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मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना- संक्षिप्त दिशा-निर्देश

मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना- संक्षिप्त दिशा-निर्देश

  1. भूमिका
  2. मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना के सिद्धान्त
  3. मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना के उद्देश्य
  4. मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना क्रियान्वयन के लिए संस्थागत संरचना
  5. राज्य स्तरीय इकाई के दायित्व एवं कार्य
  6. जिला जल एवं स्वच्छता समिति के दायित्व
  7. जल आपूर्ति योजना के घटक / अवयव
  8. मानक रूपरेखा के आधार
  9. योजना क्रियान्वयन के विभिन्न चरण 
  10. योजना क्रियान्वयन नियोजन 
  11. योजना क्रियान्वयन
  12. योजना अंतर्गत अनुश्रवण, निगरानी एवं प्रबंधन
  13. योजना प्राक्कलन
  14. मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना का वित्त पोषण एवं प्रबंधन
  15. निर्माण तकनीक एवं मॉडल प्राक्कलन
  16. योजना का अनुश्रवण एवं निगरानी
  17. बिहार वार्ड सभा तथा वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति कार्य संचालन नियमावली, 2017

भूमिका

सुशासन के कार्यक्रम अन्तर्गत राज्य सरकार के सात निश्चय के तहत हर घर नल का जल के क्रियान्वयन हेतु मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना वर्ष 2016-17 से प्रारंभ की गई है। इस योजना के तहत राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक घर को वर्ष 2019-20 तक पाईप द्वारा शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना के अन्तर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में पाईप द्वारा शुद्ध पेयजल की आपूर्ति हेतु ग्राम पंचायतों द्वारा जलापूर्ति की छोटी-छोटी योजनाएं चरणबद्ध तरीके से क्रियान्वित की जायेगी। इसके लिए साधारणतः भौगोलिक निरंतरता को  ध्यान में रखते हुए ग्राम पंचायतों के वार्ड को एक इकाई मान कर प्रत्येक वार्ड के लिए एक योजना तैयार की जायेगी। योजना के अन्तर्गत अधिकतम 70 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन की दर से पानी उपलब्ध कराया जायेगा। पंचायती राज विभाग द्वारा इस योजना का कार्यान्वयन राज्य की 5,013 ग्राम पंचायतों (जहाँ जल गुणवत्ता प्रभावित नहीं है या लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग द्वारा पूर्व से कार्य नहीं कराया जा रहा है) में किया जायेगा।

बिहार पंचायत राज (संशोधन) अध्यादेश, 2017 बिहार असाधारण गजट संख्या 493 दिनांक 08.06.2017 द्वारा एवं बिहार वार्ड सभा तथा वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति कार्य संचालन नियमावली, 2017 बिहार असाधारण गजट संख्या 568 दिनांक 29.06.2017 द्वारा अधिसूचित किया गया है। उक्त के आलोक में मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना की निम्न संशोधित दिशा-निर्देश जारी किये जाते हैं।

मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना के सिद्धान्त

  • ग्रामीणों की क्षमता पर आधारित वार्ड स्तर पर अनुकूल नीति को अपनाकर पेयजल योजना का चयन, योजना की रूपरेखा, कार्यान्वयन तथा वित्त नियंत्रण एवं प्रबंधन व्यवस्था समुदाय की भागीदारी के साथ सुनिश्चित करना,
  • वार्ड तथा पंचायत के स्तर पर पेयजल परिसम्पत्तियों पर समुदाय / पंचायत को पूर्ण स्वामित्व,
  • ग्रामीण पेयजल योजनाओं के संचालन एवं रख-रखाव में समुदाय की संपूर्ण जिम्मेदारी, भागीदारी एवं नेतृत्व,
  • योजनाओं का संचालन एवं रख-रखाव प्रयोक्ताओं द्वारा उपभोक्ता शुल्क के माध्यम से किया जाना।

मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना के उद्देश्य

(क) राज्य के ग्रामीण परिवारों के लिए पेयजल का एक बेहतर विकल्प उपलब्ध कराना,

(ख) ग्रामीण परिवारों के लिए पाईप से शुद्ध पेयजल की सतत् उपलब्धता पूरे वर्ष सुनिश्चित करना,

(ग) पीने के लिए एवं अन्य घरेलू उपयोग (जैसे-खाना बनाना, नहाना एवं पशुओं के पीने के लिए) के लिए पर्याप्त मात्रा में जल की उपलब्धता सुनिश्चित करना,

(घ) जलजनित बीमारियों को कम कर ग्रामीणों के जीवन स्तर को सुधारना।

मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना क्रियान्वयन के लिए संस्थागत संरचना

राज्य स्तरीय संरचना

मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना को प्रभावी रूप से क्रियान्वित कराने के लिए प्रधान सचिव / सचिव, पंचायती राज विभाग के अधीन राज्य स्तर पर एक क्रियान्वयन एवं अनुश्रवण कोषांग का गठन किया जायेगा। यह क्रियान्वयन एवं अनुश्रवण कोषांग नियमित रूप से योजना की प्रगति की समीक्षा करने के साथ ही जलापूर्ति की योजनाओं के मानक प्राक्कलनों की तैयारी एवं तकनीकी स्वीकृति, उनकी भौगोलिक, सामाजिक एवं पर्यावरणीय उपयुक्तता (applicability), वित्तीय प्रबंधन मॉड्यूल, क्षमता संवर्द्धन एवं सामुदायिक भागीदारी की गतिविधियों के लिए नीतियों/कार्यक्रमों को निरूपित करेगा। राज्य स्तरीय कोषांग में ग्रामीण विकास / स्वच्छता / जलापूर्ति के क्षेत्र में कार्य करने वाले अंतर्राष्ट्रीय/राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संगठनों के प्रतिनिधियों को विकास सहयोगी के रुप में शामिल किया जायेगा।

योजना के क्रियान्वयन एवं अनुश्रवण कोषांग को तकनीकी सहयोग प्रदान करने के लिए राज्य स्तर पर राज्य स्तरीय योजना अनुश्रवण इकाई (State level scheme Monitoring Unit) का गठन किया जायेगा। यह इकाई योजना को मिशन मोड में क्रियान्वित करने के लिए विशेष प्रयासों को संयोजित करेगी। इकाई के अंतर्गत संविदा / आउटसोर्सिंग / प्रतिनियुक्ति के आधार पर आई टी  विशेषज्ञ, अभियंता, वित्त प्रबंधक, जन संचार विशेषज्ञ, अनुश्रवण एवं मूल्यांकन विशेषज्ञ तथा सामाजिक वैज्ञानिक, आदि को रखा जायेगा । केन्द्र / राज्य सरकार के अनुभवी व योग्य सेवानिवृत्त कर्मियों को इकाई से जोड़ कर उनकी सेवाएं ली जायेंगी। योजना के क्रियान्वयन, अनुश्रवण एवं गुणवत्ता की निगरानी हेतु पंचायती राज विभाग के द्वारा सूचीबद्धता पर राज्य स्तरीय गुणवत्ता अनुश्रवक (State Quality Monitors) रखे जायेंगे।

राज्य स्तरीय इकाई के दायित्व एवं कार्य

(क) ग्रामीण पेयजल परियोजनाओं संबंधित नीतिगत मार्गदर्शन करना,

(ख) राज्य सरकार के विभिन्न विभागों तथा सम्बद्ध क्रियाकलापों में अन्य भागीदारों (यथा सहयोगी संस्थाएं, विशेषज्ञों / विशेषज्ञ संस्थाएं) के साथ आवश्यकतानुसार अनुबंध / समन्वय,

(ग) जिला जल एवं स्वच्छता समितियों का तकनीकी विषयों एवं वित्तीय प्रबंधन के लिए उचित मार्गदर्शन,

(घ) योजनाओं के कार्यान्वयन एवं परिचालन का अनुश्रवण करना

(ङ) ग्रामीण पेयजल परियोजनाओं के निर्माण की गुणवत्ता की जाँच हेतु स्वतंत्र प्रमाणन की व्यवस्था करना,

(च)  ग्रामीण जल आपूर्ति सम्बद्ध संचार तथा विकास कार्यक्रमों को समेकित और संचालित करना,

(छ) मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना तथा मुख्यमंत्री गली-नाली पक्कीकरण योजना का समन्वय,

(ज) स्थानीय क्षेत्रों की आवश्यकतानुसार मानक प्राक्कलन तैयार करना (इस कार्य के लिए राज्य स्तरीय इकाई विशेषज्ञ संस्थाओं एवं विशेषज्ञों की सहायता ले सकती हैं) एवं तकनीकी स्वीकृति कर विभिन्न जिलों को उपलब्ध कराना।

जिला स्तरीय संरचना -

जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के क्रियान्वयन हेतु गठित जिला जल एवं स्वच्छता समिति के माध्यम से योजना का क्रियान्वयन किया जायेगा तथा जिला पंचायत राज पदाधिकारी एवं विद्युत कार्यपालक अभियंता को इस योजना हेतु समिति के सदस्य के रूप में नामित किया जायेगा। यह समिति योजना को निर्धारित सीमावधि में पूरा कराने के लिए प्राधिकृत समिति होगी और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप दिशा-निर्देश के प्रावधानों की व्यवहारिकता को ध्यान में रखते हुए गुणवत्तापूर्ण कार्य का संपादन सुनिश्चित करेगी। जिला पंचायत राज पदाधिकारी इस योजना हेतु विशेष जवाबदेही व भूमिका को सुनिश्चित करेंगे और ग्राम पंचायत की वार्षिक कार्य योजना को मासिक/ त्रैमासिक कार्य योजना में बांटते हुए सभी प्रखण्डों के लक्ष्य निर्धारण, उसकी समीक्षा, कार्य प्रगति की निगरानी, सामाजिक जागरूकता, क्षमता संवर्द्धन कार्यक्रमों के आयोजन कराया जाना सुनिश्चित करेंगे। सामाजिक या अन्य किसी प्रकार के विवाद आदि की स्थिति में यह समिति अंतिम रूप से निर्णय लेने के लिए अधिकृत होगी।

जिला पंचायत राज पदाधिकारी के कार्यालय में एक सहयोगी कोषांग (Support cel) गठित किया जायेगा, जो जिला स्तर पर संसाधन केन्द्र के रूप में योजना के क्रियान्वयन में सहयोग करेगा। सहयोगी कोषांग में वित्त प्रबंधन, सूचना प्रावैधिकी, जनसंचार / मीडिया, अनुश्रवण / मूल्यांकन आदि के अनुभवी व्यक्तियों को परामर्शी के रूप में जोड़ा जायेगा। सहयोगी कोषांग ग्राम पंचायत को सुचारू वित्तीय प्रबंधन, कार्यों की प्रगति रिर्पोटिंग एवं तकनीकी कार्य क्रियान्वयन में सहयोग प्रदान करने के लिए प्रति चार पंचायत पर एक की दर से लेखापाले-सह-आई.टी. सहायक और कनीय अभियंता का पैनल तैयार करेगा और उन्हें कार्य आधारित मानदेय (Performance based Honorarium) पर रखा जायेगा। इस हेतु जिला कार्यालय द्वारा Expression of interest प्रकाशित कर सूचीबद्ध (Empanel) करने का कार्य किया जायेगा। इस कार्य हेतु विभाग स्तर से आवश्यक सहयोग प्रदान किया जायेगा। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में उनकी भूमिका सुनिश्चित की जायेगी। जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में सुशासन के कार्यक्रम हेतु गठित अनुश्रवण समिति इस योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा करेगी।

