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ललिता की कहानी

परिचय

जब कभी किसी महिला में स्वास्थ्य की समस्या के लक्षण हो तो इसे सुलझाने के लिए उसे जानकारी की आवश्यकता होती है । उसे ये जानना आवश्यक है कि समस्या है क्या ; उसका कारण क्या है ; इसके उपचार के लिए क्या किया जा सकता है और इसको फिर से होने से कैसे रोका जा सकता है ।

इस अध्याय में हम आपको ललिता नामक एक महिला की कहानी सुनायेंगे और यह भी बतायेंगे कि उसने अपने स्वस्थ्य समस्या कैसे सुलझाई ? हालांकि विस्तृत विवरण केवल ललिता से ही सम्बंधित है, परन्तु उसका अपनी समस्या के बारे में सोचने तथा उसका समाधान करने का तरीका लगभग सभी स्वास्थ्य समस्याओं पर लागू होता है । आप इस तरीके को किसी भी स्वाथ्य समस्या को स्वयं सुलझाने और अच्छी चिकित्सा सेवा प्राप्त करने के लिए निर्णय लेने के लिए प्रयोग कर सकती है ।

लालिता ने यह पाया कि उसकी स्वास्थ्य समस्या की स्थायी समाधान, उसकी अपनी स्थिति में भी आगे देखने में निहित था । उसे अपने समुदाय तथा राष्ट्र में उपस्थित, अपनी समस्या के मूल कारणों की भी खोज करनी पड़ती है और उनमे परिवर्तन लाने के लिए कार्य करना पड़ा । ललिता की भांति, आप और आपका समुदाय भी महिलाओं के ख़राब स्वास्थ्य के लिए जिम्मेवार सभी कारणों को पहचनाने के लिए इस तरीके का प्रयोग कर सकते हैं और उन कार्यों को करने की योजनाएं बना सकते हैं जिससे आपका समुदाय महिलाओं के लिए एक स्वस्थ स्थान बन सके ।

ललिता पश्चिम घाट के पहाड़ों में स्थित एक छोटे से गांव में रहती है जहाँ जमीन के एक छोटे से टुकड़े पर वह और उसका पति गेहूँ उगाकर गुजर बसर करते हैं । उसकी भूमि पर इतना गेहूँ पैदा नहीं होता है कि वे अपने तीन बच्चों को भरपेट भोजन दें सके। इसीलिए हर वर्ष, काई बार, उसके पति को सागर के गांव अन्य पुरुषों के साथ गांव के बाहर एक फैक्ट्री में काम करने के लिए जाना पड़ता है।

पिछली बार जब उसका पति फैक्ट्री से लौटा तो उसके 3 सप्ताह बाद, ललिता ने गौर किया कि उसे सामान्य से अधिक योनि स्त्राव शुरू हो गया हैं। फिर उसे पेशाब करते समय दर्द भी होने लगा । ललिता को यह लगने लगा कि जरूर कोई गड़बड़ है पर उसे यह नहीं पता लग पा रहा था कि ऐसा क्यों हो रहा है।

ललिता ने अपनी मित्र सुजया से पूछने की सोची। सुजया ने उसे पानी में जीश उबल कर पीने को कहा क्योंकि जब उसे इस प्रकार की शिकायत हुई थी तो उसने भी यही किया था। ललिता ने वह पी या परन्तु उसका योनि से जा रहा अतिस्त्राव तथा पेशाब करते समय दर्द ठीक नहीं हुए। तब सुजया ने उसे वह उपचार लेने की सिफारिश की जो उसकी मित्र फूलमती ने प्रसव के बाद के दर्द को ठीक करने के लिए लिया था । इस उपचार में, स्थानीय दाई ने, एक सूती आपके में कुछ जड़ी-बूटीयां भरकर फूलमती के पेट में बांध दिया था। जब ललिता ने ऐसा ही ईया तो उसे कोई लाभ नहीं हुआ। जब ललिता ने सोचा कि शायद इन औषधियों  को योनी के अन्दर रखने से फायदा हो । फिर भी कोई फायदा नहीं हुआ और उसके लक्षण बद्तर होने गए।

अंततः ललिता ने रोशन जी नामक स्वास्थ्य कर्मचारी से मिलने का फैसला कर लिया। उसे एक पुरुष से परिक्षण करते हुए बहुत झिझक हुई परन्तु तब तक वह इस बात से इतनी डर गई थी कि उसे सचमुच में कोई गंभीर बीमारी है ।

समस्या क्या है ?

