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परिवर्ती प्रावधान

इस पृष्ठ में परिवर्ती प्रावधान क्या है, इसकी जानकारी दी गयी है।

क्या जी.एस.टी. से पूर्व पहले कानून के अंर्तगत आई.टी.सी. के रूप में उपलब्ध पिछले रिटर्न का सेनवैट/आई.टी.सी. (या वैट क्रेडिट) आगे जी.एस.टी व्यवस्था के अंतर्गत आगे ले जाया जाएगा?

संयोजन योजना के अंतर्गत कर भुगतान करने का विकल्प रखने वाले व्यक्ति के अतिरिक्त, एक पंजीकृत व्यक्ति अपने इलेक्टॉनिक क्रेडिट खाते में उतना सेनवेट क्रेडिट (या वैट क्रेडिट) लेने के हकदार होंगे जो नियुक्त दिन से पहले अंतिम अवधि की रिर्टन द्वारा आगे ले जाया गया है व जो इस सम्बंध में दी गई शताँ के मानने पर मिलेगा। (सी.जी.एस.टी./एस.जी.एस.टी अधिनियम की धारा 140 (1))

वे शतें/परिस्थितियां क्या है?

शर्त इस प्रकार है:-

(i) इस अधिनियम के अंतर्गत इनपुट टैक्स क्रेडिट के रूप में क्रेडिट की वर्णित राशि स्वीकार्य है।

(ii) पंजीकृत व्यक्ति ने मौजूदा कानून (केन्द्रीय उत्पाद शुल्क और वैट) के अंतर्गत अपेक्षित सभी रिर्टन प्रस्तुत किए है, जो तत्काल नियुक्ति की तिथि से पूर्व छह माह की अवधि के लिए उपलब्ध कराये गये है।

(iii) क्रेडिट की वर्णित राशि अधिसूचना संख्या . क अंतर्गत बेची गई वस्तु से संबंधित नहीं है और उस पर भुगतान किए गए वैट की वापसी का दावा करना

एस.जी.एस.टी कानून के अंतर्गत निम्न वर्णित एक और शर्त होगी :-

केन्द्रीय बिक्री कर अधिनियम, 1956 की धारा 3 की उपधारा (3), धारा 5, धारा 6, धारा 6ए या उपधारा (8) से संबंधित कोई भी दावा जिसका आरोपण वर्णित दावे से अधिक है, जिसकी केन्द्रीय बिकी कर (पंजीकृत और टर्नओवर ) नियम 1957 के नियम 12 में निर्धारित अवधि के भीतर ठीक प्रकार से पुष्टि नहीं हुई है। वह इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट लेजर में जमा करने योग्य नहीं होगा ।

हांलाकि उपरोक्त वर्णित क्रेडिट के बराबर राशि मौजूदा कानून के अंतर्गत वापस कर दी जायेगी जब वर्णित दावा, कन्द्रीय बिक्री कर (पंजीकृत और टर्नओवर) नियम, 1957 के नियम 12 में निर्धारित तरीके से साबित किया गया हो।

माना एक पंजीकृत व्यक्ति, मौजूदा कानून (केन्द्रीय उत्पाद शुल्क) के अंतर्गत 2017-2018 की जून तिमाही में पूंजीगत वस्तुएं खरीदते है। हालांकि चालान 30 जून के भीतर प्राप्त हुआ है लेकिन पूंजीगत वस्तुओं को 5 जुलाई, 2017 (यानि जीएसटी व्यवस्था में) पर प्राप्त किया गया है। क्या इस तरह के व्यक्ति को जीएसटी व्यवस्था में सेनवैट का पूरा क्रेडिट मिलेगा।

हाँ, यह 2017-18 में क्रेडिट के हकदार होगे, बशर्त इस तरह की क्रेडिट मौजूदा कानून में सेनवैट क्रेडिट के रूप में स्वीकार्य है और सीजीएसटी अधिनियम की धारा 140 (2) के तहत सीजीएसटी में क्रेडिट के रूप में भी स्वीकार्य है।

पिछले कानून में "X" और "Y" मदों पर पूंजीगत वस्तुओं के रूप में वैट क्रेडिट उपलब्ध नहीं था। चूंकि वे जी.एस.टी. में शामिल किये जाते हैं, क्या अब पंजीकृत कराधीन व्यक्ति इनका दावा कर सकता है?

