सामग्री पर पहुँचे | Skip to navigation

होम (घर) / शिक्षा / बाल अधिकार / शिक्षा एक मौलिक और मानवाधिकार
शेयर
Views
  • अवस्था संपादित करने के स्वीकृत

शिक्षा एक मौलिक और मानवाधिकार

शिक्षा एक मौलिक मानव अधिकार है। यह व्यक्ति और समाज के रूप में हमारे विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

मौलिक अधिकार के रूप में शिक्षा

भारत के प्रत्येक नागरिक को प्राथमिक शिक्षा पाने का अधिकार है। इस संबंध में “प्रारंभिक (प्राथमिक व मध्य स्तर) शिक्षा निःशुल्क हो, प्रारंभिक शिक्षा अनिवार्य हो तथा तकनीकी व व्यावसायिक शिक्षा को सर्वसुलभ बनाया जाए एवं उच्च शिक्षा सभी की पहुँच के भीतर हो” कुछ ऐसे बुनियादी सिद्धान्त हैं जो हमारा मार्गदर्शन कर रहे हैं।

शिक्षा का उपयोग मानव व्यक्तित्व के संपूर्ण विकास, मानवीय अधिकारों और बुनियादी स्वतंत्रता के लिए किया जाना चाहिए। माता-पिता और अभिभावकों को यह पूर्वाधिकार हो कि वे अपने बच्चों को किस तरह की शिक्षा देना चाहते हैं।

ईएफए क्यों महत्वपूर्ण है?

8 भाग में एमडीजी हासिल करने के लिए सर्व शिक्षा के लक्ष्य प्राप्त करना कुछ हद तक बच्चे और प्रजनन स्वास्थ्य पर इसके सीधे असर की वज़ह से बेहद महत्वपूर्ण है और साथ ही इस कारण कि ईएफए 2015 के लक्ष्यों के लिए ईएफए ने बहु-साथी सहयोग में विस्तृत अनुभव हासिल किया है। इसके साथ ही, स्वास्थ्य में सुधार, पीने के साफ पानी की सुगमता, गरीबी में कमी, और पर्यावरणीय स्थिरता जैसे अन्य एमडीजी को प्राप्त करना शिक्षा एमडीजी प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

हालांकि कई ईएफए लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में लगातार प्रगति हुई है, चुनौतियां फिर भी बाकी हैं। आज स्कूल जाने लायक उम्र के कई बच्चे हैं जो अभी भी वित्तीय, सामाजिक या शारीरिक चुनौतियों – जिनमें उच्च प्रजनन दर, एचआईवी / एड्स, और संघर्ष शामिल हैं, की वज़ह से अभी भी स्कूल नहीं जाते हैं।

विकासशील देशों में स्कूली शिक्षा की सुगमता 1990 से बेहतर हुई है – 163 में से कोई 47 देशों ने सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा (एमडीजी 2) हासिल की है और अतिरिक्त 20 देश 2015 तक इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए "सही राह पर” होने के लिए अनुमानित हैं। लेकिन 44 देशों में अभी भी भारी चुनौतियां बाकी हैं, जिनमें से 23 उप-सहारा अफ्रीका में हैं। इन देशों में 2015 तक सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने की संभावना नहीं है जब तक कि घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों को त्वरित न किया जाए।

हालांकि शिक्षा में लैंगिक अंतर (एमडीजी 3) कम हो रहा है, जब प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय के लिए सुगमता तथा इनके पूरा होने की बात की जाती है तो बालिकाओं को लाभ अभी भी सीमित है। प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर बालिकाओं के हाल ही में नामांकन के बावजूद -विशेष रूप से उप - सहारा अफ्रीका और दक्षिण एशिया में – 24 देशों में या तो प्राथमिक या माध्यमिक स्तर पर 2015 तक लिंग समता को प्राप्त करने की संभावना नहीं हैं। इन देशों का बहुमत (13) उप - सहारा अफ्रीका में हैं।

सीखने के खराब परिणाम और कम गुणवत्ता की शिक्षा भी शिक्षा के क्षेत्र में अधिभावी चिंताएं बनी हुई हैं। उदाहरण के लिए, कई विकासशील देशों में, प्राथमिक स्कूल के 60 प्रतिशत विद्यार्थियों से भी कम, जो पहली कक्षा में दाखिला लेते हैं, स्कूली शिक्षा के अंतिम ग्रेड तक पहुँचते हैं। इसके अलावा, कई देशों में छात्र/ शिक्षक अनुपात 40:1 से अधिक है और कई प्राथमिक शिक्षकों को पर्याप्त योग्यता की कमी है।

