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वृहत बहुधंधी सहयोग समिति (लैम्पस) लिमिटेड की उप- विधियाँ

वृहत बहुधंधी सहयोग समिति (लैम्पस) लिमिटेड की उप- विधियाँ

नाम और पता

यह समिति जिसकी रजिस्ट्री विहार एंड ओडिसा को-ऑपरेटिव सोसाइटीज ऐक्ट सन १९३५ के एक्ट -६ के अन्तर्गत हुई है।....................................बहुधंधी सहयोग समिति  (लैम्पस) लिमिटेड कहलायेगी और इसका रजिस्टर्ड पता ग्राम ........................पो. आं..................अंचल....................थाना..............  सबडीबीजन.........जिला .........होगा। अगर इसके रजिस्टर्ड पता में किसी प्रकार का परिवर्तन किया जायेगा तो इसकी सूचना १५ दिनों के भीतर निबंधक, सहयोग समितियाँ, झारखण्ड, रांची को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड, रांची और उप प्रबंधक बैंक को दे दी जायेगी।

उद्देश्य

इस समिति के उद्देश्य निम्नलिखित होंगे –

१. सदस्यों में मितव्ययिता, अपनी मदद आप करने और दूसरे कि मदद करने कि भावना को प्रोत्साहित देना तथा इसके लिए योजनाएँ बनाना और उन्हें कार्यानिव्त करना।

२. उन्नत ढंग कि खेती करने के लिए सदस्यों को प्रोत्साहन देना तथा इसके लिये आश्यक साधनों को जुटाना।

३. सदस्यों के बीच सहकारी संयुक्त खेती को बढ़ाना।

४. सदस्यों को अल्पकालीन,मध्यकालीन तथा उपभोग ऋण देना।

५. सदस्यों को कृषि संबंधी आवश्यकताओं जैसे – बीज, खाद, उर्वरक, यंत्रहल, कितानुनाशक औषधियाँ इत्यदि एवं ग्राम उद्योग तथा कुटीर उद्योग और दैनिक आवश्यकताओं  की वस्तुओं तथा साधनों को प्राप्त करना एवं वितरण करना।

६. ग्राम उद्योग या गृह उद्योग के आधार पर सदस्यों के ग्राम औद्दोगिक कार्यों की संगठित करना तथा सहायता देना।

७. (क) सदस्यों के सभी प्रकार की कृषि उपज, ग्राम उद्योग, कुटीर उद्योग तथा छोटे वनोत्पन्न वस्तुओ को उचित मूल्य पर बिक्री करने का प्रबंध कराना।

(ख) सदस्यों को अपनी पैदावर का वर्गीकरण, परिष्करण (प्रोसेसिंग) तथा यातायात की सुविधाएँ प्रदान करना।

८. सदस्यों की खेती की उत्पादन योजना तैयार करना और उसको उचित रूप से कार्यानिवत करने के लिए आवश्यक करवाई करना।

९. सदस्यों की पैदावार तथा अन्य सामग्री को सुरक्षित रखने के लिये निजी गोदाम प्राप्त करना, बनवाना या किराये पर लेना।

१०. उन्नतशील बीज का उत्पादन बढ़ाने के लिये सदस्यों को आवश्यक सहायता देना।

११. समिति के कार्यक्षेत्र में कम्पोस्ट तथा हरी खाद बनवाने का अलग-अलग तथा सामूहिक प्रबंध करना।

१२. सदस्यों की आवश्यकतानुसार उन्हें कृषि यंत्र आदि किराये पर देने के लिये व्यवस्था करना।

१३. उन्नतशील सांड, बकरी, मुर्गी आदि द्वारा सदस्यों के पशुओं का नस्ल सुधारने की व्यवस्था करना।

१४. किसी भी सहकारी संस्था के उप-एजेंट के रूप में अथवा अन्य प्रकार से बीज वितरण और उसकी वसूली का कार्य करना।

१५. सदस्यों की कृषि उन्नति के लिये सिंचाई के साधनों तथा भूमि संरक्षण की व्यवस्था करना।

१६. सहकारी भू-विकास बैंक के एजेन्ट के रूप में दीर्घकालीन ऋण वितरण एवं वसूली का कार्य करना।

१७. धान से चावल निकालने का हालर, आटा-चक्की, तेल घानी, बिनौला पेरने की घानियाँ, जिन प्रक्रिया यंत्र का ट्रैक्टर, यांत्रिक हल, पम्प आदि सदस्यों को लाभार्थ स्वयं खरीदना अथवा किराये पर लेना।

१८. बीज भंडार स्थापित करना तथा उसे चलाना।

१९. वैज्ञानिक ढंग से मछली पालन को प्रोत्साहन देना तथा मछली पालन एवं संग्रह के लिये तालाब प्राप्त करना, खरीदना,पट्टे पर लेना और ऐसी मछलियों की बिक्री की व्यवस्था करना।

२०. दूध और दूध से बने पदार्थ की बिक्री का प्रबंध करना।

२१. कुकुट एवं उनसे उत्पादित वस्तुओं की बिक्री का प्रबंध करना।

२२. कार्यक्षेत्र की भीतर प्रवीण और अप्रवीण काम को ठीका या दूसरे तरह से लेना।

२३. सदस्यों के तथा उनके परिवार के सदस्य की रक्षा के प्रबंध में सहायता करना।

२४. सदस्यों के तथा उनके परिवार को शैक्षिक व्यवस्था की स्थापना एवं कायम रखने में मदद करना।

२५. सदस्यों के हितों को प्रभावित करने वाली समस्त समस्याओं की सहकारी रीति द्वारा निबटाना तथा लोगों को सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान के लिये प्रयत्न करना।

२६. ऊपर लिखे हुए उद्देश्यों की पूर्ति के लिये अपने सदस्यों, अन्य व्यक्तियों, संस्थाओं तथा सरकार की पूँजी इकठा करना।

२७. ऐसे सभी कार्य करना जिससे ऊपर लिखे हुए उद्देश्यों की पूर्ति में सहायता मिले।

२८. सभी उद्देश्यों की पूर्ति के लिये कार्यक्षेत्र के अन्तर्गत विशिष्ट स्थानों में शाखाएँ खोलना।

कार्यक्षेत्र

इस समिति का कार्यक्षेत्र निम्नलिखित ग्राम .............................................................................................. में सीमित होगा।

 

४. इस समिति का संबंध को-ऑपरेटिव बैंक एवं निबंधक की अनुमति से अन्य  संस्थाओं में रहेगा।  समय-समय पर निबंधक द्वारा प्रसारित अनुदेशों के अनुसार या अपने वसूल किये गये हिस्से की पूँजी कर ५ प्रतिशत (जो दोनों में कम हो) सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के हिस्से में लगाएँगे।

सदस्यता

सदस्यता प्रत्येक प्रत्येक व्यक्रि को जिसका चाल-चलन अच्छा हो, जिसका दिमाग ठीक हो, जो १८ वर्ष से अधिक उम्र वाला हो और जो समिति के कार्यक्षेत्र में रहता हो या स्थाई रूप से वहाँ व्यापार या कारबार करता हो या जमीन मालिक हो या खेती करता हो, सदस्य बनाया जा सकता है। राज्य सरकार भी चाहे सीधे तौर से या स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक और सेन्ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के माध्यम से सदस्य हो सकती है।  मरे हुए सदस्यों के नावालिग़ उत्तराधिकारी भी सदस्य बन सकते हैं लेकिन उन्हें कर्ज केवल उनके अभिभावकों द्वारा ही दिया जा सकेगा। सरकार का प्रतिनिधित्व उनके द्वारा अधिकृत व्यक्ति के द्वारा होगा।

