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दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण कार्य कलाप

इस पृष्ठ में दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण कार्य कलाप क्या है, इसकी जानकारी दी गयी है।

भूमिका

भारत की जनगणना वर्ष 2011 के अनुसार उत्तरप्रदेश मे विभिन्न दिवयांगताओं से ग्रसित कुल व्यक्तियों की संख्या 4157514 है। जो प्रदेश की कुल जनसंख्या का लगभग 2.08% है। प्रदेश के ग्रामीण एवं  शहरी क्षेत्रों में निवासरत दिवयांग व्यक्तियों का दिव्यांगतावार वर्गिकरण निम्नवत है-

जनगणना वर्ष 2011 के अनुसार उत्तरप्रदेश में श्रेणीवार दिव्यांगो की संख्या का विवरण

विवरण

ग्रामीण

शहरी

कुल योग

दिव्यांगजन

कुल जनसंख्या

3166615

990899

4157514

 

पुरुष

1803715

560456

2364171

 

महिला

1362900

430443

1793343

दृष्टि दिवयांगता

 

579182

184806

7633988

 

पुरुष

307821

100041

407862

 

महिला

271361

84765

356126

 

 

202152

64434

266586

वाक दिवयांगता

पुरुष

114665

36505

151170

 

महिला

87487

27929

115416

श्रवण दिवयांगता

 

753704

274131

1027835

 

पुरुष

398665

146514

545179

 

महिला

355039

127617

482656

अस्थि दिवयांगता

 

 

 

 

 

 

543203

134510

677713

 

पुरुष

355061

86554

441615

 

महिला

188142

47956

236098

मानसिक मंदित

 

140097

41245

181342

 

पुरुष

88236

25605

113841

 

महिला

51861

15640

67501

 

 

57497

19106

76603

मानसिक रुग्न

पुरुष

37021

12100

49121

 

महिला

20476

7006

27482

 

 

720020

226418

946436

अन्य दिवयांगता

पुरुष

402738

126226

528964

 

महिला

317282

100190

417472

 

 

170760

46251

217011

बहू दिवयांगता

पुरुष

99508

26911

126519

 

महिला

71252

19340

90592

 

दिव्यांगता की परिभाषा

दिव्यांगजन के समग्र कल्याण हेतु भारत सरकार द्वारा दिव्यांगजन (समान अवसर, अधिकार संरक्षण एंव पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 पारित किया गया है, जो 07 फरवरी, 1996 से जम्मू कश्मीर को छोड़कर सम्पूर्ण भारतवर्ष में प्रभावी है।इस अधिनियम में कुल 14 अध्याय एंव 74 धाराएँ हैं। इस अधिनियम की धारा-2 (न) में निःशक्त (दिव्यांग) व्यक्ति की परिभाषा निम्नानुसार दी गई है:-

निःशक्त (दिव्यांग) से ऐसा कोई व्यक्ति अभिप्रेत है, जो किसी चिकित्सा प्राधिकारी द्वारा यथाप्रमाणित किसी निःश्क्क्त्ता से केएम से केएम 40% से ग्रस्त हैं।

उक्त अधिनियम 1995 की धारा में निःशक्तता (दिव्यांगता) की श्रेणियों एंव उनकी परिभाषाएँ निम्नानुसार दी गई है –

दृष्टिहीनता – उस अवस्था के प्रति निर्देश करता है जहां कोई व्यक्ति निम्नलिखित दशाओं में से किसी से ग्रसित है अर्थात:-

1. दृष्टिगोचरता का पूर्ण अभाव या

2. सुधारक लेंसों के साथ बेहतर आँख में 5/60 या 20/200 स्नेलन से अनधिक दृष्टि की तिक्षणता या

3. दृष्टि क्षेत्र की सीमा का 2- डिग्री के कोण के कक्षांतरकारी होना या अधिक खराब होना।

कम दृष्टि वाला व्यक्ति – से अभिप्रेत है, ऐसा कोई व्यक्ति जिसके उपचार या मानक उपवर्धनीय दुधार संसोधन के बावजूद दृष्टिकोण कृत्य का ह्रास हो गया है और जो समुचित सहायक युक्ति से किसी कार्य की योजना या निष्पादन के लिए दृष्टि का उपयोग करता है या उपयोग करने में संभाव्य रूप से समर्थ है।

कुष्ठ रोग से मुक्त- से कोई ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है, जो कुष्ठ रोग से मुक्त हो गया है किन्तु निम्नलिखित से ग्रसित है:-

1. जिसके हाथ या पैरों में संवेदना की कमी तथा नेत्र और पलकों में संवेदना की कमी और आंशिक घात है किन्तु प्रकट विरूपता नहीं है।

2. प्रकट दिव्यांगताग्रस्त और आंशिक घात है किन्तु उसके हाथों और पैरों में प्र्याप्त गतिशीलता है जिससे वे सामान्य आर्थिक क्रिया कलाप कर सकते हैं।

3. अत्यंत शारीरिक विरूपांगता और धिक वृद्धावस्था से ग्रस्त है जो उन्हें कोई भी लाभपूर्ण उपजीविका चलाने से रोकती है और कुष्ठ रोग से मुक्त पद का अर्थ तदनुसार लगाया जाएगा।

श्रवण ह्रास- से अभिप्रेत है संवाद संबंधी रेंज की आवृति मे बेहतर कर्ण में 60 डेसिबल या अधिक की हानि ।

चलन क्रिया संबंधी निःशक्ता – से हड्डियाँ, जोड़ों या मांसपेशियों की कोई ऐसी निःशक्ता अभिप्रेत है जिससे अंगों की गति में पर्याप्त निर्बंधन या किसी प्रकार का प्रमस्तिष्क अंगघात हो।

मानसिक मंदता  - से किसी व्यक्ति के मष्टिक के अवरुद्ध या अपूर्ण की अवस्था है जो विशेष रूप से सामान्य बुद्धिमत्ता की अवसामनयता द्वारा प्रकट होती है, अभिप्रेत है।

मानसिक बीमार – से मानसिक मंदता से भिन्न कोई मानसिक विकार अभिप्रेत है।

दिव्यांग्ता की उक्त श्रेणियों एंव परिभाषाओं के अनुसार दिव्यांग व्यक्तियों को  दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी करने हेतु उत्तरप्रदेश निःशक्त व्यक्ति ( समान अवसर, अधिकार संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) नियमावली, 2001 को सरलीकृत करते हुए उत्तर प्रदेश व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) प्रथम संशोधन) नियमावली 2014 शासन के आधिसुचना संख्या 519/65-3-2014-62 98 दिनांक 3.9.2014 द्वारा निर्गत की गयी है। ऊक्त संशोधित नियमावली के अनुसार सहज दृश्य दिव्यांगता प्रमाण पत्र प्रदेश के विभिन्न सामुदायिक चिकित्सा केन्द्रों एंव प्राथमिक चिकित्सका केन्द्रों, राजकीय चिकित्सालयों में कार्यरत चिकित्सा विभाग द्वारा नामित प्राधिकृत चिकिसका अधिकारी द्वारा निर्गत किया जाएगा, जबकि ऐसी दिव्यांगता जो सहज दृश्य न हो एंव उसके परिणामस्वरूप हेतु विशेषज्ञ चिकित्सका एव्न उपकरण की आवश्यकता हो, के प्रकरण में दिव्यांग प्रमाण पीटीआर प्राधिकृत चिकित्सक की संस्तुति के आधार पर प्रत्येक जनपद में मुख्य चिकित्साधिकारी की अध्यक्षता में गठित चिकित्सा परिषद अथवा डॉ राम मनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय लखनऊ के प्राधिकृत चिकित्सा द्वारा निर्गत किया जाएगा।

अवगत कराना है कि भारत सरकार द्वारा दिव्यांगजनों के लिए पी॰ डब्ल्यू॰ डी॰ एक्ट 2016 व्यवहार में लाया गया है। इस अधिनियम में कुल दिव्यांगताओं को 21 प्रकारों/विशेषीकृत कोटि मे विभाजित किया गया है। ये 21 प्रकार की दिव्यांगताएं/विशेषीकृत कोटि निमन्वत है –

1. अंधता

2. कमजोर दृष्टि

3. कुष्ठ रोग मुक्त व्यक्ति

4. बौनापन,

5. बौद्धिक निःशक्तता

6.मानसिक रुग्णता

7. ओटिज्म

8. मष्टिक पक्षघात,

9. मांसपेशियों का सिकुडना

10. गंभीर न्यूरोलाजिकल दशा

11. सीखने की कमजोरी

12. एकधिक सिलेरोसिस

13. सीखने में कमजोरी

14.थैलासिमिया

15. आधीराक्त स्त्राव

16. हंसिय रोग

17. बहुनिःशक्ता

18. तेजाब हमले के पीड़ित

19. पार्किंन्स्न  रोग

20. श्रवण क्षीणत

21. चलने मे असमर्थता

उपर्युक्त दिव्यांगताओं से ग्रसित दिव्यांगजनों हेतु आवहयक तंत्र विकसित करने एंव प्रमाण पीटीआर जारी क्रयाए जाने हेतु समुचित प्रयास किया जा रहा है।

दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, उत्तर प्रदेश की संरचना

समाज के असहाय, सुविधाविहीन एंव कमजोर वित्तीय स्थिति वाले दिव्यांग व्यक्तियों के सर्वांगीण विकास एंव उनके लाभ तथा सह्यता के लिए बनाई गयी योजनाओं के सुचारु संचालन हेतु प्रदेश सरकार द्वारा 12 अगस्त, 1995 के अलग से दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग का गठन किया गया जिसके अंतर्गत शासन एसटीआर पर प्रमुख सचिव, विशेष सचिव, संयुक्त सचिव, उप सचिव एंव अनुसचिव के पद तथा 3 अनुभाग सृजित हैं।

विभाग के अधीन दिव्यांगजन विकास विभाग निदेशालय कार्यरत है जिसमें निदेशक का एक पद तथा संयुक्त निदेशक के तीन पद मुख्य वित्त एंव लेखाधिकारी का एक पद सृजित है।

उपनिदेशक के 13 पद- उपनिदेशक के दो पद मुख्यालय एसटीआर तथा 11 पद मण्डल एसटीआर (लखनऊ, कानपुर, मेरठ, बरेली, वाराणसी, इलाहाबाद, आगरा, गोरखपुर आजमगढ़, फैजाबाद तथा झाँसी) मे सृजित हैं तथा 75 जनपदों में  जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी के पद सृजित हैं।

विभाग में सृजित एंव भरे पदों के विवरण हेतु परिशिष्ट क तथा प्रशासनिक व्यवस्था संगठन का चार्ट परिशिष्ट ख अवलोकनीय है।

दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के मुख्य दायित्व

विभाग के उद्देश्य एंव कार्य:-

1. दिव्यांगजन के संबंध मे नीति का निर्धारण करना एंव प्रभावशाली सुनिश्चित करना।

2. योंजनाओं के माध्यम से दिव्यांगजन का भौतिक, शैक्षणिक एंव आर्थिक पुनर्वास कर समाज की मुख्य धारा में शामिल करना।

3. दिव्यांगजन विकास के संबंध में निर्धारित राष्ट्रीय नीतियों, कार्यक्रमों, संस्थाओं  के साथ समन्वय कर प्रदेश में प्रभावशाली तरीके से क्रियान्वयन सुनिश्चित करना।

4. दिव्यांगजजों के विकास संबंधी कार्य हेतु अंतर्विभाग समन्वय के साथ-साथ गैर सरकारी संस्थाओं को प्रोत्साहित करना।

5. सेवाओं में दिव्यांगजन का आरक्षण एंव उनके सेवायोजन का पर्यवेक्षण करना आदि।

दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा संचालित कार्यक्र्म/योजनाएँ

1. संकेत (राजकीय मुक बघिर विद्यालय) संचालित है। इन विद्यालयों में श्रवण यंत्र की सहायता से छात्रों को शिक्षा दिये जाने के साथ-साथ व्यवसायिक प्रक्षिक्षण भी दिया जाता है। लखनऊ बरेली तथा फरुखाबाद में जूनियर हाईस्कूल स्तर तक शिक्षा प्रदान की जाती है। बरेली में आवासीय छात्र संख्या 120 तथा आवासीय छात्र संख्या 220 (कुल 340) है। फरुखाबाद की आवासीय छात्र क्षमटा 60 तथा अनवासीय छात्र क्षमटा 40 है (कुल 100) तथा लखनऊ की आवासीय क्षमता 100 छात्र है। आगरा एंव गोरखपुर में हाईस्कूल एसटीआर तक की शिक्षा देने की व्व्यवस्था है। आगरा की आवासीय छात्र 50  अनवासीय छात्र क्षमता 100 (कुल 150) तथा गोरखपुर में आवासीय सुविधा उपलब्ध नहीं है अनवासीय छात्र क्षमता 100 है। इन विद्यालयों में अध्ययनरत छात्रों को जिनके अभिवभावकों की मासिक आय रु। 1000/- तक होती है, उन छात्र/छात्राओं को आवासीय सुविधा के साथ-साथ रु। 2000/- प्रतिमाह की दर से छात्रवृत्ति/छात्रवेतन दिया जाता है। इन विद्यालयों में लाभान्वितों का विवरण निम्न्व्त है –

विद्यालयों की संख्या

आवासीय/अनवासीय

स्वीकृत क्षमता

2015-2016

2016-2017

2017-2018 (लक्ष्य)

05

आवासीय

330

241

252

330

 

अनवासीय

460

261

344

460

 

योग

790

502

596

790

 

2. स्पर्श (बालक/बालिकाओं के लिए राजकीय दृष्टीबाघित विद्यालय) लखनऊ, गोरखपुर, बोंदा, सहारनपुर, मेरठ

लखनऊ/गोरखपुर मे बालकों/बालिकाओं के लिए एक-एक,बांदा एंव मेरठ में बालकों हेतु एक-एक इंटर कॉलेज संचालित है। इन विद्यालयों की आवासीय छात्र क्षमता 200-200 हैं तथा अन्य 04 विद्यालयों की आवासीय क्षमता 100-100 हैं अनवासीय छात्र क्षमता 25-25 है। जनपद सहारनपुर में बालिकाओं हेतु हाईस्कूल स्तर तक विद्यालय संचालित है, जिसकी आवासीय छात्र क्षमता 75 था अनवासीय काहटर क्षमता 25 है. इन विद्यालयों में ब्रेल पद्धति के माध्यम से निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है। इन विद्यायलों में अध्ययनरत छात्र/छात्राओं को जिनके अभिभावकों की मासिक आय रु। 100/होती है, उन छात्र/छात्राओं को आवासीय सुविधा के साथ-साथ प्रति छात्र/छात्रा रु 2000/ प्रतिमाह की दर से छात्रवृत्ति/ छात्रवेतन दिया जाता है, तथा अनवासीय छात्र/छात्राओं को घर से विद्यालय तक आने जाने हेतु निःशुल्क बस सुविधा उपलब्ध करायी जाती है। इन विद्यालयों में स्वीकृत क्षमता के सापेक्ष लाभान्वितों का वीआरएसएचवार विवरण निमन्वत है:-

विद्यालयों की संख्या

आवासीय/अनवासीय

स्वीकृत क्षमता

2015-2016

2016-2017

2017-2018 (लक्ष्य)

07

आवासीय

875

594

613

875

 

अनावासीय

175

89

94

175

 

योग

1050

683

7-7

1050

 

3. ममता (मानसिक रूप से चुनौतीग्रस्त बालकों/बालिकाओं का राजकीय विद्यालय) लखनऊ तथा इलाहाबाद

प्रदेश में मानसिक रूप से चुनौतीग्रस्त बालकों/बालिकाओं  के लिए एक- एक विद्यालय क्रमशः लखनऊ तथा इलाहाबाद में संचालित है। इन विद्यालय में बालकों एंव बालिकाओं को मनोवैज्ञानिक पद्धति से निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है। प्रत्येक विद्यालय की आवासीय छात्र क्षमता 50-50 है। इन विद्यलयों में संवासियों को शारीरिक रूप स्वस्थ रखने की दृष्टि से व्यवसायिक प्रशिक्षण भी दिया जाता है। जिन संवासियों के अभिभावकों की मासिक आय रु 100/ प्रतिमाह तक है उनके भरण पोषण पीआर शासन द्वारा 2000/रु/ प्रति माह संवासी की दर से व्यय किया जाता विद्यालयों में लाभान्वित छात्रों की वर्ष वार संख्या निम्न प्रकार है:-

विद्यालयों की संख्या

आवासीय/अनवासीय

स्वीकृत क्षमता

2015-2016

2016-2017

2017-2018 (लक्ष्य)

02

आवासीय

100

51

40

100

 

अनावासीय

0

0

0

0

 

योग

100

51

40

100

 

4. प्रयास (शारीरिक रूप से अक्षम बालकों का लिए राजकीय विदयालय) लखनऊ, प्रतापगढ़

शारीरिक रूप से अक्षम बालकों के लिए प्रतापगढ़ तथा लखनऊ मी एक-एक विद्यालय संचालित है। प्रत्येक विधायली की छात्र क्षमटा 50-50 बालकों की है। इन विद्यालयों में हाईस्कूल स्तर की निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है। इन विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों जिनके अभिभावकों की मासिक आय रु. 1000/- तक होती है उनको आवासीय सुविधा के साथ भरण पोषण हेतु रु. 2000/प्रतिमाह प्रति छात्र दिया जाता है। इन विद्यालयों में लाभविन्त छात्रों का वर्ष वार विवरण निम्न प्रकार है-

विद्यालयों की संख्या

आवासीय/अनवासीय

स्वीकृत क्षमता

2015-2016

2016-2017

2017-2018 (लक्ष्य)

02

आवासीय

100

51

40

100

 

अनावासीय

0

0

0

0

 

योग

100

51

40

100

 

5. उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले दृष्टिबाघित छात्र/छात्राओं हेतु छात्रावासों का संचालन लखनऊ गोरखपुर, इलाहाबाद एंव मेरठ

दृष्टिबाघित छात्र/छात्राओं द्वारा अपने-अपने क्षेटीआर से इंटेर्मीडिएट की शिक्षा ग्रहण करने के उपरांत उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, के दृष्टिकोण से उन्हें उच्च शिक्षा ग्रहण करने के सामी आवासीय सुविधा उपलब्ध करने हेतु लखनऊ/गोरखपुर में छात्र/छात्राओं हेतु एक-एक, इलाहाबाद/मेरठ में छात्रों हेतु के-एक कुल छः  छात्रावासों की स्थापना की गई है। प्रत्येक छात्रावास की स्वीकृत क्षमटा 200-200 है। उक्त छात्रावासों के संचालन हेतु नियमवाली का प्रख्यापन शासन द्वारा किया जा चुका है