सबके लिए शिक्षा

इस अभियान में बच्चों, युवाओं व प्रौढ़ों को गुणवत्तायुक्त बुनियादी शिक्षा प्रदान करने की वैश्विक प्रतिबद्धता है। वर्ष 1990 में सभी के लिए शिक्षा के विश्व-सम्मेलन में इस अभियान को प्रारंभ किया गया था।

24 वर्षों के बाद भी कई देश इस लक्ष्य से काफी पीछे चल रहे है। सेनेगल के डकार शहर में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने पुनः 2007 में सम्मेलन में भाग लिया और वर्ष 2015 तक सभी के लिए शिक्षा के लक्ष्य को हासिल करने के प्रति अपनी वचनबद्धता दोहराई। उन्होंने छह मुख्य शिक्षा लक्ष्यों की पहचान की और वर्ष 2015 तक सभी बच्चों, युवाओं और प्रौढ़ वर्ग की शिक्षण आवश्यकताओं की पूर्ति करने की बात कही।

एक अग्रणी अभिकरण के रूप में यूनेस्को सभी अंतरराष्ट्रीय पहल को सबके लिए शिक्षा के लक्ष्य को पाने की ओर प्रवृत एवं एकजुट कर रही है। सरकारें, विकास अभिकरण, नागरिक संस्थाएँ, गैर-सरकारी संस्थाएँ एवं मीडिया कुछ ऐसे सहयोगी हैं जो इस लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।

सबके लिए शिक्षा लक्ष्य को प्राप्त करने का यह अभियान आठ शताब्दी विकास लक्ष्य (मिलेनियम डेवलपमेन्ट गोल, एमडीजी) विशेषकर वर्ष 2015 तक सार्वजनिक प्राथमिक शिक्षा पर एमडीजी -2 और शिक्षा में महिला-पुरुष समानता पर एमडीजी -3 को भी मदद पहुँचा रहा है।

शिक्षा के महत्व पर ग्रामीण लोगों को प्रेरित किये जाने की आवश्यकता है। निम्नलिखित सूचनाएँ लोगों के लिए समाधान प्रदान करेंगी -

  1. बालिका शिक्षा
  2. बाल-मजदूरों के लिए शिक्षा एवं संयोज़क पाठ्यक्रम
  3. अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़े वर्ग व अल्पसंख्यकों के लिए शिक्षा
  4. शारीरिक व मानसिक रूप से विकलांग, अपंग एवं विशेष बच्चों के लिए शिक्षा
  5. शिक्षा व महिलाएँ

शिक्षा के छह विशिष्ट लक्ष्य:

  • बचपन की शुरुआत में ही समग्र देखभाल व शिक्षा का विस्तार तथा बेहतरीकरण, विशेष रूप से सर्वाधिक संवेदनशील व लाभों से वंचित बच्चों के लिए।
  • यह सुनिश्चित करना कि 2015 तक सभी बच्चे, विशेष रूप से कठिन परिस्थितियों में और जातिगत अल्पसंख्यक बालिकाएं, पूर्ण, मुफ्त तथा अच्छी गुणवत्ता की प्राथमिक शिक्षा प्राप्त कर सकें।
  • यह सुनिश्चित करना कि सभी युवाओं तथा वयस्कों को सीखने की आवश्यकता, सीखने तथा जीवन-कौशल के उचित कार्यक्रमों की समान उपलब्धता हो।
  • 2015 तक वयस्क साक्षरता में 50% सुधार हासिल करना, विशेष रूप से महिलाओं के लिए, तथा सभी वयस्कों के लिए मूल व सतत् शिक्षा की समान उपलब्धता हो।
  • 2015 तक प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा में लैंगिक विषमता समाप्त करना, और 2015 तक बालिकाओं को शिक्षा की पूर्ण तथा बराबर उपलब्धता पर ध्यान केन्द्रित कर अच्छी गुणवत्ता की मूल शिक्षा की उपलब्धि हासिल कर शिक्षा में लैंगिक समानता प्राप्त करना।
  • शिक्षा की गुणवत्ता के सभी पहलुओं को बेहतर बनाना और सभी की सर्वश्रेष्ठता सुनिश्चित करना ताकि सीखने के मान्य व मापे जाने योग्य परिणाम, सभी द्वारा प्राप्त किए जा सकें, विशेष रूप से साक्षरता, अंकज्ञान तथा आवश्यक जीवन कौशल।