सदस्यों का प्रवेश

नीचे लिखे व्यक्ति समिति के सदस्य होंगे –

(क) योग्य व्यक्ति जिन्होंने नाम दर्ज कराने के लिये दरखास्त पर हस्ताक्षर किया है।

(ख) वे व्यक्ति को प्रबंधकारिणी कमिटि द्वारा बाद में सदस्य के रूप में चुने जायेंगे।

(ग़) वे व्यक्ति जो ऐसी समिति के भूतपूर्व  सदस्य थे जिसे इस समिति में मिला लिया गया हो।  प्रवेश चाहने वाले प्रत्येक व्यक्ति प्रबंधकारिणी कमिटि के पास छपे फार्म पर दरखास्त देंगे जो उचित जांच पड्लाल के बाद उनकी दरखास्त को कारण बताते हुए मंजूर अथवा नामंजूर करेगी।  प्रबंधकारिणी कमिटि निर्णय होने के एक पखवारे के अन्दर आवेदक को निर्णय की सूचना दे देगी। नामंजूरी की अवस्था में ऐसे व्यक्ति को निर्णय से प्राप्ती ६० दिनों के अन्दर निबंधक सहयोग समितियाँ के समक्ष अपील करने का अधिकार होगा, जिनका निर्णय अंतिम होगा।

२. कोई व्यक्ति समिति के सदस्य होने योग्य नहीं होगा, यदि.............

(क) वह अठारह वर्ष की उम्र का न हो ।

(ख) वह समिति अथवा संबंध करनेवाली समिति का वेतनभोगी कर्मचारी है।

(ग़) वह पागल है।

(घ)  उसने दिवालिया या शोधनाक्ष्म (इनशोलमेंट) न्याय निर्णित होने के लिये आवेदन किया है या वह प्रमाणित दिवालिया या अनुत्मुक्त शोधनाक्ष्म (अनदिस्यर्द इनसोलमेंट) है।

(ड.) उसे राजीतिक अपराध को छोड़कर कोई दूसरे अपराध के लिए सजा हुई हो अथवा ऐसे अपराध के लिये सजा हुई हो जो नैतिक आचरण को अन्तग्रस्त करती हो और वह सजा रद्द नहीं की गई हो या ऐसे अपराध क्षमा नहीं कर दिया गया हो।  वह अयोग्यता सजा की समाप्ति से ५ वर्षों से अधिक तक लागू नहीं होगी।

७. सदस्य होने के पहले प्रत्येक व्यक्ति को छपे हुए फार्म में लिखे इस आशय के इकरारनामें पर हस्ताक्षर करना होगा कि वह समिति कि वर्तमान उपविधियों तथा ऐसे नियमों कि पाबन्दी रखेगा।  जिसे प्रबंधकारिणी कमिटि आम सभा कि अनुमति से बनायेगी।  वह व्यक्ति जो पहले ही से इसलिये सदस्य है कि उसने रजिस्ट्री कि दरखास्त पर हस्ताक्षर किया है, उसको इस प्रकार के इकरारनामें पर हस्ताक्षर करना होगा।  अगर वह समिति कि रजिस्ट्री होने के एक महीने के भीतर ऐसे इकरारनामें पर हस्ताक्षर करने से इंकार करे तो उसे सदस्यता से निकाला जा सकेगा।  बशर्ते बशर्ते कि वह निकले जाने के बाद प्रबंधकारिणी कमिटि द्वारा निर्धारित जुर्मना कि रकम को दे दे तो उसे सदस्यता में पुन: भर्ती किया जा सकता है।

८. प्रत्येक सदस्य के लिये यह जरूरी होगा कि जब कभी जरूरत हो अपनी पूँजी और जिम्मेदारी का पूर्ण एवं सही बयान समिति को दे और यदि बयान नहीं दे या कर्ज को छिपाकर समिति से कर्ज लेने के लिये दोषी पाया जाय तो उन पर ५० रु. तक जुर्मना किया जा सकरा है या सदस्यता से निकाल दिया जा सकता है।

सदस्यता का अधिकार

प्रत्येक सदस्य को एक रुपये प्रवेश शुल्क देना होगा।  किसी भी सदस्य को उपविधि-७ के अनुसार इकरारनामें पर हस्ताक्षर किये, प्रवेश शुल्क दिये, कम से कम एक हिस्सा खरीदे और उसकी पूरी रकम किस्तों में जिन्हें प्रबंधकारिणी कमिटि निर्धारित की है हिस्से की पहली मांग दिये बिना सदस्यता का अधिकार प्राप्त नहीं होगा।  यह उपविधि राज्य सरकार पर लागू नहीं होगी।

नामजद करना

समिति का कोई भी सदस्य अपने हाथ से लिखकर किसी ऐसे आदमी को नामजद (समिति के कर्मचारी का आफिसर को छोड़कर) कर सकता है जिसेउसकी मृत्यु के बाद में समिति से पावना दिया जा सके।

सदस्यता से हटना

कोई भी सदस्य जिसके जिम्में समिति का कोई कर्ज न हो और जो एक साल तक सदस्य रह चुका हो प्रबंधकारिणी कमिटि को तीन महीने की सूचना देकर सदस्यता से हट सकता है।  परन्तु इस तरह अलग होने से वह उस जिम्मेदारी से बरी नहीं हो सकता है, जिसका उसने पहले इकरार किया है।

सदस्यों को निकाला जाना

(१) प्रबंधकारिणी कमिटी खुले जाँच पड़ताल के बाद किसी सदस्य को नीचे लिखे कारणों से निलंबित कर सकती है या हटा सकती है :-

(क) समिति की उपविधियों या नियमों हको विशेष रूप से उल्लंघन करने पर।

(ख) उचित सूचना पाने पर भी समिति का ऋण न देने पर।

(ग़) किसी ऐसे व्यवहार पर जिससे समिति की आर्थिक हालत कमजोर हो सकती है या बदनामी हो सकती है।

२. प्रबंधकारिणी कमिटी द्वारा हटाये गये सदस्य को हटाये जाने की आज्ञा प्राप्त होने की तारीख से तीन महीने के अन्दर तक आम सभा में अपील करने का अधिकार होगा। अपील आगामी आम सभा के लिये अध्यक्ष के द्वारा रखी जायेगी।

सदस्यता की समाप्ति

नीचे लिखे कारणों से सदस्यता की समाप्ति होगी –

(१) कम से कम एक हिस्सा नहीं रखने पर, या

(२) समिति के कार्यक्षेत्र से अपने परिवार को हटा लेने और सदस्यता की योग्यता खो देने पर, या

(३) उपविधि ११ की धाराओं की अनुसार प्रबंधकारिणी कमिटी को तीन महीने की सूचना देकर हट जाने पर, या

(४) उपविधि १२ के अनुसार हटाये जाने पर, या

(५) मर जाने पर, या

(६) किसी अधिकारी प्राप्त न्यायालय द्वारा दिवालिया अथवा पागल करार किये जाने पर, या

