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ऋण जोखिम प्रंबध

इस लेख में ऋण जोखिम प्रंबध की जानकारी दी गई है।

परिचय

भा.रि. बैंक ने दिशानिर्देशों जारी किये किये थे कि बैकों में ऋण जोखिम प्रबंध के लिए कड़ी प्रणाली होनी चाहिए, जो व्यक्तियों, कॉर्पोरेट, बैंकों, वित्तीय संस्थाओं या संप्रभु राज्यों के साथ कार्य-व्यवहार के फलस्वरूप उत्पन्न होने वाले जोखिमों के प्रति संवेदनशील और प्रतिक्रियाशील हो। भा.रि.बैंक के दिशानिर्देशों के अनुसार, बैंकों को एक ऐसा जोखिम प्रबंध ढांचा तैयार करना है, जो उनके आकर, व्यवसाय की जटिलताओं, जोखिम दर्शन/बोध, विपणन बोध, आदि के अनुरूप हो और उनकी जरूरतों के अनुकूल हो/को पूरा करता हो।

बैंक जिन विभिन्न प्रकार क्र ऋण जोखिमों का सामना करता है, वे मूलतः एमएसएमई/क्षेत्र को प्रदत्त ऋणों के परिणामस्वरूप उत्पन्न होते हैं। एमएसएमई/क्षेत्र को प्रदत्त ऋणों से जोखिम इसलिए होता हैं, क्योंकि ये उदयन/क्षेत्र कमजोर कॉर्पोरेट ढांचे, प्रणालियों, लेखा मानकों, सूचनाओं की उपलब्धता/विश्वसनीयता के अभाव और बाहरी परिवर्तनों के प्रति अतिसंवेदनशील होते हैं और साथ कॉर्पोरेटों से उन्हें प्रदत्त ऋणों में जोखिम सांद्रता के फलस्वरूप होते हैं।

ऋण जोखिम रणनीति

ऋण संविभाग में जोखिम प्रंबध की रणनीति के अनुरूप, ऋण निति में निम्नलिखित सिद्धांत शामिल किये गए हैं:

क) कुल संविभाग के अनुपात के रूप में राज्य वित्त निगमों/राज्य औद्योगिक विकास निगमों को प्रदत्त ऋण-जोखिमों सीमा की निगरानी करना।

ख) उधार्कर्त्ताओं की अधिकतर श्रेणियों के लिए ऋण जोखिम की सीमा मापने के लिए आंतरिक श्रेणीनिर्धारण प्रणालियों का उपयोग। उधार देने की निर्णय-प्रक्रिया में आंतरिक/बाह्य श्रेणीनिर्धारण के उपयोग से अंततः समग्र ऋण गुणवत्ता में सुधार होगा और बैंक के संविभाग का जोखिम प्रंबध बेहतर होगा।

ग) अन्य उपायों के साथ-साथ, विभिन्न वर्गों के उधार्कर्त्ताओं के लिए अधिकतम ऋण-सीमा ढांचे का कार्यान्वयन कर जोखिम प्रबंध नियंत्रण करना।

घ) ऐसी प्रक्रियाओं का निर्धारण एवं कार्यान्वयन. जिनसे यह सुनिश्चित किया जा सके कि उत्पाद, लक्ष्य ग्राहक, आदि क्षेत्रों में नवोन्मेषी योजनाओं के माध्यम से वित्तीयन में वृद्धि के नए प्रयासों के फलस्वरूप बैंक के संविभाग की आस्ति गुणवत्ता में गिरावट न हो।

ङ) एक ऐसा समर्थ ढांचा संस्थापित करना, जो जोखिम का स्तर निर्धारत करने में सक्षम हो, और अंततः बैंक की आवश्यकताओं के अनुकूल, मूल्यन को आंतरिक श्रेणीनिर्धारण से जोड़ सके।

जोखिम माप

ऋणों के श्रेणीनिर्धारण की आंतरिक प्रणालियाँ

वर्तमान में, बैंक रु० 500 लाख तक के ऋण-प्रस्तावों (नयी और वर्तमान इकाइयाँ) तथा वर्तमान इकाइयों के मामले में रु० 200 लाख तक की जोखिम सीमा के रेटिंग-युक्त ऋण प्रस्तावों पर कार्रवाई के लिए ऋण मूल्यांकन एवं रेटिंग साधन (कार्ट) का उपयोग करता है।

कार्ट के दायरे से बाहर के ऋणों के सम्बन्ध में, नीचे इंगित क्षेत्र के उधारकर्ताओं के लिए जोखिम निर्धारण मॉडल (रैम) उपयोग किये जा रहे हैं:

क)  लघु एवं मध्यम उद्यम. वृहतर एसएमई

ख)  सेवा क्षेत्र उद्यम

ग)  मूलभूत संरचनागत विशेष प्रयोजन साधन-सड़क, उर्जा, दूरसंचार तथा बंदरगाह;

घ)  बैंक (सावर्जनिक/निजी क्षेत्र/विदेशी, आदि) तथा वित्तीय संस्थाएं।

ङ)  राज्य वित्त निगम, राज्य औद्योगिक विकास निगम.

