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अक्षय ऊर्जा

इस भाग में अक्षय ऊर्जा के उत्पादन को बढ़ावा देने वाली नीतियों और योजनाओं की जानकारी प्रस्तुत की गई है।

राष्ट्रीय बायोमास कुक स्टोव योजना

राष्ट्रीय बायोमास कुकस्टोव पहल (NBCI) 2 दिसंबर 2009 को नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा शुरू की गई थी।

पहल का प्राथमिक उद्देश्य देश की ऊर्जा की कमी और गरीब वर्गों के लिए स्वच्छ और कुशल ऊर्जा की उपलब्धता बढ़ाना है। प्रमुख तकनीकी संस्थानों में अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के साथ अत्याधुनिक परीक्षण, प्रमाणीकरण और निगरानी सुविधाओं की स्थापना को भी मजबूत बनाने पर जोर देती है।

इस पहल के तहत पायलट पैमाने पर परियोजनाओं की एक श्रृंखला के तहत व्यावसायिक तौर पर- बेहतर कुक स्टोव और उसकी उपलब्धता और बायोमास ईंधन के विभिन्न ग्रेड के उपयोग की परिकल्पना की गई है। परियोजना में बायोमास कुकस्टोव की लागत के 50% तक वित्तीय सहायता की सीमा निर्धारित की गई है। पायलट पैमाने पर परियोजना का कार्यान्वय राज्य नोडल एजेंसियों, अनुभवी एनजीओ, स्वयं सहायता समूह, निर्माताओं या अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के क्रियान्वय में जमीनी स्तर पर पर्याप्त अनुभव रखने वाले उद्यमियों के माध्यम से लागू किया जाएगा।

सौर लालटेन कार्यक्रम

उद्देश्य

  • कैरोसिन वाले लालटेन तथा बत्ती वाले दीये को हटा कर प्रकाश के लिए कैरोसिन के उपयोग को कम करना तथा सौर लालटेन का उपयोग करना।
  • पर्यावरण हितैषी सौर लाइटिंग प्रणाली के उपयोग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर में सुधार लाना, जिसके लिए किसी जीवाश्म इंधन की जरूरत नहीं और इसमें किसी प्रकार का प्रदूषण भी नहीं होता, साथ ही यह स्वास्थ्य तथा आग के विनाशों से भी हमें सुरक्षित रखता है, तथा
  • प्रकाश की छोटे-मोटी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए एक विकल्प के रूप में पेश किया जाना।

कार्यक्रम को लागू करने वाले संगठन

सौर लालटेन कार्यक्रम केवल राज्य नोडल एजेंसी/ विभागों (SNAs) तथा अक्षय ऊर्जा दुकानों के जरिए ही क्रियान्वित किया जाता है। निर्माताओं की दुकान/उनकी या उनके सहयोगियों द्वारा प्रबन्धित दुकान इस कार्यक्रम के अंतर्गत नहीं आएंगी। SNAs को निर्माताओं को उनकी ओर से इन लालटेनों के मार्केटिंग के लक्ष्य निर्धारित करने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही मंत्रालय निर्माताओं, उनके सहयोगियों या एनजीओ द्वारा प्रत्यक्ष मार्केटिंग के लिए कोई लक्ष्य नहीं देगा।

योग्य लाभार्थी

  • बिना बिजली वाले गांवों तथा विशेष वर्ग का दर्ज़ा प्राप्त बस्तियों तथा केंद्र शासित द्वीपों के लाभार्थियों तथा गैर-लाभ वाले संस्थान/ संगठनों के सभी वर्ग सौर लालटेन पाने के लिए योग्य होंगे।
  • एक परिवार को एक से अधिक सौर लालटेन नहीं दी जाएगी।
  • लड़कियों की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रति बीपीएल परिवार की कक्षा 9 से 12 में पढ़ने वाली लड़कियों के लिए एक सौर लालटेन मुफ़्त दी जाएगी। उसकी पूरी स्कूली शिक्षा के दौरान दूसरी सौर लालटेन नहीं मिल सकेगी। ऐसी लड़कियों को सौर लालटेन का वितरण जिला प्रशासन के जरिए राज्य नोडल एजेंसी द्वारा किया जाएगा, ताकि बीपीएल परिवार की पुष्टि हो सके तथा स्कूल और लड़की की कक्षा से जुड़े अन्य विवरण प्राप्त किये जा सकें। लाभार्थी को, लागू करने वाली एजेंसी को पहचान पत्र दिखाना होगा, जैसे राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र आदि।
  • SC / ST लाभार्थियों से सौर लालटेन: कार्यक्रम को लागू करने वाले संगठनों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अनुसूचित जाति तथा जनजाति के लाभार्थियों को वितरण के लिए लक्षित कुल सौर लालटेन की कम से कम क्रमशः 15% तथा 10% संख्याओं का वितरण किया जाए।
  • सौर लालटेन कार्यक्रम में महिला के मद: सौर लालटेन के वितरण के समय स्त्री शिक्षा प्रदान करने वाले बालिका छात्रावास, वयस्क शिक्षा केंद्रों तथा ड्वाकरा पर विशेष ध्यान देना होगा। ऐसे परिवारों को भी प्राथमिकता देनी होगी जिनमें कोई स्कूल जाने वाली बालिका हो।
  • सौर लालटेन का वितरण एक समूह विधि में किया जाना चाहिए, ताकि क्रियान्वयन, रखरखाव तथा बिक्री के बाद की सेवा और सौर लालटेनों की जांच आसान हो सके।

