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महिलाओं के साथ हिंसा

महिलाओं के साथ हिंसा

भूमिका

महिला हिंसा हर रोज महिलाओं को थप्पड़ों, लातों, पिटाई, अपमान, धमकियों, यौन शोषण और अनेक अन्य हिंसात्मक घटनाओं का सामना करना पड़ता है ।यहां तक कि उनके जीवन साथी या उसके परिवार के सदस्य उनकी हत्या कर देते हैं ।इन सबके बावजूद हमें इस प्रकार की हिंसा के परे में अधिक पता नहीं चलता है क्योंकि शोषित व प्रताड़ित महिलाएं इसके बारे में चर्चा करने से घबराती, डरती व झिझकती हैं ।अनेक डॉक्टर्स, नर्सें व स्वास्थ्य कर्मचारी हिंसा को एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या के रूप में पहचानने में चुक जाते हैं।

यह अध्याय महिलाओं पर घरों में होने वाली हिंसा से संबंधित है ।यह आपको यह समझने में सहायक होगा कि हिंसा क्यों होती है, इसके लिए आप क्या कर सकती हैं तथा अपने समुदाय में परिवर्तन लाने के लिए किस प्रकार कार्यरत हो सकते हैं।

कोई पुरुष महिला को चोट क्यों पहुंचता है ?

महिला को चोट पहुंचाने के लिए के पुरुष अनके बहाने दे सकता है जैसे कि-वह शराब के नशे में था ; वह अपना आपा खो बैठा या फिर वह महिला इसी लायक है ।परंतु वास्तविकता यह है कि वह हिंसा का रास्ता केवल इसलिए अपनाता है क्योंकि वह केवल इसी के माध्यम से वह सब प्राप्त कर सकता है जिन्हें वह एक मर्द होने के कारण अपना हक समझता है।

जब एक पुरुष का अपनी स्वयं की पत्नी की जिन्दगी पर काबू नहीं रहता है तो वह हिंसा का प्रयोग करके दूसरों की जिन्दगी पर नियंत्रण करने का कोशिश करता है ।अगर कोई व्यक्ति सामान्य तरीकों का प्रयोग करके अपने जीवन को नियंत्रित करने का प्रयत्न करता है तो सुमें कोई बुराई नहीं है परंतु यदि वह दूसरों के जीवन पर अपना नियंत्रण – वह भी हिंसा का प्रयोग कर के – बनाने की कोशिश करे तो वह सही नहीं है।

महिलाओं के साथ हिंसा के कारण

यहां कुछ ऐसे कारणों की चर्चा की गई है जो यह वर्णित करते हैं कि कुछ पुरुष महिलाओं को चोट क्यों पहुंचाते हैं  -

  • हिंसा काम करती है
  • किसी कमजोर व्यक्ति के साथ हिंसा में लिप्त होकर एक पुरुष अपनी कुंठाओं से मुक्ति पाने का प्रयत्न करता है।
  • वास्तविक परेशानी को पहचाने या कोई उसका कोई व्यवहारिक समाधान ढूंढने के बजाय, पुरुष हिंसा का सहारा लेकर असहमति को जल्दी से समाप्त करना चाहत है।
  • किसी पुरुष को लड़ना बेहद रोमांचक लगता है और उससे उसे नई स्फूर्ति मिलती है ।वह इस रोमांच को बार बार पाना चाहता है।
  • अगर कोई पुरुष हिंसा का प्रयोग करता है कि वह जीत गया है और अपनी बात मनवाने का प्रयत्न करता है हिंसा की शिकार, चोट व अपमान से बचने के लिए, अगली स्थिति में, उसका विरोध करने से बचती है ।ऐसे में पुरुष को और भी शह मिलती है।
  • पुरुष को मर्द होने के बारे में गलत धारणा है।
  • अगर पुरुष यह मानता है कि मर्द होने का अर्थ है महिला के उपर पूरा नियंत्रण होना तो हो सकता है कि वह महिला के साथ हिंसा करने को भी उचित माने।
  • कुछ पुरुष यह समझते हैं कि मर्द होने के कारण उन्हें कुछ चीजों का हक है जैसे कि अच्छी पत्नी, बेटों की प्राप्ति, परिवार के सारे फैसले करने का हक।
  • पुरुष के लगता है कि महिला उसकी है या उसे वह चाहिए।
  • यदि महिला सशक्त है तो पुरुष को यह  लग सकता है कि वह उसे खो देगा या महिला को उसकी जरुरत नहीं है ।वह कुछ ऐसे कार्य करगे जिससे महिला उस पर अधिक निर्भर हो जाए।
  • उसे अन्य किसी और तरीके के व्यवहार करना आता ही नहीं है (सामाजिक  अनुकूलन)
  • अगर पुरुष ने अपने पिता या अन्य लोगों के तनाव व परशानी की स्थिति में
  • हिंसा का सहारा लेते हुए देखा है तो केवल ऐसा व्यवहार करना ही सही लगता है ।उसे कोई अन्य व्यवहार करना ही सही लगता है ।उसे कोई अन्य व्यवहार का पता ही नहीं है।