विभिन्न श्रेणी के दिव्यांगों के लिए उक्त 16 विद्यालयों एंव उनके छात्रावासों के संचालन के लिए वित्तीय वर्ष 2016-17 में कुल रु 2024.73 लाख के प्राविधान के सापेक्ष कुल रु 1581.56 लाख का व्यय किया गया है। वित्तीय वर्ष  2017-18 में 2091.43 लाख का प्रविधान है।

6. कौशल विकास केंद्र (दृष्टिबाघितों के लिए राजकीय कर्मशाला) लखनऊ गोरखपुर तथा बोंदा –

दृष्टिबाघित बेरोजगार व्यक्तियों को कार्य उपलब्ध कराने एंव विभिन्न व्यवसायों में प्रशिक्षण प्रदान करने की दृष्टि से लखनऊ, गोरखपुर तथा बोंदा में एक-एक कर्मशाला संचालित है। लखनऊ, गोरखपुर कर्मशाला में स्वीकृत आवासीय संवासी क्षमटा 50-50 अनवासीय संवासी क्षमता 50-50 है। बोंदा में आवासीय संवासी स्वीकृत क्षमता 50 तथा अनवासीय क्षमता 25 है। ईन कर्मशालाओं में दृष्टिबाघित व्यक्तियों क वर्क ऑर्डर के आधार पर कुर्सी बुनाई आदि का कारी अन्य कार्यालयों में उपलब्ध कराया जाता है जिसके लिए उन्हें पारिश्रमिक दिया जाता है। इसके साथ  ही डिजाइनर मोमबत्तियों, कंप्यूटर आदि का भी प्रशिक्षण दिया जाता है। ईन कर्मशालाओं में स्वीकृत क्षमता के सापेक्ष पूर्ति वर्षवार विवरण निमन्वत है_

विद्यालयों की संख्या

आवासीय/अनवासीय

स्वीकृत क्षमता

2015-2016

2016-2017

2017-2018 (लक्ष्य)

03

आवासीय

150

20

15

150

 

अनावासीय

125

01

0

125

 

योग

275

21

15

275

 

7. कौशल विकास केंद्र (शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों के लिए राजकीय प्रशिक्षण केंद्र ) वाराणसी, इलाहाबाद, उन्नाव -

शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों/दिव्यांसन को प्रशिक्षण दिये जने के उद्देश्य से संचालित कर्मशाला मिर्जापुर से स्थानांतरित होकर जनपद वाराणसी में संचालित है। इस कर्मशाला में आवासीय संवासियों की क्षमता 50 तथा अनवासीय संवासियों की क्षमता 40 (कुल 100 है) इसी प्रकार जनपद इलाहाबाद एंव उन्नाव में संचालित कौशल विकास केन्द्रों को लखनऊ स्थित मोहान रोड पर विभागीय भनवों में स्थानांतरित किया गया है। इन संवासियों को आवासीय सुविधा के साथ-साथ रु 2000/- प्रतिमाध सनवासी की दर से धनराशि भरण पोषण हेतु प्रदान की जाती है। इस कर्मशाला में दिव्यांग व्यक्तियों को कुर्सी बुनाई, सिलाई एंव मोमबती आदि बनाने का प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।

8. कौशल विकास केंद्र (मूक- बाघिरों  केआर लीर प्रशिक्षण केंद्र एंव आश्रित कर्मशाला) आगरा

जनपद आगरा में मुक  बाघिरों के लिए एक व्यवसायिक प्रशिक्षण केंद्र एंव आश्रित कर्मशाला स्थापति है। जिसमें आवासीय संवासियों की क्षमता 25 अनवासीय संवासियों की स्वीकृत क्षमता 25 (कुल 50) है। इन संवासियों को रु 2000/ प्रतिमाह प्रति सनवासी की दर से धनराशि भरण पोषण हेतु प्रदान की जाती है। ईस केंद्र में कुर्सी बुनाई, सिलाई एंव मोमबत्ती का प्रशिक्षण दिया जाता अहि। इस कर्मशालाओं में संवासियों की स्वीकृत क्षमता एंव पूर्ति का वर्षवार विवरण निम्नवत है:

विद्यालयों की संख्या

आवासीय/अनवासीय

स्वीकृत क्षमता

2015-2016

2016-2017

2017-2018 (लक्ष्य)

01

आवासीय

25

0

0

25

 

अनावासीय

25

0

0

25

 

योग

50

0

0

50

 

दिव्यांग कर्मशालाओं के संचालन पीआर वित्तीय वर्ष 2016-17 में प्रविधानित धनराशि कुल रु 215.73 लाख के सापेक्ष कुल रु 167.77 लाख का व्यव किया गया है। वित्तीय वर्ष 2017-18 मे रु 344.83 लाख का प्रविधान है।

9. बहुद्देशीय कौशल विकास केंद्र मुरादाबाद एंव गौतमबुद्धनगर

सभी श्रेणी के दिव्यांगजन की आवश्यकता को दृष्टिगत रखते हुए मुरादाबाद एंव गौतमबुद्धनगर

जनपद में एक-एक बहुद्देशीय कौशल केंद्र की स्थापना की गयी है। इन्न केन्द्रों की स्वीकृत क्षमटा 50-50 (कुल 100 हैं) जिसमें सभी श्रेणी के दिव्यांगजन को बाजार की मांग के अनुरूप अल्प अवधि के विभिन्न व्यवसायिक ट्रेडो में प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें स्वरोजगार प्रारंभ करने योग्य बनाया जाता है। उक्त उद्देश्य की पूर्ति के लिए वित्तीय वर्ष 2016-17 हेतु कुरल रु 21/76 लाख के प्रविधान के सापेक्ष कुल रु 16.82 लाख का व्यव किया गया है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में रु 21.76 लाख का प्रविधान है।

इन बहुद्देशीय कौशल विकास केन्द्रों में स्वीकृत क्षमता/पूर्ति का वर्षवार विवरण निम्नवत है:

विद्यालयों की संख्या

आवासीय/अनवासीय

स्वीकृत क्षमता

2015-2016

2016-2017

2017-2018 (लक्ष्य)

02

आवासीय

0

0

0

0

 

अनावासीय

100

93

46

100

 

योग

100

93

46

100

 

10. निराश्रित मानसिक मंदित आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केंद्र बरेली, गोरखपुर एंव मेरठ

प्रदेश के निराश्रित मानसिक मंदित आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केंद्र बरेली में महिलाओं हेतु तथा गोरखपुर एंव मेरठ में पुरुषों हेतु एक-एक आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केन्द्रों की स्थापना की गयी है। इन केन्द्रों की आवासीय क्षमता 50-50 है। इन केन्द्रों में मानसिक मंदित दिव्यांगजन को प्रवेश देकर उनको आश्रय प्रदान किए जाने के साथ-साथ व्यवसायिक प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें स्वावलंबी बनाकर समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। जिनके संचलन हेतु गत वित्तीय वर्ष 2016-17 हेतु कुल रु 90.69 लाख का प्रविधान के सापेक्ष कुल रु लाख का प्रविधान के सापेक्ष कुल रु 80.25 लाख व्यव किया गया है वित्तीय वर्ष 2017-18 में रु 85.37 लाख का प्रविधान है।

विद्यालयों की संख्या

आवासीय/अनवासीय

स्वीकृत क्षमता

2015-2016

2016-2017

2017-2018 (लक्ष्य)

03

आवासीय

150

99

109

150

 

अनावासीय

0

05

0

0

 

योग

150

104

109

150

 

11. अमरावती पुरुषोत्तम बहुद्देशीय दिव्यांग सशक्तिकरण संस्थान का संचालन

इस संस्थान में सभी श्रेणी के दिव्यांगजन हेतु जनपद वाराणसी में अमरावती पुरुषोत्तम बहुद्देशीय दिव्यांग सशक्तिकरण संस्थान संचालित है इस संस्थान में मानसिक मंदित दिव्यांगजन को आवासीय सुविधा के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के व्यवसायिक ट्रेडो में प्रशिक्षण प्रदान कर स्वांलम्बी बनाए जने का कार्य प्रदान किया जाता है। इस वित्तीय वर्ष 2016-17 हेतु कुल रु 33.71  लाख का प्रविधान के सापेक्ष कुल रु लाख का प्रविधान के सापेक्ष कुल रु 22.67  लाख व्यव किया गया है वित्तीय वर्ष 2017-18 में रु 33.71  लाख का प्रविधान है।

12. मनोविज्ञान केंद्र, गोरखपुर

गोरखपुर मण्डल में जापानी इन्सेफलाइटिन से प्रभावित व्यक्तियों के पुनर्वसन हेतु जनपद गोरखपुर के बी॰ आर॰ डी॰ मेडिकल कॉलेज के आरोग्य भवन में मनोविज्ञान केंद्र संचालित है। इस मनोविकास केंद्र में जापानी इन्सेफलाइटिन से ग्रसित दिव्यांगजन को आई ॰क्यू॰ असेस्मेंट, आक्युपेशनलथिरेपी यूनिट, फिजियोथेरेपी यूनिट, आडियोलाजी यूनिट, व्यावसायिक प्रशिक्षण यूनिट, काउंसिलिंग एंव सोशल एजुकेशनल यूनिट के माध्यम से पुनर्वास सेवाएँ एंव सुविधाएं प्रदान की जा रही है। वित्तीय वर्ष 2016-17 हेतु कुल रु॰  18.73 लाख केआर प्रविधान के सापेक्ष कुल रु॰ 15.08 लाख का व्यय किया गया है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में रु 18.73 लाख का प्रविधान है।

