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राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम

इस आलेख में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम की सम्पूर्ण जानकारी दी गयी है ।

भूमिका

का. आ. 19(अ) – केंद्रीय सरकार, महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम  2005 (2005 का 42) की धारा 29 उप-धारा (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, यह समाधान हो जाने पर कि उक्त अधिनियम की अनुसूची 1 और अनुसूची २ संशोधन करना आवश्यक और समीचीन है, अधिनियम की अनुसूची 1 और अनुसूची २ में निम्नलिखित संशोधन करती है, अर्थात्:-

इसका  नाम राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम अनुसूची 1 और अनुसूची २ संशोधन आदेश, 2013 है।
यह राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रवृत होगा ।
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 की  अनुसूची 1 और अनुसूची २ के स्थान निम्नलिखित रखा जायेगा ।

अनुसूची 1 -धारा 4 (3)

ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम की न्यूनतम  विशेषताएं

1 .धारा ४ के अधीन अधिसुचना स्कीम को सभी राज्यों द्वारा “महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम” कहा जायेगा और उक्त स्कीम से सम्बंधित सभी दस्तावेजों में महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम  2005 (2005 का 42) का उल्लेख होगा।

2 .महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम को इसके पश्चात “महात्मा गाँधी नरेग्स” के रूप में निर्दिष्ट  किया जायेगा और महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम  2005  से सम्बन्धित उक्त स्कीम की किसी निर्दश को “महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम के रूप में निर्दिष्ट किया जायेगा।

स्कीम के उद्देश्य

3. स्कीम के सारभाग उद्देश्य निम्नलिखित होंगे

(क) विहित क्वालिटी और स्थायित्व की उत्पादक अस्तियों के सृजन में परिणामस्वरूप मांग के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक गृहस्थी के लिए वित्तीय-वर्ष में गारंटीकृत रोजगार के रूप में अकुशल शारीरिक कार्य के लिए कम से कम सौ दिन प्रदान करना।

(ख) निर्धन के जीविका संसाधन आधार को सुदृढ़ करना

(ग) सामाजिक अन्तवेर्शन  को अतिसक्रिय रूप से सुनिश्चित करना।

(घ) पंचायत राज संस्थाओं को सुदृढ़ करना।

परन्तु उक्त उद्देश्य वहाँ लागु हैं इस अचिनियम और स्कीम द्वारा या उसके अधीन अधिकथित शर्तों के अध्यधीन वयस्क स्वयं सेवक सदस्यों को अकुशल शारीरिक कार्य करना है।

स्कीम के कार्य

4.(1) स्कीम निम्नलिखित कार्यों पर केन्द्रित होगी जिसे प्रवर्गीकृत किया गया है।

1. प्रवर्ग अ: प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन से सम्बन्धित लोक निर्माण

1) पेयजल स्रोत सहित परिष्कृत भूजल पर विशेष ध्यान के साथ भूमिगत बांध, मिट्टी के बांध ठहराव बांध, रोक, बांधों जैसे भूजल की वृद्धि और सुधार के लिए जल संरक्षण और जल शास्य;

2) जल संचय के व्यापक उपचार के परिणामस्वरूप खाई रुपरेखा, कगार, खाई पुश्ता, गोलाश्म अवरोध पीपा ढांचे और झरना शेड विकास जैसे जलसंभर प्रबंधन कार्य;

3)   सुक्ष्म और लघु सिंचाई कार्य और सिंचाई नहरों तथा नालियों का सृज-1, पुनरुज्जीवन अनुरक्षण;

4)   सिंचाई कुंडों और अन्य जलाशयों की डिसिल्टिग सहित पारम्परिक जलाशयों का पुनरुज्जीवन।

5)   पैरा 5 में आने वाली गृहस्थी  के भोगाधिकार सम्यक रूप से प्रदान करके सामान्य और वन भूमियों, सडक सीमांतों, नहर बंद, कुंड तटाग्र और तटीय पट्टी में वन भूमि में वृक्ष उगाना, और बागवानी तथा:

6)  सामान्य भूमि में भूमि विकासकार्य।

२. प्रवर्ग आ: दुर्बल वर्गों के लिए व्यष्टिक आस्तियां (केवल पैरा 5 में गृहस्थी के लिए )

1) भूमि विकास के माध्यम से और खुदे हुए कुओं, कृषि तालाबों तथा अन्य जल संचयन संरचनाओं सहित सिंचाई के लिए उपयुक्त अवसंरचना उपलब्ध कराकर पैरा 5 में विनिर्दिष्ट गृहस्थियों की भूमि की उत्पादकता में सुधार करना:

2)  उद्यान कृषि, रेशम कृषि,  रोपण और कृषि वानिकी के माध्यम से आजीविका में सुधार करना;

3) इसे जुताई के अधीन लाने के लिए पैरा 5 में परिभाषित गृहस्थियों  की परती भूमि या बंजर भूमि, का विकास;

4) इदिरा आवास योजना या ऐसे अन्य राज्य या केन्द्रीय सरकार की स्कीम के अधीन स्वीकृति गृहों के सनिर्माण में अकुशल मजदूरी संघटक करना, और

5) कुटकुट आश्रय, बकरी आश्रय, सुकर आश्रय, पशु आश्रय, चारा द्रोणिका जैसे पशु धन के संवर्धन के लिए अवसंरचना का सृजन करना और

6)मछली शुष्कण याडॉ, भंडारण सुविधाओं जैसे मत्सय पालन और सार्वजानिक भूमि पर मौसमी जलाशयों में मत्सय पालन के संवर्धन के लिए अवसंरचना सृजित करना;

3.प्रवर्ग –इ: एनआरएलएम शिकायत स्वयं सहायता समूहों के लिए सामान्य अवसंरचना

1) जैव उर्वरकों और पश्च कटाई सुविधाएँ जिनके अंतर्गत कृषि उत्पात के लिए पक्का भंडारण सुविधाएँ भी हैं, के लिए टिकाऊ अवसंरचना सृजित करके कृषि उत्पादकता संवर्धन करने के लिए संकर्म, और

2) स्वयं सहायता समूहों की आजीविका क्रियाकलापों के लिए सामान्य कार्यशाला;

4. प्रवर्ग –ई : ग्रामीण अवसंरचना

1) विहित सनियमों के अनुसार स्वतंत्र  रूप से या खुले में मल त्याग न करने प्रस्थिति तथा और द्रव अपशिष्ट प्रबंधन को प्राप्त करने के लिए अन्य सरकारी विभागों की स्कीमों के अनुसार व्यष्टिक घरेलू शौचालय, विद्यालय शौचालय एकक, आंगनबाड़ी शौचालय जैसे कार्यों से सम्बन्धित ग्रामीण स्वच्छता;

2) असंबद्ध ग्रामों को और विद्यमान पक्का सड़क नेटवर्क के लिए अभिगज्ञात  ग्रामीण उत्पादन केन्द्रों को जोड़ने के लिए सभी मौसमों में ग्रामीण सड़क संयोजकता उपलब्ध कराना: और ग्राम में पक्की आंतरिक सडकें या गलियों, जिनके अंतर्गत पशिर्विक नालियां और पुलियां भी हैं, का सनिर्माण :