हिंसा के प्रकार

  • एक पुरुष किसी महिला पर अनके तरीकों से नियंत्रण करने की कोशिश करता है ।मार-पिटाई उनमें से केवल एक तरीका है ।ये सभी तरीके महिला को चोट पहुंचा सकते हैं।
  • कल्पना कीजिए कि नीचे बनाया हुआ चक्र एक पहिया है ।शक्ति व नियंत्रण इस पहिये के केंद्र में हैं क्योंकि ये सभी कार्य कलापों की जड़ें हैं ।पहिये का हर भाग एक व्यवहार को दर्शाता है जिसका प्रयोग एक हिंसक पुरुष एक महिला को नियंत्रित करने के लिए करता है ।हिंसा इस पहिये की परिधि (रिम ) है जो एक साथ रखती है और उसे शक्ति प्रदान करती है।

    एक प्रकार की प्रताड़ना आमतौर पर, दुसरे प्रकार में बदल जाती है

    अनेक मामलों में मौखिक शाब्दिक प्रताड़ना थोड़े समय के बाद शारीरिक प्रताड़ना में बदल जाती है इसकी शुरुआत पत्नी द्वारा पर्याप्त दहेज है लाने से शुरू होकर यह एक शाब्दिक प्रताड़ना, फिर हिंसा, शारीरिक हिंसा में बदल जाती है ।उसे त्योहारों, उत्सवों तथा बिमारियों जैसे अवसरों पर अपने मायके जाने की इजाजत भी नहीं दी जाती है ।इस प्रकार का घुटन वाला व्यवहार, शारीरिक पिटाई से भी अधिक दर्दनाक बन जाता है।

    खतरे के चिन्ह

    जब गली-गलौच वाला संबंध हिंसक बन जाता है, तो उसे छोड़ना और भी कठिन हो जाता है ।जितने लंबे समय तक महिला ऐसे संबंध में रहती है, पुरुष का उस पर उतना ही नियंत्रण बढ़ता जाता है उसका आत्मविश्वास समाप्त होता जाता है ।कुछ पुरुषों की अन्य पुरुषों की तुलना में अधिक हिंसक हो जाएगा ।अगर आप इन लक्षणों को देखते हैं और अगर आपके पास इन संबंध से छुटकारा पाना संभव है तो ध्यान से सोचिए।

    अपने आप से ये प्रश्न पूछिए :

    • जब आप अन्य लोगों से मिलती है ( आपके परिवार के सदस्य या मित्रगण) तो क्या वह इर्ष्यपूर्ण व्यवहार करता है या आप पर उससे झूठ बोलने का आरोप लगाता है ? अगर आप उसे इर्ष्यापूर्ण व्यवहार को रोखने के लये अपने व्यवहार में बदलाव लाटी है तो इसका अर्थ है आप उसके नियंत्रण में हैं
    • क्या वह आपको, आपके परिवारजनों या मित्रों से मिलने तथा अपने कार्य स्वयं करने से रोखने का प्रयास करता है ? इससे कोई अंतर नहीं पड़ता है कि वह ऐसा करने के लिए क्या कारण देता है ।इसका सीधा अर्थ है कि वह आपको अपने परिवारजनों तथा मित्रों का सहारा प्राप्त करने से रोक रहा है ।अगर आपके पास कोई सहायता प्राप्त करने व कहीं जाने की जगह नहीं होगी तो उसे आपको प्रताड़ित करने में आसानी होगी
    • क्या वह दुसरे व्यक्तियों के सामने आपका अपमान करता है या मजाक उडाता है ? धीरे धीरे आप उसकी कही बातों पर विश्वास करने लगेंगी और आपको यह यकीन होने लगेगा कि अगर आपके साथ दुर्व्यवहार हो रहा है तो यह ठीक नहीं है व आप इसी योग्य हैं
    • जब उसे गुस्सा आता है तो वह क्या करता है ? क्या वह चीजें तोड़ता या फैंकना शुरू कर देता है ? क्या गुस्से में उसने अभी आपको मारा –पीटा है या ऐसा करने की धमकी दी है ? क्या अभी उसने किसी अन्य महिला पर हाथ उठाया है ? इन सबसे यह पता चलता है कि उसने अपने कर्मों पर नियंत्रण करने में कठिनाई होती है
    • क्या वह अध्यापकों, अपने सीनियरों या अपने पिता जैसे शक्तियुक्त लोगों के हाथों अपमानित महसूस करता है ? उसे यह एहसास हो सकता है कि वह शक्तिहीन या असहाय है ।अपनी इस हीन भावना पर काबू पाने के लिए वह अपने जीवन में मौजूद अन्य लोगों पर नियंत्रण करने के लिए हिंसा का सहारा ले सकता है
    • क्या वह ऐसा दावा करता है कि शराब, नशीली दवाएं या तनाव उसके हिंसात्मक व्यवहार के लिए जिम्मेवार है ? अगर वह किसी अन्य को अपने इस व्यवहार के लिए जिम्मेवार ठहरता है तो ऐसा कह सकता है कि जब उसे कोई नै नौकरी मिल जाएगी या वे किसी नए शहर में चले जाएंगे या वह/ नशीली दवाएं लेना बंद कर देगा तको स्थिति सुधर जाएगी
    • क्या वह अपने दुर्व्यवहार के लिए आपको या किसी अन्य को दोषी ठहरता है ? क्या वह यह मानने से इंकार करता है कि कोई गलत कार्य कर रहा है ? अगर आपके गंदे व्यवहार के लिए वह आपको दोषी मानता है तो संभावना यह है कि वह अपने आपको बदल नहीं सकता है