अधिक जानें - भारत सरकार का मानव संसाधन विकास मंत्रालय

 

3.0

Mukta Jul 18, 2018 06:06 AM

Delhi ke Sarkari school me admission lene ke liye principal bachho ke parents ko bahut pareshan krti Hai...Kya koi upay hI aapke paas ki Sarkari school me admission karwana sabhi bachho ke parents ke liye easy ho jaaye..school I'd 1925038 principal name ..Deepti handa..Kalkaji New Delhi..110019

देवदत्त उदैनिया Mar 15, 2018 06:29 PM

जब आज हम बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान का नारा लेकर चल रहे है तो फिर बेटियों की शिक्षा के लिए राज्य सरकार और केंद्रीय सरकार को चाहिए की बह बेटियों को स्कूली शिक्षा में ५० प्रतिशत आरक्षण मतलब उनकी फीस स्कूल में आधी लगना चाहिए .केवल दीवारों पर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान का नारा लिखने से क्या होगा , सरकार को चाहिए की समाज का सहयोग लेकर बेटियों को सुरक्षा को लेकर सभी लोगों की ओपिनियन लेना चाहिए .

रणजीत raj Jun 10, 2017 11:30 AM

सरकारी स्कूल मै हर बच्चे को सरकार दे रही है प्रति माह १००० हजार रुपये मगर बच्चे को शिक्षा दो रुपये कि नही जगो भारत बासी

लवलेश भटनागर Oct 29, 2016 06:40 PM

बच्चों को किताबो के साथ खेल की साधन सुविधा भी मिलनी जिस से उनका पढ़ाई के प्रति रुझान बढ़े

सिकन्दर खान Oct 29, 2016 06:35 PM

सभी सरकारी स्कूल की पढ़ाई भी प्राइवेट स्कूल जैसी कर देनी चाहिए जिस से सरकारी स्कूल का स्तर अच्छा हो और बच्चों के रुझान में भी विकास हो सरकारी स्कूल के अध्यापक ज्यादा वेतन लेकर भी स्कूल का वातावरण सही नहीं बना पा रहे है जबकि प्राइवेट स्कूल के अध्यापक कम वेतन में भी अच्छा वातावरण बना रहे है जिस से प्राइवेट स्कूल का स्टैंडर्ड अच्छा है और सबका रुझान उसी तरफ है यदि सरकारी अफसरों के बच्चे भी सरकारी स्कूल में जाने लगेंगे तो स्टैंडर्ड वैसे ही सुधर जायेगा और सबको समानता का अधिकार देना चाहिए अच्छे पढ़ने वाले बालक, बालिका को सबको सपोर्ट करना चाहिए

अपना सुझाव दें

(यदि दी गई विषय सामग्री पर आपके पास कोई सुझाव/टिप्पणी है तो कृपया उसे यहां लिखें ।)

Enter the word
नेवीगेशन
संबंधित भाषाएँ
Back to top

T612019/01/21 17:34:40.233525 GMT+0530

T622019/01/21 17:34:40.249580 GMT+0530

T632019/01/21 17:34:40.250312 GMT+0530

T642019/01/21 17:34:40.250597 GMT+0530

T12019/01/21 17:34:40.211157 GMT+0530

T22019/01/21 17:34:40.211362 GMT+0530

T32019/01/21 17:34:40.211509 GMT+0530

T42019/01/21 17:34:40.211649 GMT+0530

T52019/01/21 17:34:40.211740 GMT+0530

T62019/01/21 17:34:40.211816 GMT+0530

T72019/01/21 17:34:40.212551 GMT+0530

T82019/01/21 17:34:40.212741 GMT+0530

T92019/01/21 17:34:40.212951 GMT+0530

T102019/01/21 17:34:40.213173 GMT+0530

T112019/01/21 17:34:40.213222 GMT+0530

T122019/01/21 17:34:40.213317 GMT+0530