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समुदाय संचालित सम्पूर्ण स्वच्छता विधि

पृष्ठभूमि

भारतीय ग्रामीण परिवेश में खुले में शौच की प्रथा को सामाजिक मान्यता सिदियों से प्राप्त है| इस पीढ़ियों कुप्रथा को तोड़ने की आवश्यकता है, खुले में शौच की जो आदत सहज ही बन गई है उसे बदलने की आवश्यकता है, व्यवहार में परिवर्तन लाने की आवश्यकता है ताकि खुले में जहाँ-तहाँ बिखरा मानव मल, जो कई बीमारियों को तो पैदा कर ही रहा है, साथ ही साथ हमारी मर्यादा पर भी एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाता है, जिससे मुक्ति पा सकें और स्वस्थ रहते हुए आत्म गरिमा के साथ सारी दुनिया का सामना कर सके|

खुले में किये जा रहे मानव मल से मुक्ति पाने और इस पुरानी आदत को बदलने के लिए एक विधि का इस्तेमाल किया जा रहा है जिसकी अवधारणा का विकास श्री कमल कार द्वारा किया गया है जो सहभागी ग्रामीण अध्ययन विधि पर आधारित है| इस विधि को समुदाय संचालित सम्पूर्ण स्वच्छता कहा गया|

CLTS  विधि के द्वारा समुदाय से उनके ही स्वच्छता सम्बन्धी व्यवहार का आत्म विश्लेषण करवाया जाता है, एवं उनमें अन्तः प्रेरणा की आग पैदा की जाती है जिससे समुदाय अपनी इस खुले में शौच की आदत का स्वयं विश्लेषण कर सके, इसके दुष्परिणामों का आकलन कर सके और ये सिर्फ व्यक्तिगत व्यवहार परिवर्तन का प्रश्न ना होकर सामाजिक व्यवहार परिवर्तन का मुद्दा बन सके| साथ ही यह समाज के हर तबके की आदत को बदलने के लिए एक सोच, एक विचार को जन्म दे सके|

स्वच्छता की वास्तविक स्थिति का सजीव चित्रण ग्रामीण समुदाय के बीच किया जाता है, जिससे समुदाय खुले में शौच की आदत के कारण स्वयं घृणा और शर्म का एहसास करता है और अस्वच्छता के कारण समूचे समुदाय/समाज पर पड़ने वाले दुष्परिणामों की विस्तृत चर्चा होती है| इससे समुदाय अपनी स्थिति को भांप कर एवं इसकी भयावह को समझते हुए व्यवहार परिवर्तन के लिए विहार कर एक मत से निर्णय लेकर सुधार एवं परिवर्तन के लिए संकल्पबद्ध होकर प्रयास करता है|

CLTS  की सम्पूर्ण प्रक्रिया को सुव्यवस्थित ढंग से किये जाने के लिए कुछ त्रिकोण या टूल्स का प्रयोग किया जाता है| ये ट्रिगर टूल्स यानी उत्प्रेरण के तरीके समुदाय की परिस्थितियों एवं वातावरण पर निर्भर करते हैं| इस पूरी प्रक्रिया को ट्रिगरिंग कहा जाता है| ये शब्द बंदूक के ट्रिगर से बना है| इस ट्रिगर में किसी जान नहीं जाती परन्तु इस पूरी ट्रिगरिंग में समुदाय की आत्मा को झकझोरने का प्रयास होता है जिससे समुदाय एक होक अस्वच्छता/खुले में शौच के रूप में पसरे मल्लासुर या मानव बम (खुले में बिखरे मानव मल से उत्पन्न राक्षस) को ख़त्म कर स्वास्थ्य जीवन यापन करते हुए समृद्धि  की ओर कदम बढ़ा सके|

CLTS टूल्स के माध्यम से चिंतनीय/विचारणीय छोटे-छोटे प्रश्नों को समुदाय के बीच छोड़ा जाता है जिस पर विचार एवं चिंतन करते हुए समुदाय स्वच्छता के प्रति व्यवहार परिवर्तन लाने के लिए संकल्पबद्ध हो सामूहिक प्रयास करता है|

CLTS विधि  में आमतौर पर प्रयोग में लाये जाने वाले उत्प्रेरण के तरीके या ट्रिगर टूल्स का उपयोग करने का कोई निश्चित क्रम नहीं होता| सामान्यतः  सहजकर्ता/उत्प्रेरक समुदाय के साथ सहज होने के बाद जमीनी परिस्थितियों के अनुसार ही ट्रिंगरिंग प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हैं| ट्रिंगरिंग टूल्स इस प्रकार है:

1 सम्बन्ध निर्माण

  1. मल क्षेत्र भ्रमण
  2. स्वच्छता की स्थिति का सामुदायिक मानचित्रण
  3. मल गणना
  4. खुले में फैले मल का मुँह तक पहुँचने का मार्ग
  5. प्रवाह चित्र
  6. चिकित्सीय खर्चों की गणना
  7. मर्यादा की रक्षा
  8. खाना पाखाना प्रदर्शन

 

इन ट्रिंगरिंग टूल्स के बारे में विस्तृत वर्णन अगले अध्यायों में प्रस्तुत है:-

सम्बन्ध निर्माण

उद्देश्य – इसका मुख्य उद्देश्य समुदाय के बीच पारस्परिक विश्वास एवं सह-समझ को विकसित करना होगा है|

कैसे किया जाये:- सर्वप्रथम समुदाय का अभिवादन करते हैं एवं उनका अभिवादन सहज स्वीकार करते हैं| सहजकर्ता/उत्प्रेरक स्वयं का परिचय देते हुए समुदाय के बीच उपस्थित होने का उद्देश्य स्पष्ट करता है| सहजकर्ता चर्चा को रोचक बनाते हुए समुदाय को स्पष्ट करें कि वे कुछ देने नहीं आये हैं| साथ ही समुदाय से उनका प्रक्रिया हेतु समय मांग लिया जाये| चर्चा को इस बिंदु पर लाया जाये कि वे पूर्ण सहमति के साथ सहजकर्ता को ग्राम और ग्रामीण जीवन के बारे में निःसंकोच समस्त जानकारी देने लगें|

कब किया जाये: - इस गतिविधि को समुदाय से भेंट करते समय करना ही चाहिए| यह सब करने से सहजकर्ता समुदाय का विश्वास जीत लेते हैं एवं समुदाय का पूर्ण सहयोग प्राप्त होता है|

सम्बन्ध निर्माण के समय रखी जाने वाली सावधानियाँ:-

  • सहजकर्ता स्वयं का परिचय देना एवं यह स्पष्ट करना ना भूलें कि ग्राम में समुदाय के बीच क्यों आये हैं
  • सहजकर्ता परिचय सत्र को आवश्यकता से अधिक ना खीचें|
  • सहजकर्ता समुदाय के बीच अपनी भूमिका को समझें| वे समुदाय को शिक्षा देने या पाठ पढ़ाने से बचें|
  • सहजकर्ता धैर्य के साथ लोगों के बीच प्रश्न रखें एवं उनकी सुने|

मल क्षेत्र भ्रमण

उद्देश्य- समुदाय की स्वच्छता की स्थिति एवं व्यवहार को समझने के लिए ग्राम का भ्रमण कर ग्राम में खुले में शौच का स्थान विशेष तौर पर देखा जाता है| इस टूल्स का मुख्य उद्देश्य समुदाय की नजरों से उनके गाँव को देखना व समझना है| भ्रमण के दौरान समुदाय के बीच स्वच्छता के सम्बन्ध में प्रश्न रखे जाते हैं|

कैसे किया जाए:- सहजकर्ता यात्रा में जिज्ञासु स्वाभाव बनाकर इस यात्रा के दौरान समुदाय के साथ उनके मुख्य स्थानों पर भ्रमण कर उनके बीच विश्वास को मजबूत करते हैं| इस यात्रा में ही समुदाय की बहुत सारी समस्याओं की भी जानकारी मिल जाती है जो उनके आत्म विश्लेषण में मददगार सिद्ध होती है| समुदाय के साथ क्षेत्र भ्रमण करते हुए गाँव के गंदगी वाले स्थान से गुजरे तब में पड़े मानव मल को देखकर रुक जाएँ और समुदाय से कुछ इस प्रकार से प्रश्न करें:-

ये क्या है?

