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दिव्यांगजन के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की राज्य-पोषित-योजनाएं

इस पृष्ठ में दिव्यांगजन के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की राज्य-पोषित-योजनाओं से जुड़ी जानकारी दी गयी है I

परिचय

समाज के असहाय, सुविधाविहीन एवं कमजोर वित्तीय स्थिति वाले दिव्यांगजनों के सर्वांगीण विकास एवं उनके लाभ तथा सहायता के लिए बनाई गयी योजनाओं के सुचारू संचालन हेतु प्रदेश सरकार द्वारा 20 सितम्बर, 1995 को दिव्यान्गजन सशक्तिकरण विभाग का गठन किया गया।

भारत की जनगणना वर्ष 2011 के अनुसार उत्तर प्रदेश में विभिन्न निःशक्तताओं से ग्रसित कुल व्यक्तियों की संख्या 4157514 है। जो प्रदेश की कुल जनसंख्या का लगभग 2.08 प्रतिशत है। इसमें दृष्टि निःशक्तता, वाक् निःशक्तता, श्रवण निःशक्तता, अस्थि निःशक्तता, मानसिक मंदित, मानसिक रूग्ण, बहु निःशक्तता एवं अन्य निःशक्तता से ग्रसित व्यक्ति शामिल हैं।

विभाग अपने विद्यालयों के माध्यम से विभिन्न आयु वर्ग, साक्षरता स्तर से संबंधित दिव्यांग छात्र/छात्राओं की आवश्यकताओं की पूर्ति कर रहा है। छात्र/छात्राओं के लिए आवासीय छात्रावास, ब्रेल प्रेस की स्थापना एवं संचालन के साथ-साथ डा0 शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय की स्थापना की गयी है जिसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न श्रेणी की निःशक्तता से ग्रसित दिव्यांग छात्र/छात्राओं को शैक्षिक सहायता प्रदत्त करना है।

विभाग ने विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को लागू किया है जैसे कि-

  • निराश्रित दिव्यांगजन हेतु आश्रय गृह-सह-प्रशिक्षण केन्द्र, कौशल विकास केन्द्र, अनुदान, पेंशन, सहायता तथा कृत्रिम अंग/सहायक उपकरण आदि।
  • इसके अलावा, विभिन्न प्रोत्साहनों जैसे कि दिव्यांगजन से विवाह करने पर, दिव्यांग / दिव्यांगता के क्षेत्र में काम कर रहे लोगों / संस्थानों के लिए राष्ट्रीय / राज्य स्तरीय पुरस्कार व कॉर्पोरेट सोशल रेस्पोंसबिलिटी (सी0 एस0 आर0) की पहल के उपयोग से अधिनियम द्वारा प्रत्यायोजित उक्त दायित्वों को पूर्ण करने हेतु तत्पर है।
  • उपर्युक्त के अतिरिक्त, आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने की योजनाओं के माध्यम से यथा: दुकान निर्माण संचालन योजना द्वारा , विभिन्न राज्य / राज्योत्तर सेवाओं में आरक्षण / छूट द्वारा दिव्यांगजन के सर्वागींण विकास एवं उन्नयन हेतु सदैव प्रयासरत है।
  • दिव्यांगजन हेतु सुगम्य आवागमन के लिए बाधा रहित वातावरण का निर्माण, शल्य चिकित्सा द्वारा दिव्यांगजन के जीवन मानकों का उच्चीकरण तथा जीवन की गुणवत्ता का विकास एवं भागीदारी सुनिश्चित कराना है।

विभाग ने सक्रिय रूप से विभिन्न हितधारकों, सेवा प्रदाताओं, गैर सरकारी संगठनों तथा प्रतिष्ठित व्यक्तियों के सुझाव, अनुभव, अपेक्षाओं को समाहित करते हुए एक अधिक न्यायसंगत, प्रगतिशील निर्णय प्रणाली व दिव्यांगजन की विशिष्ठ परिस्थितियों के प्रति जागरूकता विकसित करने हेतु तत्पर है जिससे एक अधिक समावेशी समाज का निर्माण किया जा सके।

दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के मुख्य दायित्व

  • दिव्यांगजनों के संबंध में राष्ट्रीय नीति का कार्यान्वयन
  • आयोजनागत एवं आयोजनेतर योजनाओं के माध्यम से दिव्यांगों का सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक विकास सुनिश्चित करना।
  • दिव्यांगजनों के विकास संबंधी भारत सरकार की नीतियों एवं कार्यक्रमों का कार्यान्वयन।
  • दिव्यांगजन विकास के संबंध में राष्ट्रीय संस्थानों के साथ समन्वय।
  • दिव्यांगजनों के विकास संबंधी कार्य हेतु अन्तर्विभागीय समन्वय।
  • सेवाओं में दिव्यांगजनों का आरक्षण एवं उनके सेवायोजन का पर्यवेक्षण।
  • दिव्यांगजनों के लिये सहायक उपकरणों का प्रबन्ध।
  • दिव्यांगजनों के लिये विशेष तथा व्यावसायिक प्रशिक्षण।
  • गैर सरकारी संस्थाओं/माता-पिता/सरकारी अधिकारियों/कर्मचारियों को दिव्यांगजनों के विकास संबंधी प्रशिक्षण।
  • गैर सरकारी संस्थाओं को दिव्यांगजनों के विकास सम्बन्धी कार्य करने हेतु सहायता एवं सहयोग।
  • राज्य एवं केन्द्रीय सार्वजनिक उद्यमों तथा निजी क्षेत्र के उद्यमों एवं उनके संगठनों से दिव्यांग जन विकास के लिये सहयोग प्राप्त करना।
  • दिव्यांगों से संबंधित योजनाएं आय-व्ययक अनुमान तथा अन्य प्रशासनिक मामले।