वह केवल तब क्रेडिट का हकदार होगा जब ऐसी वस्तुओं/ माल पर आई.टी.सी. पहले कानून में स्वीकार्य था और वह जी.एस. टी. में भी स्वीकार्य होगा। चूंकि दो मदों पर क्रेडिट पहले कानून के अंतर्गत उपलब्ध नहीं था, कथित व्यक्ति जी.एस.टी. में यह दावा नहीं कर सकता। (एस.जी.एस.टी अधिनियम की धारा 140 (2) के लिए प्रावधान)।

मान लिया जाये कि कथित व्यक्ति ने गलत तरीके से क्रेडिट (प्रश्न संख्या 4 का संदर्भ प्राप्त करें) का लाभ प्राप्त किया है, क्या जी.एस.टी कानून या मौजूद कानून में वसूली की जाएगी?

जब तक की मौजूदा कानून के अंतर्गत पुनः प्राप्ति नहीं की जाएगी, आई.टी.सी. से संबंधित पुन:प्राप्ति को गलत तरीके से समझा जाएगा, जी.एस.टी. के अंतर्गत कर के बकाए के रूप में वसूल किया जाएगा ।

दो पंजीकृत कराधीन व्यक्तियों के उदाहरण दें जो पहले कानून के अंतर्गत पंजीकरण के लिये जिम्मेदार नहीं थे लेकिन जी. एस.टी. के अंतर्गत उन्हें पंजीकृत करना अनिवार्य है?

मान लेते हैं कि एक निर्माता जिसका टर्नओवर / कुल बिक्री 60 लाख रुपए है और वह पहले एस.एस.आई. छूट का फायदा उठा रहा था, उसे जी.एस.टी. में पंजीकृत होना अनिवार्य होगा क्योंकि उसका कारोबार 20 लाख रू की मूल सीमा से अधिक है-धारा 22 एक व्यापारी जो ई-कॉमर्स ऑपरेटर के माध्यम से बिक्री करता है उसकी टर्नओवर सीमा से कम है उसे जी.एस.टी. में पंजीकृत होना अनिवार्य होगा । ऐसे व्यक्तियों के लिए कोई सीमा नहीं होगी – धारा 24 ।

क्या एक सेवा प्रदाता को किसी नियत दिन स्टॉक के रूप में रखी इनपुट पर वैट के भुगतान के लिये आई.टी.सी. की अनुमति दी जाएगी?

हाँ, वह धारा 140 (3) के प्रावधानों के अनुसार स्टॉक में रखे गए इनपुट टेक्स क्रेडिट के हकदार होंगे।

एक पंजीकृत कराधीन व्यक्ति के पास उसके पहले रिटर्न से पिछले कानून के अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट खाता बही में 10,000 रुपये आई.टी.सी. जमा है। अब, वह जी.एस.टी. में संरचना योजना में परिवर्तित हो जाता है, क्या वह आईटीसी को आगे जीएसटी में ले जा सकता है?

यदि वह संयोजन योजना के लिए विकल्प चुनता है तो ॉजीकृत व्यक्ति जी.एस.टी के अतिरिक्त आई.टी.सी. को आगे नहीं बढ़ा सकेगा-धारा 140 (1)

सीएसटी (अर्थात् केन्द्रीय बिक्री कर अधिनियम) के अंतर्गत रिटर्न/वापसी (Sales return) टर्नओवर/कुल बिक्री से कटौती के रूप में 6 महीने के भीतर स्वीकार्य है? यदि, मान लें कि, एक खरीदार द्वारा बिक्री के 6 महीने के बाद वस्तुएं/माल जी.एस.टी. में वापस किया गया है, क्या वह सीएसटी या जी.एस.टी. में कराधीन होगा?