    कुछ महिलाओं के प्रताड़ित होने की संभावना अधिक होती है

    बहुत से दंपतियों में , पुरुष पहली बार तब हिंसात्मक हो जाता है जब महिला पहली बार गर्भवती या उसके एक कन्या को जन्म दिया हो युवा पत्नियों, विशेष कर गरीब वर्ग की, को अपने पतियों के हाथों ऐसी स्थितियों में दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ सकता है परुष ऐसी स्थितियों का अवैध संबंध बनाने के लिए उपयोग कर सकता है , इसलिए उसे ऐसा लगने लगता है कि उसका नियंत्रण समाप्त हो रहा है उसे इस बात पर भी क्रोध आ सकता है कि उसे यह लगे कि वह उससे अधिक, बच्चे पर ध्यान दे रही है या वह यौन संबंधों के लिए मन करती है इसके अतिरिक्त अनेक दम्पतियों में बच्चे के आगमन से आर्थिक स्थिति खराब होने की चिंता के दबाव भी हो सकते हैं अशक्तता युक्ता महिलाओं के भी अधिक प्रताड़ित होने की संभावना होती है
    कुछ पुरुषों को इस बात पर भी क्रोध का सकता है कि उन्हें इच्छित आदर्श पत्नी नहीं मिली

    कुछ पुरुष ऐसा भी सोचते हैं कि अशक्त महिला को नियंत्रित करना अधिक आसान होता है क्योंकि वह अपनी रक्षा करने में अक्षम होती है

    हिंसा के चक्र

    हिंसा की पहली घटना प्राय: अपने आपमें एक बारगी होने वाली घटना लग सकती है ।लेकिन अनेक मामलों में, पहली घटना के बाद निम्न ढर्रा या चक्र विकसित होता है :

    जैसे जैसे हिंसा की घटनाओं में वृद्धि  होती है, वैसे-वैसे अधिकतर दम्पतियों में शांति काल की अवधि कम होती है चूँकि तब तक महिला की इच्छा शक्ति टूट चुकी होती है और पुरुष का वर्चस्व उस पर पूर्ण रूप से होता हो जाता है ऐसी स्थिति में पुरुष के लिए यह भी आवश्यक नहीं रह जाता है कि वह स्थिति में सुधार लाने के की वायदे भी करे

    हिंसा के हानिकारक प्रभाव

    हिंसा केवल महिलाओं को ही चोट नहीं पहुंचती है, यह उनके बच्चों व पुरे समाज को प्रभावित करती है|

    महिलाओं में, पुरुष की हिंसा के ये परिणाम हो सकते हैं :