च) एमएसएमई क्षेत्र से वित्तीय संबंध रखने वाली बड़ी कंपनियां/कॉर्पोरेट संस्थाएं, राज्य विद्युत बोर्ड, अन्य राज्य/केंद्र स्तर के विशिष्टता प्राप्त निगम. आदि. तथा प्राप्य वित्त योंजना के अधीन सीमाओं के लिए।

निवेश श्रेणियां

मूल्यांकन के दौरान रैम के यौगिक मापदंड में एस1 से एस8 के बीच आंतरिक जोखिम श्रेणीनिर्धारण (कार्ट में समकक्ष ग्रेड) वाले प्रस्ताव निवेश श्रेणी के अर्थात ऋण सुविधा प्रदान किये जाने के उपयुक्त समझे जाते हैं। तथापि, अधिक चयनात्मक एवं ऋण गुणवत्ता के udउद्देश्य से, कतिपय क्षेत्रों के लिए निर्द्रिष्ट न्यूनतम आंतरिक श्रेणीनिर्धारण श्रेणियाँ के साथ, उच्चतर निवेश श्रेणियाँ निर्धारित की गई है, जिन्हें संलग्नक-III  में दिया गया है। उपयुर्क्त उच्चतर निवेश श्रेणियाँ मूलभूत संरचना सम्बन्धी परियोजनाओं/संयुक्त वित्तीयन (सहायता संघ/बहु बैंकिंग व्यवस्था) वाले प्रस्तावों पर लागू नहीं होंगी। तथापि, विद्युत क्षेत्र के लिए केवल एस7 की न्यूनतम श्रेणीनिर्धारण वाली परियोजनाओं के सम्बन्ध में विचार करना जारी रहेगा।

जोखिम शमन (कम करना)

वर्तमान में प्रचलित ऋण जोखिम शमन कार्यनीति जारी रहेगी, जो प्राथमिक रूप से दो स्तरों पर प्रयुक्त की जा रही है। परियोजना-विशेष के स्तर पर (कार्यस्थल पर), संवेदनशील जोखिम कारकों को पहचानने के प्रयास किये जाते हैं और उन्हें कम करने के समुचित उपायों का पता लगाकर, जहाँ कहीं सम्भव हो, उन्हें लागू किया जाता है। जोखिम श्रेणीनिर्धारण का उपयोग वास्तविक रूप में जोखम का क्रमबद्ध स्तर निर्धारित करने में किया जाता है। संविभाग स्तर पर, बैंक जिस रणनीति का अनुपालन कर रहा है, उसके अधीन ऋण-सीमाओं का प्रबंध करना तथा विभिन्न गतिविधियों/उद्योगों/उधारकर्त्ताओं की श्रेणियों के लिए ऋण की विवेकपूर्ण उच्चतम सीमा निर्धारित करना शामिल है। बैंक अपने आंतरिक प्रयोजनों के लिए प्रतिचालन कार्यालयों के संविभागों का वार्षिक आधार पर श्रेणीनिर्धारण भी करता है। एक सुदृढ़ संविभाग का निर्माण करने के लिए, बैंक श्रेणीनिर्धारण ग्रेड-वार अधिकतम सीमा अपनाएगा, जैसा कि संलग्नक-IV  में दिया गया है।

बाह्य श्रेणीनिर्धारण

संपर्शिविक प्रतिभूति विहीन एमएसएमई –आरएफएस सीमाओं तथा गैर-बैंकिंग वित्त कम्पनियों को संसाधन सहयोग के सम्बन्ध में, भारतीय रिजर्व बैंक से मान्यताप्राप्त श्रेणी निर्धारण एजेंसियों से प्राप्त उस बाह्य श्रेणीनिर्धारण (दीर्घवधि श्रेणीनिर्धारण) पर पात्रता एवं मूल्यन के प्रयोजन से विचार किया जाता है, जो न्यूनतम निर्द्रिष्ट  बाह्य श्रेणीनिर्धारण ग्रेड के होते हैं।

