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झारखण्ड का गौरवशाली इतिहास - संग्रहालय निर्देशिका

इस भाग में झारखण्ड के रांची जिला में मोरहाबादी स्थित संग्रहालय में रखी गयी विभिन्न जनजातियों की जानकारी, क्रन्तिकारी वीरों की कहानियाँ तथा उनके द्वारा प्रयोग में लाये गये सामानों का संक्षिप्त विवरण दिया गया है।

बिरसा मुंडा

बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर, 1875 ई. को रांची जिला के अड़की प्रखंड के उलीहातु गाँव हुआ था। उन्होंने उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध (1895 – 1900) में एक महान मुंडा उलगुलान आन्दोलन) का नेतृत्व  किया था।

बिरसा मुंडा ने बिरसाईत धर्म का प्रचार कर एक नई जनजातीय जीवन पद्धति अपने अनुयायियों को प्रदान की।  उनको धरती अब्बा (पृथ्वी का पिता) भी माना जाता है। अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष के दौरान बिरसा मुंडा के नेतृत्व में सैंकड़ों बिरसाईत डोम्बारी  पहाड़ी 8 जनवरी, 1900 को अंग्रेजों की बंदूकों के शिकार हुए। उनकी मृत्यु 9 जून, 1900 ई. को रांची केन्द्रीय कारा में हुई।

शहीद  सिद्धू – कान्हू

संथाल हुल (विद्रोह) का नेतृत्व संथाल परगना के भोगनाडीह निवासी चुन्नी मांझी के चार पुत्रों ने किया था। इनमें से सबसे बड़े पुत्र शहीद सिद्धू था और उसके बाद कान्हू का स्थान था। इन्होंने अंग्रेजों के शोषण के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए आवाज बुलंद किया। इनके नेतृत्व में 30 जून, 1855 को भोगनाडीह  में एक विशाल सभा हुई जिसमें लगभग 30 हजार लोग सशस्त्र इकट्ठे हुए। उस सभा में सिद्धू को राजा और कान्हू को मंत्री मनोनीत किया गया और नये संथाल राज्य के गठन की घोषणा कर दी गयी।

कोरवा

कोरवा जनजाति बैगा (पुजारी) सिंगबोंगा (सूर्य) की पूजा कर रहा है। कोरवा जनजाति के सदस्य सूर्य (सिंगबोंगा) को सर्वशक्तिमान देवता मानते हैं। सरहुल तथा करम कोरवा कोरवा जनजाति बैगा (पुजारी) सिंगबोंगा (सूर्य) की पूजा कर रहा है। कोरवा जनजाति के सदस्य सूर्य (सिंगबोंगा) को सर्वशक्तिमान देवता मानते हैं। सरहुल तथा करम कोरवा जनजाति के प्रमुख पर्व हैंये पर्व बैगा द्वारा क्रमश: सरना स्थल तथा अखड़ा में सम्पन्न किये जाते हैं।

असुर जनजाति

परिचय

 

 

 

असुर जनजाति झारखण्ड राज्य की प्राचीनतम जनजाति है, जिसका उल्लेख ऋग्वेद, आरण्यक, उपनिषद, महाभारत आदि ग्रंथों में मिलता है। इस जनजाति को मोहनजोदड़ो तथा हड़प्पा सभ्यता से सम्बद्ध मन जाता है। यह जनजाति छोटानागपुर में मुंडा जनजाति के आगमन के पहले से बसी हुई थी।

निवास स्थान

 

 

 

 

वर्तमान समय असुर जनजाति मुख्य रूप से झारखंड राज्य के गुमला, लोहरदगा तथा पलामू जिलों में निवास करती है। इसकी कुछ आबादी धनबाद, सिंहभूम पुराना तथा गिरिडीह जिलों  में भी पायी जाती है। नेतरहाट के पाट क्षेत्र में इस जनजाति का मुख्य संकेन्द्रण है।

जनसंख्या

1991 के जनगणना के अनुसार झारखण्ड राज्य में इनकी कुल आबादी 9,263 है।

प्रजाति एवं भाषा

असुर जनजाति प्रोटोऑस्ट्रोलॉयड प्रजाति से संबंधित है। इस जनजाति की बोली असुरी ऑस्ट्रो – एशियाटिक भाषा समूह से सम्बंधित है।

व्यवसाय

असुर जनजाति झारखण्ड राज्य में आदिम जनजाति के रूप में चिन्हित है। इस जनजाति का परम्परागत पेशा लौह अयस्कों को गलाकर लोहा प्राप्त करना था। इस जनजाति के लोग लौह अयस्क के कच्चे साल वृक्ष से प्राप्त कोयले (चारकोल) की भट्ठी में गलाकर लोहा प्राप्त किया करते थे। आजकल इस जनजाति का यह परम्परागत पेशा समाप्त हो चुका गई। अब वे स्थायी गांवों में रहकर स्थायी कृषि किया करते हैं। यह जनजाति अपने खेतों में मुख्य रूप से गोड़ा धन, गोंदली, माडूआ, मकई, सरसों इत्यादि उपजाती है। असुर जनजाति के लोग भैंस, भैंसा, गाय बैल, सुअर, मुर्गी, बत्तख इत्यादी का पालन का भी कार्य किया करते हैं। यह जनजाति वनों में लघु वन्य पदार्थों का भी संकलन किया करती है। असुर जनजाति के लोग जंगलों में खरगोश, गिलहरी, साहिल, लागिन, जंगली पक्षियों इत्यादि का शिकार भी करते हैं।

बिरहोर जनजाति

परिचय

बिरहोर जनजाति झारखण्ड राज्य की एक अल्पसंख्यक आदिम जनजाति है।

निवास स्थल

 

 

 

 

 

वर्तमान समय में बिरहोर जनजाति प्रमुख रूप से झारखण्ड राज्य के हजारीबाग, कोडरमा, चतरा, गिरीडीह, रांची, गुमला, सिंहभूम, (पुराना) पलामू तथा धनबाद जिले में निवास करती है। इस जनजाति के लोग टहनियों से निर्मित कूम्बों (छोटी झोपड़ी) में रहा करते हैं। बिरहोर जनजाति के दो शाखाओं में विभक्त है – 1) उथलू तथा 2) जन्घी। उथलू बिरहोर के सदस्य अभी भी कूम्बों में रहते हैं, जबकि जन्घी बिरहोर अब स्थायी गांवो में स्थायी मकान बनाकर रहने लगे हैं। उथलू बिरहोर के सदस्य भी अब सरकार द्वारा बसायी गयी कॉलनियों के मकान में रहने लगे हैं।

व्यवसाय

बिरहोर जनजाति जंगलों में उपलब्ध कंद – मूल, फल – फूल तथा अन्य वनोत्पदों  व शिकार द्वारा अपना जीवन बसर करते हैं। इस जनजाति के सदस्य वृक्ष छालों से रस्सी तथा लकड़ी के कठौत, ढोल, मांदर, ओखल समाट इत्यादि भी बनाकर निकटवर्ती हाटों में बेचकर आमदनी प्राप्त करते रहे हैं। कुछ बिरहोर पशुपालन (बकरी, गाय, बैल इत्यादि पालन) भी किया हैं। कुछ बिरहोर कृषि व अकुशल श्रमिक के रूप में भी कार्य करते है। कुछ बिरहोर अब भी अर्द्ध यायावर की भांति जीवन यापन करते हैं तथा जंगलों में मधु संकलन तथा जंगली जानवरों तथा खरगोश, चूहा, वनमुर्गी व अन्य पक्षी का शिकार किया करते हैं।

जनसंख्या

1991 की जनगणना के अनुसार झारखण्ड राज्य में इस जनजाति की कुल आबादी 8,803 है।

प्रजाति एवं भाषा

बिरहोर जनजाति प्रोटोऑस्ट्रोलायड प्रजाति से सम्बन्धित है। इस जनजाति की बोली बिरहोरी ऑस्ट्रो एशियाटिक भाषा समूह से सम्बन्धित हैं।

मुंडा जनजाति

परिचय

मुंडा जनजाति झारखण्ड राज्य की एक प्रमुख अनुसूचित जनजाति है। इस जनजति का छोटानागपुर में लगभग 600 ई. पू.आगमन हुआ।

निवास स्थल

 

 

 

 

 

मुंडा जनजाति वर्तमान समय में मुख्य रूप से झारखण्ड के रांची जिलान्तर्गत खूँटी अनुमंडल में निवास करती है। इसके अतिरिक्त यह जनजाति गुमला, लोहरदगा, पूर्वी तथा पश्चिमी सिंहभूम, हजारीबाग, सिमडेगा, लातेहार, धनबाद, खरसाँवा, सरायकेला जिलो में निवास करती है। यह जनजाति बिहार राज्य की पूर्वी चंपारण तथा रोहतास में भी पाई जाती है।

जनसंख्या

1991 की जनगणना के अनुसार अविभाजित बिहार राज्य में मुंडा जनजातियों की कुल जनसंख्या – 9,20,148 है।

