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जी.एस.टी. का अवलोकन

इस पृष्ठ में वस्तु एवं सेवा कर (जी.एस.टी.) का अवलोकन से जुड़े प्रश्नों की जानकारी दी गयी है I

प्रस्तावना

सेंट्रल बोर्ड ऑफ एक्साइज एण्ड कस्टम्स (सी.बी.ई.सी) के अंतगर्त सर्वोच्च प्रशिक्षण संस्थान नेशनल एकेडमी ऑफ कस्टम्स, एक्साइज एण्ड नारकोटिक्स-नासेन द्वारा जी.एस.टी. पर प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्नों का संकलन बहुत ही अच्छी तरह से प्राप्त हुआ है।

जी.एस.टी. परिषद द्वारा कई नियमों के साथ सी.जी. एस.टी, एस.जी.एस.टी, आई.जी.एस.टी, यूटी.जी.एस.टी. और प्रतिपूर्ति उपकर के मसौदो को कानूनी मंजूरी दे दी गई है। संसद में केन्द्रीय विधेयक पेश किए गए है, राज्यों से संबंधित कानून वहां से संबंधित राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित किए जाएंगे । जैसा कि प्रथम संस्करण लाने के समय वादा किया गया था, संसद में पेश किए गए पूर्व विधेयकों के आधार पर नासेन द्वारा एफएक्यू का दूसरा संस्करण तैयार किया गया है। ये अधिकारियों, व्यापार और जनता के बीच जी.एस.टी. के बारे में ज्ञान और जागरूकता फैलाने में एक अहम भूमिका प्रदान करेगा।

वस्तु एवं सेवा कर (जी.एस.टी.) क्या है?

यह वस्तुओं और सेवाओं के उपभोग पर लगाया गया गंतव्य आधारित कर है। इसे पिछले चरणों में, क्षतिपूर्ति (सेटऑफ) हेतु उपलब्ध करके भुगतान के क्रेडिट प्राप्त करने के लिए उत्पादक से अन्तिम उपभोग के सभी चरणों पर लगाने के लिए प्रास्तवित किया गया है। संक्षेप में, केवल मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) पर ही कर लगाया जाएगा और कर का बोझ अंतिम उपभोक्ता द्वारा वहन किया जाएगा ।

उपभोग पर गंतव्य आधारित कर की वास्तव में क्या अवधारणा है?

उस कर-प्राधिकरण को कर की प्राप्ति, जिसके अधिकार क्षेत्र के स्थान पर उपभोग किया जाएगा और जिसे आपूर्ति स्थल भी कहा जाता है, उपर्जित  है।

किस मौजूदा कर को जी.एस.टी. में सम्मिलित करने के लिये प्रस्तावित किया गया है?

जी.एस.टी. में निम्नलिखित करों को प्रतिस्थापित किया जायेगा-

(i) आज के समय केंद्र द्वारा वर्तमान समय पर लगाए और संग्रह किए जाने वाले कर -

क. केंद्रीय उत्पाद शुल्क

ख. उत्पाद शुल्क (दवाईयां और प्रसाधन पदार्थ)

ग. अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (विशेष महत्व की वस्तुएं)

घ. अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (कपड़ा और कपड़ों की वस्तुएं)

ड. अतिरिक्त सीमा शुल्क(सामान्यतः सीवीडी से जाना जाता है)

च. अतिरिक्त विशेष सीमा शुल्क(एसएडी)

छ. सेवा कर

ज. केंद्रीय अधिभार और उपकर जहां तक वे वस्तुओं और सेवाओं से संबंधित है

(ii) उन राज्य करों को स्पष्ट करें जिन्हें जी.एस.टी. में प्रतिस्थापित किया जाएगा-

क. राज्य वैट (मूल्य वर्धित कर)

ख. केंद्रीय बिक्री कर

ग. विलास कर (लक्जरी टैक्स)

घ. प्रवेश कर (सभी रूपों में)

ड. मनोरंजन और मनोरंजक कर (सिवाय तब जब स्थानीय निकायों द्वारा करारोपण किया गया है)

च. विज्ञापनों पर कर

छ. क्रय कर

ज. लॉटरी, शर्त और जुए पर कर

झ. राज्य अधिभार और उपकर जहां तक वे वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति से संबंधितहैं

जी.एस.टी. परिषद् केंद्र और राज्यों को केंद्रीय, राज्यों और स्थानीय निकायों द्वारा करों उपकरों और अधिभारों के करारोपण के लिये सिफारिश करेगी जिन्हें जी.एस.टी. में सम्मिलित किया जा सकता है।

जी.एस.टी. के अंतर्गत उपरोक्त करों को सम्मिलित करने के लिये किन सिद्धांतों को अपनाया गया था?