जिला जल एवं स्वच्छता समिति निजी तौर पर कार्य करने के इच्छुक अभियंताओं (न्यूनतम अर्हता/qualification - डिप्लोमा धारक) को तकनीकी सहायक के तौर पर सूचीबद्ध कर, ग्राम पंचायतों के साथ सूची साझा करेगी। ग्राम पंचायत इनमें से किसी एक तकनीकी सहायक को जलापूर्ति योजनाओं की रूपरेखा बनाने एवं पर्यवेक्षण करने के लिए नियुक्त कर सकेगी। तकनीकी सहायकों को परियोजना की अनुमानित लागत का दो प्रतिशत भुगतान पूर्व निर्धारित किस्तों में किया जा सकेगा (उदाहरण-योजना की रूपरेखा तैयार होने तथा प्रखंड स्तरीय इकाई द्वारा तकनीकी स्वीकृति प्राप्त होने पर 0.25 प्रतिशत; योजना अन्तर्गत पानी के स्रोतों का निर्माण तथा संग्रहण व्यवस्था पूर्ण होने पर 0.25 प्रतिशत; योजनान्तर्गत सभी लाभुक परिवारों का वितरण प्रणाली के साथ संयोजन होने के उपरान्त 0.25 प्रतिशत; योजना के सफलपूर्ण परीक्षण तथा प्रवर्तन के पश्चात् 0.75 प्रतिशत; योजना के प्रवर्तन के पश्चात् तीन माह तक सफल संचालन के पश्चात् 0.50 प्रतिशत) ।

जिला जल एवं स्वच्छता समिति के दायित्व

मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना के संदर्भ में जिला जल एवं स्वच्छता समिति के दायित्व निम्न प्रकार होंगे -

(क) मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना के सिद्धांतों के बारे में जन प्रतिनिधियों, अधिकारियों तथा आम नागरिकों को जागरूक करना,

(ख) समस्त हितग्राहियों की क्षमता के विकास के लिए प्रशिक्षण देना,

(ग)  योजना के चयन हेतु प्रखंड / पंचायतवार समयबद्ध कार्यक्रम तैयार करना तथा अभियान चलाकर ग्राम पंचायतों का वार्षिक एवं perspective विकास योजना तैयार कराना,

(घ) जिला स्तर पर निजी तौर पर कार्य करने के इच्छुक अभियंताओं (कम-से-कम डिप्लोमाधारी) को सूचीबद्ध करना एवं सूची ग्राम पंचायतों के साथ साझा करना,

(ङ ) मानक प्राक्कलनों को ग्राम पंचायत / सहायक अभियंता तथा तकनीकी सहायकों के साथ साझा करना; तकनीकी सहायकों को क्षमता विकास,

(च) ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं के क्रियान्वयन का अनुश्रवण करना ।

प्रखण्ड स्तर

प्रखण्ड विकास पदाधिकारी की अध्यक्षता में लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के क्रियान्वयन हेतु गठित प्रखण्ड स्तरीय अनुश्रवण इकाई के सहयोग से प्रखंड स्तर पर योजना का क्रियान्वयन एवं अनुश्रवण किया जायेगा। योजना के क्रियान्वयन को सुनियोजित तरीके से कराने के लिए प्रखण्ड पंचायत राज पदाधिकारी की भूमिका facilitator की होगी तथा मनरेगा के सहायक/कनीय अभियंता भी इकाई को योजना के क्रियान्वयन एवं अनुश्रवण में तकनीकी सहयोग प्रदान करेंगे। योजना को क्रियान्वित कराने के लिए प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी के स्तर पर एक कार्यपालक सहायक को जोड़ा जायेगा, जो योजना संबंधित आंकड़ों, रिपोर्ट, लेखा-विवरण, आदि की प्रखण्ड स्तर पर समयबद्ध रिर्पोटिंग सुनियोजित करेगा। प्रखण्ड विकास पदाधिकारी के स्तर पर पूर्व से पंचायती राज विभाग द्वारा प्रशिक्षित प्रशिक्षकों का एक पैनल बना कर उनकी आवश्यकता आधारित उपलब्धता (need based availability) बनाई रखी जायेगी। इसके अतिरिक्त प्रखण्ड विकास पदाधिकारी क्षमता संवर्द्धन, प्रचार-प्रसार एवं सामुदायिक सहभागिता की गतिविधियों को क्रियान्वित कराने के लिए नोडल पदाधिकारी होंगे। कनीय अभियंता, लेखापाल-सह-आई.टी. सहायक एवं प्रशिक्षकों को ग्राम पंचायतों के समूह में लगाये जाने की जिम्मेदारी एवं उनके द्वारा किये गए कार्य का मूल्यांकन प्रखण्ड विकास पदाधिकारी द्वारा संपादित किया जायेगा। कनीय अभियंता, लेखापाल-सह-आई.टी. सहायक एवं प्रशिक्षकों को कार्य आधारित मानदेय भुगतान के संबंध में विभाग द्वारा अलग से दिशा-निर्देश निर्गत किये जायेंगे।

योजना की क्रियान्वयन इकाई वार्ड होगी और लगभग चार ग्राम पंचायतों के समूह को आधार मानकर ग्राम पंचायतों को तकनीकी परामर्श, वित्तीय प्रबंधन एवं प्रचार-प्रसार की सुविधा उपलब्ध कराई जायेगी।

मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना के संदर्भ में प्रखंड स्तरीय अनुश्रवण इकाई के दायित्व निम्न प्रकार होंगे -

  • क्षमता सम्वर्द्धन एवं सामुदायिक सहभागिताओं की गतिविधियों का समन्वय ।
  • वार्ड स्तरीय जलापूर्ति योजनाओं का अवलोकन एवं मानक प्राक्कलन के आधार पर वार्ड स्तरीय योजनाओं के डी0पी0आर0 की तकनीकी स्वीकृति।
  • मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना के सिद्धांतों के बारे में जन प्रतिनिधियों, अधिकारियों तथा आम नागरिकों को जागरूक करना।
  • ग्राम पंचायतों के समूह को आधार मानकर तकनीकी परामर्श, वित्तीय प्रबंधन, प्रचार-प्रसार की सुविधा उपलब्ध कराना।
  • ग्राम पंचायतों के समूह में कनीय अभियंता, लेखापाल–सह–आई0टी0 सहायक एवं प्रशिक्षकों को सम्बद्ध करना तथा इनके कार्यों का मूल्यांकन एवं अनुश्रवण करना।
  • ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं के क्रियान्वयन का अनुश्रवण करना।

ग्राम पंचायत स्तर

मुख्यमंत्री पेयजल निश्चय योजना के क्रियान्वयन में ग्राम पंचायत की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। मुखिया के नेतृत्व में ग्राम पंचायत योजना के क्रियान्वयन संबंधी समस्त दायित्वों का निर्वहन करेगी। ग्राम पंचायत के मुखिया द्वारा ग्राम पंचायत के निर्णय के आलोक में योजनाओं की प्रशासनिक स्वीकृति संसूचित की जायेगी तथा वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति द्वारा क्रियान्वित योजनाओं की नियमित अनुश्रवण एवं पर्यवेक्षण किया जायेगा। साथ ही, बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा 25 (vi) के अंतर्गत गठित लोक निर्माण समिति अपनी विशेष भूमिका निभायेगी तथा नियमित वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति को योजनाओं के क्रियान्वयन में सहयोग करेगी। ग्राम पंचायत में कार्यरत विभिन्न योजना से जुड़े कर्मी यथा- पंचायत रोजगार सेवक, पंचायत तकनीकी सहायक, ग्रामीण आवास सहायक, कृषि सलाहकार, विकास मित्र, टोला सेवक, आशा /आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, महिला स्वयं सहायता समूह / ग्राम संगठन के सदस्यों, जागरूक ग्रामीणों, आदि को भी सामुदायिक सहभागिता के लिए प्रेरक (motivator) के रूप में जोड़ा जायेगा। समुदाय के बीच सामूहिक चेतना के विकास एवं कार्य के निगरानी में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी। प्रेरक (motivator) के लिए कार्य के विरूद्ध परिणाम आधारित प्रोत्साहन राशि की व्यवस्था की जायेगी।

मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना से संबंधित, ग्राम पंचायत के दायित्व निम्न प्रकार होंगे -

  • वार्ड स्तरीय जलापूर्ति कार्य योजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति देना। ग्राम पंचायत के निर्णय के आलोक में मुखिया द्वारा प्रशासनिक स्वीकृति की वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति तथा अन्य संबंधितों को संसूचन।
  • लोक निर्माण समिति के माध्यम से जलापूर्ति योजनाओं का निरीक्षण एवं अनुश्रवण करना। वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति लोक निर्माण योजनाओं के क्रियान्वयन में अधिनियम की धारा 25 (1) (vi) के अधीन गठित लोक निर्माण समिति के सामान्य मार्गदर्शन के अधीन कार्य करेगी।
  • जलापूर्ति योजना के निर्माण के लिए आवश्यकतानुसार भूमि का चयन एवं भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित कराने हेतु सहयोग देना,
  • पंचायत के सभी वार्ड तथा टोलों में संचार एवं क्षमता विकास कार्यों में भागीदारी कर वार्ड स्तरीय समितियों की सहायता करना।

वार्ड स्तर

बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 (यथा संशोधित) एवं बिहार वार्ड सभा तथा वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति कार्य संचालन नियमावली, 2017 में निहित प्रावधानों के अन्तर्गत ग्राम पंचायत के संबंधित वार्ड सदस्य की अध्यक्षता में सात सदस्यीय वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति का गठन वार्ड सभा के माध्यम से दो वर्षों के लिए किया जायेगा, जो मुख्य रूप से लाभुकों की समिति होगी और ग्राम पंचायत के लिए मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना का क्रियान्वयन एवं रखरखाव / अनुरक्षण प्रदत्त दिशा-निर्देश के अनुसार करेगी। संबंधित वार्ड से निर्वाचित ग्राम कचहरी पंच वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति के पदेन सदस्य होंगे। अध्यक्ष एवं पदेन सदस्य के अलावा, वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति में संबंधित वार्ड के निवासियों में से चार व्यक्तियों को सदस्य के रूप में वार्ड सभा द्वारा चयनित किया जायेगा। वार्ड में यदि जीविका के ग्राम संगठन/स्वयं सहायता समूह कार्यरत हों तो इसके एक प्रतिनिधि को भी समिति के सदस्य के रूप में निर्वाचित किया जायेगा। अगर संबंधित वार्ड में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के परिवार निवास करते हैं, तो वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति के सदस्यों में कम से कम एक सदस्य अनुसूचित जाति एवं जनजाति परिवार से अनिवार्य रूप से चयनित किये जायेंगे। समिति में कम-से-कम तीन महिला सदस्य होंगी एवं समिति में वार्ड सभा द्वारा एक परिवार में से एक से अधिक सदस्य चयनित नहीं किये जायेंगे। वार्ड सभा सचिव वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति, का पदेन सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेगा। अध्यक्ष अथवा पंचायती राज संस्थाओं/ग्राम कचहरी के किसी पदधारक के परिवार के सदस्य को वार्ड सभा सचिव के रुप में नहीं चुना जायेगा। वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति की सभा बुलाने, बैठकों का कार्यवृत्त लेखन एवं लेखा-जोखा रखने की जिम्मेदारी सदस्य सचिव की होगी। वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति योजना की राशि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक के खाते में रखेगी। पूर्व में वार्ड विकास समिति के नाम से संधारित बैंक खातों का नामान्तरण नयी समिति के नाम के अनुरुप किया जायेगा। इस बैंक खाते का संचालन वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति के अध्यक्ष तथा सदस्य सचिव के संयुक्त हस्ताक्षर से होगा। वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति के निर्वाचित सदस्यों का कार्यकाल दो वर्ष का होगा। ऐसे सदस्य जो समिति की लगातार तीन बैठकों में भाग नहीं लेगें या कार्यों में अभिरूचि नहीं लेंगे, उनके स्थान पर नये सदस्य का चयन उपर्युक्त वर्णित रीति से समिति के शेष अवधि के लिए किया जा सकेगा। दो वर्षों का कार्यकाल पूर्ण होने पर, वार्ड सभा पुनः वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति के सदस्यों का चयन करेगी।

वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति की पहली बैठक इसके गठन के तुरंत बाद की जायेगी तथा प्रत्येक बैठक में समिति की अगली बैठक की तिथि एवं समय निर्धारित की जायेगी। वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति की बैठक सामान्यतः साप्ताहिक होगी, किन्तु माह में कम से कम दो बैठकों का आयोजन अनिवार्य होगा। विशेष परिस्थिति में समिति के एक तिहाई सदस्यों की लिखित अधियाचना प्राप्त होने पर, जिसमें विचारणीय विषय के साथ-साथ बैठक हेतु तिथि की भी अधियाचना होगी, अध्यक्ष द्वारा उक्त तिथि को बैठक बुलाई जायेगी। समिति की पहली बैठक में इसके संचालन हेतु नियम / उपनियमों को विभागीय मार्गदर्शिका के आलोक में अंगीकृत किया जायेगा।

वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति के कुल सदस्यों में चार की उपस्थिति से बैठक की गणपूर्ति होगी। त्याग पत्र / मृत्यु इत्यादि की स्थिति में वार्ड सभा के द्वारा शेष अवधि के लिए रिक्ति भरी जाएगी।

आधारभूत संरचना एवं बेसलाईन सर्वेक्षण

मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना के क्रियान्वयन प्रारंभ किये जाने के पूर्व वार्डों की आधारभूत संरचना एवं बेसलाईन सर्वेक्षण का कार्य संपादित किया जायेगा। यह सर्वेक्षण कार्य जिला/ प्रखंड स्तरीय समिति के मार्गदर्शन में वार्ड सदस्य, पंचायत रोजगार सेवक, पंचायत तकनीकी सहायक एवं ग्रामीण आवास सहायक द्वारा निर्धारित प्रपत्र में चिन्हित वार्ड के परिसीमन में आधारभूत सरंचना एवं बेसलाईन सर्वेक्षण का कार्य करेंगे। साथ ही, बंधित वार्ड की आँगनबाड़ी सेविका, आशा कार्यकर्ता, विकास मित्र, टोला सेवक, जागरूक ग्रामीणों, महिला स्वयं सहायता समूह / ग्राम संगठन के सदस्यों, आदि का सहयोग लिया जायेगा। सर्वेक्षण का कार्य पंचायती राज विभाग द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त प्रशिक्षकों की देखरेख में Participatory Rural Appraisal (PRA) पद्धति से (अनुसूची-1) किया जायेगा।

वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति के उत्तरदायित्व एवं कार्य

  • वार्ड में स्थित सभी परिवारों की पेयजल आवश्यकतानुसार जलापूर्ति कार्य योजना की रूपरेखा चयनित तकनीकी सहायक की मदद से तैयार करना,
  • जलापूर्ति योजना के सभी चरणों में (यथा-योजना बनाना, जल स्रोत स्थान का चयन, योजना का क्रियान्वयन, जल वितरण एवं रख-रखाव में) सामुदायिक भागीदारी तथा उनके द्वारा निर्णय सुनिश्चित करना,
  • समुदाय / प्रयोक्ता की रूचि /  स्थानीय भौगोलिक एवं भूगर्भीय परिस्थिति के आधार पर जल आपूर्ति योजनाओं की रूपरेखा तैयार करना तथा इस क्रम में सर्वेक्षित योजना क्षेत्र के सभी घरों को योजना अंतर्गत सम्मिलित किया जाना,
  • तकनीकी व्यवहारिकता के आधार पर उपयुक्त योजना पर सर्वसम्मति बनाना,
  • निर्माण सामग्रियों / सामान का बाजार सर्वेक्षण एवं क्रय करना,
  • जल आपूर्ति योजना के मद में मिली धनराशि के उपयोग के लिए स्वीकृति प्रदान करना एवं आय-व्यय का लेखा-जोखा रखा,
  • जल आपूर्ति योजना संबंधी राशि का वित्तीय प्रबंधन एवं वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति की बैठकों के कार्यवृत्त का रख-रखाव,
  • जल आपूर्ति योजना का सुचारू रूप से संचालन एवं रख-रखाव, जल गुणवत्ता परीक्षण तथा निगरानी, जल संग्रहण तथा वितरण व्यवस्था की देख-रेख,
  • उक्त सभी कार्यों हेतु वार्ड सभा द्वारा निर्धारित उपभोक्ता शुल्क का संग्रहण, उपयोग एवं लेखा संधारण,
  • जल आपूर्ति योजना का सुचारू रूप से संचालन एवं रख-रखाव, जल गुणवत्ता परीक्षण तथा निगरानी, जल संग्रहण तथा वितरण व्यवस्था की देख-रेख हेतु अन्य वित्तीय स्रोतों एवं ईच्छुक विशेषज्ञों की पहचान कर उक्त सभी कार्यों हेतु सहयोग प्राप्त करना,
  • ग्राम पंचायत तथा प्रखंड जल स्वच्छता समिति के साथ समन्वय, तथा
  • संचार तथा क्षमता विकास कार्यों में भागीदारी करना।

जल आपूर्ति योजना के घटक / अवयव,  मानक रूपरेखा एवं मानक प्राक्कलन

जल आपूर्ति योजना के घटक / अवयव

वार्ड स्तरीय जल आपूर्ति योजना के सामान्यतः निम्नवत् अवयव होते हैं -

(1) जल स्रोत,

(2) राइजिंग मेन (जल स्रोत को जल संग्रहण व्यवस्था के साथ जोड़नेवाली पाईप),

(3) जल संग्रहण व्यवस्था,

(4)  सार्वजनिक जल वितरण प्रणाली,

(5)  जल वितरण प्रणाली के साथ घर का संयोजन एवं

(6)  घर की अंदरुनी वितरण व्यवस्था ।

मानक रूपरेखा के आधार

जल आपूर्ति योजना के विभिन्न घटकों / अवयवों के मानक साधारणतः निम्न आधार पर स्थापित किये जायेंगे।

जल स्रोत

जल स्रोतों को सामान्यतः सरकारी / सार्वजनिक भूमि पर स्थित किया जायेगा। सामान्यतः भूगर्भीय जल पेयजल का स्रोत होगा, जिसे नलकूप के माध्यम से निकाला जायेगा। स्थानीय भौगोलिक स्थिति के अनुसार नलकूल की गहराई 100 मीटर (न्यूनतम) या उससे अधिक हो सकती है। नलकूप से जल निष्कासन 2 एच0पी0 के विद्युत संचालित सिंगल फेज पम्प से कर, जल संग्रहण प्रणाली में किया जा सकता है। विद्युत वोल्टेज (voltage) की समस्या के निदान हेतु बोरिंग करते समय इसके साथ ही earthing एवं voltage stabilizers का प्रावधान योजना में किया जायेगा।

राइजिंग मेन (जल स्रोत को जल संग्रहण व्यवस्था के साथ जोड़नेवाली पाईप)

राइजिंग मेन तथा जल स्रोत को जल संग्रहण व्यवस्था के साथ जोड़नेवाली पाईप साधारणतः पीएभी0सी0 (PVC) या हाई डेंसिटी पाली एथीलिन (HDPE) की होनी चाहिए तथा जमीनी सतह से कम-से-कम 3 फीट नीचे बिछाना चाहिए (राइजिंग मेन में उपयोग की जाने वाली पाईप योजना की रूपरेखानुसार उचित प्रेशर रेटिंग का होना आवश्यक है)।

जल संग्रहण

जल आपूर्ति योजना के अंतर्गत छोटे स्तर पर जल संग्रहण की व्यवस्था आवश्यकतानुसार की जायेगी। जल संग्रहण 5,000 लीटर क्षमता वाली टंकियों के माध्यम से किया जायेगा। किसी योजना में जल संग्रहण टंकियों की संख्या सामान्यतः दो से अधिक नहीं होगी। जल संग्रहण टंकियों को 8 से 10 फीट ऊँचाई के चबूतरे पर रखा जायेगा, जिससे सभी परिवारों को जल वितरण का लाभ मिल सके (अगर संबंधित गांव/टोले/वार्ड में नैसर्गिक उच्च स्थान उपलब्ध है, तो जमीन पर एक छोटा चबूतरा बनाकर अवस्थित किया जायेगा)। जल संग्रहण व्यवस्था की मवेशी आदि से आवश्यकतानुसार सुरक्षा की व्यवस्था की जायेगी। जल संग्रहण टंकियों को सामान्यतः सरकारी / सार्वजनिक भूमि पर स्थित किया जायेगा; स्थान का निर्धारण जल वितरण प्रणाली को ध्यान में रखकर (जिससे की सभी परिवारों को बराबर जल वितरण हो सके) किया जायेगा।

जल वितरण प्रणाली

इसके अन्तर्गत जल संग्रहण व्यवस्था से गलियों तक जल का अंतरण सम्मिलित है। जल
वितरण प्रणाली की पाईप साधारणतः जमीनी सतह से कम-से-कम ढाई फीट नीचे बिछायी जायेगी। जल वितरण प्रणाली में साधारणतः पीoभी0सी0 (PVC) या हाई डेंसिटी पाली एथीलिन (HDPE) पाईप का उपयोग किया जायेगा। सार्वजनिक जल वितरण प्रणाली में उपयोग की जाने वाली पाईप योजना की रूपरेखानुसार उचित प्रेशर रेटिंग का होना आवश्यक है।

जल वितरण प्रणाली के साथ घर का संयोजन

जल वितरण प्रणाली के साथ घर का संयोजन (घरेलू पाईप कनेक्शन)1/2 (आधा इंच) पाईप के माध्यम से एक फेरूल कनेक्शन द्वारा ही दिया जायेगा।

घर की अंदरूनी वितरण व्यवस्था

इसकी पूरी जिम्मेदारी लाभुक परिवार की होगी। लाभुक परिवार अधिक से अधिक तीन स्थान पर टेप (नल) लगा सकेंगे (रसोई घर में, शौचालय में तथा स्नान घर में)। प्रथमवार योजना अन्तर्गत यह तीनों नल (वितरण पाईप सहित) लगाया जायेगा तथा वितरण पाईप की अधिकतम लंबाई 25 फीट के अंदर तक योजना में ही सन्निहित होगी। इसके अतिरिक्त पाईप की आवश्यकता होने पर इसके व्यय का वहन उपभोक्ता द्वारा किया जायेगा। लाभुक परिवार / परिवारों द्वारा अपनी आवश्यकता / उपयोगिता के अनुरुप रसोई घर का नल के स्थल का चयन रसोईघर के बाहर या अपनी सुविधानुसार कई घर मिलाकर एक सामुहिक स्थल पर भी किया जा सकेगा। योजना क्रियान्वयन के उपरान्त घर केनलों एवं पाईपों के रख-रखाव का दायित्व उपभोक्ता का होगा।

मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना का ग्राम पंचायत/वार्ड स्तर पर परिचालन

ग्राम पंचायत स्तर पर, मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना परिचालन के दो मुख्य चरण होंगे -

(1) वित्तीय वर्ष में लिये जाने वाले वार्डों का चयन एवं

(2) वार्ड स्तर पर परियोजना क्रियाकलाप ।

वार्डों का चयन/प्राथमिकता

वार्ड सभा से अनुमोदित योजनाओं को ग्राम पंचायत स्तर पर समेकित कर ग्राम सभा द्वारा पारित किया जायेगा तथा राशि की उपलब्धता के अनुरूप प्रथम वर्ष के लिए 20 प्रतिशत,  द्वितीय वर्ष के लिए 30 प्रतिशत, तृतीय वर्ष के लिए 30 प्रतिशत एवं चतुर्थ वर्ष के लिए 20 प्रतिशत वार्डों को योजना के कार्यान्वयन हेतु चयनित किया जायेगा। वार्डों के चयन में प्राथमिकता का निर्धारण सर्वप्रथम वार्डों की अनुसूचित जनजाति/अनुसूचित जाति की संख्या बाहुल्यता के आधार पर जनसंख्या के घटते क्रमानुसार किया जायेगा। अवशेष वार्डों के चयन की प्राथमिकता का आधार वार्डों की कुल जनसंख्या के घटते क्रम को रखा जायेगा। यदि भौगोलिक रूप से एक वार्ड में दूसरे वार्ड का क्षेत्र आंशिक रूप से शामिल हो रहा है, तो उसे इसी वार्ड की योजना में शामिल कर लिया जायेगा। ODF ग्राम पंचायतों को इस योजना अन्तर्गत प्राथमिकता पर पूर्णतः आच्छादित किया जायेगा। इस निमित संबंधित ग्राम पंचायतों को राज्य योजना मद से विशेष सहायता दी जायेगा। पंचायत अन्तर्गत मॉडल  विकसित करने हेतु खुले में शौच से मुक्त(ODF) वार्ड का चयन प्राथमिकता के आधार पर किया जा सकेगा।

परियोजना क्रियाकलाप

प्रतिदर्शात्मक रूप से, ग्रामीण जल आपूर्ति योजनाओं की अवधि सामान्यतः 6 माह होगी। वार्ड स्तर पर परियोजना क्रियाकलाप तीन मुख्य चरणों में बांटा गया है, यथा

  • पूर्व तैयारी (अधिकतम एक माह);
  • जल आपूर्ति योजना प्रणाली की आयोजना (अधिकतम एक माह);
  • योजना कार्यान्वयन (अधिकतम तीन माह);
  • योजना चालू करना एवं सुचारू रूप से संचालन (एक माह)।

पूर्व तैयारी

इस चरण की अवधि साधारणतः एक माह होगी।

  • वित्तीय वर्ष में लिये जाने वाले वार्डों पर ग्राम पंचायत द्वारा सहमति ।
  • वार्ड स्तरीय वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति का बैंक में खाता खोलना।
  • विभिन्न संचार माध्यमों से प्रयोक्ताओं को योजना के बारे में जानकारी देना एवं उनकी भूमिका के बारे में जागरूक करना।
  • वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति का प्रशिक्षण, Exposure visit एवं जागरूकता (लेखा-जोखा, कार्यवृत्त एवं अन्य अभिलेख रखना,
  • जिम्मेदारियां एवं कार्यकलाप, जलापूर्ति योजनाओं के विभिन्न अवयवों का निर्धारण एवं उनके क्रय की प्रक्रिया) कार्यक्रम ।
  • निर्धारित वार्डों में साधारण सर्वेक्षणः प्रयोक्ता परिवारों की संख्या एवं जल की मात्रा का अनुमान।

जल आपूर्ति योजना प्रणाली की आयोजना

इस चरण की अवधि साधारणतः एक माह होगी।

  • समुदाय/प्रयोक्ताओं की रूचि के आधार पर जल आपूर्ति योजना की रूपरेखा तैयार करना (जल वितरण प्रणाली की कुल लम्बाई, जल संग्रहण व्यवस्था एवं जल स्रोतों के स्थान का चयन, इत्यादि),
  • जल आपूर्ति योजना का प्राक्कलन तैयार करना एवं तकनीकी/प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त करना,
  • योजना के प्रारूप के अनुसार वित्त की मांग तथा वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति के खाते में राशि हस्तांतरण,
  • जल आपूर्ति वितरण प्रणाली का कार्यान्वयन ।

योजना कार्यान्वयन (अधिकतम तीन माह)

  • जल आपूर्ति योजना की जरूरत के अनुसार आवश्यक सामग्रियों / प्लम्बर / तकनीशियन की उपलब्धता / आपूर्ति ।
  • निर्धारित स्थान पर जल स्रोत का निर्माण (नलकूप का निर्माण, सबमर्सिबल पम्प बिठाना एवं विद्युत ग्रिड से जोड़ना)।
  • निर्धारित स्थान पर जल संग्रहण की व्यवस्था करना।
  • जल स्रोत से जल संग्रहण व्यवस्था तक पाईप लाईन बिछाना।
  • जल वितरण प्रणाली का रूपरेखानुसार निर्माण।
  • वार्ड में अगर पूर्व से पक्की गली है तथा पाईप बिछाने के क्रम में इसे तोड़ना पड़े तो योजना मद की राशि से इसकी पुनः मरम्मत की जायेगी।
  • जल आपूर्ति योजना कार्यान्वयन की समीक्षा एवं अनुरक्षण।
  • निर्माणाधीन संरचना की समय-समय पर गुणवत्ता की जांच एवं समीक्षा ।
  • वित्त प्रबंधन ।
  • समय-समय पर प्रयोक्ताओं के साथ बैठक कर प्रगति की जानकारी देना; आय-व्यय का लेखा-जोखा ।

योजना चालू करना एवं सुचारू रूप से संचालन (एक माह)

  • सम्पूर्ण योजना तैयार हो जाने पर जल आपूर्ति योजना चालू करना।
  • योजना के संचालन के लिए आवश्यकतानुसार पम्प चालक तथा प्लम्बर के साथ अनुबंध करना।
  • जल आपूर्ति योजना के संचालन के लिए वार्ड सभा के माध्यम से उपभोक्ता शुल्क निर्धारित करना।
  • निर्धारित अवधि अनुसार उपभोक्ता शुल्क का संग्रहण, उपयोग एवं इसका लेखा संधारण ।
  • जल आपूर्ति योजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए वित्त प्रबंधन ।

निरंतरता

जल आपूर्ति योजना का प्रवर्तन होने के एवं सुचारू रूप से पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने के पश्चात्, योजना का संचालन एवं प्रबंधन का दायित्व वार्ड स्तरीय वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति के पास रहेगा। स्थानीय वार्ड के नागरिक मिलकर इस योजना से निरंतर सेवाएँ प्राप्त करने के लिए वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति की सहायता करेंगे।

योजना क्रियान्वयन के विभिन्न चरण 

कार्य पूर्व नियोजन (Pre Work Planning)

  • वार्ड सभा का आयोजन कर PRA पद्धति से वार्ड की आधारभूत संरचना एवं बेसलाईन सर्वेक्षण का कार्य संपादित होगा। इस दौरान प्रखण्ड विकास पदाधिकारी द्वारा उपलब्ध कराये गये प्रशिक्षक के माध्यम से वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति द्वारा वार्ड का नजरी नक्शा तैयार करेंगे और निर्धारित प्रपत्र में बेसलाईन सूचनाओं को अंकित करेंगे।
  • यदि भौगोलिक रूप से एक वार्ड में दूसरे वार्ड का क्षेत्र आंशिक रूप से शामिल हो रहा है, तो उसे इसी वार्ड की योजना में शामिल कर लिया जायेगा।
  • ग्राम पंचायत में योजना के प्रति व्यापक जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रचार-प्रसार एवं सघन संपर्क अभियान चलाया जायेगा। जलापूर्ति योजना के कार्य में आने वाली बाधाओं यथा अतिक्रमण, भूमि आवश्यकता, आदि को दूर किया जायेगा।
  • वार्ड सदस्य द्वारा ग्राम पंचायत को सूचना देते हुए वार्ड सभा का आयोजन किया जायेगा। वार्ड सभा के दौरान मानक प्राक्कलन के अनुरूप वार्ड के जलापूर्ति की योजना निर्धारित प्रपत्र में तैयार की जायेगी। प्राप्त योजना प्रस्ताव को ग्राम पंचायत के अनुमोदन हेतु वार्ड सभा में अनुशंसा प्राप्त की जायेगी।
  • वार्ड सभा से अनुमोदित योजनाओं को ग्राम पंचायत स्तर पर समेकित कर ग्राम सभा द्वारा पारित किया जायेगा तथा राशि की उपलब्धता के अनुरूप प्रथम वर्ष के लिए 20 प्रतिशत, द्वितीय वर्ष के लिए 30 प्रतिशत, तृतीय वर्ष के लिए 30 प्रतिशत एवं चतुर्थ वर्ष के लिए 20 प्रतिशत वार्डों को योजना के कार्यान्वयन हेतु चयनित किया जायेगा।
  • वार्डों के चयन में प्राथमिकता का निर्धारण सर्वप्रथम वार्डों की अनुसूचित जनजाति / अनुसूचित जाति की संख्या बाहुल्यता के आधार पर जनसंख्या के घटते क्रमानुसार किया जायेगा तथा शेष वार्डों की प्राथमिकता कुल जनसंख्या के घटते क्रमानुसार किया जायेगा। पंचायत अन्तर्गत मॉडल  विकसित करने हेतु खुले में शौच से मुक्त(ODF) वार्ड का चयन प्राथमिकता के आधार पर किया जा सकेगा।
  • वर्ष वार प्राथमिकता सूची को ग्राम पंचायत के अनुमोदनोपरांत तुरंत जन सामान्य के दावा-आपत्ति हेतु एक सप्ताह का समय / तिथि निर्धारित कर प्रकाशित किया जायेगा और उक्त अवधि में प्राप्त दावा/आपत्ति का निराकरण अवधि की समाप्ति के सात कार्य दिवस के भीतर ग्राम पंचायत द्वारा करते हुए पंचायत भवन में अंतिम प्राथमिकता सूची प्रकाशित की जायेगी।
  • मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना के क्रियान्वयन हेतु वार्ड सभा में वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति का गठन किया जायेगा। इस समिति के पदेन अध्यक्ष वार्ड सदस्य होंगे।
  • विभिन्न संचार माध्यमों से प्रयोक्ताओं को योजना के बारे में जानकारी देना एवं उनकी भूमिका के बारे में जागरूक करना। वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति का प्रशिक्षण, Exposure visit एवं जागरूकता कार्यक्रम ।