जहां किसी भी वस्तु पर बिकी के समय मौजूदा कानून के तहत कर का भुगतान किया गया है जो कि नियम तिथि से 6 माह पूर्व न हो और ऐसी वस्तु को नियम दिन के बाद खरीदार द्वारा वापिस कर दिया जाता है, बिकी वापसी को जी.एस.टी में वर्णित बिकेता की आपूर्ति के रूप में माना जाए और ऐसी आपूर्ति पर कर का भुगतान करना होगा, यदि

(i)  वस्तु जी.एस.टी. कानून के अंतर्गत कर योग्य है तथा

(ii) क्रेता जी.एस.टी. कानून के अंतर्गत पंजीकृत है।

हांलाकि, विकेता इस प्रकार के को वापस करने का हकदार है। (सी.एस.टी. इस मामलें में) यदि मौजूदा कानून के अंतर्गत इसका भुगतान किया जाता है यदि उपरोक्त केता जी.एस.टी. कानून के अंतर्गत अपंजीकृत व्यक्ति है और वस्तुओं को नियत दिन से 6 माह (या अधिकतम 2 माह के भीतर) के भीतर लौटा देता है और वस्तु पहचाने जाने योग्य है।-142(1)

क्या एक निर्माता या जॉब वर्कर कर का भुगतान करने के लिये उत्तरदायी होगा यदि इनपुट या अर्ध-तैयार माल पहले कानून के अंतर्गत जॉबवर्क के लिए भेजा गया था और नियत दिन के बाद जॉबवर्क पूरा होने के बाद वापस लौटा जाता है?

निर्माता या जाब वकर द्वारा निम्नलिखित परिस्थितियों में कोई कर देय नहीं होगा:

पहले कानून के प्रावधानों के अनुसार नियत दिन से पहले इनपुट्स/ अर्दध तैयार माल जॉब वर्कर के पास भेजा जाता है।

जॉब वर्कर नियत दिन (या 2 महीने की विस्तारित अवधि) से छह महीने के भीतर उस माल को वापस लौटा देता है।

निर्माता और जॉब वकर निर्धारित प्रपत्र में नियत दिन पर जॉब वकर के पास रखे गये स्टॉक के विवरण घोषित करेंगे ।

संबंधित धारा 141(1), 141 (2) और 141 (4) है

हालांकि, यदि वर्णित इनपुट/अर्द्ध निर्मित वस्तु छह माह के भीतर वापस नहीं की जाती है (या अधिकतम 2 माह की विस्तारित समय अवधि के भीतर) उपलब्ध इनपुट कर क्रेडिट की वसूली लिए उत्तरदायी हे ।

यदि जॉब वर्कर निर्धारित समय के भीतर वस्तुएं/माल वापस नहीं करता है, उस स्थिति में क्या होता है?

नौकरी श्रमिक द्वारा उस वस्तु पर कर का भुगतान किया जाएगा यदि वे नियम दिन से छह माह (या अधिकतम विस्तारित 2 माह की अवधि के भीतर) के भीतर निर्माता के व्यवसाय के स्थान पर नहीं लौटाये जाते है। धारा 141(1) 141(2)

क्या एक निर्माता तैयार माल को परीक्षण के प्रयोजन के लिये किसी अन्य कराधीन व्यक्ति के परिसर पर हस्तांतरित कर सकता है?

हाँ, पहले कानून के प्रावधानों के अनुसार एक निर्माता कथित वस्तुओं/माल को किसी अन्य कराधीन व्यक्ति के परिसर में नियति के लिये नियत दिन के 6 महीने के भीतर या विस्तारित अवधि पर कर का भुगतान करने के बाद या बिना कर का भुगतान किये हस्तांतरित कर सकता हैं (या अधिकतम 2 माह की विस्तारित अवधि के भीतर)-धारा 141(3)

पहले कानून के अंतर्गत यदि तैयार वस्तुओं/माल को कुछ प्रक्रियाएं करने के लिये कारखाने से बाहर ले जाया जाता है और नियत दिन पर या उसके बाद वापस लौटा दिया जाता है, क्या उस पर जी.एस.टी. देय होगा?

