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वित्तीय साक्षरता

परिचय

1. रिजर्व बैंक द्वारा नियुक्त कृषि ऋणों की प्रक्रियाओं की जांच हेतु कार्यसमूह (अध्यक्ष : श्री सी. पी. स्वर्णकार) ने अपनी रिपोर्ट (अप्रैल 2007) में यह अनुशंसा की थी कि ऋण एवं तकनीकी परामर्श हेतु एकल रूप से अथवा सामूहिक संसाधनों के साथ बैंकों को परामर्श केन्द्र खोलने हेतु सक्रियतापूर्वक विचार करना चाहिए। इससे किसानों में अपने अधिकार एवं दायित्व के प्रति बहुत हद तक जागरूकता आएगी। बैंक शाखाओं को जितनी अधिक हो सके उतनी जानकारियां किसानों के लिए उपलब्ध करानी चाहिए। परामर्श केन्द्रों पर आवेदन के ऑनलाइन जमा करने की सुविधा होनी चाहिए जिसे शाखाओं को अग्रेषित किया जा सके।

2. इसके अतिरिक्त, आपदाग्रस्त किसानों की सहायता हेतु सुझाव के लिए रिजर्व बैंक द्वारा गठित एक अन्य कार्य समूह (अध्यक्ष श्री एस. एस. जोल) ने भी सुझाव दिया था कि ऋण की व्यवहार्यता को बढ़ाने के लिए वित्तीय एवं जीविका संबंधी परामर्श महत्वपूर्ण हैं।

3. उपरोक्त कार्यसमूहों के सुझावों पर आधारित, तथा, वर्ष 2007-08 के लिए वार्षिक नीति विवरण की घोषणा के रूप में रिजर्व बैंक ने एसएलबीसी(SLBC) संयोजक बैंकों को 10 मई 2007 को जारी किए गए सर्कुलर द्वारा यह सलाह दी कि वे अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले, किसी भी राज्य अथवा केन्द्रशासित प्रदेश के किसी एक जिले में पायलट आधार पर एक वित्तीय साक्षरता एवं साख परामर्श केन्द्र की स्थापना करें।

4. वर्ष 2007-08 के वार्षिक नीति विवरण की मध्यावधि समीक्षा में कहा गया था कि वित्तीय साक्षरता एवं साख परामर्श केन्द्रों पर एक अवधारणा पत्र तैयार किया जाएगा जिसमें भविष्य की कार्ययोजना का उल्लेख होगा और इसे लोगों की राय हेतु रिजर्व बैंक के वेबसाइट पर डाला जाएगा। इसके आधार पर यह अवधारणा पत्र तैयार किया गया है ताकि रिजर्व बैंक द्वारा, लोगों से राय प्राप्त होने के बाद, आगे की कार्यवाही की जा सके।

वित्तीय साक्षरता

  1. वित्तीय साक्षरता अथवा वित्तीय शिक्षा को व्यापक रूप से इस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है, ‘वित्त बाजार से उसके उत्पादों, खासकर उसके प्रतिफलों एवं जोखिमों के ज्ञान के साथ, लोगों को परिचित कराना, ताकि वे अपने विकल्पों का चयन अच्छी तरह से समझ-बूझकर कर सकें’। इस दृष्टिकोण से देखने पर वित्तीय शिक्षा प्राथमिक रूप से व्यक्तिगत वित्त से संबंधित है जो लोगों को ऐसे प्रभावी कार्य में सक्षम बनाती है जो कुल मिलाकर उनकी खुशहाली को बढ़ाती है और वित्तीय मामलों में उनकी समस्याओं को कम करती है।
  2. वित्तीय साक्षरता वित्तीय जानकारी एवं सलाह की तुलना में एक व्यापक वस्तु है। वित्तीय साक्षरता पर होने वाली कोई भी चर्चा मूल रूप से ऐसे व्यक्ति पर केन्द्रित होती है जिसके पास प्राय: रोजमर्रा के जीवन में वित्तीय मध्यस्थों के साथ वित्तीय व्यवहारों की जटिलताओं को समझने हेतु सीमित संसाधन एवं योग्यता होती है।
  3. आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) ने वित्तीय शिक्षा को इस रूप में परिभाषित किया है, ‘एक ऐसी प्रक्रिया जिसके द्वारा वित्तीय उपभोक्ता/निवेशकर्ता वित्तीय उत्पादों, अवधारणाओं एवं जोखिमों के बारे में अपनी समझ को समुन्नत करते हैं और जानकारी, निर्देश एवं/अथवा वस्तुनिष्ठ सुझाव के जरिए दक्षता एवं आत्मविश्वास का विकास करते हैं जो उन्हें वित्तीय जोखिमों तथा अवसरों के बारे में अधिक जागरूक बनाते हैं; इनकी मदद से वे अपने विकल्पों का चयन समझ-बूझकर करते हैं, उन्हें यह पता होता है कि मदद के लिए कहां जाना चाहिए और अपनी आर्थिक समृद्धि को बढ़ाने हेतु प्रभावशाली कदम उठाने में सक्षम बनते हैं।
  4. इस प्रकार वित्तीय साक्षरता अपने, परिवार की और अपने व्यवसाय की समृद्धि को बढ़ाने के लिए आर्थिक संसाधनों से परिचित होने, उनपर नजर रखने और प्रभावशाली रूप से वित्तीय संसाधनों के प्रयोग करने की व्यक्ति की क्षमता है।