दिव्यांगजन के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की राज्य-पोषित-योजनाएं

निराश्रित दिव्यांगजन के भरण-पोषण हेतु अनुदान (दिव्यांग पेंशन) योजना

पात्रता व शर्ते

  • ऐसे दिव्यांगजन जिन्होंने 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर लिया हो और न्यूनतम 40 प्रतिशत की दिव्यांगता हो।
  • उत्तर प्रदेश के निवासी है एवं वास्तव में उत्तर प्रदेश में निवास कर रहे है।
  • वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, समाजवादी पेंशन अथवा ऐसी ही किसी अन्य योजना के अन्तर्गत पेंशन/अनुदान/ सहायता पाने वाला व्यक्ति तथा राजकीय संस्थाओं/गृहों में निःशुल्क भरण पोषण पाने वाले व्यक्ति पात्र नहीं होंगे।
  • लाभार्थियों की पात्रता के संबंध में जिलाधिकारी का निर्णय अन्तिम होगा।

आय

गरीबी की रेखा (वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों में रू0 46080/- तथा शहरी क्षेत्रों में रू0 56460/- प्रति परिवार प्रति-वर्ष निर्धारित है) की परिभाषा के अन्दर आने वाले दिव्यांगजन अनुदान के पात्र होंगे। (अनुदान प्राप्त करने के लिए जिले के प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा जारी प्रमाण-पत्र मान्य होगा।)

अनुदान की दर

इस योजना के अन्तर्गत अनुदान की दर रू0 500/- प्रति लाभार्थी प्रतिमाह होगी जो कि समय-समय पर शासन द्वारा संशोधित दर मान्य होगी।

अनुदान की प्रक्रिया एवं प्रतिबन्ध

अनुदान की प्रक्रिया एवं प्रतिबन्ध निम्नानुसार होंगे-

  • नवीन अवेदको को अनुदान की धनराशि का भुगतान बजट की उपलब्धता के आधार पर प्रथम आवक-प्रथम पावक के अनुसार देय होगा तथा लाभार्थी को पूर्व की बकाया (एरियर) धनराशि देय नहीं होगी।
  • अनुदान-ग्रहीता की मृत्यु होने अथवा अपात्रता की श्रेणी में आने की संगत किश्त के बाद अनुदान देना बन्द कर दिया जायेगा।
  • यदि कोई व्यक्ति फर्जी अभिलेख गलत सूचना, लाभार्थी की मृत्यु या अन्य कारण से अनुदान प्राप्त कर लेता है तो सम्बन्धित व्यक्ति द्वारा प्राप्त की गई धनराशि की वसूली भू-राजस्व के बकाये की तरह पब्लिक मनी (रिकवरी आफ ड्यूज) ऐक्ट, 1965 की धारा-3 की उपधारा (ए) (11) के अन्तर्गत की जायेगी ।

इस नियमावली के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु निदेशक दिव्यांगजन सशक्तीकरण द्वारा समय-समय पर आवश्यक निर्देश जारी किये जायेंगे।

इस योजना के अन्तर्गत किसी भी विवादास्पद विषय पर प्रमुख सचिव, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, उ0प्र0 शासन का निर्णय अन्तिम होगा तथा सभी को मान्य होगा।

आवेदन पत्र

आवेदन पत्र दिव्यांगजन जन द्वारा जन सुविधा केन्द्र/लोकवाणी/इन्टरनेट के माध्यम से पर भरा जा सकता है तथा ई-आवेदन की अद्यतन् स्थिति भी प्राप्त की जा सकती है।

भुगतान की प्रक्रिया

ई-पेमेन्ट के माध्यम से उनके बैंक खाते में किया जायेगा।

कुष्ठावस्था पेंशन योजना

पात्रता व शर्ते

  • इस योजना का मुख्य उद्देश्य ऐसे दिव्यांगजन एवं कुष्ठ रोग ग्रस्त व्यक्तियों के भरण-पोषण के लिये अनुदान की सहायता देना है जिनके परिवार की आय उनके भरण-पोषण हेतु पर्याप्त न हो।
  • कुष्ठ रोग के कारण दिव्यांगजन से तात्पर्य ऐसे सभी व्याक्तियों से है, जिनमें कुष्ठ रोग के कारण दिव्यांगता उत्पन्न हुयी हो (चाहे दिव्यांगता का प्रतिशत कुछ भी हो) तथा जिसे उत्तर प्रदेश के संबंधित जनपद के मुख्य जिकित्साधिकारी से तत्संबंधी दिव्यांगता प्रमाण पत्र प्राप्त हो।
  • जो कुष्ठ रोग के कारण दिव्यांगजन उत्तर प्रदेश के मूल निवासी हों।
  • वृद्धावस्था पेंशन, निराश्रित महिला पेंशन अथवा ऐसी ही किसी अन्य योजना के अन्तर्गत पेंशन/अनुदान/सहायता पाने वाला व्यक्ति इस पेंशन/अनुदान के लिये पात्र नही होंगे।
  • आय उक्त पेंशन/अनुदान के लिये बी0पी0एल0 आय सीमा निर्धारित होगी।
  • आयु कुष्ठ रोग के कारण हुये दिव्यांगजन किसी भी आयु वर्ग के हों, पेशन/अनुदान हेतु पात्र होगें।
  • दर इस योजना के अन्तर्गत कुष्ठ रोग के कारण दिव्यांगजन के लिये अनुदान की दर प्रति लभार्थी रू0 2500/- प्रति माह होगी। इसके लिये शासन द्वारा समय-समय पर संशोधित दर मान्य होगी।