    1. प्रेरित होने की भावना तथा आत्मसम्मान में कमी
    2. मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, जैसे कि चिंता, घबराहट, अवसाद, भोजन व नींद संबंधित समस्याएं ।हिंसा का सामना करने के लिए कोई महिला अपनी सम्पूर्ण पहचान को बदलने का पयत्न करने लगती हैं ।हिंसा से बचने के लिए वह अपने पहले व्यक्तित्व की छाया मात्र रह जाती है तथा अपने उपर लगाए गए झूठे आरोपों को विरोध भी नहीं करती है ।वह अपने छोटी छोटी खुशियों से भी स्वयं को वंचित रखने लगती है, घर –परिवार वालों व मित्रों से संबंध तोड़ने लगती है तथा एकाकीपन व अपराध बोध में शरण लेने लगती है ।उसे नशीली दवाईयों और शराब की आदत पड़ सकती है या वह अनेक पुरुषों से यौन संबंध बना बैठती है
    3. वह गंभीर चोटों व दर्द, हड्डियों के टूटने जलने, कट शरीर पर नीले दागों, सिर दर्द, पेट दर्द व मांसपेशियों में दर्द आदि से पीड़ित हो सकती है जो प्रताड़ना के बाद लंबे समय तक रह सकते हैं
    4. यौन स्वास्थ्य की समस्याएं ।गर्भावस्था के दौरान पिटाई से गर्भपात भी हो सकता है ।यौन उत्पीडन के कारण वे अवांछित गर्भ, यौन संचारित रोग या एच.आई.वी./एड्स का भी शिकार हो सकती हैं ।यौन उत्पीडन के कारण प्राय: यौन संबंधों में अनिच्छा, दर्द व भय उत्पन्न हो सकता है
    5. मृत्यु

     

    बच्चों में अपनी मां को हिंसा का शिकार होने हुए देखकर बच्चों में ये सब हो सकता है :

    1. लड़के अपने पिता से गुस्सैल व आक्रामक व्यवहार सीखते हैं ।इस का असर ऐसे बच्चों का अन्य कमजोर बच्चों व जानवरों से हिंसा करते हुए देखा जा सकता है
    2. लड़कियां नकारात्मक व्यवहार सीखती हैं और वे अकसर ही दब्बू, चुप-चुप रहने वाली या परिस्थितियों  से दूर भागने वाली बन जाती है
    3. भयंकर सपने व अन्य भय उत्पन्न हो जाते हैं ।जिन परिवारों में नारी-उत्पीडन व हिंसा होती है, वहां बच्चे प्राय: ठीक से भोजन नहीं खाते हैं, उनकी वृद्धि  व विकास में शिथिलता आ सकती है तथा उनकी सीखने-समझने की शक्ति भी धीमी हो जाती है ।ऐसे बच्चों में पेट दर्द, सिर दर्द, दमा जैसी बिमारियां तथा सोते समय बिस्तर में पेशाब करने जैसी समस्याएं हो जाती है
    4. अगर उनके साथ हिंसा होती है तो वे चोटग्रस्त हो सकते हैं और मौत भी हो सकती है|
    5. प्राय: ही पुरुष अपनी पत्नी को परोक्ष रूप से त्रास पहुंचाने के लिए बच्चों को मरता-पिटता है ताकि वह और भी असहाय महसूस कर सके

    हिंसा के कारण समाज समाज पर प्रभाव :

    1. अगली पीढ़ी में हिंसा चक्र की निरंतरता बनी रहती है
    2. यह धारणा बनी रहती है की पुरुष महिलाओं से बेहतर होते हैं
    3. प्रत्येक व्यक्ति की जीवन गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है क्योंकि हिंसा का शिकार हुई महिलाएं समाज की जीवन की विभिन्न गतिविधियों में कम भाग लेती है|

    क्यों रहती हैं महिलाएं उन पुरुषों के साथ जो उन्हें चोट पहुंचाते हैं ?

    जब लोग किसी पुरुष के हाथों एक महिला के उत्पीडन व हिंसा के बारे में सुनता हैं तो उनका पहला प्रश्न अकसर यह होता है, वह उसे छोड़ क्यों नहीं देती ? अनेक ऐसे कारण हो सकते हैं जो महिला को इस प्रकार के घुटनकारी  व उत्पीडन युक्त जीवन संबंधों को जारी रखने के लिए मजबूर कर देते हैं ।इनमें ये सब सम्मिलित हैं :