प्रजाति एवं भाषा

मुंडा जनजाति प्रोटो ऑस्ट्रोलायड प्रजाति के तत्वों को संधारण करती है। इस जनजाति की बोली मुंडारी ऑस्ट्रो एशियाटिक भाषा समूह से सम्बन्धित है।

व्यवसाय

यह जनजाति मिश्रित स्थायी गांवों में निवास कर कृषि करती है। यह जनजाति अपने खेतों में धन, गेंहू, मकई, गोंदली, मडूआ, कूर्थी, अरहर, सरसों, सरगुजा इत्यादि उपजाती है। यह जनजाति पशुपालन (गाय, बैल, भैंस, बकरी, सूअर, मुर्गी, बत्तख पालन इत्यादि) भी किया करती है। मुंडा जनजाति जंगलों  से लघु वन्य पदार्थों (फल – फूल, कंद – मूल, लकड़ी इत्यादि) का भी संग्रहण करती है। इस जनजाति के लोग जंगलों में खरहा, साहिल, जंगली पक्षी, गिलहरी इत्यादि का भी शिकार करते हैं। नदी – नालों, पानी भरे धान के खेतों, तालाबों इत्यादि में इस जनजाति के लोग मछली भी पकड़ते हैं।

सौरिया पहाड़िया

परिचय

सौरिया पहाड़िया जनजाति को झारखण्ड राज्य का संथाल परगना का आदि निवासी माना जाता है। चन्द्रगुप्त मौर्य के समय (302 बी.पी.) यूनानी यात्री मेगास्थनीज ने पाने भारत भ्रमण के दौरान राजमहल पहाड़ियों के आधे भाग में रहने वाली जंगली आदिम जातियों का उल्लेख माल्ली (मानव) या सौरि के रूप में किया है। जो अब अपने को मत्केर या सौरिया पहाड़िया कहा करते हैं। यूनानी यात्री सेल्यूकस निकेटर तथा चीनी यात्री फाहियान तथा ह्वेनसांग के यात्रा वृतांतों में भी इस जनजाति का उल्लेख प्राप्त होता है। इतिहासकारों तथा भाषाविदों का मत है की सौरिया पहाड़िया छोटानागपुर की उराँव जनजाति की एक शाखा है।

निवास स्थल

वर्तमान समय में सौरिया पहाड़िया जनजाति की मुख्य रूप से झारखण्ड राज्य के संथाल परगना प्रमंडल के साहेबगंज तथा गोड्डा जिला के उत्तरी भाग तथा दूमका जिला में निवास करती हैं। इस जनजाति की कुछ आबादी झारखण्ड राज्य के सिंहभूम (पुराना) जिला तथा बिहार राज्य के सहरसा, कटिहार तथा भागलपुर जिलों में पायी जाती है। 1991 की जनगणना के अनुसार अविभाजित बिहार राज्य के इस जनजाति की कुल जनसंख्या 48,761 है।

प्रजाति एवं भाषा

सौरिया पहाड़िया प्रोटोऑस्ट्रोलायड प्रजाति से संबंधित हैं। इस जनजाति की बोली मूलत: द्रविड़ भाषा समूह से संबंधित हैं।

व्यवसाय

सौरिया पहाड़िया जनजाति झारखण्ड राज्य में आदिम जनजाति के रूप में चिन्हित है। इस जनजाति की अर्थ व्यवस्था कृषि तथा वनों पर आधारित है। यह जनजाति पहाड़ियों पर कुरवा खेती ( स्थान्तरित खेती) करती है। मकई, बाजरा, घंघरा (बरबट्टी), अरहर, सूतनी इत्यादि इस स्थानांतरित कृषि की प्रमुख फसलें हैं। सौरिया पहाड़िया जनजाति के लोग पशुपालन भी किया करते हैं। ये लोग गाय, बैल, भैंस, भैंसा, बकरी, सुअर, मुर्गी इत्यादि पालते हैं। यह जनजाति जंगलों से कंद – मूल, फल – फूल, सब्जियां इत्यादि एकत्रित करती है तथा जगंलों से खरहा, साही, जंगली मुर्गियां, जंगली सुअर इत्यादि का शिकार भी करती है।

नगाड़ा

नगाड़ा में चर्मपत्र के रूप में चमड़े को गोलाकार फैलाकर शंकुरूप खोखला धातु (लोहा) के पात्र के आधार पर लगाया जाता है। जो अनुवादक/गूंजायमान का कार्य करता है। लोहे के ढांचे के ऊपर चमड़े की रस्सी के द्वारा सही खिंचाव चारों तरफ से बांधकर रखा जाता है। इसमें टंगना रस्सी या चमड़े का बना होता है जिसे गला में लटकाकर या नगाड़ा को कहीं रखकर बजाया जाता है। इसे लोग स्थानीय बाजार या मेले से भी खरीदते हैं जिसका प्रयोग विभिन्न अवसरों पर नृत्य एवं गीत के समय करते हैं।

डिमनी

 

डिमनी बांस की पतली पट्टी से बना होता है जिसे ढंकने के लिए बांस की पतली खामाचियों से बना ढक्कन भी होता है। यह आकार में बड़ा होता है जिसका उपयोग गाँव के जनजातीय लोग घर में धान एवं छिलका सहित दाल आदि को रखने के लिए करते हैं। यह घरेलू सामान प्राय: महली जनजाति द्वारा बनायी जाती है, जो बांस कार्य में निपुण होती है।

मांदर एवं ढोल

 

 

 

मांदर का ऊपरी भाग मिट्टी का बना होता है। जिसके चारों तरफ लम्बवत चिपटी एवं पतली चमड़े की रस्सी बांधी रहती है जिसके किनारे में लोहे का गोल अंकूशी लगा रहता है। दोनों तरफ गोलाकार भाग के सतह से ऊपर चमड़ा लगा होता है। इसका व्यास एक तरफ से दुसरे तरफ बड़ा रहता है। इसके ऊपर बीच में मिट्टी का पतला लेप लगा रहता है जिसे काला या सफेद रंग से रंग दिया जाता है। इसे दोनों हाथ से बजाया जाता है। नृत्य एवं गीत के समय इसका उपयोग किया जाता है। इसे बच्चों द्वारा भी बजाया जाता है जिसे बाजार से खरीद जाता है।

ढोल की ऊपरी रूपरेखा (ढांचा) लकड़ी के ठोस कुन्दा को खोखला बनाकर तैयार किया जाता है। इसके लिए बहरा, हर्रा बीजा आदि लकड़ी के विशेष प्रयोग होता है। इस पर चमड़े की रस्सी (बाँधी) चारों तरफ से बांधी रहती है। दोनों तरफ गोलाकार सतह पर चर्मपत्र लगा रहता है। चर्म पत्र चमड़ा का बना होता है। इस पर बन्दर का चमड़ा (खाल) का भी बिरहोर जनजाति द्वारा उपयोग किया जाता है। इस वाद्य यंत्र का भी उपयोग नृत्य एवं गीत – संगीत के अवसर पर होता है।

हल

यह लकड़ी का बना होता है जिसके तीन भाग होते हैं। बीच के भाग को हल कहते हैं जिसमें का फाल लगा होता है। हल के अगला भाग को सइंड कहा जाता है जो मुख्यत: साल की लकड़ी का बना होता है हल के पिछले भाग को चांदली कहा जाता है। जिसे पकड़ का कर हल चलाया जाता है।

जुआठ

 

 

यह भी हल चलाने के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है जिसे लकड़ी का बनाया जाता है। हल चलाने के लिए बैल को जुआठ मेंरस्सी से नारा (जोड़ा) जाता है।

पिंजड़ा

 

 

 

यह बांस का कई पतले – पतले डंठल को जोड़कर बनाया जाता है जिसमें जंगल के पक्षियों (तोता – मैना) को पकड़ कर रखा जाता है।

ढोलक का खोल

 

 

 

एक मोटी लकड़ी को बीच में खोद कर बनाया जाता है जिसके दोनों और चमड़ा चढ़ा कर ढोलक बनाया जाता है जो वाद्य यंत्रका काम करता है।

ओखली

 

 

 

 

 

यह मोटी लकड़ी के बीच में खोद कर बनाया जाता है। इसके साथ एक समाठ होता है जिसके निचले भाग में साम्बी (लोहे का) लगा रहता है ओखली और समाठ विशेष का भिंगाया हुआ चावल या उरद दल कूट कर गूंडी बनाने के कम में लाया जाता है। इससे दाल के छिलके बगैरह भी साफ किया जाता है।

मचीला

 

 

 

यह चार पैर वाला लकड़ी के कुर्सी आकार का बना होता है जिसे सुतली से बोने के बाद तैयार किया जाता है जो बैठने के काम में लाया जाता है।

तुम्बा

 

 

 

 

 

पूर्ण पका कद्दू का तुम्बा बनाया जाता है। उसके ऊपरी भाग सिर को काटकर छिद्र करके बीज बगैरह निकाल दिया जाता है जो कृषि कार्य करते समय खेत तक पीने का पानी ले आने का काम में आता है। शिकार के समय भी जनजाति लोग तुम्बा में पीने का पानी ले जाते हैं। तुम्बा में रखा पानी गर्मी में भी ठंडा रहता है। जनजातियों के लिए यह एक थर्मस है। इसके अतिरिक्त यह अनाज बीज रखने के काम में भी आता है।