इसे किस-किस नाम से जाना जाता है?

आपके क्षेत्र में इसका प्रचलित नाम क्या है?

ये टट्टी/गू/मल किसका है?

आपके ग्राम के पुरुष, महिलाएं और बच्चे हगने कहाँ-कहाँ जाते हैं?

क्या ये वही मक्खियाँ हैं जो आपके घर में भी उड़ती रहती है या फिर कुछ अलग हैं?

ये मक्खियाँ और कहाँ-कहाँ बैठती हैं?

मक्खियाँ आपके खाने पर बैठती हैं तो क्या वो खाना आप फ़ेंक देते हैं फिर मक्खियों को उड़ाने के बाद खा लिया जाता है?

आपके खाने पर मक्खियों के पैरों द्वारा क्या चिपक कर आया और आपके खाने पर छुट गया?

आपके खाने के साथ क्या खा लिया?

इस दौरान पानी को एक पारदर्शी गिलास में लेकर पहले सहजकर्ता स्वयं पीये एवं उसके बाद साथ खड़े लोगों को भी पिलाएँ तथा पानी के रंग और स्वाद के बारे में पूछें| फिर एक बाल के साथ मक्खी के एक पैर की तुलना करते हुए उस बाल को टट्टी मने लगाकर पानी में घोल कर पुनः सहजकर्ता समुदाय से पूछें कि अब वे इस पानी को पी सकते है? यदि नहीं तो क्यों? जब आँखों से देखा हुआ नहीं पीया जाता तो क्या ये सिलसिला अब भी जारी रहेगा?

कब किया जाए- समुदाय जब सहजकर्ता को चर्चा  के लिए पर्याप्त समय देने को तैयार हो| जब समुदाय अपने गाँव को घुमाने के लिए सहर्ष तैयार हो, मौसम, गाँव भ्रमण के लिए अनुकूल हो|

क्षेत्र भ्रमण दौरान रखी जाने वाली सावधानियाँ:-

  • सहजकर्ता जिज्ञासा के साथ भ्रमण करें और स्वच्छ्ता की स्थिति का ध्यानपूर्वक अवलोकन करें|
  • सहजकर्ता यात्रा में धीरे-धीरे चलें|
  • भीड़ में चल रही चर्चा को ध्यान से सुनें|
  • खुले में शौच वाले स्थान पर जाते हुए और वहां जाकर सहज व्यवहार करें मल को देखकर मुँह-नाक ना बनायें|
  • खुले में शौच की जगह में अधिक से अधिक देर रुके, प्रश्न वहीं पूछते रहें और समुदाय को उनकी ही टट्टी की बदबू में साँस लेने दें| इससे उनके मन में घृणा और शर्म उपजेंगे|
  • सहजकर्ता सदा ध्यान रखें कि इस गतिविधि का उद्देश्य किसी को अपमानित करना नहीं है, बल्कि स्वच्छता की स्थितियों के प्रति समुदाय में घृणा और शर्म की भावना पैदा करना है|
  • सहजकर्ता किसी भी स्थिति में समुदाय पर किसी भी प्रकार की निर्णयात्मक टिप्पणी करने से बचें एवं उन्हें निर्णय लेने के लिए प्रेरित करें|
  • भ्रमण के दौरान समुदाय द्वारा किये गए अच्छे सकारात्मक कार्यों को देखें और उनका मनोबल बढ़ाए|
  • पानी के गिलास वाली गतिविधि को करते समय सहजकर्ता ये ध्यान रखें कि जब पानी में टट्टी में चिपका बाल पानी में डूबा दिया गया हो उसके बाद किसी भी स्थिति में पानी पीने के लिए ना तो किसी को मजबूर करें और ना ही गिलास किसी के हाथ में दिया जाए|

स्वच्छता की स्थिति का सामुदायिक मानचित्रण

उद्देश्य- इस गतिविधि का मुख्य उद्देश्य गाँव की स्वच्छ्ता स्थिति के सम्बन्ध में समुदाय को आत्म विश्लेषण करने को प्रेरित करना है|

कैसे किया जाए:- गाँव के बीच के खुले मैदान में समुदाय के सदस्यों द्वारा ही गाँव का नक्शा बनाया जाता है| सहजकर्ता प्रश्न करते जाते हैं और सदस्यगण नक्शे में गाँव की मुख्य सड़कों एवं गाँव में उपलब्ध समस्त संसाधनों के साथ-साथ गाँव की बसाहट को भी नक्शे पर विभिन्न रंग की रंगोली या सहज उपलब्ध साधनों से उतारते जाते हैं| जब नक्शा पूरा बन जाता है तब सहजकर्ता समुदाय के मध्य सवाल रखते हैं कि आप का गाँव, आपको कैसा दिखाई दे रहा है? समुदाय से इस सवाल के सकारात्मक उत्तर मिलते हैं| सहजकर्ता भी सभी का उत्साहवर्धन करते हैं|

इस के पश्चात पुनः सहजकर्ता समुदाय से दूसरा सवाल करते हैं कि इस गाँव के लोग शौच करने के लिए कहाँ जाते हैं? समुदाय के सदस्यों को प्रेरित कर खुले में शौच के स्थान पर पीले रंग की रंगोली रखी जाती है| सहजकर्ता खुले में शौच के सभी स्थानों को जानने के लिए तरह-तरह से प्रश्न रखते हैं जैसे बरसात के मौसम में कहाँ जाते हैं? रात के समय कहाँ जाते हैं? दिन में कहाँ जाते हैं?  बच्चों को कहाँ ले जाते हैं? शिशुओं के मल को कहाँ फेका जाता है? बुजुर्ग लोग कहाँ जाते हैं? देखते ही देखते गाँव के नक्शे पर मानव मल रूपी पीला रंग छा जाता है- गाँव के आस-पास, घरों के पास, पेयजल स्रोतों के पास सभी जगहों पर|  सहजकर्ता पुनः अपना प्रश्न दोहराता है कि आपका गाँव आप को कैसा दिखाई दे रहा है? इस समय जवाब में मौन छा जाता है और चितन की प्रक्रिया प्रारंभ होती है|

