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सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की जानकारी

इस भाग में सर्वेाच्च न्यायालय के निर्णय जानने की जानकारी को संक्षिप्त मेें प्रस्तुत किया गया है।

निर्णय सूचना प्रणाली (जजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम) सर्वोच्च न्यायालय तथा अन्य उच्च न्यायालयों के निर्णय उपलब्ध कराती है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय हेतु यहाँ क्लिक करें

आप सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की जानकारी निम्न रीति से प्राप्त कर सकते हैं:

  • वादी/प्रतिवादी के आधार पर
  • न्यायाधीश के नाम के आधार पर
  • वाद संख्या के आधार पर
  • निर्णय की तिथि के आधार पर
  • संवैधानिक खंडपीठ के आधार पर
  • मुकदमा के वर्णमाला क्रम के आधार पर
  • सुनवाई तिथि के आधार पर
  • लिखित सामग्री/वाक्यांशों के आधार पर
  • अधिनियम के आधार पर

उपर्युक्त सभी सूची वेबसाइट की बाईं ओर दी गई है और आप निर्णय संबंधित मेनू पर क्लिक कर निम्न प्रकार से प्राप्त कर सकते हैं:

वादी/प्रतिवादी के आधार पर

  • वादी या प्रतिवादी का नाम टाइप करें।
  • ड्रॉप डाउन बॉक्स में से कोई एक विकल्प चुनें-
  • Don’t Know (नहीं जानता)
  • Petitioner (वादी) या
  • Respondent (प्रतिवादी)
  • ड्रॉप डाउन बॉक्स से दोनों तिथियों (से-तक) का चयन करें।
  • अंत में मुकदमा की प्रतिवेद्य (रिपोर्टेबल) स्थिति- रिपोर्टेबल या नन-रिपोर्टेबल अथवा सभी चुनें और उसे सब्मिट करें।

न्यायाधीश के नाम के आधार पर

  • न्यायाधीश का नाम टाइप करें।
  • ड्रॉप डाउन बॉक्स से दोनों तिथियों (से-तक) को चुनें।
  • अंत में प्रतिवेद्य (रिपोर्टेबल) स्थिति- रिपोर्टेबल या नन-रिपोर्टेबल अथवा सभी चुनें और उसे सब्मिट करें।

वाद संख्या के आधार पर

  • ड्रॉप डाउन बॉक्स से मुकदमा के प्रकार का चयन करें।
  • मुकदमा संख्या टाइप करें।
  • ड्रॉप डाउन बॉक्स से वर्ष का चयन करें।
  • अंत में प्रतिवेद्य (रिपोर्टेबल) स्थिति- रिपोर्टेबल या नन-रिपोर्टेबल अथवा सभी चुनें और उसे सब्मिट करें।

निर्णय तिथि के आधार पर

  • ड्रॉप डाउन बॉक्स से दोनों तिथियों (से-तक) का चयन करें।
  • अंत में प्रतिवेद्य (रिपोर्टेबल) स्थिति- रिपोर्टेबल या नन-रिपोर्टेबल अथवा सभी चुनें और उसे सब्मिट करें।

संवैधानिक खंडपीठ के आधार पर

  • ड्रॉप डाउन बॉक्स से दोनों तिथियों (से-तक) का चयन करें।
  • अंत में प्रतिवेद्य (रिपोर्टेबल) स्थिति- रिपोर्टेबल या नन-रिपोर्टेबल अथवा सभी चुनें और उसे सब्मिट करें।

मुकदमा के वर्णमाला क्रम के आधार पर

  • वादी तथा प्रतिवादी के नाम जैसे अमर टाइप करें।
  • ड्रॉप डाउन बॉक्स से दोनों तिथियों (से-तक) का चयन करें।
  • अंत में प्रतिवेद्य (रिपोर्टेबल) स्थिति- रिपोर्टेबल या नन-रिपोर्टेबल अथवा सभी चुनें और उसे सब्मिट करें।

उपरोक्त के अलावा, निर्णय संबंधी जानकारी वाक्यांश, अधिनियम तथा उद्धरण के आधार पर भी प्राप्त की जा सकती है।

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अयोध्या उपाध्याय Sep 13, 2017 11:23 AM

पूर्व और वर्तमान सासदो एवं विधायको के उनके ही द्वारा दिये गये सम्पति के हलफनामे के आधार पर सबकी होनी चाहिए और बार-बार मे पहली एवं अंतिम को।इसके बिना स्वच्छता और पारXर्शीता की कल्पना बेकार है।

एडवोकेट,स्थाई लोक अदालत सदस्य प्रह्लाद राय व्यास Sep 02, 2017 11:03 AM

हिंदी में न केवल निर्णय प्रकाशित करिये।साथ ही कानून को भी यहां पेश करिये।ओर संसद में विचाराधीन विधेयक को भी यहां प्रकाशित करिये।

Sujay kumar mandal Feb 14, 2017 10:37 PM

संविधान में जाती विशेष को आरक्षण नहीं देनी चाहिए।कुछ सामान्य लोग आज भी पिछड़े हैं तो कुछ अनुसूचित जनजाति भी अच्छे स्थान में है। जहाँ अनुसूचित जाती के घर में सबको नौकरी मिला फिर भी उसे आरक्षण मिल रहा है जबकि एक सामान्य परिवार में खाने के लिए राशन नहीं फिर भी नौकरी नहीं मिलता है। एक बात सोचिये अगर एर बारहवीं पास को आरक्षण के वजह से नौकरी मिल जाती है और एक सामान्य को ग्रेजुएट के बाद भी नौकरी नहीं मिलती तो वहां क्या स्थिति होगी।कम से कम शिक्षा के क्षेत्र में तो आरक्षण नहीं होना चाहिए।

Sujay kumar mandal Feb 14, 2017 10:28 PM

संविधान में जाती विशेष को आरक्षण नहीं देनी चाहिए।कुछ सामान्य लोग आज भी पिछड़े हैं तो कुछ अनुसूचित जनजाति भी अच्छे स्थान में है। जहाँ अनुसूचित जाती के घर में सबको नौकरी मिला फिर भी उसे आरक्षण मिल रहा है जबकि एक सामान्य परिवार में खाने के लिए राशन नहीं फिर भी नौकरी नहीं मिलता है। एक बात सोचिये अगर एर बारहवीं पास को आरक्षण के वजह से नौकरी मिल जाती है और एक सामान्य को ग्रेजुएट के बाद भी नौकरी नहीं मिलती तो वहां क्या स्थिति होगी।कम से कम शिक्षा के क्षेत्र में तो आरक्षण नहीं होना चाहिए।

Sujay kumar mandal Feb 14, 2017 10:21 PM

संविधान में जाती विशेष को आरक्षण नहीं देनी चाहिए।कुछ सामान्य लोग आज भी पिछड़े हैं तो कुछ अनुसूचित जनजाति भी अच्छे स्थान में है। जहाँ अनुसूचित जाती के घर में सबको नौकरी मिला फिर भी उसे आरक्षण मिल रहा है जबकि एक सामान्य परिवार में खाने के लिए राशन नहीं फिर भी नौकरी नहीं मिलता है। एक बात सोचिये अगर एर बारहवीं पास को आरक्षण के वजह से नौकरी मिल जाती है और एक सामान्य को ग्रेजुएट के बाद भी नौकरी नहीं मिलती तो वहां क्या स्थिति होगी।कम से कम शिक्षा के क्षेत्र में तो आरक्षण नहीं होना चाहिए।

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