कुरूआ

 

 

इससे कूँआ, डाड़ी या खेत में पानी के अंदर रख दिया जाता है जिसमें छोटी – छोटी मछलियाँ फंसाई जाती है। यह बांस को पतला – पतला काटकर बनाया जाता है।

कुमनी

मछली पकड़ने/ फंसाने का फंदा

कुमनी बांस की मजबूत पतली खमाचियों द्वारा शंकुरूप आकार का बना होता है। जिसे थोड़ी – थोड़ी दूर पर गोलाकार रूप सेछाल की रस्सी से बांधा जाता है। यह प्राय: महली जनजाति द्वारा बनायी जाती है जिसे अन्य लोग गाँव में स्थानीय बाजारों से खरीदते हैं। यह विभिन्न आकार का छोटा – बड़ा होता है। इसका प्रयोग जनजाति छोटी मछलियों को पकड़ने या फंसाने के लिए करते हैं जो स्वयं कार्य करता है। मछली पकड़ना इनके जीविका का अनियमित एवं सहायक पेशा है। इसे धान की खेत के ढलान एवं पोखरा, गड्ढा, तालाब आदि के छिछला या सतही पर बहते पानी के विपरीत रखा जाता है। पानी के साथ बहकर छोटी मछलियाँ इसमें जाकर फंस जाती हैं। कुमनी, मुचु, तोंडरा आदि मछली पकड़ने के लिए प्रयोग में लाया जाता है।

नाम मिर्च रखने का सामान

यह लकड़ी का बना होता है। इसके ऊपर ढक्कन एवं पकड़ने के लिए लकड़ी का बना होता है। इसमें रखने से नमक मिर्च दूषित नहीं होता है।

बांस का छाता

 

 

 

यह बांस की पतली एवं चौड़ी बित्ती से तैयार किया जाता है। जिसे जनजातीय समाज के द्वारा गर्मी एवं बरसात में धुप औरपानी से बचने के काम में लाया जाता है।

चरखा

 

 

 

यह लकड़ी की काई टूकड़ों को मिलाकर बनाया जाता है जिससे कपास का सूत तैयार किया जाता है और सूत से कपड़ा बुना जाता है।

रहटा

 

 

सूत काटने से पहले रूई को साफ किया जाता है जिसे जनजातीय समाज में रहटा कहा जाता है। यह भी चरखा की तरह लड़की की कई टुकड़ों से बनता है। जिसमें रूई (कपास) को ओटने (घूनने)  के बाद सूत बनाने के लिए तैयार किया जाता है।

गूंगू छाता

यह मोहलान (गंगू) पत्ता का बना होता है जिसे जनजातीय समाज के लोग वर्षा के पानी से बचने के काम में लाते हैं।

हड़िया रखने का बर्तन एवं छ्कनी

 

 

 

 

 

हड़िया छान कर रखने का बर्तन मिट्टी का बना होता है तथा हड़िया छकने (छानने) के लिए बांस का बड़ा कटोरानुमा तीनकोनिया आकार का बना होता है जसी हड़िया छ्कनी के नाम से जाना जाता है।

मंगता पाहन

 

 

 

जनजातीय परम्परा के अनुसार अपने त्यौहार पर पूजा करते हुए मंगता पहना जाता है।

संग्रहालय में संग्रहित वस्तुओं की सूची

क्र. सं

संग्रहित वस्तु का नाम

संग्रहित वस्तु की संख्या

जनजाति का नाम

उपयोग

1

विवाह कलश

1

उराँव

विवाह में उपयोग के लिए बाजार से ख़रीदा गया

2

मुचो

1

उराँव

मछली पकड़ने के लिए बांस की खामच्चियों से निर्मित

3

गूंगू

1

उराँव

बारिश से बचने गूंगू पत्ता से निर्मित

4

माला

1

उराँव

गले में पहनने के लिए बाजार से ख़रीदा हुआ

5

झुटिया

2

उराँव

पैर के उँगलियों के लिए बाजार से ख़रीदा हुआ

6

मठिया

2

उराँव

कलाई में पहनने के लिए बाजार से ख़रीदा हुआ

7

पड़िया कपड़ा

1

 

उराँव

पहनने का कपड़ा बाजार से ख़रीदा हुआ

8

बांसुरी

1

उराँव

बांस से निर्मित, वाद्य यंत्र के रूप में प्रयुक्त नृत्य एवं संगीत के समय अथवा मवेशी चराने के समय

9

पत्तियों के तोफ्त

1

उराँव

बारिश से बचने के लिए गूंगू

10

वीणा

1

उराँव

बांस, तार एवं कागज से निर्मित, वाद्य उपकरण के रूप में

11

हंसुआ

1

उराँव

धान काटने हेतु बाजार से ख़रीदा हुआ

12

पिंजड़ा

1

उराँव

चिड़िया पालने के लिए, लकड़ी एवं बीड़ी के पत्ते से निर्मित

13

तीर एवं धनुष

2

उराँव

बांस एवं रस्सी से निर्मित वस्तु शिकार में उपयोग के लिए

14

बांसुरी

1

उराँव

नृत्य एवं संगीत से वाद्य यंत्र के रूप में उपयोग तथा बांस से निर्मित

15

पिंजड़ा

1

उराँव

लकड़ी, बांस और बीड़ी के पत्ते से बना वस्तु चिड़िया पालने के लिए

16

पत्तियों का छाता

1

उराँव

गूंगू पत्ता से बना छाता बारिश से बचाव हेतु

17

पानी संग्रहक

1

उराँव

पानी संग्रहण के लिए

18

कंघी

1

उराँव

केश – सज्जा हेतु बाजार से ख़रीदा हुआ

19

छोटी टोकरी

1

उराँव

फल एवं सब्जी रखने के लिए बाजार से ख़रीदा हुआ

20

चुनौटी

1

उराँव

चूना रखने के लिए बाजार से खरीदते हैं

21

बालों का क्लिप

1

उराँव

केश सज्जा में इस्तेमाल किया जाता है।

22

तरपत (बड़ा)

1

उराँव

कानों में पहनने के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है।

23

साड़ी

1

उराँव

पहनने के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है

24

डांडा

4

उराँव

गले में पहनने के लिए इसे बाजार से खरीदते हैं

25

नारा

12

उराँव

धागों से निर्मित इसे सिक्के रखने के लिए प्रयुक्त करते हैं

26

डंडा सहित छाता

1

उराँव

बारिश से बचाव के लिए बाजार से खरीदते हैं

27

मांदर

1

उराँव

नृत्य गान में वाद्य यंत्र के रूप से प्रयुक्त होता है

28

कुमनी

1

उराँव

बांस की पतली पट्टियों से निर्मित इस मछली पकड़ने के प्रयोग में लाते हैं

29

मांदर

1

उराँव

नृत्य गान में वाद्य यंत्र के रूप से प्रयुक्त होता है

30

ढूकरी

1

उराँव

छोटे पक्षियों को रखने का पिजड़ा

31

ब्रह्मपूरी  साड़ी

1

मुंडा

पहनने का कपड़े बाजार से ख़रीदा हुआ

32

गूंगू

1

मुंडा

गूंगू पत्ता द्वारा निर्मित, बारिश से बचाव

33

चोप्पी

1

मुंडा

बारिश से बचाव हेतु बांस एवं गूंगू पत्ता से निर्मित

34

कुमनी

1

मुंडा

मछली पकड़ने के लिए बांस की खमच्चियों से निर्मित

35

चांदब

1

मुंडा

विवाह समारोहों में सजावट के लिए प्रयुक्त होता है

36

ठोंटी

4

मुंडा

शिकार में प्रयुक्त लकड़ी एवं पंख से निर्मित होता है

37

धनुष

1

मुंडा

शिकार के लिए बांस एवं रस्सी से बनाया जाता है

38

मुंडारी साड़ी

1

मुंडा

पहनने के लिए प्रयुक्त होता है

39

चंदवा

1

मुंडा

विवाह मंडप में सजावट के लिए धागे का बना होता है

49

मछली रखने का बर्तन

1

मुंडा

सामान रखने के लिए बाजार से खरीदते हैं

50

राहर रूरिक्साज

6

मुंडा

संथाल कमर में पहनने की वस्तु जिसे बाजार से खरीदते हैं

51

राहर

1

मुंडा

नृत्य के समय कमर में पहनते हैं

52

करसा

1

मुंडा

विवाह मंडप के लिए ख़रीदा जाता है

53

धनुष एवं तीर

2

हो

शिकार में उपयोग हेतु बांस से निर्मित

54

साधारण धनुष

1

हो

शिकार में उपयोग हेतु बांस से निर्मित

55

कुमनी

3

हो

बांस की खमच्चियों से निर्मित मछली पकड़ने के लिए

56

कंघी

1

हो

केश सज्जा के लिए बाजार से ख़रीदा हुआ

57

बाला

1

हो

कलाई में पहनने के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है।

58

सेर

1

हो

अनाज के माप के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है

59

घूँघरू

10

हो

नृत्य में उपयोग हेतु बाजार से ख़रीदा जाता

60

कटरी

1

हो

कलाई में पहनने के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है

61

अंगूठी

1

हो

हाथ की उँगलियों में पहनने के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है