उपर्युक्त पात्रता की शर्तो में किसी प्रकार के विवाद होने की दशा में जिलाधिकारी का निर्णय अंतिम होगा।

आवेदन पत्र

आवेदन पत्र दिव्यांगजन जन द्वारा जन सुविधा केन्द्र/लोकवाणी/इन्टरनेट के माध्यम से भरा जा सकता है तथा ई-आवेदन की अद्यतन् स्थिति भी प्राप्त की जा सकती है।

भुगतान की प्रक्रिया लाभार्थी को धनराशि का भुगतान ई-पेमेन्ट से उनके बैंक खाते में किया जायेगा।

शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों को कृत्रिम अंग एवं श्रवण सहायक यंत्र इत्यादि खरीदने तथा मरम्मत कराने हेतु सहायक अनुदान योजना

उद्देश्य एवं प्रयोजन

इस योजना का मुख्य उद्देश्य ऐसे दिव्यांगजन को कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण इत्यादि खरीदने हेतु वित्तीय अनुदान प्रदान करना है जिनकी (नियोजित या स्वरोजगार की दशा में) या जिनके परिवार की (आश्रित की दशा में) समस्त स्रोतों से वार्षिक आय गरीबी की रेखा के लिए निर्धारित आय सीमा से अधिक न हो, अर्थात् वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों में रू0 46080/- तथा शहरी क्षेत्रों में रू0 56460/- प्रति परिवार प्रति-वर्ष निर्धारित आय अथवा उ0प्र0 सरकार द्वारा संशोधित निर्देशों के अनुरूप।

अनुदान की दर

इस योजना के अन्तर्गत दिव्यांग जन को कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण इत्यादि खरीदने हेतु वित्तीय अनुदान की अधिकतम धनराशि प्रति लाभार्थी रू0 8000/- अनुमन्य होगी, अथवा उ0प्र0 शासन द्वारा समय-समय पर संशोधित दर अनुमन्य होगी।

पात्रता व शर्ते

  • किसी भी आयु वर्ग के दिव्यांगजन जो उत्तर प्रदेश के निवासी हो।
  • ऐसे दिव्यांगजन जिनमें न्यूनतम 40 प्रतिशत की दिव्यांगता राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत प्राधिकारी द्वारा प्रमाणित की गई हो। मानसिक मंदिता की स्थिति में किसी व्यक्ति के चित की अवरूद्ध या अपूर्ण विकास की अवस्था जो विशेष रूप से वृद्धि की असामान्यता द्वारा अभिलक्षित होती है जिसे प्राधिकृत अधिकारी द्वारा प्रमाणित किया गया है।
  • दिव्यांगजन हेतु आवश्यक कृत्रिम अंग/सहायक उपकरण हेतु चिकित्साधिकारी द्वारा संस्तुति की गयी हो।
  • ऐसे दिव्यांगजन जिन्हें समान प्रयोजन/उपकरण के लिए भारत सरकार/राज्य सरकार/स्थानीय निकाय से पिछले तीन वर्षो के दौरान लाभान्वित नही किया गया हो, तथापि किसी शैक्षिक संस्थान के नियमित छात्रों के लिए यह सीमा एक वर्ष के लिए होगी।

आय

गरीबी की रेखा (वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों में रू0 46080/- तथा शहरी क्षेत्रों में रू0 56460/- प्रति परिवार प्रति-वर्ष निर्धारित है) की परिभाषा के अन्दर आने वाले दिव्यांगजन अनुदान के पात्र होंगे अथवा उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संशोधित निर्देशों के अनुरूप। अनुदान प्राप्त करने हेतु मा0 संासद, मा0 विधायक, महापौर, पार्षद, नगर पंचायत अध्यक्ष, जिला पंचायत अध्यक्ष, जिले के प्रथम श्रेणी के मजिस्टेªट, तहसीलदार, खण्ड विकास अधिकारी अथवा ग्राम प्रधान द्वारा जारी आय प्रमाण पत्र मान्य होगा।

उपकरणों का विवरण

योजनान्तर्गत दिव्यांगजन को उनकी दिव्यांगता के अनुरूप निम्न प्रकार के कृत्रिम अंग/सहायक उपकरण प्रदान किये जा सकते है

  • गतिशीलता सहायक यन्त्र जैसे - ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर, सी.पी. चेयर, क्रचेज, वाकिंग स्टीक और वाकिंग फ्रेमध्रोलेटर्स।
  • दृष्टि बाधित दिव्यांगता से ग्रस्त छात्र/छात्राओं के लिए शिक्षण उपकरण जैसे अंकगणितीय फ्रेम, एबाकस, ज्यामितिय किट्स अथवा ब्रेल एजूकेशनल किट्स।
  • दृष्टि बाधित दिव्यांगजन के लिए ब्लाइन्ड स्टिक।
  • श्रवण बाधित दिव्यांगजन हेतु विभिन्न प्रकार के श्रवण-सहायक यन्त्र तथा शैक्षणिक किट।
  • मानसिक रूप से दिव्यांग बच्चों एवं विद्यार्थियों हेतु एम.एस.आई.डी. किट (मल्टी-सेन्सरी ऐजूकेशन डेवलपमेंट किट)
  • कुष्ठ रोग से मुक्त व्यक्तियों के दैनिक क्रियाकलापों सम्बन्धी किट (ए0डी0एल0 किट)
  • बहुदिव्यांगता की दशा में अथवा जिन दिव्यांगजन को एक से अधिक सहायक उपकरण की आवश्यकता होती है उनके लिए एक बार में अधिकतम रू0 8000/- तक की वित्तीय अनुदान स्वीकृत की जायेगी।

