অসমীয়া   বাংলা   बोड़ो   डोगरी   ગુજરાતી   ಕನ್ನಡ   كأشُر   कोंकणी   संथाली   মনিপুরি   नेपाली   ଓରିୟା   ਪੰਜਾਬੀ   संस्कृत   தமிழ்  తెలుగు   ردو

क्या मेरा बच्चा कभी चलने में समर्थ होगा?

क्या मेरा बच्चा कभी चलने में समर्थ होगा?

भूमिका

प्रायः विकलांग बच्चे के माता-पिता सबसे पहला सवाल यही करते है| यह एक महत्वपूर्ण समझने की पूरी कोशिश करते हैं कि जीवन में और भी कई चीजें महत्वपूर्ण हैं|  यदि कोई बच्चा पोलियो से पैरों में गंभीर लकवाग्रस्त है तो उसे चलने ले लिए सामान्यतः दो चीजों की जरुरत पड़ती है|वैशाखी के उपयोग के लिए बाहें व कंधे पर्याप्त मजबूत होने चाहिए| बच्चा स्वयं को इनके सहारे उठा लेता है तो इस प्रकार की वजन उठाने वाली कसरतों से पर्याप्त शक्ति बढ़ सकती है जिससे वह आसानी पूर्वक वैसाखी को उपयोग में ला सकता है| पहले आपको विभिन्न तत्थों को ध्यान में रखना होगा| जिसमें उसकी कीमत, उसकी कार्यकुशलता तथा धातु और बचे के लिए कौन सी खासतौर से उत्तम होगी, आदि बातें आती हैं|

परिचय

इसलिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि समय-समय पर बच्चे की आवश्यकतानुसार बंधनी के लिए मूल्यांकित  किया जाना चाहिए|

  1. वैशाखी के उपयोग के लिए बाहें व कंधे पर्याप्त मजबूत होने चाहिए|
  2. पैर ठीक से सीधे होने चाहिए (जैसे कुल्हे, घुटने व पैर) इसलिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि संकुचन ठीक किये जांए जिससे पैर सीधे रहें अथवा लगभग सीधे से हों, जब आप बंधनी दे द्वारा उसे चलाना चाहें बच्चे के चलने गिरने की सम्भावनाओं का मूल्याकंन करें|