योजना क्रियान्वयन नियोजन 

  • ग्राम पंचायत द्वारा योजना क्रियान्वयन के अनुमोदन के तीन दिनों के अन्दर वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति की बैठक आयोजित कर समिति का बैंक खाता खोले जाने हेतु आवश्यक कार्रवाई की जायेगी और बैंक खाता खोले जाने की सूचना ग्राम पंचायत एवं प्रखण्ड विकास पदाधिकारी को उपलब्ध कराई जायेगी। बैंक खाता का संचालन वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति के अध्यक्ष और सदस्य सचिव द्वारा संयुक्त रूप से किया जायेगा।
  • ग्राम पंचायत द्वारा योजना क्रियान्वयन के अनुमोदन के पाँच दिनों के अन्दर कनीय अभियंता की सहायता से वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति द्वारा जलापूर्ति योजना का विस्तृत योजना प्रतिवेदन (Detailed Project Report-DPR) तैयार कर इसकी तकनीकी स्वीकृति प्राप्त की जायेगी और योजना प्रतिवेदन (Detailed Project Report-DPR) प्रशासनिक स्वीकृति हेतु ग्राम पंचायत को समर्पित किया जायेगा।
  • ग्राम पंचायत द्वारा विहित प्रक्रिया के अनुरूप सात दिनों के भीतर योजना की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की जायेगी और वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति को निर्धारित प्रपत्र में स्वीकृत्यादेश निर्गत किया जायेगा।
  • वार्षिक रूप से चयनित वार्डवार जलापूर्ति योजनाओं की विवरणी पंचायत अंतर्गत किसी प्रमुख व सार्वजनिक स्थलों पर योजना का विवरण एवं प्राक्कलन राशि दर्शाते हुए आम जन की सूचना हेतु प्रदर्शित की जायेगी। योजना प्रारंभ एवं 9 माह में समाप्त होने का संभावित विवरण भी अंकित किया जायेगा। सूचना पट्ट पर वार्ड सदस्य एवं मुखिया का मोबाईल नम्बर अनिवार्य रुप से परिदर्शित किया जायेगा।
  • स्वीकृत्यादेश के साथ ही ग्राम पंचायत द्वारा योजना में स्वीकृत राशि का शतप्रतिशत निधि वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति के बैंक खाता में अंतरित किया जायेगा और क्रय एवं वित्त प्रबंधन हेतु समिति के सदस्यों का उन्मुखीकरण किया जायेगा।
  • वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति के सदस्य मनरेगा अंतर्गत किये जाने योग्य कार्य के लिए इच्छुक ग्रामीणों को चिन्हित कर उनका क्षमता संवर्द्धन करेंगे और प्लम्बर के कार्य में उनका कौशल विकास किया जायेगा। महिला स्वयं सहायता समूहों को भी प्लम्बर के रूप में कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। इस हेतु प्रखण्ड पंचायत राज पदाधिकारी संसाधन व्यक्ति (Resource Person) की उपलब्धता सुनिश्चित करेंगे।
  • वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति अनुमोदित DPR के अनुरूप कार्य के लिए सामग्री के क्रय हेतु मार्केट सर्वे कर सामग्रियों का दर प्राप्त करेगी और निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले व किफायती सामग्रियों की दर सूची तैयार कर समिति की बैठक में दर पर अनुमोदन प्रदान करेगी। इसकी लिखित सूचना निर्धारित प्रपत्र में ग्राम पंचायत को सूचनार्थ उपलब्ध कराई जायेगी।
  • दर निर्धारित होते ही चयनित आपूर्तिकर्ता एजेंसी को निर्धारित प्रपत्र में क्रयादेश निर्गत किया जायेगा और इसकी प्रति ग्राम पंचायत को सूचनार्थ उपलब्ध कराई जायेगी।

योजना क्रियान्वयन

  • विहित प्रावधानों के अनुरूप मजदूरों, तकनीशियनों एवं प्रशिक्षित प्लम्बरों के माध्यम से जलापूर्ति योजना का कार्य प्रारंभ कराया जायेगा।
  • ग्रामीणों के बीच योजना प्रारंभ के बारे में प्रचार-प्रसार किया जायेगा। जलापूर्ति योजना हेतु चयनित वार्डों में योजना प्रारंभ होने के उपलक्ष्य में स्वागत उत्सव आदि का भी आयोजन किया जा सकता है। इस कार्यक्रम में लाभुक परिवार एकत्र होकर योजना के क्रियान्वयन में सहयोग और बेहतर रखरखाव/अनुरक्षण का संकल्प लेंगे।
  • कार्य की प्रगति के दस्तावेजीकरण एवं मापी हेतु कार्य स्थल पर कार्य-पुस्तिका/ मस्टर रौल रखी जायेगी और इसे दैनिक आधार पर संधारित किया जायेगा। प्रतिदिन कार्य समाप्ति के उपरांत वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति के अध्यक्ष / सचिव अथवा नामित सदस्य बारी-बारी से संपादित कार्य को प्रतिहस्ताक्षरित व अभिप्रमाणित करेंगे।
  • कनीय अभियंता क्रियान्वयन अवधि के दौरान वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति से जुड़कर कार्य के संबंध में सभी आवश्यक सहयोग प्रदान करेंगे और दैनिक आधार पर प्रखण्ड विकास पदाधिकारी को लिखित रूप से प्रतिवेदन देंगे।
  • योजना के गुणवता एवं अनुश्रवण को सुनिश्चित करने के लिए बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा-10 के तहत निगरानी समिति गठित की जायेगी और योजना का अनुश्रवण सुनिश्चित किया जायेगा। निगरानी समिति के सदस्य के रूप में वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति के सदस्यों एवं उनके परिवार को शामिल नहीं किया जायेगा।
  • योजना के अंतर्गत होने वाले कार्य के संबंध में वार्ड सदस्य एवं वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति के अन्य सदस्य संपर्क अभियान चला कर ग्रामीणों को जानकारी देंगे तथा टंकी/पम्प/जलापूर्ति पाईप की सुरक्षा एवं टंकी की समय-समय पर सफाई तथा जल की निर्धारित अवधि पर गुणवत्ता परीक्षण के लिए संकल्प दिलायेंगे।

योजना अंतर्गत अनुश्रवण, निगरानी एवं प्रबंधन

  • सामग्री आपूर्तिकर्ता एजेंसी द्वारा आपूर्ति किये जाने वाले निर्माण सामग्रियों हेतु एक रजिस्टर संधारित किया जायेगा, जिसे दैनिक रूप से वार्ड सदस्यसह–अध्यक्ष, वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति के द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित किया जायेगा।
  • समय-समय पर मुखिया, निगरानी समिति के सदस्य एवं अन्य पदाधिकारी भी सामग्री रजिस्टर का अनुश्रवण करेंगे और अपना हस्ताक्षर व टिप्पणी अंकित करेंगे।
  • समिति द्वारा आय-व्यय के संधारण हेतु प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा नामित लेखापाल-सह-आई.टी. सहायक की सहायता ली जा सकेगी। समस्त वित्तीय लेन देन का दस्तावेजीकरण कर संधारित किया जायेगा।
  • संपादित कार्य का भुगतान समिति की बैठक में अनुमोदित वित्तीय प्रस्ताव के आलोक में किया जायेगा। भुगतान विपत्र पर अध्यक्ष और सदस्य सचिव दोनों हस्ताक्षर करेंगे।
  • कार्य से संलग्न मज़दूरों, प्लम्बर आदि के कार्य की गणना हेतु यथा विहित एवं प्रचलित मस्टर रोल तैयार कर संधारित किये जायेंगे। इस हेतु मेट का चयन वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति के द्वारा किया जायेगा।
  • योजना समाप्ति के उपरांत कनीय अभियंता द्वारा कृत कार्य की मापी कर मापी पुस्तिका में दर्ज किया जायेगा और ग्राम पंचायत को उपलब्ध कराया जायेगा।
    • योजना के दस्तावेजीकरण हेतु समिति द्वारा प्रत्येक पृथक निर्माण कार्य में कार्य के विभिन्न अवयव यथा-बोरिंग  / चबुतरा के निर्माण तथा वितरण पाईप एवं कनेक्शन्स पाईप बिछाने के कार्य का कम से कम तीन फोटोग्राफी जियोटैग के साथ कराई जायेगी (1. कार्य शुरू होने के पूर्व, 2. कार्य के दौरान 3. कार्य समाप्ति के उपरांत) एवं वितरण पाईप / कनेक्शन पाईप के लम्बाई अधिक होने की स्थिति में प्रत्येक 50 मीटर के पाईप वितरण कार्य पर तीन फोटो जियोटैग के साथ लिये जायेंगे और कार्य समाप्ति प्रतिवेदन के साथ संलग्न किये जायेंगे। पंचायत रोजगार सेवक/पंचायत तकनीकी सहायक/ग्रामीण आवास सहायक/ विकास मित्र / चिन्हित प्रेरक इस कार्य को आवश्यकतानुसार संपादित करेंगे। इस हेतु विभाग द्वारा मोबाईल आधारित रिर्पोटिंग एप्प तैयार कर विशेष प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जायेगा।
    • वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति कार्य समाप्ति की विधिवत सूचना एवं उपयोगिता प्रमाण पत्र के साथ ग्राम पंचायत को निर्धारित प्रपत्र में उपलब्ध करायेगी। वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति द्वारा वित्तीय लेन देन का उपयोगिता प्रमाण-पत्र निर्धारित प्रपत्र में तैयार कर सभी विपत्रों एवं मौलिक दस्तावेजों के साथ ग्राम पंचायत को उपलब्ध कराया जायेगा।
    • प्राप्त उपयोगिता प्रमाण-पत्र को ग्राम पंचायत की कार्यकारिणी की बैठक में अनुमोदन हेतु रखा जायेगा और निगरानी समिति के प्रतिवेदन, कनीय अभियंता की मापी एवं मुखिया / वार्ड सदस्यों के भ्रमण / निरीक्षण प्रतिवेदन के आधार कार्य को संपादित मानते हुए व्यय को अनुमोदित किया जायेगा। कार्य समाप्ति के एक माह के अन्दर ग्राम पंचायत को सूचित कर वार्ड सदस्य वार्ड सभा आहूत करेंगे और सामाजिक अंकेक्षण पद्धति से सम्पूर्ण कार्य का ब्योरा ग्रामीण समुदाय के बीच साझा करेंगे।

योजना प्राक्कलन

  • योजनाओं के कार्यान्वयन हेतु विभाग द्वारा जिला स्तरीय समिति के माध्यम से ग्राम पंचायतों को विभिन्न प्रकार के तकनीकी स्वीकृति प्रदत्त मानक प्राक्कलन उपलब्ध कराये जायेंगे।
  • ग्राम सभा द्वारा अनुमोदित कार्य योजना में सम्मिलित योजनाओं का प्राक्कलन विभाग द्वारा विभिन्न आकार / प्रकार के उपलब्ध कराये गये तकनीकी स्वीकृति प्रदत्त मानक प्राक्कलनों के आधार पर तैयार किया जायेगा।
  • योजनाओं की प्रशासनिक स्वीकृति ग्राम पंचायत की कार्यकारिणी द्वारा ग्राम सभा द्वारा पारित प्राथमिकता सूची एवं राशि की उपलब्धता के अनुरूप दी जायेगी।