स्वच्छता की स्थिति का सामुदायिक मानचित्रण करवाते समय रखी जाने वाली सावधानियाँ:-

  • मानचित्रण के लिए खुले एवं बड़े स्थान चयन करें जिससे लोग भाग ले सकें|
  • मानचित्रण में स्थानीय सामग्री का प्रयोग करने के लिए प्रेरित करें|
  • मानचित्रण बनाते समय सभी लोग भाग लेने के लिए प्रेरित करें|
  • सहजकर्ता स्वयं ही मानचित्र ना बनाए|
  • सहजकर्ता मानचित्रण के दौरान ऐसे प्रश्नों को समुदाय के समक्ष रखें जिनसे वे अपनी स्वच्छता स्थिति को देख सकें| उदाहरण के लिए सबसे गंदा क्षेत्र कौन सा है? क्या इस खुले में बिखरे मल से आप लोग बचकर निकल पाते हैं? क्या ये मल आप लोगों के पास वापस नहीं लौटता? क्या आप के गाँव की यही स्थिति बनी रहेगी या आप इस को बदलना चाहेंगे?
  • मानचित्र को कागज पर बना लें एवं उसे सार्वजनिक स्थान पर प्रदर्शित करने का प्रयास करें| इसे गाँव में खुले में शौच मुक्त स्थिति की प्रगति को देखने के लिए निगरानी टूल्स के रूप में उपयोग किया जा सकता है|

मल गणना

उद्देश्य- इस गणना से गाँव में खुले मल के उत्पादन की मात्रा आसानी से प्राप्त की जा सकती है जिससे समुदाय के सदस्यों को खुले में शौच की भयावह स्थिति को समझने में मदद होती है|

कैसे किया जाए:- समुदाय के सदस्यों से पूछा जाए कि आपको गाँव के कितने लोग हर रोज खुले में मल त्यागते हैं? एक व्यक्ति एक दिन में कितना त्यागता होगा? (अंदाज से) उदाहरण के लिए यदि एक व्यक्ति एक दिन में 400 ग्रा. मल त्यागे और पूरे गाँव से 500 व्यक्ति बाहर खुले में शौच को जाते है तो इस गाँव में हर रोज खुले में400 500 = 200000 ग्राम खुला मल यानि 200 किलो खुला मल यानि 2 किवंटल खुला मल हर रोज यहाँ बिखरता है| यदि एक दिन में 2 किवंटल हिसाब हो कि एक सप्ताह में कितना? एक माह में कितना? एक साल में कितना?

सहजकर्ता ये हिसाब-किताब समुदाय के सदस्यों के द्वारा ही होने हो, फिर सवाल करें कि बताएं कि इतने मल का ढेर कितना बड़ा होगा? पर ये कहीं भी दिखाई नहीं देता? तो आखिर ये सारा खुला मल कहाँ जा रहा है? क्या ये मल वापस हम तक लौट कर आ रहा है? यदि हाँ, तो कैसे? क्या ये मिट्टी में मिलकर हम तक आता है? क्या ये पानी में मिल जाता है/ क्या ये मक्खियों से हम तक आता है? क्या ये जानवरों के पैरों से, गाड़ी के पहियों से हम तक आता है? क्या गू या टट्टी हमारे मुँह में जाता है? क्या आप लोग गू खाने वाले प्राणी हैं? क्या ये गू खाने का सिलसिला जारी रखना चाहते हैं कि बंद करना चाहते हैं? निर्णय आपका है|

कब किया जाए:- जब समुदाय के सदस्य खुले में बिखरे शौच की भयावहता नहीं महसूस कर पा रहे हों, उस समय इस गणना को करवाया जाना कारगर सिद्ध होता है|

मल गणना करते समय रखी जाने वाली सावधानियाँ

  • सहजकर्ता सारे हिसाब-किताब समुदाय के सदस्यों से ही कराएँ, स्वयं ना करें|
  • इतनी बड़ी मात्रा का समुदाय अनुभव कर सके उसके लिए सहजकर्ता ऐसी वस्तुओं से इस मल के ढेर की तुलना करवाएं जिनके ढेर समुदाय देखते आ रहे हैं|

खुले में फैले मल का मुँह तक पहुँचने का मार्ग

उद्देश्य- उन कारणों एवं माध्यमों की पहचान करना जिनके द्वारा खुले में छोड़ा हुआ मल वापस समुदाय के भोजन एवं जल में पहुँचता है|

इस गतिविधि के द्वारा समुदाय आसानी से ये अनुभव कर पाटा है कि खुले छोड़ा गू/टट्टी कैसे विभिन्न मार्गों से मुंह तक पहुँच जाता है|

कैसे किया जाए:- मल गणना के पश्चात मल के ढेरों का कंही भी दिखाई ना देने वाले प्रश्न के साथ जोड़ते हुए पूछा जाए कि ये मल आखिर कहाँ जाता है? क्या पशुओं के पैरों में चिपककर वापस आ रहा है? क्या पानी में मिल कर वापस आ रहा है? क्या मक्खियाँ इसे हमारे भोजन पर ला रही है? क्या ये हवा में घुल कर वापस आ रहा है? क्या मिट्टी में मिलकर वापस आ रहा है? क्या हमारे गाड़ियों के पहियों में चिपककर हम तक वापस आ रहा है? क्या ये हमारे हाथों की उँगलियों में चिपककर हम तक वापस आ रहा है? तो ये सिलसिला जारी रखना चाहते हैं कि बंद करना चाहते हैं? निर्णय आपका है|

कब किया जाए- जब समुदाय के सदस्य मल के मुंह में पहुँचने वाली चर्चा से असहमत दिखें एवं उन्हें इसका एहसास मुश्किल हो रहा हो|

मल का मुख तक का मार्ग-प्रवाह चित्र करते समय रखी जाने वाली सावधानियां

  • सहजकर्ता कभी भी ये स्वयं ना कहें कि खुले में बिखरा मल आपके मुंह तक पहुँच रहा है|
  • सहजकर्ता अनेक प्रश्न कर समुदाय को ये सोचने में मदद करें कि कैसे बाहर छोड़ा हुआ खुला मल दूर की भी यात्रा कर वापस मुख तक का मार्ग तय करता है|

चिकित्सीय खर्चों की गणना

उद्देश्य- बीमारियां जो गंदगी के कारण होती है उनके इलाज पर होने वाले खर्च की गणना और ये एहसास कराना कि स्वच्छता कायम रखने से पैरों की बचत और सुख-समृद्धि का मार्ग खुलता है|

कैसे किया जाए- समुदाय से प्रश्न करें कि रोग कैसे फैलते हैं? कौन-कौन से रोग आमतौर पर गाँव में होते हैं? उनके इलाज पर कितना खर्च आता है? इलाज करने पर कहाँ-कहाँ खर्च होता है?

एक बार डॉक्टर की फीस कितनी?

दवाईयों और जाँच का एक बार में खर्चा कितना?

इलाज के लिए जाने आने का खर्च कितना?

बीमारी के दौरान खान-पान पर विशेष खर्च कितना?

सब जोड़कर एक आदमी के बीमार होने पर खर्च, इसी प्रकार पूरे परिवार पर एक एक वर्ष में बीमारियों पर होने वाला खर्च और फिर पूरे गाँव के परिवारों पर बीमारियों के मद में होने वाले खर्च की गणना करवाई जाती है| फिर पूछा जाता है कि क्या इस खर्च को बचत में बदला जा सकता है?