3) खेल के मैदानों का संनिर्माण

4) आपदा तैयारी में सुधार करना या सडकों का जीर्णोद्धार या अन्य आवश्यक सार्वजानिक अवसंरचना, जिसके अंतर्गत बाढ़ नियंत्रण और संरक्षण संकर्म भी हैं का जीर्णोद्धार जलमग्न क्षेत्रों में, अपवहन, उपलब्ध कराने, बाढ़ जलमार्गों की मरम्मत करने, जीर्णोद्धार, तटीय संरक्षण के लिए तूफानी जल नालियों का संनिर्माण सम्बन्धी संकर्म

5) ग्राम पंचायतों के लिए, महिला स्वयं सहायता समूहों, परिसंघों, चक्रवात आश्रय, आंगनवाड़ी केन्द्रों, ग्रामीण, ग्रामीण हाटों और ग्राम या ब्लॉक स्तर में शवदाह गृह के लिए भवनों का संनिर्माण

6) राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (2013 का 20) के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के लिए खाद्यान भंडारण संरचनाओं का संनिर्माण

7) अधिनियम के अधीन सृजित ग्रामीण लोंक अस्तियों का रखरखाव ;और

8) कोई अन्य कार्य, जो इस सम्बन्ध में राज्य सरकार के परामर्श से केंद्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाये।

2) संकर्म की प्राथमिकता का क्रम स्थानीय क्षेत्र के संभाव्यता, उसकी आवश्यकताओं स्थानीय संसाधनों को ध्यान में रखते हुए तथा पैरा  9 के उपबन्धों के अनुसार ग्राम सभा की बैठकों में प्रत्येक ग्राम पंचायत द्वारा अवधारित किया जायेगा।

3) ऐसे संकर्म, जो अमूर्त हैं अमापनीय हैं, पुनरावृत्तीय हैं जैसे घास, कंकर हटाना, कृषि संक्रियाए जो नहीं की जाएगी।

5. व्यष्टिक आस्तियां सृजित करने वाले संकर्मों को निम्लिखित से सबन्धित कुटुंबों के स्वामित्वाधीन भूमि या वास भूमि के सम्बन्ध में प्राथमिकता दी जाएगी:

क) अनुसूचित जाति

ख) अनुसूचित जनजाति

ग) घुमन्तु जनजाति

घ) अधिसूचना में से निकाली गई जनजातियां

ड.) गरीबी रेखा से नीचे अन्य कुटुंब

च) महिला प्रधान वाले कुटुंब

छ) शारीरिक रूप से विकलांगता प्रधान वाले कुटुंब

ज) भूमि सुधारों के फायदाग्राही

झ) इंदिरा आवास योजना के अधीन फायदाग्राही

अनुसूचित जनजाति तथा पारंपरिक वनवासी (वन अधिकार मान्यता) अधिनियम, 2006 (2007 का २) के अधीन फायदाग्राही और

इस शर्त के अधीन रहते हुए, कृषि ऋण माफी और ऋण राहत स्कीम, 2008 में यथापरिभाषित लघु या सीमांत किसानों की भूमि पर उपरोक्त प्रवर्गों के अधीन पात्र फायदाग्राहियों को खाली करने के पश्चात् की कुटबो के पास उनकी भूमि या वास भूमि पर आरंभ की गई परियोजना पर कार्य करने की इच्छुक कम से कम एक सदस्य के पास कार्य कार्ड होगा।

6. राज्य सरकार अन्य सरकारी स्कीमों या कार्यक्रमों के अधीन संक्रमो के अंतिम सुविधा कार्यन्वयन स्तर तक प्रभावी अंतर विभागीय अभिसरण को प्राप्त करने के लिए ठोस उपाय करेगी जिससे की अस्तियों की गुणवत्ता और उत्पादकता को सुधारा जा सके  और पोषणीय  रीति में बहुआयामी निर्धनता का साकल्यवादी ढंग से समाधान करने के लिए सक्रिया में लाया जा सके।

7. पंचायत के प्रत्येक स्तर पर एक क्रमबद्ध प्रतिभागिता योजना अभ्यास होगा, जिसे राज्य सरकार अधिकथित विस्तृत पद्धति के अनुसार प्रत्येक वर्ष अगस्त मास से दिसम्बर मास तक चलाया जायेगा। ग्राम पंचायतो द्वारा निष्पादित किये जाने वाले सभी सकर्मों की जाँच की जाएगी और उन्हें ग्राम सभा के समक्ष रखा जायेगा।

8. मौखिक या लिखित कार्य के लिए मांग, जैसे ही कार्यकार्ड धारक द्वारा उसकी अपेक्षा की जाति है, वैसे ही रोजगार दिवस में रजिस्ट्रीकृत की जाएगी, जिसे मांग के अनुसार कार्य के उपबंध की ओर ले जाने वाले, मास में कम से कम एक बार प्रत्येक वार्ड या ग्राम पंचायत स्तर पर संचालित किया जाना है।

9.(1) संकर्म के पर्याप्त शेल्फ कार्य के लिए प्रत्याशित मांग को पूरा करने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत द्वारा ऐसे ढंग में रखा जायेगा कि कम से कम एक श्रम गहन लोंक कार्य जिसमें कम से कम एक ऐसा कार्य हो जो विशिष्टतया  अति निर्बल समूहों विशेष रूप से वृद्ध और नि:शक्त व्यक्तियों के लिए उपयुक्त हैं, मांग के अनुसार कार्य प्रदान करने के लिए सभी समयों पर उपलब्ध रखा जायेगा।

(२) उक्त संकर्म (संकर्मों) के ब्यौर ग्राम की दीवारों पर लेखन के माध्यम से सुस्पष्टतः प्रदर्शित किये जायेंगे।

10. लोंक संकर्म प्रवर्ग में संकर्म के कार्य उपलब्ध कराते समय यह सुनिश्चित किया जायेगा कि चालू या अपूर्ण संकर्म को पहले पूरा किया जाना चाहिए।

11. काम के लिए मांग के रजिस्ट्रीकरण की तारीख से या उस तारीख जिससे कार्य की अग्रिम आवेदनों के मामले में मांग की गई है, इनमें जो भी पश्चातवर्ती हो, पन्द्रह दिन के भीतर कार्य उपलब्ध कराया जायेगा।

12. (1) यदि विनिर्दिष्ट समय-सीमा के भीतर मांग के अनुसार कार्य उपलब्ध नहीं कराया जा सका है तो कम्पूटर प्रणाली या प्रबंध सुचना प्रणाली द्वारा स्वतः यथासंगणित और अधिनियम के अधीन उपबंध किये गए अनुसार बेरोजगारी भत्ता संदत किया जायेगा। कार्यक्रम अधिकारी अपरिहार्य आधार पर ही बेरोजगारी भत्ते की अस्वीकृत कर सकता है।