विभिन्न केन्द्रीय, राज्य और स्थानीय करों का परीक्षण करने के बाद जी.एस.टी. में सम्मिलित करने की संभावना की पहचान की गई थी। पहचान करने के समय, निम्न सिद्धान्तों को ध्यान में रखा गया था –

(i) सम्मिलित किये जाने वाले करों या उपकरों को मुख्य रूप से अप्रत्यक्ष कर की प्रकृति में, या तो वस्तु की आपूर्ति या सेवाओं की आपूर्ति होनी चाहिये।

(ii) सम्मिलित किये जाने वाले करों या उपकरों को लेनदेन की श्रृंखला का हिस्सा होना चाहिये जो आयात/विनिर्माण/वस्तुओं के उत्पादन या सेवाओं के एक स्थान पर प्रारम्भ के साथ दूसरे स्थान पर वस्तुओं या सेवाओं का उपभोग पर समाप्त होता हे ।

(iii) करों या करारोपण (लेवी) सम्मिलित करने के परिणाम स्वरूप राज्य को भीतर और अंतर—राज्य स्तर में टैक्स क्रेडिट का मुक्त प्रवाह होना चाहिए। जो कर, उपकर और फीस विशेष रूप से वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति से संबंधित नहीं हैं, जी.एस.टी. के अंर्तगत सम्मिलित नहीं किये जाने चाहिए।

(iv) केंद्र और राज्यों को व्यक्तिगत रूप से राजस्व निष्पक्षता का प्रयास करने की आवश्यकता होगी ।

किन वस्तुओं को जी.एस.टी. के दायरे से बाहर रखा जाना प्रस्तावित है?

संविधान के अनुच्छेद 366 (12ए) जैसा कि 101 संशोधन अधिनियम 2016 द्वारा संशोधित हैं, वस्तुओं और सेवाओं या दोनों की आपूर्ति, मानव के उपभोग के लिए एल्कोहल की आपूर्ति को छोड़कर, पर वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) कर के रूप में परिभाषित किया गया है। इसलिए संविधान में जीएसटी की परिभाषा के माध्यम से मानव उपयोग के लिए एल्कोहल को जीएसटी से बाहर रखा है। अस्थाई रूप से, पाँच पेट्रोलियम उत्पाद अर्थात पेट्रोलियम क्रूड, मोटर स्प्रिट (पेट्रोल) हाई स्पीड डीजल, प्राकृतिक गैस और विमानन टर्बाइन ईधन को जीएसटी से बाहर रखा गया है। जीएसटी परिषद् द्वारा यह निर्णय लिया जाएगा कि यह किस दिनांक से जीएसटी में शामिल किए जायेंगे। इसके अलावा विद्युत को जीएसटी से बाहर रखा गया है।

जी.एस.टी. क्रियान्वित करने के बाद उपरोक्त वस्तुओं के करारोपण के संबंध में क्या स्थिति होगी?

उपरोक्त वस्तुओं के संबंध में मौजूदा कराधान प्रणाली (वैट और केन्द्रीय उत्पाद शुल्क) अस्तित्व में जारी रहेगी।

जी.एस.टी. व्यवस्था के अंतर्गत तम्बाकू एवं तम्बाकू उत्पादों की क्या स्थिति होगी ?

तम्बाकू एवं तम्बाकू उत्पाद जीएसटी के अधीन होगें । इसके अतिरिक्त केन्द्र इन उत्पादों पर केन्द्रीय उत्पाद शुल्क आरोपित करने हेतु सशक्त होगा।

किस प्रकार का जी.एस.टी. लागू करने का प्रस्ताव किया गया है?

यह केंद्र  और राज्यों के साथ एक साथ सामान्य कर आधार पर आरोपित एक दोहरा जी.एस.टी. होगा। वस्तुओं या सेवाओं की अंतर-राज्य आपूर्ति पर केंद्र द्वारा लगाये गये कर को केंद्रीय जी.एस. टी. (सी.जी.एस.टी.) कहा जायेगा तथा राज्यों द्वारा लगाये करों को राज्य जी.एस.टी. (एस.जी.एस.टी.) कहा जायेगा। इसी प्रकार केंद्र द्वारा प्रत्येक अंतर-राज्य वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर एकीकृत जी.एस.टी. (आई.जी.एस.टी.) लगाने तथा प्रशासित करने की व्यवस्था है।

दोहरा जी.एस.टी. क्यों आवश्यक है?

भारत एक संघीय देश है, जहां केंद्र और राज्यों को उनके उपयुक्त कानून के माध्यम से करारोपण और एकत्र करने की शक्तियां प्रदत्त की गई हैं। दोनों सरकार के स्तर पर अलग-अलग जिम्मेदारियों के निष्पादन के अनुसार संविधान में शक्तियों का विभाजन निर्धारित होती है। दोहरा जी.एस.टी. इसीलिये, वित्तीय संघवाद की संवैधानिक आवश्यकता का ध्यान में रखते हुए बनाया गया है।

कौन सा प्राधिकरण जी.एस.टी. करारोपण और उसका प्रशासन करेगा?

केंद्र, सी.जी.एस.टी. और आई.जी.एस.टी. का करारोपण और प्रशासन करेगा, जबकि संबंधित राज्य, एस.जी.एस.टी. का करारोपण और प्रशासन करेंगे।

भारत के संविधान को हाल ही में जी.एस.टी. के संदर्भ में क्यों संशोधित किया गया था?