सौर लालटेन के स्वीकृत मॉडल

देसी सौर लालटेन

इस योजना के तहत पूर्ण रूप से आयातित सौर लालटेन को शामिल नहीं किया गया है। हालांकि आयातित मॉड्यूल तथा/ या बैट्री के उपयोग की अनुमति है। उन्हीं आयातित मॉड्यूलों के प्रयोग की अनुमति होगी जिनकी किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच की गई हो और उसे नवीन और नवीनीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के मानदंडों के अनुरूप प्रमाणित किया गया हो।

क्रियान्वयन करने वाले संगठनों को केवल वही सौर लालटेन प्राप्त करना होगा, जोनवीन और नवीनीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के मानदंडों पर खरी उतरेगी।

अक्षय ऊर्जा दुकान द्वारा कार्यक्रम का क्रियान्वयन

  • राज्य एजेंसियों, निजी उद्यमियों तथा एनजीओ द्वारा स्थापित अक्षय ऊर्जा की दुकानें ही संबंधित राज्य एजेंसी से लक्ष्य प्राप्त करने की पात्र होंगी, तथा वे नवीन और नवीनीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के मानदंडों और दिशा-निर्देशों के अनुसार सौर लालटेन का वितरण कर सकती हैं।
  • खरीददारों को बिक्री की तिथि, मूल्य, मॉडल, तथा निर्माण, क्रम संख्या और आपूर्ति पीवी मॉड्यूल के साथ खरीददार का पहचान पत्र (राशन कार्ड, टेलीफोन बिल, पासपोर्ट, बैंक अकाउंट) जैसे पूर्ण विवरण के साथ उनकी पूरी सूची को जमा कर अक्षय ऊर्जा के दुकानदार रिएम्बर्समेंट के आधार पर अनुदान की मांग कर सकेंगे।
  • निजी रूप से संचालित तथा एनजीओ द्वारा चलाई जा रही अक्षय ऊर्जा दुकानों के लिए अनुदान राशि की प्राप्ति उनके द्वारा संबंधित राज्य की नोडल एजेंसी/ MNES क्षेत्रीय कार्यालय के माध्यम से बेची गई सौर लालटेन की 20% संख्या की जांच करने के बाद ही की जा सकती है।

केंद्रीय वित्तीय सहायता

  • मंत्रालय योग्य लाभार्थियों को प्रति सौर लालटेन रु. 2400 की एक CFA भी प्रदान करेगा, जो राज्य नोडल एजेंसी तथा अक्षय ऊर्जा दुकानों के माध्यम से दिया जाएगा।
  • मंत्रालय राज्य नोडल एजेंसीतथा अक्षय ऊर्जा दुकानों को प्रति लालटेन 100 रु. देगा। नवीन और नवीनीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय अक्षय ऊर्जा दुकानों द्वारा बेची जा रही तथा एनजीओ द्वारा रखरखाव की जा रही लालटेनों की जांच के लिए भी राज्य नोडल एजेंसी को प्रति लालटेन 100 रु प्रदान करेगा। राज्य नोडल एजेंसियों द्वारा संचालित की जा रही दुकानों को अलग से कोई राशि नहीं दी जाएगी।
  • नवीन और नवीनीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय CFA के 50% का वितरण राज्य नोडल एजेंसी को अग्रिम तौर पर किया जाएगा। शेष 50% नवीन और नवीनीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय CFA तथा सेवा शुल्कों का भुगतान परियोजना के पूरा होने पर किया जाएगा।

स्रोत: नवीन और नवीनीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय

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प्रदीप कुमार Apr 09, 2017 06:23 PM

मै कल देहरादून अक्षय उर्जा कार्यालय मे अक्षय उर्जा पलान्ट के बारे मे जानकारी लेने गया लेकिन वहा जिन अधिकारी से मेरी बात हुई उन्होने मुझे कोई जानकारी नही दी। जब अधिकारी ही अच्छे से जानकारी नही देगे तो एक आम आदमी को इसके बारे मे केसे पता चलेगा।

श्याम सुंदर दास Oct 09, 2016 02:20 PM

Sir me solar plant laga kar bijali bechana chata hu jankari de

सत्यनारायण kharol Aug 09, 2016 12:16 PM

ग्रामीणो को न तो अक्षय ऊर्जा के उपकरण मिलते हैं और न ही उस पर कोई अनुदान

राहुल इन्दौरा Jul 25, 2016 09:52 PM

जिन किसानो की जमीने छिनी गयी है उनकी पहचान सहित सारी जाXकारिXां यहाँ सार्वजनिक करो भाई । ताकि लोगों को मालूम हो की सरकार क्या कर रही है।

राजेन्द्र आर्य Jul 25, 2016 01:01 PM

पवन ऊर्जा आज सबसे ज्यादा पर्यावरण हितैषी है किन्तु सरकार की नीति किसान हित मे नही है जो भी कंपनी उर्जा संयंत्र स्थापित करती है वह किसान से जमीन खरीद कर संयंत्र लगा रही है यह किसानो के हित मे नही कहा जा सकता है ।किसान का जमीनी हक छिनने के कारण भविष्य मे वह जमीन से टूट जाएगा और बेरोज़गार हो जाएगा ।किसी भी हालत मे उसका जमीनी जुड़ाव खत्म नही होना चाहिए ।जिस कारण देश मे हर प्रकार की समस्या आ सकती है जैसे रोजगार, शहरीकरण ,आदि आदि ।इसका हल किसान की जमीन को लिज पर ले कर किया जा सकता है ।

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