(७) समिति का वेतनभोगी कर्मचारी होने पर, या

(८) रूल्स एवं एक्ट के अन्तर्गत बने नियमों के अनुसार अयोग्य हो जाने पर।

कोष

समिति का कोष निम्नलिखित स्रोतों से इकट्ठा किया जा सकता है:

(क) हिस्सा पूँजी।

(ख) अर्थ बैंक से कर्ज लेकर और रजिस्ट्रार को-ऑपरेटिव सोसैइतिज, झारखण्ड और राज्य सहकारी अधिकोष के आदेश और निर्देशन के अन्तर्गत जमा लेकर।

(ग़) सरकार और दूसरे जरियों जैसे रिजर्व बैंक इण्डिया, राष्ट्रीय सहयोग विकास निगम, आदिमजाति विकास एजेंसी आदि से प्राप्त आर्थिक सहायता अनुदान या दान से।

(घ) सुरक्षित कोष एवं अन्य कोष, तथा

(ड.) सदस्यों से अपनी इच्छा से नगद समान या श्रम के रूप में मिले हुए अनुदान से।

कर्ज लेने की सीमा

कर्ज एवं जमा पर समिति को पूर्ण वाह्य दें उसकी वसूल की हुई हिस्सा पूँजी एवं सुरक्षित कोष (रिसर्व फंड) के पन्द्रह गुणों से अधिक नहीं होगी।  किन्तु यह सीमा निबंधक, सहयोग समितियों की अनुमति से बढाई जा सकती है।

कोष की अभिरक्षा

निबंधक, सहयोग समितियों द्वारा प्रशासित आदेशों के अन्तर्गत प्रबंधकारिणी कमिटी द्वारा निर्धारित नियमों के अधीन सदस्य सचिव के पास सिमिति कोष रहेगा।

कोष को काम में लगाना

कारबार में नहीं लगाये गये समिति के कोष को निम्नलिखित रूप में जमा किया जा सकता है :

(क) पोस्टल सेविंग बैंक में या सेन्ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक में।

(ख) इंडियन ट्रस्ट एक्ट की धारा -२० में विशेष रूप से किसी भी को-ऑपरेटिव बैंक या समिति के हिस्से में।

(ग़) कनवेधक, सहयोग समितियाँ की पूर्व स्वीकृति से किसी भी को-ऑपरेटिव बैंक या समिति के हिस्से में।

(घ) निबंधक, सहयोग समितियों की आज्ञा से किसी अन्य रूप में।

हिस्सा

समिति की अधिकृत हिस्सा पूँजी ......हिस्सों की होगी।  प्रत्येक हिस्सा का मूल्य १० (दस) रुपये होंगे।  सदस्य को हिस्से की कीमत प्रबंधकारिणी कमिटी द्वारा निश्चित रूप से एक मुस्त या किस्तों में देनी पड़ेगी।

प्रबंधकारिणी कमिटी किश्तों को अदा करने के लिय समय की बढ़ोतरी कर सकती है।  कोई भी सदस्य बेचे गये हिस्से के १/५ से अधिक अथवा एक हजार रुपये दोनों में जो कम हो, के हिस्से को नहीं खरीद सकता है। यह प्रतिबंध राज्य सरकार के लिये नहीं है।

१९. आम-सभा के पूर्व स्वीकृति के बिना प्रबंधकारिणी कमिटी के सदस्य को उपविधि १८ के अनुसार समय नहीं बढ़ाया जायेगा।

हिस्से का प्रमाण-पत्र

प्रत्येक सदस्य को समिति का मोहर लगा हुआ एक प्रमाण पत्र प्राप्त करने का अधिकार होगा। जिसमें उनके खरीदे हुए हिस्से का विशेष रूप से वर्णन रहेगा।  यदि प्रमाण-पत्र खो जाये या नष्ट हो जाये या फट जाये तो एक रु. शुल्क देने पर फिर से प्रमाण-पत्र दिया जायेगा।

जिन सदस्यों के जिम्में हिस्से की किस्तों का रु. बाकि होगा वे आम-सभा या प्रबंधकारिणी कमिटी की सभा में वोट देने के अधिकारी नहीं होंगे, उन्हें कर्ज नहीं दिया जायेगा तथा ये खरीद बिक्री के कार्यों में भाग नहीं ले सकेंगे।  दी गई तीन महीने की सूचना के अन्दर यदि कोई सदस्य किस्त नहीं चुकायेगा तो उसे समिति से निकाल दिया जायेगा और हिस्से की मद में किये गये भुगतान जब्त कर लिए जायेंगे और वह रकम रक्षित कोष (रिजर्व फण्ड) में मिला दी जायेगी।  वे  सदस्य जो दूसरे वर्षों के भुगतान में लगातार तीन महीने देर करेंगे उन्हें समिति से निकाल दिया जायेगा।  यदि प्रबंधकारिणी कमिटी समय की बढ़ती न दे।

हिस्सों का स्थानान्तरण या वापसी

कोई भी सदस्य तबतक अपना हिस्सा स्थानान्तरित नहीं कर सकता है जबतक कि –

१. वह कम से कम ऐसे हिस्से का एक वर्ष तक मालिक न रहा हो, तथा

२. जिस व्यक्ति को स्थानातरण करना हो वह प्रबंधकारिणी कमिटी द्वारा स्वीकृत नहीं हो।

(ख) उपविधि – १३ के अन्तर्गत सदस्यता कि समाप्ति होने पर सदस्य का हिस्सा या हिस्से का विस्तार बिहार एवं उडीसा को-ऑपरेटिव सोसाइटी एक्ट १९३५ के (६) कि २४ वीं धारा तथा उसके अन्तर्गत बने नियमों के अनुसार किया जायेगा।

उत्तरदायित्व

समिति के कार्यों के लिये सदस्य कि जिम्मेदारी उसके अपने हिस्से के नामनिदाही मूल्य के पांच गुणों तक सीमित रहेगी और यह बिहार और ओडिसा को-ऑपरेटिव सोसाइटी कानून (१९३५ के ६) कि दफा -३२ के अनुसार लागू होगी।

आम-सभा - समिति का सर्वोच्च अधिकारी पिछले ३० जून तक बने सदस्यों कि आम-सभा में निहित होगा।  आम-सभा तीन प्रकार कि होगी :-

(क) साधारण (वार्षिक)

(ख) असाधारण

(ग़) विशेष

साधारण आम-सभा : सहकारी साल के समाप्त होने के छ: महीने के भीतर प्रत्येक वर्ष साधारण वार्षिक आम-सभा कि बैठक सदस्य द्वारा बुलाई जायेगी।  ऐसी हालत में जबकि वार्षिक आम-सभा के बुलाये जाने के निश्चित तिथि पहले तक कि स्टेच्युतरी आडिट रिपोर्ट, बैलेंस शीट के साथ आडिटर के द्वारा प्रमाणित नहीं किया हो तो मुनाफे कि बात छोड़कर साधारण आम-सभा के सभी कार्य जैसा कि उपविधि २५ में दिया गया है और सभा में जो इसलिए बुलाई जाए या आगामी वार्षिक आम-सभा में होगा।