62

ताबीज

1

हो

बीमारी एवं बुरी आत्मा से बचाव के लिए पहना जाता है

63

मदुला

1

हो

बीमारी एवं बुरी आत्मा से बचाव के लिए पहना जाता है

64

अंगूठी (छोटा)

1

हो

हाथ की उँगलियों में पहनने के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है

65

कटरी

1

हो

कलाई में में पहनने के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है

66

बेरा

2

हो

बीमारी एवं बुरी आत्मा से बचाव के लिए पहना जाता है

67

ताबीज

1

हो

बीमारी एवं बुरी आत्मा से बचाव के लिए पहना जाता है

68

सिंदूरदानी

1

हो

सिन्दूर रखने के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है

69

झांझ

1

हो

मनोरंजन के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है

70

घंटी

1

हो

बाजार से खरीद कर मवेशियों के गले में बांधा जाता है

71

खोरहू

2

हो

कलाई पर पहना जाता है

72

भोरहा

4

हो

कलाई पर पहना जाता है

73

सांका

2

हो

कलाई पर पहना जाता है

74

बेरा

4

हो

पैरों में पहने के लिए बाजार से खरीदते हैं

75

पैरू

4

हो

मवेशियों के गले में बांधने के लिए बाजार से खरीदते हैं

76

घंटी

1

हो

मवेशियों के गले में बांधने के लिए बाजार से खरीदते हैं

77

बेरा हांडी

1

हो

संग्रहक के रूप में प्रयोग किया जाता है

78

मिट्टी के बर्तन

2

हो

संग्रहक के रूप में प्रयोग किया जाता है

79

चुक्का

1

हो

संग्रहक के रूप में प्रयोग किया जाता है

80

कलसी

1

हो

संग्रहक के रूप में प्रयोग किया जाता है

81

नगाड़ा (छोटा)

1

हो

बाजार से ख़रीदा गया नृत्य एवं संगीत में प्रयुक्त वाद्य यंत्र

82

नगाड़ा

1

हो

बाजार से ख़रीदा गया नृत्य एवं संगीत में प्रयुक्त वाद्य यंत्र

83

मृदंग

1

हो

बाजार से ख़रीदा गया नृत्य एवं संगीत में प्रयुक्त वाद्य यंत्र

84

धनुष (अग्रसर)

1

हो

बाघ से शिकार में प्रयुक्त बांस और रस्सी से बनी वस्तु

85

तीर (सर)

2

हो

शिकार में प्रयुक्त लोहे, बांस और पंखों की बनी वस्तु

86

चूहा

1

हो

चूहे पकड़ने के लिए लकड़ी, बांस लोहे के तार एवं काँटी से निर्मित वस्तु

87

मछली

1

हो

मछली पकड़ने के लिए बांस की खमच्चियों द्वारा निर्मित

88

मछली (छोटा)

1

हो

मछली पकड़ने के लिए बांस की खमच्चियों द्वारा निर्मित

89

सांरगी

1

हो

लकड़ी, घोड़े के बाल और बकरी की झिल्ली से बना वाद्ययंत्र जिसका उपयोग नृत्य एवं गायन में होता है

90

साड़ी  (साड़ी लिजा:)

1

हो

स्त्रियों के पहनने की वस्तु जिसे बाजार से ख़रीदा जाता है

91

धोती (धोती लिजा:)

1

हो

पुरूषों  के पहनने की  वस्तु जिसे बाजार से ख़रीदा जाता है

92

मोचरा माला

1

हो

गले में पहनने के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है

93

मूंगा माला

1

हो

गले में पहनने के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है

94

बैल की ठारकी

2

हो

बैल के गले में बाँधने के लिए जनजातियों द्वारा निर्मित

95

पइला सेरही

1

हो

एक सेर अनाज के माप के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है

96

पइला ½ सेर

3

हो

आधा सेर अनाज के माप के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है

97

कटोरा (बड़ा)

1

हो

संग्रहण के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है

98

छिपली (छोटा)

1

हो

भोजन परोसने के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है

99

कटोरा (छोटा)

2

हो

एक पाव संग्रहण के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है

100

पइला ¼ सेर

4

हो

अनाज के माप के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है

101

धुपयानी

1

हो

धुप जलाने  के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है

102

दीया

1

हो

रौशनी के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है

103

मालिया (बड़ा)

1

हो

तेल रखने के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है

104

मालिया (छोटा)

1

हो

तेल रखने के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है

105

कलछुल

1

हो

खाना बनाने में उपयोग हेतु बाजार से ख़रीदा जाता है

106

सिंदूरदानी

1

हो

सिन्दूर रखने के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है

107

कोहंडी

1

हो

सामान रखने के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है

108

गोरांव

1

हो

पाजेब के सामान उपयोग होता है एवं बाजार से ख़रीदा जाता है

109

हंसली

1

हो

गले में पहनने के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है

110

खोरहू

2

हो

कलाई पर पहना जाता है

111

भोरहा

4

हो

कलाई पर पहना जाता है

112

सांका

2

हो

कलाई पर पहना जाता है

113

बेरा

4

हो

पैरों में पहनने के लिए बाजार से खरीदते हैं

114

पेरू

1

हो

मवेशियों के गले में बांधने के लिए बाजार से खरीदते हैं

115

बेरा हांडी

1

हो

संग्राहक के रूप में प्रयोग किया जाता है

116

मिट्टी के बर्तन

2

हो

संग्राहक के रूप में प्रयोग किया जाता है

117

चुक्का

1

हो

संग्राहक के रूप में प्रयोग किया जाता है

118

कलसी

1

हो

संग्राहक के रूप में प्रयोग किया जाता है

119

मूंडी

1

खरिया

सामान रखने के लिए

120

बीदा

1

संथाल

मिट्टी के टूकड़ों को तोड़ने की वस्तु जो लकड़ी सेनिर्मित है

121

मछली पकड़ने के जांजिद

2

संथाल

मछली पकड़ने के लिए बांस से निर्मित

122

तेल संग्रहक

1

संथाल

तेल रखने के लिए बाजार से खरीदी वस्तु

123

तार

1

संथाल

कलाई पर पहनने के लिए बाजार से ख़रीदा गया

124

कजरौटी

1

संथाल

काजल रखने की वस्तु जिसे बाजार से खरीदते हैं

125

कर्णफूल

1

संथाल

कानों में पहने जाने वाले आभूषण जिसे बाजार से ख़रीदा जाता है

126

ढिबरी

1

संथाल

रोशनी के लिए बाजार से खरीदते हैं

127

कंघी

9

संथाल

केश सज्जा के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है

128

पाउडर दानी

2

संथाल

पाउडर रखने के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है

129

नसदानी

1

संथाल

नस रखने के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है

130

खड़ाऊ

4

संथाल

चप्पल के समान प्रयुक्त बाजार से खरीदते हैं

131

चट्टी

2

संथाल

चप्पल के समान प्रयुक्त बाजार से खरीदते हैं

132

दालघोंटनी

1

संथाल

खाना बनाने में प्रयुक्त तथा बाजार से ख़रीदा जाता है

133

हाथी

1

संथाल

बच्चों का खिलौना जिसे बाजार से खरीदते हैं

134

टंगनी

1

संथाल

बच्चों का खिलौना जिसे बाजार से खरीदते हैं

135

बेंच

1

संथाल

घर के बरामदे में लकड़ी का बना टेबल

136

मचिया

1

संथाल

पहड़ा राजा के बैठने हेतु विशेष कुर्सी

137

श्रृंगारदान

1

संथाल

महिलाओं के श्रृंगार वस्तुओं के रखने हेतु

138

टेबल

1

संथाल

बच्चों का खिलौना जिसे बाजार से खरीदते हैं

139

कुर्सी

1

संथाल

बच्चों का खिलौना जिसे बाजार से खरीदते हैं

140

चारपाई

1

संथाल

बच्चों का खिलौना जिसे बाजार से खरीदते हैं

141

आदमी (टूटा हुआ)