वित्तीय साक्षरता की आवश्यकता

  1. वित्त-बाजारों की बढ़ती हुई जटिलताओं तथा बाजारों और आम लोगों के बीच सूचनाओं की विषमताओं के कारण आम लोगों के लिए अच्छी तरह समझ-बूझकर विकल्प का चयन करना लगातार मुश्किल होते जाने की वजह से हाल के वर्षों में वित्तीय साक्षरता को बहुत महत्व दिया गया है।
  2. वित्तीय साक्षरता को वित्तीय समावेशन तथा अंतत: वित्तीय स्थायित्व को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए विकसित एवं विकासशील देश वित्तीय साक्षरता/शिक्षा वाले कार्यक्रमों पर ध्यान केन्द्रित कर रहे हैं। भारत में, वित्तीय साक्षरता की आवश्यकता बहुत अधिक है क्योंकि यहां सामान्य साक्षरता का स्तर निम्न है और जनसंख्या का एक बड़ा भाग आज भी औपचारिक वित्तीय ढांचे से बाहर है। वित्तीय समावेशन के संदर्भ में वित्तीय साक्षरता का प्रक्षेत्र आपेक्षिक रूप से अधिक विस्तृत है और इसने अधिक महत्व हासिल कर लिया है क्योंकि वित्तीय लाभ से वंचित समूहों तक पहुंचने में यह एक महत्वपूर्ण कारक हो सकता है। इसके अलावा शिक्षित करने की प्रक्रिया में अपरिवर्तनीय रूप से शामिल है गहराई में बैठे हुए बाधाकारी व्यवहारात्मक एवं मनोवैज्ञानिक कारकों से निपटना। भारत जैसे विभिन्नतायुक्त सामाजिक एवं आर्थिक परिदृश्य वाले देश में वित्तीय साक्षरता उन लोगों के लिए खासतौर से मायने रखती है जो संसाधनों की दृष्टि से निर्धन हैं एवं जो हाशिए पर रहकर लगातार पड़ने वाले वित्तीय दबाव का शिकार होते हैं। बैंकों से बिना जुड़े बैंकिंग सेवा से वंचित गरीब महंगे विकल्पों की ओर रुख करने को बाध्य कर दिए जाते हैं। अत्यंत सीमित संसाधनों के साथ, कठिन परिस्थितियों में घर में वित्तीय प्रबन्धन की चुनौती तब और भी मुश्किल हो जाती है जब दक्षता और ज्ञान की कमी के कारण अच्छी तरह समझ-बूझकर आर्थिक फैसले करना कठिन हो। वित्तीय साक्षरता उन्हें, समय रहते जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति करने तथा अप्रत्याशित स्थितियों का सामना बिना अनावश्यक ऋण लिए करने में, मदद करती है।
  3. ओईसीडी-OECD ने ‘वित्तीय शिक्षा एवं जागरूकता के लिए सिद्धांतों एवं सद्कार्यों पर अनुशंसाएं’ प्रकाशित की जिसका सारांश परिशिष्ट-I में दिया गया है। इन अनुशंसाओं का मकसद है विकसित तथा विकासशील दोनों प्रकार के देशों की, प्रभावी वित्तीय शिक्षा कार्यक्रमों के निर्माण एवं क्रियान्वयन में मदद करना।

वित्तीय शिक्षा तथा जागरुकता के सिद्धांतों तथा अच्छे व्यवहारों के लिए OECD की अनुशंसाएं