असाधारण आम-सभा : असाधारण आम-सभा प्रबंधकारिणी कमिटी के द्वारा किसी भी समय बुलाई जा सकती है या एक तिहाई सदस्यों के द्वारा आग्रह पत्र पर हस्ताक्षर करने कि तारीख से एक महीने के भीतर बुलाई जा सकती है।

विशेष आम-सभा : (१) विशेष आम-सभा निबंधक या उससे अधिकार प्राप्त अफसरों के द्वारा लिखित आग्रह पत्र देने पर समिति के प्रधान कार्यालय में आग्रह पर लिखित स्थान और समय में बुलाई जा सकती है। निबंधक अथवा उनके द्वारा अधिकृत व्यक्ति कि आज्ञा प्राप्ती के २१ दिनों के अन्दर सचिव विशेष आम-सभा बुलाने को बाध्य होंगे।  यदि सचिव विशेष आम-सभा नहीं बुलावें तो निबंधक अथवा अधिकृत व्यक्ति सदस्यों को १५ दिनों कि सूचना देकर खुद आम-सभा बुला सकते हैं।  ऐसी विशेष आम-सभा को आम-सभा के सभी अधिकार प्राप्त होंगे।

कोरम

कुल सदस्यों कि १/५ संख्या आम-सभाओं के लिये कोरम कि संख्या होगी।  यदि सभा असाधारण आम-सभा रहे तो समिति के १/५ सदस्यों कि मांग पर बुलाई गई हो और कोरम कि संख्या निश्चित समय के एक घंटा के अन्दर पूरी न हो सके तो अध्यक्ष उसे विघटित कर देंगे।  यदि एक साधारण आम-सभा या विशेष आम-सभा है तो वह उसे कम से कम ७ दिनों और अधिक से अधिक २१ दिनों तक स्थगित कर देंगे।  इस प्रकार कि स्थगित सभाओं के सभी कार्यक्रम वे ही रहेंगे जो पहली सभा के होंगे और उनमें कोई हेर-फेर नहीं किया जायेगा।  अगर इस प्रकार कि स्थगित सभा में भी कोरम कि संख्या पूरी न हो तो कोई भी प्रस्ताव उपस्थित सदस्यों के तीन चौथाई संख्या के पास होगा।

मताधिकार

समिति के प्रत्येक सदस्य का केवल एक बोट होगा। दूसरे के लिए बोट देने का अधिकार नहीं मिलेगा।  दोनों पक्षों में बराबर वोट हो जाने कि अवस्था में अध्यक्ष को एक निर्णायक वोट देने का अधिकार होगा।  सभी प्रश्नों के निर्णय के लिए बहुमत मान्य होगा।

आम-सभा के लिए सूचना

किसी भी सम-सभा के लिए १५ दिनों कि सूचना दी जायेगी।  सूचन-पत्र में सभा का समय और स्थान खास तौर से लिखा होगा।

साधारण आम-सभाओं के कार्य

आम-सभा समिति के कारबार के ऊपर और विशेष रूप से प्रबंधकारिणी कमिटी के कामों के ऊपर निगरानी रखेगी और समिति के हक में फायदेमंद होने वाले सभी कामों के करने में योग्य होगी।

आम-सभा के नीचे दिये गये कार्य होंगे

(१). सभा के लिए अध्यक्ष चुनना।

(२). उपविधि-२७ के अनुसार प्रबंधकारिणी कमिटी के सदस्यों को चुनना जो आगामी आम-सभा तक के लिए पद रहेंगे।

(३). आडिट रिपोर्ट, बैलेंस शीट और प्रबंधकारिणी कमिटी कि रिपोर्ट पर विचार करना।

(४). एक्ट, नियमों और इन उपविधियों के अनुसार नफा के बंटवारे पर विचार करना।

(५). समिति कि तरफ से प्रबंधकारिणी कमिटी द्वारा अधिक से अधिक उत्तरदायित्व प्राप्त करने कि सीमा निश्चित करना।

(६). प्रबंधकारिणी कमिटी द्वारा अनुमोदित वार्षिक आय-व्यय, लाभ हानि एवं आर्थिक चिट्टे को मंजूर करना।

(७). सदस्यों को ऋण के रूप में दिये जानेवाली रकम पर सूद कि डर निश्चित करना।

(८). जमा पर सूद कि डर निश्चित करना।

(९). बकायों पर दंड कि डर निश्चित करना।

(१०). उपविधि संख्या ६१ के अन्तर्गत उपविधि का संशोधन करना।

(११). सभा के चेयरमेन से आज्ञा लेकर अन्य कार्यों को करना।

(१२). सम्बद्ध संस्थाओं के लिए समिति का डेलीगेट का चुनाव करना।

26.  आम-सभा कि कार्यवाहियाँ: समिति के पास एक कार्यवाही पुस्तिका रहेगी।  जिसमें सभी आम-सभाओं के कार्यवाहियों को लिखा जायेगा।  कार्यवाही पुस्तिका में उपस्थित सदस्यों तथा दूसरे उपस्थित व्यक्तियों के नाम रहेंगे और उस सभा के अध्यक्ष का हस्ताक्षर रहेगा।

२७. प्रबंधकारिणी कमिटी (१) प्रबंधकारिणी कमिटी समिति कि लोक व्यवस्था के लिए उत्तरदायी होगी।

(२) मनोनीत पदेन सदस्य एवं अन्य मनोनीत सदस्यों तथा आम-सभा में चुने गये अन्य सदस्यों को मिलाकर प्रबंधकारिणी कमिटी में कुल ११ सदस्य होंगे। अध्यक्ष और मनोनीत सदस्यों कि संख्या ५ से अधिक न होगी।

(३) प्रबंधकारिणी कमिटी में कारणवश खाली होने वाली जगहों को प्रबंधकारिणी कमिटी अगले आम चुनाव तक के लिए भर सकती है।

२८. (क) यदि प्रबंधकारिणी कमिटी का निर्वाचित सदस्य समिति कि सदस्यता से हट जाय, समिति के किस्त खिलाफी होने पर अथवा लगातार तीन सभाओं में उपस्थिति न हो तो कमिटी आगामी आमचुनाव तक के लिए सदस्यों के बीच से वैसे सदस्य के बदले किसी सदस्य को नियुक्त कर लेगी।

(ख) कोई व्यक्ति प्रबंधकारिणी कमिटी का सदस्य निर्वाचित होने योग्य नहीं होगा, यदि :

(१) वह समिति का सदस्य नहीं है, अथवा

(२) वह समिति के ऋण या दूसरे तरह के पावना का उपविधियों में विहित अवधि के तीन मास से अधिक के लिए बाकीदार हो या चुनाव के दिन किसी भी दूसरी निमंत्रित समिति का किस्त खिलाफी हो, अथवा

(३) उसे प्रत्यक्ष या परोक्ष में समिति के साथ चालू ठीका या समिति द्वारा लेवी या खरीदी जाने वाली किसी जायदाद या किसी लेन-देन में समिति में धन लगाने,उससे कर्ज लेने को छोड़कर हित हो, अथवा

(४) उसके विरुद्ध अधिभार (शरर्चाज) कि कार्यवाही या समिति के किसी लेन-देन संबंधी जाँच लंबित हो।

(ग़) प्रबंधकारिणी कमिटी के निर्वाचित सदस्य कमिटी के सदस्य नहीं रह सकेंगे, यदि:

(१).वे समिति के सदस्य नहीं रह जाते हों, अथवा,

(२).उनमें उपविधि-६(२) एवं २८ (ख) में दी गई अयोग्यता में से कोई भी अयोग्यता आ जाये।

२९..(१) प्रबंधकारिणी कमिटी में मनोनीत सदस्यगण :

प्रबंधकारिणी कमिटी में निम्नलिखित मनोनीत सदस्य होंगे, जिनका मनोनयन, निबंधक, सहयोग समितियाँ, झारखण्ड, रांची द्वारा किया जायेगा –

  • जनजातीय विकास परियोजना।
  • आदिवासी विकास निगम।
  • सेन्ट्रल को-ऑपरेटिव बैंक।

उपविधि

२९ (१) (क), (ख) एवं (ग़) से कोई एक प्रतिनिधि निबंधक, सहयोग समितियाँ द्वारा समिति के अध्यक्ष पद पर मनोनीत किये जायेंगे।  इसके अतिरिक्त प्रखंड विकास पदाधिकारी कमिटी में मनोनीत सदस्य रहेंगे।  सहकारिता विभाग द्वारा समिति में प्रतिनियुक्त सहायक निबंधक, सहयोग समितियाँ समिति के सदस्य सचिव रहेंगे।

(२)प्रबंधकारिणी कमिटी के सदस्यों का निर्वाचन :

समिति के सम्पूर्ण क्षेत्र को ६ जोन में विभाजित किया जायेगा एवं प्रत्येक जोन से दस-दस निर्वाचित प्रतिनिधि आम-सभा में भाग लेंगे।  इन प्रतिनिधियों में से बहुमत प्राप्त कर सिर्फ ६ निर्वाचित सदस्य होंगे, जिनमें ४ आदिवासी एवं दो गैर आदिवासी सदस्य होंगे।  आदिवासी एवं गैर आदिवासी सदस्यों के अनुपात में कमी बेशी निबंधक, सहयोग समितियाँ, क्षेत्र विशेष कि परिस्थिति के अनुसार निर्धारित करेंगे।  नियमावली के अन्तर्गत समिति को यह अधिकार रहेगा कि निर्वाचन संबंधी नियम एवं प्रक्रिया निबंधक की स्वीकृति से तैयार करेगी।

३०. अध्यक्ष के अधिकार एवं कर्तव्य :

(क) उपस्थित रहने पर अध्यक्ष समिति की सभी तरह की बैठक का सभापतित्व करेंगे।

(ख) ये अपना, सदस्य सचिव एवं अन्य कार्यकारिणी कमिटी के सदस्यों का भ्रमण विपत्र पारित करेंगे।

(ग़) समिति के सभी कार्यों पर साधारण नियंत्रण रहेगा।

३१. प्रबंधकारिणी कमिटी की सभा जब भी आवश्यकता होगी, हो सकती है, परन्तु महीने में कम से कम एक बार अवश्य होगी।  ६ सदस्यों का कोरम होगा।  सदस्य सचिव कमिटी की सभा बुलायेंगे और यदि वे नहीं बुलायेंगे तो अध्यक्ष को कमिटी की सभा बुलाने का अधिकार होगा।

३२. अध्यक्ष या उनकी अनुपस्थिति में उपस्थित सदस्यों के द्वारा चुने गये कोई अन्य सदस्य प्रबंधकारिणी कमिटी की सभाओं में अध्यक्ष का काम करेंगे।

३३. प्रबंधकारिणी कमिटी में सभी बातें बहुमत से निश्चित की जाएँगी।  अध्यक्ष पद पर रहने वाले व्यक्ति को दोनों पक्षों में बराबर वोट होने की अवस्था में एक निर्णायक वोट देने का अधिकार होगा।  कोई उस काम के लिए वोट नहीं दे सकता है जिस काम से उनका अपना संबंध है।

३४. कमिटी के अधिकार और कर्तव्य : प्रबंधकारिणी कमिटी के नीचे लिखे कार्य होंगे :

(१) सदस्य और हिस्से की मंजूरी के लिए दी गई दरखास्त पर विचार करना।

(२) बुरे तथा ऋणी सदस्यों के हटाये जाने के प्रश्न पर विचार करना।

(३) सदस्यों के इस्तीफे पर विचार करना।

(४) कानून के नियमों और इसके उपविधियों के अनुसार विगत सदस्यों की हिस्सा-पूँजी को वापस करने पर विचार करना।

(५) समिति के सर्वांगीण विकास के लिए भिन्न-भिन्न कार्यों को समिति करना चाहे उसके लिए आवश्यकतानुसार कतिपय उपसमितियों का गठन करना।

(६) सदस्यों को दिये जाने वाले ऋण की सीमा निश्चित करना।

(७) विभिन्न फसलों के खेतों का क्षेत्रफल निर्धारित करना और फसलों के आधार पर सदस्यों के ऋण लेने की सीमा निश्चित करना।

(८) सदस्यों की फसलों की खोज-खबर लेना और उपज का अनुमान लगाना जिसे वे समिति के द्वारा बेचेंगे।

(९) समिति के द्वारा बेचे जाने वाले सदस्यों की पैदावार, सफाई, हटाया जाना, वर्गीकरण, खरीद, बोराबंदी और यातायात का प्रबंध करना।

(१०) उन उपविधियों के अनुसार सदस्यों की पैदावार पर अडवांस देना।

(११) औजार और मशीनों के खरीदने या भाड़े पर लेने का प्रबंध करना और खाद उर्वरक, बीज और दूसरी जरूरी चीजों की आपूर्ति करना।

(१२) पैदावार को ठीक से इकट्ठा करने का प्रबंध करना और व्यापारिक सूचना प्रसार करना।

(१३) सदस्यों की पैदावार को बेचने के लिए उनसे ली जाने वाली कमीशन की दर और अन्य चीजों को निश्चित करना।

(१४) समिति की तरफ से प्राप्त या अप्राप्त चुकाये गये सभी रूप से स्टोरों, स्टाक और जायदातों की प्राप्ती तथा उनका वचत का प्रबंध करना।

(१५) सदस्यों के ऋण के लिए दरखास्त लेना और सदस्यों को उचित आवश्यकता एवं जिस उद्देश्य के लिए ऋण लिया जा रहा है उसकी साख योग्यता को देखते हुए उसे मंजूर करना।

(१६) सदस्यों द्वारा लिये गये ऋण को चुकाने के लिए किस्त निश्चित करना।

(१७) समिति के कारोबार के संबंध में समिति के अफसरों द्वारा या विरोध में लगाये गये सभी दावों या वैध कार्यवाहियों को क़ानूनी रूप देना, आगे बढ़ाना, सुलह करना या त्याग देना।

(१८) निबंधक, सहयोग समिति के द्वारा समय-समय पर प्रसारित आदेशों के अनुसार वैतनिक कर्मचारियों को नियुक्त करना, निलंबित करना, दंड देना या बर्खास्त करना।

(१९) को-ऑपरेटिव डिपार्टमेंट की अफसरों एवं अर्थ प्रबंधक बैंक द्वारा समिति इंस्पेक्शन और ऑडिट नोट्स पर विचार करना।

(२०) सदस्य सचिव एवं शाखा प्रभारी के द्वारा रखे जाने वाले दैनिक कैस बैलेंस की सीमा निश्चित करना।