वर्तमान में, केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय अधिकार स्पष्ट रूप से संविधान में सीमांकित किये गये हैं जिनमें संबंधित क्षेत्रों के बीच लगभग किसी तरह का ओवरलैप नही है। केंद्र के अधिकार में वस्तुओं के विनिर्माण (सिवाय मानव उपभोग के लिये एल्कोहल, अफीम, नशीले पदार्थों आदि को छोड़कर) पर कर लगाने की शक्तियां हैं, जबकि राज्यों के अधिकार में वस्तुओं की बिक्री पर कर लगाने की शक्तियां प्रदान की गई हैं। अंतर-राज्य बिक्री के मामले में केंद्र सरकार को वस्तुओं की बिक्री पर कर (केंद्रीय बिक्री कर) लगाने की शक्ति है लेकिन, कर पूरी तरह से राज्यों द्वारा एकत्र किया जाता है। जहां तक सेवाओं का प्रश्न है, केवल केंद्र  को सेवा कर लगाने के लिये सशक्त किया गया है।

जी.एस.टी. प्रस्तुत करने के लिए संविधान में आवश्यक संशोधन करने की आवश्यकता थी ताकि केंद्र और राज्यों को एक साथ कर लगाने और एकत्र करने के लिये सशक्त किया जा सके। भारत के संविधान को संविधान के (एक सी एकवां संशोधन) अधिनियम, 2016 द्वारा हाल ही में इस प्रयोजन के लिये संशोधित किया गया था। संविधान का अनुच्छेद 246ए केंद्र और राज्यों को कर लगाने और जी.एस.टी. एकत्र करने के लिए सशक्त करती है।

किस प्रकार वस्तुओं और सेवाओं के एक विशेष लेनदेन के लिए कर एक साथ केंद्रीय जी.एस.टी.(सी.जी.एस.टी.) और राज्यजी.एस.टी.(एस..जी.एस.टी.) के अंतर्गत लगाया जायेगा ?

केंद्रीय जी.एस.टी. और राज्य जी.एस.टी. को एक साथ प्रत्येक वस्तुओं और सेवाओं के लेनदेन पर लगाया जायेगा सिवाय छुट दी गयी वस्तुओं और सेवाओं और जी.एस.टी. के बाहर की वस्तुओं और उन लेनदेन लो छोड़कर जिनका मूल्य निर्धारित सीमा से नीचे है । आगे, दोनों पर  एक कीमत या मूल्य पर कर लगाया जायेगा राज्य वैट के विपरीत जिसके अंतर्गत वस्तुओं के मूल्य में सेनवैट जोड़कर वैट लगाया जाता है। जबकि सी.जी.एस.टी. के प्रयोजन के लिए देश के भीतर आपूर्तिकर्ता और आपूर्ति प्राप्तकर्ता के स्थान का कोई अर्थ नहीं है और एस.जी.एस.टी. तभी लगाया जायेगा जब आपूर्तिकर्ता और आपूर्ति प्राप्तकर्ता एक ही राज्य के भीतर स्थित हैं।

चित्रण I

मान लीजिये कि सी.जी.एस.टी. की दर 10 प्रतिशत और  एस.जी.एस.टी. की दर 10 प्रतिशत है । जब उत्तर प्रदेश में स्टील का एक थोक व्यापारी एक निर्माण कंपनी को स्टील की सलाखों और छड़ों की आपूर्ति करता है जो उसी राज्य के भीतर स्थित है; मान लें कि 100 रुपए में डीलर 10 रूपये का सी.जी.एस.टी. और 10 रूपये का एस.जी.एस.टी. माल के मूल दाम में जोड़कर वसूल करेगा । उस सी.जी.एस.टी. की रकम केंद्र सरकार के खाते में जमा करनी है, जबकि एस.जी.एस.टी. के हिस्से की राशि संबंधित राज्य सरकार के खाते में जमा करना आवश्यक होगा । जाहिर है कि उसे वास्तव में 20 रुपए(10+10 रुपए) नकद राशि में जमा करना आवश्यक नहीं होगा क्योंकि वह इस दायित्व को अपनी खरीद पर भुगतान किये गए सी.जी.एस.टी. या एस.जी.एस.टी. के (इनपुट कहते हैं ) के विरुद्ध समायोजित करने का हकदार होगा । लेकिन सी.जी.एस.टी. भुगतान करने के लिए उसे केवल अपनी खरीद पर सी.जी.एस.टी. क्रेडिट का उपयोग करने की ही अनुमति दी जाएगी जबकि सी.जी.एस. टी. के लिये वह अकेले एस.जी.एस.टी. के क्रेडिट का उपयोग कर सकता है। दूसरे शब्दों में, एस.जी.एस.टी. क्रेडिट को, आमतौर पर, एस.जी.एस.टी. के भुगतान के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। न ही एस.जी.एस.टी. क्रेडिट को सी.जी.एस.टी. के भुगतान के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