(२) उन मामलों में जंहा बेरोजगारी भत्ता संदत्त किया जाता है या संदत्त किया जाना है, वहाँ कार्यक्रम अधिकारी आवेदकों को रोजगार उपलब्ध न कराने के लिए कारण लिखित में संबद्ध जिला कार्यक्रम समन्वयक को सूचित करेगा।

(3) जिला कार्यक्रम समन्वयक, राज्य परिषद् को अपनी वार्षिक रिपोर्ट में स्पष्ट करेगा कि रोजगार उन मामलों में क्यों नहीं उपलब्ध कराया जा सका जंहा बेरोजगारी भत्ते का संदाय अंतवलित है।

13. स्कीम के अधीन प्रत्येक कार्य में राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत किसी प्राधिकारी द्वारा सम्यक्त: स्वीकृत तकनीकी प्राक्कलन होगा, प्राक्कलनों की स्वीकृति देते समय निम्लिखित पर विचार किया जाना अपेक्षित है:

(क) ऐसे सभी संकर्म के लिए, जिसमें संनिर्माण प्रभावी लागत श्रम गहन प्रौद्योगिकियां, स्थानीय सामग्री का उपयोग अंतवर्लित है, यथासंभव नियोजित किये जांएगे

(ख) मात्राओं (प्राक्कलन में प्रयुक्त) के बिल सभी पणधारियों के सहजबोध के लिए सामान्य शब्दावली में उल्लिखित किये जाते है;

(ग) प्रत्येक कार्य में प्राक्कलन डिज़ाइनऔर तकनीकी नोट होगा जो कार्य के  कार्यान्वयन से प्रत्याशित परिणामों को उपदर्शित करता हो।

14.  ग्राम पंचायत स्तर पर अंतिम रूप दिए गए और खंड या जिला स्तर पर समेकित किये गए संकर्म ग्राम पंचायत स्तर पर संकर्म के अंतिम रूप दिए जाने की तारीख से तीस दिन के भीतर सक्षम प्राधिकारी द्वारा खंडवार प्रशासनिक या वित्तीय मंजूरी या पुष्टि करने के पश्चात् ही की किसी ग्राम पंचायत में संकर्म का शेल्फ उस ग्राम पंचायत के लिए अनुमोदित श्रम बजट का दरें गुणा से कम नहीं है, दिए जांएगे।

15.  स्कीम के अधीन अपनाए गए संकर्मों के लिए मास्टर रोल निम्नानुसार रखे जांएगे, अर्थात:

(क) प्रत्येक मास्टर रोल अंग्रेजी या स्थानीय भाषा में होगा और कार्य के लिए अनुप्रयुक्त कर्मकारों की सूची के साथ कम्पुटर प्रणाली (ई-मास्टर) द्वारा इलैक्ट्रानिक रूप से जनित्र विशिष्ट पहचान संख्या रखेगा। प्रत्येक मास्टर रोल ग्राम पंचायत के प्राधिकरण व्यक्ति या कार्यक्रम अधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित होगा उसमें ऐसी आज्ञापक जानकारी अंत होगी जो केंद्रीय सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट की जाय;

(ख)  मास्टर रोल, स्कीम के अधीन प्राधिकृत किसी व्यक्ति द्वारा दैनिक हाजरी चिनिहित करके कार्य स्थल पर रखे जांएगे, जिनके ब्यौरे  कम्पूटर प्रणाली का प्रयोग करके दैनिक आधार पर जन दृष्टी में उपलब्ध कराये जांएगे:

(ग) मास्टर रोल की आवधिक रूप से स्कीम में विहित रीति में पदाधिकारी द्वारा जाँच की जायगी:

(घ) मास्टर रोल अंतिम दिए गए दिन को बंद किया जायेगा, ऐसे प्रत्येक कर्मकार द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित किया जायेगा जिसने कार्य किया है और मापन के लिए इसे तकनीकी कार्मिक को सौपा जायेगा:

(ड.) समय-समय पर यथाविनिर्दिष्ट मास्टर रोल का विस्तृत अभिलेख रजिस्ट्ररों में रखा जायेगा;

(च) जब कार्य प्रगति पर हो तो उस कार्य में लगे हुए कर्मकार साप्ताहिक चक्रीय आधार पर कम से कम अपने में से ही पांच कर्मकारों का चयन क सकेंगें कि वे सप्ताह में कम से कम एक बार अपने कार्यस्थल के सभी बिलों या ववचरों का सत्यापन और उन्हें प्रमाणित करें.

(छ) सभी कार्य घंटों के दौरान सभी दिनों को मांग किये जाने पर प्रत्येक व्यक्ति की कार्यस्थल पर मास्टर रोल तक पंहुंच होगी:

16. मास्टर रोल के बंद किये जाने के तीन किन के भीतर प्राधिकृत कार्मिक द्वारा कार्यस्थल पर लिए गए मापन के आधार पर संदाय किया जायगा, राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि प्रयाप्त तकनीकी कार्मिक नियत अवधि के भीतर इस कार्य को पूरा करने के लिए नियोजित किये जाते हैं। कर्मकारों के कुटुंबों से उपयुक्त व्यक्तियों को प्रशिक्षित किया जा सकेगा या उन्हें कुशल बनाया जा सकेगा और तकनीकी शक्तियों के समुचित प्रत्यायोजन के साथ नंगे पैर इंजीनियरों के रूप में नियोजित किये जा सकेंगे जांए तथा कुशल कर्मकारों के रूप में मजदूरी का संदाय किया जा सकेगा।

17. राज्य सरकार किये गए कार्य की मात्रा के साथ, किसी लैंगिक पक्षपात के बिना मजदूरी को संयोजित करेगी और उसे विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए तथा विभिन्न मौसमों के लिए समय और गति अध्ययनों के पश्चात् नियत दरों की ग्रामीण अनुसूची और आवधिक रूप से पुनरीक्षत दरों के अनुसार संदत्त किया जायेगा।

18. दरों की एक पृथक अनुसूची को महिलाओं, वृद्ध निःशक्त लोगों और दुर्बल करने वाली व्याधियों से ग्रस्त लोगों के लिए अंतिम रूप दिया जायेगा जिससे कि उत्पादकता कार्य के माध्यम से उनकी सहभागिता में  किया जा सके।

19. (क) विभिन्न अकुशल श्रमिकों के लिए मजदूरी की दरों की अनुसूची नियत की जायेगी ताकि आठ घंटों तक जिसके अंतर्गत विश्राम का घंटा भी सम्मिलित है, कार्य करने वाले वयस्क व्यक्ति एक ऐसी मजदूरी अर्जित करेगा जो अनुबद्ध मजदूरी दर के समान है:

(ख) किसी वयस्क कर्मकार के कार्य घंटें शिथिलनीय होंगें किन्तु किसी भी दिन बारह घंटें से अधिक नहीं होंगें।