1

संथाल

बच्चों का खिलौना जिसे बाजार से खरीदते हैं

142

संतरा का  रस निकालने वाला

1

संथाल

बच्चों का खिलौना जिसे बाजार से खरीदते हैं

143

सोप

1

संथाल

बच्चों का खिलौना जिसे बाजार से खरीदते हैं

144

नरया

1

संथाल

बच्चों का खिलौना जिसे बाजार से खरीदते हैं

145

पाउडरदानी

1

संथाल

बच्चों का खिलौना जिसे बाजार से खरीदते हैं

146

बाजागाड़ी

1

संथाल

बच्चों का खिलौना जिसे बाजार से खरीदते हैं

147

कठपुतली

5

संथाल

बच्चों का खिलौना जिसे बाजार से खरीदते हैं

148

गुड़िया

2

संथाल

बच्चों का खिलौना जिसे बाजार से खरीदते हैं

149

बाजा चिड़िया

2

संथाल

बच्चों का खिलौना जिसे बाजार से खरीदते हैं

150

करनी

1

संथाल

घर बनाने के काम में प्रयुक्त जिसे बाजार से ख़रीदा जाता है

151

तावा

1

संथाल

बाजार से खरीदकर खाना बनाने के उपयोग में लाया जाता है

152

झांझरा

1

संथाल

खाना बनाने में प्रयुक्त वस्तु जिसे बाजार से खरीदते हैं

153

धुरा

1

संथाल

शिकार में प्रयुक्त वस्तु जिसे बाजार से खरीदते हैं

154

चाकु

3

संथाल

काटने के उपयोग में लाया जाता है तथा बाजार से खरीदा जाता है

155

ताला

2

संथाल

लोहे का बना होता है जिसे बाजार खरीदते हैं

156

बटाली

1

संथाल

लोहे का बना होता और चीजों को बांटने के काम में आता है

157

माइका काटने का चाकु

2

संथाल

लोहे निर्मित तथा माइका काटने में प्रयुक्त

158

कलछुल

1

संथाल

खाना चलाने में प्रयुक्त तथा इसे बाजार से खरीदते हैं

159

चूहा पकड़ने का जल

1

संथाल

चूहा पकड़ने के लिए बाजार से खरीदते हैं

160

छूरा और उसका खोल

1

संथाल

शिकार में प्रयोग हेतु बाजार से खरीदते हैं

161

टांगी

1

संथाल

बाजार से काटने हेतु ख़रीदा जाता है

162

चनता

1

संथाल

घरेलू कार्य के लिए बाजार से खरीदते हैं

163

बीजर

2

संथाल

बांस और लोहे से निर्मित वस्तु जिसका शिकार में प्रयोग किया जाता है

164

सरौता

2

संथाल

सुपारी काटने के कार्य के लिए बाजार से खरीदते हैं

165

बरछा

2

संथाल

शिकार के  समय प्रयोग में लाया जाता है, इसे बाजार से खरीदते हैं

166

हंसूआ (बड़ा)

1

संथाल

काटने के काम में प्रयुक्त होता है

167

छंटनी

1

संथाल

छंटनी करने के लिए बाजार से खरीदते हैं

168

ढाल

1

संथाल

बाजार से रक्षात्मक उपयोग  के लिए ख़रीदा जाता है

169

ढिबरी

1

संथाल

प्रकाश करने के कार्य के लिए बाजार से खरीदते हैं

170

गुप्ती

1

संथाल

शिकार में प्रयोग के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है

171

गद्देदार रबर का खोल

1

संथाल

लोहा रखने में प्रयुक्त होता है और इसे बाजार से खरीदते हैं

172

लहटी चूड़ी

9

संथाल

कलाई में पहनने के लिए बाजार से खरीदते हैं

173

बाह का चूड़ी

1

संथाल

कलाई में पहनने के लिए बाजार से खरीदते हैं

174

चूड़ी

3

संथाल

कलाई में पहनने के लिए बाजार से खरीदते हैं

175

तरपत (छोटा)

1

संथाल

पत्तियों से बनी कानों में पहनने की बालियाँ

176

माला

1

संथाल

गले में पहनने के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है

177

तौलिया

1

संथाल

कपड़े बदलने के लिए उपयुक्त इसे बाजार से जाता है

178

बातू

2

संथाल

-----------

179

हिरण का सींग

2

संथाल

परिवार की प्रतिष्ठा के लिए इस सींग का प्रयोग किया जाता है

180

बच्चे के साथ स्त्री (गुड़िया)

2

संथाल

बच्चों के मनोरंजन हेतु बाजार से खरीदते हैं

181

घड़े के साथ स्त्री (गुडिया)

3

संथाल

बच्चों के मनोरंजन हेतु बाजार से खरीदते हैं

182

मछली के साथ औरत (गुड़िया)

2

संथाल

बच्चों के मनोरंजन हेतु बाजार से खरीदते हैं

183

टोकरी सहित औरत

1

संथाल

बच्चों के मनोरंजन हेतु बाजार से खरीदते हैं

184

चिड़िया के साथ औरत (गुड़िया)

1

संथाल

संथाल बच्चों के मनोरंजन हेतु बाजार से खरीदते हैं

185

दीया सहित औरत (गुड़िया)

1

संथाल

संथाल बच्चों के मनोरंजन हेतु बाजार से खरीदते हैं

186

औरत (गुड़िया)

4

संथाल

संथाल बच्चों के मनोरंजन हेतु बाजार से खरीदते हैं

187

पुरूष (गुड़िया)

2

संथाल

संथाल बच्चों के मनोरंजन हेतु बाजार से खरीदते हैं

188

घुड़सवार (गुड़िया)

2

संथाल

संथाल बच्चों के मनोरंजन हेतु बाजार से खरीदते हैं

189

हाथी पर सवार पुरुष (गुड़िया)

2

संथाल

संथाल बच्चों के मनोरंजन हेतु बाजार से खरीदते हैं

190

गायें

2

संथाल

संथाल बच्चों के मनोरंजन हेतु बाजार से खरीदते हैं

191

गणेशजी

1

संथाल

संथाल बच्चों के मनोरंजन हेतु बाजार से खरीदते हैं

192

उल्लू

1

संथाल

संथाल बच्चों के मनोरंजन हेतु बाजार से खरीदते हैं

193

तोता

3

संथाल

संथाल बच्चों के मनोरंजन हेतु बाजार से खरीदते हैं

194

कागज के पंख वाली चिड़िया

1

संथाल

संथाल बच्चों के मनोरंजन हेतु बाजार से खरीदते हैं

195

शेर कार्ड बोर्ड पर

1

संथाल

संथाल बच्चों के मनोरंजन हेतु बाजार से खरीदते हैं

196

चीलम

7

संथाल

तम्बाकू पीने के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है

197

गुलदस्ता

2

संथाल

फूलदार पौधों को रखने के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है

198

पइला

3

संथाल

अनाज के माप के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है

199

अँधा चुक्का

3

संथाल

पैसा रखने के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है

200

कप

1

संथाल

सामान रखने हेतु बाजार से ख़रीदा जाता है

201

कबूतर

1

संथाल

बच्चों के खेलने के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है

202

पौवा

2

संथाल

आनाज की माप के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है

203

गगरा

1

संथाल

बच्चों के मनोरंजन के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है

204

कृष्ण जी

2

संथाल

संथाल बच्चों के मनोरंजन हेतु बाजार से खरीदते हैं

205

सेरहा

1

संथाल

अनाज की माप के लिए बाजार से खरीदते हैं

206

सेरहा (1/2 सेर)

1

संथाल

अनाज की माप के लिए बाजार से खरीदते हैं

207

मितिया

1

संथाल

बच्चों के खेलने की वस्तु जिसे बाजार से खरीदते हैं

208

मलिया

4

संथाल

तेल रखने के लिए बाजार से खरीदते हैं

209

हुक्का

1

संथाल

तम्बाकू पीने के लिए बाजार से खरीदते हैं

210

चुक्का (बड़ा)

1

संथाल

बर्तन को रखने के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है

211

बोञ

1

संथाल

बच्चों के मनोरंजन हेतु बाजार से खरीदते हैं

212

गमला

1

संथाल

बच्चों के मनोरंजन हेतु बाजार से खरीदते हैं

213

पाटली

1

संथाल

बच्चों के मनोरंजन हेतु बाजार से खरीदते हैं

214

चमक

1

संथाल

बच्चों के मनोरंजन हेतु बाजार से खरीदते हैं

215

जूइं

1

संथाल

बच्चों के मनोरंजन हेतु बाजार से खरीदते हैं

216

सरपोस्त

1

संथाल

बच्चों के मनोरंजन हेतु बाजार से खरीदते हैं

217

बोय

1

संथाल

बच्चों के मनोरंजन हेतु बाजार से खरीदते हैं

218

चुक्का

1

संथाल

बच्चों के मनोरंजन हेतु बाजार से खरीदते हैं

219

सुराही

1

संथाल

बच्चों के मनोरंजन हेतु बाजार से खरीदते हैं

220

हरका

1

संथाल

बच्चों के मनोरंजन हेतु बाजार से खरीदते हैं

221

मौना

3

संथाल

बच्चों के मनोरंजन हेतु बाजार से खरीदते हैं

222

पाउती

5

संथाल

बच्चों के मनोरंजन हेतु बाजार से खरीदते हैं

223

तापना

2

संथाल

बच्चों के मनोरंजन हेतु बाजार से खरीदते हैं

224

मुनी

5

संथाल

बच्चों के मनोरंजन हेतु बाजार से खरीदते हैं

225

दस्ती पाउती

1

संथाल

बच्चों के मनोरंजन हेतु बाजार से खरीदते हैं

226

पंखा

3

संथाल

बच्चों के मनोरंजन हेतु बाजार से खरीदते हैं

227

डलिया

2

संथाल

बर्तनों को रखने के लिए बाजार से खरीदते हैं

228

कुंचरी

2

संथाल

बर्तनों को रखने के लिए बाजार से खरीदते हैं

229

सुपली

1

संथाल

फटकने की कार्य के लिए बाजार से खरीदते हैं

230

बट्टा

1

संथाल

माप के लिए प्रयुक्त किया जाता है

231

खूचरी

1

संथाल

फटकने की कार्य के लिए बाजार से खरीदते हैं

232

सुप

1

संथाल

फटकने के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है

233

धरा तराजू

1

संथाल

आनाज के माप के लिए बाजार से खरीदते है

234

तापी

1

संथाल

बच्चों के मनोरंजन हेतु बाजार से खरीदते हैं

235

झापली डोली

1

संथाल

बच्चों के मनोरंजन हेतु बाजार से खरीदते हैं

236

पिंजरा

1

संथाल

चिड़िया को रखने के लिए बाजार से खरीदते हैं

237

तापी (बड़ा)

