. जी. एस. वाई. का कुल बजट का 10% प्रशिक्षण एवं उन्मुखी कार्यक्रम के लिए अलग से रखा जायेगा।

उन्मुखी कार्यक्रम का उद्देश्य

  1. स्वरोजगारी को अपने दायित्व की पहचान करना।
  2. सम्भावित जोखिम के बारे में सावधान रहना।
  3. बही खाता का रख-रखाव के बारे में जानकारी देना, आदि।

स्रोत: जेवियर समाज सेवा संस्थान, राँची



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