अनुदान की प्रक्रिया एवं प्रतिबन्ध

  • निर्धारित प्रारूप पर आवेदन-पत्र सम्बन्धित जनपद के जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी, कार्यालय को प्रस्तुत किये जाने होंगे।
  • जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी द्वारा प्रत्येक वर्ष कार्यालय में प्राप्त प्रार्थना-पत्रों को सूचीबद्ध कर उपलब्ध धनराशि के सापेक्ष आवेदकों को वित्तीय अनुदान दिये जाने में प्रथम आवक एवं प्रथम पावक के सिद्धान्त के आधार पर स्वीकृति करेंगे।
  • योजना अन्तर्गत यदि किसी आवेदन-पत्र को निरस्त किया जाता है तो ऐसे आवेदकों की सूची निरस्त करने के स्पष्ट कारण सहित तैयार कर अनुरक्षित रखी जायेगी।
  • इस नियमावली के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु निदेशक दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा समय-समय पर आवश्यक निर्देश जारी किये जायेंगे।
  • इस योजना के अन्तर्गत किसी भी विवादास्पद विषय पर शासन का निर्णय अन्तिम होगा तथा सभी को मान्य होगा।

आवेदन की प्रक्रिया

दिव्यांगजन जन जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी कार्यालय एवं जन सुविधा केन्द्र/लोकवाणी के माध्यम से आवेदन कर सकते है तथा ई-आवेदन की अद्यतन् स्थिति भी प्राप्त की जा सकती है।

उपकरण वितरण की प्रक्रिया

जनपदों में शिविर के माध्यम से लाभार्थियों को सहायक उपकरण (प्रथम आवक एवं प्रथम पावक के सिद्धान्त के आधार पर) वितरित किये जायेगें।

शादी-विवाह प्रोत्साहन पुरस्कार योजना

पात्रता व शर्ते

  • 40 प्रतिशत या उससे अधिक (मुख्य चिकित्साधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र/प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के चिकित्सक द्वारा प्रदत्त प्रमाण-पत्र मान्य होगा)।
  • समस्त श्रेणी के दिव्यांगजन व्यक्ति जो उत्तर प्रदेश के निवासी हो।
  • ऐसे दिव्यांगजन जिनकी आयु 18 वर्ष या उससे अधिक, किन्तु 60 वर्ष से अधिक न हो।
  • दिव्यांग मूल ऋण की वसूली, भुगतान के तीन माह बाद रू0 500/- प्रति त्रैमासिक किश्त की दर से तीस समान किश्तों में की जायेगी।
  • दिव्यांगजन जो किसी आपराधिक अथवा आर्थिक मामलों में सजा न पाये हो तथा उनके विरूद्ध किसी प्रकार की सरकारी धनराशि देय न हो।
  • दिव्यांगजन के पास दुकान निर्माण हेतु स्वयं की 110 वर्ग फीट भूमि हो या अपने संस्त्रोतों से उक्त क्षेत्रफल की भूमि खरीदने/लेने में समर्थ हो।
  • दिव्यांगजन द्वारा 05 वर्ष की अवधि का किरायेदारी का पट्टा कराया जाये उन्हें उपलब्ध दुकान संचालन हेतु (किराया एवं कार्यशील पूँजी)

दुकान निर्माण/क्रय/किराये पर लिये जाने के लिए स्थल का चयन

नगरीय क्षेत्र

ऐसा स्थान जहाँ पर व्यापार अथवा व्यवसाय चलने की पूर्ण सम्भावना हो।

ग्रामीण क्षेत्र

ऐसा स्थान जहाँ आवगमन की आसान सुविधा हो एवं व्यापार अथवा व्यवसाय चलने की पूर्ण सम्भावना हो।

आय

दिव्यांगजन जन जिनकी वार्षिक आय समय-समय पर शासन द्वारा गरीबी रेखा के लिए निर्धारित आय सीमा के दोगुने से अधिक न हो।

दर

  • दुकान निर्माण हेतु रू0 20,000/- एवं दुकान/खोखा/गुमटी/हाथ ठेला संचालन हेतु रू0 10,000/- की धनराशि प्रदान की जाती है।
  • रू0 20,000/- में रू0 15,000/- की धनराशि 4 प्रतिशत साधारण ब्याज पर ऋण के रूप में तथा रू0 5,000/- अनुदान के रूप में प्रदान की जाती है।
  • इसी प्रकार रू0 10,000/- में रू0 7,500/- की धनराशि 4 प्रतिशत साधारण ब्याज पर ऋण के रूप में तथा रू0 2,500/- अनुदान के रूप में प्रदान की जाती है।

इस योजना अन्तर्गत दिव्यांगजन जन सुविधा केन्द्र/लोकवाणी के माध्यम से ऑन लाइन आवेदन कर सकते है तथा ई-आवेदन की अद्यतन् स्थिति भी प्राप्त की जा सकती है।