13. बचपन डे केयर की स्थापना एंव संचालन

सर्व शिक्षा अभियान से प्राप्त कराई  गई धनराशि से जनपद लखनऊ, इलाहाबाद, वाराणसी (प्रत्येक 60 बचोन की क्षमटा) आगरा सहारनपुर, झांसी, बरेली, गौतमबुद्धनगर (प्रत्येक 30 बच्चों हेतु)में बचपन डे केयर सेंटर संचालित किए गए थे। वर्ष 2008-09 तक केन्द्रों का संचालन सर्व शिक्षा आभियान के अंतर्गत किया गया था, तदोउपरांत वर्ष 2009-10 से दियांगजन सहशक्तिकरण विभाग द्वारा उक्त योजना को विभागीय बजट से संचालित किए जाने का निर्णय लिया गया। बचपन डे केयर सेंटर में मानदेय पर समन्व्यक  तथा विशेष अध्यापकों की व्यवस्था है तथा इसके अतिरिक्त प्रतेयक सेंटर पर  1-1 फिजियोथिरेपिस्ट, साइकोकाउन्सलर स्पीच ट्रेनर/ विशेषज्ञों की सेवाएँ प्रति विजिट के आहार पर तथा अटेंडेंट, आया, सफाई कर्मी, चौकीदार की सेवाएँ मानदेय के आधार पर ली जा रही है इन सेंटर्स में 03 से 07 वर्ष तक के दिव्यांग बच्चों को शिक्षण/प्रशिक्षण के साथ-साथ आवागमन की निःशुल्क सुविधा उपलब्ध करते हुए सामान्य विद्यालयों में शिक्षण प्राप्त करने हेतु प्रशिक्षित किया जाता है। नवीन बचपन नर्सरी केन्द्रों की स्थापना हेतु रु॰  200.00 लाख के प्रविधान के सापेक्ष प्रदेश के 10 मण्डल मुख्यालय के जनपदों यतह अलीगढ़, चित्रकूट, मुरादाबाद, मिर्जापुर, बस्ती, आजमगढ़, कानपुर एनजीआर फैजाबाद, गोंडा तथा गोरखपुर में बचपन डे केयर सेंटर खोले जने कार्यवाही की जा रही है। स्थापित बचपन डे केयर सेंटर्स के स्ंचप्न हेतु वित्तीय वीआरएसएच 2016-17 में कुल रु. 310.00 लाख का प्रविधान के सापेक्ष कुल रु, 221.41 लाख का व्यय किया गया है वित्तीय वर्ष 2017 -18 में रु.  310.00 लाख का प्रविधान है।

14. समेकित विद्यालयों की स्थापना

वित्तीय वर्ष 2016-17 समेकित विद्यालयों के निर्माण हेतु कुल रु.4400,00 लाख का प्रविधान सापेक्ष कुल रु, 4400.00 लाख का व्यय किया गया है। वित्तीय वर्ष 2017-18 मे 1840.00  लाख का प्रविधान है।

15. डॉ, शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वद्यालय (लखनऊ)

देश मे प्रथम बार विभिन्न श्रेणी के दिव्यांग विध्यार्थियों  को बाधारहित वातावरण में समेकित शिक्षा के अंतर्गत गुणवत्तापरक शिक्षा प्रदान किए जाने के उदेश्य से डॉ शकुंलता मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय,लखनऊ की स्थापना की जगई है। वर्तमान में विशेष शिक्षा संकाय में दृष्टिबाधाधितार्थ, श्रवणबाधितार्थ एंव मानसिक मंदिततार्थ बी एड एंव डी एड विशेष शिक्षा पाठ्यक्रमों के संचालन के साथ-साथ बी ए एम ए , बी काम , एम काम, एम एस डब्ल्यू, एम बी ए  तथा विधि  संकाय के अंतर्गत बी काम, एल एल बी पाठ्यक्रम संचालित किया जा रहे है। विश्वविद्यालय में कुल 09 संकाय के अंतर्गत 29 विभागों के बनने का प्रविधान है जिसमें वर्तमान में 21 विभाग क्रियाशील है। विश्वविद्यालय में प्रत्येक पाठ्यक्रम में विबभिन्न श्रेणी के दिव्यांग विद्यार्थियों के लेई 50% सीट आरक्षित है जिसमें पुनः 50% अर्थात 25 % सीटें केवल दृष्टिहीन विद्यार्थियों के लिए आरक्षित है। वित्तीय वर्ष 2016-17 हेतु वेतन एंव नया आकस्मिक ,मदों के अंतर्गत  रु 3700.00 लाख तथा पूंजीगत निर्माण हेतु रु 1364.11 लाख के प्रविधान के सापेस्ख क्रमशः रु 3700.00 लाख तथा रु 1364.11 लाख का व्यय किया ज्ञ है। वित्तीय वर्ष 2017-18 मे वेतन एंव अनय आकस्मिक मदों के अंतर्गत रु 4176.58 लाख तथा पूंजीगत निर्माण हेतु 1030.52 लाख का प्रविधान है। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालयो में विशिष्ट स्टेडियम के निर्माण हेतु रु। 2000.00 लाख तथा कृत्रिम अंग एंव पुनर्वास केंद्र की स्थापना हेतु  र 914.84  लाख का प्रविधान किया गया है।

16. विभिन्न श्रेणी के निराश्रित दिव्यांग व्यक्तियों हेतु भरण पोषण अनुदान (दिवयांग पेंशन)

प्रदेश में दृष्टिबाधित मूक बधिर, मानसिक तथा शारीरिक रूप से दिव्यांग व्यक्तियों, जिनका जीवनयापन के लिए  -- का न कोई साधन है और न ही वे किसी प्रकार के ऐसा परिश्रम कर सकते  है, के भरण-पोषण हेतु दिब्यांग भरण-पोषण अनुदान योजना के अंतर्गत शासन के पत्रांक 914/65-2017-21- 96 दिनाक 06 जून 2017 द्वारा पेंशन वृद्धि रु 300/ प्रति माह व्यक्ति से बढ़ाकर रु 500/ प्रति माह की दर से अनुदान दिया जा रहा है।

वित्तीय वर्ष 2016017 सामान्य पक्ष के दिव्यांगजन हेतु कुल रु 31251.26 लाख तथा एस सी पीआईआई पक्ष में रु 900.00 लाख एंव टी एस पी हेतु रु 2.00 लाख के प्रविधान के सापेक्ष क्रमशः रु 30938.37 लाख एंव एस सी। पी। हेतु रु 899.99 लाख एंव टी एस पी पक्ष में रु 1.91 लाख का व्यय किया गया है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में सामान्य पक्ष के लाभार्थियों हेतु रु 55000.00 लाख एससी पी रु 900.00 लाख व टी एस पी में रु 2.00 लाख का प्रविधान है।

17. शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों को कृत्रिम अंग / सहायक उपकरण क्रय हेतु अनुदान योजना

शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों को अधिकतम रु 8000/- तक अनुदान कृत्रिम अंग/ सहायक उपकरण हेतु दिया जाता है। वित्तीय वर्ष 206-17 हेतु सामान्य पक्ष के दिव्यांगजनों हेतु रु 1250.00 लाख व एस।सी।पी। में रु 240.00 लाख का प्रविधान के सापेक्ष क्रमशः रु 1179.65 लाख तथा रु 233.50 लाख का व्यय किया गया है। वित्तीय वर्ष 2017018 में सामान्य पक्ष के लाभार्थियों हेतु रु 3000.00 लाख व एस सी सी में रु 24.00 लाख का प्रविधान  है।

18. दिव्यांग व्यक्तियों से शादी करने पीआर प्रोत्साहन पुरस्कार योजना

इस योजना के अंतर्गत दम्पतियों में युवती के दिव्यांग होने की दशा में रु 20000/ तथा युवक व युवती दोनों के दिव्यांग होने की दशा में रु 20.000/- तथा दंपति में युवक के दिव्यांग होने की दशा में रु 15,000/- की धनराशि प्रोत्साहन स्वरूप प्रदान की जाती है। शासन के पत्र संख्या 702/65-202017-03/96 दिनांक 08 जून, 2017 द्वारा दंपति में पति पत्नी दोनों  होने पीआर देय पुरस्कार की धनराशि में वृद्धि कर रु 35000/- कर दी गयी है।

वित्तीय वर्ष 2016-17 में रु 220.00 लाख का प्रविधान के सापेक्ष रु 215.26 लाख का व्यय किया गया है। वित्तीय वर्ष 2017-18 रु 264.00 लाख का प्रविधान है।

19. दिव्यांगजन को निःशुल्क यात्रा सुविधा प्रदान करने हेतु उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम को प्रतिपूर्ति