कब किया जाए- इस गतिवधि को तब करें जब समुदाय स्वच्छता और खुले में शौच से मुक्ति को आर्थिक प्रगति से जोड़कर नहीं सोच पा रहा हो|

चिकित्सीय खर्चों की गणना करते समय रखी जाने वाली सावधानियां

  • सहजकर्ता ये ध्यान रखें कि यहाँ स्वच्छता कैसे कायम रखी जाए, इस विषय पर समुदाय को शिक्षित करने का प्रयास ना करें|
  • सबसे महत्वपूर्ण ये है कि समुदाय को घृणा, शर्म एवं अशुद्ध होने का एहसास हो|
  • रोगों के बारे में समुदाय से ही पूछा जाए ना कि सहजकर्ता   उनको रोगों की पोथी बताने लग जाए|

मर्यादा की रक्षा

उद्देश्य- शर्म और मर्यादा का एहसास होता है| खुले में शौच करने की मजबूरी के कारण महिलाओं के अपमानित होने का अनुभव कराया जाता है|

कैसे किया जाए- समुदाय से चर्चा के दौरान प्रश्न किया जाए कि आप को मान-सम्मान प्यारा है? यदि आपकी बेटी से कोई व्यक्ति छेड़खानी करें तो आप क्या करेंगे? जब आप के घर की मर्यादा यानि आपकी बहु-बेटियां बाहर खुले में शौच के लिए जाती हैं तो क्या आप पूरे गाँव में पर्दा लगवा देते हैं? क्या पराया लोगों की गलत निगाहों आप के घर की, गाँव की बहन-बेटियों पर नहीं जाती होंगी? क्या आप अपनी बहन-बेटियों को सुरक्षित जीवन दे पा रहे हैं? आपनी बहन-बेटियों को सुरक्षित जीवन देना किसका फर्ज है? क्या ये समुदाय इस स्थिति को बदलने के लिए तैयार है?

कब किया जाए- परिस्थिति को समझते हुए इस टूल्स का प्रयोग करना चाहिए|

मर्यादा की रक्षा टूल का प्रयोग करते समय रखी जाने वाली सावधानियां

  • महिलाओं की भावनाओं के प्रति संवेदनशील रहें|
  • समुदाय को अपमानित करने जैसी कोई बात ना करें
  • नारी सशक्तिकरण के उपदेश देने से बचें|

खाना पाखाना प्रदर्शन

उद्देश्य- इस टूल्स के द्वारा मल के मुंह तक के मार्ग को सजीव कर अस्वच्छता की स्थिति से बाहर निकलने का विचार समुदाय में उत्पन्न किया जा सकेगा| खुले में शौच के प्रति घृणा की भावना प्रबल होगी| तत्काल इस स्थिति से निकलने के लिए समुदाय प्रेरित होगा|

कैसे किया जाए- जब समुदाय के साथ चर्चा चल रही हो उसी बीच में इस टूल को दिखाया जा सकता है| इस को प्रदर्शित करते समय सहजकर्ता समुदाय को यह दृश्य दिखाकर शांत खड़े रहें| समुदाय को आपस में चर्चा करने दें तथा बाद में प्रश्न करें- क्या ये खाने खिलाने का सिलसिला जारी रखना चाहते हैं कि बंद करना? इस को तत्काल कैसे बंद करेंगे? कुछ देर चर्चा और प्रश्न उत्तर होने के बाद, मल पर मिट्टी लाकर डाल दें और टट्टी को गड्ढे में गाड़ने का संकेत दें|

इन टूल्स के अतिरिक्त अन्य टूल्स भी प्रयोग में लाये जा सकते हैं जिससे समुदाय आत्म चितन के लिए प्रेरित हो और स्वच्छता के प्रति एकजुट होकर प्रयास करें|

CLTS कार्यकर्ता के तौर पर आपका व्यवहार कैसा हो?

क्या अवश्य करें

क्या न करें

सर्वप्रथम सम्पूर्ण टीम अपना परिचय दें एवं गाँव में आने का उद्देश्य करें|

अपना परिचय दिए बिना समुदाय को परिचय देने के लिए करना|

समुदाय के साथ उनके स्तर पर ही बैठें ना कि कुर्सी आदि का प्रयोग करें

श्रेष्ठतम जैसा व्यवहार करना

गाँव में पहुँचते ही अपने मोबाइलसेट  को बंद करें अथवा शांत रखें

मोबाइल पर बात करते रहना और लोगों को इंतजार कराना

प्रक्रिया के दौरान सभी व्यक्तियों से चर्चा हो

कुछ ही लोगों पर ध्यान केन्द्रित करना

समुदाय को अपनी स्वच्छता की वर्तमान स्थिति का विश्लेषण करने में मदद करें

लोगों को शिक्षा देना, भाषण देना एवं कीच करने के लिए कहना

लोगों को स्वयं के विश्लेषण द्वारा महसूस करने दें|

लोगों को बताना कि उनके लिए क्या अच्छा है क्या बुरा है| सुझाव देना|

लोगों को स्वयं में परिवर्तन लाने के लिए ट्रिगर करें

कार्य करने के लिए दबाव डालना और बार-बार कहना|

स्वयं पीछे रहें व स्वाभाविक नेताओं पर सबकुछ छोड़ दें|

उनके कार्य का जिम्मा लेना

शांत रहें और लोगों को आपस में चर्चा करने दें व प्रज्ज्वलन का क्षण आने पर उस पहचानें|

जब उपस्थित समुदाय एक दुसरे पर दोषारोपण कर रहें हों तो उसे रोकना|

जब समुदाय की आपस में बहस प्रारम्भ हो जाए तो आप शांत रहें| याद रखें कि ये प्रज्ज्वलन का क्षण आने के संकेत हैं

लोगों को बहस करने से रोकना अरु जब लोग एक दूसरे को कार्य करने के लिए कह रहे हों तो जल्दी ही प्रक्रिया को समेटने की कोशिश करना व जल्द ही निकल जाना|

जो लोग प्रक्रिया में स्वाभाविक रूप से आगे आ रहे हों उनके प्रशसा करें व उन्हें प्रोत्साहित करें|

उभरते हुए लोगों को, बच्चो को महिलाओं को नजरअंदाज करना

जो लोग गरीबों की मदद के लिए आगे आए उनकी प्रसंशा करें

गरीबों की मदद करने वालों को नजरअंदाज करना

लोगों को साधारण शौचालय बनाने के लिए आविष्कार करने दें

किसी विशेष प्रकार के शौचालय के मॉडल को बनाने के लिए बढ़ावा देना

स्थानीय स्तर पर कारवाई के लिए प्रेरित करें| समुदाय में स्वयं निर्भरता के लिए प्रेरित करें

शौचालय निर्माण के लिए अनुदान प्रदान करना

सावधान रहते हुए मजबूती से अपनी बात को रखें

लोगों को अपनी बात पर दवाब डालकर सहमत कराना

सब कुछ ध्यानपूर्वक सुनें| पूर्वाग्रह  ना रखे

व्यवधान डालना

 

 

जाने निर्मल भारत अभियान और उससे जुड़े शौचालय निर्माण के तकनीकी पहलुओं को

1.निर्मल भारत अभियान क्या है?

  • वर्ष 1999 से भारत सरकार द्वारा समग्र स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा था| 01.04 2012 से इस अभियान का नाम बदल कर निर्मल भारत अभियान किया गया| इस अभियान में स्वच्छता के सभी 7 घटकों को केन्द्रित करते हुए एवं पूर्व के अभियान के अनुभवों के आधार पर नवीन दिशानिर्देश जारी किये हैं|

2. निर्मल भारत अभियान अंतर्गत क्या-क्या किये जा सकते हैं?