भुगतान की प्रक्रिया

आवेदन-पत्र प्रथम आवक तथा प्रथम पावक के सिद्धान्त के आधार पर ही नियमानुसार स्वीकृत किये जायेगें तथा भुगतान ई-पेमेंट के माध्यम से उनके बैंक खाते में किया जायेगा।

ऋण की वसूली

  • दुकान निर्माण हेतु स्वीकृत मूल ऋण की वसूली, ऋण व अनुदान की सम्पूर्ण धनराशि के भुगतान के एक वर्ष बाद रू0 500/- प्रति त्रैमासिक किश्त की दर से तीस समान किश्तों में की जायेगी।
  • दुकान क्रय हेतु स्वीकृत मूल ऋण की वसूली, भुगतान के तीन माह बाद रू0 500/- प्रति त्रैमासिक किश्त की दर से तीस समान किश्तों में की जायेगी।
  • खोखा/गुमटी/हाथ ठेला क्रय हेतु स्वीकृत मूल ऋण की वसूली, भुगतान के तीन माह बाद रू0 250/- प्रति त्रैमासिक किश्त की दर से तीस समान किश्तों में की जायेगी।
  • दुकान के निर्माण/खोखा, गुमटी, हाथ ठेला क्रय हेतु स्वीकृत मूल ऋण की वसूली के बाद ब्याज की धनराशि वसूल की जायेगी। यह वसूली 24 समान मासिक किश्तों में की जायेगी। लाभार्थी ब्याज की सम्पूर्ण धनराशि को एक मुश्त भी अदा कर सकता है।

दिव्यांगजन के पुनर्वासन हेतु दुकान निर्माण/दुकान संचालन योजना

पात्रता व शर्ते

  • 40 प्रतिशत या उससे अधिक (मुख्य चिकित्साधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र/प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के चिकित्सक द्वारा प्रदत्त प्रमाण-पत्र मान्य होगा)।
  • समस्त श्रेणी के दिव्यांगजन व्यक्ति जो उत्तर प्रदेश के निवासी हो।
  • ऐसे दिव्यांगजन जिनकी आयु 18 वर्ष या उससे अधिक, किन्तु 60 वर्ष से अधिक न हो।
  • दिव्यांग मूल ऋण की वसूली, भुगतान के तीन माह बाद रू0 500/- प्रति त्रैमासिक किश्त की दर से तीस समान किश्तों में की जायेगी।
  • दिव्यांगजन जो किसी आपराधिक अथवा आर्थिक मामलों में सजा न पाये हो तथा उनके विरूद्ध किसी प्रकार की सरकारी धनराशि देय न हो।
  • दिव्यांगजन के पास दुकान निर्माण हेतु स्वयं की 110 वर्ग फीट भूमि हो या अपने संस्त्रोतों से उक्त क्षेत्रफल की भूमि खरीदने/लेने में समर्थ हो।
  • दिव्यांगजन द्वारा 05 वर्ष की अवधि का किरायेदारी का पट्टा कराया जाये उन्हें उपलब्ध दुकान संचालन हेतु (किराया एवं कार्यशील पूजी)

दुकान निर्माण/क्रय/किराये पर लिये जाने के लिए स्थल का चयन

नगरीय क्षेत्र - ऐसा स्थान जहाँ  पर व्यापार अथवा व्यवसाय चलने की पूर्ण सम्भावना हो।

ग्रामीण क्षेत्र - ऐसा स्थान जहाँ  आवगमन की आसान सुविधा हो एवं व्यापार अथवा व्यवसाय चलने की पूर्ण सम्भावना हो।

आय

दिव्यांगजन जन जिनकी वार्षिक आय समय-समय पर शासन द्वारा गरीबी रेखा के लिए निर्धारित आय सीमा के दोगुने से अधिक न हो।

दर

  • दुकान निर्माण हेतु रू0 20,000/- एवं दुकान/खोखा/गुमटी/हाथ ठेला संचालन हेतु रू0 10,000/- की धनराशि प्रदान की जाती है।
  • रू0 20,000/- में रू0 15,000/- की धनराशि 4 प्रतिशत साधारण ब्याज पर ऋण के रूप में तथा रू0 5,000/- अनुदान के रूप में प्रदान की जाती है।
  • इसी प्रकार रू0 10,000/- में रू0 7,500/- की धनराशि 4 प्रतिशत साधारण ब्याज पर ऋण के रूप में तथा रू0 2,500/- अनुदान के रूप में प्रदान की जाती है।

आवेदन पत्र

इस योजना अन्तर्गत दिव्यांगजन जन सुविधा केन्द्र/लोकवाणी के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते है तथा ई-आवेदन की अद्यतन् स्थिति भी प्राप्त की जा सकती है।

भुगतान की प्रक्रिया

आवेदन-पत्र प्रथम आवक तथा प्रथम पावक के सिद्धान्त के आधार पर ही नियमानुसार स्वीकृत किये जायेगें तथा भुगतान ई-पेमेंट के माध्यम से उनके बैंक खाते में किया जायेगा।