चित्रण II

मान लीजिए, फिर अनुमानत: कि सी.जी.एस.टी. की दर 10 प्रतिशत और एस.जी.एस.टी. की दर भी 10 प्रतिशत है। जब मुंबई में स्थित एक विज्ञापन कपनी महाराष्ट्र राज्य के भीतर स्थित करती है, आईये मान लेते हैं कि 100 रूपये, विज्ञापन कपनी सेवा की मूल कीमत पर 10 रूपये सी.जी.एस.टी. और 10 रूपये एस.जी. एस.टी. शुल्क लगायेगी। उसे सी.जी.एस.टी. का हिस्सा केंद्र सरकार के खाते में, और एस.जी.एस.टी. हिस्सा संबंधित राज्य सरकार के खाते में जमा करना आवश्यक होगा । बेशक, उसे फिर से, वास्तव में 20 रुपये (10+10 रु) का नकद भुगतान करने की जरूरत नहीं है क्योंकि वह इस दायित्व को अपनी खरीद पर भुगतान किये गये सी.जी.एस.टी. या एस.जी.एस.टी. के (इनपुट जैसे स्टेशनरी, ऑफिस उपकरण, कलाकारों की सेवाएं इत्यादि कहते हैं) के विरूद्ध समायोजित करने का हकदार होगा। लेकिन सी.जी.एस.टी. भुगतान करने के लिए उसे केवल अपनी खरीद पर सी.जी.एस.टी. क्रेडिट/ जमा का उपयोग करने की ही अनुमति दी जाएगी जबकि एस.जी. एस.टी. के लिये वह अकेले एस.जी.एस.टी. के क्रेडिट का उपयोग कर सकता है। दूसरे शब्दों में, सी.जी.एस.टी. क्रेडिट को, आमतौर पर, एस.जी.एस.टी. के भुगतान के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। न ही एस.जी.एस.टी. क्रेडिट को सी.जी.एस.टी. के भुगतान के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

वे कौन से लाभ हैं जो देश को जी.एस.टी. से प्राप्त होंगे?

जी.एस.टी. का प्रस्तुतीकरण भारत के अप्रत्यक्ष कर सुधारों के क्षेत्र में एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम होगा। बहुत सारे केंद्रीय और राज्यों के करों को एकल कर में मिलाकर और पूर्व-चरणों के करों को समाप्त करने की अनुमति देकर, यह व्यापक रूप से गिरावट के बुरे प्रभावों को काफी हद तक कम करने में मदद करेगा और समान राष्ट्रीय बाजार के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा। उपभोक्ताओं के लिए सबसे बड़ा फायदा समग्र माल पर कर बोझ में कमी है, जिसका वर्तमान समय में 25 से 30 प्रतिशत होने का अनुमान है। जी.एस.टी. की प्रस्तुतीकरण हमारे उत्पादों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी प्रतिस्पर्धी बनाएगा। अध्ययनों से ज्ञात होता है, कि इससे आर्थिक विकास में तुरन्त तेजी आ जाती है। वही केंद्र और राज्यों के लिए भी कर आधार को व्यापक करने से राजस्व लाभ हो सकता है, व्यापार में वृद्धि और कर अनुपालन भी बेहतर होगा। अंतिम लेकिन कम नहीं है, इस कर की पारदर्शी प्रकृति के कारण, इसका प्रशासन भी आसान होगा ।

आई.जी.एस.टी. क्या है?

जी.एस.टी. व्यवस्था के अंर्तगत, अंतर-राज्य वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर केंद्र द्वारा एकीकृत जी.एस.टी. (आई.जी.एस. टी) कर लगाया और एकत्र किया जायेगा। संविधान के अनुच्छेद 269ए के अंर्तगत, अंतर-राज्य व्यापार या वाणिज्य के दौरान आपूर्ति पर जी.एस.टी लगाया जाएगा और भारत सरकार द्वारा एकत्र किया जायेगा और कथित कर को केंद्र और राज्य के बीच इस प्रकार से विभाजित किया जायेगा जिस प्रकार संसद द्वारा वस्तु और सेवा कर परिषद की सिफारिशों पर कानून बनाकर किया जा सकता है।

जी.एस.टी. कर लगाने के लिए कौन इसकी दरें तय करेगा?

सी.जी.एस.टी. और एस.जी.एस.टी. केंद्र और राज्यों द्वारा संयुक्त रूप से तय की गई दरों पर लगाया जाएगा। दरों को जी. एस.टी. परिषद की सिफारिशों पर अधिसूचित किया जाएगा।

जी.एस.टी. परिषद की क्या भूमिका होगी?