    1. भय व धमकियां : पुरुष ने उसे यह धमकी दी हो सकता है , “अगर तुम यहां से गई तो में तुम्हें, बच्चों और तुम्हारी मां को जान से खत्म कर दूंगा – “।महिला के ऐसा लग सकता है कि वह वहां रह कर – वह सब कर रही है जिससे उसकी व अन्य लोगों की जान की रक्षा हो सके
    2. पैसे व स्थान का अभाव : महिला के पास न तो पैसा ही हो और न ही कहीं जाने का ठिकाना ।यह विशेषत: उन स्थितियों में और भी सत्य होता हैं जहां पैसे पर पुरुष का सम्पूर्ण नियंत्रण हो और उसने उसके रिश्तेदारों, मित्रों आदि से मिलने पर रोक लगा राखी हो
    3. शिक्षा व दक्षता की कमी : इन की कमी के करण वह कोई रोजगार पाने में असमर्थ हो सकती है जिससे वह अपना व बच्चों को पाल पोस सके
    4. सुरक्षा का अभाव : महिला के पास पुरुष की हिंसा और चोटों व मौत से बचने की कोई सुरक्षा न हो
    5. शर्म: हो सकता है कि उसे यह लगे कि हिंसा उसकी स्वयं की वजह से हो रही है और वह इसी लायक है
    6. धार्मिक व सांस्कृतिक प्रभाव: अनेक महिलाओं का ऐसा विश्वास होता है कि चाहे कुछ भी हो, शादी को बचाना उसका कर्त्तव्य है
    7. व्यवहार परिवर्तन की आशा : महिला को ऐसा लग सकता है कि वह उस पुरुष से प्यार करती है और उस रिश्ते को जारी रखना चाहती है ।उसे आशा रहती है की किसी न किसी तरह से हिंसा रुक जाएगी|बच्चों को बिना बाप के कर देने का अपराधबोध

     

    लेकिन शायद एक बेहतर प्रश्न हो सकता है यह पूछना कि “ वह क्यों नहीं घर छोडकर जाता “? जब हम यह पूछते हैं कि “वह उसे छोड़ कर क्यों नहीं जाती” तो इसका तात्पर्य यह हो सकता है कि हमारे विचार में यह उसकी व्यक्तिगत समस्या है ।लेकिन ऐसा सोचना सरासर गलत है कि हिंसा केवल उसकी समस्या है।

    यह पुरे समाज का यह उतरदायित्व है की समाज का हर व्यक्ति स्वस्थ व कुशलतापूर्वक रहे।

    अगर पुरुष या परिवार का कोई अन्य सदस्य महिला के स्वस्तंत्र रूप से रहने के अधिकार का हनन करके या उसे चोट पहुंचा अथवा मारकर कोई अपराध कर रहा है तो इसके इन कुकर्मों को चुनौती देना व रोकना आवश्यक है।

    इस स्थिति में क्या करना चाहिए

    एक सुरक्षा योजना बनाइयें

    एक महिला का अपने जीवन साथी की हिंसा के उपर नियंत्रण नहीं होता है परंतु यह तो उसके हाथ में हैं कि वह इस हिंसा का किस प्रकार उत्तर देती है और उससे निपटती हैं ।वह पहले से ही कोई ऐसी योजना बना सकती हैं ताकि पुरुष के हिंसा समाप्त करने के पल तक स्वयं को और अपने बच्चों को सुरक्षित रख सके।

    अगली बार हिंसा शुरू होने से पहले की सुरक्षा

    1. अपने आस पड़ोस में किसी को हिंसा के बारे में बतायें ।उसे कहें कि आगे फिर आप मुसीबत में हों तो वह स्वयं आये या आपके लिए कोई सहायता पहुंचाये ।संभवत: कोई पडोसी, पुरुष रिश्तेदार या पुरूषों अथवा महिलाओं का कोई समूह आपकी सहायता के लिए आ सकता है
    2. कोई ऐसा विशेष शब्द या संकेत निर्धारित करें जिसे सुनकर आपके बच्चे या घर का कोई अन्य स्वस्थ्य आपके लिए सहायता प्राप्त कर सके
    3. आपने बच्चे को सुरक्षित स्थान तक पहुंचना सिखाईए

    हिंसा के दौरान सुरक्षा

     