निर्मल भारत अभियान के अंतर्गत स्वच्छता के सात घटकों पर कार्य किया जाता है| ये घटक इस प्रकार हैं|

  • शुद्ध पेयजल की व्यवस्था हेतु|
  • खुले में शौच मुक्त वातावरण निर्माण हेतु
  • संस्थाओं, शालाओं, आंगनबाड़ियों में शौचालय निर्माण हेतु
  • कूड़े-कचरे के निपटान हेतु|
  • व्यक्तिगत स्वच्छता हेतु
  • खान-पान की स्वच्छता हेतु
  • गंदे पानी के निपटन हेतु
  • सामुदायिक स्वच्छता परिसर का निर्माण कार्य

3.  व्यक्तिगत शौचालय निर्माण के लिए कितनी प्रोत्साहन राशि दी जाती है?

व्यक्तिगत शौचालय निर्माण एवं उपयोग के लिए प्रोत्साहन राशि रु. 5500/- है| जिसमें रु. 3200/- का केन्द्रांश, रु. 1400/- का राज्यांश एवं रु. 900/- का हितग्राही का अंशदान होता है|

  • ये प्रोत्साहन राशि सभी बी.पी.एल. के हितग्राहियों को दी जा सकती है|
  • ए.पी.एल. वर्ग के ऐसे हितग्राही जो अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति/भूमिहीन/लघु/सीमांत किसान/परिवार का मुखिया विकलांग या महिला हो तो ऐसे ए.पी.एल. परिवारों को प्रोत्साहन राशि दी जाती है|

4. व्यक्तिगत शौचालय निर्माण के लिए कितनी प्रोत्साहन राशि दी जाती है क्या वह शौचालय निर्माण के लिए होती है?

  • व्यक्तिगत शौचालय निर्माण एवं उपयोग के लिए प्रोत्साहन राशि दी जाती है वह शौचालय निर्माण की लागत नहीं होती| सरकार ये राशि आपको ईनाम के तौर पर देती है| आप इस ईनाम के तभी हकदार होते हैं जब आप शौचालय का निर्माण करके उसका नियमति उपयोग करें|
  • आप अपना शौचालय अपनी सुविधानुसार बहुत अच्छा और सुंदर बना सकते हैं| इसमें ज्यादा खर्च भी कर सकते हैं|

5. व्यक्तिगत शौचालय निर्माण की  प्रोत्साहन राशि ए.पी.एल. व्यक्तियों को भी दी जाती है?

  • हाँ, निर्मल भारत अभियान में ए.पी.एल.के हितग्राहियों को भी प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है जिसका उल्लेख बिंदु-३ में किया गया है|

6. शाला शौचालय के लिए कितनी प्रोत्साहन राशि दी जाती है?

  • शाला शौचालय के लिए राशि रु. 35000/- का प्रावधान है जिसमें 70 प्रतिशत केन्द्रांश एवं 30 प्रतिशत राज्यांश होता है

7. आंगनबाड़ी शौचालय के लिए कितनी प्रोत्साहन राशि का प्रावधान है?

  • आंगनबाड़ी शौचालय के लिए लिए राशि रु. 8000/- का प्रावधान है जिसमें 70 प्रतिशत केन्द्रांश एवं 30 प्रतिशत राज्यांश होता है

8. क्या निर्मल भारत अभियान के अंतर्गत कूड़े-कचरे के प्रबंध के लिए भी राशि का प्रावधान है?

हाँ, कूड़े-कचरे के प्रबंध के लिए भी राशि का प्रावधान ग्राम में परिवारों की संख्या के आधार पर हैं जिसमें 70 प्रतिशत केन्द्रांश एवं 30 प्रतिशत राज्यांश होता है|

  • 150 तक परिवार संख्या वाले ग्रामपंचायतों के लिए- राशि रु. 7लाख तक का प्रावधान है?
  • 151 से 300 तक परिवार संख्या वाले ग्रामपंचायतों के लिए- राशि रु. 12लाख तक का प्रावधान है
  • 301 से 500 तक परिवार संख्या वाले ग्रामपंचायतों के लिए- राशि रु. 15लाख तक का प्रावधान है
  • 500 से अधिक परिवार संख्या वाले ग्रामपंचायतों के लिए- राशि रु. 20लाख तक का प्रावधान है

 

9. क्या निर्मल भारत अभियान और महात्मा गाँधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना मने मिला-जुला कर काम किया जा सकता है?

  • हाँ, दोनों योजनाओं को जोड़कर कार्य किया जा सकता है| निर्मल भारत अभियान से राशि रु. 5500/- और मनरेगा से अधिकतम राशि रु. 4500/- तक का प्रावधान है

10.क्या निर्मल भारत अभियान में स्वयं सेवी संस्थाएं भी काम कर सकती हैं?

  • यह अभियान समुदाय से सीधा-सीधा जुड़ा हुआ है एवं मूलतः व्यवहार परिवर्तन का कार्यक्रम है| अतः अगर स्वयं सेवी संस्थाएं आगे आती हैं तो उनका स्वागत होता है|

शौचालय निर्माण के तकनीकी पहलू कौन-कौन से है:-

11.शौचालय निर्माण क्यों आवश्यक है?

  • बेहतर स्वास्थ्य हेतु
  • आत्म सम्मान की रक्षा हेतु
  • महिलाओं की गरिमा की रक्षा हेतु
  • बच्चों में स्वच्छता के संस्कार देने हेतु
  • समृद्धि हेतु

12.कौन सा शौचालय ग्रामीण क्षेत्रों के लिए उपयुक्त होगा?

ग्रामीण क्षेत्रों के लिए लीच-पिट तकनीक से बना शौचालय उपयुक्त होगा क्योंकि

  • इस तकनीक से कम जगह में शौचालय का निर्माण हो जाता है|
  • यह सरल तकनीक है
  • इस तकनीक द्वारा कम से कम बजट में भी शौचालय निर्माण सम्भव है|
  • इस तकनीक से जैविक खाद का उत्पादन भी सम्भव है|
  • इस तकनीक के पिट की साफ-सफाई बहुत आसान है|

13. लीच-पिट शौचालय को बनाने में कितनी जमीन लगती है?

  • लीच-पिट तकनीक के शौचालय के निर्माण में कम से कम 1मीटर X1 मीटर  की जगह की आवश्यकता होती है|

14. लीच-पिट के गड्ढे को किस नाप से खोदना चाहिए?

  • लीच-पिट के गड्ढे को 1 से 1.25 मीटर गोलाई और गहराई के माप से खोदना चाहिए और जब पिट के अंदर जालीदार दीवार बने तो दीवार के अंदर-अंदर की चौड़ाई 1 मीटर यानि 3.25 फुट की आनी चाहिए|

15. लीच-पिट जालीदार चुनाई क्यों आवश्यक है?

लीच-पिट में जालीदार चुनाई करना अतिआवश्यक है क्योंकि

  • लीच-पिट के अंदर जैविक खाद बनने की प्रक्रिया को निरंतर बनाये रखने के लिए छिद्र जरुरी है|
  • मानव मल को खाद में परिवर्तित करने वाले जीवाणुओं को जिन्दा रखने के लिए हवा और गर्मी आवश्यक है जो इन छिद्रो से पहुँचती हैं|
  • इन जालीदार छिद्रों से बाहर निकलता है जिसे मिट्टी सोख लेती है|

16. लीच-पिट के अंदर जालीदार दीवार में कितने माप के छिद्र रखने चाहिए?

  • छिद्र 1.5 से 2 इंच होने चाहिए|
  • छिद्र छोड़ते समय ध्यान होना चाहिए कि सीमेंट (माल) छिद्र में ना जम जाए|

17. लीच-पिट के अंदर छिद्र किस प्रकार छोड़ना चाहिए?