ऋण की वसूली

  • दुकान निर्माण हेतु स्वीकृत मूल ऋण की वसूली, ऋण व अनुदान की सम्पूर्ण धनराशि के भुगतान के एक वर्ष बाद रू0 500/- प्रति त्रैमासिक किश्त की दर से तीस समान किश्तों में की जायेगी।
  • दुकान क्रय हेतु स्वीकृत मूल ऋण की वसूली, भुगतान के तीन माह बाद रू0 500/- प्रति त्रैमासिक किश्त की दर से तीस समान किश्तों में की जायेगी।
  • खोखा/गुमटी/हाथ ठेला क्रय हेतु स्वीकृत मूल ऋण की वसूली, भुगतान के तीन माह बाद रू0 250/- प्रति त्रैमासिक किश्त की दर से तीस समान किश्तों में की जायेगी।
  • दुकान के निर्माण/खोखा, गुमटी, हाथ ठेला क्रय हेतु स्वीकृत मूल ऋण की वसूली के बाद ब्याज की धनराशि वसूल की जायेगी। यह वसूली 24 समान मासिक किश्तों में की जायेगी। लाभार्थी ब्याज की सम्पूर्ण धनराशि को एक मुश्त भी अदा कर सकता है।

निःशक्तता निवारण हेतु शल्य चिकित्सा अनुदान

निःशक्तता निवारण के लिए शल्य चिकित्सा हेतु एक वर्ष में रू. 8000/- प्रति लाभार्थी को प्रतिपूर्ति की व्यवस्था है।

योजना की श्रेणी- व्यक्तिगत

योजना से प्राप्त होने वाला लाभ

  • विभिन्न प्रकार की निःशक्तताओं को यथा सम्भव कम करने के लिये आवश्यक करेक्टिव सर्जरी कराके दिव्यांगजन को सामान्य जीवन जीने लायक बनाया जाता है।
  • शल्य चिकित्सा हेतु एक वर्ष में अधिकतम रू0 10,000/- प्रति व्यक्ति की सीमा तक इलाज के खर्च की भरपाई के लिये धनराशि संबंधित राजकीय चिकित्सालय को लाभार्थी की चिकित्सा के लिये प्रदान की जाती है।

योजना से लाभ प्राप्त किए जाने की पात्रता

  • ऐसे दिव्यांग जन जिनका तथा जिनके अभिभावकों की वार्षिक आय रू0 6000/- से अधिक न हो।
  • भारत वर्ष का नागरिक हो।
  • उत्तर प्रदेश का स्थाई निवासी अथवा कम से कम 05 वर्ष से उत्तर प्रदेश का अधिवासी हो।
  • किसी अपराधिक मामले में दण्डित न किया गया हो।

लाभ प्राप्त करने के लिए निर्धारित प्रपत्र, यदि कोई हो और उसे कहाँ से प्राप्त किया जा सकता है, यदि वेबसाइट पर उपलब्ध हो, तो उसका पता संबंधित जनपद के जिला दिव्यांग कल्याण अधिकारी कार्यालय एवं निदेशालय दिव्यांग कल्याण, उत्तर प्रदेश से आवेदन पत्र प्राप्त किया जा सकता है।

निर्धारित आवेदन पत्र का प्रारूप दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की विभागीय वेबसाइट से भी प्राप्त किया जा सकता है।

अनुदान के लिये आवेदन पत्र प्रस्तुत करने की प्रक्रिया

संबंधित जनपद के जिला दिव्यांग कल्याण अधिकारी लाभ प्राप्त करने के लिए किससे सम्पर्क करना होगा?

संबंधित जिले के जिला दिव्यांग कल्याण अधिकारी से

लाभ प्राप्त करने में आने वाली समस्या का किस स्तर पर हल होगा?

सम्बन्धित जनपद के जिलाधिकारी/मुख्य विकास अधिकारी।

निदेशक दिव्यांग कल्याण, 10वाँ तल इन्दिरा भवन, लखनऊ (दूरभाष संख्या : 0522-2287267, 0522-2286188)

दिव्यांगजन को राज्य परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा सुविधा प्रदान करने की योजना

परिभाषा

इस योजना के अन्तर्गत जब तक विषय या संदर्भ में कोई बात विरूद्ध न हों।

  • बसों में ऐसी साधारण बसें अभिप्रेत होंगी जो निगम द्वारा उसके अधीन उ0प्र0 की सीमा के अन्दर एवं प्रदेश की सीमा के बाहर विभिन्न मार्गो पर चलाई जाती हो। वायुशीतित, शयनयान, वातानुकूलित तथा वीडियोयुक्त बसों पर यह सुविधा लागू नहीं होंगी।

निगम उ0प्र0 राज्य सड़क परिवहन निगम अभिप्रेत होगा।

राज्य से उ0प्र0 अभिप्रेत होगा।

  • दिव्यांगजन को उ0प्र0 निःशुल्क यात्रा सुविधा उ0प्र0 सड़क परिवहन निगम की बसों से भिक्षावृत्ति से भिन्न प्रयोजन के लिये यात्रा करने पर दी जायेगी।
  • यात्रा प्रारम्भ करते समय दिव्यांग व्यक्ति मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा प्रदत्त प्रमाणपत्र परिवहन निगम के अधिकृत कर्मचारी/अधिकारी को प्रस्तुत कर यात्रा प्रारम्भ कर सकेगा।
  • उ0प्र0 राज्य सड़क परिवहन निगम लखनऊ द्वारा प्रत्येक वित्तीय वर्ष में आवश्यक प्रमाणपत्र, जिसमें इस बात का उल्लेख होगा कि कितने दिव्यांग व्यक्तियों ने एक त्रैमास में निःशुल्क यात्रा सुविधा का उपयोग किया, के साथ मांग पत्र दिये जाने पर अनुमन्य धनराशि निदेशक, दिव्यांगजन सशक्तीकरण द्वारा उ0प्र0 राज्य सड़क परिवहन निगम को उपलब्ध कराई जायेगी।