    1. अगर आपको लग रहा है कि वह (पुरुष) हिंसक होने ही वाला है तो यह सुनिश्चित करें कि हिंसात्मक कार्यवाई ऐसे स्थान पर हो जहां कोई हथियार अथवा वस्तु न हो जिनसे वह आपको नुक्सान पहुंचा सके या जहां से आप जल्दी से भाग सकें
    2. अपनी निर्णय लेने की योग्यता का सर्वोतम प्रोयग करें ।जो आवश्यक हो वह करें जिससे आप उसे शांत कर सकें तथा आप व आपके बच्चे सुरक्षित रहें
    3. यदि आपको उस स्थान से दूर भागने की आवश्यकता हो तो इसके बारे में सोचिए ।सोचिए कि आपके लिए सबसे सुरक्षित जगह कौन से होगी
    4. महिला के घर छोडकर जाने की स्थिति में सुरक्षा
    5. पैसा तो हर स्थिति में बचाईए ।इस पैसे को घर से दूर किसी सुरक्षित स्थान पर या बैंक में अपने नाम के खाते में रखें ताकि आप अधिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें
    6. अगर आप ऐसा सुरक्षित  रूप से कर सकती हैं तो पुरुष पर निर्भरता कम करने के अन्य तरीकों के बारे में सोचिए ।उदहारण के लिए मित्र बनाईए, किसी संगठन या समूह के सदस्य बनिए या अपने पिरवार के साथ अधिक समय बताईए
    7. ऐसे “आश्रम घरों” या सेवाओं के बारे में जानकारी एकत्रित करके रखें जो उत्पीडित महिलाओं और उसके बच्चों के लिए उपलब्ध है ।घर छोड़ने से पहले नजदीक के किसी गृह के बारे में जानकारी आवश्य ले लीजिए
    8. किसी विश्वसनीय मित्र या संबंधी से पूछिए कि क्या वे आपके अपने पास रहने देंगे या आपको पैसा उधार दे सकेंगे ? ये लोग ऐसे होने चाहिए जो आपके जीवन साथी को इस बारे में न बतायें
    9. महत्वपूर्ण दस्तावेजों  तथा प्रमाणपत्रों की कापियां अपने लिए एकत्रित करें ।जैसे कि- आपका पहचान पत्र, बच्चों के जन्म प्रमाणपत्र ( जिसमें पिता का नाम हो ), टीकाकरण कार्ड, आपकी शादी का प्रमाणपत्र या कार्ड (जिसके आपके पति के पहचान निर्धारित की जा सके) ।अगर आपको रख-रखाव भत्ते का दावा करना पड़ा तो इन सब की आवश्यकता होगी ।इन सब की एक कॉपी घर पर रखें तथा दूसरी कॉपी किसी विश्वसनीय व्यक्ति के पास घर से दूर रखें
    10. पैसा, दस्तावेजों की कॉपीयां तथा अतिरिक्त कपड़े किसी विश्वसनीय व्यक्ति के पास रखें ताकि आप जल्दी से जा सकें
    11. अगर आप ऐसा बिना किसी झंझट के कर सकें तो अपने बच्चों के साथ आपनी भागने की योजना का एक बार पूर्वाभ्यास (रिहर्सल) करके यह देखें कि क्या यह कार्य करती है अथवा नहीं ।ध्यान रखें कि किसी बच्चे को इस बारे में नहीं बताएं

    अगर आपको घर छोडकर जाना पड़े

    अगर आपने घर छोडकर जाना निश्चित कर लिया है तो कुछ नई समस्याओं का सामना करने के लिए अपने आपको तैयार करिए|

    सुरक्षा :

    किसी महिला के लिए घर छोडकर जाने के तुरंत पश्चात का समय सबसे अधिक खतरनाक होता है ।चूँकि पुरुष महिला पर नियंत्रण समाप्त खो चूका होता है, इसलिए वह इस नियंत्रण को पुन: हासिल करने के लिए कुछ भी कर सकता है ।वह महिला को जान से मार डालने की अपनी धमकी पर भी आचरण कर सकता है ।महिला को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वह किसी सुरक्षित स्थान पर रह रही हैं और इस बारे में महिला को किसी को भी नहीं बताना चाहिए ।पति उन लोगों को आपके निवास स्थल के बारे में बताने के लिए विवश कर सकता है।

    अपने बलबूते पर जीना :

    आपना व अपने बच्चों का गुजर बसर करने का कोई तरीका ढूंढइए ।अगर आप अपने मित्रों या परिवारजनों के पास रह सकती हैं तो इस समय का और शिक्षा या रोजगार दक्षता हासिल करने के लिए सदुपयोग करें ।आप किसी अन्य उत्पीडित महिला के साथ भी रह सकती है ।इससे पैसे की बचत होगी|

    भावनाएं :