(i)  सरकार तथा सभी संबद्ध सहभागियों को भेद-भाव रहित, सही तथा सामन्जस्यपूर्ण वित्तीय शिक्षा को बढ़ावा देना चाहिए।
(ii)  वित्तीय शिक्षा की शुरुआत स्कूल स्तर से ही शुरु होनी चाहिए, ताकि लोग जल्द से जल्द इसके बारे में जागरुक हो सकें।
(iii) वित्तीय शिक्षा वित्तीय संस्थानों के सुशासन का हिस्सा होना चाहिए, जिसकी जिम्मेदारी को बढ़ावा मिलना चाहिए।
(iv) वित्तीय शिक्षा को व्यावसायिक सलाह से अलग होना चाहिए, वित्तीय संस्थानों के कर्मचारियों के लिए आचार संहिता को विकसित किया जाना चाहिए।
(v) वित्तीय संस्थानों को इसकी जांच करने के लिए बढ़ावा देना चाहिए कि ग्राहकों को महत्वपूर्ण वित्तीय परिणामों वाले लंबे समय के वादों या वित्तीय सेवाओं से जुड़ी जानकारियों को अच्छी तरह से समझना चाहिए; छोटे तथा अस्पष्ट कागजों पर रोक लगायी जानी चाहिए।
(vi) वित्तीय शिक्षा के कार्यक्रमों को जीवन योजना के संदर्भ में अहम होना चाहिए, जैसे बेसिक सेविंग, ऋण, बीमा तथा पेन्शन इत्यादि।
(vii) ऐसे कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए, जो वित्तीय क्षमता का निर्माण करें तथा विशेष समूह के लिए लक्षित हों और साथ ही संभव हो, तो वैयक्तिक भी।
(viii) भविष्य में रिटायर होने वाले व्यक्ति को यह पता होना चाहिए कि उन्हें उनकी वर्तमान पब्लिक तथा प्राइवेट पेन्शन स्कीम के वित्तीय पर्याप्तता के मूल्यांकन की जरूरत होती है।
(ix) राष्ट्रीय अभियान, विशेष वेबसाइट, मुफ्त सूचना सेवाएं तथा वित्तीय कंज्यूमर पर जोखिम के मामलों (जैसे जालसाजी) पर वॉर्निंग प्रणालियों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

भारतीय रिजर्व बैंक उठाए गए कदम

  1. रिजर्व बैंक ने एक परियोजना अपने हाथ में ली। जिसका नाम ‘परियोजना वित्तीय साक्षरता’ ('Project Financial Literacy') है। इस परियोजना का उद्देश्य है केन्द्रीय बैंक तथा सामान्य बैंकिंग अवधारणाओं से संबंधित जानकारियों को विभिन्न लक्षित समूहों, जैसे स्कूल एवं कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं, महिलाओं, ग्रामीण एवं शहरी गरीबों, रक्षाकर्मियों तथा वरिष्ठ नागरिकों में प्रसारित करना। लक्षित समूहों तक जानकारियों का प्रसार अन्य माध्यमों के साथ-साथ बैंकों, स्थानीय सरकारी तंत्र, NGOs, स्कूलों तथा कॉलेजों द्वारा प्रस्तुतिकरणों, पर्चों, ब्रॉशरों, फिल्मों तथा रिजर्व बैंक के वेबसाइट के जरिए किया जाएगा। रिजर्व बैंक ने पहले से अपने वेबसाइट में एक लिंक आम लोगों के लिए बना रखा है जिसके माध्यम से उन्हें अंग्रेजी, हिन्दी तथा भारत की 12 अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में वित्तीय जानकारी प्राप्त हो सकती है।
  2. साल २००७ में वित्तीय शिक्षा से संबंधित लाई गई वेबसासाइट मुख्य रूप से मूलभूत बैंकिंग, वित्त एवं केन्द्रीय बैंकिंग के बारे में विभिन्न आयु-वर्गों के बच्चों को शिक्षा देने के साथ यह वेबसाइट अन्य लक्षित समूहों जैसे महिलाओं, ग्रामीण एवं शहरी गरीबों, रक्षाकर्मियों तथा वरिष्ठ नागरिकों से संबंधित उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराती है। बैंकिंग, वित्त एवं केन्द्रीय बैंकिंग की जटिलताओं को समझाने हेतु बच्चों के लिए सरल एवं दिलचस्प तरीके से कॉमिक किताब के रूप का प्रयोग किया गया है। विभिन्न मूल्यों वाले करेंसी नोटों के सुरक्षा मानकों पर इस साइट पर फिल्में उपलब्ध है। वर्तमान में डिस्प्ले होने वाले गेम खासतौर से स्कूली बच्चों को भारत के विभिन्न करेंसी नोटों से परिचित कराने के लिए डिजाइन किए गए हैं। यह साइट जल्द ही हिन्दी तथा 12 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है।
  3. इसके अतिरिक्त वित्तीय जागरूकता बढ़ाने की दृष्टि से रिजर्व बैंक ने बैंकिंग तथा वित्तीय समावेशन से संबंधित विषयों पर स्कूली बच्चों के बीच लेख प्रतियोगिता आयोजित करता रहता है। वित्तीय साक्षरता के प्रसार हेतु बैंक ने प्रदर्शनियों में भी हिस्सा लिया है। रिजर्व बैंक द्वारा अंतर-स्नातक छात्रों में बैंकिंग क्षेत्रक तथा रिजर्व बैंक के बारे में जागरूकता एवं दिलचस्पी पैदा करने के लिए ‘आरबीआई युवा विद्वत् पुरस्कार’ (‘RBI Young Scholars Award’) योजना द्वारा 150 युवा विद्वानों का देशव्यापी प्रतियोगिता परीक्षा के जरिए चयन कर छोटी अवधि की परियोजनाओं पर कार्य करने के लिए उन्हें स्कॉलरशिप प्रदान की गई।

स्त्रोत: पोर्टल विषय सामग्री टीम



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