जी.एस.टी. परिषद के गठन में केंद्रीय वित्त मंत्री (जो परिषद के अध्यक्ष होंगे), राज्यमंत्री (राजस्व) और राज्य वित/कराधान मंत्री सम्मिलित होंगे जो केंद्र  और राज्यों को निम्न पर अपनी सिफारिशें करेंगे-

  1. केंद्र,राज्यों और स्थानीय निकायों द्वारा लगाये करों, उपकरों और अधिभारों पर जिन्हें जी.एस.टी. के अंतर्गत सम्मिलित किया जा सकता है;
  2. वस्तुओं और सेवाओं पर जो जी.एस.टी. के अधीन की जा सकती हैं या जिन्हें छूट दी जा सकती है;
  3. जिस तारीख को पेट्रोलियम कच्चे तेल, हाई स्पीड जल, मोटर स्प्रिट (आमतौर पर पेट्रोल के रूप में जाना जाता है), प्राकृतिक गैस और एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर जी.एस.टी. लगाया जाएगा;
  4. मॉडल जी.एस.टी. कानून, करारोपण के सिद्धांत, आई. जी.एस.टी. का संविभाजन और वे सिद्धांत जो आपूर्ति स्थल को निर्धारित करते हैं;
  5. कुल बिक्री की वह सीमारेखा जिसके नीचे वस्तुओं और सेवाओं को जी.एस.टी. से छूट दी जा सकती है;
  6. वह दरें जिनमें जी.एस.टी.बैंड सहित न्यूनतम तय दरें शामिल हैं;
  7. प्राकृतिक आपदा या आपदा के दौरान अतिरिक्त संसाधन जुटाने के लिए कोई विशेष दर या निर्धारित अवधि के लिए तय की गई दरें;
  8. उत्तर-पूर्वी राज्यों, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के संबंध में विशेष प्रावधान, तथा
  9. जी.एस.टी. से संबंधित कोई अन्य मामला, जिसपर परिषद निर्णय ले सकती है

जी.एस.टी. परिषद के मार्गदर्शक सिद्धांत क्या हैं?

जी.एस.टी. परिषद की प्रक्रिया केंद्र और राज्यों के साथ-साथ राज्यों के बीच जी.एस.टी. के विभिन्न पहलुओं पर सामंजस्य बनाये रखना सुनिश्चित करेगी। संविधान (एक सी एकवां संशोधन) अधिनियम, 2016 में यह प्रावधान किया गया है कि जी.एस.टी. परिषद, अपने विभिन्न कायों के निष्पादन में जी.एस.टी. की सामंजस्य संरचना की जरूरत और वस्तुओं और सेवाओं के अनुकूल राष्ट्रीय बाजार के विकास के लिए निर्देशित की जायेगी।

जी.एस.टी. परिषद द्वारा कैसे निर्णय लिया जाएंगे?

संविधान का (एक सौ एकवां संशोधन) अधिनियम, 2016 प्रावधान करता है कि जी.एस.टी. परिषद का प्रत्येक निर्णय बैठक में कम से कम कुल उपस्थित सदस्यों के 3/4 के बहुमत से मतदान करने के बाद लिया जाएगा। बैठक में कुल डाले गये मतों के 1/3 हिस्से का महत्व केंद्र  सरकार के मतों का और बाकी सभी राज्य सरकारों का एक साथ मिलकर कुल डाले गये मतों का 2/3 हिस्से का महत्व होगा। जी.एस.टी. परिषद के सदस्यों की कुल संख्या में से आधे के साथ बैठकों का कोरम गठित होगा ।

प्रस्तावित जी.एस.टी. व्यवस्था के अंतर्गत कौन जी.एस.टी. भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है?

जीएसटी व्यवस्था की अंतर्गत कर देय योग्य व्यक्ति द्वारा वस्तुओं और/या सेवाओं की आपूर्ति पर कर देय होगा। जब कर देय योग्य व्यक्ति का कुल कारोबार 20 लाख रु. (पूर्वोत्तर और विशेष श्रेणी के राज्यों के लिए 10 लाख रु.) की छुट सीमा को पार करता है तब उस पर कर का दायित्व बनता है। सिवाय कुछ विशिष्ट मामलों को छोड़कर कराधीन व्यक्ति जी.एस.टी. का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है भले ही उसने निर्धारित सीमा रेखा की छूट को पार नहीं किया है। सी.जी.एस.टी./एस.जी.एस.टी.अंतर-राज्य में आपूर्ति की गई सभी वस्तुओं और/या सेवाओ पर देय है। सी.जी. एस.टी./एस.जी.एस.टी. और आई.जी.एस.टी संबंधित अधिनियमों की अनुसूचियों में निर्दिष्ट दरों पर देय हैं।

जी.एस.टी. व्यवस्था के अंतर्गत छोटे कर दाताओं के लिये क्या लाभ उपलब्ध हैं?

एक वित्तीय  वर्ष में समग्र रूप से कुल कारोबार (20 लाख और पूर्वोत्तर तथा विशेष श्रेणी राज्य के लिए 10 लाख तक) करने वाले कर दाताओं को कर से छूट प्राप्त होगी। आगे ऐसे व्यक्ति जिनका पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष में समग्र कारोबार 50 लाख रु. से कम है, वे सरलीकृत योजना का विकल्प चुन सकते हैं, जहाँ एक राज्य में कुल कारोबार पर रियायती दर पर कर देय होगा ।