मूल्यन

  1. गतिशील/परिवर्तनशील ब्याजदरों एवं प्रतिस्पर्द्धा  वाले परिदृश्य में, तथा गुणवत्तापूर्ण आस्तियाँ जोड़कर प्रत्यक्ष वित्त संविभाग का विस्तार करने की बैंक की आवश्यकता के कारण, आक्रमक मूल्यन रणनीति अनिवार्य बन गई है। आंतरिक श्रेणीनिर्धारण द्वारा नियत जोखिम के श्रेणीनिर्धारण के अनुसार, उधारकर्त्ताओं के विभिन्न वर्गों के लिए ऋणों का मूल्यन किया जाता है। बाजार में प्रतिस्पर्द्धा बने रहने के लिए, ब्याजदर/भुनाई दर का निर्धारण प्रतिस्पर्द्धा/मांग तथा ऐसे अन्य कारकों के आधार पर करने की निति जारी रहेगी। संयुक्त वित्तीयन/सहायता-संघ व्यवस्था के अंतर्गत मूलभूत संरचना सम्बन्धी परियोजनाओं एवं ऐसी अन्य परियोजनाओं के मामले में सामान्यतया अग्रणी संस्था/अन्य बैंकों द्वारा तय की गई ब्याजदरों का ही अनुसरण किया जायेगा।
  2. बहु बैंकिंग/संयुक्त वित्तीयन/सहायता-संघ व्यवस्था वाली परियोजनाओं के मामलों में, ब्याजदर पुननिर्धारण की शर्तें अन्य बैंकों/संस्थाओं की परम्पराओं के अनुरूप होंगी।

धन-शोधन-निवारण की दृष्टि से ग्राहकों का जोखिम-अनुसार वर्गीकरण

अपना ग्राहक जाने सम्बन्धी मानदंडों एवं धन-शोधन निवारक मानकों से सम्बन्धित नीतिगत दिशानिर्देशों के अनिपालन में, ग्राहकों की गतिविधि स्थान और संघटन, आदि के आधार पर उनके जोखिम वर्गीकरण की प्रक्रिया स्थापित की गई है।

आस्ति संकेन्द्रण का प्रबंध

ऋण –जोखिम की अधिकतम सीमा

ऋण विनियोजन के लिए विभिन्न वर्गों के ऋणों की सर्वोच्च सीमा/मापदंड निम्नवत निर्धारण कर, बैंक आस्ति समुच्चय का प्रबंध करता है। इन सीमाओं/मानदंडों का निर्धारण भारतीय रिजर्व बैंक के मानदंडों को ध्यान में रखकर किया गया है।

एकल/समूहगत ऋण-जोखिम सीमा

क) अत्यंत लघु एवं मध्यम उद्यमों को प्रत्यक्ष सहायता तथा  अत्यंत लघु एवं मध्यम उद्यमों के उत्पादों का विपणन करने वाले विशेषज्ञताप्राप्त संगठनों को दी जाने वाली सहायता की योजनाओं के सम्बन्ध में, एकल/समूहगत ऋण-जोखिम सीमा निम्नवत  होगी:

विवरण

सर्वोच्च सीमा

एकल उधारकर्त्ता  के लिए

सिडबी की पूंजी निधियों का 3%

स्वामित्व वाली संस्था के लिए

रु० 10 करोड़

समूहगत ऋणों के लिए

सिडबी की पूंजी निधियों का 6%

 

ख) गैर-बैकिंग वित्त कम्पनियों/निजी क्षेत्र के निगमों को सहायता के सम्बन्ध में लागू सर्वोच्च ऋण जोखिम सीमा निम्नवत होगी:

विवरण

सर्वोच्च सीमा

भा.रि.बैंक के दिशानिर्देश

एकल उधारकर्त्ता  हेतु

सिडबी की पूंजी निधियों का 15% - एएफसी

सिडबी की पूंजी निधियों का 10%- अन्य

पूंजी निधियों का 15% -

समूहगत ऋण=जोखिम सीमाओं हेतु

सिडबी की पूंजी निधियों का 40%-

पूंजी निधियों का 40%-

 

ग) एमएसएमई प्राप्य वित्त योजना, सार्वजानिक वित्तीय संस्थाओं, सार्वजानिक उपक्रमों एवं नियमों को प्रत्यक्ष संसाधन सहयोग तथा इसी प्रकार की अन्य थोक उधार (पुनर्वित्त एवं बिल पुनार्भुनाई योंजना को छोड़कर) के सम्बन्ध में लागू सर्वोच्च ऋण-जोखिम सीमा निम्नवत होगी:

यद्यपि बैंक एक पुनर्वित्त संस्था है, फिर भी विवेकपूर्ण परिपेक्ष्य से तथा भा.रि.बैंक में राज्य अनुरूप पुनर्वित्त संविभाग के लिए समुचित आंतरिक सर्वोच्च सीमाएं बनाई गई हैं। बैंक में राज्य वित्त निगमों एवं राज्य औद्योगिक विकास निगमों के लिए सर्वोच्च समग्र ऋण-जोखिम सीमाएँ नियत हैं, क्योंकि इन संस्थाओं को प्रदत्त ऋणों को इस संविभाग में अपेक्षाकृत अधिक जोखिमपूर्ण समझा जाता है। वित्तीय संस्थाओं के लिए ऋण जोखिम सीमा मापदंडों के बारे में भा.रि.बैंक की नीति को ध्यान में रखते हुए अन्य बातों के साथ-साथ, ऋण-जोखिम सीमाओं का सम्बन्ध बैंक की पूंजीगत निधियों से जोड़ा गया है।