1

संथाल

बच्चों के मनोरंजन हेतु बाजार से खरीदते हैं

238

छोपी

2

संथाल

वर्षा से बचाव के लिए निर्मित

239

झाड़ू

2

संथाल

फर्श की सफाई के लिए बाजार से खरीदते हैं

240

टोकरी

2

संथाल

बर्तन रखने के लिए बाजार से खरीदते हैं

241

दस्ती पोटी

1

संथाल

बच्चों के मनोरंजन हेतु बाजार से खरीदते हैं

242

पैजन

4

संथाल

बच्चों के मनोरंजन हेतु बाजार से खरीदते हैं

243

सिकड़ी

1

संथाल

गले में पहनने के लिए बाजार से खरीदते हैं

244

माला

1

संथाल

गले में पहनने के लिए बाजार से खरीदते हैं

245

धांकी

1

संथाल

गम्हार लकड़ी से निर्मित इसका उपयोग वाद्य  के रूप में नृत्य के रूप में किया जाता है।

246

हेंगारो

1

संथाल

सामान रखने के रूप में प्रयुक्त इसे बाजार से खरीदते हैं

247

पवा

1

संथाल

अनाज को मापने के लिए प्रयुक्त होता है

248

परि

1

संथाल

अनाज को मापने के लिए प्रयुक्त होता है

249

कटली

1

संथाल

तेल रखने के लिए बाजार से खरीदते हैं

250

चूहे का जाल

1

संथाल

लकड़ी और रस्सी का बना होता है और चूहे को मारने के लिए प्रयुक्त होता है

251

झीनपीर

1

संथाल

कानों में पहनने के लिए प्रयुक्त होता है

252

पुटकी

1

संथाल

नाक में पहनने के लिए प्रयोग किया जाता है

253

बहासूथक

1

संथाल

केश सज्जा के लिए बाजार से ख़रीदा जाता है

254

मंडोली

1

संथाल

गले में पहनने के लिए ख़रीदा जाता है

255

मर्चबाड़ा

1

संथाल

कानों में पहनने के लिए ख़रीदा जाता है

256

सुलक

1

संथाल

बालों को सँवारने के लिए ख़रीदा जाता है

257

ठाकापगडा

1

संथाल

कानों में पहनने के लिए प्रयुक्त होता है

258

मुपुतकी

1

संथाल

कानों में पहनने के लिए प्रयुक्त होता है

259

चुरली

1

संथाल

कलाई में पहनने के लिए ख़रीदा जाता है

260

ओहगंब्रन

1

संथाल

नृत्य गान में पहना जाता है

261

संथाली साड़ी

1

संथाल

स्त्रियों द्वारा पहना जाता है

262

परहंद

1

संथाल

लड़कियां स्कर्ट के समान इसे पहनती है

263

भगुआ

1

संथाल

नीचे पहनने वाले वस्त्र के रूप में प्रयुक्त होता है

264

पंछी

1

संथाल

साड़ी के समान व्यवहृत होता है

265

पेपरे

1

संथाल

लकड़ी और ताड़ पत्ते का बना होता है तथा नृत्य गान में इसका उपयोग  होता है

266

लूतुरपुतकी

1

संथाल

कानों में पहनने के लिए प्रयुक्त होता है

267

तीर

2

संथाल

बांस और पंख की बनी यह चीज शिकार करने में काम आती है

268

धनुष

2

संथाल

बांस और रस्सी से निर्मित इसे शिकार करने में प्रयोग करते हैं

269

बांसुरी

3

संथाल

वाद्य यंत्र के रोप में प्रयुक्त होता है

270

तूनूज

1

संथाल

लकड़ी और धागे से बना इससे चूहा पकड़ा जाता है

271

चेरी पांसी

1

संथाल

यह लकड़ी घोड़े की बाल और बकरी की झिल्ली से बना होता है

272

बानय

1

संथाल

नृत्य - गान के समय बजाया जाता है

273

गूंदरी सांय

1

संथाल

गूंगू पत्ता और बैलों के बाल से बना यह चिड़िया पकड़ने के काम में आता है

274

स्ट्रिंग त्रपत्र

3

संथाल

बांस और घोड़े के बाल से बना वाद्य यंत्र

275

तुराई

1

संथाल

लकड़ी और तार के पत्ते से बना वाद्य यंत्र

276

लाठा

1

संथाल

चिड़िया पकड़ने के काम में आता है

277

लोहे की चूड़ी

2

संथाल

कलाई में पहनने के लिए ख़रीदा जाता है

278

कंगन

2

संथाल

बांह में पहना जाता है

279

कारू

1

संथाल

कलाई  में पहनने का आभूषण

280

करताल

2

संथाल

नृत्य गान में बजाने की वस्तु

281

झीका

3

संथाल

नृत्य गान में बजाने की वस्तु

282

कंगन

2

संथाल

कलाई  में पहनने का आभूषण

283

बोंक

1

संथाल

पैरों में पहनने के लिए ख़रीदा जाता है

284

सकुआ

1

संथाल

भैंस के सींग से बनी वस्तु समारोहों में फूंकने के काम आती है

285

लिपूर

2

संथाल

नृत्य – गान में प्रयुक्त होता है

286

तुमदक

2

संथाल

नृत्य – गान में प्रयुक्त होता है

287

मरक पिंचर

1

संथाल

जंगल से लाया जाता है और नृत्य – गान में प्रयुक्त होता है

288

मुरब्बे

1

बिरहोर

विक्रय हेतु रेशों से निर्मित होता है

289

हंसली

1

बिरहोर

गले में पहनने के लिए बाजार से खरीदते हैं

290

फूदना

1

बिरहोर

बाहों पर पहनने के लिए बाजार से खरीदते है

291

पगड़ा

2

बिरहोर

कानों में पहनने के लिए ख़रीदा जाता है

292

अरापत

1

बिरहोर

मछली पकड़ने के लिए बांस से निर्मित सामान

293

खूंघी

1

बिरहोर

सामन रखने के लिए

294

खानरा

2

बिरहोर

छऊ नृत्य में प्रयुक्त लकड़ी का बना होता है

295

बलम

1

बिरहोर

शिकार या आत्मारक्षा के लिए प्रयोग होता है

296

सकम

1

बिरहोर

साल के पत्तों से बना कान में पहने जाने वाला आभूषण होता है

297

चिकुआर

1

बिरहोर

ताबीज के रूप में प्रयुक्त होता है। दांतों को धागों से बांधकर गले में बीमारी दूर करने के लिए पहनते हैं

298

भानुरी माला

1

बिरहोर

लू से बचने के लिए पहना जाता है

299

झाली

1

बिरहोर

बिरहोर इसका प्रयोग जाल के रूप में करते हैं

300

बेअर पेशा

1

बिरहोर

रस्सी बनाने के लिए कच्चा माल के रूप में करते हैं

301

सिकुआ

1

बिरहोर

झोला के समान प्रयुक्त

302

दोअर

1

बिरहोर

महलेन पेड़ से बनाया जाता है

303

बंदर की चमड़ी

1

बिरहोर

नगाड़ा या ढोल पर इसे मढ़ा जाता है

304

कुमनी

2

बिरहोर

मछली पकड़ने के लिए बांस से बना

305

कुरूआ

1

बिरहोर

मछली पकड़ने के लिए बांस से बना

306

तूंबा

1

बिरहोर

पानी रखने में प्रयुक्त होता है

307

धनु और तीर

2

बिरहोर

बांस और रस्सी से बना शिकार करने के काम में आता है

308

लुंडिक

1

बिरहोर

विक्रय हेतु गम्हार की लकड़ी का बना होता है

309

ऊखल

1

बिरहोर

विक्रय हेतु साल की लकड़ी का बना होता है

310

समाठ

1

बिरहोर

विक्रय हेतु साल की लकड़ी का बना होता है

311

सूपत ढोलकी खोल

3

 