हर समय उसके बाहों एवं कंधों की मजबूती अवश्य जाँच लें|

  • उसे अपना भार अपनी बाँहों पर डालकर फर्श में ऐसा करके देखें|
  • यदि वह आसानी से अपना भार बाँहों में कई बात उठ सके तो उसे वैसाखी के सहारे चलने के काफी अच्छे अवसर हैं|
  • यदि उसके कंधे और बांहें कमजोर हैं और अपना वजन उठाने में सक्षम नहीं है तो वैसाखी के सहारे चलने की काफी कम सम्भावनाएँ हैं|
  • यदि उसके कंधों और बाहों की मजबूती पर्याप्त है और बच्चा स्वयं को इनके सहारे उठा लेता है तो इस प्रकार की वजन उठाने वाली कसरतों से पर्याप्त शक्ति बढ़ सकती है जिससे वह आसानी पूर्वक वैसाखी को उपयोग में ला सकता है|
  • यदि बच्चा इस प्रकार की छड़ के सहारे अपना वजन उठा लेता है तो इस तरह से भी उसे वैसाखी उपयोग के लिए अपनी बाहों एवं कलाइयों को मजबूती प्रदान करने में मदद मिल सकती है|
  • पहिये वाली कुर्सी या गाड़ी को धक्का देकर चलाने से भी कार्यरूप में कंधों, बाँहों एवं हाथों को मजबूती प्रदान करने में मदद मिलती है|
  • यधि बच्चा कमजोर कोहनियों के कारण अपना वजन नहीं उठा पाता तो साधारण सी खपच्चियां बांध कर वह देखें कि काया वह ऐसे अपना वजन उठा सकता है|
  • यदि कोहनी में खपच्ची बाँधने से अवह अपना भार उठा सकता है तो बच्चा ऐसी वैसाखी प्रयोग में ला सकता है जिससे उसके कोहनी को सहारा मिल सके|
  • यदि बच्चा मोटा है तो उसे निश्चय ही ओना भार घटाना होगा| इससे उसे अपने कमजोर अंगों के सहारे चलाना थोड़ा सरल हो जायेगा|
  • यदि बच्चे के कुल्हे, घुटने व पैर काफी सीधी स्थिति में हैं तो बंधनी (खपच्ची) के सहारे चल-फिर सकने के अच्छे अवसर हैं (यदि बांह की शक्ति ठीक है)
  • लेकिन, यदि बच्चे के कूल्हों, घुटनों व पैरों में काफी संकुचन हैं तो उसे सीधा करके चलने लायक बनने से पहले ठीक करने की जरूरत है|
  • कई बार यदि बच्चे के केवल एक पाँव में संकुचन है तो वह दुसरे पाँव के सहारे वैसाखी से चलना सीख सकता है|| लेकिन बेहतर यह है की जब भी संभव हो दोनों पैरों से चलाना सीखे|
  • बाहों की मजबूती व पैरों के सीधेपन को जाँच करने के बाद, दूसरी चीजें , जैसे टखनों, घुटनों व पैरों की क्षमता जांचनी होती है| इससे आपको यह तय करने में मदद मिलगी कि अगर बच्चे को बंधनी की जरुरत है तो वे किस प्रकार की हों|
  • नीचे को झुके पाँव वाला या एक तरफ को मुडे पाँव बच्चे क लिए घुटने से नीचे की पलास्टिक या धातु की बंधनी मददगार हो सकती है|
  • न झुका हुआ पाँव यह अपने पाँव को उठा नहीं सकता|
  • एक तरफ को मुड़ा या लटका पाँव

पहले आपको विभिन्न तत्थों को ध्यान में रखना होगा| जिसमें उसकी कीमत, उसकी कार्यकुशलता तथा धातु और बचे के लिए कौन सी खासतौर से उत्तम होगी, आदि बातें आती हैं|

एक कमजोर घुटने वाले बच्चे के लिए पलास्टिक या धातु की लम्बी पैरों वाली बंधनी की जरुरत होती है|

  • जांघों एवं पैरों के नीचे कमजोर मांसपेशीयां
  • पैरों के ऊपर तक की बंधनी घुटने ने के जोड़ सहित या बिना जोड़ के बनाई जा सकती  जो चलने के समय सीधी लॉक की जा सकती है और बैठने पर मोड़ी जा सकती है|

सूचना- वे बच्चे जो ताकत की कमी के कारण घुटने को सीधा नहीं कर पाते है उन सभी को लम्बे पैरों वाली बंधनी की जरूरत नहीं है जिस बच्चे के पुट्ठों की मांसपेशी काफी मजबूत है वे बंधनी के चल सकते हैं|

  • मजबूत पुट्ठों वाली मांसपेशी
  • शक्तिशाली पुट्ठे की मांसपेशी जांघ को पीछे करती है और घुटने को झुकने से रोकते है|
  • एक बच्चा, जिसके मजबूत पुट्ठे हैं और घुटना सीधा है तो उसे पैरों के नीचे वाली बंधनी से मदद मिलती जो कि उसके घुटने को पीछे की ओर धकेलती है|
  • बंधनी घुटने को पीछे को धकेलती है| एक सख्त बंधनी का हल्का सा आगे झुका होने से घुटने को पीछे की ओर धकेलने में तब मदद मिलती है जब उसे पहन कर भार डाला जाये|
  • यदि एक बच्चे को पुट्ठे वाली मांसपेशी कमजोर है तो वह अपने घुटने पर हाथ टीकाकर चल सकता है|
  • या वह अपने घुटने को पीछे की ओर मोड़ कर वजन से सख्ती देकर चल सकता है|
  • यदि किसी बच्चे के पैरों में संकुचन है और घुटने को सीधा करके चल नहीं सकता तो उसके संकुचन तो तब तक ठीक कीजिये जब तक कि उसका घुटना थोड़ा पीछे की उर झुक नहीं पाता, जिससे वह बेहतर ढंग से चल सकता है|