    आपको ऐसा महसूस हो सकता है कि नई ज़िन्दगी की शुरुआत करने के लिए आवश्यक साधन जुटाना एक अत्यंत कठिन कार्य है ।नई जगह में आपको भय व एकाकीपन लग सकता है क्योंकि आप अनजान जगह पर रहने की आदि नहीं हैं ।चाहे आपका पति ने आपके साथ कितना भी दुर्व्यवहार क्यों न किया हो – आप फिर भी उससे बिछुड़कर दुखी महसूस कर सकती हैं ।जब वर्त्तमान स्थिति में आप कठिनाईयों का सामना कर रही हैं तो आप शायद घर छोड़ने से पहले की कठिन परिस्थितियों को भूलने लगें ।थोडा धीरज रखें ।कुछ समय गुजरने दें ताकि आप अपनी गुजारी ही ज़िन्दगी तथा अपने जीवन साथी से बिछुड़ने के गम पर काबू पा सकें ।मजबूत बने रहने का प्रयत्न करें ।आपकी जैसी स्थिति से गुजरती हुई महिलाओं से मिलिए ।साथ रहकर, एक दुसरे को सहारा दीजिए।

    अगर सुखद परिस्थितियों में परिवर्तन लाना है तो लोगों क महिलाओं के विरुद्ध होने वाली हिंसा के प्रति अपने दृष्टिकोण में परिवर्तन लाना होगा ।“ऐसा ही होता है “ या “यह तो महिला का दोष है“ जैसे विचारों से मुक्ति पानी होगी ।यहां पर हम आपके समुदाय में हिंसा की समाप्ति के बारे में कुछ विचार प्रकट कर रहें हैं :

    इस विषय में चर्चा करें

    हिंसा व उत्पीडन के विषय में चर्चा करना इसको रोकने की दिशा में पहला कदम है ऐसी महिलाओं को खोजने का प्रयत्न करें जिन्होंने हिंसक व उत्पीड़क पुरुषों का व्यवहार भुगता है उनसे विचारों का आदान-प्रदान करें ऐसे पुरुषों को खोजिए जो महिलाओं के विरुद्ध हिंसा को गलत मानते हैं हिंसा को बातचीत का एक सामान्य मुद्दा बनाईए इसको ऐसा विषय बनाईए जिसके बारे में लोग कहें की यह गलत है

    घर छोड़ने वाली महिलाओं के लिए सेवाएं स्थापित करें

    महिलाओं के लिए ऐसी परामर्श (काउंसलिंग) सेवाएं व आश्रय गृह स्थापित करें जिन्हें वे आवश्यकता पड़ने पर शीघ्रातिशीघ्र प्रयोग कर सकें

    अन्य लोगों-विशेषकर बड़े व अधिक शक्तिशाली संगठनों से समर्थन प्राप्त करें उदहारण के लिए यह देखें कि क्या आपके देश में स्वस्थ्य संस्थाओं का एक ऐसा नेटवर्क है जो सहायता कर सके आप समुदाय के ऐसे माननीय सदस्यों से भी इस विषय पर चर्चा कर सकती है जिन पर आप विश्वास करती हैं आपने साथ, जितने लोग हो सके, इस कार्य में लगाएं

    महिलाओं को कानून में दिए गए उनके अधिकारों के बारे में जानकारी दें परिवारों व हिंसा से संबंधित ऐसे कानून हो सकते हैं जिन्हें महिलाएं प्रयोग कर सकती है भारत में ऐसी महिलाओं के लिए नि:शुल्क क़ानूनी सहायता उपलब्ध कराने का भी प्रावधान है जो पैसा नहीं दे सकती है महिलाओं को नई दक्षताओं में प्रसिक्षण देने के साधन खोजिए ताकि उत्पीडित महिलायें, आवश्यकता पड़ने पर, अपनी गुजर बसर कर सकें

    सामाजिक दबाव का प्रयोग करें

    ऐसे कौन से दबाव हैं जो आपके क्षेत्र में लोगों को गलत समझे जाने वाले कार्यों को करने से रोकते हैं ? कहीं पर पुलिस का डर होता है तो कहीं पर सेना, समझ के बुजुर्ग, परिवार या धर्म ।अधिकतर स्थानों पर ये संयुक्त रूप से कार्य करते हैं।

    सामुदायिक नेताओं तथा नया पुरुषों को महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों तथा हिंसा के विरोध में बोलने तथा महिलाओं को पीटने वाले लोगों की निंदा करने के लिए प्रोत्साहित करें ।महिलाओं का उत्पीडन रोकने के लिए उस जगह पर काम करने वाले दवाबों का प्रयोग करें।