सामग्री आपूर्ति श्रृखंला (Material supply Chain) की उपलब्धता

ग्राम / पंचायत स्तर पर निर्माण सामग्री आपूर्ति प्रबंधन को सुदृढ़ किया जायेगा

  • जिला स्तर पर जिला पंचायत राज पदाधिकारी, प्रखण्ड स्तर पर प्रखण्ड विकास पदाधिकारी और पंचायत स्तर पर मुखिया के द्वारी आस-पास के बाजार में उपलब्ध निर्माण सामग्री के आपूर्तिकर्ताओं का आकलन एवं सूची तैयार करने का कार्य किया जायेगा। आपूर्तिकर्ताओं का सर्वेक्षण कर, मूल्य तालिका तैयार की जायेगी और संबंधित वार्ड सदस्यों, मुखिया, आदि के साथ साझा किया जायेगा।
  • युवा उद्यमियों/सामाजिक उद्यमियों, महिला स्वयं सहायता समूहों को आपूर्तिकर्ता के रूप में कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया जायेगा।

मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना का वित्त पोषण एवं प्रबंधन

पंचायतों को चौदहवें वित्त आयोग की अनुशंसा से प्राप्त होनेवाली बुनियादी अनुदान (Basic Grant) की कम-से-कम 40 प्रतिशत राशि एवं पंचम राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा से प्राप्त होनेवाली प्रतिनिधायन (Devolution) की राशि का कम-से-कम 45 प्रतिशत राशि को जोड़ने के उपरांत वार्ड हेतु स्वीकृत पेयजल निश्चय योजना को पूरा करने के लिए वांछित अवशेष राशि को राज्य योजना मद से पूरा किया जायेगा। इस योजना हेतु ग्राम पंचायत द्वारा एक अलग बैंक खाता एवं सहायक रोकड़ बही कैश बुक संधारित किया जायेगा।

निर्माण तकनीक एवं मॉडल प्राक्कलन

ग्राम पंचायत के क्षेत्रों की स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों, को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग क्षेत्रों के अनुरूप जलापूर्ति योजना हेतु विभिन्न विशिष्टियों के विभिन्न प्रकार के मानक प्राक्कलन तैयार किये जायेंगे। इस हेतु विभाग द्वारा एक हरितका का विकास कर वार्ड सदस्यों को ग्राम पंचायत के माध्यम से उपलब्ध कराया जायेगा, ताकि योजना के क्रियान्वयन में तकनीकी चुनौतियों को सहज किया जा सके। मानक प्राक्कलन पर जिला एवं प्रखण्ड स्तर पर विशेषज्ञों की देख-रेख में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।

योजना का अनुश्रवण एवं निगरानी

  • कार्यक्रम के क्रियान्वयन की निगरानी वार्ड सभा/ग्राम सभा द्वारा गठित निगरानी समिति के द्वारा किया जायेगा। प्रखंड स्तर पर योजना का नियमित प्रखण्ड विकास पदाधिकारी द्वारा किया जायेगा। जिला स्तर पर योजनाओं का नियमित अनुश्रवण सुशासन कार्यक्रम के लिए गठित अनुश्रवण समिति द्वारा किया जायेगा।
  • अनुश्रवण व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए मोबाईल फोन आधारित एप्प का विकास किया जायेगा, जिसकी सहायता से किसी भी व्यक्ति द्वारा जलापूर्ति योजना की स्थिति एवं शिकायतें दर्ज की जा सकेंगी। योजना के कार्य को जियोटैग करने हेतु सूचना प्रोद्यौगिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जायेगा।
  • राज्य स्तर से योजना के क्रियान्वयन, अनुश्रवण एवं गुणवत्ता की निगरानी हेतु सूचीबद्धता पर राज्य स्तरीय गुणवत्ता अनुश्रवक (State Quality Monitors) रखे जायेंगे और उनसे अनुश्रवण एवं गुणवत्ता जॉच का कार्य कराया जायेगा। योजनाओं की गुणवत्ता जाँच के अलावा शिकायतों, आदि की जाँच कराये जाने में इनका उपयोग किया जायेगा।
  • योजना के क्रियान्वयन अथवा दिशा-निर्देश से संबंधित स्पष्टीकरण, विवाद निष्पादन हेतु सामान्यतः जिला पदाधिकारी सक्षम प्राधिकार होंगे। विशेष परिस्थिति में जिला पदाधिकारी द्वारा आवश्यकतानुसार पंचायती राज विभाग से मार्गदर्शन प्राप्त कर अग्रेतर कार्रवाई की जायेगी।
  • रखरखाव एवं अनुरक्षण  जलापूर्ति पर होने वाले आवर्ती व्यय एवं रख-रखाव मद की राशि की व्यवस्था वार्ड सभा द्वारा उपभोक्ता शुल्क निर्धारित कर किया जायेगा। रख-रखाव सामुदायिक सहयोग राशि, अन्य स्रोतों से प्राप्त होने वाले अनुदान/वित्तीय सहायता या अन्य योजना का अभिसरण कर भी किया जा सकेगा। रखरखाव एवं अनुरक्षण का दायित्व वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति का होगा। अनुरक्षण हेतु राशि वार्ड की वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति के बैंक खाते में संधारित की जायेगी।
  • सामाजिक सहभागिता कोषांग (Community Participation cell) की स्थापना
  • ग्राम पंचायतों को 14वें वित्त आयोग एवं पंचम राज्य आयोग की अनुशंसा से प्राप्त होने वाली अनुदान राशि को लोक निर्माण की विभिन्न योजनाओं में व्यय करने हेतु नेतृत्व कौशल एवं प्रबंधन क्षमता के विकास के साथ ही सामाजिक सहभागिता के प्रभावी साधन (tool) Participatory Rural Appraisal (PRA) हेतु सहजकर्ताओं (facilitators) की आवश्यकता होगी। इस हेतु सामाजिक सहभागिता कोषांग की स्थापना की जायेगी। कोषांग का कार्य पंचायतों में PRA गतिविधियों के सुचारू कार्यान्वयन हेतु सहजकर्ताओं (facilitators) की टीम तैयार करना होगा। साथ ही, यह कोषांग व्यापक सामाजिक जागरूकता हेतु IEC, Teaching, Learning Materials आदि का भी विकास करेगा।

बिहार वार्ड सभा तथा वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति कार्य संचालन नियमावली, 2017

बिहार गजट( असाधारण अंक,बिहार सरकार द्वारा प्रकाशित,(संo पटना 568) पटना, वृहस्पतिवार, 29 जून 2017- पंचायती राज विभाग- सं0 8प0/वि0-04-01/2016/5685/पंoरा0—बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 (बिहार अधिनियम, 6, 2006),

समय-समय पर यथासंशोधित, की धारा 146 सह–पठित धारा 170 क, 170 ख एवं 170 ग द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बिहार के राज्यपाल निम्नलिखित नियमावली बनाते हैं -

बिहार वार्ड सभा तथा वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति कार्य संचालन नियमावली, 2017

1.  संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारंभ

(1) यह नियमावली बिहार वार्ड सभा तथा वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति कार्य संचालन नियमावली, 2017 कही जा सकेगी।

(2)  इसका विस्तार सम्पूर्ण बिहार राज्य में होगा।

(3) यह तुरंत प्रवृत्त होगी।

2. परिभाषाएं

इस नियमावली में, जबतक कोई बात, विषय या संदर्भ के विरूद्ध न हो –

(क) अधिनियम से अभिप्रेत है बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006;

(ख) धारा से अभिप्रेत है बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा;

(ग) सरकार से अभिप्रेत है बिहार राज्य सरकार

(घ) मुखिया से अभिप्रेत है इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन किसी ग्राम पंचायत का निर्वाचित मुखिया;

(ङ)  ग्राम पंचायत के सदस्य या वार्ड सदस्य से अभिप्रेत है अधिनियम की धारा 12 की उप धारा (1) के खंड (ख) के अधीन निर्वाचित ग्राम पंचायत का सदस्य;

(च )  ग्राम सभा से अभिप्रेत है ग्राम स्तर पर पंचायत के क्षेत्र के भीतर समाविष्ट किसी ग्राम से संबंधित निर्वाचक नामावली में रजिस्ट्रीकृत व्यक्तियों को मिलाकर गठित निकाय;

(छ)  वार्ड सभा से अभिप्रेत है धारा 170क की उप धारा-(1) के अधीन गठित वार्ड सभा; वार्ड सभा सचिव से अभिप्रेत है इस नियमावली के नियम-3 के उप-नियम (4) के अधीन चयनित वार्ड सभा सचिव ;

(ज ) वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति से अभिप्रेत है अधिनियम की धारा 170 ख के अधीन गठित वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति;

(झ) सदस्य सचिव से अभिप्रेत है वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति का सदस्य सचिव,

(ञ)  कार्यपालक पदाधिकारी से अभिप्रेत है अधिनियम की धारा 60 के अधीन नियुक्त पंचायत समिति का कार्यपालक पदाधिकारी;

(ठ) इस नियमावली में प्रयुक्त किन्तु अपरिभाषित सभी शब्दों तथा अभिव्यक्तियों से वही अभिप्रेत

होंगे जो अधिनियम में क्रमशः उनके लिए समनुदेशित किए गए हों।

3. वार्ड-सभा और उसकी बैठकें

(1) ग्राम पंचायत के प्रत्येक प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र या वार्ड के लिए अलग-अलग वार्ड सभा होगी। उस वार्ड की निर्वाचक नामावली में दर्ज सभी व्यक्ति संबंधित वार्ड–सभा के सदस्य होंगे।

(2) वार्ड से निर्वाचित ग्राम पंचायत सदस्य (वार्ड सदस्य) अधिनियम में विनिर्दिष्ट कृत्यों का पालन करने के लिए, समय-समय पर, वार्ड सभा की बैठकें बुलायेगा किन्तु किसी भी वार्ड सभा की दो बैठकों का अन्तराल तीन महीने से अधिक का नहीं होगा।

(3) नियमावली के नियम-4 में यथानिर्दिष्ट स्थान पर नियमित रूप से वार्ड-सभा की बैठकों का आयोजन किया जाएगा। वार्ड सदस्य द्वारा वार्ड सभा का आयोजन नहीं कराए जाने की स्थिति में, संबंधित ग्राम पंचायत का मुखिया अथवा मुखिया द्वारा अधिकृत किये जाने पर उक्त ग्राम पंचायत का उप–मुखिया बैठक का संयोजन करेगा तथा बैठक की अध्यक्षता करेगा। जब मुखिया अथवा उप–मुखिया भी वार्ड सभा की बैठक आयोजित करने में विफल रहे या वार्ड सदस्य का पद रिक्त हो, तब संबंधित पंचायत समिति के कार्यपालक पदाधिकारी की दृष्टि में यह बात लायी जाएगी, जो संबंधित मुखिया / वार्ड सदस्य को ऐसे वार्ड सभा की बैठक शीघ्र आयोजित करने हेतु दिशा-निर्देश दे सकेगा।

(4) वार्ड सभा अपने सदस्यों के बीच से एक व्यक्ति को वार्ड सभा के सचिव के रूप में कार्य करने हेतु चयनित करेगी, जिसकी शैक्षणिक योग्यता न्यूनतम दसवीं कक्षा उत्तीर्ण होगी। अध्यक्ष अथवा ग्राम पंचायत/ग्राम कचहरी के किसी पदधारक के परिवार के सदस्य को वार्ड सभा सचिव के रूप में नहीं चुना जाएगा। वार्ड सभा सचिव का मुख्य दायित्व वार्ड सदस्य के निदेशों के अधीन वार्ड सभा की बैठक हेतु सूचना निर्गत करना, बैठकों की कार्यवाही अभिलिखित करना तथा वार्ड सभा द्वारा समय-समय पर सौंपे गये अन्य दायित्वों का निर्वहन करना होगा।