कुल कारोबार में सभी कर योग्य वस्तुओं की आपूर्ति, छूट प्राप्त वस्तुओं की आपूर्ति और निर्यात की वस्तुएँ और/या सेवाएँ का समग्र मूल्य शामिल किया जाएगा। कुल कारोबार में कर अर्थात एसटी का मूल्य शामिल नही किया जायेगा। समग्र कारोबार की गणना सम्पूर्ण भारत के आधार पर की जाएगी। पूर्वोतर राज्यों और विशेष श्रेणी के राज्यों के लिए छूट सीमा (10 लाख रु) होगी। छूट सीमा को योग्यता वाले सभी कर दाताओं के पास इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) लाभों के साथ कर भुगतान का विकल्प होगा। अंर्तराज्यीय आपूर्ति करने वाले कर दाता या रिवर्स जार्च के आधार पर कर का भुगतान करने वाले कर दाता छुट सीमा के लाभ के पात्र नहीं होंगे ।

जी.एस.टी. व्यवस्था के अंतर्गत वस्तुओं और सेवाओं को कैसे वर्गीकृत किया जाएगा?

एच.एस.एन. (हार्मोनाइज्ड सिस्टम आफ नॉमेंक्लेचर) कोड को जी.एस.टी. व्यवस्था के अंर्तगत वस्तुओं को वर्गीकृत करने के लिए प्रयोग किया जाएगा। करदाताओं जिनकी कुल बिक्री/टर्नओवर 1.5 करोड रुपये से ऊपर है लेकिन 5 करोड़ रुपये से कम है, वे 2 अंकों के कोड का उपयोग कर पाएंगे और वह करदाता जिनकी कुल बिक्री/टर्नओवर 5 करोड रुपये और उससे अधिक है वह 4 अंकों के कोड का उपयोग करेंगे। ऐसे करदाताओं को जिनकी कुल बिक्री 1.5 करोड रुपये के नीचे है उन्हें अपने चालान/बिलों पर एचएसएन कोड का उल्लेख करना आवश्यक नहीं है।

सेवाओं को सर्विस एकाउंटिंग कोड के अनुसार वर्गीकृत किया जाएगा (एस.ए.सी.)

जी.एस.टी. व्यवस्था के अंर्तगत आयात पर किस प्रकार कर लगाया जायेगा?

वस्तुओं और सेवाओं के आयात को अंतर-राज्य आपूर्ति के रूप में माना जाएगा और देश में वस्तुओं और सेवाओं के आयात पर आई.जी.एस.टी. लगाया जाएगा। कर की घटना का गंतव्य सिद्धांत पालन करेंगे और एस.जी.एस.टी. के मामले में कर राजस्व उस उपभोग किया जा रहा है। वस्तुओं और सेवाओं के आयात पर पिछले चरण में भुगतान किया गया जी.एस.टी. कर पूरा और सारा (फुल एंड फाइनल) सेट-ऑफ (वापसी) पुनः प्राप्त हो जाएगा।

जी.एस.टी. के अंर्तगत निर्यात से कैसे व्यवहार किया जाएगा?

निर्यात को शून्य दर की आपूर्ति के रूप में माना जाएगा। वस्तुओं या सेवाओं के निर्यात पर कोई कर देय नहीं होगा, हालांकि इनपुट टैक्स क्रेडिट पर जमा सुविधा उपलब्ध रहेगी और उसे निर्यातकों को रिफण्ड कर दिया जाएगा।

जी.एस.टी. के अंर्तगत संरचना योजना (कम्पोजिट स्कीम) का क्या कार्यक्षेत्र है?

वे छोटे करदाता जिनकी एक वित्तीय वर्ष में टर्नओवर (50 लाख रुपए) तक है, संरचना कर के पात्र होंगे। इस योजना के अंतर्गत करदात बिना इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) लाभ प्राप्त किए, एक राज्य में एक वर्ष के दौरान अपने कुल कारोबार के प्रतिशत के रूप में कर का भुगतान करेगा। सीजीएसटी और एसजीएसटी/यूटीजीएसटी के लिए कर की न्यूनतम दर (उत्पादकों के लिए 1% और अन्य मामलों में 0.5% अनुसूची-II के पैरा 6 (बी) में उल्लेखित विशिष्ट सेवाओं अर्थात भोजन परोसने की सेवाएँ अथवा मानव उपयोग के लिए अन्य वस्तुओं के लिए 25%) से कम नहीं होगा। संरचना कर का विकल्प चुनने वाला करदाता अपने ग्राहकों से कोई कर नहीं लेगा। सरकार, जीएसटी परिषद की सिफारिश पर उपरोक्त उल्लेखित 50 लाख रु. की सीमा को 1 करोड़ रु. तक बढ़ा सकती है।

अतंर-राज्यीय आपूर्ति करने वाले करदाता अथवा ई-कामर्स ऑपरेटरों के माध्यम से आपूर्ति करने वाले करदाता जिनके लिए स्त्रोत पर कर संग्रह करना आवश्यश्क है संयोजन योजना के पात्र नहीं होंगे।

क्या संरचना योजना वैकल्पिक या अनिवार्य होगी?

वैकल्पिक हे ।

जी.एस.टी.एन. क्या है और जी.एस.टी. व्यवस्था में इसकी क्या भूमिका है?

