सामग्री पर पहुँचे | Skip to navigation

होम (घर) / समाज कल्याण / आपदा प्रबंधन / आपदा प्रबंधन संस्थान और प्राधिकरण
शेयर
Views
  • अवस्था संपादित करने के स्वीकृत

आपदा प्रबंधन संस्थान और प्राधिकरण

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एक स्वतंत्र, स्वायत्त, और आपदा तैयारियों के लिए संवैधानिक रूप से संघीय संस्था के अधिदेश द्वारा स्थापित तथा देश में आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी मुद्दों और आपदा तैयारी के लिए जिम्मेदार है।

भारत में लंबे समय तक आपदा प्रबंधन प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों के लिए राहत और पुनर्वास प्रदान करने के एक मुद्दे के रूप में हाशिए पर था। केन्द्र सरकार में आपदा प्रबंधन कृषि मंत्रालय में एक विभाग के रुप में कार्यरत था तथा राज्य स्तर पर आपदा प्रबंधन राजस्व या राहत विभाग का विषय था इसके साथ जिला स्तर पर कलेक्टरों के कई संकट प्रबंधन कार्यों में से एक कार्य-आपदा प्रबंधन था। विकास और अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव का कोई विशेष अध्ययन नहीं किया गया था गरीबी उन्मूलन, पर्यावरण, लघु ऋण, सामाजिक और आर्थिक कमजोरियों, आदि महत्वपूर्ण मुद्दों पर विभिन्न योजनाओं, नीतियों और कार्यक्रमों में देश के शीर्ष नियोजन निकाय में आपदा जोखिम के बारे में चर्चा होती रही है। 2005-15 के ह्योगो फ्रेमवर्क में कहा गया है सतत विकास के लिए सभी स्तरों पर विकास योजना बनाने की प्रक्रिया में आपदा जोखिम के बारे में देश की प्रतिबद्धता वांछित परिणाम प्राप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम होना चाहिए।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान

संस्थान के बारे में

आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत स्थापित राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान को मानव संसाधन विकास, क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण, अनुसंधान, प्रलेखन और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में नीति की वकालत के लिए नोडल राष्ट्रीय जिम्मेदारी सौंपी गई है। 16 अक्टूबर, 2003 को भारतीय लोक प्रशासन संस्थान के आपदा प्रबंधन राष्ट्रीय केन्द्र से उन्नत राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान, सभी स्तरों पर रोकथाम और तैयारियों की संस्कृति को विकसित कर व बढ़ावा देकर आपदा के प्रति सहिष्णु भारत निर्मित करने के अपने मिशन को पूरा करने हेतु तेजी से अग्रसर है।

प्रबंधन संरचना

केंद्रीय गृह मंत्री इस संस्थान के अध्यक्ष होते हैं जो 42 सदस्यों का एक सामान्य निकाय है जिनमें प्रख्यात विद्वानों, वैज्ञानिकों और चिकित्सकों के अलावा भारत सरकार और राज्य सरकारों के विभिन्न नोडल मंत्रालयों और विभागों के सचिव और राष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी संगठनों के प्रमुख शामिल होते हैं। इस संस्थान का 16 सदस्यीय शासी निकाय होता है जिसके अध्यक्ष राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष होते हैं। कार्यकारी निदेशक इस संस्थान का दिन-प्रतिदिन का प्रशासन संचालित करते हैं।

दृष्टि

  • भारत में आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन पर प्रशिक्षण और अनुसंधान के लिए उत्कृष्टता का एक प्रमुख संस्थान होना और इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी संस्थाओं में से एक के रूप में मान्यता प्राप्त करना।
  • सभी स्तरों पर रोकथाम और तैयारियों की संस्कृति को विकसित करने और बढ़ावा देकर एक आपदा मुक्त भारत बनाने की दिशा में लगातार प्रयास करना।

मिशन

  • नीति निर्माण और सहायता प्रदान करके सरकार के लिए एक थिंक टैंक के रूप में काम करना और
इनके माध्यम से आपदाओं के प्रभाव को कम करने में सुविधा प्रदान करना:
  • सामरिक सीखने सहित प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण सेवाओं का नियोजन एवं उन्हें बढ़ावा देना।
  • राष्ट्रीय स्तर की जानकारी का अनुसंधान, प्रलेखन और विकास।
  • प्रभावी आपदा तैयारियों और शमन के लिए प्रणाली का विकास और विशेषज्ञता को बढ़ावा देना।
  • सभी हितधारकों के ज्ञान और कौशल को बढ़ावा देना और जागरूकता बढ़ाना।
  • सभी हितधारकों के सभी स्तरों पर प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के लिए संस्थागत तंत्र को मजबूत बनाना।
  • नेटवर्किंग और जानकारी,अनुभव और विशेषज्ञता के आदान - प्रदान की सुविधा प्रदान करना।