(1) यात्रा की सुविधा केवल मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा प्रदत्त प्रमाणपत्र के आधार पर ही दिव्यांगजन को ही दी जायेगी।

(2) यात्रा की सुविधा केवल उन्हीं दिव्यांगजन को देय होगीं जो निम्नांकित श्रेणियों में से किसी एक में आते हों

जो पूर्ण रूप से अंधे हो या अल्पदृष्टि (लो विज़न) हों (दिव्यांगजन अधिनियम 1995 की परिभाषा के अनुसार)।

जो पूर्ण रूप मूक हों, बधिर हों या दोनों हों (दिव्यांगजन अधिनियम, 1995 की परिभाषा के अनुसार)।

    • जिनके एक हाथ व पैर या जिनके दोनों हाथ या दोनों पैर पूर्ण रूप से कटे हों।
    • जिनके एक हाथ एवं एक पैर या दोनों हाथ या दोनों पैर अपंग (पैरालाइज्ड) हों।
    • जो मानसिक रूप से मंद/रूग्ण हों। (दिव्यांगजन अधिनियम 1995 की परिभाषा के अनुसार)
    • जो लेप्रोसी मुक्त दिव्यांग हों।
  • मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा दिये गये दिव्यांगता प्रमाण-पत्र में यदि कोई दिव्यांग गम्भीर दिव्यांगता से ग्रसित है। अर्थात यदि व 80 प्रतिशत या अधिक दिव्यांगता से ग्रसित है तो उस दिव्यांग के एक सहयोगी को दिव्यांग की तरह ही निःशुल्क यात्रा सुविधा उपलब्ध कराई जायेगी।
  • परिवहन निगम की बसों से दिव्यांग को पूरे वित्तीय वर्ष में यात्रा की सुविधा अनुमन्य होगी।
  • नगर बस सेवा में भी यह सुविधा अनुमन्य होगी, यदि उ0प्र0 राज्य सड़क परिवहन निगम सेवा संचालित करते हों।
  • नियम 7 (2) के अंतर्गत उल्लिखित दिव्यांगजन को उ0प्र0 राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा सुविधा उपलब्ध होगी।
  • उ0प्र0 राज्य सड़क परिवहन निगम को दिव्यांगजन पर होने वाले व्यय की प्रतिपूर्ति के लिये संबंधित विभाग के आय-व्ययक में व्यवस्थित धनराशि के अनुसार पारस्परिक सहमति से धनराशि का भुगतान निदेशक, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा किया जायेगा।
  • मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा प्रदत्त प्रमाण पत्र का प्रयोग यात्रा सुविधा हेतु किया जायेगा।
  • दिव्यांग द्वारा यात्रा करने पर परिवहन निगम का बस कंडक्टर दिव्यांग को मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा प्रदत्त दिव्यांगता प्रमाण-पत्र देखने के पश्चात गंतव्य स्थान तक यात्रा की सुविधा उपलब्ध करायेगा। इस यात्रा का लेखा-जोखा यथासमय परिवहन निगम के कार्यालय में प्रस्तुत करेगा। उक्त निःशुल्क यात्रा के लिये जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी द्वारा दिव्यांगता प्रमाण-पत्र पर पंजीकरण संख्या, हस्ताक्षर व मोहर का अंकन किया जाना अनिवार्य नही होगा।
  • जिला समाज कल्याण अधिकारी/जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी अपने यहाँ  एक रजिस्टर रखेंगे, जिसमें ऐसे दिव्यांगजन का उल्लेख होगा जो परिवहन निगम की बसों से यात्रा करने हेतु पात्र हैं।
  • उ0प्र0 राज्य सड़क परिवहन निगम प्रत्येक तीन माह पर लेखा विवरण तथा यात्रा करने वाले दिव्यांगजन की संख्या संबंधी विवरण निदेशक, दिव्यांगजन सशक्तीकरण को उपलब्ध करायेगे।
  • दिव्यांगता की जो परिभाषा यात्रा के लिये दी गई है, उस श्रेणी में आने के लिये यह आवश्यक होगा कि संबंधित दिव्यांग अपने जिले के मुख्य चिकित्साधिकारी से दिव्यांगता प्रमाण-पत्र प्राप्त करें।
  • इस यात्रा हेतु संबंधित दिव्यांग तथा उसके सहयोगी को यात्रीकर का भुगतान नही करना होगा।

दिव्यांगजन के सशक्तिकरण हेतु राज्य स्तरीय पुरस्कार

प्रदेश के दक्ष दिव्यांग कर्मचारियों/स्वत: रोजगारत दिव्यांग व्यक्तियों, दिव्यांगजन के सेवायोजकों एवं उत्कृष्ट प्लेसमेंट अधिकारियों, दिव्यांगजन के हितार्थ उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों/संस्थाओं को प्रति वर्ष विश्व दिव्यांग दिवस 03 दिसम्बर के अवसर पर राज्य स्तरीय पुरस्कार प्रदान किया जाता है।