जी.एस.टी.एन. वस्तुओं एवं सेवाओं का कर एक नेटवर्क (जी.एस.टी.एन.) है। यह एक विशेष प्रयोजन के लिये माध्यम है जिसे जी.एस.टी.एन. कहा जाता है और इसे जी.एस.टी. की जरूरतों को पूरा करने के लिये स्थापित किया गया है। जी.एस.टी.एन. केंद्रीय और राज्य सरकारों, कर दाताओं और अन्य हितधारकों को जी.एस. टी. के कार्यान्वयन के लिये आईटी बुनियादी सुविधाएं साझा करेगा।

जी.एस.टी.एन. के काम में, अन्य बातों के साथ, शामिल होंगे-

(i) पंजीकरण की सुविधा;

(ii) केन्द्रीय और राज्य के अधिकारियों को रिटर्न अग्रेषित करना;

(iii) आई.जी.एस.टी. की संगणना और निपटान;

(iv) बैंकिग नेटवर्क के साथ कर भुगतान विवरणों का मिलान करना;

(v) केन्द्र और राज्य सरकारों को करदाताओं के रिटर्न/वापसी की जानकारी के आधार पर विभिन्न एमआईएस सूचना प्रदान करना;

(vi) करदाताओं के प्रोफाइल का विश्लेषण प्रदान करना; और

(vii) इनपुट टैक्स क्रेडिट के मिलान, उलटने और पुर्नदावा करने के लिये उसी के अनुकूल इंजन का संचालन करना।

जी.एस.टी.एन. पंजीकरण, भुगतान, रिटर्न और एम.आई.एस./रिपोर्ट को लिए एक आम जी.एस.टी. पोर्टल और एप्लीकोशंस विकसित कर रहा है। जी.एस.टी.एन. में मौजूदा कर प्रशासन में उपयोग की जा रही आईटी प्रणालियों के साथ एक आम जी.एस. टी. पोर्टल को एकीकृत किया जाएगा और करदाताओं के लिए इंटरफेस का निर्माण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, जी.एस.टी. एन. 19 राज्यों और केंद्रीय शासित प्रदेशों (मॉडल II राज्यों) के लिये मूल्यांकन, लेखा परीक्षण, रिटर्न, अपील इत्यादि के लिये एक बैक-एंड मॉडयूल भी विकसित कर रहा है। सीबीईसी और मॉडल I राज्य (15 राज्य) स्वयं अपने जी.एस.टी. बैक-एंड सिस्टम् विकसित कर रहे हैं। जी.एस.टी. के फ्रट-एंड सिस्टम को बैक-एंड सिस्टम से एकीकृत कर प्रक्रिया सुगम करने के लिये पहले से ही परीक्षण पूरा कर लिया जायेगा।

जी.एस.टी. व्यवस्था के अंतर्गत विवादों का समाधान कैसे किया जायेगा?

संविधान (एक सौ एकवां संशोधन) अधिनियम, 2016 प्रदान करता है कि वस्तुओं और सेवाओं की परिषद या उसके कार्यान्वयन की सिफारिशों से उत्पन्न किसी भी विवाद में निर्णय देने के लिये एक मैकेनिज्म स्थापित करेगी -

(क) भारत सरकार और एक या एक से अधिक राज्यों के बीच; या

(ख) भारत सरकार और कोई राज्य या एक से अधिक राज्य एक तरफ तथा एक या एक से अधिक राज्य दूसरी तरफ, की बीच; या

(ग) दो या अधिक राज्यों के बीच,

अनुपालन रेटिंग तंत्र का उद्देश्य क्या है?

सीजीएसटी/एसजीएसटी अधिनियम की धारा 149 के अनुसार, प्रत्येक पंजीकृत व्यक्ति को निर्दिष्ट पैरामीटर के अनुपालन के रिकार्ड पर आधारित एक अनुपालन रेटिंग सौंपी जाएगी। ऐसी रेंटिग को पब्लिक डोमेन पर भी डाला जाएगा। एक संभावित ग्राहक, आपूर्तिकताओं के अनुपालन रेटिंग को देखने में सक्षम हो जाएगा और किसी विशेष आपूर्तिकर्ता से लेनदेन करने अथवा नहीं करने का निर्णय ले सकता है। यह कर देय योग्य व्यक्तियों के मध्य एक स्वस्थ प्रतियोगिता उत्पन्न करेगा ।

क्या कार्यवाही योग्य दावे जीएसटी के लिए उत्तरदायी है?

सीजीएसटी/एसजीएसटी अधिनियम की धारा 2(52) के अनुसार कार्यवाही योग्य दावों को वस्तुएँ के रूप में माना जाएगा अनुसूची-III जिससे सीजीएसटी/एसजीएसटी अधिनियम के धार 7 के साथ पढ़ा जाए, ऐसी लेन देन/गतिविधियों को सूचीबद्ध करत है, जिन्हें ना तो वस्तुओं की आपूर्ति और ना ही सेवाओं की आपूर्ति समझा जाएगा। अनुसूची की सूची में कार्यवाही योग्य दावे जो कि, व्यवस्था के अतंर्गत केवल लॉटरी, शर्त और जुएं को आपूर्ति माना जाएगा। अन्य सभी कार्यवाही योग्य दावों को आपूर्ति नहीं माना जाएगा ।

क्या प्रतिभूतियों का लेन देन जीएसटी के अंतर्गत कर योग्य होगा?