कार्य

  • आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत संस्थान को अन्य बातों के अलावा, साथ - साथ  में, निम्नलिखित कार्य सौंपे गए हैं:
  • प्रशिक्षण मॉड्यूल्स का विकास, आपदा प्रबंधन में अनुसंधान और प्रलेखन कार्य और प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन;
  • आपदा प्रबंधन के सभी पहलुओं को शामिल करते हुए एक व्यापक मानव संसाधन विकास योजना तैयार कर लागू करना;
  • राष्ट्रीय स्तर पर नीति निर्माण में सहायता प्रदान करना;
  • विभिन्न हितधारकों के लिए प्रशिक्षण और अनुसंधान कार्यक्रमों के विकास हेतु प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्थानों को आवश्यक सहायता प्रदान करना;
  • राज्य सरकारों और राज्य स्तरीय नीतियों, रणनीतियों, आपदा प्रबंधन ढांचे तैयार करने और क्षमता निर्माण के लिए आवश्यक किसी अन्य सहायता के रूप राज्य सरकारों और राज्य प्रशिक्षण संस्थानों को सहायता प्रदान करना;
  • शैक्षिक और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों सहित आपदा प्रबंधन के लिए शैक्षिक सामग्री का विकास करना;
  • बहु-​​खतरा शमन तैयारियों और प्रतिक्रिया उपायों के साथ जुड़े कॉलेज/स्कूल के शिक्षकों और छात्रों, तकनीकी कर्मियों और अन्य सहित हितधारकों के बीच जागरूकता को बढ़ावा देना;
  • देश के भीतर और बाहर आपदा प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए अध्ययन पाठ्यक्रम, सम्मेलन, व्याख्यान, सेमिनार हाथ में लेना, आयोजित करना और उनके संचालन में सुविधा प्रदान करना;
  • पत्रिकाओं, शोध पत्रों और पुस्तकों के प्रकाशन हाथ में लेना और उनके लिए सहायता प्रदान करना तथा पुस्तकालय आदि को स्थापित करना व उन्हें बनाए रखना।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए)

आपदा प्रबंधन (डीएम) अधिनियम, अन्य बातों के साथ, राष्ट्रीय प्राधिकरण को उसके कार्यों में सहायता प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में और सचिवों की राष्ट्रीय कार्यकारी समिति (एनईसी) के अंतर्गत एक राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) की स्थापना का प्रावधान करता है।

कार्य

एनडीएमए को सौंपे गए कार्य और दी गई जिम्मेदारियां नीचे संक्षेप में सूचीबद्ध हैं :-

(क) आपदा प्रबंधन पर नीतियों का निर्धारण करना;
(ख) राष्ट्रीय योजना का अनुमोदन करना और भारत सरकार के मंत्रालयों/विभागों द्वारा राष्ट्रीय योजना के अनुसार तैयार योजनाओं को मंजूरी देना;

(ग) राज्य द्वारा योजनाओं को तैयार करने के लिए राज्य के अधिकारियों द्वारा पालन किए जाने वाले दिशा निर्देशों का निर्धारण करना;

(घ) आपदा की रोकथाम के लिए उपायों को एकीकृत करने के उद्देश्य से या उनके प्रभावों का शमन करने के लिए भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/विभागों को उनके विकास योजनाओं और परियोजनाओं के लिए लागू किए  जाने वाले दिशा-निर्देशों का निर्धारण करना;
(ङ) आपदा प्रबंधन के लिए नीति और योजना के प्रवर्तन और कार्यान्वयन के लिए  तालमेल करना;

(च) शमन के उद्देश्य के लिए धन के प्रावधान की सिफारिश करना;

(छ) केन्द्रीय सरकार द्वारा निर्धारित की जाने वाले अन्य प्रभावित देशों की प्रमुख आपदाओं के लिए सहायता प्रदान करना;