जहां वस्तुओं/माल को कोई प्रक्रिया पूरा करने के लिये भेजा जाता है और जो विनिर्माण नहीं है नियत दिन (या विस्तारित 02 महीने की अवधि) से 6 महीने के भीतर लौटा दिया जाता है वहां जी.एस.टी. में निर्माता या जॉब वकर द्वारा कोई कर देय नहीं होगा (या अधिकतम दो माह की विस्तारित अवधि के भीतर) नियुक्त दिन से-धारा 141(3)

जीएसटी में परिक्षण/अन्य प्रक्रिया जो मौजूदा कानून के गई विनिर्मित वस्तुओं पर कब कर देय होगा?

वैसे विनिर्मित वस्तुएं जो परिक्षण/ अन्य प्रक्रिया में मौजूदा कानून के तहत निर्माण प्रक्रिया नहीं के लिए नौकरी श्रमिक को नियत तिथि से पहले भेजी गई थी और नियत तिथि से 6 माह (अधिकतम विस्तारित अवधि दो माह के भीतर) के भीतर वापस नहीं की जाती, उस पर कर देय होगा। इसके अतिरिक्त निर्माता द्वारा उपभोग किए गए इनपुट क्रेडिट भी वसूली का हकदार होगा। यदि उक्त वस्तु नियत तिथि से 6 माह के अंदर वापस नहीं किए जाते (नियम 145 (3)) ।

क्या धारा 141 में स्वाचालित रूप से 2 माह के विस्तार की चर्चा है?

नहीं, यह स्वचालित नहीं है इसे पर्याप्त कारण दिखाये जाने पर आयुक्त द्वारा विस्तारित किया जा सकता है।

कीमतों में संशोधन के लिए डेबिट/क्रेडिट नोट(स) जारी करने के लिए क्या समय सीमा है?

कराधीन व्यक्ति कीमतों में संशोधन करने के 30 दिनों के भीतर डेबिट/क्रेडिट नोट(स) या पूरक चालान/बिल जारी कर सकता है।

किसी मामले में जहां कीमतें कम करके संशोधित की जाती हैं कराधीन व्यक्ति को अपने कर दायित्व कम करने के लिए अनुमति केवल तब दी जाएगी जब चालान या क्रेडिट नोट प्राप्तकर्ता ने

अपनी आई.टी.सी. की कथित कर देयता में उसी समरूपता में कमी की है - धारा 142 (2)

मौजूदा कानून के अंतर्गत लंबित कर के रिफंड/ब्याज का क्या परिणाम होगा?

लंबित कर के रिफंड के दावों का निपटारा मौजूदा कानून के प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा - धारा 142 (3)

मौजूदा कानून के अंतर्गत लंबित सेनवैट/आई.टी.सी. के दावों की किसी अपील या संशोधन का क्या परिणाम होगा? यदि ऐसा कहें, वह उत्पादन के दायित्व से संबंधित है तब?

दोनों मामलों में इसका निपटारा मौजूदा कानून के प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा - धारा 142 (6)/ 142 (7)

यदि अपीलीय या पुनरीक्षण आदेश निर्धारिती के पक्ष में जाता है, क्या जी.एस.टी. में रिफंड दिया जाएगा? यदि निर्णय निर्धारिती के विरूद्ध जाता है, तब उस स्थिति में क्या परिणाम होगा?

रिफंड केवल मौजूदा कानून के प्रावधानों के अनुसार दिया जाएगा। किसी मामले में यदि कोई वसूली की जानी है तब इसे जी.एस.टी. के अंतर्गत कर के बकाया के रूप में लिया जाएगा - धारा 142 (6) और 142 (7)

मौजूदा कानून के अंतर्गत प्रस्तुत संशोधित रिटर्न(नों) से उत्पन्न रिफंड के साथ जी.एस.टी. में कैसे निपटा जाएगा?