योजना से प्राप्त होने वाला लाभ

निःशक्तता के बावजूद उत्कृष्ट कार्य करने, स्वरोजगार करने वाले दिव्यांग जन एवं ऐसे सेवायोजक जिन्होंने दिव्यांग व्यक्तियों को सेवारत किया हो, सहायक प्लेसमेंट अधिकारी जिन्होने दिव्यांग व्यक्तियों को रोजगार दिलाने का कार्य किया हो अथवा ऐसी स्वैच्छिक संस्थाये जिन्होंने दिव्यांगता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों को सम्पन्न किया हो को पुरस्कृत कर योजनाओं के क्रियान्वयन/कार्यक्षेत्र में नये आयामों को प्राप्त करने तथा गतिशीलता प्रदान करना।

पुरस्कार के रूप में एक शील्ड, मान पत्र एवं रू0 25000/- का नकद पुरस्कार दिया जाता है।

योजना से लाभ प्राप्त किए जाने की पात्रता

  • निःशक्तता के बावजूद उत्कृष्ट दिव्यांग कर्मचारी/स्वरोजगार करने वाले दिव्यांग जन एवं ऐसे सेवायोजक जिन्होंने दिव्यांग व्यक्तियों को सेवारत किया हो, सहायक प्लेसमेन्ट अधिकारी जिन्होने दिव्यांग व्यक्तियों को रोजगार दिलाने का कार्य किया हो अथवा ऐसी स्वैच्छिक संस्थायें/व्यक्ति विशेष जिन्होने निःशक्तता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यो को सम्पन्न किया हो इस पुरस्कार की पात्रता के अन्तर्गत आते है।
  • ऐसे पात्र व्यक्ति/संगठन/विभाग/स्वायतशासी निकाय को पुरस्कार प्रदान करने हेतु संबंधित जनपद के जिलाधिकारी की संस्तुति अनिवार्य है।
  • लाभ प्राप्त करने के लिए निर्धारित प्रपत्र, यदि कोई हो और उसे कहाँ से प्राप्त किया जा सकता है, यदि वेबसाइट पर उपलब्ध हो, तो उसका पता
  • निर्धारित फार्म संबंधित जनपद के जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी कार्यालय एवं निदेशालय दिव्यांग जनसशक्तिकरण विभाग, उत्तर प्रदेश से आवेदन पत्र प्राप्त किया जा सकता है।
  • निर्धारित फार्म दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की वेबसाईट से भी प्राप्त किया जा सकता है।
  • लाभ प्राप्त करने के लिए किससे सम्पर्क करना होगा?

संबंधित जनपद के जिला दिव्यांग जनसशक्तिकरण अधिकारी

डिस्लेक्सिया व अटेन्शन डैफसिट एंड हाईपर एक्टिविटी सिंड्रोम से प्रभावित बच्चो की पहचान हेतु शिक्षकों को प्रशिक्षण

डिसलेक्सिया व अटेंशन डैफसिट एण्ड हाईपर एक्टिविटी सिन्ड्रोम जैसी छिपी हुई दिव्यांगता से प्रभावित बच्चों की पहचान हेतु अध्यापकों को प्रशिक्षित करने उनके अभिभावकों को इस परिपेक्ष्य में जागरूक करने एवं समाज में जागरूकता का सृजन करने का कार्य किया जाता है।

मानसिक मंदित एवं मानसिक रूप से रूग्ण निराश्रित दिव्यांग जन के लिए आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केन्द्र संचालित करने हेतु स्वैच्छिक संगठनों को सहायता

विभिन्न श्रेणी के दिव्यांगजन हेतु मानसिक दिव्यांगता के प्रति सर्वाधिक संवेदनशील दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है, क्योंकि निश्चित स्तर की मानसिक दिव्यांगता के बाद इस वर्ग के व्यक्तियों के पराश्रय एवं दूसरों के सहयोग की अनिवार्य आवश्यकता होती है। इसकों दृष्टिगत रखते हुये मानसिक रूप से रूग्ण व्यक्तियों के आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान को सुनिश्चित करने के लिये शासकीय कार्यक्रमों के साथ स्वैच्छिक संस्थाओं की भी भागीदारी के लिये विभाग द्वारा मानसिक रूप से रूग्ण निराश्रित दिव्यांगजन हेतु आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केन्द्रों के संचालन हेतु स्वैच्छिक संगठनों को अनुदान दिये जाने की योजना संचालित की जा रही है।

स्वैच्छिक संगठनों/संस्थाओं को सहायता

दिव्यांग जन सशक्तीकरण के कार्य में लगी स्वैच्छिक संस्थाओं/संगठनों को दिव्यांगता का कारण, बचाव, उपचार, पुनर्वासन एवं दिव्यांगजन विकास विभाग की योजनाओं तथा अधिनियम के प्राविधानों का प्रचार-प्रसार करने हेतु राज्य सरकार द्वारा अनुदान स्वीकृत किया जाता है।

ब्रेल प्रेस का संचालन

प्रदेश में दृष्टिबाधित छात्र/छात्राओं के पठन-पाठन हेतु ब्रेललिपि में पुस्तकों को प्रकाशित करने हेतु प्रेस का संचालन किया जा रहा है। यह ब्रेल प्रेस उच्च शिक्षा में अध्ययनरत दृष्टिबाधित छात्रों के छात्रावास निशातगंज, लखनऊ में स्थापित की गयी है। इस ब्रेल प्रेस में विभाग द्वारा संचालित दष्टिबाधित विद्यालय में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के पठन पाठन हेतु सम्बन्धित विषयों की पुस्तकों को ब्रेल लिपि में प्रकाशित कराये जाने का कार्य किया जा रहा

 

स्रोत- दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार

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