(२१) वार्षिक बजट स्वीकृत करना।

(२२) निबंधक, सहयोग समितियों के द्वारा प्रसारित आदेशों के अनुसार कारबार संबंधी नियमों को बनाना, अगर कमिटी निबंधक, सहयोग समितियों के द्वारा प्रसारित अवधि के भीतर कारबार संबंधी नियम बनाने से चुक जाती है तो रजिस्ट्रार स्वंय नियम बनाकर देंगे जो समिति को मानना जोग। तथा

(२३) साधारण समिति के कारबार करना।

(२४) अर्थ बैंक, राज्य सरकार एवं अन्य संस्थाओं से ऋण एवं अनुदान करने की स्वीकृति प्रदान करना।

(२५) समिति का वार्षिक आय-व्यय, लाभ-हानि, वार्षिक प्रतिवेदन, आर्थिक चिट्टे एवं आवेदन प्रतिवेदन अनुमोदित कर आम-सभा में प्रस्तुत करना।

(२६) विभागीय निदेशानुसार बैंकों में समिति का खाता खोलना एवं उससे राशि निकालने के लिये अधिकृत करना।

३५. समिति के कारबार : प्रबंधकारिणी कमिटी समिति के कारबार में साधारण व्यापारी की तरह दूरदर्शिता और तत्परता से काम लेगी। को-ऑपरेटिव सोसाइटी एक्ट के अन्तर्गत बने नियम और इन उपविधियों के विपरीत किये गये किसी भी कार्य के लिए जिससे नुकसान हो कमिटी उत्तरदायी होगी।

३६. प्रबंधकारिणी कमिटी की सभाओं, कार्यवाही पुस्तिका :

सभा में किये गये समस्त कार्य सदस्य सचिव के पास रहने वाली कार्यवाही पुस्तिका में लिखे जायेंगे और उसपर अध्यक्ष से लेकर सभा में उपस्थित कमिटी के सभी सदस्यों के द्वारा हस्ताक्षर किया जायेगा।  रुपये से संबंध रखनेवाली सभी कार्यों के प्रस्ताव पर या विषय में पड़नेवाले प्रत्येक सदस्य का मत लिखा जायेगा।

३७. सदस्य सचिव के ये अधिकार होंगे :

(क) सभी प्रबंधकारिणी कमिटी की सभाओं को बुलाना तथा उनमें उपस्थित रहना।

(ख) प्रबंधकारिणी पुस्तिका में सभी कार्यवाहियों को लिखना।

(ग़) प्रबंधकारिणी कमिटी द्वारा जो सीमा निर्धारित हो उसके अन्दर रुपया प्राप्त करना और खर्च करना।

(घ).रूल्स के अनुसार सभी हिसाब और बहियाँ रखना।

(ङ).रसीद, बाउचर, वायलेंससीट और अन्य कागजात जो समिति के कार्य सम्पादन के लिए आवश्यक हो उसे बनाना।

(च).पत्र व्यवहार करना और समिति के सदस्यों को आवश्यक सूचनाएँ देना।

(छ).प्रबंधकारिणी कमिटी के सामने ऑडिटनोट विचार हेतु रखना और ऑडिट प्रतिवेदन में दिये गये गलतियों को सुधारना।

(ज).समिति के अध्यक्ष के नियंत्रण के अन्तर्गत सभी वैतनिक कर्मचारियों के कार्यों पर निरीक्षण, निर्देशन एवं नियंत्रण रखना।

(झ).कार्यकारिणी कमिटी के निर्देशानुसार या उसके प्रतिबंध सीमा के अन्तर्गत सदस्य सचिव समिति के व्यावसायिक तथा अन्य कार्यकलापों से संबंधित (प्रीमिश्री नोट्स सहकारी एंड आदर्श सिक्कुरिती) की खरीदगी, बिक्री, विनियोग, जमानत पर रखना तथा हस्तानांतरित करने में या उन सभी कागजातों पर समिति के पक्ष से हस्ताक्षर करने से सक्षम होंगे एवं समिति के तरफ से अधिकोष दाताओं का आपरेट करेंगे एवं इसके अतिरिक्त समिति के पक्ष से सभी तरह के आमदनी प्राप्त करेंगे।

(ञ).समिति के पक्ष में सदस्य सचिव सभी तरह के बंद यंत्रों तथा अन्य दलित यंत्रों पर समिति एवं उनके पद मुहरों के साथ हस्ताक्षर करेंगे तथा समिति के पक्ष में सदस्य सचिव को ही सू एंड सूड़ किया जायगा।

(ट).हिस्से के प्रमाण पत्र पर अध्यक्ष के साथ हस्ताक्षर करना।

(ठ).प्रबंधकारिणी कमिटी द्वारा निर्धारित सीमा के अन्तर्गत आकस्मिक खर्च (कन्तिजेंट एक्सपेंडिचर) करना।

(ड).प्रबंधकारिणी कमिटी एवं अध्यक्ष द्वारा सौंपे गये अन्य कार्य करना।  सदस्य सचिव की अनुपस्थिति में प्रबंधकारिणी कमिटी सदस्य सचिव के कर्तव्यों को करने के लिए किसी अन्य चयनित को नियुक्त कर सकती है।

(ढ).किस्त खिलाफी ऋणों में से किये गये वसूली की प्रगति प्रतिवेदन तैयार करेंगी एवं उनकी समीक्षा करने के पश्चात वसूली हेतु उनके ऊपर पंचाट मुकदमा चलाने का प्रस्ताव कार्यकारिणी कमिटी के समक्ष उपस्थित करेंगे।

(ण).सदस्य सचिव सदस्यों के उस आवेदन पत्रों की समीक्षा के उपरांत अपने सिफारिशों के साथ कार्यकारिणी कमिटी या ऋण उप-समिति के समक्ष विचार एवं स्वीकृति हेतु उपस्थापित करेंगे।

३८. पदाधिकारियों को भत्ता और पारिश्रमिक : आम-सभा निवंधक, सहयोग समितियाँ की स्वीकृति से कार्यकारिणी के सदस्यों को समिति के कार्य करने के लिए भत्ता दे सकती है।

३९. ऋण –

(क) साधारण कर्ज सदस्यों को उत्पादन के कार्यों में लगाने के लिए दिया जायेगा।  अगर कर्ज वर्णित कार्यों में नहीं लगाया गया हो तो प्रबंधकारिणी कमिटी सम्पूर्ण कर्ज को वापस ले सकती है।  कर्ज केवल संयुक्त परिवार के कर्त्ता को ही दिया जायेगा

(ख) नियमावली -३९ (क) के अतिरिक्त सदस्यों को उपभोग ऋण भी दिया जायेगा।  इस ऋण की अधिकतम राशि १०० रु. विभागीय निदेशानुसार प्रति सदस्य होगी एवं उसकी वसूली सदस्यों के छोटे वनोत्पादन वस्तुओं से किया जायेगा।  जहाँ तक संभव हो उपभोग ऋण को उत्पादन ऋण सम्बंद्ध कर रखा जायेगा।