(ज) जैसा कि आवश्यक समझा जाए, आपदा की रोकथाम, या शमन, या सम्भावित खतरेयुक्त आपदा की स्थिति या आपदा से निपटने के लिए तैयारियों और क्षमता निर्माण की तैयारियों के लिए इस तरह के अन्य उपाय करना;

(झ) राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान के कामकाज के लिए व्यापक नीतियों और दिशा निर्देशों का निर्माण करना;

(यं) सम्भावित खतरेयुक्त आपदा की स्थिति या आपदा के लिए बचाव और राहत सामग्री या प्रावधानों की आपात खरीद करने के लिए संबंधित विभाग को अधिकार करना;
(ट) सम्भावित खतरेयुक्त आपदा की स्थिति या आपदा से विशेषज्ञ के रूप में निबटने के लिए अधिनियम के तहत गठित राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) का सामान्य अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण करना;

(ठ) आपदाओं से प्रभावित व्यक्तियों को प्रदान की जाने वाली राहत के न्यूनतम मानकों के लिए दिशा-निर्देशों की अनुशंसा करना;

(ड) आपदा से गम्भीर रूप से प्रभावित व्यक्तियों के लिए ऋण की चुकौती में या रियायती शर्तों पर ताजा ऋण के अनुदान के लिए राहत की अनुशंसा करना।

नीतियां और अधिनियम

  1. आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005
2.82692307692

Suraj Apr 28, 2018 05:59 PM

TO AVOID ROAD ACCIDENT DRIVERS SHOULD MAINTAIN ALL ROUND SAFE DISTENCE AMONG VEHICLES ON ROAD.

Suraj Apr 28, 2018 05:45 PM

Sadak durgatna ke Rukh Khan ke liye sabse Zyada Zaruri Hai Ki Driver Gadi ke beech surakshit 2 riico Rakhe