बिरहोर

विक्रय हेतु लकड़ी का बना होता है

312

राबगा

1

बिरहोर

विक्रय हेतु लकड़ी का बना होता है

313

कठौत

1

बिरहोर

विक्रय हेतु लकड़ी का बना होता है

314

मादर जनाउ

1

बिरहोर

विक्रय के लिए बांस का बना होता है

315

खखोरनी

1

बिरहोर

लकड़ी और लोहे का बना होता है तथा नगाड़ों या ढोल के खोल को चिकना किया जाता है

316

बसुला

1

बिरहोर

लकड़ी और लोहे का बना जंगल में कार्य करने के लिए प्रयुक्त होता है

317

टांगा

1

बिरहोर

लकड़ी और लोहे का बना जंगल में कार्य करने के लिए प्रयुक्त होता है

318

टांगुला

1

बिरहोर

लकड़ी और लोहे का बना जंगल में कार्य करने के लिए प्रयुक्त होता है

319

सबर

1

बिरहोर

मिट्टी खोदने के कार्य में प्रयुक्त होता है

320

चोप की रस्सी

8 बंडल

बिरहोर

जंगल से प्राप्त रस्सी बनाई जाती है

321

सिलाई की रस्सी

1

बिरहोर

बेचने के उद्देश्य से रेशों से बनाया जाता है

322

मुरब्बे की रस्सी

1

बिरहोर

विक्रय हेतु रेशों से निर्मित होता है

323

काटू छूरी

1

बिरहोर

काटने एवं छीलने के कार्य में प्रयुक्त होता है

324

हनौथ

1

बिरहोर

रस्सी को बराबर करने हेतु लकड़ी का बना होता है

325

ताला

1

लोहरा

विक्रय के लिए इस टेल का निर्माण लोहे से होता है

326

खरगोश पकड़ने का जाल

1

लोहरा

खरगोश पकड़ने के लिए बाजार से खरीदते हैं

327

डोरा गजिया

1

लोहरा

पैसे रखने के लिए धागों से निर्मित

328

घोंघी

3

लोहरा

बांस से निर्मित मछली पकड़ने के लिए प्रयुक्त

329

साड़ी

1

लोहरा

पहनने के लिए बाजार से खरीदते हैं

330

मूंगा चेन

1

लोहरा

बाजार से खरीद कर गले में पहनते हैं

331

तरकी

4

खरवार

कानों में पहनने के लिए बाजर से लाते हैं

332

डंडकहार

1

 

नृत्य के समय कमर में पहना जाता है

333

मांदर

1

खरवार

नृत्य गान में वाद्य यंत्र के रूप में प्रयुक्त होता है

334

झाल

1

खरवार

नृत्य में प्रयुक्त होता है

335

साड़ी

1

खरवार

पहनने के उपयोग में आता है तथा बाजार से खरीदते हैं

336

करया

1

खरवार

पुरूषों द्वारा पहनने के प्रयोग में आता है

337

सहइया काँटा

10

खरवार

नृत्य के समय इसका प्रयोग सजने के लिए किया जाता है

338

पहारिया सुलाकी

1

पहाड़िया

केश – विन्यास में प्रयुक्त होता है

339

बांस गोलट

2

असुर

बांस और रस्सी से बनाया जाता है और शिकार करने में प्रयुक्त होता है

340

उद का खाल

1

असुर

ढोल या नगाड़ों पर चढ़ाया जाता है

341

रेवाया

2

 

असुर

लकड़ी का बना बच्चों के खेल के उपयोग में आता है

342

सगरी

1

असुर

लकड़ी का बना बच्चों के खेल के उपयोग में आता है

343

छोटा धनु

1

असुर

बांस का बना शिकार करने के काम में आता है

344

सिल्ली या करधनी

2

असुर

बैल कापूंछ के बाल का बना, कमर शारीरिक सुंदरता बनाने के लिए पहना जाता है

345

लगुना का सिंग

1

असुर

मूठ के समान उपयोग तथा प्रतिष्ठा का परिचायक

346

बाघ  दूध

1

असुर

बाघिन का दूध जिसका उपयोग दवा में होता है

347

कानू या चपुआ

2

असुर

बांस की लकड़ी एवं चमड़े से निर्मित वस्तू जिसका उपयोग फूंकने में किया जाता है

348

काठा दांग

2

असुर

लकड़ी का बना

349

नाड़ी या

1

असुर

लकड़ी का बना

350

सौरसी

1

असुर

लोहे का बना होता है तथा औजार के रूप में लोहरा इसका उपयोग करते हैं

351

कूतासी या पास

1

असुर

रोजमर्रा के कम में आने वाली वस्तु जो लोहे की बनी होती है

352

चूड़ी

1

असुर

मिट्टी का बना होता है और छत बनाने के काम में आता है

353

मुंगरा

2

असुर

यह लकड़ी का बना होता है तथा मिट्टी के टाइल बनाने वाले सांचे के नीचे वाले भाग में प्रयुक्त होता है

354

वासुकी

1

असुर

मिट्टी का बना होता है और छत बनाने के काम में आता है

355

खपड़ा

2

असुर

मिट्टी का बना होता है और छत बनाने के काम में आता है

356

बूलंग काठ

1

असुर

लकड़ी का बना नमक एवं मसाला रखने के काम में आता है

357

कुमनी

1

असुर

बांस का बना मछली पकड़ने का काम में आता है

358

नचूआ

1

असुर

बांस का बना होता है तथा मछली  पकड़ने के काम में आता है

359

टोंकी

1

असुर

महालियान पत्तों द्वारा निर्मित इसका उपयोग अनाज के संग्रहण में होता है

360

पोतम

1

असुर

----

361

गूंगू

1

असुर

बारिश से बचाव हेतु इसका उपयोग होता है और यह गूंगू पत्ता से निर्मित होता है

362

लडोरा

1

असुर

महालियन पेड़ के छाल से इस रस्सी का निर्माण होता है

363

सिसिर डोरा

1

असुर

शिशिर पेड़ की छाल से इस रस्सी का निर्माण होता है

364

मोराबी डोरा

1

असुर

मोराबी पेड़ की छाल से इस रस्सी का निर्माण होता है

365

उदाल डोरा

1

असुर

उदाल पेड़ की छाल से इस रस्सी का निर्माण होता है

366

फूतचीरा

1

असुर

झाडू बनाने के काम में इसका उपयोग होता है

367

खजूर पत्ती

1

असुर

चटाई बनाने में इसका प्रयोग होता है

368

जनाउ

1

असुर

एक प्रकार की घास से निर्मित यह बुहारने एवं विक्रय किया जाता  है

369

खजूर की चटाई

1

असुर

जमीन पर बिछाकर बैठने तथा धान सुखाने के काम में आता है

370

पोपरा

1

असुर

पोपरा की गुठली के इस्तेमाल नमक रखने में होता है

371

दतराम

1

असुर

लोहा एवं लकड़ी का बना होता है तथा इसका उपयोग अनाज काटने के समय होता है

372

चमड़ी (बैल की)

1

असुर

इसका विक्रय किया जाता है

373

थारकी

1

असुर

लकड़ी और धागे से बनी इस वस्तु को मवेशियों के गले में बांधा जाता है

374

नाहेल (हल)

1

असुर

लकड़ी, बांस के तार एवं लोहे से निर्मित इसका प्रयोग हल चलाने के करते हैं

375

जुअथ

1

असुर

साल की लकड़ी का बुना होता है और बैलों के गले डाला जाता है

376

पट्टा

1

असुर

लकड़ी का बना होता है और हल चलाने के बाद मिट्टी बराबर करने में प्रयुक्त होता है

377

सुप्तिकाठु

1

असुर

लकड़ी का बना होता है तथा सुअरों को खिलाने के लिए प्रयुक्त होता है

378

रांवा

1

असुर

लकड़ी और लोहे का बना होता है तथा मिट्टी कुरेदने के काम आता है

379

लकड़ी का फर्नीचर

2

असुर

लकड़ी का बना होता है तथा बैठने के काम में आता है

380

पाटनी

4

असुर

लकड़ी का बना होता है तथा तेल सामान रखने के काम आता है

381

पूटली

1

असुर

बांस का बना होता है और सामान रखने के काम आता है

382

बेहिंगा

1

असुर

सामान ढोने के कार्य में प्रयुक्त यह लकड़ी  का बना होता है

383

घानु एवं चियारी

1

असुर

बांस और रस्सी का बना होता है तथा बच्चों के खेलने के काम में आता है

384

मोंगरा

1

असुर

लकड़ी के निर्मित हथौड़े के रूप में व्यवहृत होता है

385

मोरा

1

असुर

अनाज संग्रहण के लिए यह धान की भूंसी से बना होता है

386

दारी

1

असुर

लोहा बनाने के अयस्क के रूप में व्यवहृत

387

गेरा

1

असुर

लोहन गलाने के बाद बचा हुआ अयस्क

388

काँटी

1

असुर

चुना बनाने के लिए इस चूने के पत्थर के प्रयोग कच्चा माल के रूप में होता है

389

सफेद मिट्टी

1

असुर

सिर धोने में इसका इस्तेमाल किया जाता है

390

काली मिट्टी

1

असुर

सिर धोने में इसका इस्तेमाल किया जाता है

391

मिट्टी

1

असुर

सिर धोने में इसका इस्तेमाल किया जाता है

392

तमुक

1

असुर

महुआ के फूल को तम्बाकू के पत्ते के साथ मिलाकर इसका इस्तेमाल महिलाओं द्वारा नशा के लिए किया जाता है