प्रतिभूतियों को विशेष रूप से वस्तुओं के साथ-साथ सेवाओं की परिभाषा से बाहर रखा गया है। इस प्रकार प्रतिभूतियों में लेन-देन जीएसटी के लिए उत्तरदायी नहीं होगा ।

सूचना वापसी की अवधारणा क्या है?

सूचना वापसी का विचार स्वतंत्र तृतीय पक्ष के स्रोतों से प्राप्त जानकारी के माध्यम से पंजीकृत व्यक्तियों के अनुपालन के स्तर की पुष्टि पर आधारित है। सीजीएसटी/एसजीएसटी अधिनियम की धारा 150 के अनुसार बहुत से प्राधिकरण पंजीकरण के अभिलेख या खाते का विवरण या कोई अवधिक रिटर्न या कर भुगतान के विवरण वाले दस्तावेज और वस्तुओं और सेवाओं य दोनों के लेन-देन का विवरण या बैंक खाते से लेन-देन या विद्युत का उपयोग था वस्तुओं की अदला-बदलिया बिक्री या खरीद लेन-देन, उस समय लागु किसी कानुन के अंतर्गत संपत्ति पर ब्याज अधिकार, इस संबंध में इस अवधि की निर्धारित समय में निर्धारित प्रारूप और तरीके द्वारा जैसा कि प्राधिकरण या एजेंसी निर्धारित करे इस अवधि में सूचना वापसी करना आवश्यक है। इसमें असफल होने का परिणाम धारा 123 के अंर्तगत दंड हो सकता है

अलग-अलग कम्पनियों के पास विभिन्न प्रकार के लेखा सॉफ्टवेयर पैकेज हैं और अभिलेख रखने के लिए कोई विशिष्ट प्रारूप नहीं है। विभाग इस तरह के जटिल सॉफ्टवेयरों को समझने योग्य कैसे होगा?

सीजीएसटी/एसजीएसटी अधिनियम की धारा 153 के अनुसार, मामले के अनुसार, मामले की प्रकृति और जटिलता ओर राजस्व हित को देखते हुए, विभाग जाँच, पूछताछ, संवीक्षा या कोई अन्य कार्यवाही के स्तर पर एक विशेषज्ञ की सहायता ले सकता है।

क्या  प्राप्तकर्ता द्वारा वापस की गई वस्तुओं पर कर के उपचार के संबंध में जीएसटी के अंतर्गत कोई प्रावधान है?

हाँ, धारा 34 ऐसी परिस्थितियों से संबंधित है। जहां पर प्राप्तकर्ता द्वारा आपूर्ति की गई वस्तुओं को वापस किया गया है, वहाँ पर पंजीकृत व्यक्ति (वस्तुओं का आपूर्तिकर्ता) प्राप्तकर्ता को एक क्रेडिट नोट जिसमें निर्धारित विवरण शामिल हो जारी कर सकता है। आपूर्तिकर्ता द्वारा क्रेडिट नोट के विवरण को उस महीने की रिटर्न में जिसके दौरान ऐसा क्रेडिट नोट जारी किया गया लेकिन सितम्बर के बाद नहीं अनुगामी वर्ष जिसमें आपूर्ति की गई या प्रासंगिक वार्षिक रिटर्न फाईलिंग जो भी पहले हो में घोषणा करेगा। प्राप्तकर्ता द्वारा अपने उसी अवधि के वैध कर रिटर्न या उसके बाद की किसी कर अवधि से क्रेडिट नोट का विवरण इनपुट टैक्स क्रेडिट के लिए संबंधित कमी से मिलान होगा और आपूर्तिकर्ता द्वारा आउटपुट कर दायित्व का दावा प्राप्तकर्ता द्वारा इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) में संबंधित कमी से मिलाने होने पर इसे अंततः स्वीकार किया जाएगा और दोनों पक्षों को सूचित किया जाएगा।

मुनाफाखोरी के विरूद्ध क्या उपाय है?

सीजीएसटी/एसजीएसटी अधिनियम की धारा 171 के अनुसार वस्तुओं एवं सेवाओं की आपूर्ति में किसी प्रकार के टैक्स में कमी या इनपुट टैक्स क्रेडिट के लाभ को मूल्यों में अनुरूप कमी के माध्यम से प्राप्तकर्ता को अग्रेसित किया जाएगा । सरकार द्वारा एक प्राधिकरण का गठन किया जा सकता है जो यह जाँच करे कि क्या किसी पंजीकृत व्यक्ति द्वारा प्राप्त किया गया इनपुट टैक्स क्रेडिट या कर की दरों में कमी वास्तव में वस्तुओं या सेवाओं में मूल्यों के अनुरूप कमी हुई है।

स्रोत: भारत सरकार का केंद्रीय उत्पाद व सीमा शुल्क बोर्ड, राजस्व विभाग, वित्त मंत्रालय

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surajpal Jun 13, 2017 03:38 PM

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