    कुछ देशों में महिलाओं ने संगठित होकर ऐसे कानून लागु करवा दिए हैं जिनके द्वारा महिलाओं को उत्पीडित करने वाले पुरुषों को दंडित किया जा सकता है ।फिर भी, कानून हमेशा ही उत्पीडित महिलाओं की सहायता नहीं करता है ।कहीं-कहीं कानूनों को इमानदारी से लागू करने वालों पर पूर्णतया विश्वास नहीं किया जा सकता है ।किंतु अगर आपके क्षेत्र में कानून तंत्र और पुलिस दोनों ही महिलाओं की सुरक्षा करने का लिए तत्पर हैं तो संबंधित कानूनों और महिलाओं के अधिकारों के बारे में अधिक से अधिक जानकारी प्राप्त करने का प्रयास करें ।अपने बच्चों को हिंसा मुक्त जीवन गुजरने के लिए तैयार करने वाले तरीकों से पालें-पोसें ।उन्हें अहिंसक तरीकों से समस्याओं का समाधान करना सिखाईए ।उन्हें स्वयं का एक दुसरे का तथा अपन बड़ों का सम्मान करना सिखाईए।

    महिलाओं के विरुद्ध हिंसा रोकने के लिए स्वास्थ्य कर्मचारी एक अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं ।केवल महिला के जख्मों की मरहम मिटटी करना ही काफी नहीं है।

    जब आप किसी महिला का परिक्षण करें तो उत्पीडन के लक्षणों को भी देखें।

    पुरुष अकसर ही अपनी पत्नियों के साथ मार पीट करते हैं ।हो सकता है कि इनके कोई लक्षण आपके बाहर से नजर न आयें ।मार-पीट की शिकार महिला अपने कपड़ों से इन लक्षणों को छिपाने की कोशिश करती हैं ।स्वास्थ्य कर्मचारी होने के नाते आप ऐसे कुछ गिने-चुने लोगों में से हैं जो महिला के गुप्त अंगों देख पातें हैं।

    अगर आपको कोई असामान्य निशान, धब्बे या जख्म नजर आये तो महिला से उनके होने का कारण पूछिए ।अगर कोई महिला आपके पास दर्द, खून स्त्राव, टूटी हड्डियाँ या अन्य कोई चोट के साथ आये तो उससे पूछिए की क्या उसे पीटा गया है ? याद रखिए कि मार पीट की शिकार अनके महिलाएं इस प्रकार की चोट व लक्षणों को “दुर्घटना” के कारण होना बताती है ।उसे आश्वासन दीजिए कि आप कोई ऐसा कार्य नहीं करेंगे जिसे वह नहीं चाहती हो।

    हर चीज को लिख लें ।जब आप हिंसा का शिकार हुई किसी महिला का परिक्षण करें तो मानव शरीर की एक आकृति कागज पर बनाएं तथा उस महिला के शरीर के अगले व पिछले भागों पर पाई गई चोटों को अकिंत करें ।उस व्यक्ति का भी नाम लिखें जिसने उसे ये चोट पहुंचाई हैं ।यह भी पता करने का प्रत्यन्न करें कि क्या परिवार के किसी अन्य सदस्य, जैसे कि उसकी बहन या बच्चों, के साथ भी ऐसा हुआ है ? अगर उसको खतरा है तो उससे पूछें कि वह क्या करना चाहती है ।चाहे वह घर छोड़ना चाहे अथवा नहीं, एक सुरक्षा योजना बनवाने में उसकी सहायता करें ।अगर वह पुलिस सहायता प्राप्त करना चाहती हैं तो उसमें भी उसकी सहायता करें ।आप यह सुनिश्चित करें कि पुलिस उसकी शिकायत को गंभीरता से ले ।आप उस उत्पीडित महिलाओं, सामाजिक संस्थाओं तथा गैर सरकारी संस्थाओं से संपर्क बनाने में भी सहायता कर सकते हैं ।एक साथ मिलकर, वे शायद उसकी समस्या का समाधान ढूंढने में सहायता कर सकें।

    आपके समुदाय या आस पड़ोस में उत्पीड़ित महिलाओं की सहायता के लिए क्या संभवना उपलब्ध हैं ? खोजिए :

     

    • कानूनी सहायता
    • मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं
    • आश्रय गृह
    • महिलाओं के लिए पैसा अर्जित करने की परियोजनाएं
    • परामर्श सेवाएं

    वयस्कों को पढ़ाना-लिखना सिखाने वाली आया अन्य शिक्षण सेवाएं

    पुरुष की सहायता करें ।इसके अतिरिक्त परिवार के अन्य हिंसक सदस्य की भी सहायता करें ।उन्हें भी सहायता की आवश्यकता है ।सामुदायिक अथवा धार्मिक नेताओं में ऐसे लोगों की सहायता करने तथा समुदाय में महिलाओं के विरुद्ध हिंसा समाप्त करने के बारे में बात-चीत करें।

    स्रोत: ज़ेवियर समाज सेवा संस्थान लाइब्रेरी, विहाई।



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