चेतावनी:- एक सख्त पैर एंव  पंजों के प्रबल संकुचन वाले बच्चे को अपना घुटना पीछे को ठेले रखने में मदद मिल सकती है| ठीक एक सख्त बंधनी तरह कारगर | ऐसे बच्चों के संकुचन ठीक करने से चलना कठिन या असम्भव हो सकता है| और तब तक बंधनी की जरुरत हो सकती है जोकि पहले नहीं चाहिए थी|

  • बहुत कमजोर पुट्ठे की मांसपेशी वाला एक बच्चा अपने पांव को एक बड़ी बंधनी के साथ बहुत ढीला ढाला या बहुत लचकीला सा पा सकता है|
  • यदि यहाँ पर मांसपेशी बहुत कमजोर है|
  • तो बच्चा इस तरह से अपना पैर नहीं उठा सकता
  • या वह अपने पाँव की इस प्रकार बाह या भीतर की ओर नहीं घुमा सकता है|
  • उसके पैर बंधनी के साथ ऐसे ढीले ढाले या लचकदार हो सकते हैं|
  • उसे कमर में बंधनी वाली बंधनी की जरुरत हो सकती है जो पैर को कुल्हे से सुदृढ़ करने में सहयता दें|
  • कुल्हे से मुड़ी हुई बंधाने वालो बंधनी, जो कि पुट्ठे को टिकाने में सहारा दे और कमर में कड़ाई से बंधने की बजाय ठीक सहारा दे|
  • कमर के ऊपर बाँधने वाली झुकी बंधनी से प्रायः पुट्ठे पीछे को निकल जाते है और इस तरह से पीठ में धंसाव की शिकायत आ जाती है|
  • बैठने के लिए एक जोड़ (जरुरी हो तो उसमें लॉक भी रहे)
  • एक प्लास्टिक की पुट्ठे से झुकी बंधनी उतनी परन्तु वह ज्यादा लचकदार तथा अच्छी तरह से बाँधने योग्य होती है|

कमजोर शरीर एवं कमजोर पिछले मांसपेशियों वाला बच्चा, जोकि अपने शरीर को ठीक से नहीं संभाल पाता, उसे शरीर की जैकेट के साथ बंधी लम्बे पैरों वाली बंधनी की जरुरत पड़ सकती है|

  • यदि उसे अपना शरीर संभालने में इस प्रकार की कठिनाई होती है|
  • तो उसे शरीर का सहारा देने के लिए इस प्रकार की बंधनी की जरुरत हो सकती है|

सूचना: आमतौर पर किसी बच्चे को शुरू में पुट्ठे से मुड़ी या जैकेट वाली बंधनी शरीर को मजबूती देने के लिए जरूरत पड़ सकती है| लेकिन कुछ हफ्तों या महीनों बाद उसे इसकी जरुरत न पड़ें, क्योंकि इसके   हटाने के बाद बच्चे को अपना संतुलन बनाने व शक्ति अर्जित करने में सहयता मिलती है| इसलिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि समय-समय पर बच्चे की आवश्यकतानुसार बंधनी के लिए मूल्यांकित किया जाना चाहिए|

  • ख़राब रीढ़ की हड्डी वाला गंभीर रूप से झुका बच्चा- इसे धड़ में बाँधने वाली बंधनी से मदद मिल सकती है (बहुत गंभीर रोगी को शल्यक्रिया की जरुरत पड़ सकती है|)
  • यदि जरुरत हो तो धड़ वाली बंधनी को पाँव की बंधनी से जोड़कर बना सकते हैं जैसी कि पहले दिखाई जा चुकी है|

 

स्रोत:- जेवियर समाज सेवा संस्थान, राँची|



© 2006–2019 C–DAC.All content appearing on the vikaspedia portal is through collaborative effort of vikaspedia and its partners.We encourage you to use and share the content in a respectful and fair manner. Please leave all source links intact and adhere to applicable copyright and intellectual property guidelines and laws.
English to Hindi Transliterate