4. बैठक का स्थान

वार्ड सभा की बैठक वार्ड में अवस्थित पंचायत भवन/पंचायत सरकार भवन या सामुदायिक भवन या किसी अन्य सुविधाजनक सार्वजनिक स्थान पर होगी। यह किसी निजी मकान या स्थान पर नहीं होगी। इस बात का ध्यान रखा जायेगा कि बैठक का स्थान खुला हो तथा वहाँ पर्याप्त रोशनी हो और वार्ड सभा के सदस्य एक साथ आसानी से बैठ सकें।

5. बैठक की नोटिस का प्रकाशन

(1) बैठक की तारीख, समय एवं स्थान को अंतर्विष्ट करते हुए नोटिस,उसमें कार्यसूची का ब्यौरा देते हुए, कम-से-कम 7 दिन पूर्व, निम्नलिखित रीति से प्रकाशित एवं प्रचारित की जाएगी -

  • वार्ड क्षेत्र में एक या अधिक सहजदृश्य स्थानों पर चिपका करके, और
  • वार्ड क्षेत्र में डुगडुगी या ढोल पिटवाकर या किसी ध्वनिविस्तारक यंत्र से ऐसी बैठक की घोषणा करके,या
  • स्कूलों में प्रार्थना के समय बच्चों को जानकारी देकर ताकि वे अपने अभिभावकों को वार्ड-सभा की बैठक के  संबंध में संदेश दे सकें, या
  • वार्ड सदस्य एवं वार्ड सभा सचिव द्वारा घर-घर जाकर व्यक्तिगत सम्पर्क करके, परन्तु विशेष या आपात बैठक विशेष प्रयोजनों के लिए अल्प अंतराल अवधि की नोटिस देकर बुलायी जा सकेगी, परन्तु ऐसी कालावधि तीन दिनों से कम की नहीं होगी।
  • वार्ड–सभा की बैठक सामान्यतया सप्ताह के किसी दिन सुविधाजनक समय पर आयोजित की जाएगी ताकि घर-गृहस्थी के कार्यों के निपटारे के पश्चात् महिलाएं भी इसमें सहजता से भाग ले सकें।
  • नोटिस की एक प्रति संबंधित मुखिया तथा वार्ड में निवास करने वाले पंचायती राज संस्था के निर्वाचित सदस्यों को भी भेजी जाएगी।
  • ग्राम पंचायत संबंधित वार्ड–सभा की बैठक के लिए, ग्राम सभा की बैठक हेतु विहित कालावधि से कम-से-कम एक माह पूर्व, ऐसी बैठक को आयोजित करने के लिए सुविधाजनक तारीखों का सुझाव अग्रिम तौर पर वार्डो को दे सकेगी जिससे ग्राम सभा की बैठक के पूर्व सभी वार्ड सभाओं की बैठक का आयोजन किया जा सके। ग्राम पंचायत द्वारा सुझायी गई तिथियों के अनुसार सामान्यतः वार्ड–सभा की बैठक की नोटिस जारी की जायेगी।

गणपूर्ति एवं गणपूर्ति के अभाव में वार्ड सभा की बैठक का स्थगन

वार्ड-सभा के कुल सदस्यों के दसवें भाग या कम-से-कम पचास सदस्यों की उपस्थिति से किसी बैठक की गणपूर्ति होगी। किसी बैठक के लिए नियत समय पर यदि गणपूर्ति नहीं हुई हो या यदि बैठक आरंभ हो जाए और गणपूर्ति की कमी की ओर ध्यान आकृष्ट किया जाए, तो ऐसी स्थिति में पीठासीन पदाधिकारी एक घंटा प्रतीक्षा करेगा और यदि उसके भीतर भी गणपूर्ति नहीं होती हो तो पीठासीन पदाधिकारी उस बैठक को, अगले सप्ताह के किसी दिन एवं किसी समय के लिए, जो उसके द्वारा निर्धारित किया जायेगा, स्थगित कर देगा। अगले सप्ताह आयोजित की जाने वाली बैठक का स्थान सामान्यतया वहीं रखा जाएगा जो स्थगित बैठक के लिए रखा गया था, परन्तु किसी कारण से बैठक का पूर्व स्थान उपलब्ध नहीं हो तो ग्राम पंचायत सदस्य अपने विवेक से नियम 4 के उपबंधों के अनुसार किसी अन्य स्थान पर बैठक का आयोजन करने का निर्णय ले सकेगा। अगले सप्ताह होने वाली बैठक के लिए नियत स्थान, तिथि और समय की सूचना नियम 5 के अनुसार पुनः वार्ड–सभा के सभी सदस्यों को दी जाएगी।

गणपूर्ति के कमी के चलते स्थगित बैठक के बाद की बैठक के लिए भी गणपूर्ति वार्ड सभा के कुल सदस्यों के दसवें भाग या पचास सदस्यों की उपस्थिति से पूरी होगी एवं इसमें उसी एजेण्डा पर विचार किया जायेगा और निपटाया जाएगा, जो स्थगित बैठक में रखे गए थे।

बैठक की अध्यक्षता

वार्ड–सभा की प्रत्येक बैठक की अध्यक्षता संबंधित वार्ड सदस्य द्वारा की जायेगी। अगर किसी कारण से वार्ड सदस्य बैठक में नहीं आ सके, तो वार्ड सभा की अध्यक्षता वार्ड सभा के किसी ऐसे सदस्य द्वारा की जायेगी जो बैठक में उपस्थित सदस्यों के बहुमत द्वारा,  इस प्रयोजनार्थ निर्वाचित किया जाए।

संकल्प

अधिनियम के अधीन वार्ड सभा को प्रदत्त विषयों में से किसी के संबंध में कोई संकल्प वार्ड सभा की बैठक में उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के बहुमत से पारित किया जाएगा।

वार्ड–सभा की बैठकों के लिए कार्य सूची

(1) वार्ड–सभा की बैठक की कार्यसूची में, अधिनियम की धारा-170क (4) के अधीन बैठक में विचाराधीन विषयों के अतिरिक्त, निम्नलिखित विषय भी सम्मिलित किए जा सकेंगे -

(क) वार्ड सभा की पूर्ववर्ती बैठक की कार्यवाही की सम्पुष्टि;

(ख) गत वार्ड सभा बैठक में विचारित / पारित प्रस्तावों के अनुपालन की स्थिति;

(ग) सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा विभिन्न योजनाओं/कार्यक्रमों के सूत्रण, कार्यान्वयन एवं पर्यवेक्षण के लिए वार्ड को यथा समनुदेशित अधिकार एवं जिम्मेवारी पालन करने के लिए वार्ड द्वारा की जानेवाली कार्रवाई का प्रस्ताव;

(घ) वार्ड सभा के विनिश्चय पर ग्राम पंचायत द्वारा की गई अनुवर्ती कार्रवाई के संबंध में सूचना प्राप्त करना;

(ङ ) स्थानीय लोगों की प्रतिभा को पहचान देने हेतु सांस्कृतिक उत्सवों एवं खेलों का आयोजन करना;

(च )  ग्राम पंचायत की आय बढ़ाने के उपाय,

(छ )  ग्राम पंचायत के मुखिया से वार्ड से संबंधित किसी विनिर्दिष्ट क्रियाकलाप, योजना या आय और व्यय के संबंध में प्रतिवेदन माँगना;

(ज)  वार्ड से संबंधित संपरीक्षा टिप्पणियाँ

(झ) निगरानी समिति के प्रतिवेदन पर टिप्पणियाँ

(ञ) वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति के कार्यकलाप एवं इसके माध्यम से क्रियान्वित योजनाएँ।

वार्ड सभा की बैठक में निम्नलिखित विषयों पर भी चर्चा की जाएगी -

सामाजिक अंकेक्षण

वार्ड में अबतक क्रियान्वित सभी विकास कार्यों का सामाजिक अंकेक्षण करना वार्ड–सभा का महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व होगा। वार्ड सभा का सचिव पूर्व तिमाही के दौरान क्रियान्वित वार्ड से संबंधित समस्त कार्यों तथा कार्यवार व्यय का ब्यौरा आदि वार्ड–सभा में पढ़कर सुनायेगा। इसके अतिरिक्त निष्पादित कार्यों की गुणवत्ता पर चर्चा भी की जाएगी तथा कार्यों का भौतिक सत्यापन भी कराया जाएगा।

चर्चा के दौरान अगर उपस्थित सदस्यों द्वारा कोई आपत्ति उठायी जाए तो उसे वार्ड सभा सचिव पंजी में दर्ज करेगा तथा पंचायत समिति के कार्यपालक पदाधिकारी एवं मुखिया को सूचित करेगा। पंचायत समिति के कार्यपालक पदाधिकारी एवं मुखिया द्वारा इन समस्त आपत्तियों पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। वार्ड सभा की अगली बैठक में इस संबंध में अनुपालन प्रतिवेदन भी रखा जाएगा।

सामाजिक सदभाव

वार्ड सभा की बैठकों में सामाजिक समरसता/ साम्प्रदायिक सदभाव कायम रखने के बिन्दु पर नियमित रूप से चर्चा की जाएगी।

कार्यवाहियों का अभिलेख

  • सचिव द्वारा वार्ड सभा की बैठकों की कार्यवाहियाँ उसी दिन अभिलिखित की जाएंगी। सचिव इस उद्देश्य हेतु संधारित एक पंजी में बैठक में उपस्थित सदस्यों का हस्ताक्षर करवायेगा या अंगूठे का निशान लगवायेगा। पंजी हिन्दी में देवनागरी लिपि में संधारित की जायेगी। बैठक की अध्यक्षता करने वाले व्यक्ति द्वारा कार्यवाहियाँ हस्ताक्षरित की जायेगी। वार्ड सभा से संबंधित समस्त कागजात/अभिलेख वार्ड सदस्य की अभिरक्षा में रखे जायेंगे एवं वह उनकी सुरक्षा के लिए पूर्णरूपेण उत्तरदायी होगा। अभिलेख आदि वार्ड सभा के सचिव अथवा किसी अन्य सदस्य के पास किसी भी स्थिति में नहीं रखे जायेंगे।
  • ऐसी कार्यवाहियों की प्रतियां 15 दिनों के भीतर संबंधित ग्राम पंचायत को अग्रेषित की जाएंगी।
  • ग्राम पंचायत के मुखिया एवं पंचायत सचिव का यह दायित्व होगा कि ग्राम सभा की अगली बैठक में ग्राम पंचायत अंतर्गत अवस्थित वार्डों से प्राप्त वार्ड सभा की बैठकों की कार्यवाहियों को निश्चित रूप से विचारार्थ प्रस्तुत करे। ग्राम सभा प्रत्येक वार्ड से प्राप्त कार्यवाही में की गई अनुशंसाओं पर विचार करेगी तथा ग्राम पंचायत को इस संबंध में समुचित एवं आवश्यक कार्रवाई करने हेतु अनुशंसा करेगी।
  • वार्ड सभा की कार्यवाहियाँ ग्राम सभा की कार्यवाही का अभिन्न अंग होंगी।
  • ग्राम पंचायत के जो वार्ड नियत तिथि पर वार्ड सभा की बैठक आयोजित करने अथवा अपनी कार्यवाही को ग्राम पंचायत के पास विहित समयावधि के भीतर भेजने में विफल रहेंगे, ग्राम सभा की बैठक में उक्त वार्ड से संबंधित बिन्दुओं पर सामान्यतः चर्चा नहीं की जायेगी। किन्तु अगर ग्राम सभा की यह राय हो कि किसी वार्ड विशेष से संबंधित किसी बिन्दु/योजना पर विचार-विमर्श किया जाना आवश्यक है, तो ग्राम सभा उस वार्ड विशेष की वार्ड सभा की कार्यवाही उपलब्ध नहीं रहने अथवा कार्यवाही उपलब्ध रहने पर उसमें उस बिन्दु विशेष/योजना का उल्लेख नहीं रहने पर भी, ऐसे बिन्दु/योजना पर विचार-विमर्श कर सकेगी और ग्राम पंचायत को समुचित कार्रवाई हेतु अपनी अनुशंसा कर सकेगी।