लीच-पिट में ईटों से जालीदार दीवार बनाते समय ध्यान रखना चाहिए कि-

  • पिट की पहली परत 8 इंच की चुनाई हो|
  • इसके बाद की परतों को 4 इंच की चुनाई की जाती है| दूसरी और तीसरी परत में कोई भी छिद्र ना छोड़े जाएँ|
  • उसके उपरांत 1 के बाद हर दूसरी परत पर छिद्र छोड़ें|
  • एक परत पर 7 से 8 छिद्र आते हैं|
  • पिट के सबसे ऊपर की दो परतों में घी कोई छिद्र नहीं छोड़े जाते|

18.लीच पिट का उपयुक्त आकर क्या है?

  • लीच पिट के लिए गोल आकर ही उपयुक्त है क्योंकि गोल आकार पर दबाव चारों ओर से समान पड़ता है और ये आकर आसानी से दबाव को झेल लेता है|

19. क्या लीच पिट के अंदर जालीदार दीवार, ईंट के अतिरिक्त किसी अन्य साधन से भी बनाया जा सकता है?

लीच पिट के अंदर जालीदार दीवार, ईंट के अतिरिक्त और भी कई साधनों से बन सकती है

  • सीमेंट के छिद्रदार रिंग से
  • बांस की दीवारों से
  • लोहे की चादर से
  • पत्थरों से

20 लीच पिट के गड्ढे की गहराई 1 मीटर की ही क्यों राखी जाती है?

लीच पिट के गड्ढे की गहराई 1 मीटर तक गहरे रखने के कई कारण हैं-

  • जमीन के नीचे के पानी के ख़राब नहीं होता|
  • जैविक खाद बनने की प्रक्रिया ठीक चलती है क्योंकि इतनी गहराई तक सूरज की गर्मी बराबर पिट तक पहुँचती है जिससे मानव मल से बनने वाली जैविक खाद जल्दी और अच्छी बनती है|

21. एक लीच पिट का गड्ढा कितने वर्षों में भर जाता है?

  • यदि एक परिवार में 6 सदस्य हैं तो 1 लीच पिट का गड्ढा लगभग 5 से 6 वर्षों में भर जाता है

22. लीच पिट को चूहे भी नुकसान पहुंचाते हैं अरु उसमें मिट्टी भर देते हैं यदि ऐसा हो तो क्या करना चाहिए?

जिस क्षेत्र में चूहे हों वहाँ लीच पिट को बनाते समय एक बहुत आसान उपाय करना चाहिए-

  • लीच पिट की चुनाई हो जाने के पश्चात उसके चारों ओर बाहर की ओर से कपड़ा लपेट देना चाहिए| फिर पिट और मिट्टी के बीच की खाली जगह को बालू से भर देना चाहिए| ऐसा करने से चूहे जब पिट में घुसना चाहेंगे उस समय बालू उनके मुँह में गिरेगी और वे वापस लौट जायेंगे| साथ ही पिट के चारों ओर लगाया हुआ कपड़ा

बालू को पिट के अंदर गिरने नहीं देगा|

23. क्या लीच पिट को घर के अंदर भी बनाया जा सकता है?

  • लीच पिट को घर के अदर बहुत आसानी से बनाया जा सकता है क्योंकि इस तरह के पिट में से ना कोई बदबू और ना ही किसी प्रकार का पानी निकलता है| चूँकि मानव मल से निकलने वाली सारी बदबू और पानी को मिट्टी सोख लेती है|
  • घर के बाहर यदि जगह ना हो तो कम जगह में घर के अंदर बनाया जा सकता है और फिर उस पिट को ऊपर से पक्का पलास्टर कर दिया जाता है|

24. क्या लीच पिट शौचालय में से बदबू आती है?

  • लीच पिट से कोई बदबू नहीं आती| मानव मल में लगभग 90 प्रतिशत भाग पानी और गैस का होता है जिसको मिट्टी बहुत आसानी से सोख लेती हैं|
  • इसके आलावा ग्रामीण सीट के साथ जुड़े मुर्गे में 20 मी.मी. की जल सील होती है जो बदबू को बाहर आने से रोक लेती है|

25. दो लीच पिट के गड्ढों में कम से कम कितनी दूरी होनी चाहिए?

  • दो लीच पिट के गड्ढों में कम से कम 1 मीटर की  दूरी अवश्य होनी चाहिए क्योंकि जब पहला गड्ढा भर जाता है तो दूसरे गड्ढे में मल जाने लगता है और  पहले गड्ढे की खाद बनने की प्रक्रिया तेज हो जाती है| इस समय जरुरी हो जाता है कि गड्ढा सुखा raheरहे| यदि दो गड्ढों के बीच की दूरी 1 मीटर से कम होती है तो दूसरे गड्ढे की नमी पहले गड्ढे तक पहुँचेगी और खाद ठीक से तैयार नहीं हो पाएगी|

26. क्या लीच पिट वाले शौचालय में वेंट पाइप लगाया जाता है?

  • नहीं, लीच पिट वाले शौचालय में वेंट पाइप लगाने की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि इस पिट में बनने वाली गैस को मिट्टी सोख लेती है|

27. लीच पिट में बनने वाली जैविक खाद में क्या-क्या गुण होते हैं?

  • मानव मल से बनने वाली खाद को सोना खाद कहा जाता है| ये बहुत गुणकारी खाद होती है| इस खाद में पो पोटैशियम, नाइट्रोजन और फ़ोस्फोरस की मात्रा बहुत होती है| आम तौर पर ये समझा जा सकता है कि 1 बोरी सोना खाद 12 बोरी यूरिया खाद की ताकत रखती है|

28. ये खाद कितने दिनों में तैयार हो जाती है?

  • पिट के भर जाने के बाद पिट को पूरी तरह बंद कर देते हैं| उसके 1 वर्ष के पश्चात् सोना खाद तैयार हो जाती है|

29. क्या लीच पिट से बाहर ओवर-लो का पानी निकलता है?

  • नहीं, लीच-पिट से किसी किस्म का कोई पानी बाहर नहीं निकलता क्योंकि वह पानी मिट्टी द्वारा सोख लिया जाता है|

30. क्या लीच पिट से जमींन के पानी के ख़राब होने का खतरा होता है?

  • लीच पिट आदर्श माप के साथ बनाया जाये तो जमीन के नीचे के पानी को लीच-पिट से कोई खतरा नहीं है|

31. क्या लीच पिट वाला शौचालय हमारे बजट में तैयार हो सकता है?

  • लीच पिट वाला शौचालय में भी बन सकता है|

32.लीच पिट की पेयजल स्रोत से कितनी दूरी होनी चाहिए?

  • लीच पिट को पेयजल स्रोत से कम से कम 10 मीटर की दूरी पर होना चाहिए|
  • यदि ये किन्हीं कारणों से सम्भव नहीं हो पाता तो जिस ओर पेयजल स्रोत है उस ओर की दीवार को पक्का पलस्तर कर देना चाहिए|

33.लीच पिट जब हर जाए तब क्या करना चाहिए?

  • जब लीच पिट का 1 गड्ढा भर जाता है तो उससे कम से कम 1 मीटर की दूरी पर दूसरा गड्ढा कर लेना होता है और जंक्शन चैम्बर से पाइप को दूसरे गड्ढे में जोड़ दिया जाता है| पहले गड्ढे को कम से कम से 1 वर्ष के लिए बंद कर दिया जाता है|

34.सेफ्टिकटैंक और लीच पिट में से कौन सी तकनीक बेहतर है?