20. ग्राम पंचायत द्वारा लिए गए सभी कार्य के लिए कुशल और अर्ध कुशल कर्मकारों के परिश्रमिक सहित भौतिक घटकों की लागत चालीस प्रतिशत से अधिक नहीं होगी। ग्राम पंचायत से भिन्न कार्यान्वयन अभिकरणों द्वारा किये गए काम के लिए, ब्लॉक या मध्यावर्ती स्तर पर, कुशल और अर्धकुशल श्रमिकों के पारिश्रमिक सहित समस्त भौतिक घटक चालीस प्रतिशत से अधिक नही होगी।

२1. किसी भी ठेकेदार को नियुक्त किये बिना कार्य निष्पादित किया जायेगा। स्कीम के अधीन कार्यान्वयन अभिकरण सभी कार्य अधिनियम के अधीन विनिर्दिष्ट प्रक्रियाओं के अनुरूप और आज्ञापक पूर्व सक्रिय प्रकटन और सामाजिक संपरीक्षा के अनुपालन के पश्चात् निष्पादित किये जांएगे।

22. कार्यक्रम कार्यान्वयन अभिकरण द्वारा यथा साध्य कार्यों का निष्पादन श्रमिकों द्वारा ही किया जायेगा और कोई श्रमिक विस्थापित मशीनों का उपयोग नहीं करेगा।

23. ग्राम पंचायत या कार्यान्वयन अभिकरण द्वारा कार्य के लिए सभी आवश्यक सामग्री राज्य सरकार द्वारा यथाविनिर्दिष्ट पारदर्शी निविदा प्रक्रिया का उपयोग करके उपाप्त की जाएगी।

24. स्कीम के अधीन अनुज्ञात  प्रशासनिक लागतों की, कम से कम एक तिहाई(1/3) ग्राम पंचायत स्टेट पर ग्राम रोजगार सहायक, अन्य तकनीकी कार्मिकों की नियुक्ति और उनके काम के लिए वेतन और अन्य प्रशासनिक व्यय के लिए उपयोग होंगे।

कार्यान्वयन के सभी स्तरों पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना

25. कार्यान्वयन के सभी स्तरों पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रर्याप्त उपबंध अंतविर्ष्टि करने के लिए प्रत्येक स्कीम निम्नलिखित उपायों से मिलकर बनेगी, आर्थत :-

(क) निम्लिखित से मिलकर बने “जनता सुचना तंत्र” का उपयोग करके सभी साधारण लोग और पणधारियों को आधारभूत सुचना का आज्ञापक पूर्व सक्रिय प्रकटन:

(1) कार्य को ‘जनता’ प्राक्कन का प्रत्येक कार्यस्थल पर प्रदर्शन-कार्य के ब्यौरे, प्राक्कलित श्रम दिवस, स्थानीय शब्दावली में उपयोग की जाने वाली सामग्री की मात्रा और प्राक्कलन की मदवार लागत।

(२) ग्राम में मुख्य दीवारों या पब्लिक बोर्डों पर प्रदर्शन: रोजगार कार्ड सूची, दिए गए कार्य के दिवसों की संख्या और प्रत्येक कार्य धारक को संदत्त मजदूरी और अधिनियम के अधीन उपबंधित हकदारियाँ।

(3) ग्राम पंचायत कार्यालय पर बोर्डों के माध्यम से प्रदर्शन: अनुमोदित परियोजनों का शेल्फ, ग्राम पंचायतों और लाइन विभागों द्वारा लिए गए या पूर्ण किये गए वर्षवार संकर्म, प्रदत्त नियोजन, प्राप्त निधियां और व्यय, प्रत्येक कार्य में प्रयुक्त मात्राओं के साथ सामग्री की सूची, वह दरें जिन पर सामग्री उत्पाप्त की गई थी।

(4) वेबसाइट पर प्रदर्शन: ग्रामीण विकास मंत्रालय और राज्य विभागों के ग्रामीण विकास विभाग या सुनिश्चित करेंगे कि उनकी वेबसाइट सूचना का अधिकार अधिनियम, (2005 का 22)  की धरा 4(1) (ख) के सभी सत्रह उपबन्धों पुर्णतः संगत होंने के लिए अद्यतन हैं और अधिनियम के बारे में सम्पूर्ण सुचना निःशुल्क डाउनलोड करने योग्य इलैक्ट्रानिक रूप में जनता के लिए उपलब्ध है।

ख) समवर्ती सामाजिक संपरीक्षा प्रत्येक मास में सभी संकर्मों के लिए की जाएगी। इस प्रयोजन के लिए कार्यक्रम अधिकारी सत्यापन और रिपोर्ट व्युत्पन्न, यदि कोई हो, के लिए पिछले एक मास के दौरान किये गए संकर्मों और किये गए व्यय के ब्यौर भारत निर्माण कार्यकर्त्ताओं, ग्राम सामाजिक संपरीक्षकों, स्वयं सहायता समूहों, युवा संघटनों और ऐसे अन्य ग्राम स्तरीय संघटनों को निःशुल्क उपलब्ध कराएगा।

ग) सामाजिक संपरीक्षा : स्कीम के अधीन गारंटीकृत ग्रामीण रोजगार के लिए सभी शर्तों का कार्यान्वयन और श्रमिकों के न्यूनतम हकदारियों का उपबंध, जिसके अंतर्गत अधिनियम के अधीन सभी व्यय भी हैं निम्नलिखित से मिलकर बनने वाले केन्द्रीय सरकार द्वारा विहित रीति में प्रत्येक छह:मास में कम से कम बार सामाजिक संपरीक्षा के अधीन होगा:

1. सामाजिक संपरीक्षकों के रूप में स्थानीय युवाओं की पहचान, और सामाजिक संपरीक्षा के संचालन के लिए ग्राम पंचायत से बाहर प्रत्येक ग्राम पंचायत के लिए युवाओं की प्रशिक्षित सामाजिक संपरीक्षा दल बनाना, परन्तु ग्राम  सामाजिक संपरीक्षकों में से कम से कम 25% अ.जा./अ.ज.जा. समूहों से हों। ऐसे युवाओ द्वारा दी गई-सेवाओं के लिए उनमें से प्रत्येक को म.गा.रा.गा.अ. के अधीन कुशल श्रमिक को संदेय पारिश्रमिक से अन्यून दर पर मानदेय संदत्त किया जायेगा।

२.  सामाजिक संपरीक्षा दलों को निःशुल्क अभोलेखों (मास्टर रोल, एम-पुस्तिकाएं वेतन आदेश) का उपबंध ।

3. एम-पुस्तिकाओं के साथ क्षेत्र में   मापों को प्रत्येक कार्य स्थल पर पुनः पुष्टि का सत्यापन: और इस प्रकार निष्पादित कार्य की उपयोगिता और परिणामों का सत्यापन:

4. सबद्ध फायदाग्राहियों के साथ अभिलेख पर प्रत्येक संवितरण का सत्यापन:

5. प्राक्कलित परिणामों के साथ परिणामों का सत्यापन

6. क्षेत्र में हकों के उपबन्धों का सत्यापन

7. दुर्बल समूहों के लिए म.गा.रा.ग्रा. रो.गा.अ. के कार्यान्वयन का पुनविलोकन

8. निष्कषों  को पढने के लिए वार्ड/ग्राम पंचायतों और ब्लॉक स्तर पर सामाजिक संपरीक्षकों द्वारा लोंक सुनवाई का संचालन:

9.  सामाजिक संपरीक्षा रिपोर्टों पर आनुक्रमिक अनुसरण कार्रवाई दुविर्नियोजित और पाई गई रकमों की वसूली करना और सामाजिक संपरीक्षा संचालन की तारीख से छःमास के भीतर सामाजिक संपरीक्षाओं में दर्शित अनियमिताओं पर उचित अनुशासनात्मक/दांडिक कार्रवाई करना।

26. अधिनियम के अधीन खर्च की गई रकमों का कोई दुविनियोग उस राज्य में विद्यमान वसूली के लिए राजस्व विधियों के अधीन वसूलनीय होगा।

27. कार्य की उचित गुणवत्ता सुनिश्चित करने के और साथ ही साथ यह भी सुनिश्चित करने कि के लिए कार्य करने के लिये संदत्त मजदूरी किये गए कार्य की गुणवत्ता और मात्रा के अनुसार है, गुणवत्ता नियंत्रण दलों द्वारा कार्य के नियमित निरीक्षण और पर्यवेक्षण के उपबंध ।

28. राज्य सरकार या तो अपने तंत्र में माध्यम से या सिविल सोसाइटी संगठनों के साथ कार्य करके कामगारों को कार्यान्वयन में उनकी भागदारी सुधारने के लिए तथा अधिनियम के अधीन उपबंधित हकों के उपबंधों को सुनिश्चित करने के लिए उन्हें औपचारिक समूहों में संगठित करने के लिए कदम उठाएगी।

प्रभावी शिकायत प्रतितोष तंत्र की स्थापना

29. निम्नलिखित से मिलकर बनी एक प्रभावी शिकायत प्रतितोष तंत्र स्थापित करेगो जिसमें निम्नलिखित बातें होगीं:

क) प्रत्येक सप्ताह एक दिवस नियत करते हुए शिकायतें प्राप्त करने के लिए संस्थानिक, जब भी वे उदभूत हों, जिसके दौरान सभी पदधारी आवश्यक रूप से वार्ड/ ग्राम पंचायत/ब्लॉक और जिला स्तर पर शिकायतें प्राप्त करने के लिए उपस्थित रर्हेगे:

ख) सभी शिकायत प्राप्त करने के लिए प्राधिकृत कार्मिक अधिकारियों द्वारा लिखित, फोन, इंटरनेट और मौखिक रूप में स्वीकृत शिकायतों की रसीद तारीख से जारी करना।

ग) स्थल पर सत्यापन के माध्यम से जाँच, निरीक्षण और निपटारा सात कार्य दिवसों के भीतर पूरा किया जाना।

घ) जाँच पूरी होने पर, सम्बन्धित प्राधिकारी द्वारा 15 दिनों में शिकायतों के निवारण के लिए तुरंत कदम उठाए जांएगे ।

ड.) सात दिन के भीतर शिकायत का निपटारा करने में असफल होने पर, अधिनियम की धारा के अनुसार उल्लंघन होगा।

च) ) वित्तीय अनियमितताओं के सम्बन्ध में प्रथन दृष्टया साक्ष्य होने की सूचना के पश्चात् शिकायत की प्राथमिक जाँच या सामाजिक संपरीक्षा रिपोर्ट के निष्कर्ष होने की दशा में, जिला कार्यक्रम समन्वयक विधिक परामर्श अभिप्राप्त करने के पश्चात् यह सुनिश्चित करेगा कि प्रथम सूचना रिपोर्ट फाईल की गई है।

छ) जाँच के निष्कर्ष को व्यथित पक्ष या व्यक्ति को सूचित करने के लिए सम्बन्धित प्राधिकारी जिम्मेदार होगा और लिखित रूप में उसके/उसकी शिकायत के निवारण के लिए कदम उठाएँ।

झ) ग्राम पंचायत  के आदेशों के विरुद्ध अपील कार्यक्रम अधिकारी को की जाएगी जो कार्यक्रम अधिकारी के आदेशों के विरुद्ध हैं जिला कार्यक्रम समन्वयक की की जाएगी जो  जिला कार्यक्रम समन्वयक के विरुद्ध हैं वे राज्य आयुक्त रा.ग्रा.रो.ग्रा.स्की. और मंडल आयुक्त रा.ग्रा.रो.ग्रा.स्की. और राज्य शिकायत निवारण अधिकारी को की जाएगी।

इं) सभी अपील आदेश पारित  होने के तारीख से पैतालीस  दिनों के भीतर की जांएगी।

ट) सभी अपीलों का निपटारा एक मास के भीतर किया जायेगा।

ठ) वार्ड/ ग्राम पंचायत/मंडल/ जिला स्तर पर रजिस्ट्रीकृत शिकायतों का यदि 15 दिनों के भीतर निपटारा नहीं होता तो उन्हें अगले उच्च स्तर पर भेंजने के के लिए एक वृद्धि प्रणाली होगी और जिसमें इसे इलेक्ट्रॉनिकलि मानीटर किया जायेगा।

30. आम्बड्सपर्सन : जारी निर्देशानुसार प्रत्येक जिले में शिकायतों को प्राप्त करने, जाँच करने और आदेश पारित करने के लिए एक आम्बड्सपर्सन होगा।

31. शिकायतों के निवारण और प्रोग्राम को प्रभावी तरीके से मानीटर करने के लिए, राज्य सरकार कार्यक्रम अधिकारी, जिला कार्यक्रम समन्यवक, . आम्बड्समेन, सामाजिक संपरीक्षा यूनिट, कॉल सेंटर और हेल्पलाइन्स, सतर्कता और मानीटरी सिमितयां , राष्ट्रीय स्तर के मानीटर, रोजगार सहायता केन्द्र और समुचित सरकार द्वारा प्राधिकृत कोई अन्य अस्तिव का अस्तिव का समन्वय करेगी।

32. राज्य सरकार या जिला कार्यक्रम समन्यवक या  कार्यक्रम अधिकारी या  आम्बड्समेन या राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत प्राधिकारी द्वारा जहाँ कहीं भी सम्यक जाँच के पश्चात् अधिनियम के उपबंधों के उल्लंघन को साबित किया जाता है, अधिनियम की धारा 25 के उपबन्धों के अनुसार कदम उठाए जांएगे ।

33.  जिला प्रोग्राम समन्वयक, प्रोग्राम अधिकारी और ग्राम पंचयत अपने कार्यक्षेत्र से सम्बन्ध में एक वार्षिक रिपोर्ट बनाएगे, जिसमें तथ्य और आंकड़े और स्कीम के क्रियान्वयन से सम्बन्धित उपलब्धियों को रखा जायेगा और उसकी एक प्रति, जनता की मांग पर और ऐसी फीस से संदाय पर जो स्कीम मी विनिदिष्ट की जाए, उपलब्ध कराई जाएगी।