राज्य सरकार द्वारा ईस योजना की नियमावली के अनुसार पात्र दिव्यांगजन एंव उसके सहायक को निःशुल्क यात्रा सुविधा प्रदान कीजाती है। वित्तीय वर्ष 2015-16 में उ। प्र स परि नि को प्रतिपूर्ति हेतु में कुल रु 1200.00 लाख तथा उ। प्र स परि नि को लंबित अवशेष धनराशि की प्रतिपूर्ति हेतु कुल रु 3766.77 लाख के प्रविधान सापेक्ष माह मार्च, 2017 तक क्षतिपूर्ति हेतु रु 1200.00 लाख तथा उ। प्र स परि नि को लंबित अवशेष धनराशि की प्रतिपूर्ति हेतु कुल रु 3766.77 लाख व्यव किया ज्ञ है। वित्तीय वर्ष 2017-18 मे लंबित अवशेष धनराशि की प्रतिपूर्ति हेतु कुल रु 2000.00 लाख उ। प्र स परि नि को प्रतिपूर्ति हेतु रु 1200.00 लाख का प्रविधान है।

20. दक्ष दिव्यांग व्यक्तियों व उनके सेवायजकों को राज्य स्तरीय पुरस्कार

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न श्रेणी के दिव्यांग कर्मचारियों एवं उनके सेवायोजकों को राज्य स्तरीय पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं। वित्तीय वर्ष 2016017 हेतु पक्ष में रु 4.50 लाख प्रविधान के सापेक्ष माह मार्च, 2017 तक रु 4.23 लाख का व्यय किया गया है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में 13.00 लाख का प्रविधान हिय।

21. स्वैछिक संगठनों/संस्थानों को सहायता

दिव्यांग सशक्तिकरण के कार्य में लगी स्वैछिक संगठनों/संस्थानों को संगठनों को दिव्यांगत का कारण, बचाव, उपचार, पुनर्वास एवं दिव्यांगजन विकास विभाग की योजनाओं तथा अधिनियम के प्रविधानों का प्रचार-प्रसार करने हेतु राज्य सरकार द्वारा अनुदान स्वीकृत किया जात है। वीटिय वर्ष 2016 में रु 30.000 के लाख प्रविधान के सापकेश रु 8.95 लाख का व्यय किया ज्ञ है। वित्तीय वर्ष 2071-18 में रु 3000.00 लाख प्रविधान हाई।

22. मानसिक मंदित एवं मानसिक रूप से रुग्ण निराश्रित दिव्यांग जन के लिए आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केंद्र संचालित करने हेतु सहायता

मानसिक मंदित एवं मानसिक रूप से रुग्ण निराश्रित दिव्यांग जन के लिए आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केंद्र संचालित करने हेतु वित्तीय वर्ष 2016-18 500.00 लाख का प्रविधान है।

23. निर्धन एवं असहाय दिव्यांग व्यक्तियों की दिवयांगता निवारण हेतु शल्य चिकित्सा के लिए अनुदान

उक्त योजना की नियमवावली में निहित शर्तों एवं प्रतिबंधों के अधीन ऐसे दिव्यांग व्यक्ति जिनकी वार्षिक आय सीमा रु 60000/ प्रति वर्ष ही, की शल्य चिकित्सा हेतु संबन्धित राजकीय चिकित्सालय को उनके द्वारा उपलब्ध कराये गए अनुमानित शल्य चिकित्सा व्यय के आधार पर एक वर्ष  में आधिकतम रु 1000/- प्रति व्यक्ति की सीमा तक चिकित्सा व्यय की प्रतिपूर्ति की व्यवस्था की गयी है वित्तीय वर्ष 2016-17 हेतु रु 20.00 लाख के प्रविधान के सापेक्ष कुल रु 14.08 लाख का व्यय किया गया है\ वित्तीय वर्ष 2017-18 में रु 620.00 लाख का प्रविधान है।

24. दृष्टिबाधितार्थ अध्यापकों हेतु प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना

राजकीय दृष्टिबाधित इंटर कॉलेज, मोहान रोड, लखनऊ के परिसर में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित कर राजकीय दृष्टिबधितार्थ संस्थान, देहरादून के समन्वय से दृष्टिबाधितार्थ आध्यापन  डिप्लोमा प्रदान किए जाने हेतु प्रशिक्षण केंद्र आने वाले व्यय को वहन करने के लिए वित्तीय वर्ष 2017-18 रु 2.00 लाख का प्रविधान है।

25. ब्रेल प्रेस का संचालन

प्रदेश में दृष्टिबाधित छात्र/छात्राओं के पठन-पाठन एहतू पुस्तकों को प्रकाशित करने हेतु ब्रेल निशांतगंज, लखनऊ में स्थापित की गयी है। इस ब्रेल प्रेस में विभाग द्वारा संचालित दृष्टिबाधित विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के पठन पाठन हेतु संबन्धित विषयों की पुस्तकों को ब्रेल लिपि में प्रकाशित कराया जा रहा है। ब्रेल प्रेस के संचालन हेतु वित्तीय वर्ष 2016-17 में रु 19.87 लाख प्रविधान के सापेक्ष माह मार्च, 2017 तक ऋ 9.64 लाख का व्यय किया गया है। वित्तीय वर्ष 2017-18 रु 20.76 लाख का प्रविधान है।

26. कुष्ठवस्था पेंशन योजना

दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा दिव्यांगजन हेतु संचालित दिव्यांग भरण पोषण अनुदान योजना के अंतर्गत कुष्ठ रोग के कारण दिव्यांगजन को भी पेंशन दिये जाने का निर्माण शासन द्वारा लिया ज्ञ है। कुष्ठ रोग के कारण दिव्यांग हुए ऐसे सभी दिव्यांगजन पात्र होंगे, जो उत्तर प्रदेध के मूल निवासी हों तथा बी पी एल सीमा के अंतगर्त आते हों एवं शासन द्वारा संचालित अन्य कोई पेंशन न प्रपट कर रहे हो को प्रदेश से संबन्धित जनपद के मुखी चिकित्सा अधिकारी द्वारा जारी दिव्यांगत प्रमाण पत्र (चाहते दिवयांगता का प्रतिशत कुछ भी हो) मान्य होगा को रु 2500/ प्रति माह की दर से अनुदान अनुमान्य होगा। इस योजना की नियमावली प्रख्याति कर दी गई है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में रु 1800.00 लाख का प्रविधान है।

27. डिस्लेक्सिया व अंटेशन डाइफिसिट एंड हाइपर एक्टिविटी सिंड्रोम से प्रभावित बच्चों की पहचान हेतु शिक्षकों को प्रशिक्षण

डिस्लेक्सिया व अंटेशन डाइफिसिट एंड हाइपर एक्टिविटी सिंड्रोम जैसी छिपी हुई दिवयांगता से प्रभावित बच्चों की पहचान हेतु अध्यापकों को प्रशिक्षित करने उनके अभिवावकों को इस परिपेक्ष्य में जागरूक करने एंव समाज में जागरूकता का सृजन कर संवेदन संवेदनशीलता उत्पन्न करने की एक नवीन एवं महत्वपूर्ण योजना विभाग द्व्वरा प्रारंभ की गयी है।

उक्त योजना अंतर्गत शिक्षकों को प्रशिक्षित दिलाए जाने हेतु वित्तीय वर्ष 2016-17 मे 20.00 लाख के बजट प्रविधान के सापेक्ष रु 19.99 लाख का व्यय किया गया है। वर्ष 2016-18  मे 20.00 लाख  का प्रविधान है।

28. दिव्यांगजन के लेई बादधारहित व्यवस्था हेतु सिपडा-1995 का कार्यान्वयन

प्रदेश के विभिन्न जन उपयोगी सार्वजनिक कार्यालय/भवनों के चरणबद्ध ढंग से दिव्यांगजन हेतु सुगम्य बनाने एंव वहों बाधरहित वातावरण सृजित कर दिव्यांगजन को आसान पहुँच हेतु सुविधा प्रदान करने की दृष्टि से सिपडा योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2017018 हेतु रु 5000.00 लाख पूंजीगत पक्ष में तथा राजस्व पक्ष में रु 10.00 लाख की धनराधी का प्रविधान किया गया  है।

29. सुगम्य भारत अभियान योजनन्तगर्त चिन्हित शासकीय एंव जनउपयोगी भवनों का एक्सेस आडिट तथा विभिन्न विभागों को दिव्यांगजन के हितार्थ बनाया जाना

सुगम्य भारत अभियान योजनन्तगर्त चिन्हित शासकीय एंव जनउपयोगी भवनों का एक्सेस आडिट तथा विभिन्न विभागों को दिव्यांगजन के हितार्थ बनाया जाने की दृष्टि से वित्तीय वर्ष 2017018 हेतु रु 6000.00 लाख पूंजीगत पक्ष में तथा राजस्व पक्ष में रु 50.00 लाख की धनराधी का प्रविधान किया गया  है।