डॉ शेष नारायण वाजपेयी May 25, 2016 03:51 PM

महोदय, विषय - प्राकृतिक आपदाओं के विषय में रिसर्च कार्य के लिए सहायता प्राप्ति हेतु ! आपदा प्रबंधन में अनुसंधान से संबंधित विषय पर भारत के प्राचीन वैदिक विज्ञान के आधार पर प्राकृतिक घटनाओं पर शोध कार्य पिछले कई वर्षों से कर रहा हूँ इसके द्वारा भावी "आपदाओं के पूर्वाXुXाX " के विषय कुछ महत्वXूर्ण विंदु सामने आए हैं जिसके आधार पर भूकंप आने के बाद घटित होने वाली प्राकृतिक आपदाओं के संबंध में काफी सटीक पूर्वाXुXाX लगाया जा सकता है । इसके आधार पर जिस भी तारीख को जिस समय भूकंप आता है उस तारीख ,समय और स्थान पर गहन रिसर्च करके उसी के आधार पर भविष्य संबंधी ये अनुमान लगाया जा सकता है कि इस भूकंप के आने के कारण प्रकृति में आगे किस किस प्रकार से दुष्X्रXाव दिखाई पड़ेंगे !जैसे - नेपाल में 22 -4-2015 को आए तूफान के कारण 25-4-2015 को भूकंप आया था और 25-4-2015को भूकंप आने के कारण 10 -6 -2015 तक आफ्टर शॉक्स आने चाहिए थे । इसी प्रकार से 26 -10-2015 को हिंदूकुश से भारत तक आए भूकंप के कारण मद्रास जैसे समुद्र के किनारे के शहरों में भीषण बाढ़ का पूर्वाXुXाX लगाया जा सकता था । 10 -4-2016 को आए भूकंप के प्रभाव से ही भूकंप से प्रभावित क्षेत्रों में नदियाँ कुएँ तालाब आदि बहुत तेजी से सूखने लगे ,गर्मी बहुत अधिक बढ़ गई एवं आग लगने संबंधी घटनाएँ बहुत तेजी से बढ़ने लगीं ऐसी सभी घटनाओं का पूर्वाXुXाX 10 -4-2016 को ही लगाया जा सकता था । 13 -4-2016 को आए भूकंप से चीन ,भारत ,बँगलादेश आदि जो जो देश या इन देशों के जो जो प्रदेश शहर आदि प्रभावित हुए अर्थात भूकंप का कम्पन महसूस किया गया उन उन देशों प्रदेशों शहरों में भूकंप आने के बाद हुई भीषण वर्षा और भयंकर बाढ़ का पूर्वाXुXाX 13 -4-2016 को ही लगाया जा सकता था ! ऐसे सभी प्रकार के भूकंपों के कारण हुए उत्पातों का असर अगले 45 दिनों तक अधिक दिखता है फिर 6 महीने तक समय के साथ साथ धीरे धीरे सामान्य होता चला जाता है किंतु इसी की समय सीमा के बीच यदि भूकंप आदि कोई कोई दूसरा उत्पात हो जाता है तो उसका असर भी दिखाई पड़ता है जैसे 13 -4-2016 के भूकंप के कारण चल रही भीषण वर्षात 7 मई 2016 को असम और मेघालय में आए भूकंप के कारण अचानक रुक गई ! जो भूकंप जिस क्षेत्र में जितनी तेज या धीमा होता है वहाँ उत्पात का स्तर भी वैसा ही होता है ।विशेष बात यह भी है कि सभी भूकंपों की श्रेणियाँ भिन्न भिन्न होती हैं और इनका फल भी एक जैसा नहीं होता है इसका पूर्वाXुXाX भूकंप आने की तारीख ,समय और स्थान आदि के आधार पर लगाया जाता है ! विशेषबात यह है कि उपर्युक्त भूकंपों से संबंधित पूर्वाXुXाX गूगल स्थित अपने ब्लॉग पर भूकंप आने वाले दिन ही डाल दिए गए थे जो पूर्वाXुXाX बाद में सच साबित हुए इसकी प्राXाणिकता की जाँच की जा सकती है क्योंकि गूगल पर प्रकाशित इन लेखों में संशोधन नहीं किया गया है अभी भी वैसे ही पढ़े जा सकते हैं । अतएव आपसे सानुरोध निवेदन है कि मेरे शोध कार्यों पर विचार किया जाए और यदि आपको उचित लगें तो हमारी मदद की जाए जिससे अपने शोध कार्य को मैं निरंतर आगे बढ़ा सकूँ ! मुझे विश्वास है कि आपके द्वारा मदद पाकर मैं प्रकृति में अचानक होने वाले परिवर्तXों से भविष्य में घटने वाली प्राकृतिक घटनाओं ,बीमारियों आदि अनेक विषयों से संबंधित पूर्वाXुXाX लगाने में सफल हो सकता हूँ । -निवेदक भवदीय - राजेश्वरीX्राच्XविX्XाशोXसंस्थाX(रजि.) --------------------------आचार्Xडॉ.शेषXाराXण वाजपेयी ------------------------------- एम. ए.(व्Xाकरणाचार्X) ,एम. ए.(ज्Xोतिषाचार्X)-संXूर्णाXंX संस्कृत विश्वविX्XालX वाराणसी एम. ए.हिंदी -कानपुर विश्वविX्XालX PGD पत्रकारिता -उदय प्रताप कालेज वाराणसी पीएच.डी हिंदी (ज्Xोतिष)-XXारस हिंदू यूXिवर्सिटी (BHU )वाराणसी K -71 ,छाछी बिल्डिंग, कृष्णा नगर, दिल्ली -110051 Tele: +91-11-22002689, +91-11-22096548 Mobile : +91XXXदी73,

पवन kumar Jul 29, 2015 09:30 AM

आप फोटो क्यों नहीं dalte

अपना सुझाव दें

(यदि दी गई विषय सामग्री पर आपके पास कोई सुझाव/टिप्पणी है तो कृपया उसे यहां लिखें ।)

Enter the word
नेवीगेशन
संबंधित भाषाएँ
Back to top

T612019/06/26 20:00:30.101904 GMT+0530

T622019/06/26 20:00:30.119294 GMT+0530

T632019/06/26 20:00:30.119974 GMT+0530

T642019/06/26 20:00:30.120240 GMT+0530

T12019/06/26 20:00:30.077611 GMT+0530

T22019/06/26 20:00:30.077788 GMT+0530

T32019/06/26 20:00:30.077932 GMT+0530

T42019/06/26 20:00:30.078070 GMT+0530

T52019/06/26 20:00:30.078161 GMT+0530

T62019/06/26 20:00:30.078234 GMT+0530

T72019/06/26 20:00:30.078931 GMT+0530

T82019/06/26 20:00:30.079142 GMT+0530

T92019/06/26 20:00:30.079351 GMT+0530

T102019/06/26 20:00:30.079571 GMT+0530

T112019/06/26 20:00:30.079618 GMT+0530

T122019/06/26 20:00:30.079714 GMT+0530