कारबार का संव्यवहार

प्रत्येक साधारण या विशेष बैठक में संव्यवहृत किया जाने वाले कारबार के क्रम का विनिश्चय

बैठक की अध्यक्षता करने वाले व्यक्ति द्वारा किया जायेगा।

बैठक का चलते रहना

यदि वार्ड सभा की बैठक के लिए नियत तारीख को सभी मुद्दों पर विचार-विमर्श पूरा होना संभव न हो, तो बैठक एक पक्ष के भीतर, किसी पश्चात्वर्ती दिन तक चालू रखी जा सकती है। उस बैठक की अगली तारीख का विनिश्चय उसी बैठक में किया जाएगा।

कारबार के संचालन का विनियमन

वार्ड सभा की बैठक की अध्यक्षता करने वाला व्यक्ति कारबार के संचालन को विनियमित करेगा और व्यवस्था बनाए रखेगा। यदि कोई सदस्य अध्यक्षता करने वाले व्यक्ति के प्राधिकार की अवहेलना करता है या बैठक के दौरान बाधा डालने या आक्रामक आचरण का दोषी है, तो अध्यक्षता करने वाला व्यक्ति उसे समुचित व्यवहार करने के लिए कह सकेगा और वैसा करने में उसके असफल होने पर उसे बैठक से चले जाने का निर्देश दे सकेगा।

वार्ड–सभा के प्रस्तावों/संकल्पों का अनुपालन

(1) वार्ड–सभा बैठक में पारित प्रस्तावों की प्राथमिकताएं तय करते हुए ग्राम पंचायत को भेजेगी एवं पंचायत सचिव इसे ग्राम सभा की अगली बैठक में अनिवार्य रूप से रखेगा।

(2)  ग्राम सभा वार्ड सभा द्वारा तय की गई प्राथमिकताओं पर विचार करेगी। ग्राम पंचायत के विकास की योजनाओं का अंतिम रूप से चयन करते समय ग्राम पंचायत ग्राम सभा द्वारा पारित प्रस्तावों की प्राथमिकताओं का ध्यान रखेगी।

(3) अनुपालन प्रतिवेदन, अगर कोई हो, वार्ड सभा की अगली बैठक में रखी जायेगी।

(4) पंचायत समिति के कार्यपालक पदाधिकारी, प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी एवं अन्य पदाधिकारी ग्राम पंचायतों के अपने निरीक्षण के दौरान अनुपालन की प्रगति का पुनर्विलोकन करेंगें।

निगरानी समिति के प्रतिवेदन को वार्ड सभा के समक्ष रखा जाना

बिहार ग्राम सभा (बैठक के संयोजन एवं संचालन की प्रक्रिया)नियमावली, 2012 के नियम (18) के अधीन गठित संबंधित वार्ड की निगरानी समिति का प्रतिवेदन, वह जब भी उपलब्ध हो, वार्ड सभा की बैठक में रखा जायेगा तथा सदस्यों को निगरानी समिति के प्रतिवेदन में उल्लिखित बिन्दुओं से अवगत कराया जायेगा। वार्ड सभा अपने वार्ड से संबंधित निगरानी समिति के प्रतिवेदन पर अनुवर्ती कार्रवाई करने हेतु ग्राम पंचायत एवं संबंधित प्राधिकारियों से अनुरोध कर सकेगी।

वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति

(1) अधिनियम में अभिहित सामान्य एवं वित्तीय कार्यों / दायित्वों के निर्वहन एवं सम्पादन हेतु वार्ड सभा द्वारा अपने सदस्यों के बीच से वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति का गठन किया जायेगा।

2)  वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति में अध्यक्ष सहित 7 (सात) सदस्य होंगे। वार्ड से निर्वाचित ग्राम पंचायत सदस्य (वार्ड सदस्य) समिति के पदेन सदस्य एवं अध्यक्ष होंगे। वार्ड से निर्वाचित ग्राम कचहरी के पंच एवं वार्ड सभा का सचिव समिति के पदेन सदस्य  होंगे। परन्तु यह कि वार्ड सदस्य का पद रिक्त रहने पर मुखिया या मुखिया द्वारा प्राधिकृत किये जाने पर उप–मुखिया वार्ड सभा की बैठक आहूत करेगा। वार्ड सभा ऐसी बैठक में अपने सदस्यों के बीच से पूर्णतः अस्थायी कार्य व्यवस्था के अधीन एक सदस्य को वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति के अध्यक्ष के रूप में कार्य करने हेतु चुनेगी। वार्ड सदस्य पद के लिए नियमित चुनाव के पश्चात् कार्यकारी व्यवस्था के अधीन अध्यक्ष के रूप में चयनित व्यक्ति की अधिकारिता स्वतः समाप्त हो जाएगी एवं ऐसा निर्वाचित वार्ड सदस्य तुरंत वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति के अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाल लेगा।

(3)  समिति के शेष सदस्यों का चयन निम्न आधार पर किया जायेगा -

  • अगर संबंधित वार्ड में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्य निवास करते हैं, तो वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति में कम-से-कम एक सदस्य अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति परिवार से अनिवार्य रूप से चुने जायेंगे।
  • वार्ड में यदि जीविका के ग्राम संगठन/स्वयं सहायता समूह कार्यरत हों, तो इसके एक प्रतिनिधि को भी समिति के सदस्य के रूप में चयनित किया जायेगा।
  • समिति में कम-से-कम तीन महिला सदस्यों को रखा जायेगा।
  • एक परिवार से एक से अधिक व्यक्ति को समिति का सदस्य नहीं बनाया जायेगा।

(4)  नियम-3 के उप नियम– (4) के अधीन चयनित वार्ड सभा सचिव समिति के सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेगा।

(5) वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति का गठन दो वर्षों के लिए किया जायेगा। ऐसे सदस्य जो समिति की तीन लगातार बैठकों से अनुपस्थित रहेंगे अथवा समिति के कार्यों/दायित्वों में रूचि नहीं लेंगे, उन्हें वार्ड सभा प्रस्ताव पारित कर समिति की सदस्यता से हटा सकेगी। ऐसी पदमुक्ति से उत्पन्न रिक्ति अथवा किसी सदस्य के त्याग पत्र एवं मृत्यु के फलस्वरूप उत्पन्न रिक्ति को भरने हेतु वार्ड सभा उनके स्थान पर नये सदस्यों का चयन समिति की शेष कार्यावधि के लिए कर सकेगी।

6)  समिति अपनी सभी प्राप्तियों को नजदीक के राष्ट्रीयकृत बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक या किसी अन्य अधिसूचित वाणिज्यिक बैंक में अपने नाम से बचत खाता खुलवाकर जमा करेगी या करायेगी।

(7)  दो वर्षों का कार्यकाल पूरा होने पर वार्ड सभा उप-नियम (3) में वर्णित सदस्यों का चयन नये सिरे से करेगी।

(8)  समिति के खाते का संचालन अध्यक्ष (वार्ड सदस्य) एवं सदस्य सचिव के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जायेगा। समिति द्वारा क्रियान्वित योजना से संबंधित अभिलेखों तथा बैंक पासबुक, चेक बुक आदि अध्यक्ष (वार्ड सदस्य) की अभिरक्षा में रखे जायेंगे।

(9)  वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति मुख्यतः निम्नलिखित कृत्यों का निर्वहन करेगी -

  • वार्ड सभा के विचारण हेतु वार्ड में चलायी जाने वाली योजनाओं एवं विकास कार्यक्रमों के प्रस्ताव एवं उनकी प्राथमिकता तैयार करना।
  • साक्षरता, सार्वजनिक स्वच्छता, स्वास्थ्य, पर्यावरण, प्रदूषण नियंत्रण जैसे विषयों पर जागरूकता पैदा करने  हेतु वार्ड सभा को सहयोग करना।
  • जलापूर्ति, सार्वजनिक स्वच्छता इकाईयों एवं अन्य सार्वजनिक सुविधा योजनाओं के लिए वार्ड सभा की ओर से उपयुक्त स्थल का चयन करना।
  • महामारी तथा प्राकृतिक आपदा की रोक-थाम हेतु वार्ड सभा / ग्राम पंचायत के सामान्य नियंत्रण के अधीन कार्य करना।
  • वार्ड सभा/ग्राम पंचायत/सरकार द्वारा समय-समय पर सौंपी गयी योजनाओं/ कार्यक्रमों / दायित्वों का  क्रियान्वयन ।
  • वार्ड सभा को समिति के कृत्यों से संबंधित अद्यतन प्रगति प्रतिवेदन से अवगत कराना।

(10)  वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति की पहली बैठक इसके गठन के तुरंत बाद की जायेगी तथा प्रत्येक बैठक में समिति की अगली बैठक की तिथि, समय एवं स्थान निर्धारित की जायेगी। समिति की बैठक सामान्यतः साप्ताहिक होगी, किन्तु माह में कम से कम दो बैठक का आयोजन अनिवार्य होगा। समिति के एक तिहाई सदस्यों की लिखित अधियाचना प्राप्त होने पर, जिसमें विचारणीय विषय के साथ-साथ बैठक हेतु तिथि की भी अधियाचना अंकित होगी, अध्यक्ष द्वारा उक्त तिथि को विशेष बैठक बुलाई जायेगी। समिति के कुल सदस्यों में से चार की उपस्थिति से बैठक की गणपूर्ति होगी।

(11)  समिति अपने कर्तव्यों के निर्वहन एवं बैठकों के संचालन हेतु विभागीय मार्गदर्शिका के आलोक में विनियम अंगीकृत कर सकेगी।

(12)  समिति लोक निर्माण योजनाओं के क्रियान्वयन में अधिनियम की धारा 25 (1) (vi) के अधीन गठित लोक निर्माण समिति के सामान्य मार्गदर्शन के अधीन कार्य करेगी और उक्त समिति (लोक निर्माण समिति) द्वारा समय-समय पर मांगे गये प्रतिवेदन एवं विवरण (reports and returns) भी समर्पित करेगी।

प्रकीर्ण

राज्य सरकार इस नियमावली के किसी प्रावधान को अधिसूचना/अनुदेश के द्वारा स्पष्ट कर सकेगी तथा उसके क्रियान्वयन में उत्पन्न होने वाली कठिनाईयों को दूर कर सकेगी।

 

स्रोत: पंचायती राज विभाग, बिहार सरकार



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