34. स्कीम से सम्बन्धित सभी खातों और अभिलेखों व मास्टर रोल को सार्वजनिक संवीक्षा के लिए निःशुल्क उपलब्ध कराया जायेगा। यदि कोई व्यक्ति इसकी प्रति या इससे संबद्ध सार प्राप्त करना चाहता है तो उसकी मांग किये जाने पर आवेदन प्राप्ति की तारीख से तीन कार्य दिवसों के भीतर ऐसी प्रतियाँ या सार उपलब्ध कराए जा सकते हैं।

35. स्कीम के भाग क्र रुप में एक सामर्थ्य निर्माण स्कीम सूचना शिक्षा संचार स्कीम और पंचायतों को शक्ति देने के लिए एक स्कीम होगी।

अनुसूची-2 (धारा 5)

स्कीम के अधीन गारंटीकृत ग्रामीण रोजगार के लिए शर्तें और श्रमिकों की न्यूनतम हकदारियां  कार्यकार्ड:

  1. प्रत्येक गृहस्थी का वयस्क सदस्य जो किसी ग्रामीण क्षेत्र में रह रहा है और अकुशल शारीरिक कार्य करने का इच्छुक हो, नाम, आयु, और गृहस्थी का पता, ग्रामीण स्तर की ग्राम पंचायत में, जिसके अधिकार क्षेत्र में वः रहता है, कार्य कार्ड जारी हेतु अपनी गृहस्थी को रजिस्ट्रीकृत करवाने के लिए दाखिल करवा सकता है। यदि कार्य चाहने वाला कोई एकल महिला या निःशक्त व्यक्ति या वृद्ध व्यक्ति या छोड़ा गया बंधुआ श्रमिक या विशिष्ट दुर्बल जनजाति से सम्बन्धित है तो उन्हें सुभिन्न रंग का विशेष कार्यकार्ड दिया जाना चाहिए जो उन्हें यथास्थिति कार्य प्रदान करने, कार्य मूल्याकंन और कार्य स्थल में विशेष संरक्षण सुनिश्चित करेगा।
  2. ऐसी जाँच करने के पश्चात् जो यह वः ठीक समझे, ग्राम पंचायत का यह कर्तब्य होगा कि इस प्रकार के आवेदन की प्राप्ति की तारीख के पंद्रह दिनों के भीतर कार्यकार्ड, एक अदिवतीय  कार्यकार्ड, संख्या के साथ जारी करें, जिसमें रजिस्ट्रीकृत वयस्क सदस्यों की गृहस्थी की पूरी जानकारी, उनकी फोटो, बैंक या डाकखाना खाता संख्या, बीमा संखया, यदि कोई हो।
  3. जारी किया गया कार्य कम से कम पांच वर्षों के लिए विधिमान्य होगा, जिसके पश्चात इसे सम्यक सत्यापन के पश्चात नवीकृत किया जा सकेगा।
  4. कोई भी कार्यकार्ड रद्द नहीं किया जा सकता अन्यथा जहाँ इसकी अनुलिपि पाई जीत है या सम्पूर्ण गृहस्थी रूप से ग्राम पंचायत बाहर किसी स्थान के लिए प्रवास कर चुकी हो और गाँव में न विद्यमान हो।
  5. राज्य सरकार अधिनियम के अधीन मुख्य हकदारियां जो स्पष्ट रूप से निम्नानुसार सूचीबद्ध है, का उल्लेख करते समान कार्य कार्ड में निम्नलिखित व्यौरे अद्यतन करने के लिए प्रबंध करेगी:-
    1. दिनों की संख्या जिनके लिए कार्य मांगा गया;
    2. आबंटित कार्य के दिनों की संख्या
    3. मास्टर रोल संख्या सहित आबंटित कार्य का वर्णन:
    4. माप ब्यौरे;
    5. संदत्त बेरोजगारी भत्ता, यदि कोई;
    6. कार्य दिवसों की तारीख और संख्या;
    7. तारीखवार संदत्त मजदूरी की रकम;
    8. विलंबित संदत्त प्रतिकर, यदि कोई है।

कार्य की मांग :-

 

  1. रजिस्ट्रीकृत गृहस्थी का ऐसा प्रत्येक वयस्क सदस्य, जिसका नाम कार्ड में है, स्कीम के अधीन अकुशल शारीरिक कार्य के लिए आवेदन करने का हकदार होगा, और प्रत्येक ऐसा आवेदन अनिवार्यतः रजिस्ट्रीकृत होगा और तारीख के साथ जारी की गई रसीद, रसीद कम्पूटर प्रणाली में डाली जाएगी।
  2. राज्य दुर्लब समूहों की आवश्यकताओं का प्रतिक्रियात्मक रूप में सत्यापन करेगा और उन्हें कार्य देगा।
  3. कार्य के लिए आवेदन मौखिक या लिखित रूप में वार्ड मैंबर या ग्राम पंचायत या कार्यक्रम अधिकारी या राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति या दूरभाष या मोबाइल या अंतःक्रिया ध्वनि प्रत्युत्तर प्रणाली के माध्यम से या कॉल सेंटर के माध्यम से या वेबसाइट या इस प्रयोजन के लिए तैयार किए गए एक किओस्क सेटअप के माध्यम से या राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत किसी भी अन्य साधन द्वारा किया जा सकता है।
  4. कार्य के लिए आवेदन व्यक्तिगत रूप से या किसी समूह के लिए किया जा सकता है।
  5. गृहस्थी की सकल हकदारी के अधीन रहते हुए, रोजगार के उन दिनों की संख्या जिनके लिए कोई व्यक्ति आवेदन कर सकेगा या उसको वस्तुतः दिए गए रोजगार के दिनों की संख्या पर कोई सीमा नहीं होगी।
  6. सामान्यतः कार्य के लिए आवेदन कम से कम चौदह दिन के निरंतर कार्य के लिए होने चाहिए, इसके आलावा यदि कार्य स्वच्छता सुविधाओं से सम्बंधित है तो कार्य के लिए आवेदन कम से कम साठ दिन के निरंतर कार्य के लिए होने चाहिए।
  7. अग्रिम आवेदन के लिए स्कीम में अर्थात ऐसे आवेदन जो उस तारीख से जिससे रोजगार चाहा गया है, पहले प्रस्तुत किये जा सकेंगे, उपबंध किया जायेगा।
  8. स्कीम में एक ब्यक्ति द्वारा अनेक आवेदन प्रस्तुत करने के बारे में उपबंध किया जायेगा पंरतु यह तव जब कि तत्सम्बन्धी अवधियाँ, जिनके लिए रोजगार चाहा गया है, अतिव्याप्त नहीं हो जाती।

 