  • लीच पिट तकनीक बेहतर है क्योंकि -

लीच-पिट तकनीक का शौचालय

सेफ्टिकटैंक तकनीक का शौचालय

कम जगह लगती है

अधिक जगह लगती है

कम पानी लगता है

अधिक पानी लगता है

सरल तकनीक है

कठिन तकनीक है

बजट अनुसार बनाया जा सकता है

अधिक खर्च आता है

अधिक से अधिक दो दिन में बन जाता है

कम से कम 1 माह का समय लगता है

जैविक खाद तैयार की जाता है

कुछ भी नहीं किया जा सकता

खाली करना बहुत आसान है| स्वयं खाली किया जा सकता है

बाहर से मशीन द्वारा ही सम्भव है

पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होता|

पर्यावरण के लिए हानिकारक है

वेंट पाइप की जरुरत नहीं होती

वेंट पाइप जरुरी होता है|

ओवर लो या बदबू की शिकायत नहीं होती है

ओवर लो या बदबू की शिकायत होती है

 

35. लीच पिट को कैसे खाली करना चाहिए?

  • लीच पिट जब भर जाए तो उसके ऊपर थोड़ी मिट्टी डालकर उस गड्ढे को अच्छी तरह से बंद कर देना चाहिए| उसके उपरांत 1 वर्ष के बाद गड्ढे को खोलना चाहिए| इस समय तक मल पूर्णतः खाद में परिवर्तित हो जाता है और भूरी फुसफुसी मिट्टी जैसा प्रतीत होता है|

36.अलग-अलग संसाधनों से बनाये गये लीच पिट में कितना खर्च आता होगा?

इस्तेमाल किये जा रहे संसाधनों के स्थानीय बाजार में उपलब्धता और भाव पर खर्च निर्भर करता है|

लीच पिट को कई प्रकार से बनाया जा सकता है जैसे

  1. चित्र 1 के अनुसार बिना किसी लाइनिंग वाला लीच पिट

इस प्रकार के पिट को तैयार करने में कोई भी सामग्री नहीं लगती है| ये पिट 2 वर्षों के लिए प्रर्याप्त है|

  1. चित्र 2 के अनुसार बांस की लाइनिंग वाला लीच पिट

इस तरह के पिट को तैयार करने में बांस, लोहे के पतले तार, लोहे की कील एवं अलकतरा के लियो आदि की जरुरत होगी| ये पिट 4 से पांच वर्षों के लिए प्रर्याप्त है| इसकी लागत का अनुमान आप निम्न सारणी अनुसार स्वंय लगा सकते हैं-

क्रमांक

सामग्री

मात्रा

राशि

1

बांस

1 नग

 

2

लोहे का पतला तार

10 मीटर

 

3

लोहे की कील

100 ग्राम

 

4

अलकतरा का लेप

200 ग्राम

 

  1. चित्र 3 के अनुसार लोहे के ड्रम की लाइनिंग वाला लीच पिट

इस प्रकार के पिट को तैयार करने में किसी भी पुराने लोहे के ड्रम या अलकतरे के ड्रम का उपयोग किया जा सकता है| ये पिट भी 3 से 4 वर्षों तक पर्याप्त है| eskeskiइसकी laglagtलागत का अनुमान आप निम्नानुसार स्वयं लगा सकते हैं-

क्रमांक

सामग्री

मात्रा

राशि

1

लोहे का पुराना ड्रम

1

नग

 

4.चित्र 4 के अनुसार पत्थर की लाइनिंग वाला लीच पिट

इस प्रकार के पिट को तैयार करने में बड़े आकर के पत्थरों, सीमेंट और बालू  की आवश्यकता होती है| ये पिट बहुत वर्षों तक पर्याप्त है| इसकी लगात का अनुमान आप निम्नानुसार स्वयं लगा सकते हैं

क्रमांक

सामग्री

मात्रा

राशि

1

पत्थर

1/2 ट्रोली

 

2

सीमेंट

1 बोरी

 

3

बालू

10    बोरी

 

 

5.चित्र 5 के अनुसार ईंट की लाइनिंग वाला लीच पिट

इस प्रकार के पिट को तैयार करने में बड़े आकर के पत्थरों, सीमेंट और बालू की आवश्यकता होती है| ये पिट बहुत वर्षों तक पर्याप्त है| सामान्य मिट्टी में इस प्रकार के लीच पिट को तैयार करने में नीचे से पहली दो हफ्तों में और ऊपर से पहली दो परतों में कोई छिद्र नहीं छोड़े जाते| शेष परतों में 2 इंच के छिद्र छोड़े जाते हैं| इस तरह एक परत में 7 से 8 छिद्र आते हैं| छिद्रों को छोड़ते समय ये ध्यान रखना चाहिए कि छिद्र के ऊपर दूसरा छिद्र ना आये| गड्ढे का माप 1X1X1  मीटर का होता है|

यदि काली मिट्टी हो तो हर एक परत के बाद दूसरी परत पर छिद्र परत पर छिद्र छोड़े जाते हैं| इसकी लागत का अनुमान आप निम्नानुसार स्वयं लगा सकते है-

क्रमांक

सामग्री

मात्रा

राशि

1

ईंट

175

 

2

पत्थर

1 बोरी

 

3

सीमेंट

20 बोरी

 

4

बालू

10    बोरी

 

 

6. चित्र 6 के अनुसार सीमेंट कंक्रीट की रिंग की  लाइनिंग वाला लीच पिट

इस प्रकार का पिट सभी प्रकार के मिट्टी के लिए उपयुक्त है और मजबूत भी होता| इसकी लागत का अनुमान आप निम्नानुसार स्वयं लगा सकते है-

क्रमांक

सामग्री

मात्रा

राशि

1

पत्थर

2 ट्रोली

 

2

सीमेंट

30 बोरी

 

3

बालू

20बोरी

 

 

37.शौचालय में ग्रामीण सीट लगाने से क्या फायदा है?

ग्रामीण सीट का ढाल अधिक होता है (लगभग 35’’ से 45’’) जिसके कारण

  • शौच क्रिया में पानी कम लगता है
  • शौच सीट से आसानी से फिसल जाता है|

38. ये ग्रामीण सीट कहाँ से प्राप्त हो सकती है?

  • ग्रामीण सीट जनपद स्टार एवं ग्राम पचायत स्तर पर प्राप्त की जा सकती है|

39. ये ग्रामीण सीट कितने दामों में आती है?

  • इन ग्रामीण सीट की कीमत 200/-से 250/- रूपये के बीच होती है|

40. ग्रामीण सीट के साथ लगने वाले मुर्गे में क्या विशेषताएं होती हैं?

  • मुर्गे में २० मी.मी, का जालबंद होता है जिससे बदबू नहीं आती|
  • शौचालय में वेंट पाइप लगाने की जरुरत नहीं होती है|
  • जगह के अनुसार सीट को मुर्गे की मदद से किसी भी ओर लगाया जा सकता है|

41. क्या जंक्शन चैबर बनाना चाहिए?

  • जंक्शन चैबर का शौचालय के साथ होना बहुत आवश्यक है क्योंकि-
  • शौचालय के जाम होने की दशा में जंक्शन चैबर को आसानी से खोलकर साफ किया जा सकता है|
  • एक पिट के भर जाने की दशा में आसानी से पाइप को दूसरे पिट के साथ जोड़ा जा सकता है|

42. जंक्शन चैबर का आकार कैसा होना चाहिए?