रिफंड मौजूदा कानून के प्रावधानों के अनुसार में वापस किये जाएंगे - धारा 142 (a)(b)

मौजूदा कानून के अंतर्गत किये अनुबंध के अनुसरण में, यदि वस्तुओं या सेवाओं की जी.एस.टी. में आपूर्ति की गई है तो कौन सा कर देय होगा?

इस तरह की आपूर्ति पर जी.एस.टी. देय होगा - सी.जी.एस. टी. अधिनियम की धारा 142 (10)

मौजूदा कानून के अंतर्गत वस्तुओं/सेवाओं की विशेष आपूर्ति पर कर लगाया जा सकता है। अगर जी.एस.टी. व्यवस्था में वास्ताविक आपूर्ति की जाएगी तो क्या जी.एस.टी. भी देय होगा?

इस प्रकार की आपूर्ति पर कोई कर देय नहीं होगा। मौजूदा कानून-धारा 142(11) के तहत वस्तुओं वे सेवाएं जी.एस.टी के अंतर्गत कर योग्य हे ।

मौजूदा कानून के अंतर्गत निर्धारित दिन के बाद स्थापित किसी भी आकलन या न्यायनिर्णय की कार्यवाही के अनुसरण में कर, ब्याज या दण्ड की राशि रिफंड होती है। क्या जी.एस.टी. कानून के अंतर्गत ऐसी रकम वापस होगी?

मौजूदा कानून के तहत इस तरह की रकम की नकद वापसी नहीं की जायेगी-सी.जी.एस.टी. अधिनियम की धारा 142(8) (बी)

यदि आईएस.डी. द्वारा सेवाए, पहले कानून के अंतर्गत प्राप्त की गई हैं, क्या इससे संबंधित आई.टी.सी. को जी.एस.टी. व्यवस्था में वितरित किया जा सकता है?

हाँ, बिना इस पर विचार किये कि क्या कथित सेवाओं के संबंध में चालान(नों)/बिलों को नियत दिन पर या उसके बाद प्राप्त किया गया है - सी.जी.एस.टी. अधिनियम की धारा 140(7)

जहां किसी भी वस्तु की बिकी की जाती है, जिस पर राज्य वैट कानून के अंतर्गत स्त्रोत पर कटौती की जानी चाहिए और एक चालान भी नियम दिन से पहले जारी किया गया था, इस अधिनियम के अंतर्गत स्त्रोत पर कर कटौती की जाएगी यदि भुगतान नियम तिथि के बाद किया जाता है?

नहीं ऐसे मामलों में जी.एस.टी. के अंतर्गत स्त्रोत पर कर की कटौती नहीं की जाएगी ।

वस्तु को नियम दिन से छह माह पूर्व की मंजूरी पर नहीं भेजा गया था, लेकिन विनिदिष्ट दिन से 6 माह के बाद वह विकेता को वापस कर दी जाती है, तो क्या जी.एस.टी. के अंतर्गत कर देय होगा?

हाँ यदि इस प्रकार की वस्तु जी.एस.टी के अंतर्गत कर योग्य है और वह व्यक्ति और वह व्यक्ति जिसने इसे खरिज कर दिया है या स्वीकार नहीं किया है, तो उसे नियम दिन से 6 माह (या दो माह की अधिकतम विस्तारित अवधि के भीतर) के बाद वापस लौटाता है। इस मामलें मे कर भी उस व्यक्ति द्वारा देय होगा जिसने मंजूरी के आधार पर वस्तु भेजी है-धारा 142 (12)

स्रोत: भारत सरकार का केंद्रीय उत्पाद व सीमा शुल्क बोर्ड, राजस्व विभाग, वित्त मंत्रालय

2.94736842105

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