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स्त्री का अश्लील चित्रण

किसी स्त्री का चित्रण इस रूप में प्रदर्शित करना कि

  • जिससे उसकी लज्जा भंग हो सकती हो;
  • जन साधारण के नैतिक चरित्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हो;
  • किसी महिला की आकृति, उसके रूप या शरीर अथवा उसके किसी भाग का इस प्रकार वर्णन या चित्रण करना जिससे उसका चरित्र कलंकित हो तथा जिससे दुराचार, भ्रष्टाचार या लोक अपदूषण अथवा नैतिकता की हानि होने की सम्भावना हो। अश्लील चित्रण की परिधि में आयेगा।
  • ऐसा करना महिलाओं का स्त्री अशिष्ट रूपण (प्रतिषेध) अधिनियम, 1986 के अधीन दण्डनीय अपराध है।

अधिनियम के अन्तर्गत दण्डात्मक प्रावधान

  • प्रथम बार अपराध करने पर 02 वर्ष तक की अवधि का कारावास तथा रू. 02 हजार का जुर्माना;
  • ऐसे अपराध की पुनरावृत्ति करने पर न्यूनतम 06 माह से 05 वर्ष तक का कारावास तथा न्यूनतम रू. 10,000/- से रू. 01 लाख तक का जुर्माना।

शिकायत किससे और कहाँ करें

  • नजदीकी पुलिस स्टेशन;
  • जिला न्यायालय;
  • उपनिदेशक, महिला एवं बाल विकास से कर सकती है
  • तहसील, जिला, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से निःशुल्क परामर्श/विधिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

उपरोक्त में किसी से भी, स्वयं, माता-पिता या अन्य रिश्तेदार या सरकार द्वारा मान्य कोई समाज सेवी संस्था के माध्यम से शिकायत दर्ज करायी जा सकती है या फिर टोल फ्री नं. पर कॉल कर सकते हैं।

टोल फ्री/हेल्पलाइन

नम्बर

समाधान शिकायत निवारण प्रकोष्ठ

 

18001805220

वूमेन्स पावर लाइन

 

1090

पुलिस

100

 

निःशुल्क विधिक सहायता

18004190234, 15100

 

स्त्रोत: दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान, उत्तर प्रदेश

 



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