वित्तीय वर्ष में विभाग के महत्वपूर्ण लक्ष्य

  1. दिव्यांग पेंशन योजना के अंतर्गत रु 559.02 करोड़ की प्रविधानित धनराशि से लगभग 930000 दिव्यांगजन को पेंशन दिये जाने का लक्ष्य है।
  2. कुष्ठ रोग के कार्न दिव्यांगजन को रु 18.00 करोड़ की प्रविधानित धनराशि से लागभग 6000 दिव्यांगजन को पेंशन दिये जाने का लक्ष्य है।
  3. कृत्रिम अंग/सहायक उपकरण अनुदान योजना में रु 32.40 करोड़ के प्रविधान से लगभग 52400 दिव्यांगजन को लाभान्वित किए जाने का लक्ष्य है।
  4. शादी विवाह प्रोत्साहन पृसकार देने हेतु रु 2.64 करोड़ की धनराशि से लगभग 1320 दम्पतियों को लाभवन्वित किए जाने का लक्ष्य है।
  5. प्रदेश के विभिन्न जन उपयोगी सार्वजनिक कार्यालय/ भवनों को चरणबद्ध ढंग से दिव्यांगजन हेतु सुगम्य बनाने एंव वहों बाधरहित वातावरण सृजित कर दिव्यांगजन को आसान पहुँच हेतु सुविधा प्रदान करने की दृष्टि से सिपडा योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2017018 हेतु रु 5.00 लाख पूंजीगत पक्ष में तथा राजस्व पक्ष में रु 10.00 लाख की धनराधी का प्रविधान किया गया  है।
  6. सुगम्य भारत अभियान योजनन्तगर्त चिन्हित शासकीय एंव जनउपयोगी भवनों का एक्सेस आडिट तथा विभिन्न विभागों को दिव्यांगजन के हितार्थ बनाया जाने की दृष्टि से वित्तीय वर्ष 2017018 हेतु रु 60.00 करोड़  पूंजीगत पक्ष में तथा राजस्व पक्ष में रु 50.00 लाख की धनराधी का प्रविधान किया गया  है।
  7. मानसिक मंदित मानसिक रूप से रुग्ण निराश्रित दिव्यांगजन के लिए आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केंद्र स्ंचल्ति करने हेतु स्वैछिक  संगठनो  को सहायता प्रदान किए जाने हेतु कुल 5.00 करोड़ का प्रविधान किया गया है।
  8. डिस्लेक्सिया व अंटेशन डाइफिसिट एंड हाइपर एक्टिविटी सिंड्रोम से प्रभावित बच्चों की पहचान हेतु शिक्षकों को प्रशिक्षण दिये जाने हेतु रु 20.00 लाख का प्रविधान किया गया है।
  9. सभी मण्डल मुख्यालयों पर समेकित विशेष माध्यमिक विद्यालयों की स्थापना किए जाने के उद्देश्य से समेकित विद्यालयों की स्थापना किए जाने हेतु कुल रु 18.40 करोड़ का प्रविधानित है।
  10. जनपद प्रतापगढ़ में संचालित प्रयास राजकीय विद्यालयों ( शारीरिक रूप से अक्षम बालकों का ) के भवन निर्माण हेतु रु 200 लाख का प्रविधान है।
  11. जनपद बाराबंकी में मानसिक रूप से चुनौतीग्रस्त बालिकाओं हेतु ममता राजकीय विद्यालयों के संचालन हेतु रु 53.60 रु 200 लाख का प्रविधान है।
  12. संकेत मूकबधिर बालक/बालिकाओं के लिए जनपद सोनभद्र, कुशीनगर, सहारनपुर में आवासीय राजकीय विद्यालयों के भवन निर्माण हेतु कुल रु 1200.00 लाख का प्रविधान है।
  13. स्पर्श राजकीय दृष्टिबाधित बालिका इंटर कॉलेज की स्थापना हेतु रु 400.00 लाख का प्रविधान है।
  14. डॉ शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय लखनऊ में विशिष्ट स्टेडियम के निर्माण हेतु रु 20000.00 लाख का प्रविधान है।
  15. डॉ शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय लखनऊ में कृत्रिम अंग एंव पुनर्वास केंद्र की स्थापना हेतु रु 974.84 लाख का प्रविधान है।

ई-गवर्नेस की प्रगति

दिव्यांगजन सहशक्तिकरण विभाग में ई गवर्नेस की ओर विशेष कार्यवाही की जा रही है। दिव्यांगजन सहशक्तिकरण विभाग उपलब्ध कम्पुटरों का उपयोग दिव्यांगजन, सहशक्तिकरण अधिकारियों को बजट आंवटन, बी एम=8 का संकलन एंव बी एम-13 तैयार किए जाने, बजट प्रस्ताव, बजट नियंत्रण, वार्षिक योजना एंव योजनाओं की प्रगति का संकलन कर अनुश्रवण हेतु किया जा रहा है। ई-गवर्नेस की धारणा को विकसित करने हेतु मुख्यालय स्तर के अधिकारियों एंव कर्मचारियों को कम्पुटर प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

दिव्यांगजन सहशक्तिकरण अनुभाग-2 के शासनादेश संख्या-85/65-2-2011-95 (विविध)/ 2-5। दिनांक-31 मई, 2-11 द्वारा दिव्यांगजन सहशक्तिकरण विभाग द्वारा संचालित योजनाओं 1- दिव्यांग व्यक्ति द्वारा रिन हेतु आवेदन-2 दिव्यांग व्यक्ति के शादी प्रोत्साहन पुरस्कार के लिए आवेदन-3 दिव्यांग व्यक्ति के कृत्रिम अंग/उपकरण क्रय हेतु सहायता के लेई आवेदन संबंधी सेवाओं को इल्क्ट्रोनिक  डिलिवरी सिस्टम द्वारा पात्र दिव्यांगजनों को उपलब्ध कराये जाने का भी निर्णय लिया गया है।  जिसके लिए कामन सर्विस सेंटर/लोकवाणी केन्द्रों द्वारा सेवा हेतु निर्धारित प्रपत्र मे आवेदक द्वारा दी गयी है सूचनाओं को ई- फार्म्स एप्लिकेशन के माध्यम से इलेक्ट्रोनिक विधि से ई-फार्म्स सॉफ्टवेर का प्रायोग करते हुए संबन्धित सक्षम प्राधिकारी को प्रेषित किया जाएगा तथा निर्धारित समय सीमा केय अंतर्गत सक्षम अधिकारी द्वारा जाँचोउपरांत आवेदन पत्र को स्वीकृत/अस्वीकृत किया जाएगा, जिसकी जानकारी आवेदक को किसी भी सेंटर पर हो सकेगी । इस प्रकार योजनाओं का लाभ पात्र दिव्यांगजनों को ई- गवर्नेस के माध्यम से बिना विलंब के सुविधापूर्वक प्राप्त हो सकेगा।

वर्ष 2017-18 में प्रविधानित धनराशि का विवरण

क्रम. सं.

विवरण

धनराशि 0 (लाख रु) में

1

शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों को कृत्रिम अंग।/श्रवण सहायक यंत्र आदि खरीदने के लिए सहायता

 

3000.00

2

नेत्रहीन मूकबधिर तथा शारीरिक रूप से दिव्यांगों को उनके भरण पोषण हेतु अनुदान

 

55000.00

3

मानसिक मधीत एंव मानसिक रूप से रुग्ण निराश्रित दिव्यांगजन के लिए आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केंद्र संचालित करने हेतु स्वै—संस्थाओं को सहायता

 

500.00

4

डिस्लेक्सिया व अटेन्शन डाइफिसिट एंड हाईपर एक्टिविटी सिंड्रोम से प्रभावित बच्चों की पहचान हेतु शिक्षकों को प्रशिक्षण

 

20.00

5

मुख्यालय/मंडलीय/जिला कार्यालयों का अधिष्ठान

 

1376.65

6

विभिन्न श्रेणी के दिव्यंगों के लिए राजकीय  विद्यालयों/छात्रावासों का संचालन

 

2091.43

7

विभिन्न श्रेणी के दिव्यांगों के लिए आश्रित कर्मशाला एंव प्रशिक्षण केंद्र

 

344.83

8

मानसिक मंदित केंद्र सह आश्रय गृहों का संचालन

 

85.37

9

दिव्यांगों को निःशुल्क यात्रा सुविधा प्रदान करने हेतु उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम को क्षतिपूर्ति

 

 

3200.00

10.

दक्ष दिव्यांग कर्मचारियों को एंव उनके सेवायोजकों को राज्य  स्तरीय पुरस्कार

 

13.00

11.

विभिन्न श्रेणी के दिव्यांगों के कल्याण हेतु स्वाइ—संगठन एंव संस्थानों को सहायता

 

30.00

12.

शारीरिक रूप से सक्षम व्यक्तियों द्वारा दिव्यांग से शादी करने पर प्रोत्साहन पुरस्कार

 

264.00

13.

दृष्टिबाधितार्थ अध्यापकों हेतु प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना

 

2.00

14.

कौशल विकास केन्द्रों की स्थापना

 

21.76

15.

अमरावती पुरषोत्तम बहूदेहशीय दिव्यांग संस्थान वाराणसी

 

33l71

16.

दिव्यांगजन हेतु गोरखपुर में मनोविकास केंद्र की स्थापना

 

18.73

17.

असहाय दिव्यांगजन की बीमारी के इलाजा हेतु अनुदान

 

620.00

18.

बचपन नर्सरी केंद्र की स्थापना

 

310.00

19.

दुकान निर्माण (अनुदान)

 

24.10

20.

कार्यालय आयुक्त दिव्यांगजन

 

66.56

21.

ब्रेल प्रेस का संचालन

 

20.76

22.

डॉ शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय लखनऊ

 

4176.58

23.