(ग़) प्रत्येक वर्ष स्वीकृत उत्पादन कर्ज सदस्यों को भुगतान करते समय ३% प्रतिशत काटकर उनके हिस्सापुंजी में जमा रखा जायेगा।  इसके अतिरिक्त समिति के माध्यम से सदस्यों द्वारा उनके छोटे वनोत्पन्न की कुल विक्रय रकम से १% प्रतिशत के दर से काटकर संबंधित सदस्य की हिस्सापुंजी खातों में जमाकर रखा जायेगा।  सदस्यों की अधिकतम ऋण सीमा उनके हिस्सापुंजी का १० गुणा होगा।

(घ) कुल वितरित ऋण ..................... प्रतिशत आदिवासी सदस्यों के लिए होगा।

४०. कर्ज देने के समय रजिस्टर को-ऑपरेटिव सोसाइटी, झारखण्ड या झारखण्ड स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक के द्वारा समय-समय पर निर्धारित नियमों का पालन किया जायेगा।

४१. दरखास्त में जिस प्रयोजन के लिए कर्ज लिया जा रहा है वह ठीक-ठीक और स्पष्ट रूप से लिखा रहेगा।

४२. कर्ज की वसूली की किस्त कर्ज मंजूर करने के समय ही किस काम के लिए कर्ज दिया जाता है उसपर विचार करते हुए निश्चित कर दी जायेगी।

४३. रजिस्ट्रार या झारखण्ड स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक द्वारा समय-समय पर प्रसारित आदेशों के अनुसार आम-सभा के द्वारा सदस्यों द्वारा लिये गये कर्ज पर सूद की दर निश्चित की जायेगी। सूद का हिसाब प्रतिवर्ष एक बार किया जायेगा।

४४. प्रबंधकारिणी कमिटी विशेष अवस्थाओं में आम तौर पर जमानतदारों के विचार से किस्त देने की अवधि को बढ़ा सकती है।

४५. आम-सभा उन सभी किश्तों पर जिनकी अवधि समाप्त हो चुकी है दण्डनीय सूद की दर लगाने की अनुमति दे सकती है वर्शार्त्ते कि सूद की दरें जिसमें दण्ड की ब्याज दर भी मिली हो वार्षिक १२/१/२% प्रतिशत से अधिक नहीं हो।

४६. प्रबंधकारिणी कमिटी सदस्यों की खेती की पैदावार, छोटे वनोत्पादन वस्तुओं तथा तैयार माल को नीचे लिखे तरीकों से बेचने का प्रबंध कर सकती है।

(क) आउटराईट पर्चेज सिस्टम -  इस तरीके के अन्दर समिति सदस्यों की पैदावार को गाँव में खरीद सकती है।  इसकी सफाई, वर्गीकरण और यातायात का प्रबंध कर सकती है और इसे अपनी जिम्मेवारी पर बेच सकती है।  व्यक्तिगत सदस्य इस प्रकार के कारबार में जो नफा या नुकसान होगा उसके भागी नहीं होंगे।

(ख) सेल और कमीशन बेसिस :  इस तरीके के अन्दर सदस्यगण अपनी पैदावार को या तो अपने या समिति के गोदामों में जमा कर सकती है।  समिति अपने पास माल का नमूना रखेगी और सदस्यों के आदेशानुसार उसे बेच देगी।  माल का माप घटने-बढ़ने से समिति को कोई तालुक नहीं रहेगा और समिति सदस्यों से कमीशन और अन्य खर्च वसूल करेगी।

(ग़) प्लेजिंग सिस्टम : इस तरीके के अन्तर्गत  सदस्यगण अपनी उपज समिति के गोदामों में रखेंगे और उसकी जमानत पर उन्हें कीमत के ७५ फीसदी या किसी कम सीमा तक, जैसा रजिस्ट्रार निर्धारित करेंगे, अग्रिम मिल सकेगा, जो पैदावार की जमानत पर किया जायेगा तथा उसकी अदायगी सदस्यों को साधारणता: देने की तारीख से छ: महीने के अन्दर करनी होगी।  किन्तु विशेष हालतों में समिति अदायगी के लिए इससे अधिक समय भी दे सकती है।  अगर किसी पैदावार की कीमत जिसे सदस्य ने बंधक रखा है १० प्रतिशत या इससे अधिक गिर जाय तो समिति सदस्यों को कुछ कर्ज वापस करने या अधिक जमानत देने के लिए बाध्य कर सकती है।  अगर सदस्य इन दोनों में से कोई भी बात न करे तो समिति को अधिकार होगा कि सदस्य को सूचना देकर रखी गई पैदावार को बेच दे।  ऐसी अवस्था में जो कीमत वसूल होगी उससे समिति कमीशन, गोदाम भाड़ा और कर्ज का रुपया सूद के साथ काट लेगी और जो रकम बेचेगी उसे सदस्य को लौटा दी जायेगी।

४७. अगर कोई सदस्य समिति से अलग कर दिया जाय तो उसे कर्ज कि शर्त पर ध्यान दिये बिना ही समिति का कुल बकाया चुका देना होगा।

४८. समिति के द्वारा किसी फसल के बेचे जाने कि अवस्था में समिति प्रत्येक सदस्य के द्वारा बोई गई फसल के खेत के क्षेत्रफल के अनुमानित उपज और समिति के द्वारा बेचे जाने वाले माल कि तायदाद के साथ एक स्टेटमेंट तैयार करेगी।

४९. किसी सदस्य कि पैदावार बेचने से जो कीमत वसूल होगी उसमें से समिति उस रकम को काट लेगी जो उसे मिलना उचित है।

५०. खरीद और बिक्री – सभी बिक्री केवल नगद में होगी एवं गैर सदस्य के हाथ भी हो सकती है।

५१. वस्तुओं के गुण या कीमत के लिए समिति के पदाधिकारी के आचरण के विरुद्ध कि गई सभी शिकायतें प्रबंधकारिणी कमिटी के सदस्य के सामने पेश कि जायेगी।

५२. निश्चित जमा -  (फिक्स डिपोजिट)- समिति रजिस्ट्रार या झारखण्ड स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक के द्वारा समय-समय पर बनाये गये नियमों के अनुसार साधारण आम-सभा द्वारा निश्चित कि गई सूद पर किस्त और सेभिंग्स बैंक डिपोजिट ले सकती है।

५३. खाता-बही और लेखा : समिति के द्वारा निम्नलिखित खाता-बही रखी जायेगी –

(क) हिस्सा खरीदने वाले सदस्यों की खाता बही।

(ख) कैश-बुक।

(ग़) कर्जा बही।

(घ)कार्यवाही पुस्तिका।

(ड.) जमा बही।

(च) सदस्यों की हैसियत बही।

(छ) सहकारिता विभाग एवं केन्द्रीय सहकारिता बैंक द्वारा समय पर विहित कि गई कोई अन्य बही।

५४. समिति कि बहियों – केवल जमा (डिपोजिट) बही को छोड़कर सर्वदा दैनिक कार्यकाल के अन्दर सदस्यों के देखने के लिए उपलब्ध हो सकेगी वर्शते कि सदस्य केवल अपने नाम की जमा को जमा बही में देख सकते हैं।

५५. उन सभी कागजातों पर जिसमें समिति पर लगाये गये चार्जो और प्रतिबंधों का वर्णन रहेगा, अध्यक्ष और सदस्य सचिव या इन दोनों में से किसी एक की अनुपस्थिति में प्रबंधकारिणी समिति के कोई एक सदस्य हस्ताक्षर करेंगे।