प्रतिपक्षी/गतिविधि/उद्योग-वार ऋण-जोखिम सीमा

प्रत्यक्ष सहायता की विभिन्न योजनाओं तथा विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों के लिए आंतरिक सर्वोच्च सीमाएं निर्धारित की गई हैं, जिनका संक्षिप्त विवरण संलग्नक-V  की तालिका में दिया गया है।

प्रतिबन्ध उद्योग

कतिपय उद्योगों, जैसे-रसायन रंजक व रंजक मध्यम, औधोगिक ऑक्सीजन , आसवन उद्योग, आदि के सम्बन्ध में सावधानीपूर्वक/सतर्क दृष्टिकोण रखने के मौजूदा अनुदेश जारी रहेंगे। यदि सूची के सुपात्र उद्योगों का आंतरिक श्रेणीनिर्धारण एस7 या उससे ऊपर हो, तो उन्हें सहायता देने पर विचार किया जा सकता है। ओजोन के क्षरण/ समापनकारी पदाथों, जैसे-क्लोरोफ्लूरोककार्बन (सीएफसी), हैलोन कार्बन टेट्राक्लोराइड, मेथाइल क्लोरोफार्म, हाइड्रोब्रोमोफ्लूरोककार्बन (एचबीएफसी), हाइड्रोब्रोमोफ्लूरोककार्बन (एचबीएफसी), मेथाइल   ब्रोमाइड, ब्रोमोक्लोरोमीथेन (बीसीएम), आदि का उपभोग/उत्सर्जन करने वाले उद्योगों को कदापि सहायता नहीं दी जायगी।

समूहगत उधार सम्बन्धी नीति

बैंक केवल चुनिदा योजनाओं, जैसे एमएसएमई-प्राप्य वित्त योजना, गैर-बैंकिंग वित्त कम्पनी तथा मूल्भुत संरचना योजना के अंतर्गत ही बड़े समूहों को सहायता देने पर विचार करता है। जिन प्रतिष्ठानों के समूह/संबद्ध प्रतिष्ठान (प्रतिष्ठानों) ने बैंक और/अन्य बैंकों/वित्तीय संस्थाओं के साथ चूक की है, उनको वित्तीय सहायता की मंजूरी/मौजूदा सहायता जारी रखने के निर्णय उस विशिष्ट मामले के गुण-दोषों के आधार पर किये जाते हैं। यह परम्परा जारी रहेगी और ऐसे मामलों पर अंतिम निर्णय प्रत्यायोजित मजूरी प्राधिकारी करेंगे।

उपसंहार

गुणवत्तापूर्ण संविभाग बनाने और अपना ग्राहक-वर्ग अपने पास बनाये रखने के लिए सुदक्ष ऋण वितरण एक मूल तंत्र है। सक्षम व्यवसाय प्रस्ताव विकसित करने के लिए ऋण नीति में पर्याप्त लचीलापन दिया गया है। नीति में, नवीं उत्पादों के  अनुमोदन/अनुमति के लिए समुचित प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है। अंतः-व्यवसाय सम्बन्धी कोई भी ऐसा प्रस्ताव, जो विकासक्षम और बैंक सहायता के ल्क्ये सुयोग्य प्रतीत होता हो, केवल इस कारण से नहीं छोड़ा जाना चाहिय, कि उपयुक्त योजना/उत्पाद उपलब्ध नहीं है। आंतरिक ऋण निगरानी के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का दक्षतापूर्ण उपयोग सुनिश्चित करने के साथ-साथ, बैंक का यह भी प्रयास होगा कि ऋण वितरण की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए प्रक्रियाओं/कार्यविधियों को अधिक से अधिक सरल एवं सुसंगत बनाया जाये।  एमएसएमई ग्राहकों को बेहतर सुविधाएँ और सेवाएं देने के लिए वाणिज्य बैंकों के साथ किये गये रणनीतिक सहयोग का भी उपयोग किया जायेगा। यद्यपि, बैंक जोखिम प्रबंध उपायों को सतत परम्परा के रूप में स्थापित करने के प्रयास कर रहा है, किन्तु वह इस बात पर भी अपेक्षित बल देगा कि पूर्णतः एकीकृत जोखिम प्रंबध प्रणाली की दिशा में आमूल परिवर्तन/संक्रमण शुरू किया जाये।

 

स्रोत: भारतीय लघु, उद्योग विकास बैंक (सिडबी)

3.19402985075

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