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कृषि बीमा सहायता

इस भाग में कृषि बीमा के अंतर्गत प्रदान की जा रही सहायता की जानकारी दी गई है।

क्या करें ?

  • फसल बीमा अपनाकर अपने आपको अपरिहार्य प्राकृतिक जोखिमों जैसे प्राकृतिक आपदाओं, अकाल, कीटों, एवं रोगों और प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों में आर्थिक सुरक्षा प्राप्त करें।
  • अपने क्षेत्र में लागू उचित फसल बीमा योजना का लाभ उठायें। इस समय देश में राष्ट्रीय फसल बीमा कार्यक्रम (एन.सी.आई.पी.) के तीन घटकों जैसे % संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (एमएनएआईएस) मौसम आधारित फसल बीमा योजना (डब्ल्यूबीसीआईएस) एवं नारियल पाम बीमा योजना (सीपीआईएस) के साथ क्रियान्वित की जा रही है।
  • यदि आप अधिसूचित फसलों के लिए फसल ऋण ले रहे हैं तो आपके लिए एमएनएआईएस/डब्ल्यूबीसीआईएस के अन्तर्गत फसल बीमा कवरेज अनिवार्य है। गैर ऋणी किसानों के लिए यह कवरेज स्वैच्छिक है। फसल बीमा योजना का लाभ उठाने के लिए अपने निकटतम बैंक शाखा/बीमा कंपनी से संपर्क कर सकते हैं।

क्या पायें ?

क्र.सं.

स्कीम

सहायता

 

संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (एमएनएआईएस)

अधिसूचित खाद्य फसलें, तिलहन एवं वार्षिक बागवानी/वाणिज्यिक फसलों के लिए बीमा सुरक्षा।

  • अधिसूचित फसलों के लिए वास्तविक प्रीमियम दर वसूल की जाती है, जो क्रमश: खरीफ और रबी मौसम की खाद्यान्न एवं तिलहन फसलों के लिए अधिकतम प्रीमियम 11% एवं 9% तक है। वार्षिक वाणिज्यिक/बागवानी फसलों के लिए यह अधिकतम 13% है।
  • प्रीमियम के स्लैब के आधार पर सभी प्रकार के किसानों को प्रीमियम में 75% तक की सब्सिडी दी जाती है।

क. 2 % तक - शून्य

ख. 2-5 % से अधिक - 40 % न्यूनतम 2 % अनिवार्य प्रीमियम

ग. 5-10 % से अधिक - 50 % न्यूनतम 3 % अनिवार्य प्रीमियम

घ. 10-15 % से अधिक - 60 %ए न्यूनतम 5 % अनिवार्य प्रीमियम

च. 15 % से अधिक - 75 %ए न्यूनतम 6 % अनिवार्य प्रीमियम

  • यदि प्रतिकूल मौसम/जलवायु के कारण बुआई नहीं हो पाती है तो बुआई में रुकावट/रोपाई जोखिम के लिए बीमित राशि का 25 % तक का दावा/क्षतिपूर्ति का भुगतान किया जाता है।
  • यदि अधिसूचित फसल का उत्पादन गारंटीशुद उपज से कम होता है तो सभी बीमित किसानों को क्षतिपूर्ती के भुगतान में हुई कमी के आधार पर किया जाता है तथापि संभावित दावे का 25 % अग्रिम भुगतान के रुप में तत्काल राहत के लिए उन अधिकृत क्षेत्रों में जहाँ पैदावार से नुकसान threshold yield का 50 % हो, किया जाएगा।

इसके अलावा, तटवर्ती क्षेत्र में चक्रवात के कारण हुये फसलोत्तर नुकसान को ;दो सप्ताह तकद्ध भी कवर किया जाता है।

स्थानीयकृत जोखिमों जैसे कि भूस्खलन और ओलावृष्टि के कारण हुये नुकसान का आंकलन व्यक्तिगत आधार पर किया जाता है। इसके अनुसार प्रभावित बीमित किसानों को भुगतान किया जाता है।

  • यदि अधिसूचित फसल का उत्पादन गारंटीच्चुदा उपज से कम होता है तो सभी बीमित किसानों को क्षतिपूर्ति का भुगतान उत्पादन में हुई कमी के आधार पर किया जाता है।
  • जिन अधिसूचित क्षेत्रों में न्यूनतम पैदावार की क्षति न्यूनतम 50 % हुई हो वहां पर तत्काल राहत के लिए संभावित दावे का 25 % अग्रिम के रुप में भुगतान किया जाएगा।

 

मौसम आधारित फसल बीमा योजना (डब्ल्यूबीसीआईएस)

  • अधिसूचित खाद्य फसलें, तिलहन एवं वार्षिकबागवानी/वाणिज्यिक फसलों के लिए बीमा सुरक्षा।
  • अधिसूचित फसलों के लिए अधिकतम 10 और खरीफ और रबी मौसम की खाद्यान्न एवं तिलहन फसलों के लिए 8 % और वार्षिक वाणिज्यिक/बागवानी फसलों के लिए अधिकतम 12 % बीमांकित प्रीमियम दर वसूल की जाती है

क. 2 % तक - अनुदान (सब्सिडी) नहीं

ख. 2-5 % से अधिक-25 % अनुदान (सब्सिडी) न्यूनतम 2 % का अनिवार्य प्रीमियम,

ग. 5-8 % से अधिक-40 % अनुदान(सब्सिडी) न्यूनतम 3.75% का अनिवार्य प्रीमियम,

घ. 8 % से अधिक-50 % अनुदान (सब्सिडी), न्यूनतम 4.8 % का अनिवार्य प्रीमियम और अधिकतम 6 % का नेट प्रीमियम का किसानों द्वारा भुगतान किया जाता है।

  • यदि मौसम सूचकांक (वर्षा/तापमान/आपेक्षिक आर्द्रता/हवा की गति आदि) में अधिसूचित फसल के गारंटीच्चुदा मौसम सूचकांक से परिवर्तन (कमी या वृद्धि) होता है तो अधिसूचित क्षेत्र के सभी किसानों को क्षतिपूर्ति भुगतान अंतर अथवा कमी के समतुल्य किया जाता है।

 

नारियल पाम बीमा योजना

(सीपीआईएस)

  • नारियल पाम उत्पादकों के लिए बीमा सुरक्षा।
  • प्रति पाम प्रीमियम दर रुपये 9.00 (4 से 15 व र् की आयु सीमा में) से रुपये 14.00 (16 से 60 वर्ष की आयु सीमा में).
  • सभी श्रेणी के किसानों को प्रीमियम में 50 से 75% की अनुदान (सब्सिडी)दी जाती है।
  • पाम फसल क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में अधिसूचित क्षेत्रों के सभी बीमित किसानों को क्षतिपूर्ति भुगतान आदानों के मूल्य में नुकसान/क्षति के समतुल्य देय होता है।

 

किससे संपर्क करें ?

निकटतम बैंक शाखा/अधिसूचित जनरल इंश्योरेन्स कंपनियों, ऋण एवं सहकारी समिति एवं जिला कृषि अधिकारी, खण्ड विकास कृषि अधिकारी से संपर्क करें।

स्त्रोत : किसान पोर्टल,भारत सरकार

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अरविंद शुक्ल May 17, 2015 08:39 PM

फसल बीमा तो अनिवार्य है पर बीमा कंपनी छतिपूर्ति नहीं करती हैं अतः बीमा किसान की मर्जी पर होन चाहिए न की अनिवार्य

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