५६. समिति के पास एक आम मोहर होगी जो सदस्य सचिव की देख-रेख में रहेगी।

५७.प्रति वर्ष ३० जून को समिति का आर्थिक वर्ष समाप्त होगा और सूद-लाभ में से जो आडिट के द्वारा प्रमाणित होगा कम से कम ३५ प्रतिशत रक्षित कोष (रिजर्व फण्ड) में तथा रजिस्ट्रार द्वारा नियत परिणाम में अघोष ऋण कोष (बैक डेट फण्ड) में देने के बाद जो बचेगा वह निम्नलिखित प्रकार से बाँटा जायेगा :-

(क) लाभांश जो ६ प्रतिशत से अधिक नहीं होगा, हिस्सों के चुकाये गये मूल्य पर किया जाएगा।

(ख) कर्मचारियों को बोनस जो एक महीने के वेतन से अधिक नहीं होगा।

(ग़) सदस्यों द्वारा समिति से लिये गये कर्ज पर सूद में, समिति द्वारा खरीदे गये माल की कीमत में तथा समिति द्वारा बेचे गये माल की कीमत पर दी जाने वाली प्रीमियम में छुट अथवा प्रीमियम जो घोषित की जायेगी तबतक सदस्य को नहीं मिल सकेगी, जबतक कि उनके जिम्मे पहले का कुछ पावना बाकी हो।  यह रकम उसके बकाया में मिन्हा कर दी जायेगी।

(घ) इन उपविधियों के अनुसार समिति पदाधिकारी या कर्मचारी को पारिश्रमिक देना।

(ड.) रिस्क फण्ड एवं प्रैएस फिलक्चुयेशन फण्ड में।

(च) बचे हुए रुपये का अधिक से अधिक १० प्रतिशत साधारण भलाई के कोष में।

(छ) अगर शेष बचेगा तो वह अगले वर्ष के लिए रख दिया जायेगा।  हिस्सों पर लाभांश, रिवेट या प्रीमियम यदि एक वर्ष के भीतर समिति से नहीं ले लिया जाता तो ये सदस्य खाते में जमा कर दिये जायेंगे।

५८. रक्षित कोष (रिसर्व फण्ड)

(१) रक्षित कोष (रिसर्व फण्ड) इन सबों को मिलाकर बनेगा –

(क) एक्ट के अधीन प्रतिवर्ष शुद्ध लाभ का ६५% रक्षित कोष (रिसर्व फण्ड) में जायेगा।

(ख) लाभ से या किसी अन्य प्रकार से इस फण्ड में जाने वाली रकम से।

(ग़) समिति कि रजिस्ट्री कि तारीख से तीन वर्षों के भीतर तक प्रारंभिक काटकर सभी प्रवेश शुल्क से।

(घ) समिति के द्वारा बचत किये गये हिस्सों के मूल्य से।

(२) रक्षित कोष (रिसर्व फण्ड)समिति का होगा और सदस्यों में बाँटा जायेगा।

(३)रक्षित कोष (रिसर्व फण्ड) निम्नलिखित किसी भी कार्य के हेतु उपलब्ध हो सकेगा –

(क) किसी भी परोक्ष घटना के कारण जो कमी होगी उसे पूरा करने में और उससे जो कमी होगी वह यथाशीघ्र पूर्ति कर दी जायेगी।

(ख) समिति के किसी ऐसे कार्य के लिए जिसकी पूर्ति अन्य तरह से नहीं हो सकती है उससे जो कमी होगी वह जल्दी पूरी कर दी जायेगी।

(ग़) समिति के किसी कर्ज हेतु जमानत के काम में।

(१)   समिति के विघटित हो जाने कि अवस्था में रक्षित कोष (रिसर्व फण्ड) उन कार्यों में लगाया जायेगा जैसा उसी उद्देश्य से बुलाई गई विशेष सभा के बहुमत से निर्धारित होकर रजिस्ट्रार के द्वारा स्वीकृत होगा।

५९. रक्षित कोष (रिसर्व फण्ड) बिहार एंड ओडिशा कॉपरेटिव एक्ट सन-१९३५ ई. के एक्ट-६ के अनुसार या तो किसी काम में लगाया जायेगा या जमा किया जायेगा। बशर्त कि रजिस्ट्रार एक विशेष आज्ञा से समिति के कार्यों में लगाने के हेतु समिति के रक्षित कोष के एक विशेष अंग को लगाने कि आज्ञा दे।

६०. रिस्क फण्ड : रिस्क फण्ड इन सबों को मिलाकर बनेगा:

१. (क) समिति के अधीन प्रतिवर्ष अतिरिक्त अल्पकालीन, मध्यकालीन ऋण उपलब्ध कराये जायेंगे, उनका ८% जनजातीय विकास परियोजना या राज्य सरकार द्वारा दिये गये अनुदान से।

२. प्रैईस फ्लक्चुयेशन : प्रैईस फ्लक्चुयेशन फण्ड इन सबों को मिलाकर बनेगा-

(क) समिति के अधीन प्रतिवर्ष शुद्ध लाभ से जमा की गई रकम।

(ख) समिति द्वारा क्रय-विक्रय की उपविधि का एक निर्धारित प्रतिशत जनजातीय विकास परियोजना या राज्य सरकार के अनुदान से।

६१. उप-विधियों का परिवर्तन :  कोई भी उपविधि तबतक बदली या काटी नहीं जा सकती जबतक कि –

(क) सदस्यों को इस प्रस्ताव की सूचना आम-सभा के बैठक के १५ दिनों के पहले न दे दी जाती है।

(ख) प्रस्ताव जबतक आम-सभा में उपस्थित सदस्यों की दो तिहाई वोट से पास नहीं हो जाता है।

(ग़) रजिस्ट्रार को-ऑपरेटिव सोसाईटी से यह संशोधन परिवर्तन या पूर्ण रूप से हटा देने को मंजूर नहीं कर लिया जाता है।

६२. पंचायत :  कोई भी झगड़ा जिसका निपटारा प्रबंधकारिणी कमिटी या आम-सभा के द्वारा नहीं हो सकता है, रजिस्ट्रार को-ऑपरेटिव सोसाईटी के पास पेश किया जायेगा।

६३. विघटन :  असाधारण आम-सभा जो इसी उद्देश्य से बुलाई जाय कि ३ चौथाई सदस्यों के द्वारा पास किये गये तथा रजिस्ट्रार के द्वारा स्वीकृत प्रस्ताव से समिति विघटित की जा सकती है।

६४. अगर एक्ट की बनावट या नियमों अथवा उपविधियों के विषय में किसी प्रकार का संदेह उत्पन्न हो तो प्रबंधकारिणी कमिटी इस बात को रजिस्ट्रार के सम्मुख उपस्थित करेगी, जिसका फैसला अंतिम होगा।

६५. उन सभी शर्त्तों का निपटारा जो विशेष रूप से नहीं दी गई है बिहार एण्ड उडीसा को-ऑपरेटिव सोसाईटी (सन-१९३५ ई. एक्ट -६ ) और उसके अधीन नियमों अथवा रजिस्ट्रार के आदेशानुसार होगा।

स्त्रोत: हलचल, ज़ेवियर समाज सेवा संस्थान



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