कार्य का आबंटन

  1. ग्राम पंचायत और कार्यक्रम अधिकारी यह सुनिश्चित करेगा कि प्रत्येक आवेदक को स्कीम के उपबंधों के अनुसार, आवेदन की प्राप्ति की पंद्रह दिनों के भीतर या उस तारीख से, जिससे वह अग्रिम आवेदन की दशा में कार्य चाहता है, इनमें से हो पश्चातवर्ती हो, अकुशल शारीरिक कार्य प्रदान किया जायेगा।
  2. महिलाओ के इस तरह पुर्विकता ही जाएगी कि कम से कम कम एक-तिहाई फायदा प्राप्त करने वालों में ऐसी महिलाएं होंगी, जो रजिस्ट्रीकृत हैं और कार्य के लिए जिन्होंने अनुरोध क्या है। एकल महिला और निः शक्त व्यक्ति की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए प्रयास किये जायेंगे।
  3. ऐसे आवेदक, जिन्हें कार्य दिया जाता है, कार्यकार्ड में दिए गए उनके पते पर उनको पत्र भेजकर और जिला, मध्यवर्ती या ग्रामस्तर पर पंचायतों में सार्वजानिक सुचना प्रदर्शित कर इस प्रकार लिखित रूप में सूचित किया जायेगा।
  4. उन व्यक्तियों की सूची, जिन्हें कार्य दिया जाता है, ग्राम पंचायत के सुचान्न पटल पर और कार्यक्रम अधिकारी के कार्यालय में तथा ऐसे एनी स्थानों पर जिन्हें कार्यक्रम अधिकारी आवश्यक समझे, प्रदर्शित की जाएगी और सूची राज्य सरकार या किसी हितबद्ध व्यक्ति द्वारा निरीक्षण के लिए खुली रहेगी।
  5. जहाँ तक संभव हो, आवेदक को उस ग्राम से जहाँ वः आवेदन करते समय निवास करता है, पांच किलोमीटर के व्यास के भीतर रोजगार प्रदान किया जायेगा।
  6. स्कीम के अधीन को नया कार्य आरंभ किया जा सकता है, यदि कम से कम दस श्रमिक कार्य के लिए उपलब्ध हो जाते है।
  7. यदि रोजगार पैरा 8 विनिर्दिष्ट में ऐसे व्यास के बाहर प्रदान किया जाता है तो या ब्लॉक के भीतर प्रदान किया जाना चाहिए और श्रमिकों को अतिरिक्त परिवहन और जीवनयापन खर्चों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त मजदूरी के रूप में, मजदूरी दर दे दस प्रतिशत का संदाय किया जायेगा।
  8. रोजगार की अवधि कम से कम निरंतर चौदह दिन के लिए होगी एक सप्ताह में छह दिन से अनधिक के साथ।

कार्यस्थल प्रबंधन

  1. कार्यस्थल  पर कार्य में पारदर्शिता के उद्देश्य के लिए निम्नलिखित सुनिश्चित लिए जायेंगे:-
    1. परियोजना प्रारंभ के समय बैठक होगी जिसमें कार्य के विभिन्न उपबंधों को कर्मकारों का बताया जायेगा:
    2. कार्यस्थल पर सार्वजानिक निरीक्षण के लिए मंजूर कार्य आदेश के एक पति उपलब्ध होगी,
    3. सार्वजानिक निरीक्षण के लिए प्रत्येक कार्य के माप का अभिलेख की एक प्रति उपलब्ध होगा;
    4. प्रत्येक कार्यस्थल पर एक नागरिक सुचना पटल लगाया जायेगा औए उसे केन्द्रीय सरकार द्वारा रीति में नियमित रूप से अद्यतन किया जायेगा;
    5. केंद्रीय सरकार के अनुदेशों के अनुसार, स्थापित की गई सतर्कता और मानीटरी समिति सभी कार्यों और उस पर  मूल्यांकन रिपोर्ट की जाँच कर सके केंद्रीय सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट रूपविधान में और कार्य रजिस्टर में इसकी मुल्यांकन रिपोर्ट अभिलिखित की जायगी  जो  केन्द्रीय सरकार और सामाजिक संपरीक्षा के दौरान ग्रामसभा को प्रस्तुत की जाएगी।

 

23 .कार्यस्थल पर सुरक्षित पयेजल, बालकों तथा विश्राम की अवधि के लिए शेड, लघु क्षति में   आपात उपचार के लिए पर्याप्त सामग्री सहित प्राथमिक सहायता पेटी तथा किये जा रहे कार्य से सम्बद्ध अन्य स्वास्थ्य परिसंकट के लिए सुविधाएँ कार्यस्थल पर प्रदान की जाएगी।

24 .यदि किसी कार्यस्थल पर पांच साल से आयु के बालको की संख्या पांच या अधिक है तो ऐसी एक महिला कर्मकार की ऐसे बालकों की देखरेख करने के लिए नियुक्ति करने का उपबन्ध किया जायेगा। प्रतिनियुक्ति किये गे व्यक्ति को मजदूरी दर संदत्त होगी। परिक्षेत्र में अति अधिकारहीन महिला, शोषित दशा में महिला या बंधुआ मजदूर या वे जो सहजबेद होने से दुर्व्यापार का शिकार हो रही है या जो मैला उठाने के कार्य से छोड़ी गई है, को बालकों की देखरेख प्रदान करने के लिए नियोजित किया जायगा।

कल्याण

25. यदि स्कीम के अधीन किसी नियोजित से उदभूत दुर्घटना या उसके क्रम में कोई शारीरिक क्षति होती है, वह यथाअपेक्षित ऐसी निःशुल्क चिकित्सीय उपचार का हकदार होगा।

26. जिला प्रोग्राम समन्यवक, प्रोग्राम अधिकारी और ग्राम पंचायत अपने कार्यक्षेत्र क्व सम्बन्ध में एक वार्षिक रिपोर्ट बनायेंगे, जिसमें तथ्य और आंकड़े और स्कीम के क्रियान्वयन से सम्बन्धित उपलब्धियों को रखा जायेगा और उसकी एक प्रति, जनता की मांग पर और ऐसी फीस के संदाय प् जो जो स्कीम में विनिर्दिष्ट की जाये, उपलब्ध कराई जाएगी।

27. स्कीम से सम्बन्धित सभी खातों और अभिलेखों व मास्टर रोल को सार्वजानिक संवीक्षा के लिए निः शुल्क उपलब्ध कराया जायेगा। यदि को व्यक्ति इसकी प्रति या इससे सम्बद्ध सार प्राप्त करना चाहता है तो उसकी मांग किये जाने पर आवेदन  प्राप्ति की तारीख से तिन कार्य दिवसों के भीतर ऐसी प्रतियाँ या सार उपलब्ध कराए जा सकते हैं।

28. स्कीम के भाग के रूप के एक सामर्थ्य निर्माण स्कीम सुचना शिक्षा संचार स्कीम और पंचायतों को शक्ति देने के लिए एक स्कीम होगी।

29. (1) यदि मास्टर रोल को बंद करने की ततिख के पंद्रह दिन के भी भीतर मजदूरी का संदाय नहीं किया जाता है, तब मजदूरी चाहने वाले व्यक्ति मास्टर रोल बंद होने के प्रतिदिन देरी पर असंदत्त मजदूरी 0.05% की दर पर, प्रतिकर संदाय प्राप्त करने के हकदार होंगे।