कुष्ठवस्था दिव्यांग भरण पोषण अनुदान

 

1800.00

24.

मानसिक रूप से चुनौतीग्रस्त बालिकाओं के लिए राजकीय विद्यालय ममता का संचालन

 

53.60

25.

विशेष विद्यालयों में विकलांग विद्यार्थियों को गुणवत्तापार्क विशेष शिक्षा

 

30.00

26.

सिपडा योजनंतगर्त  सार्वजिक/विभागीय भवनों में दिव्यांग जन  हेतु बाधरहित वातावरण तथा विभागीय वेबसाइटों की दिव्यांगजन के हितार्थ बनाया जाना

 

10.00

27.

सुगम्य भारत अभियान योजनंतगर्त चिन्हित शासकीय एंव जन उपयोगी भवनों का एक्सेस आडिट तथा  विभिन्न विभागों की वेबसाइटों को दिवयांगजन के हितार्थ बनाया जाना

 

50.00

28.

दुकान  निमरण  (ऋण पक्ष)

 

72.30

29.

योग

 

73235.38

 

 

वर्ष 2017-18 में प्रविधानित धनराशि का विवरण

क्रम. सं.

विवरण

धनराशि (लाख रु में)

1

दिवयांगजन के लिए बधाहरित व्यवस्था हेतु सिपडा 1995 का कार्यान्वयन

 

500.00

2

राजकीय कौशल विकास केंद्र आग्रा का भवन निर्माण

 

130.00

3

सुग्मय भारत अभियान योजनन्तगर्त सरकारी कार्यालयों एव्न जन उपयोगी भवनों को चिन्हित कर बाधरहित बनाया जाना

 

6000.00

4

समेकित विद्यालयों का भवन निर्माण

 

1840.00

5

संकेत राजकीय मुक बाघिर विद्यालय गोरखपुर में छात्रावास भवन व आवासीय भवनों का निर्माण

 

158.72

6

संकेत राजकीय मुक श्रवणबाधित बालिका इंटर कॉलेज  गोरखपुर भवनों का निर्माण

 

298.00

7

प्रयास राजकीय अक्षम बालकों का विद्यालय लखनऊ का उच्चीकारण

 

196.73

8

स्पर्श राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की स्थापना

 

400.0

9

संकेत मुकबाघिर  विद्यालय लखनऊ का उच्चीकारण

 

97.89

10.

डॉ शकुंतला म्श्र राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय लखनऊ

 

1030.52

11.

डॉ शकुंतला म्श्र राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय लखनऊ  में स्टेडियम का निर्माण

 

2000.00

12.

डॉ शकुंतला म्श्र राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय लखनऊ में कृत्रिम अंग एंव पुनर्वास केंद्र की स्थापना प्रयास शारीरिक रूप से अक्षम बालकों का राजकीय विद्यालय प्रतापगढ़ का भवन निर्माण

 

974.84

13.

जनपद सोनभद्र में संकेत मूकबधिर बालकों के लिए राजकीय इंटर कॉलेज

 

200.00

14.

जनपद कुशीनगर  में संकेत मूकबधिर बालकों के लिए राजकीय इंटर कॉलेज

 

400.00

15.

संकेत राजकीय मुकबधिर विद्यालय सहारनपुर की स्थापना

 

400.00

 

पूंजीगत पक्ष का योग

 

15026.70

 

अनुदान संख्या-76 के (राजस्व एंव पूंजीगत पक्ष) का कुल योग

 

88262.08

 

 

 

 

अनुदान संख्या-81 (टी एस पी)

 

धनराशि )लाख रु में)

1

नेत्रहीन मूकबधिर तथा शारीरिक रूप से दिव्यांगों  को उनके भरण पोषण हेतु अनुदान (जिला योजना)

 

2.00

 

योग

2.00

 

 

 

 

अनुदान संख्या-83  (टी एस पी)

 

धनराशि )लाख रु में)

1

नेत्रहीन मूकबधिर तथा शारीरिक रूप से दिव्यांगों  को उनके भरण पोषण हेतु अनुदान (जिला योजना)

 

900.00

2

शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों को कृत्रिम अंग/श्रवण सहायक यंत्र आदि खरीदने के लिए सहाता ( जिला योजना)

 

240.00

 

योग

 

1140.00

 

कुल योग

 

89404.08

 

वित्तीय आवश्यकतालों का औचित्य

  • विभिन्न श्रेणी के दिव्यांगो हेतु विद्यालयों/छात्रावासों का संचालन

मुक बाघिरों की शिक्षा एंव पुनर्वासन के उद्देश्य से आगरा, बरेली, लखनऊ, फरुखाबाद तथा गोरखपुर में एक-एक बधिर विद्यालय संचालित अहि। इन विद्यालय में श्रवण यंत्र की सहायता से छात्रों को शिक्षा दिये जने के साथ-साथ व्यावसायिक प्रशिक्षण भी दिया जाता है। दृष्टिबधितों की शिक्षा के लिए लखनऊ, में बालकों एवं बालिकाओं के लेई एक-एक एंव गोरखपुर, बोंडा में बालकों के लिए  तथा सहारनपुर में बालिकाओं के लिए एक-एक विद्यालय संचालित है। प्रदेश में मानसिक रूप से अविकसित बालकों/बालिकाओं के लिए एक-एक विद्यालय क्रमशः लखनऊ तथा इलाहाबाद में संचालित है। शारीरिक रूप से अक्षम बालकों (मुक बाघिर मानसिक मंदित तथा दृष्टिबाधित को छोड़कर) के लिए प्रतापगढ़ तथा लखनऊ में एक-एक विद्यालय संचालित अहि। विद्यालय के छात्रों के भरण-पोषण का व्यय शासन द्वारा वाहन किया जाता है। उक्त के अतिरिक उच्च शिक्षा में अध्ययनरत दृष्टिबाधित विद्यार्थियों हेतु जनपद लखनऊ तथा गोरखपुर में बालक तथा बालिकाओं के लिए एक-एक एंव मेरठ तथा इलाहाबाद में बालकों के लिए एक-के छात्रावास संचालित है।

इन विद्यालयों में निर्धन दिव्यांग विद्यार्थी अध्ययन है जिन्हें विभाग की ओर से भरण पोषण तथा छात्रावास की सुविधा निःशुल्क प्रदान की जाती है। इसी प्रकार उच्च शिक्षा में अध्ययन दृष्टिबधित विद्यार्थियों के छात्रावास में निर्धन विद्यार्थी ही प्रवेश पाते हैं, जिनमें छात्रावास शुल्क के के मात्र रु 50 प्रतिमाह प्राप्त किया जाता है, परंतु अन्य सुवधाएँ यथा  फर्नीचर कुर्सी मेज सुरक्षा बिज़ली, पानी तथा भोजन  आदि निशुल्क प्रदान किया जाता है, जिसकी प्रतिपूर्ति हेतु विभिन्न श्रेणी के दिव्यांगों के लिए उक्त 16 विद्यालयों एवं  छात्रावासों के संचालन के लिए वित्तीय वर्ष 2017-18 में रु 20191.43 लाख का प्रविधान है।

  • कौशल विकास केंद्र

बेरोजगार दिव्यांग व्यक्तियों को स्वरोजगार उपलब्ध कराने एंव विभिन्न व्यवसायों में प्रशिक्षण प्रदान करने की दृष्टि से लखनऊ, गोरखपुर, बोदा वाराणसी एवं आग्रा में एक-एक आश्रित कर्मशाला संचालित है। प्रत्येक कर्मशाला में स्वीकृत क्षमता  50 है। चालू वित्तीय वर्ष में उक्त कर्मशालों में कुर्सी बुनाई, मोमबत्तियों, कंप्यूटर आदि का भाई प्रशिसखान दिया जा रहा है। इन कर्मशालाओं में निश्चित आय सीमा के दिव्यांगजन को निःशुल्क प्रशिक्षण आवास भोजन किया जाता है, जिसकी प्रतिपूर्ति स्वरूप वित्तीय वर्ष 2017-18 रु 344.83 लाख का प्रविधान है।

  • बहुद्धेशीय कौशल विकास केंद्र मुराबाबाद एंव गौतमबुद्ध नगर

पशिचमी उत्तर प्रदेश में सभी श्रेणी के दिव्यांगजन की आवश्यकता को दृष्टिगत रखते हुये मुरादाबाद एंव गौतमबुद्ध नगर जनपद में एक-एक बहुद्धेशीय कौशल विकास केंद्र की स्थापना की गयी है जिसमें  सभी श्रेणी के दिव्यांगजन को बाजार की मांग के अनुरूप अल्प अवधि के प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें स्वरोजगार प्रांरभ करने योग्य बनाया जाता है। इन केन्द्रों में दिव्यांगजन को निश्चित समयावधि का  अनवासीय प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। प्रशिक्षण के लिए आवश्यक मशीन-उपकरण, संयत्र, कच्चा माल तथा प्रशिक्षक के मानदेय एंव इन केन्द्रों के संचालन में लगे कामरिकों के मानदेय आदि की प्रतिपूर्ति हेतु वित्तीय वर्ष 2017-18 में रु 21.76 लाख का प्रविधान है।