  • जंक्शन चैबर को अंग्रेजी के अक्षर “Y”  आकर का होना चाहिए एवं अंदर से चिकना होना चाहिए|

43. जंक्शन चैबर से जुड़कर लीच पिट के गड्ढे तक जाने वाली पाइप का माप क्या होना चाहिए?

  • जंक्शन चैबर से जुड़कर लीच पिट के गड्ढे तक जाने वाली पाइप का माप 100 एम.एम. या 4 इंच का होना चाहिए|

44. पाइप का ढाल कितना होना चाहिए?

  • पाइप का ढाल 1 फुट पर 2 इंच के अनुसार होना चाहिए|

45. पाइप को गड्ढे के कितने अदंर तक ले जाना चाहिए?

  • पाइप को गड्ढे के अदंर 4 से 6 इंच तक ले जाना चाहिए ताकि मल गड्ढे के बीच में ही गिरे और गड्ढा पूरी तरह से चारों ओर से बराबर भरे|

46. बरसात/वर्षा का जल गड्ढे के अंदर ना पहुंचे, इसके लिए क्या करना चाहिए?

  • बरसात/वर्षा का जल गड्ढे के अंदर ना पहुंचे, इसके लिए गड्ढे को जमीन  से 6 ईंच ऊपर उठाना चाहिए और गड्ढे को ठीक तरह से सील करना चाहिए

47. प्लेटफार्म/प्लिंथ के लिए कितनी खुदाई करनी चाहिए?

  • प्लेटफार्म के लिए कम से कम 1 फुट X 1  फुट चौड़ी और गहरी खुदाई करनी चाहिए|
  • भूमितल से 1 फुट ऊपर तक जुड़ाई चारों ओर की जाए और फिर कमरे की दीवार कम से कम 5 फुट से 10 इंच तक उठाया जाए|

48. शौचालय में कदमदान/पांवदान/ कदमचे को जमाते समय क्या सावधानियां रखनी चाहिए?

  • शौचालय में कदमदान को जमाते समय निम्नलिखित सावधानियां रखनी चाहिए?-
    • कदमदान का ही उपयोग करें| एनी किसी वैकल्पिक व्यवस्था जैसे ईंट या कुछ वस्तुओं को ना लगाएं|
    • कदमदान को सीट के अगले और पिछले भाग से समान दूरी पर रखना चाहिए||
    • कदमदान को सीट से थोड़ा तिरछा रखकर जमाना चाहिए|

49. शौचालय का कमरा कैसा बनाना चाहिए?

  • शौचालय का कमरा अपनी सुविधानुसार बनाना चाहिए| सुविधा को ध्यान में रखकर लम्बाई, चौड़ाई तय करें| सुविधा एवं साधन हो तो कमरे में पानी की टंकी, नल कनेक्शन और टाइल्स आदि लगाएँ|

50. क्या शौचालय का कमरा ईंट के आलावा अन्य साधनों से भी बनाया जा सकता है? जाता है| बांस, लकड़ी, चटाई, पत्थर, टीन आदि से बन जाता है|

  • शौचालय का कमरा ईंट के आलावा अन्य साधनों से भी बनाया जाता है| बांस, लकड़ी, चटाई, पत्थर, टीन आदि से बन जाता है|

51. ग्रामीण शौचालय के सबसे सामान्य प्रकार कौन-कौन से है?

  • ग्रामीण शौचालय सामान्यतः दो प्रकार से बनाया जा सकता है:-

गड्ढे के ऊपर शौचालय

इस तरह के शौचालयों में गड्ढे के ऊपर ही सीट और मुर्गे को फिट किया जाता है| यह उन घरों के लिए उपयोगी है जहाँ की कमी हो| इन शौचालयों के साथ तब परेशानी आती है जब पिट भर जाता है| इससे सीट और शौचालय के कमरे को हटाना पड़ता है नये सिरे से शौचालय निर्माण करना होता है तथा पहले वाले पिट को खाद बनने के लिए सील करना होता है| इस प्रकार के शौचालय उयोग करने वाले लोगों के लिए ये ठीक नहीं होगा कि होगा कि पक्का कमरा बनाएं|

 

गड्ढे से हटकर शौचालय

इस प्रकार के शौचालयों में एक या दो पिट बनाएं जा सकते हैं| दूसरा पिट कुछ वर्षों के बाद भी बन सकता है, लेकिन दूसरे पिट के लिए हमेशा जगह की गुंजाइश छोड़नी चाहिए| जंक्शन चैबर अनिवार्यतः बनना चाहिए| इसमें सीट और मुर्गे को गड्ढे से हटकर बनाया जाता है और सुविधायुक्त शौच के कमरे का निर्माण होता है| सीट और मुर्गे को जंक्शन चैबर के द्वारा पाइप के माध्यम से पिट से जोड़ा जाता है| दोनों पिट के बीच कम से कम 1 मीटर का अंतर होना चाहिए ताकि पहले पिट के भर जाने के उपरांत जब उसमें खाद बनने की प्रक्रिया चल रही हो तो  दूसरे पिट की नमी पहले पिट में ना पहुँच पाए|

52. अलग-अलग साधनों से बनाए गए शौचालय के कमरों की क्या कीमत होगी?

  • इस्तेमाल किये जा रहे संसाधनों के स्थानीय बाजार में उपलब्धता और भाव पर खर्च निर्भर करता है|

53. क्या शौचालय में नल लगाया जा सकता है?

  • हाँ, शौचालय में नल लगाया जा सकता है|

54. क्या लीच-पिट शौचालय में फ्लश सिस्टम लगाया जा सकता है?

  • हाँ, शौचालय में फ्लश सिस्टम लगाया जा सकता है|

55. क्या लीच-पिट शौचालय को शहरी शौचालय की तरह सुंदर और सुविधापूर्ण बना सकते हैं?

  • हाँ, लीच-पिट शौचालय भी  शहरी शौचालय की तरह  सुविधापूर्ण बनते हैं|

56. लीच-पिट शौचालय की साफ-सफाई कैसे रखी जाए?

  • लीच-पिट शौचालय की साफ-सफाई रखते समय ध्यान दें कि-
  • शौच करने से पहले सीट पर थोड़ा पानी दाल दें ताकि सीट पर टट्टी ना चिपके|
  • रोज सादे पानी एवं ब्रश से साफ करें|
  • राख से ग्रामीण सीट को साफ रखें|

57. लीच-पिट शौचालय की साफ-सफाई के लिए एसिड का प्रयोग क्यों नहीं करना चाहिए?

  • लीच-पिट शौचालय की साफ-सफाई के लिए एसिड का प्रयोग क्यों नहीं करना चाहिए क्योंकि एसिड के प्रयोग से खाद बनाने वाले कीड़े मर जाते हैं|

58. शौचालय के साथ-साथ और क्या सुविधा होनी चाहिए?

  • शौचालय के साथ-साथ हाथ धोने की व्यवस्था और नहाने का कक्ष होना चाहिए|

59. शौच के बाद साबुन से हाथों को धोना क्यों आवश्यक है?

  • शौच के बाद हाथों को साबुन से धोना इसलिए आवश्यक है क्योंकि शौच साफ करने के बाद शौच के कीटाणु हाथों में रह ना जाएँ|

60. हाथ होने के सही चरण-

 

स्रोत:- पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, झारखण्ड, राँची|



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