(क) तारीख से पद्रह दिनों के परे प्रतिकर संदाय में किसी विलंब पर उसी रीति में विचार किया जायेगा जैसा कि मजदूरी के संदाय में विलंब का है।

(ख) मजदूरी संदाय के उतरदायित्व को सुनिश्चित करने और विभिन्न कृत्यकारियों या अभिकरणों की संदोषता की गणना के प्रयोजन के लिए राज्य, मजदूरी का संदाय की प्रक्रियाओं को विभिन्न विभाजित करेंगे, जैसे कि-

1)      कार्य का माप

2)      मास्टर रोल का कम्पयूटरीकरण

3)      माप का कम्पयूटरीकरण,

4)      मजदूरी की सूचियों का सृजन बनाना, और

5)      निधि अंतरण आदेश अपलोड करना कृत्यकारी या अभिकरणों की  जो कि विनिर्दिष्ट कृत्य के निर्वहन के लिए जिम्मेवार हैं के साथ प्रक्रमवार अधिकतम सीमाएं विनिर्माण करना।

(ग) कम्पयूटर प्रणाली में मास्टर रोल बंद होने की तारीख पर आधारित प्रतिकर संदेय की स्वचालित गणना और मजदूरी लेने वालों के खातों में मजदूरी जमा होने के  तारीख का उपबंध होगा।

(घ) राज्य सरकार ऊपर समय विनिर्दिष्ट सीमाओं के भीतर सम्यक सत्यापन के पश्चात प्रतिकर संदाय करेगी और कृत्यकारियों और अभिकरणों, जो कि संदाय के विलंब के लिए जिम्मेवार हैं, से प्रतिकर वसूल करेंगी।

() जिला प्रोग्राम समन्वयक और कार्यक्रम अधिकारी का यह कर्तव्य होगा कि वह सुनिश्चित करें कि प्रणली प्रचालित रहें।

(च) विलंब के दिनों की संख्या, संदेय प्रतिकर और वास्तविक संदत्त प्रतिकार मानीटरी और सूचना प्रणाली और मजदूर बजट में प्रतिविम्ब होगा।

(२) अधिनियम की धारा 27 के प्रयोजन के लिए उप पैर (1) का प्रभावी कार्यान्वयन आवश्यक माना जाएगा।

30. मजदूरी का संदेय , जब तक कि केंद्रीय सरकार द्वारा ऐसी छुट न  दी जाए सुसंगत बैंकों या डाक घरों में कर्मकारों के व्यष्टिक जमा खातो के माध्यम से किया जायेगा।

31. स्कीम के अधीन प्रदान किये गए नियोंजन की दशा में, मात्र लिंग के आधार पर कोई विभेद नहीं होगा और समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976 (1976 का 25) के उपबन्धों का पालन किया जायेगा।

अभिलेख अनुरक्षण और शिकायत प्रतितोष प्रणाली

३२. ग्राम पंचायत, ऐसे रजिस्टर वाऊचर  और अन्य दतावेज ऐसे रीति से, जो कार्यकार्ड की विशिष्टियों से युक्त स्कीम विनिर्दिष्ट की जाये, तैयार करेगी और रखेगी या तैयार करवाएगी और रखवाएगी जिसमें ग्राम पंचायत में रजिस्ट्रीकृत कार्यकार्डों और जारी की गई पासबुकों की विशिष्टियां और गृहस्थी के मुखिया तथा वयस्क सदस्यों के नाम, आयु, और पते अंतविर्ष्ट  होंगें

३३. ग्राम पंचायत, उसके पास रजिस्ट्रीकृत गृहस्थियों और उनके वयस्क सदस्यों के नाम और पते की ऐसी सूची या सूचियाँ तथा ऐसी अन्य जानकीरियां सम्बद्ध कार्यकम अधिकारी को, ऐसी अवधि पर ऐसे प्रारूप में, जो स्कीम में विनिर्दिष्ट किया जाये, भेजेगी।

34. (1) इस अनुसूची में अंतविर्ष्ट  किसी बात के होते हुए भी, बाढ़, चक्रवात, सुनामी और भूकम्प की जैसी राष्ट्रीय विपत्तियों की दशा में जिसके परिणाम-स्वरुप ग्रामीण आबादी के व्यापक विस्थापन, इस प्रकार प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीण गृहस्थियों के वयस्क सदस्य-

(क) रजिस्ट्रीकरण के लिए अनुरोध  कर सकेंगे और अस्थायी पुनर्स्थापन क्षेत्र की ग्राम पंचायत या कार्यक्रम  अधिकारी द्वारा जारी कार्यकार्ड प्राप्त कर सकेंगे।

(ख) अस्थायी पुनर्स्थापन क्षेत्र के कार्यक्रम अधिकारी या ग्राम पंचायत के समक्ष कार्य के लिए लिखित या मौखिक आवेदन कर सकेंगे; और

(ग) हानि या विनाश की दशा में, कार्य कार्ड के पुनः रजिस्ट्रीकृत और पुनः जारी किये जाने के लिए आवेदन कर सकेंगे।

(२) ऐसे कार्य कार्डों के व्यौरे के सुचना जिला प्रोग्राम समन्यवक को संसूचित किये जांयेंगे।

(3) सामान्य स्थिति के प्रत्यावर्तन की दशा में, इस प्रकार जारी कार्यकार्ड, निवास के मूल स्थान पर पुनः पृष्ठांकित किया जायेगा और सुधार होने पर मूल कार्यकार्ड के साथ जोड़ दिया जायेगा।

(4) इस प्रकार उपलब्ध कराए गए नियोजन के दिनों की संख्या की गणना, प्रति गृहस्थी 100 दिनों की गांरटीकृत नियोजन की संगणना करते समय की जाएगी।

35. प्रत्येक कर्मकार को स्कीम के अधीन, शिकायत प्रतितोष तंत्र के उपबंधों के अनुसार सुनवाई का और किसी भी शिकायत का लिखित या मौखित रूप में रजिस्टर करने का, सभी कार्यान्वयन स्तर पर निपटारा करने का अवसर होगा।

 

स्रोत: ग्रामीण विकास मंत्रालय, झारखण्ड सरकार ।

3.02884615385

Koushleya devi Jan 05, 2019 08:38 AM

Balence check

Gopi kishan godara Sep 15, 2018 09:39 PM

Gopi kishan godara Bajju tejpura me kam ka bura

Chhatrapal Jul 11, 2018 05:03 AM

Janpat panchayat nowgang

सँतोष कुमार दिबाकर Jun 15, 2018 03:17 PM

मेरे पापा का रोजगार गारंटी मे योजना मे नाम था लेकिन पता नही किसने काट दिया है mp मे भ्रष्टाचार बहुत तेजी से बडरहा है लेकिन हम सब कुछ.नही कर सकते मेरी योग्यता 12बी DCA .bsc . maths है लेकिन बेरोजगार बेटे है कुछ नही कर.सकते .मोबाईल नः 76XXX15

Rupesh Mar 11, 2018 01:10 PM

Kya apni panchayat chhod kar dusari panchayat Me kam kar sakte h

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