393

चारी और अनगढ़ा

1

असुर

बैल के पूंछ के बाल का उपयोग कमरबंद बनाने में होता है

394

माथादत राम

1

असुर

लकड़ी और लोहे का बना इसे घास निकालने में उपयोग करते हैं

395

अखरनी

1

असुर

बांस और लोहे का बना यह औजार अनाज पीटने का काम आता है

396

सखेस

1

असुर

अनाज ढोने में प्रयुक्त होते है

397

चुनौटी

1

असुर

तम्बाकू रखने के लिए बाजार से खरीदते हैं

398

टड्डू

1

सौरिया पहाड़िया

भेलवा की लकड़ी से बना

399

तोश

1

सौरिया पहाड़िया

भेलवा की लकड़ी से बना

400

अरतू

1

सौरिया पहाड़िया

बांस और गूंगू पत्ता से बनी वस्तु जिसका उपयोग शिकार करने से होता है

401

चारू

1

सौरिया पहाड़िया

बांस और मयूर पंख से निर्मित, शिकार में प्रयुक्त

402

छोंगे

1

सौरिया पहाड़िया

बांस से निर्मित पंखे के रूप में प्रयुक्त

403

ततरू

1

सौरिया पहाड़िया

फसलों की कटाई में प्रयुक्त

404

कड्डू

12

सौरिया पहाड़िया

कलाई पर पहनने के लिए ख़रीदा जाता है

405

कदबे अंगती

8

सौरिया पहाड़िया

पैर के अंगूली में पहना जाता है

406

बंसली

1

सौरिया पहाड़िया

नृत्य – गान में प्रयुक्त, बांस से बना वाद्य यंत्र

407

कांदो

1

सौरिया पहाड़िया

जामुन की लकड़ी से बना बैठने के काम में प्रयुक्त होता है

408

भासू

1

सौरिया पहाड़िया

लकड़ी काटने का औजार जो जामुन की लकड़ी और लोहे का बना होता है

409

बाघ धानु

1

सौरिया पहाड़िया

बाघ के शिकार के लिए बांस और रस्सी से बना

410

तुरकू

1

सौरिया पहाड़िया

सखूआ के लकड़ी से निर्मित चूहा पकड़ने के काम में आता है

411

बंसली

1

सौरिया पहाड़िया

बांस का बना होता है और नृत्य गान में काम आता है

412

जोगरी

1

सौरिया पहाड़िया

साल की लकड़ी का बना होता है और मिट्टी खोदने के काम में आता है

413

तुक्का

1

सौरिया पहाड़िया

बांस और मयूर पंख का बना, चिड़िया मारने के काम में आता है

414

कांडवरे

1

सौरिया पहाड़िया

साल की लकड़ी का बना होता है जिसमें सूअरों को खाना देते हैं

415

सेरा

1

सौरिया पहाड़िया

बांस का बना, मछली पकड़ने के काम में आता है

416

तोकरेन

1

सौरिया पहाड़िया

बांस का बना मवेशियों के गले में बाँधा जाता है

417

कद – ब – ए’ अंगती

16

सौरिया पहाड़िया

कानों में पहनने हेतु ख़रीदा जाता है

418

मूइया एन – अंगती

2

 

सौरिया पहाड़िया

नाक में पहनने हेतु ख़रीदा जाता है

419

पइ

1

सौरिया पहाड़िया

अनाज को मापने के लिए प्रयोग में आता है

420

पूरसो

1

सौरिया पहाड़िया

अनाज को मापने के लिए प्रयोग में आता है

421

देनरू

1

सौरिया पहाड़िया

जामुन की लकड़ी, बांस और घोड़े के बाल से बना वाद्य यंत्र

422

कनजली

2

सौरिया पहाड़िया

कचनार की लकड़ी बना वाद्य यंत्र

423

नकतु

1

सौरिया पहाड़िया

भेलवा की लकड़ी से बना नृत्य में पहना जाता है

424

खैलू

1

सौरिया पहाड़िया

आम की लकड़ी से बना वाद्य यंत्र

425

गूगोरी

1

सौरिया पहाड़िया

पैरों में पहनने के लिए खरीदा जाता है

426

धनुष

2

सौरिया पहाड़िया

बांस और रस्सी से बनी वस्तु जिसका उपयोग शिकार करने में आता है

427

चिड़िया का जाल

3

सौरिया पहाड़िया

बांस और रस्सी से बना होता है तथा इससे चिड़िया फंसाई जाती है

428

मिट्टी कुरेदने की छड़ी

1

सौरिया पहाड़िया

बांस और कुरूम के रेशे से निर्मित होता है तथा मिट्टी कुरेदने के काम में आता है

429

घोती

1

पहारिया

बांस का बना मछली रखने में प्रयुक्त होता है

430

पाटनी

1

माल पहाड़िया

बीजों को रखने के लिए पत्ती से बना होता है

 

431

दादू

1

माल पहाड़िया

चावल पकाने में प्रयुक्त होता है

432

कादू

4

माल पहाड़िया

कलाई पर पहनने के लिए बाजार से खरीदते हैं

433

पूंदू

16

माल पहाड़िया

माला के रूप में व्यवहृत होता है

434

झाल सूलक

2

माल पहाड़िया

बाल में लगाने वाले क्लिप के समान प्रयुक्त होता है

435

कोरला फूली

2

माल पहाड़िया

नाक में पहनने के लिए खरीदते हैं

436

पैजन

2

माल पहाड़िया

पैरों में पहनने हेतु खरीदते हैं

437

खंता

1

माल पहाड़िया

मिट्टी खोदने के काम में आता है तथा लकड़ी और लोहे का बना होता है

438

लकड़ी

1

माल पहाड़िया

कटहल की लकड़ी का बना होता है

439

चूटी

1

माल पहाड़िया

काँटा निकालने में प्रयुक्त होता है

440

दाओ

1

माल पहाड़िया

पेड़ काटने में प्रयुक्त होता है

441

झांप (चूहा का जाल) फांस

1

माल

पहाड़िया

चूहा पकड़ने के लिए लकड़ी का बना होता है

442

पून

10

माल पहाड़िया

माला के रूप में व्यवहृत होता है

443

बीजोती

1

माल पहाड़िया

बांह में पहना जाता है और बाजार से ख़रीदा जाता है

444

बाजू

4

माल पहाड़िया

बांह में पहना जाता है और बाजार से ख़रीदा जाता है

445

महुली

2

माल पहाड़िया

गले में पहनने के लिए प्रयोग होता है

446

बोंक

4

माल पहाड़िया

पैर में पहनने के लिए प्रयोग होता है

447

ठेक

4

माल पहाड़िया

कलाई पर पहना जाता है

448

सिकड़

1

माल पहाड़िया

गले में पहना जाता है

449

खोन्सो

4

माल पहाड़िया

बाल में क्लिप के समान इस्तेमाल किया जाता है

450

झालासू लक

1

माल पहाड़िया

बाल में क्लिप के समान इस्तेमाल किया जाता है

451

चूटा

1

माल पहाड़िया

काँटा निकालने में प्रयुक्त होता है

452

एरतु

1

माल पहाड़िया

बांस और रस्सी का बना शिकार करने में प्रयुक्त होता है

453

दुलिया

2

माल पहाड़िया

चिड़िया मारने के लिए लकड़ी एवं बांस का बना होता है

454

चरतु

11

माल पहाड़िया

बांस और लोहे का बना होता है और जंगली जानवरों को मारने में व्यवहृत होता है

455

ततरूदू

1

माल पहाड़िया

जानवरों को मारने में व्यवहृत होता है

456

टूनगा

1

माल पहाड़िया

घास और छोटे पेड़ काटने में व्यवहृत होता है

457

उर्मल

1

माल पहाड़िया

बांस का बना एक तरह वाद्य यंत्र

458

लीपुर

1

माल पहाड़िया

नृत्य के समय पैर में पहना जाने वाला आभूषण, नृत्यगान में इसका प्रयोग होता है

459

चकमक

1

माल पहाड़िया

घर्षण से आग उत्पन्न करने के लिए प्रयुक्त

460

जातरे

1

माल पहाड़िया

बाघ के शिकार के लिए बांस का बना होता है

461

बनावे

1

माल पहाड़िया

एक प्रकार का वाद्य यंत्र

462

ढाक

1

माल पहाड़िया

नगाड़ा या ढोल बनाने में प्रयुक्त लकड़ी का बना होता है

463

चाहे

1

माल पहाड़िया

लकड़ी का बना मिटटी खोदने के व्यवहृत होता है

464

डोले आरचापो

1

माल पहाड़िया

खुरचने के प्रयोग में आता है

465

मतला

1

माल पहाड़िया

बांस और पत्तों से निर्मित बारिश से बचाव के लिये प्रयुक्त होता है

466

सुरली

1

माल पहाड़िया

बांस का बना वाद्य यंत्र

467

मनरली

1

माल पहाड़िया

बांस का बना वाद्य यंत्र

468

आले

1

माल पहाड़िया

लकड़ी से बना हल चलाने के प्रयोग में आता है

469

जोगी

1

माल पहाड़िया

लकड़ी और लोहे से बना मिट्टी खोदने के काम में आता है

 

स्त्रोत: कल्याण विभाग, झारखण्ड सरकार

 

 

3.05

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