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झारखण्ड में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की कार्यप्रणाली

झारखण्ड में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की कार्यप्रणाली

परिचय

ग्रामीण विकास मंत्रालय,भारत सरकार द्वारा चलाया जा रहा राष्ट्रीय स्तर अभियान है, जो शत-प्रतिशत गरीबी उन्मूलन के उदेश्य को लेकर त्वरित रूप से गतिमान है।

जिसके तहत एन.आर.एल.एम में बिभिन स्तरों पर समर्पित सहायता संरचनाओ तथा संगठन के माध्यम से सभी निर्धन गरीब परिवार तक पंहुच सुनिश्चित करना एवं उन्हें स्थायी आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना है ताकि वे बेहतर जीवन व्यतित कर सके।

राज्य में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन कार्यक्रम के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी वर्ष 2011 से झारखण्ड स्टेट लाईवलीहुड प्रमोशन सोसाईटी(जे.एस.एल.पी.एस) को सौपी गई है जिसके बाद वर्ष 2013-14 से एन. आर. एल.एम की गतिविधिया का क्रियान्वयन शुरू किया गया है ।

झारखण्ड स्टेट लाईवलीहुड प्रमोशन सोसाईटी का उद्देश्य

जे.एस.एल.पी.एस का उद्देश्य निर्धन ग्रामीण महिलाओं के लिए एक प्रभावी संस्थागत आधार तैयार करना है ताकि वे आजीविका में सतत वृद्धि के जरिये अपने परिवार की आय को बढ़ा सके और बेहतर वित्तीय सेवाएं प्राप्त कर सके। जिसके लिए चरणबद्ध कार्यक्रम सघन एवं असघन रूप से सभी जिलों के प्रखंडो व पंचायत स्तर तक चलाये जा रहे हैं ।

इस कार्यक्रम के जरिये प्रावधान है कि गरीबी रेखा से नीचे के हर परिवार की एक महिला सदस्या को स्वयं सहायता समूह के दायरे में लाया जाये साथ ही उनका क्षमता वर्धन व कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण एवं वित्तिय समवाशेन भी किया जा रहा है।

मिशन के अंतर्गत वर्ष 2019-20 तक राज्य के समस्त 259 प्रखंडो को सघन रूप से आच्छादित करने का लक्ष्य रखा गया है जिसके लिए चरणबद्ध योजना के क्रियान्वयन हेतु 259 प्रखंडो का वर्गीकरण कार्य की निर्धारित रणनीति व योजनानुसार किया गयाहै।

कार्यक्रम का क्रियान्वयन

एन.आर.एल.एम अपनी चरणबद्ध योजनानुसार कार्यक्रम का क्रियान्वयन दो रूपों में क्रियान्वित कर रही है-

1) सघन प्रखंड

2) असघन प्रखंड

सघन प्रखंड मे कार्यक्रम का क्रियान्वयन हेतु जिला मिशन प्रबंधन ईकाई (डिस्ट्रिक्ट मिशन मैनेजमेंट यूनिट) ,प्रखंड में प्रखंड मिशन प्रबंधन इकाई (ब्लाक मिशन मैनेजमेंट यूनिट)एवं पंचायत स्तर पर पेशेवर फील्ड टीम(प्रोफेशनल फील्ड टीम) का गठन कर अनुभवी पेशेवरों के माध्यम से कराया जा रहा है। वर्तमान में राज्य के 12 जिलों मे रांची,प.सिहभूम,पाकुड,सिमडेगा, पलामू, लातेहार, गिरिडीह, गोड्डा, गुमला, दुमका, खूंटी, लोहरदगा के 40 प्रखंडो का चयन सघन प्रखंड के रूप में किया गया है।

सघन प्रखंडों के कार्य मे तीव्रता लाने हेतु सघन प्रखंडो को दो श्रेणियों मे विभक्त किया गया है:-

(क) संसाधन प्रखंड(रिसोर्स ब्लाक ) : वर्तमान मे सात जिलों–रांची,प.सिहभूम,पाकुड़,सिमडेगा, पलामू, लातेहार एवं गिरिडीह के 16  प्रखंडो (अनगड़ा, नामकुम, गोईलकेरा, खुटपानी, मनोहरपुर, पकुडिया, महेशपुर, लिट्टीपाड़ा, कोलेबिरा, ठेठेईटगर, छतरपुर, सतबरवा, बरवाडीह, लातेहार, डुमरी बेगाबांद)  को संसाधन प्रखंडो के रूप में चिन्हित किया गया है। संसाधन प्रखंड में महिला स्वयं सहायता समूह के गठन की प्रक्रिया SERP, आन्ध्रप्रदेश की अनुभवी स्वयं सहायता समूह की सदस्या द्वारा गावों मे 45 दिन के तीन चरणों मे प्रवास के दौरान किया जाता है ।

(ख) होम ग्रोन मॉडल : राज्य में पूर्व से गठित सशक्त महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन एवं उनके फेडरेशन के माध्यम से नये समूहों का गठन एवं महिलाओं के ग्राम संघठन का निर्माण करने हेतु राज्य के चार जिलों के सात प्रखंडो में“प्रदान” नामक गैर-सरकारी संस्थान के साथ करार किया गया है।

असघन प्रखंड : स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना के अंतर्गत गठित महिला स्वयं सहायता समूहों को एन.आर.एल.एम के कार्यो मे भागीदार बनाने के उदेश्य से राज्य के 23 जिलों के 219 प्रखंडो को असघन रूप से चिन्हित किया गया है असघन प्रखंडो में एन. आर. एल. एम के कार्यों का कार्यान्वयन राज्य स्तर पर गठित राज्य संसाधन प्रकोष्ठ के द्वारा जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के माध्यम से किया जा रहा है ।

असघन प्रखंडो में स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना के अंतर्गत गठित महिला स्वयं सहायता समूहों को चिन्हित कर प्रचार-प्रसार एवं प्रशिक्षण के द्वारा सशक्त बनाकर पंच-सूत्र पालन कराया जा रहा है साथ ही समूह के वित्तिय अनुसाशन के मजबूती हेतु 15000 रु (पंद्रहहजार रूपये )की राशि चक्रिय निधि उपलब्ध कराई जा रही है एवं बैंक से सस्ते ब्याज दर पर ऋण मुहैया कराया जा रहा है।

संजीवनी परियोजना :  झारखण्ड राज्य लाईवलीहुड प्रोमोशन सोसाईटी,ग्रामीण विकास विभाग झारखण्ड सरकार द्वारा राज्य के 15 जिलों- रांची,प.सिहभूम, पलामू, लातेहार, गिरिडीह, गुमला, दुमका, लोहरदगा, चतरा, धनबाद, गढ़वा, के 28 प्रखंडो मे एन.आर.एल.एम के तर्ज पर संजीवनी परियोजना का कार्यान्वयन शत - प्रतिशत राज्य के अंशदान से किया जा रहा है, जिसका मूलभूत लक्ष्य प्रत्येक गरीब ग्रामीण परिवार से एक महिला को स्वयं सहायता समूह से जोड़कर उनकी आजीविका को सशक्त करना है।



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