  • बचपन डे केयर सेंटर की स्थापना एंव संचालन

03 से 07 वर्ष आयु वर्ग तक के विभिन्न दिव्यांगत से ग्रस्त बच्चों को सामान्य स्कूलों में प्रवेश योग्य तैयार किए जाने हेतु जनपद लखनऊ, इलाहाबाद, वाराणसी (प्रत्येक 60 बच्चों की क्षमता) आगरा, सहारनपुर, झाँसी, बरेली, गौतमबुद्धनगर (प्रत्येक 30 बच्चों हेतु) बचपन डे केयर सेंटर का संचालन किया जा रहा है। संचालित बचपन डे केयर सेंटर्स में विभिन्न श्रेणी के दिव्यांग बच्चों को आनावसीय औपचारिक शिक्षा प्रदान करने हेतु निःशुल्क यातायात तथा पुस्तकें उपकरण यूनिफार्म जूता के साथ-साथ उनके केन्द्रों में तैनात विशेष शिक्षकों एंव सहयोगी कार्मिकों को मानदेय दिये जाने हेतु वित्तीय वर्ष 2017-18 में समस्त मण्डल मुख्यालयों पीआर बचपन नर्सरी केंद्र स्थापित किए जाने हेतु में कु रु 310.0 लाख का बजट प्राविधान है।

  • डॉ शकुंलता मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय (लखनऊ)

देश में पहली बार विभिन्न श्रेणी के दिव्यांग विद्यार्थियों को बधारहित वातावरण में गुणवत्तापरक शिक्षा प्रदान किए जाने के उद्देश्य से डॉ शकुंलता मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय (लखनऊ) की स्थापना की गई है। वर्तमान में दृष्टिबधित, श्रवण बाधित मानसिक मंदित के क्षेटीआर में बी॰ एड॰  स्पेशल एंव एम ॰एड॰ स्पेशल के साथ स्नातक एंव परास्नातक पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय में कुल 08 संकाय एंव 28 विवहाग बनाना प्रस्तावित है। विश्वविद्यालय के प्रत्येक पाठयक्रम में विभिन्न श्रेणी के दिव्यांग विद्यार्थियों के लेई 50% सीट आरक्षित है , जिसमें से पुनः 50% अर्थात कुल 25% सीटें केवल दृष्टिहीन विद्यार्थियों के लिए आरक्षित की गई है। यह विश्वविद्यालय समस्त श्रेणी के दिव्यांग विद्यार्थियों को बाधारहित वातावरण में उनकी दिव्यांगता के अनुरूप सुलभ शिक्षा प्रदान करता है, तथा अपने आप में देश का एक अनुक्रणीय संस्थान है। विश्वविद्यालय में दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के निश्शुल्क शिक्षा के साथ-साथ निःशुल्क छात्रावास एंव भोजन आदि प्रदान किया जाता है, अन्य श्रेणी के दिव्यांग विद्यार्थियों को अभी अल्प शुल्क में अध्ययापन कराया जाता है। उक्त कार्यों में आने वाले व्यय की प्रतिपूर्ति एंव विश्वविद्यालय के शेष भवनों के निरंन आदि कार्यों हेतु वित्तीय वर्ष 2017-18 हेतु वेतन एंव अन्य आकस्मिक मदों के अंतर्गत रु॰ 4176.58 लाख तथा पूंजीगत निर्माण हेतु रु 1030.52 लाख का प्रविधान है। डॉ शकुंलता मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय (लखनऊ)  में विशिष्ट स्टेडियम के निर्माण  हेतु रु 2000.00 लाख तथा कृत्रिम अंग एंव पुनर्वास केंद्र की स्थापना हेतु रु 974.84 लाख का प्रविधान है।

  • विभिन्न श्रेणी के निराश्रित दिव्यांग व्यक्तियों हेतु भरण पोषण अनुदान (दिव्यांग पेंशन)

प्रदेश में दृष्टिबाधित, मुक बधिर , मानसिक तथा शारीरिक रूप से दिव्यांग एंव निराश्रित व्व्यक्तियों जिनके जीवन यापन के लिए स्वयं का ण तो कोई साहन है ण ही वह किसी प्रकर का ऐसा परिश्रम कर सकते हैं के भरण पोषण हेतु दिव्यांग भरण पोषण योजनन्तगर्त वर्तमान में रु 300/- प्रति माह लाभार्थियों की दर से अनुदान दिया जा रहा है। भरण-पोषण हेतु दिव्यांग भरण पोषण अनुदान योजन के अंतर्गत शासन दिनाक 9114/65-2-2017-21-96 दिनाक 06 हयन्ब 2017 द्वारा पेंशन वृद्धि रु 300 प्रति माह व्यक्ति से बढ़ाकर रु 500/ प्रति माह की दर से अनुदान दिया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में 55000.00 लाख एस॰सी॰पी॰ पक्ष हेतु  रु 900.00 लाख था टी॰ एस॰ पीआईआई॰ हेतु रु 2.00 लाख प्रविधान है।

  • शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों को कृत्रिम अंग एंव श्रवण सहायक यंत्र क्रय हेतु अनुदान योजना

शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों को कृत्रिम अंग एंव श्रवण सहायक यंत्र क्रय हेतु अधिकतम रु 800/ का अनुदान दिया जाता है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में सामान्य पक्ष में रु 3000.00 लाख एस॰सी॰पी॰ पक्ष में रु 240.00 लाख का प्रविधान है।

  • दिव्यांग व्यक्तियों से शादी करने पीआर प्रोत्साहन पुरस्कार योजना

इस योजना के अंतरगर्त दंपति में युवती के दिव्यांग अथवा युवक व युवती दोनों के दिव्यांग होने की दशा में प्रोत्साहन पुरस्कार देने की व्यवस्था है। विवाहित जोड़े में महिला के अथवा दोनों के दिव्यांग होने पर रु 20000/तथा केवल पुरुष के दिव्यांग होने पर रु 1500/ की धनराशि प्रोत्साहन स्वरूप प्रदान की जाती है। शासन के पत्र संख्या 702/65-2-3/96 दिनांक 08 जून, 2017 द्वारा दंपति में पति पत्नी दोनों के दिव्यांग होने पर देय पुरस्कार की धनराशि में वृद्धि कर रु 35000/- कर दी गई है।

उक्त की प्रतिपूर्ति हेतु वित्तीय वर्ष 2016-17 में दिव्यांग व्यक्तियों से शादी करने पर प्रोत्साहन पुरस्कार योजना हेतु रु 264.00 लाख का प्रविधान है।

  • दिव्यांगजन के पुनर्वास हेतु दुकान निर्माण/संचालन योजना

इस योजा के अटरगत दिवयांगता के पुनर्वास हेतु रु 20000/- की धनराशि दुकान निर्माण हेतु अथवा रु 10000/- की धनराशि दुकान संचालन हेतु देने की व्यवस्था है। रु 2000/- में रु 15000/- की धनराशि तथा रु 10000/- में से रु 7500/ की स्थापना 4% वार्षिक साधारण ब्याज की दर से ऋण के रूप में एंव क्रमशः रु 500/- एवं रु 2500/- अनुदान के रूप में दी जाती है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में अनुदान हेतु रु 24.10 लाख ऋण हेतु रु 72.30 लाख का प्रविधान है।

  • 10. दिव्यांगजन को निःशुल्क यात्रा सुविधा प्रदान करने हेतु उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम को क्षतिपूर्ति

राज्य सरकार द्वारा इस योजना के नियमावली के अनुसार पात्र दिव्यांगजन एंव उसके सहयाक को निःशुल्क यात्रा सुविधा प्रदान की जाती है। यह सुविधा उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम द्वारा प्रदान की जा रही है, जिंकोन विभाग की ओर से इस कार्य में हुए व्यय की प्रतिपूर्ति की जाती अहि, उक्त देयताओं की प्रतिपरुती हेतु वित्तीय वर्ष 2017-18 में गत वर्षों की लंबित देयताओं हेतु रु 2000.00 लाख तथा चालू वित्तीय वर्ष की देयताओं एहतू रु 1200.00 लाख कुल रु 3200.00 लाख का प्रविधान है।

  • दक्ष दिव्यांग व्यक्तियों व उनके सेवायोजकों को राज्य स्तरीय पुरस्कार

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्नश्रेणी के दिव्यांग कर्मचारियों एंव उनके सेवायोजकों को राज्य स्तरीय पुरस्कार वितरित किए जाते हैं। पुरस्कार सामग्री क्रय करने, नकद धनराशि प्रदान करने तथा इस हेतु कार्यक्रम आयोजित करने आदि की लिए वित्तीय वर्ष  2017-18 हेतु रु 13.00 लाख का प्रविधान है।

  • स्वैछिक  संगठनों/ संस्थानों को सहायता

दिव्यांग सशक्तिकरण के कारी में लगी स्वैछिक संगठनों/ संस्थानों को  दिवयांगता का कारण, बचाव, उपचार, पुनर्वास एंव दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की योजनाओं तथा अधिनियम के प्रविधानों का प्रचार-प्रसार करने एहतू राज्य सरकार द्वारा अनुदान स्वीकृत किया जाता है। इसके लिए विभाग द्वारा प्रख्यापीट नियमावली में उद्धृत शर्तों के अंतर्गत चयनित स्वयंसेवी संस्थाओं को अनुदान प्रदान किया जाता है, जिसके लिए वित्तीय वर्ष 2017018 हेतु रु 30.00 लाख का प्रविधान किया गया है।

स्त्रोत: सामाजिक न्याय और आधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार

2.94117647059

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