रोशन जी ने ललिता से कहा कि उसे मदद करने के लिए बीमारी के बारे में विस्तार से कुछ प्रश्न पूछने होंगे । अत: उसें ललिता से ये प्रश्न पूछे :

  • आपको इस समस्या के बारे में पहली बार कब पता चला ?
  • किन लक्षणों के आधार पर आपको ये शंका हुई कि कुछ गड़बड़ है ?
  • दिन में कितनी बार ये लक्षण होते हैं ? किस प्रकार के लक्षण होते हैं ?
  • क्या आपको ये लक्षण पहले कभी हहुए हैं या आपके गहर पर या समुदाय में किसी अन्य को ऐसे लक्षण हुए हैं ?
  • किसी कारण से ये लक्षण घट या बढ़ जातें हैं ?

बीमारियों की पहचान कठिन

कुछ बीमारियों को एक दूसरे से पहचानना कठिन हैं

ललिता द्वारा अपने दर्द व योनि स्त्राव के बारे में बताये गये विवरण को ध्यान में सुनने के बाद रोशन जी ने समस्या कि लक्षण अकसर हमें किसी सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में आम संकेत देते हैं । लेकिन कभी-कभी, कई बिमारियों के कारण एक जैसे लक्षण पैदा हो सकते हैं । उदाहरण के तौर पर , किसी महिला के योनि स्त्राव की मात्र, रंग, गंध में परिवर्तन इन कारणों से हो सकते हैं –

यौन संचारित रोग (इस.टी.डी)

योनि का कोई अन्य संक्रमण जो इस टी डी नहीं है ।

पेल्विक इनफलामेट्री डिजीज जो की गर्भाशय ततः फैलोपियन नलिकाओं का संक्रमण है और अकसर किसी इसटीडी के कारण होती है ।

गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर ।

यह बेहतर रूप से जानने के लिए कि ललिता के लक्षण इनमें से किस कारणवश थे , रोशन जी के लिए यह जानना आवश्यक था कि ललिता और उसका पति कंडोम का प्रयोग करते थे या नहीं तथा क्या उन दोनों में से किसी के महिला/ पुरुष के साथ यौन संबंध थे या नहीं । ललिता ने स्वीकार किया कि उसे अपने अपने पति के किसी अन्य महिला के साथ यौन संबंध होने का शक है क्योंकि वह कार्यवश, घर से महीनों दूर रहता था । चूँकि उन्होंने कभी इस विषय में आपस में बात चित नहीं की थी, इसलिए यह विश्वास के साथ ऐसा नहीं कह सकती थी, हालांकि आखिरी बार जब उसक पति घर वापस आया था तो उसने पेशाब करते समय दर्द होने की शिकायत की थी उसने अपने इन लक्षणों के लिए फैक्ट्री के भोजन को दोषी ठहराया था ।

इस अतिरिक्त जानकारी के साथ रोशन जी ने कहा कि उसे शक है कि ललिता को कोई इस टी डी- गोनोरिया या क्लेमाइडीया हो गया है । चूँकि इन दोनों रोगों की एक दुसरे से पहचान करना कठिन है, इसलिए इन दोनों का एक साथ उपचार करना ही बेहतर है ।

समस्या क्यों हो रही हैं?

संक्रमण रोग वे रोग है जो एक व्यक्ति दुसरे व्यक्ति को फैलाते हैं । वे संक्रमित व्यक्तियों या वस्तुओं के सम्पर्क में आने से तथा हवा या पानी के मध्यम से फ़ैल सकते हैं । रोशन जी का सोचना है कि कीटाणु ललिता के रोग के लिए जिम्मेवार हैं, वे यौन सम्पर्क से फैलते हैं । जिस कीटाणु को रोशन जी ललिता के रोग का जिमेवार मानते हैं, वह यौन सम्पर्क से फैलता है ।

  • जो रोग एक व्यक्ति से दुसरे व्यक्ति को नहीं फैलाते हैं उन्हें असंक्रामक रोग कहते हैं तथा ये इन कारणों से हो सकते हैं :
  • शरीर में उत्पन्न विकारों से – उदहारण बुढ़ापे में हड्डियों के कमजोर होने से ।
  • ऐसा कोई विकार जो शरीर को बाहरी रूप से हानि पहुंचता है जैसे कि – भारी वजन उठाने से पीठ की समस्या हो जाना ।
  • शरीर में किसी पदार्थ, जैसे कि पोषण, की कमी होने से । कम मात्रा या गलत किस्म का भोजन खाने से कोई व्यक्ति कुपोषण का शिकार हो सकता है ।
  • लेकिन विरले ही किसी बीमारी का केवल एक कारण होता है । अकसर ही लोगों के रीती-रिवाजों तथा विश्वासों आदि का बीमारीयों के होने में काफी योगदान होता है – बिलकुल वैसे ही, जैसे हमरे आस-पास की परिस्थितियों, जमीन, धन-दौलत तथा शक्ति आदि के वितरण का प्रभाव पड़ता है ।

स्त्रोत

  • ज़ेवियर समाज सेवा संस्थान,राँची


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